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पुस्तक समीक्षा – नारी की परिभाषा को स्थापित करने का एक प्रयास

हीरा प्रसाद ठाकुर नाम है एक ऐसे व्यक्ति का, जिन्होंने अबतक 84 पुस्तकों का सृजन किया है। मूलतः भोजपुरी भाषा में काव्य रचना करने वाले श्री ठाकुर मूल रुप से रोहतास जिले के अगिआंव बाजार इलाके के नावाडीह नामक गांव के निवासी हैं और वर्तमान में आरा में रहते हैं। साहित्य इनके रग-रग में बसा है। यही इनका जीवन धर्म है और अपने जीवन को सार्थक बनाने की इनकी यह पहल निस्संदेह अनुकरणीय है। इनका सृजन उस चुनौती का जवाब है जो आये दिन आंचलिक भाषाओं के रचनाकारों को झेलना पड़ता है। वैसे बड़े दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि सूबे में जिन्हें साहित्य को शिखर पर ले जाने की जिम्मेवारी नीतीश सरकार द्वारा दी गई है, वह असल में कपटपूर्ण है और संभवतः साहित्य उनके लिये सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बन चुकी है।

फ़िलहाल चर्चा वर्ष 1948 में बिहार की धरती पर अवतरित हुए हीरा प्रसाद ठाकुर नामक महामानव की। इनकी लेखनी से निकले शब्द कितने असरदार हैं, यह इनकी पुस्तकों को पढने के बाद ही जानने को मिल सकती है। इनकी नवीनतम रचना है नारी शतक। अपने इस रचना में इन्होंने 100 छंदों के माध्यम से नारी को परिभाषित करने की कोशिश की है। इस कोशिश को आप भी देखें।

चमन में फ़ूल खिलावे जो

अमन की सांस जे होला

लगन के बीन बजावे जे

कि ओकरे नाव नारी ह ।

जेकर बा रुप अनेकों में

कबो बेटी बहिन होखे

कबो गल के बने जे हार

कि ओकरे नाव नारी ह।

कबो मैया बने दादी

कबो चाची भतीजी हो

कबो भगिनी हो जाले जे

कि ओकरे नाव नारी ह।

जेकर न सुख के चिंता

ना राखे दुख के ही गम

अमर हो शाख सिंदूर के

कि ओकरे नाव नारी ह।

मिटा दे शूल-कांटा जे

खिला दे गुल गुलशन में

जगा दे प्रात के मौसम

कि ओकरे नाव नारी ह।

यह सुंदरता है हीरा प्रसाद ठाकुर की सृजनता में। उनके शब्द सहज भाव से ही दिल में उतर जाते हैं। खड़ी हिन्दी में लिखी गई रचनाओं की तुलना में आंचलिक रचनाओं में दिल में उतरने की क्षमता अधिक होती है। फ़िर भोजपुरी, मगही, मैथिली, बज्जिका और अंगिका आदि तो वे भाषायें हैं, जिसने हम सभी बिहारवासियों को बोलना सिखाया। श्री ठाकुर की ये रचनायें भिखारी ठाकुर की याद दिलाती हैं। इनका सम्मान किया जाना चाहिये। खैर, इस आलेख की रचना का अंत भी श्री ठाकुर की रचना के साथ ही करते हैं। वैसे यह छंद इनकी अपनी रचना नारी शतक की आखिरी रचना भी है। जरा इसकी खुबसूरती को देखिये। शायद आप भी अपनी मिट्टी से जुड़ाव महसूस कर सकें।

समर्पित बा इ परिभाषा

चरण में माई भलुनी के

हीरा लिखले उहे जे पाये

कि ओकरे नाव नारी ह।