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अपना बिहार निष्पक्षता हमारी पहचान
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मातृ दिवस पर हर माँ को अर्पित राधाराम "माँ तू मेरा मान है" माँ तू मेरा मान है, मेरे रोम रोम में भरा तेरा प्यार है, मेरे जीवन में कभी न अंत होनेवाला आशीर्वाद है।
मेरी एक मुस्कान पर जान न्योछावर कर देना, मेरी एक उदासीन झलक पर असंभव को संभव कर देना, अपनी मधुर लोरी से मेरे जीवन को उभारा, अपने निश्चय से मुझमे द्रिड विश्वास जगाया, इस मेरी सफलता का पूर्ण श्रेय है तुझे माँ, माँ तू मेरा मान है।
जब भी जीवन में कठिनायियI आती हैं, माँ तू मेरे सामने रहती है, अपना आँचल मेरे सर पर रखे, अपनी ममता का रूप लिए, उसी तरह महसूस होता है मुझे, जैसे बचपन में मुझे गोद लेती थी, अपने आँचल में माँ तू मेरा मान है।
माँ दुर्गा, माँ सरस्वती, माँ काली को कभी नहीं देखा, पर उन सबका माँ तुझमे रूप देखा, हर जीवन में तू मेरी माँ हो, पा सकूं तुझसे वो ज्ञान वो प्यार, वो स्नेह वो निस्वार्थ भाव, माँ तू मेरा मान है
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मेरे आंगन में शीशम का एक पेड़ है
हम मनुष्यों जैसा सजीव तो नहीं, लेकिन हम जैसा निर्जीव भी नहीं, हरदम अपने जड़ों पर कायम, मेरे आंगन में शीशम का एक पेड़ है।
सूरज की तेज को हंस हंसकर सहता, पुरवैया के संग मंद-मंद डोलता, हम मनुष्यों जैसा परिवर्तनशील तो नहीं, लेकिन हम जैसा अस्थिर भी नहीं, हरदम अपनी जगह पर खड़ा, मेरे आंगन में शीशम का एक पेड़ है।
उसकी सख्त टहनियां और कोमल पत्ते, जीवन का सबूत देती हैं, उसकी छांव मुझ काफ़िर को भी, जन्नत का सुख देती है, हम मनुष्यों जैसा धर्मशील तो नही, लेकिन हम जैसा धर्महीन भी नहीं, हरदम अपने धर्म का निर्वाह करता, मेरे आंगन में शीशम का एक पेड़ है।
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