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बिहार गीत के नाम पर साहित्यिक भ्रष्टाचार को बढावा – अरुण कमल

पटना (अपना बिहार, 11 नवंबर 2011) – सूबें भ्रष्टाचार का एक नया स्वरुप सामने आया है। यह भ्रष्टाचार का सबसे खतरनाक स्वरुप है। खतरनाक इसलिये क्योंकि गांध जी ने भी कहा है- अगर धन चोरी हो गई तो थोड़ा नुकसान हुआ, अगर स्वास्थ्य खराब हुआ तो थोड़ा अधिक नुकसान और यदि चरित्र चला गया तो सब कुछ चला गया। बिहार में पहले दो तरह के भ्रष्टाचार तो आजादी के बाद से ही शुरु हो गये थे। अब चुंकि बिहार बदल रहा है तो तीसरे तरह का भ्रष्टाचार भी सामने आ रहा है। अब बिहार के चरित्र में भ्रष्टाचार व्याप्त हो गया है। इसका एक प्रमाण यह कि सूबे की सरकार द्वारा एक कवि की साहित्यिक रचना को बिहार गीत की उपाधि से सम्मानित किया गया है। इस गीत की खासियत यह है कि यह “गीत” नहीं है। गीत इसलिये नहीं है क्योंकि इसमें लय नहीं है। साहित्यिक दृष्टिकोण से बात करें तो इसकी पंक्तियों ने तो मात्रा का हिसाब रखा गया है। पहले आप इस कविता को पढें, फ़िर हम आपको बतायेंग इस कविता की कहानी उस व्यक्ति की जुबानी, जिन्हें इस कविता को चुनने की जिम्मेवारी दी गयी थी।

मेरे भारत के कंठहार,

तुझको शत-शत वंदन बिहार,

तू बाल्मीकि की रामायण,

तू वैशाली का लोकतंत्र,

तू महाबुद्ध की करूणा,

तू महावीर का शांति मंत्र,

तू नालंदा का ज्ञान दीप,

तू ही अक्षत चंदन बिहार,

तू है अशोक का धर्म चक्र,

तू गुरु गोविंद की वाणी है,

तू आर्यभट्ट, तू शेरशाह,

तू कुंवर सिंह बलिदानी,

तू ही बापू की कर्मभूमि,

धरती पर नंदन वन बिहार,

तुझको शत-शत वंदन,

तेरा अतीत गौरवशाली,

तेरा समृद्ध है वर्तमान,

अब जाग उठे हैं तेरे सपूत,

लौटेगा खोया स्वाभिमान्।

इस कविता के रचयिता हैं कवि सत्यनारायण जी। सरकारी जात के आदमी हैं। यह इनकी सबसे बड़ी विशेषता है। अब इस कविता के जरिये इनकी योग्यता का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। अब बात उस महान कवि की करें, जिनके जिम्मे बिहार गीत चुनने की जिम्मेवारी थी। तीन महान कवियों को यह जिम्मेवारी दी गई थी। तीनों एक से बढकर एक। प्रगतिशील यानी वामपंथी विचारचारा के मुख्य कवि अरूण कमल, पटना विश्वविद्यालय में हिन्दी के विशेषज्ञ सुरेंद्र स्निग्ध और पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त प्राख्यात हास्य कवि रवींद्र राजहंस। मिली जानकारी के अनुसार कविवर सत्यनारायण जी की रचना को बिहार गीत की मान्यता प्रदान करने में इन तीनों ने अपनी-अपनी भूमिका का निर्वहन किया है।

हालांकि इस संबंध में जब अपना बिहार ने प्रगतिशील कवि अरूण कमल से उनके दूरभाष पर बातचीत की तो किसी भी बात का जवाब देने से पहले ही श्री कमल ने प्रश्न किया कि क्या ऐसी कोई सूचना जारी हो चुकी है कि मैंने इस कविता को अपनी सहमति दी है? इन्होंने बेबाक तरीके से बताया कि उन्होंने इस कविता को अपनी सहमति नहीं दी। जब इनसे यह पूछा गया कि जब आप चयन समिति के सदस्य थे तो क्या आपसे कोई सहमति नहीं ली गई? इस सवाल के जवाब में श्री कमल ने कहा कि इस प्रश्न का जवाब आप मानव संसाधन विकास के विभाग के अधिकारियों से मांगिये। इनका इशारा विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह की ओर था।

बहरहाल, बिहारवासियों को यह जानकर खुशी होगी कि उपरोक्त “बिहार गीत” के लिये धुन तैयार करने की जिम्मेवारी देश में प्राख्यात संगीतकार जोड़ी “शिव-हरि” को दी गई है। शिव हरि यानी शिव कुमार शर्मा (देश के अग्रणी संतूर वादक) और हरि यानी पंडित हरि प्रसाद चौरसिया (देश के सुप्रसिद्ध बांसूरी वादक)। इसके लिये इस जोड़ी को बिहार की गरीब जनता की गाढी कमाई का पैसा मेहनताना के रुप में दिया जा रहा है। वैसे यदि यह जिम्मेवारी बिहारी संगीतकार को दी जाती तब इसमें बिहारी संस्कृति का असर भी आ पाता। फ़िलहाल तो सुशासन में सभी बिहारवासियों को “इम्पोर्टेड” से ही काम चलाना पड़ेगा।

तीन वर्षों से जारी है भू-अभिलेखों के कम्प्यूटराइजेशन की घिसी पिटी कहानी

पटना (अपना बिहार, 11 नवंबर 2011) – बिहार में भू-अभिलेखों के कम्प्यूटराइजेशन का चर्चा एक बार फ़िर जोर पकड़ने लगा है। सरकार और विभाग की ओर से यह कहा जा रहा है कि इस बार हवाई जहाज के जरिये पांच दिनों तक अभियान चलाकर सभी प्लाट की पैमाइश की जायेगी। इसके बाद जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों का कम्प्यूटरीकरण होगा। बताया तो यह भी जा रहा है कि आने वाले तीन वर्षों में बिहार के लोग अपने जमीन के दस्तावेज कम्प्यूटर स्क्रीन पर अपने घर में ही देख सकेंगे। इस मह्त्वपूर्ण योजना को अंजाम देने की जिम्मेवारी एक कनाडा की कंपनी को दी गई है। इसके लिये सरकार के द्वारा 600 करोड़ रुपये का बजट बनाया गया है।

अब बात करते तीन साल पहले की। तीन साल पहले भी सरकार ने कुछ इसी तरह की घोषणा की थी। उस समय कंपनी विदेशी नहीं, बल्कि देशी थी। कंपनी का नाम था टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज। सरकार की ओर से उस समय भी भू अभिलेखों के डिजिटलाइजेशन के लिये सरकारी खजाने को खोल दिया गया था। टीसीएस ने साफ़ट्वेयर भी विकसित कर लिया गया और इस पूरी प्रक्रिया की मानिटरिंग के लिये एक आनलाइन वेबपोर्टल भी तैयार किया गया। परंतु, बाद में सारी योजना धरी की धरी रह गई।

बहरहाल, एक बार फ़िर सरकारी खजाने को खोला गया है, ताकि विदेशी कंपनियां बिहार की गरीब जनता की गाढी कमाई का पैसा लूट सकें और इस लूट में सुशासन बाबू सहित उनके माननीय मंत्री रमई राम भी शामिल हो सकें। वैसे भी राजद के शासनकाल के समय से ही रमई राम के बारे में कहा जाता है कि जबतक ये हरे-भूरे पत्तों की रंगीनियत नहीं देखते हैं, तबतक बेचारे की तुतलाहट नहीं जाती है। उनकी भी मजबूरी अजीबोगरीब है।

सेवा यात्रा की दास्तान - प्रकाश झा के अत्याचार की बात पर भड़के सुशासन बाबू

बेतिया (अपना बिहार, 12 नवंबर 2011)- अपने मित्र प्रकाश झा द्वारा अत्याचार किये जाने की बात बर्दाश्त नहीं कर सके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। बेतिया में सेवा यात्रा के दौरान जिले के महाराजा स्टेडियम में आयोजित जनता दरबार में शामिल हुए श्री कुमार से जब लोगों ने श्री झा के संबंध में लिखित शिकायत किया तब मुख्यमंत्री भड़क गये। यह बात इन्हें इतनी नागवार गुजरी कि वे जनता दरबार को अधूरा छोड़कर ही निकल गये। मिली जानकारी के अनुसार बड़ी संख्या में किसानों ने मुख्यमंत्री से शिकायत किया कि श्री झा ने अपने चीनी मिल के लिये उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया है। किसानों ने मुख्यमंत्री को बताया कि श्री झा ने किसानों को झांसा देकर उनकी जमीन हड़प ली। किसानों ने मुख्यमंत्री से इस संबंध में कारगर पहल करने की मांग की।

पंडारक हत्याकांड में नीतीश की संलिप्तता के मामले में जज को मिली कोर्ट की नोटिस

पटना(अपना बिहार, 3 फ़रवरी 2012)- पंडारक हत्याकांड मामले में तथाकथित तौर पर संलिप्त सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ़ संज्ञान लेने वाले बाढ के तत्कालीन एसीजेएम जस्टिस रंजन कुमार के खिलाफ़ पटना हाईकोर्ट ने अवमाननावाद का नोटिस जारी किया है। मिली जानकारी के अनुसार पटना हाईकोर्ट के जज अजय कुमार त्रिपाठी ने जस्टिस रंजन कुमार से पूछा है कि आखिर क्यों नहीं उनके खिलाफ़ अवमाननावाद के मामले में कानूनी कार्रवाई की जाये। बताते चलें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा जस्टिस रंजन कुमार के खिलाफ़ पटना हाईकोर्ट में एक अपील की गई थी। यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 1991 में बाढ अनुमंडल के पंडारक थाने में राजनीतिक कारणों से एक साथ दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में नीतीश कुमार को अभियुक्त बनाते हुए एक प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी जिसकी प्राथमिकी संख्या 131/91 है। 

पूर्व डीजीपी नारायण मिश्रा के हश्र के बाद कहीं खुशी कहीं गम
पटना(अपना बिहार, 3 फ़रवरी 2012) – राज्य के पूर्व डीजीपी नारायण मिश्रा की संपत्ति जब्त करने का आदेश आने के बाद सूबे में कहीं खुशी कहीं गम का माहौल कायम हो गया है बताते चलें कि निगरानी की विशेष अदालत ने बुधवार को पूर्व डीजीपी नारायण मिश्रा की आय से अधिक संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया। पूर्व डीजीपी, उनकी पत्नी और परिवार के पास ज्ञात श्रोतों से 1.40 करोड़ की संपत्ति अधिक पायी गई है। अपने आदेश में निगरानी के विशेष न्यायाधीश आर सी मिश्रा ने कहा है कि पूर्व डीजीपी और उनके परिवार के पास इतनी संपत्ति कहां से आयी, इसे सिद्ध करने में वे असफल रहे। न्यायाधीश ने तीस दिनों में भीतर डीएम पटना को तीस दिनों के भीतर जब्त करने का आदेश दिया है।
उल्लेखनीय है कि विशेष अदालत से अभी तक चार आरोपितों की संपत्ति जब्त करने का आदेश आ चुका है। अदालत ने यह फैसला भ्रष्टाचार के आरोपितों की अवैध संपत्ति जब्त करने के लिए बनाए गए नये कानून बिहार स्पेशल कोर्ट एक्ट 2009 के तहत सुनाया है। निगरानी के विशेष लोक अभियोजक राजेश कुमार ने बताया कि पूर्व डीजीपी मिश्रा, उनकी पत्नी कंचन मिश्रा, बेटा सत्यव्रत मिश्रा, बहू पूजा मिश्रा समेत अन्य परिवार के पास पायी गयी आय से अधिक संपत्ति को जब्त करने के लिए जुलाई 2010 में विशेष अदालत में मुकदमा दायर किया गया था।
निगरानी की विशेष सतर्कता इकाई की टीम ने 6 फरवरी 2007 को पूर्व डीजीपी और उनकी पत्नी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की प्राथमिकी दर्ज कर जांच की थी। अपनी जांच टीम ने पाया कि आरोपित मिश्रा ने वर्ष 1984 से लेकर फरवरी 2007 तक अपने पद का जमकर दुरुपयोग और भ्रष्टाचार में लिप्त होकर 1.40 करोड़ की चल और अचल संपत्ति अर्जित की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आरोपित मिश्रा ने अपने नाम पर राजधानी के वेद नगर में चार मंजिला मकान और रुकनपुरा में प्लॉट, दीघा में नेपाली नगर के सेक्टर तीन में जमीन खरीदी थी। इसके अलावे अपनी पत्नी कंचन मिश्रा के नाम पर पटना के रुकनपूरा में पवन विला में मकान और हजारीबाग में जमीन खरीद की है। अपनी बेटी रीता पांडेय के नाम पर रुकुनपूरा में कीमती जमीन खरीदी थी। इसके साथ ही आरोपित मिश्रा ने खुद और पत्नी के नाम पर लाखों रुपए का फिक्स डिपोजिट किया है। वही दूसरी ओर आरोपित नारायण मिश्रा ने कहा कि निगरानी की वे विशेष अदालत के इस आदेश को पटना हाईकोर्ट में चुनौती देंगे विशेष अदालत का यह आदेश कानूनी रुप से सही नहीं है।
इधर श्री मिश्रा के हश्र के बाद सूबे के अनेक सूरमाओं के चेहरे लटक गये हैं। वहीं श्री मिश्रा के विरोधियों के चेहरे पर इन दिनों चवनियां मुस्कान देखी जा रही है। सूबे में कभी डीजीपी के दावेदार रहे एक वरीय पदाधिकारी की मानें तो श्री मिश्रा के पाप का घड़ा बहुत पहले भर चुका था। वही एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि सरकार इस तरह के कार्रवाईयों से पुलिस अधिकारियों का हौसला कुंद करने पर आमदा है। यदि सरकार को हिम्मत है तो सबसे पहले वह अपने और अपने मंत्रियों की संपत्ति का आकलन कराये। वैसे कहीं खुशी और कहीं गम के माहौल में इन दिनों सभी तथाकथित अपनी संपत्तियों का निबटारा करने में जूटे हैं। इसे कथित तौर पर सुशासन का प्रभाव माना जा रहा है।

वाह सुशासन वाह :  बिहार में तीन महीने में तीन बच्चे जनती हैं मांयें

सहरसा. बिहार में तथाकथित 'सुशासन' का करिश्मा देखना हो तो कोसी अंचल आइए। यहां सुशासन के कारिन्दों ने कागज पर तीन माह में तीन सगी बहनों का जन्म करा दिया है। मामला जिले के पतरघट प्रखंड का है। यहां मुख्यमंत्री बाढ़ राहत की राशि का जमकर गोलमाल हुआ है। फर्जी नामांकन के माध्यम से राशि की निकासी कर ली गयी है।
मिली जानकारी के अनुसार पतरघट पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में वर्ष 07-08 में लक्ष्मीपुर निवासी माला देवी की तीन पुत्रियों के नाम पर आठ सौ की दर से मुख्यमंत्री बाढ़ राहत राशि प्रदान की गयी है। माला देवी की पहली पुत्री रूबी कुमारी की जन्मतिथि पंजी में 18 जनवरी 02, दूसरी रीका कुमारी की 15 फरवरी 02 तीसरी पुत्री सुबी कुमारी की जन्म तिथि 15 मार्च, 02 है। जबकि सच्चई यह है कि माला देवी की पहली पुत्री की शादी दस वर्ष पूर्व, दूसरी की शादी पांच वर्ष पूर्व हो चुकी है। तीसरी पुत्री तकरीबन 20 वर्ष की है। इस बाबत माला देवी ने बताया कि उनके पति कुलदीप राम का निधन छह वर्ष पूर्व हो चुका है। उन्होंने ना तो किसी का नाम स्कूल में लिखाया है और ना ही उन्हें मुख्यमंत्री बाढ़ राहत राशि ही मिली है।

इस मामले में उत्क्रमित मध्य विद्यालय के अवकाश प्राप्त प्रधानाध्यापक जयप्रकाश यादव का कहना है कि यह मामला मेरे समय की उपस्थिति पंजी नहीं हो सकती। सरकार को चाहिये कि वह पूरे मामले की जां करवाकर दोषी के विरूद्ध कार्रवाई की जाय। वहीं वर्तमान में प्रभारी प्रधानाध्यापिका रीभा देवी पूरे मामले से हाथ झाड़ते हुए कहती हैं कि यह मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है। जबकि पतरघट के बीईईओ नित्यानंद ठाकुर का कहना है कि मामला काफी गंभीर है। जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगीबहरहाल, उक्त मामले के प्रकाश में आने के बाद से संबंधित विभाग में हडकंप मचा हुआ है। क्या होगा यह तो समय आने पर ही मालूम हो पाएगा।

बिहार में स्थापित होगा अमेरिकी कृषि शोध संस्थान

पटना(अपना बिहार, 2 फ़रवरी 2012) – अमेरिकी शीर्ष कृषि शोध संस्थान बोरलग इन्स्टीच्यूट की एक शाखा समस्तीपुर के पूसा में स्थापित की जायेगी। इसके लिये पर्याप्त जमीन अधिग्रहित कर ली गई है। इस संबंध में बिहार सरकार द्वार केंद्र सरकार को सूचना प्रेषित की जा चुकी है। इस आशय की जानकारी बिहार के कृषि उत्पादन आयुक्त ए के सिन्हा और विभाग की प्रधान सचिव एन विजयालक्ष्मी ने दी। इन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा पिछले वर्ष ही देश में तीन स्थानों पर संस्थान के शाखा की स्थापना करने का निर्णय लिया गया था। पंजाब के लुधियाना और मध्यप्रदेश के जबलपुर के अलावे एक शाखा बिहार में स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। इसके लिये आवश्यक जमीन लीज के आधार पर संस्थान को उपलब्ध करा दी गई है। इन्होंने यह भी बताया कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्यान्न की कमी के संकट को दूर करना है। इसके लिये संस्थान द्वारा अत्याधुनिक शोध किये जाते हैं।

ए एन सिन्हा सामाजिक शोध अध्ययन संस्थान के पूर्व निदेशक का निधन

पटना(अपना बिहार, 2 फ़रवरी 2012) – बीते मंगलवार को नई दिल्ली के एक निजी अस्पताल में स्थानीय ए एन सिन्हा सामाजिक शोध अध्ययन संस्थान के पूर्व निदेशक सह सूबे के जाने-माने समाजशास्त्री सच्चिदानंद का निधन हो गया। वे 86 वर्ष के थे। इन्होंने वर्ष 1980 में संस्थान के निदेशक का कार्यभार संभाला था। इस दौरान उन्होंने समाजशास्त्र और नृतत्वशास्त्र का अध्यापन किया। इसके अलावे वे वर्ष 1985-86 में रांची विश्वविद्यालय के कुलपति भी बनाये गये। वर्ष 1986 में उन्हें बिहार राज्य योजना पर्षद के सदस्य मनोनीत किये गये। इसके अलावे वे ब्रज किशोर स्मारक संस्थान और बिहार विद्यापीठ से भी जुड़े रहे।

सीएम अंकल, शराब नहीं  किताब चाहिए

नालंदा(अपना बिहार, 2 फ़रववी 2012) – बिहारशरीफ में मासूम बच्चों ने सीएम अंकल से लगाई गुहार कि उन्हें शराब नहीं, बल्कि किताबें चाहिये। मासूम बच्चों ने अपनी स्लेट पर सीएम अंकल, शराब नहीं  किताब चाहिए सड़क पर उतरे। रहुई प्रखंड के इमामगंज पंचायत अन्तर्गत आधा दर्जन गांव की सैकड़ों महिलाएं मासूम बच्चों ने खिदरचक गांव से निकल कर पूरे पंचायत का भ्रमण किया और अवैध शराब के निर्माण बिक्री पर रोक लगाने की मांग की। इस प्रदर्शन में मासूम बच्चों महिलाओं का भाव स्पष्ट झलक रहा था कि वे अपने शराबी अभिभावक शराब माफियाओं से किस कदर ऊब चुके हैं। प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं का कहना था कि इमामगंज पंचायत के खाजासराय, तूफानगंज, इकबालगंज, राघोपुर, समेत अन्य गांवों में इन दिनों अवैध शराब का निर्माण बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। इस कारण गांव के अधिकांश पुरुषों को शराब की लत लग गयी है। अपनी लत पूरी करने के लिये ये लोग घर का सामान भी गिरवी रखने से बाज नहीं आते। ससे उनकी माली हालत बिगड़ती जा रही है। यहां तक कि कुछ कम उम्र के बच्चे भी शराब के आदी हो गये हैं। जगह-जगह शराब की बिक्री होने से सुबह से ही गांव में शराबियों का जमावड़ा लग जाता है,गाँव हो या शहर सभी जगह का ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है शायद ही कोई ऐसा मोहल्ला या कोई गली हो जहां शराब की बिक्री नहीं होती हो। गांव की महिलाओं को घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। प्रदर्शन करने वालों में मुख्य रूप से पंचायत समिति चौरसी देवी, वार्ड सदस्य सुदामा चौधरी, सुषमा देवी, देवंती देवी, रीना देवी, रिंकी देवी, सरपंच श्रवण कुमार, उप मुखिया सुधीर पासवान आदि शामिल थे।

मानवाधिकार आयोग ने दी बलात्कार पीड़िता को 5 लाख रुपये की राहत देने का निर्देश

नई दिल्ली (अपना बिहार, 1 फ़रवरी 2012) -राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को बगहा जिल की एक बलात्कार पीड़िता को एक सप्ताह के अंदर 5 लाख रुपय की अंतरिम राहत देने का निर्देश दिया है। मिली जानकारी के अनुसार उक्त पीड़िता के साथ वर्ष 2007 में बिहार पुलिस के जवानों ने सामूहिक बलात्कार किया था। आयोग ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक सप्ताह के अंदर पीड़िता को राहत देने से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करे। उधर राज्य सरकार की ओर से आयोग को यह बताया गया है कि पूरे मामले की जांच चल रही है और दोषी पुलिस जवान को निलंबित किया जा रहा है।

उत्तरप्रदेश के वासियों को भी सुशासन पाने का हक, नीतीश ने किया चुनाव प्रचार

लखनऊ (अपना बिहार, 1 फ़रवरी 2012)- बिहार के तथाकथित सुशासन बाबू नीतीश कुमार ने कहा है कि उत्तरप्रदेश के वासी उन्हें थोड़ी सी ताकत दें तो वे यूपी को भी बिहार बना देंगे। यानी यूपी में भी वे सुशासन की स्थापना कर देंगे। श्री कुमार बीते दिनों उत्तरप्रदेश के ठाकुरगंज जनप्द के सेवाराही में अपने दल के प्रत्याशी के समर्थन में एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। इन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के कारण लोगों का राजनेताओं में विश्वास घटा है। अन्य सभी राजनीतिक दलों के नेता भ्रष्टाचार पर लंबी-लंबी भाषण देते हैं, जबकि केवल जदयू ने ही भ्रष्टाचार के खिलाफ़ ठोस कदम उठाया है। इन्होंने यह भी कहा कि बिहार में भ्रष्टाचारियों की संपत्ति पर कब्जा कर उसमें स्कूल खोले जा रहे हैं। श्री कुमार ने कांग्रेस पर प्रहार करते हुए कहा कि 54 वर्षों तक शासन करने के बाद भी वह यूपी का विकास करने में नाकाम रही।

अब रिवाल्वरधारी करेंगे माननीयों की सुरक्षा

पटना(अपना बिहार, 1 फ़रवरी 2012) - जी हां, बिहार के माननीयों यानी विधायकों की सुरक्षा उनके सुरक्षाकर्मी एके 47 और करबाईन के बदले रिवाल्वर के जरिये करेंगे। बिहार पुलिस के एडीशनल डायरेक्टर जेनरल(मुख्यालय) रवीन्द्र कुमार ने बताया कि यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय से निर्देश मिलने के बाद किया गया है। बताते चलें कि पिछले वर्ष रुपम पाठक द्वारा पूर्णिया के विधायक राजकिशोर केसरी की हत्या किये जाने के बाद माननीय विधायकों की सुरक्षा बढा दी गई थी।

सूर्य अस्त होते ही 78 फ़ीसदी बिहारी युवा हो जाते हैं मस्त

नंदी फ़ाऊंडेशन की हंगामेदार रिपोर्ट से खुली नीतीश सरकार की पोल

पटना (अपना बिहार, 1 फ़रवरी 2012) – जी हां, यह सच है। बिहार के 78 फ़ीसदी बिहारी युवा सूर्य अस्त होते ही शराब के नशे में मस्त हो जाते हैं। सबसे अधिक आश्चर्य जनक यह कि इनमें से अधिकांश युवाओं की उम्र 15 वर्ष से लेकर 40 वर्ष है। यह रिपोर्ट सामने आई है एक मल्टीनेशनल सर्वे संस्थान नंदी फ़ाऊंडेशन के द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर किये गये सर्वेक्षण में। सर्वेक्षण में यह तथ्य भी सामने आया है कि घर में माता-पिता के अशिक्षित होने का सबसे बड़ा असर यहां शराब और तंबाकू के बढ़ते सेवन के रूप में दिख रहा है। राज्य के 78 प्रतिशत घरों में कम-से-कम एक सदस्य या तो शराब पीते हैं या फ़िर तंबाकू का सेवन करते हैं।

बिहार में यह रिपोर्ट 23 जिलों की 15373 महिलाओं की मानें, तो 62 से 94 प्रतिशत घरों में कम-से-कम एक पुरुष या महिला शराब पीती है या फ़िर तंबाकू का सेवन करती है। सबसे अधिक उल्लेखनीय है कि फ़ाउंडेशन की ओर से जमीनी वास्तविकता जानने के लिए कई युवा सांसदों ने बिना तामझाम के जिलों का भ्रमण किया। सर्वे के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी गयी इस रिपोर्ट की खास बात यह है कि बिहार के जिन 23 जिलों में सर्वे किया गया, वहां 51 से 79 प्रतिशत महिलाओं ने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा था। रिपोर्ट के अनुसार स्कूल का कभी मुंह नहीं देखनेवालों में पुरुषों की स्थिति महिलाओं से बेहतर रही। लेकिन इन जिलों में 8 से 56 प्रतिशत पुरुषों का यही हाल था। मसलन किशनगंज ऐसा जिला है, जहां 92 प्रतिशत महिलाएं कभी स्कूल नहीं गयीं। इस जिले में 71 प्रतिशत पुरुषों ने भी स्कूल का रास्ता कभी नहीं देखा।

इसका असर इस रूप में देखा जा सकता है कि यहां के 75 प्रतिशत घरों में शराब और तंबाकू का सेवन होता है। पढ़े-लिखे माता-पिता के मामले में औरंगाबाद की स्थिति अच्छी रही है। यहां 51 प्रतिशत महिलाएं कभी स्कूल नहीं गयीं। जबकि पुरुषों के मामले में यह प्रतिशत मात्र 21 है. पूर्वी चंपारण जिले में स्थिति कुछ भिन्न है। यहां स्कूली शिक्षा से अलग रही महिलाओं की प्रतिशत 39 है, जबकि मात्र आठ प्रतिशत पुरुष ही इस जिले में हैं, जिन्होंने कभी स्कूल की राह नहीं पकड़ी। रिपोर्ट के मुताबिक आकार में सबसे छोटे जिले शिवहर में 94 प्रतिशत घर ऐसे पाये गये, जहां कम-से-कम एक व्यक्ति शराब पीते हैं या फ़िर तंबाकू का सेवन भी करते हैं। शराब व खैनी के मामले में 23 जिलों में मुंगेर की स्थिति सबसे बेहतर है। यहां महज 49 प्रतिशत घरों में तंबाकू सेवन की स्थिति पायी गयी है। यहां 42 प्रतिशत माताएं शिक्षित हैं और 58 प्रतिशत पिता ने भी स्कूली शिक्षा हासिल की है।
बहरहाल, इस सर्वे के निष्कर्षों केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रुपों में स्वीकार किया गया है। प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह ने भी अपने बयान में देश की इस स्थिति पर असंतोष व्यक्त किया। जबकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी दबी जुबान से ही अपने सुशासन की विफ़लता को स्वीकार किया है। वैसे इस संबंध में भूख से होने वाली मौत के सवाल पर पीयूसीएल बनाम केंद्र सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त सलाहकार के बिहार प्रतिनिधि रुपेश बताते हैं कि जब स्थानीय संस्थायें सरकारी योजनाओं के विफ़लताओं के संबंध में प्रमाण देती हैं तो सरकारें उसे पूरी तरह से खारिज करती हैं, जबकि मल्टीनेशनल संस्थाओं के सर्वे की रिपोर्ट उनके लिये पत्थर की लकीर बन जाती है। नंदी फ़ाऊंडेशन के सर्वे के रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आये हैं, बिहार में स्थिति इससे अधिक विषम है।

बिहार सरकार ने की शराब से तौबा

पटना(अपना बिहार, 1 फ़रवरी 2012) – जी हां, बिहार सरकार अब शराब दूकानों से आजिज हो चुकी है और वह अब इससे तौबा करना चाहती है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अब शराब की दुकानों की संख्या अब नहीं बढ़ायी जायेगी।

बजट की तैयारी को लेकर परिवहन, उत्पाद एवं निबंधन विभागों के राजस्व संग्रहण की स्थिति की समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में श्री मोदी ने कहा कि निबंधन, उत्पाद तथा परिवहन विभाग में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में क्रमश: 35.94 प्रतिशत, 36.85 प्रतिशत एवं 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। निबंधन विभाग के सचिव ओमर सुबहानी ने उपमुख्यमंत्री को बताया कि वित्तीय वर्ष 2010-11 में दिसंबर 2010 तक 762.42 करोड़ का राजस्व संगृहीत हुआ था जबकि 2011 के दिसंबर माह तक 1036.41 करोड़ संगृहीत हुआ है। परिवहन विभाग की समीक्षा में बताया गया कि चालू वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक 392 करोड़ का राजस्व संग्रहीत किया जा चुका है। जो पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है. उत्पाद विभाग की समीक्षा में बताया गया कि दिसंबर 2011 तक 1166.08 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रहीत हुआ है। बैठक में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के अलावा निबंधन एवं उत्पाद विभाग के सचिव ओमर सुबहानी, परिवहन विभाग के सचिव आरके महाजन समेत कई अन्य अधिकारी मौजूद थे।

अप्रैल से और महंगी होगी बिजली

पटना(अपना बिहार, 1 फ़रवरी 2012) – बिहार सरकार सूबे के बिजली उपभोक्ताओं को लगातार झटके पर झटके दे रही है।  पिछले कई महीनों से फ्यूल सरचार्ज वसूल कर उपभोक्ताओं को रुला रहा बिजली बोर्ड इस बार फ़िर जोर का झटका देनेवाला है। मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल से डेढ़ गुना से अधिक बिजली बिल वसूलने की तैयारी की जा रही है। बोर्ड ने प्रस्तावित दर की टैरिफ़ को पिछले साल ही मंजूरी के लिए बिहार राज्य विद्युत विनियामक आयोग को भेज दिया था। इस संबंध में फ़िलहाल आम लोगों से राय मांगी जा रही है। सार्वजनिक प्रतिष्ठानों व उद्यमियों की भी राय लिये जाने की योजना है। आयोग से मिली जानकारी के अनुसार नयी दर अप्रैल से प्रभावी होगी।

सिरमौर बना नीतीश कुमार का नालंदा जिला

पटना(अपना बिहार, 31 जनवरी 2012) - बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला पूरे देश में सिरमौर बन गया है। इस आशय की जानकारी नालंदा जिला के डीएम संजय अग्रवाल ने दी। इन्होंने बताया कि यह पहला अवसर है जब बिहार के किसी जिले को यह सम्मान मिला है। इसके अलावे नालंदा पूर्वोत्तर राज्यों में एक मात्र जिला है, जिसका चयन इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिये किया गया है। बताते चलें कि मनरेगा योजना के सफ़ल क्रियान्व्यन के लिये नालंदा का चयन किया गया है। आगामी 5 फ़रवरी को नई दिल्ली में नालंदा जिला को यह सम्मान प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह द्वारा प्रदान किया जायेगा। नालंदा जिला के अलावे यह सम्मान छत्तीसगढ के सरगूजा, महाराष्ट्र में नांदेड़, आंध्रप्रदेश के विजयनगरम और तामिलनाडु के कोयम्बटुर जिला को दिया जायेगा।

 काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में एआईबीएसएफ़ का गठन

बनारस((अपना बिहार, 31 जनवरी 2012) -बनारस के काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के बैकवर्ड यानी पिछड़े वर्ग के छात्र आल इंडिया बैकवर्ड स्टूडेंट्स फ़ोरम के बैनर तले संगठित हुए। इस आशय की जानकारी फ़ोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र यादव ने दी। इन्होंने बताया कि एक बैठक के दौरान पदाधिकारियों का मनोनयन किया गया। इनमें उमेश यादव को अध्यक्ष, अरविंद गौंड़ और विकास मौर्य को उपाध्यक्ष, श्रीकांत यादव को संयोजक, अनिल कुमार चौधरी को सह संयोजक और कमलेश खरवार को महासचिव शामिल हैं।

कई सवाल छोड़ गया जदयू नेत्री अंजू देवी की संदेहास्पद मौत

पटना(अपना बिहार, 31 जनवरी 2012) - जदयू नेत्री अंजू देवी की लाश सोमवार के अहले सुबह राजधानी पटना के आईजीआईएमएस अस्पताल के मुख्य द्वार के सामने बेली रोड पर लावारिस अवस्था में फ़ेंकी पायी गई। मिली जानकारी के अनुसार अहले सुबह पुलिस ने करीब ढाई बजे अंजू की लाश बरामद की। पुलिस का कहना है कि अंजू की मौत सड़क दुर्घटना में हो गई। जबकि सूत्रों से मिली जानकारी के अंजू देवी अंतिम बार एक कद्दावर नेता के यहां देखी गई थीं। इसके अलावे प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो अंजू देवी के शरीर पर दुर्घटना का कोई निशान नहीं था। वैसे सबसे बड़ा सवाल यह है कि ठंढी रात में करीब ढाई बजे यदि अंजू देवी दुर्घटना की शिकार हुई तो यह जांच का विषय है कि उस वक्त वह कहां से आ रही थीं और फ़िर उनके शरीर पर सड़क दुर्घटना के निशान क्यों नहीं पाये गये। बहरहाल, बिहार की सुशासनी पुलिस पूरे मामले को दबाने की हर संभव कोशिश कर रही है।

डाक्टरों का हाथ काटने की गीदड़ धमकी के सवाल पर बिहार में बवाल

पटना(अपना बिहार, 31 जनवरी 2012) – सुशासन राज के स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे की गीदड़भभकी के बाद बिहार में बवाल मच गया है। इस मामले में सरकार चारों ओर से फ़ंसती नजर आ रही है। बताते चलें कि श्री चौबे ने अपने जन स्वास्थ्य चेतना यात्रा के दौरान हड़ताल की धमकी देने वाले जूनियर डॉक्टरों के हाथ काट लेने का फरमान सुनाया था। इन्होंने स्वस्थ बिहार मुहिम के तहत डॉक्टरों को उनकी ड्यूटी याद दिलाते हुए कहा कि अस्पताल का काम छोड़कर प्राइवेट प्रैक्टिस करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके अलावे उन्होंने आए दिन जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल की धमकियों को गंभीरता से लेते हुए कह डाला कि "धमकी देने वालों के मैं हाथ काट लूँगा"। यह सवाल इसलिये भी महत्वपूर्ण है कि वेतन वृद्धि के मुद्दे पर पीएमसीएच के जूनियर डाक्टर 31 जनवरी से हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्री के इस विवादास्पद बयान की चहूंओर निंदा हो रही है। सीपीएम की वरिष्ठ नेत्री वृंदा करात ने कल रांची में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अब यह साबित हो गया है कि बिहार में सुशासन नहीं, बल्कि तालिबानियों का राज चल रहा है।

निजी प्रैक्टिस करने वाले और जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर जाने की चेतावनी के खिलाफ बिहार के स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे के बयान पर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जेडीए) ने जहां तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) की बिहार शाखा ने भी इसकी अलोचना की है। चौबे ने कहा था कि निजी प्रैक्टिस करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने की धमकियों पर उन्होंने कहा था कि सरकार उन्हें सुविधा देना जानती है तो उनके हाथ काटना भी जानती है। यदि उन्होंने चिकित्सा सेवा बाधित की तो उन्हें चिकित्सक बने नहीं रहने दिया जाएगा।

इधर चौबे के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जूनियर डाक्टर एसोसिएशन के डॉ़ धीरज कुमार ने कहा कि उनका तालिबानी बयान मानवता से परे है। ऐसे बयान देने वालों को मंत्रिमंडल में इतने बड़े विभाग का जिम्मा कैसे सौंपा गया है? पढ़े-लिखे व्यक्ति को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी किया कि हड़ताल की घोषणा के बाद ही सरकार को जूनियर डॉक्टरों की याद क्यों आती है? उधर, आईएमए की बिहार शाखा ने भी मंत्री के बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए चेतावनी दी कि ऐसे बयान से हालात और बिगड़ेंगे। जेडीए ने वेतन वृद्घि की मांग को लेकर 30 जनवरी की रात से हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। चौबे ने जन स्वास्थ्य चेतना यात्रा के दौरान शनिवार को उक्त बयान दिया था।

पिछड़े वर्गों के छात्रों के समर्थन में आगे आये कैप्टन निषाद

पटना(अपना बिहार, 31 जनवरी 2012) – मुजफ़्फ़रपुर के बीआरए विश्वविद्यालय के छात्रावास में संविधान प्रदत्त आरक्षण की व्यवस्था लागू करने को लेकर स्थानीय सांसद कैप्टन जयनारायण निषाद ने कुलाधिपति सह राज्यपाल देवानंद कुंवर को पत्र लिखा है। इस आशय की जानकारी आल इंडिया बैकवर्ड स्टूडेंट्स फ़ोरम के संयोजक अरुण कुमार ने दी। इन्होंने बताया कि मुजफ़्फ़रपुर के भीमराव आंबेदकर विश्वविद्यालय के छात्रावास में पिछड़े वर्ग के छात्रों को छात्रावास नहीं उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसके कारण उन छात्रों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

28 हजार करोड़ रुपये का होगा बिहार का योजना आकार

पटना (अपना बिहार, 29 जवनरी 2012) – वर्ष 2012-13 के दौरान बिहार के विकास के लिये 28 हजार करोड़ रुपये की योजनायें बनाई जायेंगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी विभागों के उच्च पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान वर्तमान वित्तीय वर्ष में अबतक हुए खर्च की समीक्षा की गई। सूत्रों की मानें तो बैठक के दौरान श्री कुमार ने इस बात पर अप्रसन्नता व्यक्त किया कि दिसंबर के अंत तक वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिये निर्धारित 24000 करोड़ रुपये में से केवल 12,084 करोड़ रुपये ही क्यों खर्च हो सके। हालांकि बाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान श्री कुमार ने यह स्पष्ट किया कि अगले वित्तीय वर्ष में बिहार के विकास के लिये 28 हजार करोड़ रुपये की योजना आकार सुनिश्चित की गई है। इसके अलावे इन्होंने यह भी कहा कि सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि हर हाल में वर्तमान वित्तीय वर्ष के योजना आकार की सारी राशि मार्च के अंत तक उपयोग में लायी जाये।

सीबीआई करेगा बिहार का अनुसरण

पटना(अपना बिहार, 29 जनवरी 2012) – जी हां, अब सीबीआई बिहार सरकार की उस नीति का अनुसरण करेगा, जिसके जरिये बिहार में भ्रष्टाचारियों की संपत्ति कब्जाई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई के पदाधिकारी बिहार सरकार के विशेष न्यायालय अधिनियम 2009 की बारीकियों का अध्ययन कर रहे हैं, जिसके जरिये भ्रष्टाचारियों द्वारा भ्रष्ट तरीके से अर्जित की गई संपत्ति को सरकारी कब्जे में लिये जाने का प्रावधान है। बिहार विजिलेंस के एडिशनल डायरेक्टर पी के ठाकुर ने इस संबंध में बताया कि सीबीआई ने इस संबंध में बिहार सरकार से संपर्क किया था और वे इस कानून को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। इस संबंध में सीबीआई के पदाधिकारियों ने बताया है कि सीबीआई के पास भ्रष्टाचारियों की संपत्ति पर कब्जा करने के लिये जो कानूनी प्रावधान है, वह असल में पुराना पड़ चुका है और इसके अनुपालन में समय एवं अन्य कानूनी जटिलतायें हैं।

मोदी पहुंचे सियारा लियोन

पटना(अपना बिहार, 29 जनवरी 2012) – उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कल बिहार के विकास की बखान करने पश्चिमी अफ़्रीकी देश सियारा लियोन पहुंचे। मिली जानकारी के अनुसार श्री मोदी कल यानी 30 जनवरी को विकास विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बिहार में हुए सुशासनी परिवर्तन के बारे में जानकारी देंगे। वैसे बताते चलें कि इस सम्मेलन का आयोजन भी लंदन स्कूल आफ़ इकोनामिक्स के जरिये किया गया है और इस संस्थान से श्री मोदी का बहुत पुराना रिश्ता है। पिछले 3 वर्षों से यह संस्थान बिहार में भी विकास के नये कारनामे गढ रहा है।

28 हजार करोड़ रुपये का होगा बिहार का योजना आकार

पटना (अपना बिहार, 29 जवनरी 2012) – वर्ष 2012-13 के दौरान बिहार के विकास के लिये 28 हजार करोड़ रुपये की योजनायें बनाई जायेंगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी विभागों के उच्च पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान वर्तमान वित्तीय वर्ष में अबतक हुए खर्च की समीक्षा की गई। सूत्रों की मानें तो बैठक के दौरान श्री कुमार ने इस बात पर अप्रसन्नता व्यक्त किया कि दिसंबर के अंत तक वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिये निर्धारित 24000 करोड़ रुपये में से केवल 12,084 करोड़ रुपये ही क्यों खर्च हो सके। हालांकि बाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान श्री कुमार ने यह स्पष्ट किया कि अगले वित्तीय वर्ष में बिहार के विकास के लिये 28 हजार करोड़ रुपये की योजना आकार सुनिश्चित की गई है। इसके अलावे इन्होंने यह भी कहा कि सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि हर हाल में वर्तमान वित्तीय वर्ष के योजना आकार की सारी राशि मार्च के अंत तक उपयोग में लायी जाये।

बिहार में स्वास्थ्य सुविधायें बदहाल – ताराकांत झा

पटना(अपना बिहार, 29 जनवरी 2012) एक ओर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे राज्य में जन स्वास्थ्य चेतना यात्रा के दौरान जनता को स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धियों का बखान करने यात्रा पर जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विधान परिषद के सभापति(भाजपा के ही सर्वमान्य नेता) ताराकांत झा का कहना है कि बिहार में स्वास्थ्य सुविधायें बदहाल हैं। श्री झा की खासियत यह रही कि यह बात उन्होंने इस यात्रा को हरी झंडी दिखाते हुए कहीं। इन्होंने कहा कि गांव में स्वास्थ सुविधायें नहीं के बराबर हैं और सरकार को इस दिशा में बेहतर कदम उठाने चाहिये। इस अवसर पर विधानसभा के अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव और स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे सहित अनेक मंत्री एवं स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी मौजूद थे।

भूमि पूजन के बाद भी नहीं शुरु हो सका नबीनगर बिजली परियोजना

पटना(अपना बिहार, 29 जनवरी 2012)- भूमि पूजन के एक साल बाद भी नहीं शुरु हो सका नबीनगर बिजली परियोजना। बताते चलें कि बिहार सरकार एनटीपीसी के साथ मिलकर 660 मेगावाद क्षमता वाली तीन यूनिटें स्थापित करने का निर्णय लिया था। इसके लिये सरकार ने व्यापक पैमाने पर किसानों से जमीन अधिग्रहित किया था और फ़िर जमीन की समुचित मुआवजा नहीं मिलने के कारण वहां किसानों ने आंदोलन भी किया था। इस आंदोलन का हिंसात्मक दमन भी सरकार के द्वारा किया गया था, जिसकी सर्वत्र आलोचना की गई थी। बाद में सरकार ने किसानों से वादा किया था कि वह उन्हें बेहतर मुआवजा देगी और इसके बाद पिछले वर्ष 14 जनवरी 2011 को बिहार सरकार के मुखिया ने भूमि पूजन कर परियोजना की स्थापना का श्रीगणेश किया था। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि आजतक परियोजना की जमीनी शुरुआत नहीं हो सकी है। हालांकि बिहार राज्य बिजली बोर्ड के पदाधिकारियों की मानें तो सरकार की नयी मुआवजा नीति से किसानों को लाभ मिलेगा और पिछले दो वर्षों से चला आ रहा जमीनी मतभेद समाप्त होगा।

सीबीआई करेगा बिहार का अनुसरण

पटना(अपना बिहार, 29 जनवरी 2012) – जी हां, अब सीबीआई बिहार सरकार की उस नीति का अनुसरण करेगा, जिसके जरिये बिहार में भ्रष्टाचारियों की संपत्ति कब्जाई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई के पदाधिकारी बिहार सरकार के विशेष न्यायालय अधिनियम 2009 की बारीकियों का अध्ययन कर रहे हैं, जिसके जरिये भ्रष्टाचारियों द्वारा भ्रष्ट तरीके से अर्जित की गई संपत्ति को सरकारी कब्जे में लिये जाने का प्रावधान है। बिहार विजिलेंस के एडिशनल डायरेक्टर पी के ठाकुर ने इस संबंध में बताया कि सीबीआई ने इस संबंध में बिहार सरकार से संपर्क किया था और वे इस कानून को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। इस संबंध में सीबीआई के पदाधिकारियों ने बताया है कि सीबीआई के पास भ्रष्टाचारियों की संपत्ति पर कब्जा करने के लिये जो कानूनी प्रावधान है, वह असल में पुराना पड़ चुका है और इसके अनुपालन में समय एवं अन्य कानूनी जटिलतायें हैं।

मोदी पहुंचे सियारा लियोन

पटना(अपना बिहार, 29 जनवरी 2012) – उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कल बिहार के विकास की बखान करने पश्चिमी अफ़्रीकी देश सियारा लियोन पहुंचे। मिली जानकारी के अनुसार श्री मोदी कल यानी 30 जनवरी को विकास विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बिहार में हुए सुशासनी परिवर्तन के बारे में जानकारी देंगे। वैसे बताते चलें कि इस सम्मेलन का आयोजन भी लंदन स्कूल आफ़ इकोनामिक्स के जरिये किया गया है और इस संस्थान से श्री मोदी का बहुत पुराना रिश्ता है। पिछले 3 वर्षों से यह संस्थान बिहार में भी विकास के नये कारनामे गढ रहा है।

साहित्यकार बना जी कृष्णैया का हत्यारा

बिहार बदलाव के राह पर है। इसी बदलाव का एक प्रमाण है कि जो पूर्व में बाहुबली कहलाते थे, आजकल साहित्यकार बन चुके हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं भूतपूर्व डीएम जी कृष्णया की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व बाहुबली सांसद आनंद मोहन की। सहरसा मंडल कारा में सजा काट रहे पूर्व बाहुबली सांसद ने साहित्य के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करने की ठान ली है। अपनी पहली कविता संग्रह कैद में आजाद कलम में जहां एक ओर उन्होंने बाजारवाद को नंगा किया है वहीं आम आदमी के दर्द को भी उकेरा है। इस संग्रह में कुल 26 कविताएं हैं। इनकी इस कविता संग्रह को लब्ध प्रतिष्ठित प्रकाशन राजकमल प्रकाशन ने प्रकाशित किया है।

अपनी कविताओं के जरिये श्री मोहन ने विरोधियों को भी यह संदेश भी दिया है कि वे झुकनेवालों में से नहीं हैं। प्रमाण के रुप में इस कविता को देखिये।
गुमनाम नहीं मरूंगा
शायद सोचा था उसने

कि मृत्युदंड की सजा सुन हार मान लूंगा मैं

झुकी गर्दन उसकी सजा स्वीकार

तंग काल-कोठरी में

 तिल-तिल घुट-घुट मरूंगा मैं

समझा नहीं कि हार से भी

 रार ठान लूंगा मैं

पर जीते जी उससे कभी

हार नहीं मानूंगा मैं।
आनंद मोहन ने अपनी कविता संग्रह में केवल इतने से बस नहीं किया है। एक दूसरी रचना “हराने को उन्हें लेने होंगे कई-कई जन्म” में अपने विरोधियों को ललकारते हुए वे कहते हैं कि - हराने को उन्हें लेने होंगे/ कई-कई जन्म/ क्योंकि/ गिर-गिरकर उठने/ और मर-मर जीने का/ मैं जानता हूं इल्म। इसी कविता में आगे कहा है- शातिर राजनीति के गन्दे खेल में/ वक्त के हाथों पराजित हूं/ यह मानता हूं मैं/ लेकिन/ वक्त की करवटों को भी/ बखूबी पहचानता हूं मैं।
अपनी रचनाओं में एक वफ़ादार पति के जैसे पूर्व बाहुबली सांसद ने अपनी अर्धांगिनी पूर्व सांसद लवली आनंद से मिले समर्थन को भी उकेरा है- हमें चैन दी/ गर होती बाहर तुम/ बेफिक्री में लिखते हम/ दिल में खुशी है/ आंखे नम/ सामने है यह तेरे दम/ कैद में आजाद कलम। बताते चलें कि डीएम हत्याकांड में मौत की सजा पाने के बाद (आज की तारीख में आजीवन कारावास की सजा) मोहन ने भागलपुर कैंप जेल में यह कविता लिखी थी। बहरहाल, चाहे जो भी हो पूर्व सांसद ने अब बंदूक का परित्याग कर कलम पकड़ ली है। वे अपनी आत्मकथा बचपन से पचपन” तक भी लिख रहे हैं। माना जा रहा है कि अपनी इस रचना के जरिये वे सूबे के अनेक सफ़ेदपोशों की पोल खोलेंगे। उनकी जेल डायरी का पहला खंड प्रकाशन के इंतजार में है।

बिहार में अब स्वास्थ्य यात्रा की बारी

पटना(अपना बिहार, 28 जनवरी 2012) – बिहार में यात्राओं का सिलसिला चल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेवा यात्रा के बाद सूबे के स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे अब स्वास्थ्य चेतना यात्रा पर निकलने वाले हैं। मिली जानकारी के अनुसार श्री चौबे की यह यात्रा पूरे बिहार से होकर गुजरेगी। इनकी इस यात्रा के दौरान लोगों को राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में किये गये कारनामों के बारे बताया जायेगा। इसके अलावे लोगों की निशुल्क स्वास्थ्य जांच के बाद मुफ़्त में विटामिन की गोलियां और टानिक की बोतलें भी मिलेंगी। यह यात्रा 30 अप्रील तक चलेगी।

मटुकनाथ-जुली ने लगायी गुहार

पटना(अपना बिहार, 25 जनवरी 20120) – जुली के नाथ मटुकनाथ और स्वयं मटुकनाथ ने लोगों से अपील की है कि वे लव पार्टी के नाम के झांसे से बचे। दोनों प्रेमी दंपत्ति ने आम लोगों से अपील किया है कि कुछ लोगों ने फ़र्जी रुप से उनके नाम पर यूपी में लव पार्टी गठित कर रखी है। मटुक-जुली ने जारी प्रेस बयान में है कि पिछले एक सप्ताह से मीडिया में लगातार खबर रही है कि यू. पी. चुनाव में उम्मीदवार खड़े करने के लिए कुछ लोगों ने हमारे नाम से एक लव पार्टी बनायी है। यह खबर पूरे देश में फैल रही है। इस संबंध में मेरा कहना है कि हमलोग लव पार्टी बनाने वालों में किसी को मैं नहीं जानता हैं। इससे जुड़े किसी व्यक्ति ने आजतक मुझसे संपर्क नहीं किया है। इन दोनों ने यह भी कहा कि खबरों के फूहड़पन को देखकर लगता है कि इनलोगों से मेरा वैचारिक और भावात्मक मेल नहीं है।

नालंदा में मिलते हैं असली सोना और चांदी

पटना(अपना बिहार, 25 जनवरी 2012) – जी हां, बिहार का नालंदा जिला केवल इसलिये महत्वपूर्ण नहीं है कि यहां कभी नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय हुआ करता था और अब वर्तमान में गोपा सबरवाल के कुलपतित्व में (गोपा सबरवाल दिल्ली विश्वविद्यालय में रीडर मात्र रह चुकी हैं और नीतीश कृपा के कारण इन्हें यह सौभाग्य मिला है) यह विश्वविद्यालय नया इतिहास रचने को बेकरार है। अब नयी बात है कि बिहार के नालंदा जिले में सोना-चांदी भी मिलता है। बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग के दस्तावेजों पर नजर डालें तो नालंदा जिले में करोड़ों रुपये के खर्च से सोना और चांदी की खोज की जा रही है। सरकारी सूत्रों की मानें तो राजकीय भूतात्विक प्रोग्रामिंग बोर्ड को राज्य विभाजन के पश्चात पुनर्जीवित किया गया है| इसके अंतर्गत भारतीय भूबैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा इस वर्ष कुल पाँच भूतात्विक अध्ययन के कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं जिसमें नालंदा जिलान्तर्गत सोना एवं चाँदी का पूर्वेक्षण सम्मिलित है | रही बात बिहार में खान एवं भूतत्व विभाग के उपलब्धियों की स्थिति तो सबसे महत्वपूर्ण यह कि पिछले 5 वर्षों में विभाग को प्राप्त होने वाले राजस्व में तीन गुणी वृद्धि हुई है। वर्ष 2006-07 में विभाग को 117 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई थी। जबकि वर्ष 314 लाख रुपये करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इसमें सबसे अधिक हिस्सेदारी दो लघु खनिजों की है। इनके नाम