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जब हाजत पहुँच गये जननायक

- डा. निहोरा प्रसाद यादव

बात १९८२ की है। पूरे बिहार में सुखाड़ से अकाल पड़ गया था। इस अवस्था में पूरे देश के प्रेजायडिंग आॅफिसर्स का सम्मेलन बिहार में रखा गया था । इस सम्मेलन में करोडों रुपये पानी की तरह बहाये जा रहे थे। पटना को दुल्हन की तरह सजाया गया था। एक तरफ अकाल से बिहार की जनता परेशान थी वहीं दूसरी तरफ सम्मेलन पर पैसे पानी की तरह बहाए जा रहे थे। ऐसा महसूस हो रहा था कि यह सम्मेलन अकाल पीड़ितों को चिढ़ा रहा हो।

सरकार को सूचना थी कि ऐसे समय में कराये जा रहे सम्मेलन का विरोध हो सकता है। इसलिए पटना प्रशासन को सख्त निर्देश था कि ऐसी व्यवस्था की जाय ताकि इसके विरोध में परिन्दा भी पंख न मार सके। चारों तरफ प्रशासन सर्तक। जिन दलों एवं नेताओं पर संदेह था उस पर प्रशासन की कड़ी नजरे थी। ऐसी स्थिति में इस सम्मेलन का विरोध करना काफी कठिन कार्य हो गया था। जहाँ कहीं चार पांच कार्यकर्ता एकत्रित देखे जाते प्रशासन वहां पर मौजूद हो जाता। मुझे युवा लोक दल में महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। हमने भी मन बना लिया था कि चाहे जो भी परिणाम हो जनहित में इस सम्मेलन का विरोध आवश्यक है े ताकि संदेश बिहार के आम आवाम में जाये कि बिहार के इस संकट कि स्थिति में किस तरह संकट से उवारने के बजाय अनावश्यक रूप से करोडों रूपयों का खर्च किया जा रहा है।

उस दिन दिनभर हमलोग भी चौकस रहे। कहाँ और किस तरह विरोध किया जाय। नीतियाँ तय करते रहे। तय हुआ कि सूर्यास्त होते ही हम सभी एक-एक कर जीपीओ गोलंबर के पास इकठठे होंगे, क्योकि संध्या समय प्रशासन भी मान लेगा कि अब विरोध नहीं होगा। इसी नीति क तहत हमलोग सैकड़ों की संख्या में एकत्रित हुए। वहीं से सम्मेलन के विरोध में नारा लगते आगे बढ़ने लगे ज्योही थोडा कदम आगे बढे प्रशासन आकर घेरे में लेकर गिरफ्तार कर ली। कोतवाली थाना लाया गया। अपराधियों की तरह हाजत में डाल दिया गया। रात भर हाजत में ही रहे जब कर्पूरी ठाकुर को जानकारी मिली कि हम लोगों को हाजत में बंद रखा है ? प्रात: काल अचानक कर्पूरी जी हाजत के सामने खड़े दिखे। विश्वास नहीं हो रहा था कि इतने बड़े राजनेता हाजत के सामने आकर हमलोगों की पीड़ा को सहलायेंगे। ऐसा सोचा भी नहीं था। बड़े भावुक मन से उन्होंने कहा कि आपलोगों को हाजत में बंद कर दिया गया है यह न्यायोचित नहीं है।

जो नेता कार्यकतार्ओं के पीड़ा में शामिल होने हाजत पहुंच जाय, वह मामूली नहीं महान नेता हो सकते हैं। उनके इस व्यवहार से कार्यकर्ताओं के प्रति आगाध प्रेम झलकता था। कार्यकर्तार्ओं की पीड़ा देखने के बाद कर्पूरी जी के चेहरे पर पीड़ा स्पष्ट दिखाई देने लगती थी। हर संभव उनके पीड़ा को दूर करने की कोशिश करते थे। यही कारण रहा की कार्यकर्ता कर्पूरी जी को मात्र नेता ही नहीं अभिभावक भी मानते थे।

दृढ निश्चयी बिहार का दृढ निश्चय

- प्रवीण बागी

कौन कहता है आकाश में सुराख हो नहीं सकता / एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों । दुष्यंत कुमार की ये कालजयी पंक्तियाँ बिहार में शराबबंदी के पक्ष में बनी मानव श्रंखला को देखकर दिमाग में अनायास ही कौंध गई। 21 जनवरी 17 को बनी यह मानव श्रृंखला अभूतपूर्व और ऐतिहासिक थी। बिहार जैसे राज्य में शराबबंदी के पक्ष में 3 करोड़ से ज्यादा लोगों का सड़क पर आना किसी चमत्कार से कम नहीं। बिहार में ऐसे चमत्कार होते रहते हैं। ऐसे चमत्कार यह उम्मीद जगाते हैं कि बिहार भी बदल सकता है। बशर्ते कोई सही नेतृत्वकर्त्ता मिले।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वह कर दिखाया जो दुनिया में आज तक नहीं हुआ था।

कहते हैं कि आजतक दुनिया में इतनी लंबी और इतने अधिक लोगों की मानव श्रृंखला नहीं बनी थी। नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई शराबबंदी की मुहिम को सभी दलों ने समर्थन दिया। हाल में अपने पटना दौरे के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी नीतीश की इस मुहिम का पुरजोर समर्थन किया। इससे शराबबंदी के अभियान को और बल मिला। जब नीतीश कुमार ने शराबबंदी लागू की थी ,उस समय अलग -अलग वजहों से इसकी आलोचना की जा रही थी। लेकिन नीतीश आलोचनाओं से घबराये नहीं, डटे रहे। अपनी हर सभा में शराबबंदी के पक्ष में दलीलें देते रहे। इसका असर भी हुआ। शराबबंदी से गांवों में भी माहौल बदला।लोगों को समझ में आने लगा की शराब से फायदा नहीं है। और फिर कारवां बढ़ता गया। जिसका नतीजा 21 जनवरी को दिखा।

यह मानव श्रृंखला 11 हजार 400 किलोमीटर लंबी थी। हालाँकि कई जगह लोग दो -दो -तीन -तीन लाइन लगाए हुए थे। 45 मिनट से अधिक समय तक पूरे बिहार में लोग एक दूसरे का हाथ पकडे खड़े रहे। पटना के गांधी मैदान में नीतीश कुमार लालू प्रसाद का हाथ पकडे मानव श्रृंखला का हिस्सा बने। उधर सिवान में केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ,बीजेपी नेता सुशील मोदी, विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रेम कुमार ,सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल आदि नेता मानव श्रृंखला का हिस्सा बने।

आम लोगों में उत्साह था। पश्चिम चंपारण में एक डेयरी संचालक जय सिंह और यश सिंह ने ने 600 लीटर दूध की चाय बनाकर मानव श्रृंखला में शामिल लोगों को मुफ्त में पिलाई । यह भाव बता रहा था कि बिहार में अब शराब का दौर गुजरे जमाने की बात हो गई है। हालांकि कई जगह कुछ बच्चे -बच्चियां बेहोश हो गए। शुक्र है की इलाज से वे तुरंत ठीक हो गए।

इस ऐतिहासिक घटना को रिकार्ड करने के लिए 5 सेटेलाइटों से तस्वीर ली गई। इसके अलावा 40 ड्रोन ,कई हेलीकॉप्टर भी इस काम में लगे हुए थे। सभी तस्वीरों और रेकॉर्डिंग की पुष्टि के बाद गिनीज बुक में इसे दर्ज किया जायेगा। इतनी लंबी मानव श्रृंखला दुनिया ने नहीं देखी थी. बिहार ने अरसे बाद अपनी ताकत दिखाई है। यह जज्बा बना रहे तो बिहार को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता।(लेखक सूबे के वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं)

याद जयपाल सिंह मुंडा की...

- प्रवीण बागी

जो समाज अपने सपूतों को याद नहीं रखना, उनपर गर्व नहीं करता, वह अपनी जडों से कट जाता है। वह अपनी परंपरा, संस्कृति और धरोहर को भूल जाता है। झारखंड इसका ताजा उदाहरण है। 3 जनवरी जयपाल सिंह मुंडा की जयंती है। नयी पीढी शायद उनके नाम से अवगत न हो, लेकिन आदिवासी संस्कृति की दुहाई देनेवाले और आदिवासियों के नाम पर राजनीति' करनेवाले उन्हें जरूर जानते हैं। क्योंकि वे उन्हीं की कमाई खा रहे हैं। जयपाल सिंह मुंडा ने ही सबसे पहले आदिवासियों के लिए झारखंड नाम से अलग प्रदेश बनाने की मांग बुलंद की थी। उन्होंने झारखंड पार्टी बनाई थी। वे आक्सफोर्ड विवि से पढे थे। संविधान सभा के सदस्य थे।. प्रथम लोकसभा के सदस्य रहे।लगातार चुनाव जीतते रहे। एक समय बिहार विधानसभा में झारखंड पार्टी के 23 विधायक जीत कर पहुंचे थे। दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह को राज्यसभा में भेजनेवाले जयपाल सिंह ही थे। आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा और विधायिका तथा सरकारी नौकरियों में आरक्षण, जयपाल सिंह मुंडा की ही देन है। संविधान सभा में उन्होंने इसके लिए जोरदार बहस की थी। इसलिए लोगों ने उन्हें 'मरांग गोमके' का नाम दिया था, यानी सर्वोच्च नेता।यह उपाधी फिर किसी दूसरे नेता को नहीं मिली।

वे हॉकी के बेहतरीन खिलाडी थे। 1928 में एम्सटर्डम ओलंपिक में इन्हीं के कैप्टनशिप में भारत ने गोल्ड जीता था। हॉकी के जादूगर कहे जानेवाले मेजर ध्यानचंद उस टीम के हिस्सा थे। उन्हीं के चलते झारखंड में आज भी हॉकी लोकप्रिय है। गांव- गांव में लडके- लडकियां हॉकी खेलते दिख जाते हैं। 20 मार्च 1970 को उनका निधन हुआ था। जिस रांची में जयपाल सिंह का जन्म हुआ था, आज वहां उनका कोई स्मारक नहीं है। उनके नाम पर सिर्फ एक स्टेडियम है, जिसमें उनकी प्रतिमा है। उस प्रतिमा पर आज फूल चढाना चाहिये, इसकी जरूरत न सरकार को महसूस हुई न दूसरे राजनेताओं को । सिर्फ रांची की मेयर आशा लकडा को यह समझ में आया कि जयपाल सिंह क्या थे। उन्होंने श्रद्धांजलि दी। ऐसे राजनेताओं और समाज को आप क्या कहेंगे ?

जयपाल सिंह आदिवासियों के धर्मान्तरण के भी खिलाफ थे। उनकी शिक्षा इसाई मिशन के सहयोग से हुई थी।9 वीं क्लास के बाद ही मिशन की ओर से उन्हें पढने के लिए इंग्लैंड भेज दिया गया था।आक्सफोर्ड में पढने का खर्च भी मिशन ने ही उठाया था।जब वे लौटकर आये तो मिशन ने उन्हें इसाईयत के प्रचार- प्रसार के काम में लगाना चाहा, पर उन्होंने दृढतापूर्वक मना कर दिया। लेकिन अफसोस कि हिन्दू धर्म के ध्वजाधारकों को भी उनकी याद नहीं आयी। हम शमिंर्दा हैं मरांग गोमके'...... (लेखक वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं)

आदमियत की दुखती रग के निर्दोष राग को ढूँढ़ने का नया तरीका

- शहंशाह आलम

मेरा मानना है कि हर लेखक किसी पहाड़ी कबीले का सदस्य होता है। तभी तो हर लेखक जीवन को, जीवन से जुड़े संघर्ष को इतने निकट से देख पाता है। यह सही भी है। एक सच्चे लेखक का जीवन क्या है, कैसा है, कैसा होना चाहिए जैसे सवाल जब कभी मेरे भीतर उठे हैं, तो मुझे उत्तर यही मिलता रहा है कि हर लेखक को पहाड़ी कबीले का सदस्य होना चाहिए। इसलिए कि इस जीवन को कोई दूर किसी छोटे इलाके में रहकर अगर जीता है, तो असल जीवन तो वही है। वही जीवन जीवन के असल महत्व को दशार्ता है। जहाँ ऊँच-नीच का लफड़ा है भी तो उस लफड़े में मासूमियत रहती है। जबकि शहरी अथवा महानगरीय तामझाम ने जो छीना-झपटी हमें दी है, वह हमारा नाश करने के लिए काफी है। इस छीना-झपटी से मुक्ति तभी संभव है, जब हम कई सौ मील जाकर अपनी जड़ों से जुड़ेंगे और अपने असली जीवन को आत्मसात् करेंगे। कम-अज-कम हम लेखकों को ऐसा जरूर करना चाहिए। तभी हमारा लेखन हमारे अंतस का लेखन सिद्ध होगा। मैंने अपने समय के बेहद महत्वपूर्ण लेखकों में एक जाबिर हुसेन को अपने लेखन को सच्ची धार देने के लिए उस जीवन को जीते देखा है, जो जीवन बिना किसी शोर के धरती के उस टुकड़े से जुड़ा रहता आया है, धरती का जो टुकड़ा अपनी एक नई तरह के तीव्र संघर्ष से जुड़ा रहा और जीतता आया है। जाबिर हुसेन ऐसे जीवन के बारे में कहते हुए लिखते हैं, 'मैं चाक पर फैली रेत के समान हूँ। मुझे पता है, इस रेत से चाक पर कोई उपयोगी वस्तु आकार नहीं ले सकती। मैं खुद भी अपने जीवन में कोई आकार कहाँ ले पाया।' अब आप ही कहिए, एक चाक, जो एक कुम्हार के हाथों गति पाते हुए, मिट्टी-पानी पाते हुए कितनी ही चमत्कारिक वस्तुएँ देता है, एक लेखक अपनी कलम से उस चाक से कहीं अधिक चमत्कारिक रचनाएँ देता है। मैंने पहले ही लिखा है कि जाबिर हुसेन एक महत्वपूर्ण लेखक हैं और उनका महत्व इससे स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपने आस-पास के जीवन से जो लिया, उससे कहीं ज्यादा उस जीवन को वापस लौटाया है। अभी-अभी छपकर आई उनकी किताब 'चाक पर रेत' को पढ़कर आप भी यही कहेंगे बिना कोई शक किए। 256 पृष्ठों की यह किताब इस रेत से भरे समय से हमारे काम लायक बहुत सारा बढ़िया छानकर एक नया दरिया-बहाती है :

मछुआरों को पता है

समुद्र में

कब आएगा तूफान

कब आएगी लहरों में उछाल

कितनी ऊँची उठेंगी लहरें

कितनी दूर भीगेगी रेत

तहस-नहस होंगे कितने किनारे

मछुआरों को पता है, सब

जाल में फँसी मछलियों ने

बता दिया है उन्हें, सबकुछ

खतरों से

आगाह कर दिया है, उन्हें

मछुआरे नहीं बेचते हैं

अपना नमक

हमेशा ख़्याल रखते हैं

अपने 'शुभ-चिंतकों' का

तभी तो

समुद्री तूफान से पहले

मछुआरे

ढीले कर देते हैं, अपने जाल

और मछलियों को

दे देते हैं

समुद्र में लौटने की छूट ( 'मछुआरों को पता है', पृ.254 )।

जाबिर हुसेन 'चाक पर रेत' में शामिल अपनी गद्य-रचनाओं को अपने जीवन की रचनाएँ कहते हैं। उनकी ये रचनाएँ बिहार के बहाने अपने भारत के उन अभिशप्त गाँवों की हैं, जहाँ हिंसा है, प्रतिहिंसा है, यातनाएँ हैं, गैर-बराबरी का नंगा नाच है। वे अपनी रचनाओं के बारे में कहते हैं, 'ये सारी तहरीरें उस समय लिखी जाती रहीं, जब बिहार के गाँवों की जमीन दरक रही थी और सामाजिक रिश्तों की बुनियादें ढह रही थीं। गाँव के खेतिहर मजदूर, भवन-निर्माण से जुड़े कामगार, छोटे-मोटे व्यवसायी, दलित और उपेक्षित वर्गों के लोग, इन सब की आवाज बनकर आगे बढ़ना अपने आप में एक जोखिम भरा अभियान था।' यहाँ पर मुझे एक कंबोडियन कहावत याद आ रही है। वह कहावत कुछ यूँ है कि जब शीशा टूटकर पानी पर तैरने लगे तो बुराई जीत जाती है। मेरे ख़्याल से अभी बुराई हम पर भारी है। सच्चाई यह भी है कि जाबिर हुसेन की रचनाएँ बुराई को हराती रही हैं। सच्चाई यह भी है कि देश का और विश्व का सामान्य वर्ग किसी असहाय, रक्षा चाहने वाला जीवन जी रहा है। इनके दर्द का मरुथल आप जाबिर हुसेन का साहित्य पढ़कर महसूस सकते हैं। उनकी रचनाएँ कभी भी कुछ लोगों के अच्छे जीवन का उत्सव न मनाकर उनके अच्छे जीवन के लिए संघर्ष करती रही हैं, जिन्हें ठेल-ठालकर हमेशा पंक्ति में सबसे पीछे खड़ा किया जाता रहा है। असल बात यही है कि जाबिर हुसेन की रचनाएँ जलते लोकतंत्र का सीधा, साफ-सुथरा बयान हैं। सौ से अधिक गद्य-रचनाएँ और चार कविताओं के माध्यम से इस 'चाक पर रेत' में व्यक्ति-चित्र और हमारे जीने के रोजमर्रा के दिन से लिए गए आत्मविश्वास से लेखक द्वारा जो कुछ लिखा-रचा गया है, वह अद्भुत है और अपने पढ़ने वालों को संतुष्ट करता है। (लेखक सूबे के सुविख्यात युवा कवि हैं)

दंगल : एक आंच की रह गयी कसर

- नवल किशोर कुमार

हरियाणा के भिवानी शहर की महिला पहलवान बबीता फोगाट और गीता फोगाट की कामयाबी की कहानी आमिर खान ने अपनी फिल्म दंगल में बखूबी चित्रित किया है। हालांकि इसमें कई तरह की मनोरंजन के लिहाज से स्वीकार्य नाटकीयता है जो महावीर फोगाट के वास्तविक जीवन से मेल नहीं खाती हैं। इसके बावजूद इस फिल्म की खासियत यही है कि इस फिल्म में स्त्री पक्ष के साथ कई दृश्यों में नाइंसाफी की गयी है। नाइंसाफी का एक प्रमाण तो यह भी कि मुख्य पोस्टर में आमिर यानी महावीर फोगाट अपनी बेटियों के साथ नजर तो आते हैं लेकिन उनकी पत्नी शोभा कौर(साक्षी तंवर) को जगह भी नहीं मिलती है। इस नाइंसाफी की एक बड़ी वजह समाज का पुरूष प्रधान होना है।

फिल्म में महावीर फोगाट को एक कुंठित पिता के रूप में दिखाया गया है। चार बच्चियों का पिता कुंठित हो और वह अपनी बेटियों को पहलवान बनाये, आश्चर्य पैदा करता है। आश्चर्य इसलिए भी कि महावीर फोगाट मूल रूप से जाट हैं और जाटों के हर गोत्र के अपने खाप हैं। इन खापों में महिलाओं की स्थिति क्या होती है, यह किसी से छुपी हुई बात नहीं है। पूरी फिल्म में दो हिस्से हैं। एक हिस्सा महावीर फोगाट की महानता है तो दूसरा हिस्सा उसकी बेटियों की कामयाबी है। फिल्मकार ने दोनों हिस्सों को फिल्माने में सावधानी बरती है। यह भी कहा जा सकता है कि फिल्मकार की ईमानदारी के पीछे फोगाट परिवार की जीवटता है।

बहरहाल एक फिल्म के रूप में दंगल एक कामयाब प्रयास है। उम्मीद की जानी चाहिए कि स्त्री पक्ष के फिल्मांकन में फिल्मकार इसी तरह की ईमानदारी दिखायेंगे। कम से कम पिंक के फिल्मकार की आधी अधूरी ईमानदारी जैसी तो बिल्कुल भी नहीं।

नाम से ही बिदक रहे संस्कृति के ठेकेदार

- मुसाफिर बैठा

सबका ठेका लेकर बात कहना बड़ी बीमारी है जो करीना-सैफ के नवजात बेटे के तैमूरनाम को लेकर फेसबुक-ट्विटर जैसे सोशल मीडिया पर अनेक बेहूदे राष्ट्रवादियों पर तारी है।

तैमूर नाम मात्र से उन्हें भी परेशानी है जिन्हें इतिहास का मात्र कखग ज्ञात है। तैमूरलंग ने उस समय हमारी भौगोलिक भूमि पर आक्रमण किया और लूटपाट की जब हमारा समाज असभ्य था, हम एक राष्ट्र न थे, हमारी राष्ट्रीयता थी तो अलग अलग थी, खण्ड खण्ड थी, (वैसे, प्रैक्टिकली अभी भी हम एक राष्ट्र कहाँ हैं, हो भी नहीं सकते!) सामन्तों एवं राजाओं तथा हिन्दू ऊँच नीच वाला समाज था। हमारे शासक भी आम लोगों के लिए कमोवेश उतने ही क्रूर थे, जालिम थे जितना कि तैमूर लंग था। तैमूर लंग जैसों की विजय कमजोर साबित क्रूर शासकों पर एक बलशाली शासक का आधिपत्य था। ब्राह्मणी एवं सवर्णी व्यवस्था जो तैमूर जैसे विदेशी आक्रमणकारियों के पहले से चली आ रही है, उस पर इन बेहूदों को क्यों परेशान नहीं कर रही है जो तैमूर नाम मात्र से परेशान हैं?

ऐसे 'देशभक्त' क्या यह सर्टिफाई करेंगे कि उनकी वंश परंपरा में अत्याचारी-व्यभिचारी-जातिवादी लोग नहीं हुए हैं? अगर स्वीकार करेंगे तो उनके पास अपने बेहूदे पूर्वजों के लिए क्या आलोचना है?

फिर, जहाँ लाखों लोग भगवान के नाम पर अपना नाम रखे हुए हैं और अनेक तरह के कुकर्मों में लगे हैं उनके प्रति इन तैमूर-घृणागिरों के क्या विचार हैं? आप ईश्वर से जुड़ा नाम रखकर भी कुकर्म और अपराध करें तो आपके लिए क्या सजा हो?

नरेंद्र माने नरों का इंद्र अथवा ईश्वर है। तो क्या गुजरात कत्लेआम के समय प्रदेश का मुख्यमंत्री रहे इस नाम के व्यक्ति को आप सीधे कठघरे में रखेंगे? क्या एक मुख्यमंत्री के रहते राज्य में नरसंहार हो जाए तो उसे इसका दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए?

घृणा योग्य लोग ही ऐसी बेहूदी घृणा पालते हैं कि किसी नाम पर भी ओछा वितंडा खड़ा कर देते हैं।

मेरे नाम और सरनेम 'मुसाफिर' और 'बैठा' को लेकर अबतक अनेक बुद्धिजीवियों (राजेंद्र यादव शामिल) तक ने बेहूदगी भरा मजाक और परिहास किया है। राजेंद्र यादव से यदि मैं पूछता कि आपके नाम में 'राजा' और 'इंद्र' जो लगा है वह आपके कर्म और आचरण को किस तरह क्वालीफाई करता है, तो उन्हें कैसा लगता? मैं उनसे कह सकता था कि आप नास्तिक होकर भी इंद्र क्यों हो, क्यों विरोधाभास को साथ लेकर जी रहे हैं, अपनी बुद्धिजीविता और नास्तिकता की हानि कर रहे हैं।

जब किसी अपराधी का बच्चा नेक हो सकता है, जब नेक का बच्चा बदनेक और अपराधी हो सकता है तो किसी नाम को किसी मिथकीय, ऐतिहासिक अथवा वर्तमान व्यक्तियों के नाम-बदनाम होने से अच्छा-बुरा ठहरा देना कुबुद्धि है। ऐसे ही कुबुद्धि जन पत्थर को भी भगवान मानते हैं एवं कोरी कल्पना की मिथक कथाओं को इस वैज्ञानिक युग में भी जीते हैं। ऐसे दुर्बुद्धि से हम फेसबुक पर नाता न रखें, उन्हें अपनी वॉल पर बेहूदगी न उगलने दे। बेहूदे चिकना घड़ा होते हैं। काम से मतलब रखिये, नाम से नहीं। नाम जैसा भी हो काम अच्छा होना चाहिए। मोल करो तलवार का, पड़ी रहन दो म्यान! (लेखक सूबे के चर्चित युवा कवि हैं)

सनक में लिया गया है नोटबंदी का निर्णय...

- शिवानंद तिवारी

गत आठ नवंबर को प्रधानमंत्री जी ने पाँच और हजार के नोट रद्द किए जाने की घोषणा की थी।रिजर्व बैंक के मुताबिक उस दिन देश मे पाँच और हजार के 15.44 करोड़ नोट चलन में थे।आज एक महीना बाद रद्द किए गए नोटों मे से कल तक 11.5 करोड़ यानी कुल रद्द नोटों का 80 प्रतिशत बैंकों में वापस आ चुका है।भारत सरकार के राजस्व सचिव के मुताबिक इस माह के अंत तक यानी रद्द नोटों को बैंकों मे जमा करने की अंतिम मोहलत तक लगभग सारे रद्द नोट बैंकों में वापस आ सकते हैं।इसका अर्थ हुआ कि नगदी में काला धन होने का जो दावा किया जा रहा था वह गलत साबित हुआ।या वह कालाधन कम था जो भ्रष्ट बैंक पदाधिकारियों की सहायता से सफेद कर लिया गया।इस तरह नोटों को रद्द किए जाने का जो मुख्य मकसद प्रधानमंत्री जी ने बताया था वह गलत साबित हो रहा है।

नोटबंदी के पहले देश की आर्थिक हालत ठीकठाक थी।स्वंय सरकार का दावा था कि हम दुनिया में सबसे तेज गति से विकास करने वाले देश हैं।हमारी विकास की गति चीन से भी तेज है।पिछले दो-तीन वर्षों से देश का बड़ा हिस्सा सुखा से प्रभावित था।कुछ इलाकों मे तो पीने के पानी तक का संकट उपस्थित हो गया था।लेकिन इस वर्ष बारिश बहुत अच्छी हुई।खरीफ की बहुत अच्छी फसल हुई है।रबी की फसल भी अच्छी होगी इसकी संभावना दिखाई दे रही थी।

जब अर्थ व्यवस्था बिलकुल स्वस्थ हालत में दिखाई दे रही थी तो प्रधानमंत्री जी द्वारा उठाए गए इस कदम का औचित्य समझ के बाहर है।रिजर्व बैंक द्वारा देश मे जारी कुल मुद्रा का 86 प्रतिशत पाँच और हजार रूपए के नोटों के रूप में ही था।ठीकठाक चल रही अर्थव्यवस्था से इतनी बड़ी राशि निकाल लेना एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर से 86 प्रतिशत खून निकाल कर उसे अधमरा बना दिए जाने के समान है।

सनक में उठाए गए कदम से देश की अर्थव्यवस्था को कुल कितना नुकसान पहुँचा है इसका अंतिम आकलन तो बाद में होगा।लेकिन रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने कल जो आकलन बताया उसके अनुसार देश का विकास दर 7.6 से 7.1 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है।यानी राष्ट्रीय आमदनी में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आएगी।ए. एन. सिंहा संस्थान, पटना के अर्थशास्त्र के प्रो. डी. एम दिवाकर के अनुसार आर्थिक सर्वे के आधार पर 2015-6 के वर्तमान मूल्य के आधार पर हमारा सकल राष्ट्रीय आय 1,34,09,892 करोड़ रू. था। इसमे 0.5 प्रतिशत की गिरावट अर्थ है सकल घरेलू आय में 67,04,946 करोड़ की कमी या सकल घरेलू उत्पाद में यह 67,83,596 करोड़ है।दिवाकर जी के मुताबिक नोटों की छपाई तथा देश भर में उनको पहुँचाने की लागत लगभग 1,28,000 करोड़ तक आ सकती है। मनमोहन सिंह जी ने नोटबंदी के इस कदम से सकल राष्ट्रीय उत्पाद में दो प्रतिशत गिरावट की आशंका व्यक्त की है।

अत: यह कहा जा सकता है किसी सकारात्मक आर्थिक सोच के आधार पर नोटबंदी का यह निर्णय नहीं लिया गया है।इस फैसले के द्वारा मोदीजी गरीबों से तप करा रहे हैं और अमीरों को मौज। आगे आनेवाले दिनों में इस कदम का पुरा प्रभाव जब प्रत्यक्ष होगा तो जो भक्त आज उनका जयकारा लगा रहे हैं वही उनके प्राण के पीछे लगे दिखाई देंगे। (लेखक राज्यसभा के पूर्व सांसद हैं)

Daily News

हर हाल में मिले वन्य प्राणियों को सुरक्षा : मुख्यमंत्री, बिहार राज्य वन्यप्राणी पर्षद की 7वीं बैठक संपन्न

पटना(अपना बिहार, 27 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सूबे के वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। वन एवं पर्यावरण मंत्री तेज प्रताप यादव के साथ श्री कुमार ने बिहार राज्य वन्य प्राणी पर्षद की 7वीं बैठक राज्य में वन्यप्राणी प्रक्षेत्र में वर्तमान परिदृष्य एवं क्रियाकलापों की समीक्षा की गयी। बैठक में मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया गया।

बैठक में वाल्मिकी टाइगर रिजर्व में की जा रही अधिवास प्रबध्ांन, बाघों की बढ़ रही संख्या, इको टूरिज्म, स्वायल कनजर्वेषन, वाइल्ड लाइफ मॉनिटरिंग, फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट सहित गंडक में घड़ियाल संरक्षण, पक्षी आश्रयणी, नेषनल डॉल्फिन रिसर्च सेंटर की स्थापना के साथ-साथ अन्य बिंदुओं पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि गंडक नदी में घड़ियाल संरक्षण का फेज-2 कार्यक्रम की शुरूआत की जा चुकी है। बैठक में बरैला झील पक्षी आश्रयणी, भीम बांध आश्रयणी पर विस्तृत चर्चा की गई। नीलगाय एवं जंगली सुअर के विभिन्न जिलों में असंतुलित आबादी से समस्या का प्रबंधन करने पर चर्चा की गयी। भागलपुर के गंगा एवं कोसी नदी के दियारा क्षेत्र में संकटग्रस्त गरूड़ पक्षी प्रजाति का बचाव कार्य किया जा रहा है। गंगा नदी में इनलैंड वाटरवेज प्रोजेक्ट के प्रस्तावित क्रियान्वयन से डॉल्फिन एवं जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल आघात के संबंध में चर्चा की गयी। मुख्यमंत्री द्वारा समीक्षा के क्रम में निर्देष दिया गया कि आश्रयणियों में स्वच्छता का पूरा ख्याल रखा जाये।

वन्य प्राणी पर्षद की 7वीं बैठक में कैमूर वन्य प्राणी आश्रयणी-रोहतासगढ़ में रोपवे निर्माण को सषर्त स्वीकृति दी गई, साथ ही कुषेष्वर-स्थान पक्षी आश्रयणी, बरैला झील पक्षी आश्रयणी, कॉवर झील पक्षी आश्रयणी के संबंध में मुख्यमंत्री द्वारा निर्देष दिया गया कि पॉच सदस्यीय समिति बनाकर उक्त सभी आश्रयणियों का क्षेत्र भ्रमण किया जाय तथा सभी स्टेक होल्डरों से बातचीत की जाय। गौतम बुद्ध आश्रयणी गया में एनएच- 2 का उन्नयन कार्य शर्तों के साथ अनुमति हेतु अनुशंसा की गयी।

बैठक में विधान पार्षद नीरज कुमार, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, प्रधान सचिव वन एवं पर्यावरण विवेक कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, मुख्य वन संरक्षक, मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक, मुख्यमंत्री के विशेष कार्यपदाधिकारी गोपाल सिंह सहित वन्यप्राणी पर्षद के सभी गणमान्य सदस्य उपस्थित थे।

देश में सवर्णों के लिए बने आयोग : नीतीश

पटना(अपना बिहार, 27 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से देश में सवर्णों के लिए राष्ट्रीय आयोग बनाने की मांग की है। वे बुधवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में वीर कुॅवर सिंह शहादत दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में कुंवर सिंह के योगदान को जानने एवं समझने की जरूरत है। इनकी बड़ी भूमिका है, 23 अगस्त 1857 से 22 अप्रैल 1858 तक उन्होंने इतिहास में एक लंबी मार्च की। आजादी की लड़ाई में इतनी बड़ी लंबी मार्च का मिसाल देखने को कम मिलता है। लखनऊ से लौटते वक्त गंगा नदी पार करने के क्रम में उनकी बांह में गोली लगी और उन्होंने जख्मी बांह को तलवार से काटकर गंगा को अर्पित कर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जगदीशपुर आजाद था। 23 अप्रैल 1858 विजयोत्सव का माहौल था। अपने जन्म और मृत्यु दोनों वक्त उनका जगदीशपुर आजाद ही रहा। उनमें कुषल नेतृत्व एवं अभूतपूर्व संगठन क्षमता मौजूद था। दानापुर में सैनिक छावनी में सक्रिय भागीदारी कर उनका नेतृत्व किया। नौ महीने तक लौंग मार्च के दौरान उन्होंने मिल, ली ग्राण्ड, डगलस आदि अंगे्रजी फौजों को पराजित किया। मिजार्पुर, रेवा, बांदा, काल्पी, कानपुर होते हुये लखनऊ और फिर जगदीशपुर आये। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही रोमांचित करने वाली बात है इसलिये बाबू वीर कुॅवर सिंह की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। राष्ट्रीय स्तर पर उनको मान्यता मिलनी चाहिये। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष 2018 में 160वां विजयोत्सव मनाया जायेगा। 160वें वर्षगांठ का आयोजन ज्ञान भवन में भव्य आयोजित किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि डुमरांव में वीर कुॅवर सिंह की जो प्रतिमा बनकर तैयार है, उसका अनावरण करना मेरे लिये गर्व की बात होगी। इस अवसर पर जदयू प्रदेष अध्यक्ष सह सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह, जदयू नेता श्याम रजक, उद्योग मंत्री जयकुमार सिंह, पूर्व मंत्री गौतम सिंह, विधायकगण, विधान पार्षदगण सहित बड़ी संख्या में अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

बालश्रम समाज के लिए धब्बा : विजय प्रकाश

पटना(अपना बिहार, 27 अप्रैल 2017) - प्रदेश के श्रम संसाधन मंत्री विजय प्रकाश ने कहा है कि बाल अधिकारों का उल्लंघन होना धब्बा है। विकास की ऊंचाइयों को छूने के बाद भी इस धब्बे को पूरी तरह हटाया नहीं जा सका है। नतीजतन अब भी हर 11 में से एक बच्चा बाल श्रमिक है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकारी, अर्द्धसरकारी और गैर सरकारी संगठनों को एकीकृत प्रयास करना होगा। इस कुरीति को मिटाने का संकल्प लेना होगा।

बुधवार को एक होटल में चाइल्ड लेबर फ्री जोन बनाने के लिए संस्था स्टॉप चाइल्ड लेबर (एससीएल) तथा एमवी फाउंडेशन द्वारा परामर्श के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया था। कार्यशाला का उद्घाटन करने के पश्चात मंत्री विजय प्रकाश ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में 6.5 करोड़ बच्चे बाल श्रमिक के रूप में काम कर रहे हैं। इसमें से 11 फीसदी बच्चे बिहार के हैं। बाल श्रमिकों के मामले में बिहार देश में दूसरे स्थान पर है। बाल श्रम हमारे समाज के लिए अभिशाप है। इसको पूरी तरह समाप्त करना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य को बाल श्रम मुक्त देखने का संकल्प दोहराया है। व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से सामाजिक एवं व्यवहार बदलाव की रणनीति पर काम किया जा रहा है। इससे बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने और उनके विकास में मदद मिलेगी। बिहार सरकार द्वारा श्रम विभाग के साथ 13 अन्य विभागों में समन्वय स्थापित कर राज्य कार्ययोजना बनाई गई है। स्टेट कन्वीनर नवलेश कुमार सिंह तथा अन्य ने भी विचार व्यक्त किया।

दिल्ली एमसीडी चुनाव का परिणाम आते ही खुली महागठबंधन की पोल, अलग-अलग लड़ने से मिली हार : लालू, वार्ड का चुनाव भी नहीं जीत सकते पीएम बनने का सपना देखने वाले नीतीश, मांझी ने बोला हमला, वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा - हार से सीख लेने की जरूरत

पटना(अपना बिहार, 27 अप्रैल 2017) - दिल्ली एमसीडी चुनाव का परिणाम आते ही बिहार का सियासी पारा भी गरम हो गया। चुनाव में भाजपा को मिली निर्णायक जीत के बाद बिहार में महागठबंधन की गांठ भी खुलती दिखी। स्वयं राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जबतक अलग-अलग लड़ेंगे यही हाल होगा। हम एकता की पहल करते रहेंगे। वहीं दूसरी ओर राजद विधायक भाई वीरेंद्र की ओर से जदयू पर तंज कसते हुए कहा गया है कि जदयू द्वारा बिहार की जनता का पैसा दिल्ली में लुटाया गया है। चुनाव नतीजों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश कुमार वार्ड का चुनाव जीत नहीं सकते, लेकिन सपना देखते हैं प्रधानमंत्री बनने का।

वहीं दिल्ली एमसीडी का परिणाम सामने आने के बाद जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि दिल्ली एमसीडी चुनाव नतीजों से निराश होने की जरूरत नहीं है। बल्कि, सीख लेने की जरूरत है। श्री सिंह ने सभी पार्टियों को मतभेद भुलाकर आपस में समन्वय करने की बात कही। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो सबको एक साथ लेकर चल सके। दूसरी ओर राजद के प्रवक्ता मनोज झा ने कहा है कि आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल अपनी करनी का खामियाजा भुगत रहे हैं। जबकि जदयू के नेता श्याम रजक ने कहा कि दिल्ली एमसीडी चुनाव नतीजों से अब सबको सबक लेने की जरूरत है, सबको एक साथ आना होगा। जहां-जहां सब अलग-अलग चुनाव लड़े हैं, वहां सबको हार का मुंह देखना पड़ा है। वहीं बिहार विधान सभा में लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा है कि एमसीडी चुनाव में भाजपा की जीत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति असीम विष्वास और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के प्रभावशाली व चमत्कारी नेतृत्व पर जनता की मुहर है। इससे दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल सरकार का सिंहासन हिल उठा है। श्री यादव ने दिल्ली नगर निगम के चुनाव में भाजपा को मिली अपार सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को बधाई देते हुए कहा कि दो-ढाई साल के भीतर दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य में इतना जबरदस्त बदलाव आम जनता का भाजपा के प्रति बढ़ता विश्वास है। श्री यादव ने महागठबंधन के नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव में जदयू ने एक सौ सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़ किये थे। उनके जीताने के लिए पचास से अधिक विधायक और आधे दर्जन से अधिक मंत्री बिहार का कामकाज छोड़कर एक पखवारे तक दिल्ली में डटे थे। बिहार की जनता की गाढ़ी कमाई का चुनाव प्रचार में करोड़ो रूपया फूंका गया लेकिन दिल्ली के वोटरों ने जदयू उम्मीदवारों की जमानत जब्त कर दी।

आज फिर सुमो की पोल खोलेंगे मनोज झा

पटना(अपना बिहार, 25 अप्रैल 2017) - सुशील मोदी उन तथ्यों को सनसनी बनाकर पेश कर रहे हैं जो पहले से ही सरकार एवं जनता के बीच है। हम उन तथ्यों को सामने ला रहे हैं जिन्हें श्री मोदी ने जानबुझकर रहस्य बना रखा है और जनता के साथ बेईमानी की है। राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि श्री मोदी अब यह समझ चुके हैं कि उन्होंने रांग नंबर डायल कर दिया है। उन्होंने कहा कि राजद अब श्री मोदी के सारे काले कारनामों की पोल जनता के सामने खोलेगा। उन्होंने कहा कि मंगलवार को वे एक बार फिर श्री मोदी के द्वारा किये गये बड़े घोटाले की पोल खोलेंगे।

राजद के आरोपों को सुमो ने नकारा, कहा - मेरा काम राजनीति है कोई व्यवसाय नहीं

पटना(अपना बिहार, 25 अप्रैल 2017) - राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. मनोज झा द्वारा आशियाना होम्स एवं मनी लॉन्ड्रिंग के खुलासे के बाद बैकफुट पर आते हुए सोमवार को भाजपा के नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि उनका काम राजनीति करना है न कि कोई व्यवसाय। संवाददाता सम्मेलन में श्री मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद अब उनके रिश्तेदारों पर दबाव बना रहे हैं ताकि वे उनका मुंह बंद कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि इधर-उधर की बातों को छोड़ श्री प्रसाद को उनके सवालों का जवाब देना चाहिए।

राजद प्रवक्ता द्वारा लगाये गये आरोपों के जवाब में श्री मोदी ने कहा कि वे स्वयं किसी भी कंपनी में न तो हिस्सेदार हैं और न ही निदेशक। जिन कंपनियों के बारे में राजद द्वारा आरोप लगाया जा रहा है, उन सवालों का जवाब उनके मालिक ही दे सकते हैं। उन्होंने एक बार फिर कहा कि श्री प्रसाद एबी एक्सपोर्ट्स के बारे में बताना चाहिए कि इस कंपनी में 98 फीसदी शेयर तेजस्वी यादव का है। क्या श्री प्रसाद इस सच से इन्कार करेंगे? बताते चलें कि बीते रविवार को राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा और पूर्व सांसद जगदानंद सिंह ने श्री मोदी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने उपमुख्यमंत्रित्व काल में अपने रिश्तेदारों की कंपनी को आर्थिक मदद पहुंचायी थी। राजद नेताओं ने यह भी आरोप लगाया था कि श्री मोदी का संबंध काले धन को सफेद करने वाली कंपनियों से जुड़ा रहा है।

राजनीति को गंदा मत करिए मोदी जी, जगदानंद सिंह ने दी सलाह

पटना(अपना बिहार, 25 अप्रैल 2017) - राजद के कद्दावर नेता व पन्द्रह वर्षों तक राजद सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे पूर्व सांसद जगदानंद सिंह ने सोमवार को भाजपा नेता सुशील मोदी को गंदी राजनीति से बाज आने की सलाह दी। राजद के प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि चिड़ियाघर प्रशासन द्वारा मिट्टी खरीद मामले की जांच को खारिज करने से पहले श्री मोदी को वह वक्त याद करना चाहिए जब वे स्वयं वन एवं पर्यावरण मंत्री थे। उन्होंने कहा कि आजादी के पहले से वन एवं पर्यावरण विभाग बिना टेंडर के की कार्य करता आया है।

श्री सिंह ने कहा कि वे स्वयं भी सूबे में वन एवं पर्यावरण विभाग के मंत्री रहे हैं। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद वर्ष 1955 में इस संबंध में यह सवाल उठाया गया था कि वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा बिना टेंडर के ही कार्य क्यों कराया जाता है। लेकिन तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा तय किये गये मानदंडों के आधार पर ही आजतक विभाग द्वारा कार्यों का निष्पादन होता है।

पूर्व सांसद ने कहा कि चिड़ियाघर में मिट्टी की आपूर्ति आवश्यक कार्य के लिए की गयी थी और यह सरकारी जांच में स्पष्ट है। रही बात बिना टेंडर के मिट्टी आपूर्ति की तो यह विभाग की परंपरा के मुताबिक है। उन्होंने कहा कि यदि यह गलत है तो श्री मोदी के मंत्रित्व के काल में वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा कुल 175 करोड़ रुपए खर्च किये गये, क्या वह भी घोटाला था। श्री सिंह ने कहा कि श्री मोदी गंदी राजनीति कर रहे हैं। उन्हें इससे बचना चाहिए।

आंदोलनरत शिक्षक अभ्यर्थियों की मांगें माने सरकार : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 25 अप्रैल 2017) - विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि टीईटी-एसटीईटी के उत्र्तीण अभ्यर्थियों की बहाली सरकार ने अभी तक नहीं की है। साथ ही विभिन्न संगठन जो हड़ताल पर हैं, सरकार बुला कर उन से वार्ता कर उनकी मांगों को जल्द से जल्द मान लें। बिहार विद्याालय परीक्षा समिति के द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी-एसटीईटी) में उत्र्तीण अभ्यर्थियों का सरकार ने नियोजन नहीं किया, जिस कारण जो सभी सड़कों पर हैं। बीएसएससी परीक्षार्थियों ने अपने रिजल्ट की मांग को लेकर आज राजधानी में अर्द्धनग्न प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता के बरक्स बिहार के सवाल

- नवल किशोर कुमार

पटना । नीति आयोग के शासी निकाय की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जहां एक ओर बिहार के हक का सवाल उठाया तो दूसरी ओर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही विषमता को लेकर केंद्र को चेताया भाी। अपने संबोधन में श्री कुमार ने राष्ट्रीय स्तर पर बन रही अपनी राजनीतिक छवि को नया आयाम भी दिया। मसलन उन्होंने कहा कि कि बदले हुए आर्थिक एवं सामाजिक परिवेश में देश के विकास के लिए समावेशी सोच एवं दृष्टि की आवश्यकता है। श्री कुमार के मुताबिक प्रत्येक भारतीय को आवश्यक रूप से प्रतिष्ठापूर्ण और आत्मसम्मान से जीवन जीने का अवसर उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित करना हम सबका कर्तव्य है। सतत विकास के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लघु, मध्यम एवं दीर्घकालीन रणनीति का सूत्रण किया जाना चाहिए जो राज्यों के बीच असमानता के स्तर पर आधारित हो। इससे सार्वभौमिक, एकीकृत, रूपान्तरित एवं आकांक्षात्मक विकास की लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय विषमताओं का सवाल पूरी मजबूती के साथ उठाया और कहा कि यद्यपि 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर सभी राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गयी है, परन्तु आयोग द्वारा राज्यों के बीच क्षैतिज वितरण के लिए जो मानक तय किये गये हैं, उसके चलते विभिन्न राज्यों पर पड़ रहे प्रभाव में बहुत ज्यादा भिन्नता है। उदाहरण के लिए बिहार को 13वें वित्त आयोग के फामूर्ले के आधार पर राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी 32 प्रतिशत रहने पर भी पूर्व के वर्ष के वृद्धि दर (15 प्रतिशत) के आधार पर वित्तीय वर्ष 2015-16 में 48,118 करोड़ रुपए की प्राप्ति का आकलन था। नये फामूर्ले पर बिहार को वित्तीय वर्ष 2015-16 में 50,748 करोड़ रुपए की प्राप्ति केन्द्रीय करों के हिस्से के रूप में होगी। इस प्रकार बिहार के लिए मात्र 5 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी में बढ़ोतरी करीब 30 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के इस अत्यंत असमान प्रभाव को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।

बहरहाल श्री कुमार के इस चिंता से केंद्र सरकार को स्वयं को अलग नहीं करना चाहिए कि राज्यों के बीच निधि के बँटवारा हेतु 14वें वित्त आयोग ने जो फार्मूला दिया है उसके आधार पर कुल राशि में बिहार का हिस्सा 10.9 प्रतिशत से घटकर 9.665 प्रतिशत हो गया है। मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि बिहार भौतिक एवं सामाजिक आधारभूत संरचना की दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा है और यहॉं की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। बिहार राज्य की इन विशेष आवश्यकताओं को भी देखे जाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में केन्द्र सरकार द्वारा गठित रघुराम राजन समिति की अनुशंसाओं का सवाल भी उठाया। इस समीति ने राज्यों के लिए समग्र विकास सूचकांक प्रस्तुत किया था एवं जिसके अनुसार देश के 10 सर्वाधिक पिछड़े राज्यों को चिन्ह्ति किया गया था। इन राज्यों में बिहार भी सम्मिलित है। प्रतिवेदन में उल्लेखित था कि सर्वाधिक पिछड़े राज्यों की विकास की गति बढ़ाने के लिये केन्द्र सरकार अन्य रूप में केन्द्रीय सहायता उपलब्ध करा सकती है। इस पृष्ठभूमि में हमारा अनुरोध है कि केन्द्र सरकार, सर्वाधिक पिछड़े राज्यों के लिये विभिन्न केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में केन्द्रांश के प्रावधान को 90 प्रतिशत करे ताकि इन राज्यों को केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में राज्याशों की प्रतिबद्धताओं में बचत हो सकेगी एवं इन्हें अपने संसाधनों का उपयोग अन्य विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं में करने का अवसर मिल सकेगा।

बिहार को उसका हक दे केंद्र, नीति आयोग की बैठक में नीतीश ने दी गुजरात नहीं, पूरे देश का ध्यान रखने की सलाग

पटना(अपना बिहार, 24 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से बिहार को उसका वाजिब हक देने की मांग की। साथ में उन्होंने कहा कि बदले हुए आर्थिक एवं सामाजिक परिवेश में देश के विकास के लिए समावेशी सोच एवं दृष्टि की आवश्यकता है। श्री कुमार रविवार को राष्ट्रपति भवन के प्रेक्षागृह में आयोजित नीति आयोग के शासी परिषद् की तीसरी बैठक को सम्बोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को आवश्यक रूप से प्रतिष्ठापूर्ण और आत्मसम्मान से जीवन जीने का अवसर उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित करना हम सबका कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लघु, मध्यम एवं दीर्घकालीन रणनीति का सूत्रण किया जाना चाहिए जो राज्यों के बीच असमानता के स्तर पर आधारित हो। इससे सार्वभौमिक, एकीकृत, रूपान्तरित एवं आकांक्षात्मक विकास की लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती है।

नीति आयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि भारत के संघीय ढाँचे में सभी राज्यों की पहल एवं सहभागिता से समस्याओं का निराकरण करने तथा लोकोपयोगी नीतियों के क्रियान्वयन के लिए बेहतर समन्वय का माहौल पैदा करने में नीति आयोग अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि यह बैठक हमें यह अवसर प्रदान करती है कि हम अपनी समस्याओं पर एक मंच पर विचार विमर्श करें और उनका समाधान ढूंढे। राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं, नीतियों तथा क्षेत्रों की रणनीतियों के साथ-साथ राज्यों द्वारा उठाये जा रहे सामयिक विषयों पर सकारात्मक चर्चा हो। केन्द्र तथा राज्यों के बीच महत्वपूर्ण विषयों पर आम सहमति बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि यद्यपि 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर सभी राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गयी है, परन्तु आयोग द्वारा राज्यों के बीच क्षैतिज वितरण के लिए जो मानक तय किये गये हैं, उसके चलते विभिन्न राज्यों पर पड़ रहे प्रभाव में बहुत ज्यादा भिन्नता है। उदाहरण के लिए बिहार को 13वें वित्त आयोग के फार्मूले के आधार पर राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी 32 प्रतिशत रहने पर भी पूर्व के वर्ष के वृद्धि दर (15 प्रतिशत) के आधार पर वित्तीय वर्ष 2015-16 में 48,118 करोड़ रूपये की प्राप्ति का आकलन था। नये फार्मूले पर बिहार को वित्तीय वर्ष 2015-16 में 50,748 करोड़ रूपये की प्राप्ति केन्द्रीय करों के हिस्से के रूप में होगी। इस प्रकार बिहार के लिए मात्र 5 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी में बढ़ोतरी करीब 30 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के इस अत्यंत असमान प्रभाव को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।

बिहार जैसे पिछड़े राज्य के लिए यह चिन्ता का विषय है कि राज्यों के बीच निधि के बॅंटवारा हेतु 14वें वित्त आयोग ने जो फार्मूला दिया है उसके आधार पर कुल राशि में बिहार का हिस्सा 10.9 प्रतिशत से घटकर 9.665 प्रतिशत हो गया है। मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि बिहार भौतिक एवं सामाजिक आधारभूत संरचना की दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा है और यहाॅं की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। बिहार राज्य की इन विशेष आवश्यकताओं को भी देखे जाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में आधारभूत संरचना की कमी को देखते हुए भारत सरकार द्वारा 12वीं पंचवर्षीय योजना में विशेष योजना (बी॰आर॰जी॰एफ॰) के तहत 12000 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई थी। इसमे नयी परियोजनाओं के लिये 10500 करोड़ रूपये तथा पुरानी चालू योजनाओं को पूरा करने के लिये 1500 करोड़ रूपये कर्णांकित किये गये थे। इसमें 9597.92 करोड़ रूपये की नयी परियोजनाओं की स्वीकृति नीति आयोग द्वारा दी गयी थी। अभी भी 902.08 करोड़ रूपये की राशि के विरूद्ध परियोजनाओं की स्वीकृति हेतु नीति आयोग के पास प्रस्ताव लंबित है। इसके विरूद्ध ऊर्जा प्रक्षेत्र की स्वीकृत परियोजनाओं में लागत में हुई वृद्धि से संबंधित 856.81 करोड़ रूपये का प्रस्ताव तथा पथ प्रक्षेत्र की एक परियोजना-लागत राशि 391 करो़ड़ रूपये का प्रस्ताव नीति आयोग के स्तर पर स्वीकृति हेतु लंबित है। मुख्यमंत्री ने बीआरजीएफ के अन्तर्गत लंबित राशि को शीघ्र विमुक्त करने का अनुरोध किया ताकि योजनाओं को ससमय पूरा किया जा सके।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने गैर-उग्रवाद प्रभावित जिलों में भी 250 से अधिक आबादी वाले बसावटों को जोड़ने की योजना को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में शामिल करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में दोहरे अंक का विकास दर हासिल करने के बावजूद भी हम विकास के प्रमुख मापदंडों मसलन गरीबी रेखा, प्रति व्यक्ति आय, औद्योगीकरण और सामाजिक एवं भौतिक आधारभूत संरचना में राष्ट्रीय औसत से नीचे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि हमारी तरह कई अन्य राज्य भी पिछड़े हैं। ऐसे पिछड़े राज्यों को एक समय सीमा में पिछड़ेपन से उबारने और राष्ट्रीय औसत के समकक्ष लाने के लिए सकारात्मक नीतिगत पहल की जरूरत है। जिन राज्यों को विशेष श्रेणी के राज्य का दर्जा मिला है वे विकास के मामले में प्रगति किये हैं। अतः पिछड़ेपन से निकल कर विकास के राष्ट्रीय औसत स्तर को प्राप्त करने के लिए बिहार को और इस जैसे अन्य पिछड़े राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमने लगातार केन्द्र सरकार के समक्ष अपनी मांग को रखा है।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने इसी संदर्भ में केन्द्र सरकार द्वारा गठित रघुराम राजन समिति की अनुशंसाओं की तरफ ध्यान आकृष्ट किया। इस समीति ने राज्यों के लिए समग्र विकास सूचकांक प्रस्तुत किया था एवं जिसके अनुसार देश के 10 सर्वाधिक पिछड़े राज्यों को चिन्ह्ति किया गया था। इन राज्यों में बिहार भी सम्मिलित है। प्रतिवेदन में उल्लेखित था कि सर्वाधिक पिछड़े राज्यों की विकास की गति बढ़ाने के लिये केन्द्र सरकार अन्य रूप में केन्द्रीय सहायता उपलब्ध करा सकती है। इस पृष्ठभूमि में हमारा अनुरोध है कि केन्द्र सरकार, सर्वाधिक पिछड़े राज्यों के लिये विभिन्न केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में केन्द्रांश के प्रावधान को 90 प्रतिशत करे ताकि इन राज्यों को केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में राज्याशों की प्रतिबद्धताओं में बचत हो सकेगी एवं इन्हें अपने संसाधनों का उपयोग अन्य विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं में करने का अवसर मिल सकेगा। साथ ही इन राज्यों को केन्द्रीय प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों में छूट मिलने से निजी निवेश के प्रवाह को गति मिलेगी तथा रोजगार के नए अवसर सृजित हो सके। केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में मार्गदर्शिका के अनुसार लोगों को योजना के क्रियान्वयन में लगाया जाता है और इसके लिए उन्हें मानदेय दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर समेकित बाल विकास कार्यक्रम के तहत आंगनवाड़ी सेविका/सहायिका, मध्याह्न भोजन के तहत रसोईया आदि। समय-समय पर इनके द्वारा अपने मानदेय को बढ़ाने की माँग की जाती है। ऐसे लोग बड़ी संख्या में होने के कारण संगठित रूप से भी अपनी माँगों को रखते है एवं पूरा नही होने पर विरोध भी करते है। इस कारण योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और योजनाओं के मूल उद्देश्यों पर मानदेय संबंधी मामला हावी हो जाता है। कुछ मामलों में केन्द्र सरकार द्वारा लम्बी अवधि से मानदेय में वृद्धि नही करने के कारण, केन्द्र द्वारा निर्धारित मानदेय के अतिरिक्त बिहार जैसे अल्प संसाधन वाले राज्य कोे अपने संसाधनों से भी राशि देनी पड़ रही है। इस संबंध में माननीय मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि अगर केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में ऐसे लोगों को लम्बी अवधि तक लगाया जाता है तो इनके मानदेय में एक निर्धारित अन्तराल पर यथोचित वृद्धि की जानी चाहिए और इसका पूर्ण वित्तीय भार केन्द्र सरकार को वहन करना चाहिए।

खुलासा : दलित होने का दंश झेल रहे बीएसएससी के पूर्व अध्यक्ष सुधीर कुमार, हर हाल में दोषी साबित करने में जुटी एसआईटी

पटना(अपना बिहार, 24 अप्रैल 2017) - बीएसएससी पेपर लीक मामले में जांच कर रही एसआईटी खुद ही सवालों के घेरे में उलझ गयी है। अब यह सवाल महत्वपूर्ण होता जा रहा है कि निलंबित अध्यक्ष सुधीर कुमार को हर हाल में दोषी साबित करने में क्यों जुटी है एसआईटी। जिस तरह की कोशिशें अब तक एसआईटी ने श्री कुमार के मामले में किया है, उससे यही लगता है कि वह इसी बहाने दलितों और पिछड़ों को महत्वपूर्ण जिम्मेवारी के योग्य नहीं हैं, साबित करना चाहती है।

खैर सुधीर कुमार से सोमवार को फुलवारी जेल में जाकर एसआईटी पूछताछ कर सकती है। पूछताछ करने के लिए उसे निगरानी कोर्ट से इजाजत मिल गई है। पहले वह श्री कुमार को एसआईटी रिमांड पर लेकर पूछताछ करना चाहती थी मगर उसे कोर्ट से रिमांड पर लेने की इजाजत नहीं मिली थी।

दिलचस्प यह है कि इस पूरे मामले में पुलिस ने दिल्ली के उस प्रोफ़ेसर के द्वारा कोर्ट में दिये गये इकबालिया बयान को सच मान लिया है, जिसके बारे में श्री कुमार ने प्रश्नपत्र सेट करवाने की बात कही थी। मिली जानकारी के अनुसार उस प्रोफ़ेसर ने कोर्ट में श्री कुमार के कथन को गलत करार दिया। जबकि यह जानना अत्यंत ही सहज है कि बीएसएससी का अध्यक्ष रहते हुए श्री कुमार ने किस व्यक्ति को प्रश्नपत्र सेट करने की जिम्मेवारी दी। मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने एसआईटी को इस बाबत दस्तावेज भी दिये। लेकिन कोर्ट में उक्त प्रोफ़ेसर के इन्कार के बाद एसआईटी अब एक बार फ़िर से सुधीर कुमार पर शिकंजा कसना चाहती है।

एसआईटी ने यह मान लिया है कि सुधीर ने प्रश्न-पत्र सेट करने वाले प्रोफेसर का नाम व पता गलत बताया। उसे शक है कि ष्री कुमार ने प्रश्न-पत्र अनंतप्रीत सिंह बरार से ही सेट करवाया होगा। उसका कहना है कि श्री बरार से श्री कुमार की काफी पटती थी। प्रश्न-पत्रों का आंसर सीट बरार ने ही तैयार किया था। बाद में बरार के दिए आंसर सीट को सुधीर का भांजा आशीष हजारीबाग स्थित घर से लाकर वाट्सएप पर वायरल कर दिया था।

यानी एसआईटी की पूरी कहानी तैयार है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब इस पूरे मामले में एसआईटी के पास पूरी जानकारी है फ़िर वह किस बात का इंतजार कर रही है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि एसआईटी उनलोगों को माफ़ कर देना चाहती है जिनके बारे में सच्चाई पहले ही सामने आ चुकी है। खासकर उस सफ़ेदपोश की सच्चाई जो सीएम के दायें हाथ माने जाते हैं।

बिहार को उसका हक दे केंद्र, नीति आयोग की बैठक में नीतीश ने दी गुजरात नहीं, पूरे देश का ध्यान रखने की सलाग

पटना(अपना बिहार, 24 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से बिहार को उसका वाजिब हक देने की मांग की। साथ में उन्होंने कहा कि बदले हुए आर्थिक एवं सामाजिक परिवेश में देश के विकास के लिए समावेशी सोच एवं दृष्टि की आवश्यकता है। श्री कुमार रविवार को राष्ट्रपति भवन के प्रेक्षागृह में आयोजित नीति आयोग के शासी परिषद् की तीसरी बैठक को सम्बोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को आवश्यक रूप से प्रतिष्ठापूर्ण और आत्मसम्मान से जीवन जीने का अवसर उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित करना हम सबका कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लघु, मध्यम एवं दीर्घकालीन रणनीति का सूत्रण किया जाना चाहिए जो राज्यों के बीच असमानता के स्तर पर आधारित हो। इससे सार्वभौमिक, एकीकृत, रूपान्तरित एवं आकांक्षात्मक विकास की लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती है।

नीति आयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि भारत के संघीय ढाँचे में सभी राज्यों की पहल एवं सहभागिता से समस्याओं का निराकरण करने तथा लोकोपयोगी नीतियों के क्रियान्वयन के लिए बेहतर समन्वय का माहौल पैदा करने में नीति आयोग अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि यह बैठक हमें यह अवसर प्रदान करती है कि हम अपनी समस्याओं पर एक मंच पर विचार विमर्श करें और उनका समाधान ढूंढे। राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं, नीतियों तथा क्षेत्रों की रणनीतियों के साथ-साथ राज्यों द्वारा उठाये जा रहे सामयिक विषयों पर सकारात्मक चर्चा हो। केन्द्र तथा राज्यों के बीच महत्वपूर्ण विषयों पर आम सहमति बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि यद्यपि 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर सभी राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गयी है, परन्तु आयोग द्वारा राज्यों के बीच क्षैतिज वितरण के लिए जो मानक तय किये गये हैं, उसके चलते विभिन्न राज्यों पर पड़ रहे प्रभाव में बहुत ज्यादा भिन्नता है। उदाहरण के लिए बिहार को 13वें वित्त आयोग के फार्मूले के आधार पर राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी 32 प्रतिशत रहने पर भी पूर्व के वर्ष के वृद्धि दर (15 प्रतिशत) के आधार पर वित्तीय वर्ष 2015-16 में 48,118 करोड़ रूपये की प्राप्ति का आकलन था। नये फार्मूले पर बिहार को वित्तीय वर्ष 2015-16 में 50,748 करोड़ रूपये की प्राप्ति केन्द्रीय करों के हिस्से के रूप में होगी। इस प्रकार बिहार के लिए मात्र 5 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी में बढ़ोतरी करीब 30 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के इस अत्यंत असमान प्रभाव को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।

बिहार जैसे पिछड़े राज्य के लिए यह चिन्ता का विषय है कि राज्यों के बीच निधि के बॅंटवारा हेतु 14वें वित्त आयोग ने जो फार्मूला दिया है उसके आधार पर कुल राशि में बिहार का हिस्सा 10.9 प्रतिशत से घटकर 9.665 प्रतिशत हो गया है। मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि बिहार भौतिक एवं सामाजिक आधारभूत संरचना की दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा है और यहाॅं की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। बिहार राज्य की इन विशेष आवश्यकताओं को भी देखे जाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में आधारभूत संरचना की कमी को देखते हुए भारत सरकार द्वारा 12वीं पंचवर्षीय योजना में विशेष योजना (बी॰आर॰जी॰एफ॰) के तहत 12000 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई थी। इसमे नयी परियोजनाओं के लिये 10500 करोड़ रूपये तथा पुरानी चालू योजनाओं को पूरा करने के लिये 1500 करोड़ रूपये कर्णांकित किये गये थे। इसमें 9597.92 करोड़ रूपये की नयी परियोजनाओं की स्वीकृति नीति आयोग द्वारा दी गयी थी। अभी भी 902.08 करोड़ रूपये की राशि के विरूद्ध परियोजनाओं की स्वीकृति हेतु नीति आयोग के पास प्रस्ताव लंबित है। इसके विरूद्ध ऊर्जा प्रक्षेत्र की स्वीकृत परियोजनाओं में लागत में हुई वृद्धि से संबंधित 856.81 करोड़ रूपये का प्रस्ताव तथा पथ प्रक्षेत्र की एक परियोजना-लागत राशि 391 करो़ड़ रूपये का प्रस्ताव नीति आयोग के स्तर पर स्वीकृति हेतु लंबित है। मुख्यमंत्री ने बीआरजीएफ के अन्तर्गत लंबित राशि को शीघ्र विमुक्त करने का अनुरोध किया ताकि योजनाओं को ससमय पूरा किया जा सके।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने गैर-उग्रवाद प्रभावित जिलों में भी 250 से अधिक आबादी वाले बसावटों को जोड़ने की योजना को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में शामिल करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में दोहरे अंक का विकास दर हासिल करने के बावजूद भी हम विकास के प्रमुख मापदंडों मसलन गरीबी रेखा, प्रति व्यक्ति आय, औद्योगीकरण और सामाजिक एवं भौतिक आधारभूत संरचना में राष्ट्रीय औसत से नीचे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि हमारी तरह कई अन्य राज्य भी पिछड़े हैं। ऐसे पिछड़े राज्यों को एक समय सीमा में पिछड़ेपन से उबारने और राष्ट्रीय औसत के समकक्ष लाने के लिए सकारात्मक नीतिगत पहल की जरूरत है। जिन राज्यों को विशेष श्रेणी के राज्य का दर्जा मिला है वे विकास के मामले में प्रगति किये हैं। अतः पिछड़ेपन से निकल कर विकास के राष्ट्रीय औसत स्तर को प्राप्त करने के लिए बिहार को और इस जैसे अन्य पिछड़े राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमने लगातार केन्द्र सरकार के समक्ष अपनी मांग को रखा है।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने इसी संदर्भ में केन्द्र सरकार द्वारा गठित रघुराम राजन समिति की अनुशंसाओं की तरफ ध्यान आकृष्ट किया। इस समीति ने राज्यों के लिए समग्र विकास सूचकांक प्रस्तुत किया था एवं जिसके अनुसार देश के 10 सर्वाधिक पिछड़े राज्यों को चिन्ह्ति किया गया था। इन राज्यों में बिहार भी सम्मिलित है। प्रतिवेदन में उल्लेखित था कि सर्वाधिक पिछड़े राज्यों की विकास की गति बढ़ाने के लिये केन्द्र सरकार अन्य रूप में केन्द्रीय सहायता उपलब्ध करा सकती है। इस पृष्ठभूमि में हमारा अनुरोध है कि केन्द्र सरकार, सर्वाधिक पिछड़े राज्यों के लिये विभिन्न केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में केन्द्रांश के प्रावधान को 90 प्रतिशत करे ताकि इन राज्यों को केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में राज्याशों की प्रतिबद्धताओं में बचत हो सकेगी एवं इन्हें अपने संसाधनों का उपयोग अन्य विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं में करने का अवसर मिल सकेगा। साथ ही इन राज्यों को केन्द्रीय प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों में छूट मिलने से निजी निवेश के प्रवाह को गति मिलेगी तथा रोजगार के नए अवसर सृजित हो सके। केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में मार्गदर्शिका के अनुसार लोगों को योजना के क्रियान्वयन में लगाया जाता है और इसके लिए उन्हें मानदेय दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर समेकित बाल विकास कार्यक्रम के तहत आंगनवाड़ी सेविका/सहायिका, मध्याह्न भोजन के तहत रसोईया आदि। समय-समय पर इनके द्वारा अपने मानदेय को बढ़ाने की माँग की जाती है। ऐसे लोग बड़ी संख्या में होने के कारण संगठित रूप से भी अपनी माँगों को रखते है एवं पूरा नही होने पर विरोध भी करते है। इस कारण योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और योजनाओं के मूल उद्देश्यों पर मानदेय संबंधी मामला हावी हो जाता है। कुछ मामलों में केन्द्र सरकार द्वारा लम्बी अवधि से मानदेय में वृद्धि नही करने के कारण, केन्द्र द्वारा निर्धारित मानदेय के अतिरिक्त बिहार जैसे अल्प संसाधन वाले राज्य कोे अपने संसाधनों से भी राशि देनी पड़ रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि अगर केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में ऐसे लोगों को लम्बी अवधि तक लगाया जाता है तो इनके मानदेय में एक निर्धारित अन्तराल पर यथोचित वृद्धि की जानी चाहिए और इसका पूर्ण वित्तीय भार केन्द्र सरकार को वहन करना चाहिए।

खुलासा : दलित होने का दंश झेल रहे बीएसएससी के पूर्व अध्यक्ष सुधीर कुमार, हर हाल में दोषी साबित करने में जुटी एसआईटी

पटना(अपना बिहार, 24 अप्रैल 2017) - बीएसएससी पेपर लीक मामले में जांच कर रही एसआईटी खुद ही सवालों के घेरे में उलझ गयी है। अब यह सवाल महत्वपूर्ण होता जा रहा है कि निलंबित अध्यक्ष सुधीर कुमार को हर हाल में दोषी साबित करने में क्यों जुटी है एसआईटी। जिस तरह की कोशिशें अब तक एसआईटी ने श्री कुमार के मामले में किया है, उससे यही लगता है कि वह इसी बहाने दलितों और पिछड़ों को महत्वपूर्ण जिम्मेवारी के योग्य नहीं हैं, साबित करना चाहती है।

खैर सुधीर कुमार से सोमवार को फुलवारी जेल में जाकर एसआईटी पूछताछ कर सकती है। पूछताछ करने के लिए उसे निगरानी कोर्ट से इजाजत मिल गई है। पहले वह श्री कुमार को एसआईटी रिमांड पर लेकर पूछताछ करना चाहती थी मगर उसे कोर्ट से रिमांड पर लेने की इजाजत नहीं मिली थी।

दिलचस्प यह है कि इस पूरे मामले में पुलिस ने दिल्ली के उस प्रोफ़ेसर के द्वारा कोर्ट में दिये गये इकबालिया बयान को सच मान लिया है, जिसके बारे में श्री कुमार ने प्रश्नपत्र सेट करवाने की बात कही थी। मिली जानकारी के अनुसार उस प्रोफ़ेसर ने कोर्ट में श्री कुमार के कथन को गलत करार दिया। जबकि यह जानना अत्यंत ही सहज है कि बीएसएससी का अध्यक्ष रहते हुए श्री कुमार ने किस व्यक्ति को प्रश्नपत्र सेट करने की जिम्मेवारी दी। मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने एसआईटी को इस बाबत दस्तावेज भी दिये। लेकिन कोर्ट में उक्त प्रोफ़ेसर के इन्कार के बाद एसआईटी अब एक बार फ़िर से सुधीर कुमार पर शिकंजा कसना चाहती है।

एसआईटी ने यह मान लिया है कि सुधीर ने प्रश्न-पत्र सेट करने वाले प्रोफेसर का नाम व पता गलत बताया। उसे शक है कि ष्री कुमार ने प्रश्न-पत्र अनंतप्रीत सिंह बरार से ही सेट करवाया होगा। उसका कहना है कि श्री बरार से श्री कुमार की काफी पटती थी। प्रश्न-पत्रों का आंसर सीट बरार ने ही तैयार किया था। बाद में बरार के दिए आंसर सीट को सुधीर का भांजा आशीष हजारीबाग स्थित घर से लाकर वाट्सएप पर वायरल कर दिया था।

यानी एसआईटी की पूरी कहानी तैयार है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब इस पूरे मामले में एसआईटी के पास पूरी जानकारी है फ़िर वह किस बात का इंतजार कर रही है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि एसआईटी उनलोगों को माफ़ कर देना चाहती है जिनके बारे में सच्चाई पहले ही सामने आ चुकी है। खासकर उस सफ़ेदपोश की सच्चाई जो सीएम के दायें हाथ माने जाते हैं।

विधान परिषद में महिला पार्षद से छेड़छाड़ करने वाले के बुलावे पर पटना आयेंगी पीएम की परित्यकता पत्नी

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - बजट सत्र के दौरान लोजपा की विधान पार्षद नूतन सिंह के साथ छेड़छाड़ करने वाले भाजपाई पार्षद लाल बाबू प्रसाद के बुलावे पर पीएम नरेंद्र मोदी की परित्यकता पत्नी जसोदा मोदी बेगूसराय में साहू-तेली समाज के एक कार्यक्रम को संबोधित करेंगी। इस आशय की जानकारी स्वयं लाल बाबू प्रसाद ने दी। बताते चलें कि यह पहला अवसर है जब जसोदा मोदी बिहार आ रही हैं। उनके आगमन को लेकर सूबे के भाजपाइयों में बहुत उत्साह देखा जा रहा है।

मई के अंत में आएगा इंटर का रिजल्ट

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के इंटर की कॉपियों का मूल्यांकन काफी तेजी से हो रहा है। कई जिलों से मूल्यांकन समाप्त होने की सूचना मिल रही है। ऐसे में बोर्ड की कोशिश है कि मई अंतिम सप्ताह तक इंटरमीडिएट का रिजल्ट प्रकाशित कर दिया जाए। भभुआ में मूल्यांकन समाप्त हो गया है। इसी तरह से पटना के आठों केन्द्रों पर मूल्यांकन कार्य समाप्ति की ओर है। कुछ जगह जहां कॉपियों बची हुई हैं, वहां शिक्षकों को भेजा जा रहा है। पटना के केन्द्रों पर मुख्य तौर पर भौतिकी और अंग्रेजी की कॉपियां बची हुई हैं। बीएन कॉलेजिएट स्कूल में अंग्रेजी की कॉपियों का मूल्यांकन समाप्त हो गया है। यहां के अंग्रेजी के शिक्षकों को जेडी वीमेंस कॉलेज भेजा गया है। कॉलेज आॅफ कॉमर्स में भी शिक्षकों को लगाया गया है। यहां पर अंग्रेजी और भौतिकी में अधिक कॉपियां बची हुई थीं।

अब बोर्ड को उम्मीद है कि तय सीमा के अंदर कॉपियों का मूल्यांकन समाप्त हो जाएगा। अगर कुछ भाषा विषय की कॉपियों के मूल्यांकन में थोड़ा विलंब होगा। हालांकि उम्मीद है कि माह के अंत तक कॉपियों का मूल्यांकन समाप्त हो जाएगा। मई के तीसरे सप्ताह या अंतिम सप्ताह तक रिजल्ट आ जाएगा।

धान घोटाले के छह साल बाद खुली सरकार की नींद, पटना हाईकोर्ट के न्यायादेश के बाद पहल, एसआईटी का गठन

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - धान के बदले चावल देने में घोटाला करने वाले मिलरों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है। पटना उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित एसआईटी का प्रमुख एडीजी सीआईडी विनय कुमार को बनाया गया है। सीआईडी के अधीन गठित एसआईटी में सात पुलिस अफसरों को शामिल किया गया है। इनमें एडीजी के अलावा आईजी अजिताभ कुमार, एसपी नवीन चंद्र झा और संजय कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार सिन्हा के अलावा दो डीएसपी सोनेलाल सिंह और वीरेन्द्र कुमार सिन्हा को रखा गया है।

धान के बदले चावल की आपूर्ति में गड़बड़ी से जुड़ा मामला वर्ष 2011-12, 2012-13 और 2013-14 का है। इस दौरान राज्यभर में मिलरों से संबंधित 1202 मामले दर्ज किए गए हैं। पटना उच्च न्यायालय के आदेश के तहत एसआईटी में शामिल अधिकारियों का तबादला बगैर कोर्ट की इजाजत के नहीं होगा। मामले की जांच सही ढंग से और जल्द कराने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी दो तरह से मामलों की जांच करेगी। एक करोड़ रुपए से ऊपर की गड़बड़ी वाले मामलों का पर्यवेक्षण, जबकि इससे कम के मामलों की एसआईटी मॉनिटरिंग करेगी। इसके अलावा जिन मामलों का अनुसंधान बंद हो चुका है, उन मामलों को दोबारा खोला जाएगा। केस के अनुसंधानकर्ता जिला पुलिस के इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के ही अधिकारी होंगे। एसआईटी को इस मामले से जुड़ी तमाम एजेंसियों को कागजात उपलब्ध कराने के साथ जांच में पूरा सहयोग करना है।

जंग के दो वर्ष पहले ही चाचा-भतीजी के बीच युद्धाभ्यास शुरू

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - वर्ष 2014 में राजद छोड़कर भाजपा में गये रामकृपाल यादव और उनकी मुंहबोली भतीजी यानी डा. मीसा भारती के बीच दो वर्ष बाद होने वाले राजनीतिक जंग की तैयारी दोनों ओर से शुरू हो गयी है। बताते चलें कि वर्ष 2014 के चुनाव में डा. मीसा भारती को श्री यादव के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। बाद में उन्हें नरेंद्र मोदी ने लालू प्रसाद का साथ छोड़ने एवं उनकी बेटी को हराने का इनाम देते हुए अपने मंत्रिमंडल में बतौर राज्यमंत्री शामिल किया।

हार के बाद भी डा. भारती ने पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र में अपना राजनीतिक संघर्ष जारी रखा। बाद में जब वर्ष 2015 में राजद को विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने का मौका और वह सरकार में शामिल हुई तब यह अनुमान लगाया जा रहा था कि नीतीश मंत्रिमंडल में डा. भारती को भी शामिल किया जाएगा। लेकिन अपने इरादों के प्रति अटल लालू प्रसाद की सबसे बड़ी बेटी ने राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने के कयासबाजियों को धत्ता बताते हुए अपनी राजनीति को जारी रखा। इसका इनाम राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने उन्हें राज्यसभा भेजकर दिया।

हालांकि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से डा. भारती का पाटलिपुत्र की जनता से मिलना-जुलना कम ही रहा। लेकिन उन्होंने अब इसकी भरपाई करना शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो उन्होंने अपने आपको पाटलिपुत्र की जनता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। वहीं सूत्रों की मानें तो उनके चाचा यानी रामकृपाल यादव भी इस बार जमकर तैयारी में जुटे हैं। इसकी वजह संभवत: यह कि पिछली बार नरेंद्र मोदी की लहर ने उन्हें विजयश्री दिलवा दिया था और तब लालू प्रसाद सत्ता से दूर भी थे। लेकिन इस बार स्थितियां बदल सकती हैं। लिहाजा चाचा और भतीजी दोनों के बीच चुनावी युद्ध का पूर्वाभ्यास जारी है।

जेल से निकलते ही लालू पर बरसे पप्पू

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - जेल से बाहर निकलते ही जन अधिकार पार्टी (लो) के संरक्षक और सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उनके पुत्रों पर हमला बोला। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ साजिश रचने वालों के विरुद्ध वे 5 करोड़ की मानहानि का मुकदमा करेंगे। केंद्रीय कारा बेउर से बाहर निकलने के बाद पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है कि थाने से बेल मिलने वाले मुकदमे में हाईकोर्ट से जमानत लेनी पड़ी। श्री यादव ने कहा कि वे कोर्ट का सम्मान करते हैं और कोर्ट पर उन्हें पूरा भरोसा है।

सांसद ने आरोप लगाया कि रेलमंत्री रहते हुए लालू यादव ने अरबों की बेनामी संपत्ति अर्जित की। रेलमंत्री के अधिकार का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने अपने पुत्र और अन्य परिजनों के नाम से बेनामी संपत्ति अर्जित की। सांसद श्री यादव ने कहा कि गरीब परिवार से आने वाले लालू यादव ने सत्ता में आते ही अरबों की संपत्ति कैसे अर्जित कर ली, इसकी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त, आर्थिक अपराध एवं प्रवर्तन निदेशालय और रेलमंत्री को अलग-अलग भेजे पत्रों की कॉपी मीडिया को जारी करते हुए कहा कि काली कमाई को सफेद करने वाले लालू यादव और उनके परिजनों की साजिश का खुलासा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव ने चुनाव के दौरान दायर अपने शपथ पत्र में संपत्ति से जुड़े तथ्यों को छुपाया था। शपथ पत्र में गलत और अधूरा ब्योरा देने के कारण तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के निर्वाचन को रद करना चाहिए।

राष्ट्रपति चुनाव के सिलसिले में सोनिया गांधी से मिले सीएमम जदयू नेता केसी त्यागी का बयान

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस बैठक में दोनों के बीच राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर भी चर्चा हुई। विपक्ष द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए एक ही उम्मीदवार खड़ा करने पर बातचीत हुई। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने बताया कि हमारी पार्टी विपक्ष की एकजुटता की पक्षधर है। उन्होंने कहा, 'जेडीयू का मानना है कि विपक्ष को मिलकर एक राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार की घोषणा करनी चाहिए। विपक्ष की सबसे वरिष्ठ नेता होने की वजह से सोनिया गांधी को आगे आकर राजनैतिक दलों से बातचीत करनी चाहिए।'

श्री त्यागी ने बताया कि नीतीश कुमार ने इस संबंध में एनसीपी और लेफ्ट पार्टियों से भी चर्चा की है। सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर तकरीबन आधे घंटे तक हुई दोनों के बीच मुलाकात को बेहतर रणनीति और समन्वय के लिए हुई बैठक बताया गया है। एक अन्य जेडीयू नेता ने नीतीश कुमार और सोनिया गांधी की मुलाकात को औपचारिक बताया है। उन्होंने कहा कि बिहार में कांग्रेस जेडीयू की सहयोगी है और पिछले कुछ दिनों से सोनिया गांधी की तबीयत भी खराब थी। इस वजह से यह मुलाकात हुई।

जल्द मिलेगा राज्य सरकार के कर्मियों को सातवें वेतन का लाभम पन्द्रह दिनों के अंदर राज्य सरकार की कमिटी सौंपेगी रिपोर्ट

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - राज्य सरकार के कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ देने के लिए गठित 'वेतन आयोग' ने तमाम कर्मचारी संगठनों और कर्मचारियों से दावा-आपत्ति की सुनवाई पूरी कर ली है. इसके साथ ही आयोग ने कर्मचारियों को सातवां वेतनमान का लाभ देने से संबंधित सभी पहलुओं पर विचार करते हुए रिपोर्ट तकरीबन तैयार कर ली है. 15 दिनों के अंदर इस रिपोर्ट को सरकार के पास सौंप देने की पूरी संभावना है. इसके बाद राज्य सरकार इसमें की गयी तमाम अनुशंसाओं पर गंभीरतापूर्वक मंथन करने के बाद इसे लागू करेगी. हालांकि यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि कुछ एक बातों को छोड़कर रिपोर्ट में उल्लेखित अन्य सभी बातों को लागू कर दिया जायेगा. इसमें सबसे अहम होगा, राज्य सरकार के कर्मचारियों को सातवां वेतनमान का लाभ देने से जुड़ी बात. कर्मचारियों को उनके मूल वेतन में 2.57 से गुना करने पर जो परिणाम आयेगा, इसके आधार पर ही इन्हें सातवां वेतनमान में वेतन बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा.

कर्मचारियों को जनवरी, 2016 से इसका लाभ नोशनल (अनुमानित) के रूप में तथा जनवरी, 2017 से इसका आर्थिक लाभ कर्मचारियों को मिलेगा. यानी सरकार जिस दिन से भी इसे लागू करने की घोषणा करेगी, जनवरी, 2017 से ही कर्मचारियों को एरियर जोड़कर दिया जायेगा. हालांकि इन्हें नोशनल के रूप में इसका लाभ मिलने से सर्विस बुक पर इन्हें जनवरी, 2016 से ही सेवाशर्त से जुड़े सभी लाभ मिलेंगे. इस आधार पर कई श्रेणी के कर्मचारियों को जुलाई, 2017 में एक प्रोन्नति का लाभ मिलेगा. केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में यहां के कर्मचारियों को करीब 12 महीने का वित्तीय स्तर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है. फिर भी इससे पहले जब राज्य सरकार ने पांचवां और छठवां वेतनमान की अनुशंसाएं लागू की थीं, तो राज्य कर्मचारियों को 15 महीने या इससे अधिक दिनों का नुकसान उठाना पड़ा था.

हालांकि इस बार आर्थिक रूप से नुकसान कम उठाना पड़ेगा. वेतन आयोग के समक्ष राज्य के 300 से अधिक कर्मचारी संगठनों और विभिन्न स्तर के कर्मचारियों ने अपनी बात रखी है. इनकी तरफ से प्राप्त तमाम दावा और आपत्तियों की सुनवाई करने के बाद वेतन आयोग ने इनकी कई बातों को अपनी रिपोर्ट में शामिल कर लिया है. आवेदन देने वालों में शिक्षकों के सबसे ज्यादा संगठन थे. इसके अलावा अन्य सभी वर्ग के कर्मचारियों के संगठन शामिल हैं. कई नियोजित कर्मियों के संगठनों ने नियमित वेतनमान या वेतन को सातवां वेतनमान की सिफारिशों के बराबर करने की मांग की है. अधिकांश की अनुशंसा रद्द कर दी गयी हैं.

बहरहाल सातवां वेतनमान के लाभ से पहले राज्य कर्मचारियों को चार फीसदी डीए (महंगाई भत्ता) का लाभ मिलने जा रहा है. राज्य सरकार ने इससे संबंधित रूपरेखा तैयार कर ली है और आगामी कैबिनेट में इस पर मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है. राज्य कर्मचारियों को डीए की मंजूरी मिलने के बाद यहां के कर्मचारियों को इसका लाभ 132 से बढ़कर 136 प्रतिशत हो जायेगा. कर्मचारियों का डीए 136 प्रतिशत हो जायेगा. केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को दो फीसदी डीए देने की घोषणा हाल में ही की है. इसी तर्ज पर राज्यकर्मियों को चार फीसदी डीए देने की घोषणा होने जा रही है.

वाणिज्य सह बीएड छात्रों के साथ भेदभाव नहीं करे सरकार : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - राज्य सरकार बिहार वाणिज्य स्नातक सह बीएड डिग्रीधारी छात्रों के साथ भेदभाव करना बंद करे। अपने आवास पर छात्रों को संबोधित करते हुए बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि सरकार ने जब शिक्षक पात्रता परीक्षा की अधिसूचना जारी की थी तब सभी संकाय के छात्रों को फार्म भरने की छूट थी, किन्तु उसके कुछ ही दिनों बाद नई अधिसूचना जारी किया गया जिसमें वाणिज्य उत्तीर्ण छात्रों को इस पात्रता परीक्षा से वंचित कर दिया गया जो वाणिज्य जैसे महत्तवपूर्ण विषय की गरिमा को धूमिल करता है । आज बिहार को छोड़कर अधिकांश राज्य सरकार द्वारा वाणिज्य सह बी एड उत्तीर्ण छात्रों को शिक्षक पात्रता परीक्षा में वर्ग 6-8 में मौका दिया जाता है । साथ ही केन्द्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा में भी वाणिज्य विषय को सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के योग्य माना जाता है । बिहार सरकार के द्वारा .टेट परीक्षा के माध्यम से अप्रशिक्षित अभ्यर्थियों को भी शिक्षक बना दिया गया। जब कि वाणिज्य संकाय के अभ्यर्थी अर्थशास्त्र, सामाजिक विज्ञान, हिन्दी, अंकगणित, अंग्रेजी, व्यापार प्रबंधन, सांख्यिकी तथा लेखांकन में पात्रता रखते हैं। साथ ही एनसीटीई के मापदंड में भी बी.कॉम के छात्र योग्य है, फिर बिहार सरकार इन छात्रों के साथ भेद भाव क्यों कर रहीं है। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से यह मांग की है कि वाणिज्य स्नातक सह बी.एड प्रशिक्षित छात्रों को अविलंब पात्रता परीक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान करें।

सुमो ने फिर उठाया डिलाइट कंपनी का सवालम राजद प्रमुख से पूछे पांच सवाल

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - अन्य दिनों की तरह कोई नया खुलासा करने के बजाय शुक्रवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदीने एक बार फिर डिलाइट कंपनी का सवाल उठाया। उन्होंने राजद प्रमुख लालू प्रसाद से पांच सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि रेलवे के रांची व पुरी के दो होटल के बदले तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद के निकटतम प्रेमचन्द गुप्ता की कम्पनी डिलाइट मार्केटिंग को कारोबारी हर्ष कोचर द्वारा लिखी गई पटना की 200 करोड़ की दो एकड़ जमीन जिस पर लालू परिवार का बिहार का सबसे बड़ा मॉल बन रहा है, के तमाम खुलासे के बावजूद लालू प्रसाद चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? आज तक लालू प्रसाद यह क्यों नहीं बता पा रहे हैं कि आखिर प्रेमचन्द गुप्ता ने 200 करोड़ की जमीन के साथ अपनी कम्पनी लालू परिवार को क्यों सौंप दिया? उन्होंने एक बार फिर पूछा कि रेल मंत्री बनने के चार महीने के भीतर ही रेलवे बोर्ड से रांची व पुरी के दो होटलों को लीज पर देने का फैसला क्यों कराया गया? श्री मोदी ने कहा कि बोर्ड के निर्णय के चार महीने के अंदर ही हर्ष कोचर ने प्रेमचंद गुप्ता की कम्पनी डिलाइट मार्केटिंग को 2 एकड़ जमीन पटना में रजिस्ट्री क्यों कर दिया? उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर प्रेमचन्द गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता व पुत्र गौरव गुप्ता ने अपने सारे शेयर और डायरेक्टरशीप को छोड़ कर अपनी कम्पनी जमीन सहित लालू परिवार को क्यों सौंप दिया?

डिजिटलाइजेशन का लाभ ब्रॉडबैंड के बिना अधूरा : सदानंद

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेतासदानंद सिंह ने कहा कि केन्द्रीय दूर-संचार मंत्री चाहे जितना डिजिटलाइजेशन का फायदा बताएँ; लेकिन इसका लाभ ब्रॉडबैंड के बिना अधूरा है, जबकि देश में ब्रॉडबैंड कनेक्शन और स्पीड दोनों ही स्तरहीन हैं। हालात यह है कि जहाँ विदेशों में ब्रॉडबैंड की सामान्य स्पीड 2 एमबीपीएस की है; वहीं अपने देश में यह मात्र 512 केबीपीएस के आसपास ही है।

श्री सिंह ने कहा कि उद्योग मंडल सीआईआई-केपीएमजी के एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में मोबाइल ब्रॉडबैंड का घनत्व मात्र 17 फीसदी है, जबकि मलेशिया में यह 77 प्रतिशत है। मोबाइल ब्रॉडबैंड घनत्व के मामले में गाँवों की स्थिति और भी बुरी है। देश के ग्रामीण इलाकों में यह मात्र 12.98 फीसद ही है। रिपोर्ट में ब्रॉडबैंड की स्पीड में बढ़ोत्तरी के लिए केंद्र सरकार को नियमों में पारदर्शिता लाने का सुझाव दिया गया है। अब अगर ब्रॉडबैंड कनेक्शन और इसका स्पीड दोनों कम होगा तो देश में ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट को पूर्णत: कैसे लागू किया जा सकता है ?

श्री सिंह ने कहा कि जिस तरह से देश में डिजिटल इकॉनमी को 2024 तक 600 लाख करोड़ रुपये करने की योजना है, उसी तरह से इसका वास्तविक लाभ हरेक देशवासियों तक पहुँचाने के लिए ब्रॉडबैंड कनेक्शन और इसके स्पीड को बढ़ाने के लिए मोदी सरकार को कारगर योजना बनानी चाहिए।

जनता की कमाई का पैसा दिल्ली में उड़ा रहे सरकार के मंत्री, नंदकिशोर ने लगाया आरोप

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - बिहार विधानसभा की लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नन्दकिशोर यादव ने आरोप लगाया है कि राज्य मंत्रिमण्डल में शामिल जदयू के अधिसंख्य मंत्री एमसीडी के चुनाव प्रचार के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई की राशि उड़ा रहे हैं। उन्हें मालूम होना चाहिए कि दिल्ली की जनता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुरीद हो चुकी है और वह किसी भी दल का खूंटा एमसीडी के चुनाव में गाड़ने तक नहीं देगी।

श्री यादव ने कहा कि सरकार में शामिल जदयू कोटे के मंत्रियों को बिहार के हितों की कतई चिंता नहीं है। 20 अप्रैल 2017 को मंत्रिपरिषद् की बैठक में जदयू कोटे के अधिसंख्य मंत्रियों की अनुपस्थिति बताती है कि जनहित में होने वाले फैसलों के प्रति उनकी दिलचस्पी दिनों दिन घटती जा रही है। मंत्रिमंडल में शामिल जदयू कोटे के 12 में से आठ मंत्री और पचास से अधिक विधायक एक सप्ताह से एमसीडी के चुनाव प्रचार के नाम पर दिल्ली में जमे हैं, उनकी मौज-मस्ती पर सूबे की गरीब जनता की कमाई का एक बड़ा हिस्सा अनावष्यक रूप से खर्च हो रहा है।

श्री यादव ने कहा कि दिल्ली में जदयू का कोई आधार नहीं है। न सांसद है न विधायक और न ही संगठन। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने पहले तो 272 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया लेकिन प्रत्याशी उतारे 101 क्षेत्रों में है। उन्हें मालूम होना चाहिए कि दिल्ली विधान सभा के चुनाव में उनके चेहरे को दिल्ली की जनता रिजेक्ट कर चुकी है और उनके उम्मीदवारों की जमानत तक नहीं बची। यही कारण है कि चुनाव प्रचार के मैदान से वे दूर हैं। नीतीश कुमार के विश्वासघाती रवैये से वरिष्ठ नेता शरद यादव तो पहले से ही किनारा थाम चुके हैं। कांग्रेस ने भी दूरी बना रखी है। राजद कोटे के मंत्रियों पर लगे आरोप से नीतीश कुमार का कन्नी काटना स्पष्ट संकेत है कि एमसीडी के चुनाव में नरेन्द्र मोदी के पक्ष में चल रही तेज आंधी के आगे जदयू बुरी तरह उड़ जायेगा।

लोकसेवक जनता के प्रति बनें संवेदनशील : मुख्य सचिव

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - लोकतंत्र में सिविल सेवा का बहुत महत्व है। आवश्यकता है कि लोक सेवक जनता के प्रति संवेदनशील बनें। ये बातें मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने सिविल सेवा दिवस 2017 के अवसर पर मुख्य सचिवालय स्थित सचिवालय सभागार में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने अपने संबोधन में सिविल सेवा दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम को आगे के वर्षो में खुले में और व्यापक तौर पर किए जाने का सुझाव दिया ताकि बिहार सरकार द्वारा किये जा रहे नवाचारी प्रयोगों को सभी जान सकें। डॉ. धर्मेन्द्र सिंह गंगवार, प्रधान सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग ने सिविल सेवा दिवस के आयोजन की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय सिविल सेवा आम नागरिकों के बीच सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों को पहुँचाने का सशक्त माध्यम है। अपने अध्यक्षीय संबोधन में विकास आयुक्त, बिहार नें सभी लोक सेवकों के लिए सेवा भाव से काम करने की आवष्कता पर बल दिया।

परिचर्चा के प्रारंभ में ब्रजेश मेहरोत्रा, प्रधान सचिव, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग द्वारा सात निष्चय योजना की पृष्ठभूमि एवं रूप रेखा पर प्रकाश डाला गया। डॉ. दीपक प्रसाद, प्रधान सचिव , योजना एवं विकास विभाग की ओर से आर्थिक हल, युवाओं को बल विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिशिर सिन्हा, विकास आयुक्त, बिहार द्वारा की गयी। यह कार्यक्रम बिहार लोक प्रषासन एवं ग्रामीण विकास संस्था (बिपार्ड) के तत्वावधान में आयोजित था।

सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख तेजप्रताप पर की कार्रवाई की मांग, धोखाधड़ी का लगाया आरोप

पटना(अपना बिहार, 21 अप्रैल 2017) - गुरुवार को सुशील कुमार मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिख कर उनका ध्यान मंत्री तेंज प्रताप यादव द्वारा चुनाव आयोग एवं बिहार सरकार से औरंगाबाद में अपने नाम से रजिस्ट्री कराई गई 53 लाख की 45 डिसमिल जमीन की सही जानकारी जानबूझकर छुपाये जाने की ओर आकृष्ट किया है। श्री मोदी ने लिखा है कि धोखाधड़ी एवं जानबूझकर बेनामी सम्पत्ति को छुपाने के कुत्सित प्रयास के आरोप में मंत्री को तत्काल बर्खास्त करते हुए प्राथमिकी दर्ज कर आवष्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। तेज प्रताप यादव द्वारा औरंगाबाद में 16 जनवरी, 2010 को 7 लोगों से 53 लाख 34 हजार रूपये में 45.24 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम से करायी गई। पुनः 2 फरवरी, 2012 को इस जमीन को गिरवी ;उवतजहंहमद्ध रखकर मध्य बिहार ग्रामीण बैंक, औरंगाबाद से 2 करोड़ 29 लाख 60 हजार रु. का ऋण लिया गया। वर्तमान में इस जमीन पर लारा डिस्ट्रिब्यूटर्स प्रा. लि. का भवन बना हुआ है और इसमें हीरो होन्डा मोटरसाईकिल का शो रूम है।

श्री मोदी ने लिखा है कि तेज प्रताप यादव ने वर्ष 2015 के विधान सभा चुनाव के दौरान दिये गये अपनी सम्पत्ति के ब्यौरे में औरंगाबाद हाइवे पर अवस्थित इतनी महत्वपूर्ण जमीन और इसपर प्राप्त ऋण संबंधी तथ्य छुपा लिया। साथ ही, वर्ष 2016 में बिहार सरकार को अपनी सम्पत्ति के संबंध में दिए गए ब्यौरे में भी उन्होंने इसका उल्लेख नहीं किया। यह धोखाधड़ी और जानबूझकर बेनामी सम्पत्ति को छुपाने का कुत्सित प्रयास है। श्री मोदी ने कहा है कि तेज प्रताप यादव को मंत्री पद से तत्काल बर्खास्त करते हुए उनके विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर मुख्यमंत्री अपनी न्यायप्रियता का परिचय दें।

सहारा इंडिया व अन्य चिट फ़ंड कंपनियों के खिलाफ़ होगी कड़ी कार्रवाई, वित्त मंत्री ने की समीक्षा

पटना(अपना बिहार, 21 अप्रैल 2017) - सुदूर ग्रामीण इलाकों से लेकर संभ्रान्त शहरी इलाकों में विभिन्न चिट फंड एवं नन-बैंकिग फाइनेंन्शियल कम्पनियों द्वारा गरीब-गुरबों की गाढ़ी कमाई को लेकर चम्पत होने की कई घटनाऐं अखबारों की सुर्खियाँ बनती रही हैं। इस लूट-खसोट के धंधे में लगे लोगों को लुभावने वादों सुसज्जित कार्यालय खोलकर पहले विश्वास में लेते हैं औ फिर नकली कागज थमाकर चंपत हो जाते हैं। इस मुद्दे पर विगत् बजट सत्र में सदन के समक्ष भी मामला कुछ सदस्यों द्वारा लाया गया था। यह अत्यंत ही सोचनीय विषय है इस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। ये बातें राज्य के वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दिकी ने बुधवार को आयोजित सचिवालय स्थित अपने सभाकक्ष में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।

श्री सिद्दिकी ने कहा कि ऐसे जालसाज नन-बैंकिंग फाइनेंसियल कम्पनी के लिए 2002 में बना बीपीआईडी एक्ट यथा संशोधित 2013 में व्याप्त लचीलापन का फायदा उठा रहे हैं। हाँलाकि, इस स्रंबंध में बकायदारों का पैसा वापसी में इंकार करने के मामलों का रिव्यू करते हूए उव्वतम न्यायालय ने एक अंतरिम आदेश पारित कर पैसों की वापसी का निर्देश भी जारी किया है। ताजातरीन सहारा इण्डिया का मामला अभी सुर्खियों में है। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार निबंधित संस्थाओं के लिए स्थानीय प्रशासन से सम्बद्धता को भी अनिवार्य बनाया जाए, ताकि जमा लेने का अधिकार के साथ ही साथ पैसों की वापसी की गारंटी को प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही के साथ सुनिश्चित किया जा सके। प्रत्येक जिला में ऐसी कम्पनियों को सूचीबद्ध किया जाए। ऐसी कम्पनियों के क्रिया कलापों पर पैनी नजर रखने के लिए एक कमिटि का गठन किया जाए। संबंधित नियम, एक्ट, अध्यादेश एपं प्रावधानों की प्रति स्थानीय प्रशासन को तत्काल उपलब्ध कराकर आगामी मई माह में एक सघन अभियान चलाया जाए। परिपक्वता की स्थिती में अमूमन ऐसी कम्पनियों द्वारा दोबारा निवेश का दबाव बनाया जाता है, जिसके कारण ठगी के शिकार भोले भाले लोग प्राथमिकी से कतराते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि सभी जिलों में एक नोडल पदाधिकारी ठगी के शिकार लोगों को गवाह बनाकर प्राथमिकी दर्ज कराएँ।

श्री सिद्दिकी ने कहा कि बचत एवं साख समितियों के निबंधन एवं क्रियाकलापों पर कड़ी निगरानी की भी आवश्यकता है। ताकि सन् 1935 के सहकारिता अधिनियम एवं माॅडल को-औपरेटिव एक्ट के दुरूपयोग को रोका जा सके। सेबी, आर्थिक अपराध अनुसंधान इकाई एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा जांच, अनुसंधान एवं भुगतान की प्रक्रिया की जटिलता को समाप्त कर पारदर्शी बनाया जाना भी आवश्यक है। इस बैठक में उपस्थित भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक एन पी टोपनों को वित्त मंत्री श्री सिद्दिकी ने प्रशासन एवं राज्य सरकार की ओर से भरपूर सहयोग का आश्वासन दिया। वहीं पटना के जिलाधिकारी डा संजय कुमार अग्रवाल ने इस संबंध में नियमों की जानकारी आम जनों को देने के लिए प्रभावकारी विज्ञापन को भी आवश्यक बताया। इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रधान सचिव, वित्त रवि मित्तल, आर्थिक अपराध अनुसंधान इकाई के महानिरीक्षक जे एस गंगवार, सांवर भारती विशेष सचिव (वित्त विभाग) सुशील कुमार, अपर आरक्षी अधीक्षक, अपराध अनुसंधान इकाई, राजीव कुमार दास संयोजक राज्य स्तरीय बैंकर्स कमिटि, अनंतशक्ति उप महाप्रबंधक सेवी एवं अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

नंदकिशोर यादव ने तेजस्वी पर उठाया सवाल

पटना(अपना बिहार, 21 अप्रैल 2017) - बिहार विधान सभा की लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बिहार में राष्ट्रीय उच्च पथ के निर्माण और विस्तार के लिए केन्द्र सरकार धन लेकर बैठी है लेकिन राज्य सरकार सड़क के लिए जमीन उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल है ।

श्री यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार ने सन् 2019 तक 2.23 लाख किलो मीटर राजमार्ग का निर्माण कर 65 हजार पात्र बस्तियों को जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सन् 2015-16 में 6029 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण कराया गया है जो अपने आप में रिकार्ड है। इसका एक बड़ा हिस्सा बिहार के खाते में आया है । चालू वित्तीय वर्ष में 350 किलोमीटर राष्ट्रीय उच्च पथ को दस मीटर चैड़ा करने की योजना है जिस पर लगभग 15 सौ करोड़ रूपये का व्यय संभावित है लेकिन राज्य सरकार इसके लिए जमीन नहीं उपलब्ध करा पा रही है । इसी प्रकार अगले साल बिहार में 750 किलोमीटर राष्ट्रीय उच्च पथ का निर्माण किया जाना है । भारत-नेपाल की सीमा पर पष्चिम चम्पारण में उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे मदनपुर से पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया होते हुए किषनगंज के गलगलिया तक राष्ट्रीय उच्च पथ के निर्माण में 359 किलोमीटर की दूरी तक भू-खंड उपलब्ध कराने में राज्य सरकार अब तक विफल है ।

पटना हाईकोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज, बच्चा राय की जमानत याचिका मामले में हुई सुनवाई

पटना(अपना बिहार, 21 अप्रैल 2017) - बिहार टॉपर घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने घोटाले के मुख्य आरोपी बच्चा राय को जमानत देने से इनकार कर दिया है। यह आदेश देकर सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के जमानत के फैसले को निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिए आदेश में कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को अभी जेल से रिहा नहीं किया जाना चाहिए। बिहार सरकार ने राय की मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इससे पहले 6 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के जमानत के आदेश पर अंतरिम रोक का आदेश देते हुए रिहाई पर रोक लगा दी थी और बिहार सरकार की अर्जी पर राय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिका में बिहार सरकार के वकील मनीष कुमार ने दलील दी थी कि पटना हाईकोर्ट का बच्चा राय जमानत देने का फैसला गलत है क्योंकि वह घोटाले का मुख्य आरोपी है यदि वह जमानत पर बाहर आया तो सबूतों को प्रभावित कर सकता है। हाईकोर्ट ने 14 फरवरी को बच्चा राय को पटना हाइकोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी थी। पटना हाइकोर्ट ने कहा था कि 30 दिनों के भीतर आरोपित किए जाएं और यदि 30 दिन में आरोपित नहीं होते हैं तो राय को जेल से रिहा कर दिया जाएगा।

दोष नरेंद्र मोदी का, नीतीश कुमार मुर्दाबाद का नारा लगा रहीं आंगनबाड़ी सेविकायें, दिनभर पटना को किया अस्त-व्यस्त

पटना(अपना बिहार, 21 अप्रैल 2017) - आंगनबाड़ी परियोजना केंद्र सरकार द्वारा संपोषित योजना है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा यह पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि आंगनबाड़ी सेविका कोई सरकारी सेवा का पद नहीं बल्कि सामाजिक सेवा है। केंद्र सरकार इसके लिए प्रोत्साहन राशि देती है। इसके बावजूद गुरुवार को हजारों की संख्या में पटना में अपना मानदेय कम से 18 हजार करने की मांग को लेकर नरेंद्र मोदी के बजाय नीतीश कुमार मुर्दाबाद का नारा लगा रही थीं। आंदोलन कर रही प्रदेशभर की आंगनबाड़ी सेविकाओं ने चौराहे के हर छोर पर डेरा जमा लिया। इससे राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई। लगभग हर इलाके में भीषण जाम लग गया। पुलिस की लाख कोशिशों के बाद भी सेविकाएं मानने को तैयार नहीं हुईं और वे आक्रोशित हो उठी। उनकी प्रमुख मांगों में मानदेय में बढ़ोतरी व वेतनमान तय करने जैसी प्रमुख थीं। कोतवाली थाने में दर्जनभर नामजद और दो-तीन हजार अज्ञात आंगनबाड़ी सेविकाओं पर सड़क जाम करने, प्रतिबंधित क्षेत्र में जबरन प्रवेश करने व सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का केस दर्ज किया गया है।

गुरुवार सुबह पौने ग्यारह बजे चार-पांच सौ की संख्या में छोटे-छोटे ग्रुप में आंगनबाड़ी सेविकाएं डाकबंगला चौराहा पर पहुंचने लगीं। नारेबाजी कर रही सैकड़ों महिलाएं गर्दनीबाग धरनास्थल से जिस रास्ते से होकर गुजरीं, वाहनों की आवाजाही थम गई। कोतवाली, स्टेशन रोड, फ्रेजर रोड, एग्जीबिशन रोड जाने वाली सड़कों पर चार घंटे तक वाहन फंसे रहे। सवा ग्यारह बजे तक इनकी संख्या चार से पांच हजार हो गई। प्रर्दशनकारी महिलाओं ने डाकबंगला से होकर गुजरने वाले वाहनों को जबरन रोका। उसके बाद बारी-बारी से सभी सेविकाएं सड़क पर ही बैठ गई। देखते ही देखते स्टेशन रोड, कोतवाली टी, फ्रेजर रोड व एग्जीविशन रोड सेविकाओं से भर गया। शाम तीन बजे के बाद किसी तरह आंदोलनकारी महिलाओं को चौराहे से हटाकर गांधी मैदान भेजा गया।

तीन हजार में दम नहीं, 18 हजार से कम नहीं.. के नारे लगा रही महिलाओं को चौराहे से हटाने के लिए कई थाने की पुलिस मशक्कत करती रही लेकिन नतीजा सिफर रहा। महिलाएं सरकार के खिलाफ नारेबाजी करती रहीं। चौराहे के हर छोर पड़ झुंड बनाकर जमी सेविकाओं ने पैदल यात्रियों का आना जाना भी बंद कर दिया। आसपास की दुकानों को भी महिलाओं ने बंद करवा दिया और कई राहगीरों से बदतमीजी की। वहीं पटना के सिटी एसपी चंदन कुशवाहा ने बताया कि आंगनबाड़ी सेविकाओं के खिलाफ कोतवाली थाने में डाकबंगला चौराहा जाम करने, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने व प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने का केस दर्ज हुआ है। जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सुशील मोदी के साथ नित्यानंद राय ने भी लालू परिवार पर साधा निशाना

पटना(अपना बिहार, 21 अप्रैल 2017) - प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय ने उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव एवं स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव से इस्तीफा देने की मांग की। गुरुवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने पिछले विधानसभा चुनाव में नामांकन पत्र दाखिल करने के वक्त घोषित चल-अचल संपत्ति का विवरण देने में पारदर्शिता नहीं बरती। चुनाव आयोग के समक्ष घोषित संपत्ति में तब और अब काफी अंतर है। उन्होंने कहा कि इसी आधार और विश्वास पर मतदाता उन्हें अपना वोट देते है, लेकिन दोनों नेताओं ने जनता के साथ विश्वासघात किया है। श्री राय ने मांग की कि दोनों नेताओं को खुद इस्तीफा दे देना चाहिए या मुख्यमंत्री उन लोगों को बर्खास्त करें। एक अन्य बयान में श्री राय ने गाड़ियों से लालबत्ती हटाकर वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने के प्रधानमंत्री के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से आम व खास के बीच का अंतर का भाव समाप्त होगा।

जमानत मिलते ही पप्पू यादव ने लालू और उनके परिवार को कोसा

पटना(अपना बिहार, 20 अप्रैल 2017) - राजनीतिक प्रदर्शन के दौरान हिंसा उकसाने के मामले में बेऊर जेल में बंद जन अधिकार पार्टी (लो) के संरक्षक और सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्‍पू यादव को राहत मिल ही गयी। अदालत ने उनकी जमानत याचिका को मंजूर कर लिया। उधर जमानत मिलते ही श्री यादव राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उनके परिजनों पर टूट पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर महात्‍मा गांधी के चंपारण सत्‍याग्रह का शताब्‍दी समारोह मना रही है और दूसरी उसी चंपारण में किसान आत्‍महत्‍या करने पर विवश हो रहे हैं। लेकिन सरकार का कोई प्रतिनिधि उनके घाव पर मरहम लगाने नहीं पहुंचा। श्री यादव ने कहा कि लालू यादव के परिवार और उनके पुत्रों की संपत्ति की सीबीआई या न्‍यायिक जांच करायी जानी चाहिए। लालू यादव के परिवार की बेनामी संपत्ति के मुद्दे पर मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की चुपी भी कई सवाल खड़ा कर रही है। इस संबंध में जन अधिकार पार्टी (लो) के राष्‍ट्रीय महासचिव व प्रवक्‍ता प्रेमचंद सिंह ने जारी बयान में बताया कि सांसद श्री यादव ने मं‍त्री, विधायक और अधिकारियों की संपत्ति की जांच की मांग भी की। इससे स्‍पष्‍ट हो जाएगा कि मंत्री, विधायक या अधिकारियों की संपति में तेजी से इजाफा कैसा होता है। सांसद ने कहा कि वे मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के दहेज विरोधी अभियान के साथ हैं और बिना दहेज के शादी-विवाह के पक्ष में हैं। इसके लिए अंतरजातीय विवाह को प्रोत्‍साहित किया जाना चाहिए।

लालू परिवार को अंजाम तक पहुंचाने को सुमो ने लगाया जोर, केन्द्रीय पर्यावरण व वन राज्यमंत्री को लिखा पत्र

पटना(अपना बिहार, 20 अप्रैल 2017) - पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उनके परिजनों को उनके अंजाम तक पहुंचाने के इरादे से केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री अनिल माधव दवे को पत्र लिख कर जांच की मांग की है। बुधवार को अपने बयान में श्री मोदी ने कहा कि उन्होंने लालू यादव के निर्माणाधीन 700 करोड़ के शापिंग काम्प्लेक्स की मिट्टी खपाने के लिए पटना के चिड़ियाघर में बिना किसी आवश्यकता के 90 लाख की मिट्टी भराई व 4 फुट ऊंचा पाथवे (मार्ग) के निर्माण की शिकायत कर केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकारण की टीम से इसकी जांच कराने की मांग की है। श्री मोदी ने पत्र में लिखा है कि चिड़ियाघर में अभीतक 5 लाख घनफुट मिट्टी तीन महीने तक रात में हाइवा से करीब 1000 ट्रिप लगा कर ढोया गया जबकि वन्य प्राणी क्षेत्र में शाम से लेकर सुबह तक किसी भी तरह के निर्माण कार्य वर्जित है।

भूमिहार अनंत सिंह ने दलित जीतन राम मांझी को दी थी गाली, प्रोडक्शन वारंट जारी

पटना(अपना बिहार, 20 अप्रैल 2017) - पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के खिलाफ अपशब्द और जातिसूचक शब्द कहने के मामले में मोकामा के भूमिहार विधायक अनंत सिंह के खिलाफ प्रोडक्टशन वारंट जारी हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार को गया की एससीएसटी कोर्ट से प्रोडक्शन वारंट जारी हुआ। वारंट की कॉपी बेऊर जेल को भिजवा दी गई है। जिससे इस मामले में कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए उनकी पेशी हो सके। 28 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई होनी है। दरअसल इस केस के जांचकर्ता नीमचक बथानी डीएसपी विजय कुमार ने कोर्ट से प्रोडक्शन वारंट के लिए प्रार्थना की थी। मंगलवार एससीएसटी कोर्ट के प्रभारी जज सच्चिानंद सिंह ने विभिन्न प्रकार के साक्ष्य जैसे बयान की सीडी, केस डायरी आदि देखने के बाद प्रोडेक्शन वारंट जारी किया। गया के महकार गांव के रहने वाले जीतन राम मांझी का भगिना उपेन्द्र मांझी ने खिजरसराय थाना में अनंत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज (33/15) कराया था। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा था कि 11 फरवरी 2015 को नेशनल और रीजनल चैनल पर विधायक अनंत सिंह ने मेरे मामा जीतन राम मांझी के खिलाफ जातिसूचक शब्द, गाली गलौज और जान से मारने की धमकी दी है।

दलितों को आबादी के हिसाब से मिले आराक्षण : मांझी

पटना(अपना बिहार, 20 अप्रैल 2017) - हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने बुधवार को पार्टी की ओर से रवींद्र भवन में आयोजित अल्पसंख्यक जागरूकता सम्मेलन में ये बातें कही। उन्होंने कहा कि सेक्यूलर के नाम पर मुसलमानों का वोट ठगा जा रहा है। पूछा कि मुस्लिम समाज भाजपा को अछूत क्यों मानता है? भाजपा के शासन में कहीं बीफ का कारोबार बंद तो नहीं हुआ। बल्कि उसका निर्यात बढ़ गया। श्री मांझी ने यूपी सरकार की सराहना करते हुए कहा कि बिहार में भी किसानों के बिजली बिल माफ होने चाहिए। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष शाहिद अली खान ने कहा कि मुसलमानों के लिए तालिम की मुकम्मल व्यवस्था होनी चाहिए। आरोप लगाया कि एमवाई समीकरण बना कर 26 साल से मुसलमानों को ठगा जा रहा है।

वहीं प्रदेश अध्यक्ष वृशिण पटेल ने कहा कि दलितों-अति पिछड़ों और मुसलमानों को मिलकर सत्ता परिवर्तन करना चाहिए। मौके पर पूर्व मंत्री अनिल कुमार, अजीत कुमार, पार्टी नेता रवीन्द्र राय, अनामिका पासवान, फैज आलम सिद्दिकी, सुभाष सिंह चन्द्रवंशी, तुफैल कादरी आदि मौजूद थे।

महात्मा गांधी के हत्यारे के समर्थक नंद किशोर यादव को सता रही गांधी दर्शन की चिंता, राज्य सरकार पर लगाया यह आरोप

पटना(अपना बिहार, 20 अप्रैल 2017) - महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे के समर्थक और बिहार विधान सभा लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने आरोप लगाया है कि बिहार में महात्मा गांधी का ग्राम स्वराज का सपना दम तोड़ रहा है। चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के नाम पर गांधीजी के विचारों और आदर्शों को अपनाने की लंबी-लंबी बात करने वालों की नीति और नियत का जीता-जागता उदाहरण है सूबे के गांव, देहात की ग्राम कचहरियां।

श्री यादव ने आरोप लगाया कि एनडीए के शासनकाल में भाजपा के दबाव पर सन 2006 में ग्राम स्वराज को कानूनी रूप देने का निर्णय हुआ था। बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 के तहत ग्राम कचहरी की व्यवस्था गांव स्तर पर आपसी झगड़ों एवं विवादों के निपटारे के लिये की गई थी जिसके तहत 8391 ग्राम कचहरियों की व्यवस्था की गई थी जिसे न्यायपीठ की मान्यता दी गई। जिसकी स्थापना सबसे और त्वरित न्याय के लिये की गई है। सन् 2009 में पुलिस महानिदेषक के स्तर से ग्राम कचहरी को मुकदमा सौंपने का निर्णय हुआ और फरवरी 2012 में 40 धाराओं के तहत थानों में दर्ज मुकदमों को ग्राम कचहरी को देने का फैसला हुआ था। ग्राम कचहरी को मजबूत होने से न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम होगा। लेकिन सरकार के तमाम आदेश-निर्देश धरे के धरे रह गये और सरकार सरकारी खजाने से करोड़ करोड़ रूपये खर्च कर गांधीजी के बताये रास्ते पर चलने का ढोंग पीट रही है।

महिलाओं पर अत्याचार बढा, सुरक्षा देने में सरकार विफ़ल, भाजपा नेता ने सीएम से मांगा इस्तीफ़ा

पटना(अपना बिहार, 20 अप्रैल 2017) - विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज में महिलाओं को जलाने की घटनाएं लगातार हो रहीं हैं, जिस कारण सूबे की महिलाएं पूरी तरह से असुरक्षित हो गयीं हैं। बेतिया में आज दो सगी बहनों को जिंदा जला दिया गया, जिसमें एक की मौत हो गयीं और दूसरी गंभीर रूप से घायल है। इसके पहले भी राज्य के अंदर महिलाओं को जिंदा जलाने की घटनाएं हो चुकीं हैं। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन घटनाओं को रोकने में पूरी तरह से विफल हो रहें हैं।

डा. कुमार ने कहा कि नीतीश, लालू व कांग्रेस के महागठबंधन की सरकार में राज्य की महिलाओं के साथ आए दिन अत्याचार बढ़ने की घटनाएं हो रहीं है, जिसे नीतीश कुमार रोकने में विफल हो रहे हैं। मुजफ्फरपुर में 4 अक्टूबर16 को एक महिला को डायन बता कर अर्द्धनग्न कर पीटा और पेड़ से बांध दिया। इसके पहले 23 सितम्बंर 2016 को गया में एक महिला को डायन का आरोप लगा कर पीटा गया। डा. कुमार ने कहा कि बिहार में गरीब महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है, तो नीतीश जी आप चुप हैं। साल 2013 में 4 हजार 821 दलितों पर अत्याचार हुए, जो साल 2015 में दलित, महादलित उत्पीड़न की 7 हजार 874 मामले रिकोर्ड किये गये हैं। यह महादलितों पर बढ़ रहे अत्याचार का सबुत है। राज्य के अंदर 2016 में बलात्कार की 1008 घटनाएं हुई। डा. कुमार ने कहा कि वर्तमान नीतीश कुमार की सरकार में गरीब महिलाओं, दलित, महादलित पर हो रहे अत्याचार को रोकने के कारण नैतिकता के आधार पर नीतीश जी आप को अपने पद इस्तिफा दे देना चाहिए।

खत्म होगी पशु चिकित्सकों की कमी, 341 पदों के लिए नियुक्ति का निर्णय, छह प्रस्तावों पर कैबिनेट ने लगाया मुहर

पटना(अपना बिहार, 20 अप्रैल 2017) - आज 19 अप्रैल, 2017 को कैबिनेट की बैठक में 06 मामलों पर निर्णय लिये गये। इस सन्दर्भ में प्रधान सचिव मंत्रिमंडल ब्रजेश मेहरोत्रा ने जानकारी देते हुए आगे बताया कि गृह विभाग (विशेष शाखा) के अन्तर्गत बिहार गृह रक्षा वाहिनी में समादेष्टा संवर्ग के लिए बिहार गृह रक्षा वाहिनी सेवा नियमावली, 2005 के नियम-8 में संशोधन की स्वीकृति दी गई। तदनुसार उपमहासमादेष्टा के स्वीकृत पद को नियमावली में जोड़ा गया है। जल संसाधन विभाग के अन्तर्गत बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायक केन्द्र, जल संसाधन विभाग, पटना में पूर्व से कुल छह अदद कार्यरत विशेषज्ञों/परामर्शियों की सेवाओं का वित्तीय वर्ष 2017-18 (01 अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 तक) की अवधि के लिये पूर्व के सेवा शर्त्तों के अनुसार सेवा विस्तार एवं उनके मानदेय भुगतान हेतु रू० 32,34,000/-(रू० बत्तीस लाख चैतीस हजार) मात्र की प्रशासनिक एवं व्यय की स्वीकृति दी गई। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग (निबंधन) के अन्तर्गत बिहार राज्य आवास बोर्ड की सम्पदाओं को लीज होल्ड से फ्री-होल्ड में परिवर्तन करने में लगने वाले स्टाम्प तथा निबंधन शुल्क की देयता सम्परिवर्तन के लिए देय राशि पर आधारित करने की स्वीकृति दी गई। इसके मुताबिक लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने वाले में सम्पत्ति शुल्क के 10 प्रतिशत की राशि जो भुगतेय है उसी राशि के आधर पर स्टाम्प तथा निबंधन शुल्क निर्धारित किया जायेगा। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के अन्तर्गत पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग अन्तर्गत 341 पदों के विरूद्ध संविदा के आधार पर नियोजित पशु चिकित्सकों के नियोजन अवधि का विस्तार आदेश निर्गत की तिथि से एक और वर्ष के लिए अथवा उक्त पद पर पशु चिकित्सकों के स्थाई पदस्थापन होने तक, जो पहले हो, तक के लिए विस्तार की स्वीकृति दी गयी।

बापू धाम में फ़िर से जिंदा हुआ इतिहास, बापू के रास्ते चले नीतीश-तेजस्वी

पटना(अपना बिहार, 19 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव सहित पूर्वी चम्पारण मोतिहारी में चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित स्मृति यात्रा (पद यात्रा) में शामिल हुये। स्मृति यात्रा चंद्रहिया से मोतिहारी तक आयोजित की गयी थी। यात्रा के क्रम में सबसे पहले चंद्रहिया में आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। साथ ही चंद्रहिया का महत्व षिलापट्ट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने चंद्रहिया में चम्पा पौधा का वृक्षारोपण किया। स्मृति यात्रा का चंद्रहिया से हरी झंडी दिखाकर शुरूआत की गयी। चंद्रहिया से मोतिहारी सात किलोमीटर लंबी पद यात्रा मोतिहारी में समाप्त हुयी। मोतिहारी गांधी बाल उद्यान में मुख्यमंत्री ने गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा आयोजित प्रार्थना सभा में भाग लिया।

स्मृति यात्रा पूरी होने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के सिलसिले में आज चंद्रहिया से मोतिहारी तक की स्मृति यात्रा आयोजित की गयी थी। गांधी जी 15 अप्रैल 2017 को मोतिहारी पधारे थे। यहां आने के बाद उन्हें जानकारी मिली कि जषौलीपट्टी के किसानों पर जूल्म हुआ है। गांधी जी ने 16 अप्रैल को जषौलीपट्टी जाने का निर्णय लिया और मोतिहारी से जषौलीपट्टी के लिये निकले। रास्ते में चंद्रहिया में उन्हें नोटिस दिया गया कि आपको चम्पारण छोड़ना है। गांधी जी चंद्रहिया से मोतिहारी वापस आये। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक दिन है इसलिये आज के दिन स्मृति यात्रा का आयोजन किया गया है। 18 अप्रैल 1917 को गांधी जी की एसडीएम कोर्ट में पेशी हुयी थी, जहां पर उन्होंने ऐतिहासिक वक्तव्य दिया था।

उन्होंने कहा कि बापू का संदेश था कि मेरा जीवन ही संदेश है। बापू के संदेश को जन-जन तक हम पहुॅचाना चाहते हैं। नई पीढ़ी को बापू के विचारों से अवगत कराना चाहते हैं। पूरे साल चम्पारण सत्याग्रह के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। आप सभी आज स्मृति यात्रा में शामिल हुये, इसके लिये मैं सभी को बधाई देता हूं और इस अवसर पर बापू के चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूॅ। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के अलावा शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डा मदन मोहन झा, विधान पार्षद सतीष कुमार, विधायक राजेन्द्र कुमार राम, विधायक फैसल रहमान, विधायक राजेश कुमार, विधायक शमीम अहमद, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति, वरीय अधिकारी एवं हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे।

चंपारण सत्‍याग्रह का ही प्रतिफल है बिहार विद्यापीठ : राज्यपाल

पटना(अपना बिहार, 19 अप्रैल 2017) - चंपारण शताब्‍दी समारोह के अवसर पर बिहार विद्यापीठ में आयोजित एक समरोह का उद्घाटन करते हुए राज्‍यपाल रामनाथ कोविंद ने कहा कि बिहार विद्यापीठ चंपारण सत्‍याग्रह का एक प्रतिफल रहा है। चंपारण सत्‍याग्रह के क्रम में ही चंपारण आने जाने के दौरान बिहार में अशिक्षा की समाप्ति का अभियान और 1920 में ई0 में सविनय अवज्ञा आंदोलन के फलस्‍वरूप महात्‍मा गांधी के आह्वान पर सरकारी शिक्षणालयों के परित्‍यागी छात्रों के शिक्षण के लिए महात्‍मा गांधी ने 1921 में मौलाना मजरूल हक, ब्रजकिशोर प्रसाद, देशरत्‍न डॉ राजेंद्र प्रसाद आदि नेताओं के सहयोग से बिहार विद्यापीठ की स्‍थापना की।

इस अवसर पर राज्‍यपाल ने भैरव लाल दास रचित और बिहार विद्यापीठ द्वारा प्रकाशित पुस्‍तक चंपारण में गांधी की सृजन यात्रा का लोकार्पण भी किया। पुस्‍तक को चंपारण सत्‍याग्रह पर लिखा एक महत्‍वपूर्ण दस्तावेज बताते हुए श्री कोविंद ने कहा कि इससे वर्तमान और भावी युवा पीढी को चंपारण सत्‍याग्र‍ह की वास्‍तविकता से परिचित होने में मदद मिलेगी। उन्‍होंने बिहार विद्यापीठ के अध्‍यक्ष विजय प्रकाश की बातों को कोट करते हुए कहा कि इस परिसर में बिहार विद्यापीठ की स्‍थापना का उद्घाटन मात्र ही महात्‍मा गांधी ने नहीं किया था, बल्कि 62 हजार रूपए का चंदा एकत्र कर इसके संवर्द्धन के लिए दिया था।

उन्‍होंने बिहार विद्यापीठ में कौशल विकास के कई कार्यक्रमों के संचालन पर प्रसन्‍नता जाहिर करते हुए कहा कि चंपारण शताब्‍दी वर्ष के इस वर्ष में अशिक्षा, बेकारी, आदि को दूर करने लिए बिहार विद्यापीठ के कदम बढ़ते रहें, यही चंपारण सत्‍याग्रह शताब्‍दी समारोह के आयोजन की वास्तविक सार्थकता होगी।

अपनी गलतबयानी के लिये माफ़ी मांगें सुमो और दें इस्तीफ़ा : राजद

पटना(अपना बिहार, 19 अप्रैल 2017) - राजद के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने सुशील मोदी को उनके द्वारा पूर्व में दिये गये बयान का हवाला देते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की है। श्री मोदी द्वारा वन एवं पर्यावरण मंत्री तेजप्रताप यादव पर संजय गांधी जैविक उद्यान को मिट्टी बेचने का आरोप लगाया गया था साथ हीं यह घोषणा की थी कि उनका आरोप यदि गलत साबित हुआ तो वे अपने सभी पदों से इस्तीफा दे देंगे। उनका आरोप पूर्णतः गलत साबित हो चुका है, अतः उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।

राजद नेता ने कहा है कि श्री मोदी अब अपनी बातों से पलट कर लालू जी की सम्पति की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। वे शायद भूल रहे हैं कि वे लोग लालू जी की सम्पति की जांच करवा चुके हैं। उनके और उनके संबंधियों के रसोई घर और शौचालय तक खनवा चुके हैं। मा0 न्यायालय भी यह मान चुकी है कि लालू जी और उनके परिजनों के पास कोई अवैध सम्पति नहीं है। लालू जी के पास जो भी सम्पति है, वह खुली किताब है। कुछ भी छीपा हुआ नहीं है। सारी सम्पति आॅन रिकार्ड है। जांच तो उसकी होनी चाहिये जो बेनामी और फर्जी नामों से है। गत दिनों राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने सुशील मोदी जी से कई बेनामी सम्पतियों के बारे में खुलासा करने को कहा था। पर इस पर मोदी जी चुप्पी साधे हुए हैं। उन्हें बताना चाहिए कि उत्कर्ष स्फटिक लिमिटेड द्वारा वैपटिस्ट मिशनरी सोसाईटी की 7.5 एकड़ जमीन कैसे प्राप्त की गई। जमीन के दस्तावेज में खेसरा नम्बर क्यों नहीं दिया गया। जिस लड़के के नाम पर एक मोटरसाईकिल भी नहीं है वह आडी और बीएमडब्लू में कैसे घूम रहा है। राजेन्द्र नगर स्थित राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का मकान और जमीन किसके कब्जे में है। 2004 में सुशील मोदी जी द्वारा दिये हलफनामे के अनुसार उनके नाबालिग लड़कों के खाते में लाखों रूपये कैसे आये। उनके पत्नी के डिग्री और नियुक्ति पर सवाल उठ रहे हैं, उन्हें वास्तविकता को सार्वजनिक करना चाहिए।

राजद नेता ने कहा है कि दरअसल लालू जी पर हमला उनकी सोंची-समझी राजनीति का हिस्सा है। बिहार में नित्यानंद के नेतृत्व में नई कमिटी के गठन के बाद सुशील मोदी एण्ड कम्पनी का अन्त हो गया है। भाजपा में उनकी पहली वाली हैसियन नहीं रही। भुवनेश्वर में हुये भाजपा के राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में इन्हें बोलने का भी अवसर नहीं मिला और न केन्द्रीय नेतृत्व द्वारा इन्हें कोई तवज्जो मिला।

राजद नेता ने कहा कि राजद सुप्रीमो पर प्रलाप करते-करते थक गये तो अब उनके पुत्रों पर राजनीति कर रहे हैं। तेजस्वी जी और तेजप्रताप जी द्वारा किये जा रहे विकास के कामों को वे पचा नहीं पा रहे हैं। दोनों भाईयों की बढ़ रही लोकप्रियता और जन स्वीकार्यता से इनकी परेशानी बढ़ गई हैं। इसलिए अपने वजूद बचाने के लिए अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।

नंद किशोर ने रेलमंत्री के प्रति जताया आभार

पटना(अपना बिहार, 19 अप्रैल 2017) - बिहार विधान सभा की लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा है कि बिहार में रेल सेवाओं के विकास और विस्तार के लिए केन्द्र सरकार का 37 अरब रूपये का तोहफा मील का पत्थर साबित होगा।

श्री यादव ने आज यहां कहा कि राज्य के पिछड़ेपन को दूर करने की दिषा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कितने चिंतित हैं यह उपहार इसका उदाहरण है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने दिल्ली से 37 सौ करोड़ रूपये का तोहफा देकर बता दिया कि केन्द्र सरकार की सीधी नजर प्रदेश की विकास योजनाओं पर है और इसके लिए धन की कोई कमी नहीं हैं। जिस कांग्रेस की गोद में बैठकर महागठबंधन की सरकार चला रहे हैं उन्हें जानकारी होनी चाहिए सन् 2009 से 2014 तक जब केन्द्र में कांग्रेसनीत यूपीए की सरकार थी तो उसने बिहार में रेल नेटवर्क के विस्तार के मद में मात्र 1132 करोड़ रूपये दिये थे। श्री यादव ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए बिहार को एकमुश्त इतनी बड़ी राशि देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रेल मंत्री सुरेश प्रभु के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इसके तहत पांच अरब रूपये की लागत से दरभंगा-समस्तीपुर दोहरीकरण योजना मिथिलांचल में विकास का एक नया सूरज उगायेगा वहीं 102 करोड़ रूपये की लागत से सोननगर-पतरातु रेल मार्ग का तिहरीकरण आर्थिक उन्नति का द्वार खोलेगा। 678 करोड़ रूपये के व्यय से हाजीपुर-बछवाड़ा के बीच रेल लाइन के दोहरीकरण से जनता की चिरप्रतिक्षित मांग भी पूरी होगी ।

चंपारण सत्याग्रह की सफ़लता से भाजपा को लगी मिर्ची, मुख्यमंत्री पर लगाया जनता के पैसे के दुरुपयोग का आरोप

पटना(अपना बिहार, 19 अप्रैल 2017) - चंपारण सत्याग्रह के 100 वर्ष पूरे होने पर राज्य सरकार द्वारा किये गये ऐतिहासिक आयोजनों की सफ़लता से विपक्षी दल भाजप को तीखी मिर्ची लगी है। दिलचस्प यह है कि अंग्रेजों की मुखबिरी करने वाले पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी के मौके पर केंद्र सरकार ने पूरे देश में अरबों रुपए का व्यय कर ऐतिहासिक तरीके से मनाने का फ़ैसला लिया है। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकारी खर्च पर अपनी राजनीतिक छवि बनाने में लगे हुए हैं। वहीं दूसरी और राज्य के अंदर जनता बेहाल हो रहीं हैं। राज्य के अंदर घोटाले ही घोटाले हो रहें, अपराधियों के बढ़ते आतंक से सूबे की जनता डरी हुई हैं। राज्य के अंदर विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़ी हुई हैं।

डा. कुमार ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि शराबबंदी और सात निश्चय के नाम पर आज भी अपनी ब्रांडिंग कर रहे हैं, ताकी इनकी राजनीतिक चमकती रहें। फिर नीतीश जी आपने प्रकाश पर्व के अवसर पर अपनी ब्रांडिंग किया। और अब चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह में तो आपने खुल कर राजनीति की ताकी उसका आप राजनीतिक लाभ लें सकें।

डा. कुमार ने कहा कि नीतीश जी आपके शासनकाल में अस्पतालों में दवाएं व डाॅक्टर नहीं हैं। राज्य के अंदर आगलगी की घटनाएं हो रहीं हैं, पीड़ितों को बचाने की कोई व्यवस्था नहीं हैं। शिक्षा विभाग में घोटाले ही घोटाले हो रहें हैं। स्कूलों में भवन नहीं, तो कहीं छत नहीं, कहीं शौचालय व पानी, बिजली नहीं हैं, छात्रों को पुस्तक तक नहीं हैं। शिक्षक लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते रहें। शिक्षकों को वेतन नहीं मिल रहा है। समान काम समान वेतन की मांग शिक्षक लगातार कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों को सरकार सुन नहीं रहीं है। राज्य के किसान बेहाल हैं, उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। आज भी पूरे राज्य के अंदर बुनियादी सुविधाएं लोगों को नहीं मिल रहीं हैं।

डा. कुमार ने कहा कि आपने तो पद यात्रा कर के मीडिया में बने रहें। इसके पहले आपने कई यात्राएं की, जिसमें अपनी राजनीतिक को चमकाने का काम किया। जैसे न्याय यात्रा, विकास यात्रा, धन्यवाद यात्रा, प्रवास यात्रा, विश्वास यात्रा, सेवा यात्रा, अधिकार यात्रा, संकल्प यात्रा, संपर्क यात्रा, स्मृति यात्रा, आदि यात्राएं की। उक्त सभी यात्राएं सरकारी खर्च पर नीतीश जी आपनी छवि चमकाने में किया। राज्य की जनात सब कुछ जानती है।

याद किये गये भूतपूर्व मुख्यमंत्री विनोदानंद झा

पटना(अपना बिहार, 18 अप्रैल 2017) - राज्यपाल राम नाथ कोविन्द ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व॰ विनोदानन्द झा की जयन्ती के अवसर पर स्थानीय श्रीकृष्ण स्मारक भवन परिसर, पटना में आयोजित जयन्ती-समारोह में उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर अपनी श्रद्धा अर्पित की। इस अवसर पर राज्य के वित्त मंत्री श्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने भी स्व॰ विनोदानन्द झा की तस्वीर पर माल्यार्पण किया। राजकीय समारोह के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम में कई जन-प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों, प्रषासनिक अधिकारियों, गणमान्य लोगों आदि ने भी पूर्व मुख्यमंत्री की तस्वीर पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम के दौरान सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के कलाकारों द्वारा आरती-पूजन एवं भजन व देशभक्तिपूर्ण गीतों के गायन प्रस्तुत किये गये।

मधेपुरा में संपन्न हुआ किसान स्त्याग्रह

पटना(अपना बिहार, 18 अप्रैल 2017) - सौ वर्ष पहले निलहे किसानों की दुर्दशा और उसपर हों रहे जुल्म के खिलाफ चम्पारण में गाँधी ने सत्याग्रह का बिगुल फूंका था, जिसके आगे अंग्रेजी हुकूमत को झुकना पड़ा था। यह आन्दोलन आजादी की लड़ाई में मिल का पत्थर साबित हुआ और गाँधी जी को महत्मा बना दिया। इस ऐतिहासिक सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष और आजादी के सात दशक हों गए फिर भी किसान बेहाल हैं। सच्चाई यह है कि आजादी के बाद लगातार सरकारों ने किसानों की उपेक्षा की हैं जो लगातार जारी रहने के साथ ही नित्य वीभत्स होती जा रही है। सबसे दुखद पहलू यह भी हैं कि इस शताव्दी वर्ष के सरकारी आयोजनों में खेती व किसान के मुद्दे गायब हैं। ये बातें कोशी नव निर्माण मंच के आह्वान पर शुरू कोशी किसान एकता अभियान द्वारा जिले के किसानों के सवालों पर आयोजित किसान सत्याग्रह में वक्ताओ ने कही। वक्ताओ ने कहा कि सरकारी नीतिगत उपेक्षा से खेती किसान को खा रही हैं इसका ज्वलन्त उदाहरण किसानों की आत्महत्याए हैं। इसके बाद भी सरकारे संवेदनशील नहीं हो रही हैं। अभी एक सप्ताह भी नहीं हुए कि देश की राजधानी में अपनी मांगो के नहीं माने जाने पर तमिलनाडु के किसानो को नंगा होकर विरोध करना पड़ा। वक्ताओं ने स्थानीय स्तर की समस्यायों रेखांकित करते हुए कहा कि खेती के उत्पाद लागत खाद बीज कीटनाशक के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। फसल लगाते समय किसानों के सस्ते ऋण की आसान व्यवस्था नहीं हैं। वहीं उपज होने पर सरकार नीतिगत अक्षमता के कारण खरीद नहीं हों पाता हैं और मज़बूरी में किसानों को अपनी उपज औने पौने दामों में व्यापारियों को बेचने मजबूर होना पड़ता है। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील कोशी अंचल में समय समय पर आने वाली आपदाएं किसानों पर कहर बनकर टूटती हैं। नतीजा है कि किसान साल दर साल कर्ज में डूबता जा रहा हैं। कभी इसकी जमीन बिकती हैं तो कभी उत्पादन का मालिक पलायन करके मजदूरी करने पर विवश होता है।

इससे पहले सोमवार को सभी सत्याग्रही मधेपुरा रेलवे स्टेशन पर जमा हुए और जहाँ से किसान सत्याग्रह यात्रा निकाली गयी, जो मेन रोड होते हुए कालेज चौक, बस स्टैंड के बाद समाहरणालय धरना स्थल पहुंची। यात्रा में किसानों को सम्मान मिले, फसल का सही दाम मिले, मक्का समेत सभी फसलों का लाभकारी मूल्य तय करों, पूज्य बापू अमर रहे, सत्याग्रह शताब्दी जिंदाबाद के जोरदार नारे गूंजते रहे। समाहरणालय के समक्ष धरना स्थल पर किसान सत्याग्रह रामजी दास की अध्यक्षता में शुरू हुआ। सत्याग्रह को अनिल यादव, श्यामसुंदर, निराला, ई प्रभात, अमरेन्द्र, लखनलाल दास, अनिल मेहता, रामरूप पासवान, बिजेंद्र, अरुण, नंदकिशोर, चन्द्र किशोर, मंटू, शिशुपाल, धीरेन्द्र, दुनी दत्त, भूपेंद्र कुमार, चन्दन, अजय, प्रमोद संदीप, रणवीर, रौशन, दिलीप झा, त्रिलोक, शिवनंदन मंडल, यशपाल, शम्भू, साधू साव व महेन्द्र इत्यादि ने संबोधित किया।

नंदकिशोर ने लगाया आरोप, सरकारी सुस्ती के कारण जल परियोजनायें अधर में

पटना(अपना बिहार, 18 अप्रैल 2017) - बिहार विधान सभा की लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा है कि राज्य सरकार की इच्छाशक्ति मृतप्राय होने के कारण लगभग साढ़े पांच अरब रूपये की पटना जलापूर्ति योजना आधा तितर आधा बटेर हो कर रह गयी है। स्थानीय निकायों के चुनाव की घंटी बजने के बाद सरकार की ओर से आनन-फानन में 11 बोरिंग स्टेषनों का उद्घाटन कर योजना की खानापूर्ति की जा रही है जबकि प्रस्तावित एक दर्जन से अधिक जलमीनारों के निर्माण के लिए राज्य सरकार जमीन तक उपलब्ध नहीं करा सकी है। श्री यादव ने कहा कि एनडीए के शासन काल में भाजपा कोटे के नगर विकास मंत्री के अथक प्रयास के बाद 537 करोड़ रूपये की पटना में जलापूर्ति योजना पर काम शुरू हुआ था लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद शहरियों को शुद्ध जल की आपूर्ति सुनिश्चित न हो सकी । उधर योजना राशि भी बढ़कर 927 करोड़ रूपये हो गयी है। पटना नगर निगम का चुनाव नजदीक आने पर राजधानी में जलापूर्ति की 11 योजनाओं का हड़बड़ी में उद्घाटन कर जनता को कोई लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि जलापूर्ति की पाइप लाइन पचास वर्ष पुराना है। आष्चर्य है कि अंग्रेजों के जमाने के तमाम नियम-कानून तो बदल गये लेकिन राजधानी में जलापूर्ति की पाइप लाइन नहीं बदली गयी ।

किसानों का कर्ज माफ करे सरकार: श्रीभगवान सिंह कुशवाहा

पटना(अपना बिहार, 18 अप्रैल 2017) - जन अधिकार पार्टी (लो) के प्रदेश अध्‍यक्ष एवं पूर्व मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा ने कहा है कि किसानों को दिया गया कृषि ऋण पूरी तरह माफ कर देना चाहिए। पटना में पत्रकारों से उन्‍होंने कहा कि बिहार के किसान सालों भर प्राकृतिक आपदा से पीडि़त रहते हैं। उत्‍तर बिहार के किसान बाढ़ से और दक्षिण बिहार के किसान सुखाड़ से पीडि़त हैं। उनकी आर्थिक हालात खराब रहती है। इस कारण किसानों का कृषि ऋण माफ कर देना चाहिए। श्री सिंह ने कहा कि उत्‍तर प्रदेश की सरकार ने किसानों का 36 हजार करोड़ का कृषि कर्ज माफ कर दिया है। बिहार में किसानों पर 30 हजार करोड़ रुपये का कृषि ऋण है, उसे राज्‍य सरकार को माफ कर देना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्‍य में किसानों के लिए 180 योजनाएं संचालित हो रही हैं। लेकिन इन योजनाओं के लिए आवंटित एक भी राशि सरकार ने खर्च नहीं किया है। इस कारण सरकारी योजनाओं के लाभ किसान वंचित रह गये हैं। इसलिए सरकार को तत्‍काल कृषि ऋणों को पूरी तरह माफ कर देना चाहिए।

सुमो ने फ़िर अलापा सीबीआई का राग

पटना(अपना बिहार, 18 अप्रैल 2017) - चर्च की जमीन पर कब्जा एवं अपनी पत्नी की फ़र्जी डिग्री व अकूत बेनामी संपत्ति वाले सुशील मोदी ने उलटा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत चरितार्थ करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से राजद प्रमुख लालू यादव के परिवार की बेनामी सम्पति और जमीन से जुड़े तमाम मामलों की जांच अविलम्ब सीबीआई को सुपुर्द करें। 2008 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ही निर्देश पर शिवानन्द तिवारी और ललन सिंह ने तत्कालीन रेलमंत्री लालू यादव पर रेलवे के दो होटलों के बदले हर्ष कोचर से 200 करोड़ की बेनामी जमीन पटना में डिलाइट मार्केटिंग कम्पनी के नाम से लेने का पर्दाफास किया था। अब इस मामले की जांच और कार्रवाई करने से मुख्यमंत्री क्यों भाग रहे हैं?

उन्होंने कहा कि लालू यादव ने आज तक इसका जवाब नहीं दिया है कि आखिर ओम प्रकाश कत्याल ने पटना शहर की करोड़ों की कीमती जमीन और ए के इंफोसिस्टम कम्पनी लालू यादव के परिवार को क्यों सौंप दिया। इसी प्रकार हर्ष कोचर की डिलाइट मार्केटिंग कम्पनी और उसकी 200 करोड़ की जमीन पर लालू परिवार का कब्जा कैसे हो गया?

उन्होंने यह भी कहा कि लालू यादव के बेटे तेजप्रताप यादव ने औरंगाबाद में 2010 में 53 लाख में ली गई 45 डिसमिल जमीन जिसकी आज की कीमत 15 करोड़ रुपये हैं की जानकारी चुनाव आयोग व राज्य सरकार से क्यों छुपा लिया? उन्होंने कहा कि लालू यादव के दबाव और सरकार गिरने के डर को छोड़ कर नीतीश कुमार हिम्मत दिखाएं और लालू परिवार की बेनामी सम्पति की जांच सीबीआई को सौंपे। इसके साथ ही भ्रष्टाचार के जरिए अकूत सम्पति अर्जित करने में जुटे मंत्री तेज प्रताप व तेजस्वी यादव को अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त करें।

जाति छोड़ इंसाफ़ करें सभापति अवधेश नारायण सिंह, मगध महिला कालेज की प्रोफ़ेसर सुहेली मेहता ने की मांग

पटना(अपना बिहार, 17 अप्रैल 2017) - मगध महिला कालेज में प्रोफ़ेसर सुहेली मेहता ने विधान परिषद के अंदर एक महिला पार्षद के साथ की गयी छेड़छाड़ मामले में इंसाफ़ करने का अनुरोध किया है। फ़ेसबुक पर जारी अपने अनुरोध में प्रोफ़ेसर मेहता ने कहा कि लोकतंत्र के मंदिर बिहार विधान मंडल में विधान पार्षद लालबाबू के द्वारा एक महिला विधान पार्षद के साथ छेड़- छाड़ के लगभग एक महीने हो गए । इस अपराध की सजा के रूप में पार्टी ने बस उन्हें निलंबित कर अपनी औपचारिकता मात्र तो निभा दिया वो भी विधान मंडल के विरोधी दल के नेता सुशील मोदी के दो दिनों तक निर्दोष साबित कर बचाने के बाबजूद।

उन्होंने कहा कि हो सकता है कि पैरवी, सिफारिस या किसी बहाने इन्हें क्षमा दान भी मिल जाये । सवाल यह है कि विधान परिषद के अभिभावक (सभापति) ने इस शर्मनाक घटना को संज्ञान में लिया या नही। अगर संज्ञान में लेते तो अभी तक लालबाबू को कड़ी सजा मिल गयी रहती। पीड़ित विधान पार्षद ने सभापति से लालबाबू के बेशर्म कृत्य की लिखित शिकायत भी की थी। ताज्जुब है कि मीडिया बंधू ने भी इस शर्मनाक घटना को फॉलोअप नही किया। ताज्जुब यह भी है कि सभी पार्टी जबरदस्ती एक दूसरे के विरोध का झूठ मुद्दा खोजती रहती है लेकिन महिला पार्षद की अपनी पार्टी (लोकजनशक्ति पार्टी) के नेता ने दो दिन बाद औपचारिक रूप से आपत्ति जताई। शायद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को डर था कि कहीं भाजपा, जिसके रहमोकरम पर वो चल रहे है (जिस पार्टी से लालबाबू हैं) उन्हें कोई क्षति न पहुचाये। जब लालबाबू को पार्टी ने निलंबित किया तब जाकर महिला पार्षद के नेता चिराग पासवान की नींद खुली।

उन्होंने कहा कि आगामी 24 अप्रैल को GST बिल पास होने के लिए सदन के एक दिन के सत्र में हम लालबाबू पर भी फैसले केलिए अपेक्षित हैं। उन्होंने कहा कि ना मैँ किसी पार्टी की बात कर रही और न किसी जात की। में तो बस एक महिला होने के नाते महिलाओं के तरफ से एक मांग कर रही हूँ विधान परिषद के अविभावक से कि पीड़िता हो सकता है कि अपनी प्रतिष्ठा को देखते हुए अपनी आवाज मीडिया में बुलंद न कि हों या सदन में हंगामा नही किया हो, बाबजूद इसके आधी आबादी की अस्मिता को ध्यान में रखते हुए इतिहास में कभी इस तरह की नही घटने वाली घटना जिसे लालबाबू ने अंजाम दिया..इसके लिये सजा भी वैसी ही ऐतिहासिक हो कि ऐसी घटना दोबारा न होकर यह भी इतिहास ही बन जाये।

प्रशिक्षण शिविर की तैयारी में जुटा राजद

पटना(अपना बिहार, 17 अप्रैल 2017) - राजगीर में राजद के प्रशिक्षण शिविर की तैयारी के लिए रविवार को पार्टी कार्यालय में तैयारी समिति की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचन्द्र पूर्वे ने बताया कि शिविर में कार्यकर्ताओं को अनुशासन और चुनौतियों का सामना करने की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस से जैसी चुनौतियां मिल रही हैं, उसका सामना करने के गुर भी कार्यकर्ताओं को सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने वालों के लिए खान-पान आदि की व्यवस्था को उप समिति बनाई गई है। पार्टी के राज्य कार्यकारिणी सदस्य भाई अरुण कुमार ने कहा कि बैठक में कुमार राकेश रंजन, बल्ली यादव, नन्दू यादव, राजेश पाल, देवकिशुन ठाकुर, सुनील यादव, भाई सनोज यादव, भाई अरुण कुमार, केडी यादव, सत्येन्द्र पासवान, ई. अशोक यादव और निरंजन कुमार चन्द्रवंशी ने भी विचार रखे।

मुवक्किलों को लूटने पर लगी रोक तो भड़के वकील, केंद्र सरकार ने बनाया है नया कानून

पटना(अपना बिहार, 17 अप्रैल 2017) - बिहार सहित पूरे देश के तमाम वकील आगामी 21 अप्रैल को एक बार फिर न्यायिक कार्य नहीं करेंगे। साथ ही उस दिन विधि आयोग के प्रस्तावित बिल को जिला मुख्यालय सहित अन्य जगहों पर जलाने का काम किया जाएगा। बताते चलें कि केंद्र सरकार ने हाल ही में एक कानून बनाया है जिसके जरिए एक वकील द्वारा एक दिन में लड़े जाने वाले केसों की अधिकतम संख्या तय कर दी गयी है। मिली जानकारी के अनुसार आगामी 2 मई को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नेतृत्व में पूरे देश के वकील संघों के प्रतिनिधि पटियाला हाउस से राजघाट तक वकील विरोधी काला कानून के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। रविवार को बार काउंसिल ऑफ बिहार के ब्रज किशोर सभागार में पूरे प्रदेश के वकील संघों की बैठक हुई। इसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा मुख्य अतिथि थे। अध्यक्षता बार काउंसिल ऑफ बिहार के पूर्व चेयरमैन राजेंद्र प्रसाद सिंह ने की।

प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए वकील संघों के अध्यक्ष व महासचिवों ने प्रस्तावित बिल का पूरजोर विरोध करते हुए कहा कि समाज को हक दिलाने का काम वकील करते हैं और अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए सड़क पर उतरना पर रहा है। यह सरकार के लिए शर्म की बात है। सरकार वकील विरोधी कानून को तुरंत रद्दी के टोकरी में डाल दें। उनका कहना था कि 21 अप्रैल को सांकेतिक हड़ताल के साथ बिल की प्रति जलाने का काम किया जाएगा। इसके बाद क्रमबद्ध ेतरीके से प्रस्तावित बिल का विरोध किया जाएगा। 1 मई तक बिल वापस नहीं हुआ तो 2 मई को दिल्ली कूच होगा।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन सूरज नारायण प्रसाद सिन्हा ने कहा कि आर-पार की लड़ाई लड़नी होगी। अगर आत्मदाह की नौबत आयी तो वह सबसे पहले आत्मदाह करेंगे। बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के प्रस्ताविक एडवोकेट एक्ट संशोधन बिल का विरोध करते हुए बताया कि सोमवार से हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बिल को लेकर सोशल मीडिया में फैलाए जा रहे अफवाहों पर ध्यान नहीं देने तथा इस पर बीसीआई का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि बीसीआई ने कभी भी इस बिल का समर्थन नहीं किया है। कुछ वकील आपस में फूट डालने के लिए गलत अफवाह फैला रहे हैं। वकीलों को एकजुट होकर आंदोलन तेज करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि विधि आयोग ने वकीलों पर अंकुश लगाने के लिए ऐसा कानून बनाया है कि कोई भी वकील वकालत करने नहीं आएगा। उन्होंने बताया कि कानून मंत्री से उनकी बात हुई है, लेकिन जब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल जाता तब तक आंदोलन चलता रहेगा।

बैठक में बार काउंसिल ऑफ बिहार के पूर्व सदस्यों में योगेश चंद्र वर्मा, रमाकांत शर्मा, शशि एस किशोर, राजेश्वर प्रसाद, सुदामा राय, विश्वनाथ प्रसाद सिंह, अखौरी मंगला चरण श्रीवास्तव, उमेश प्रसाद सिंह, अंजनी परासर आदि वकील उपस्थित थे।

अगलगी की घटनाओं को रोके सरकार : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 17 अप्रैल 2017) - विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि राज्य में हर साल आगलगी की घटनाओं से सैकड़ों घटनाएं होती हैं, जिस में लोगों की मौतें, पशुओं के जलने से मौतें होती हैं। करोड़ों का नुकसान होता है। इस साल पूरे सूबे के अंदर जनवरी से अब तक 970 आगलगी की घटनाएं हुई, जिसमें 5 लोगों की मौत हुई, 20 पशुओं की जानें गयीं। सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग सूबे के अंदर आलगली की घटनाओं को रोकने में पूरी तरह से विफल रहीं। डा. कुमार ने कहा कि इस साल जनवरी से अब तक पूरे सूबे के अंदर 970 आगलगी की घटनाएं हुई, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गयी, 20 पशुओं आगलगी की चपेट में आने से मौत हो गयी। इसके साथ आगलगी से सूबे के अंदर 502 एकड़ की फसल जल कर नष्ट हो गयीं। जिस कारण 1398 मकान आगलगी में जल गयें।

डा. कुमार ने कहा कि राज्य के अंदर आए दिन आगलगी की घटाएं हो रहीं हैं, जिस में हादसे हो रहें हैं। लोगों का घर, जान-माल का नुकसान हो रहा है। सरकार फिर भी कुछ नहीं कर रहीं है।डा. कुमार ने सरकार से मांग किया कि अगलगी से जले घरों को बनाने के लिए सरकार मुआवजा दें, पशुओं की मौत की क्षतिपूत्र्ति करें। जिन के परिवार के लोग जल कर मरे हैं, उन्हें मुआवजा दें और एक परिजन को सरकारी नौकरी दें। साथ ही किसानों के जले फसल का मुआवजा राशि दें।

नंदकिशोर ने लगाया न्यायालयों में चल रहे निर्माण पर सवाल

पटना(अपना बिहार, 17 अप्रैल 2017) - बिहार विधान सभा की लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा है कि खाकी के खौफ के साथ अब धोखाधड़ी करने वाले आर्थिक अपराधियों का न्याय के मंदिर से भी डर-भय समाप्त हो गया है। न्यायालयों के भवन निर्माण में अनियमितता और गड़बड़ी यही बताती है। श्री यादव ने कहा कि जिला न्यायालयों में आधार भूत संरचनाओं और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कार्य आधी अधूरी स्थिति में हैं। राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से इसकी मुकम्मल रिपोर्ट मांग कर स्पष्ट कर दिया है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानक के अनुसार नहीं हुआ। सभी जिला व्यवहार न्यायालयों में वहां के जिला एवं सत्र न्यायाधीष के परामर्ष से भवन, रैम्प, लिफ्ट, शौचालय, पेयजल केन्द्र, सुरक्षा पोस्ट आदि का निर्माण होना था। लेकिन राज्य सरकार की उदासीनता से लापरवाह विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की सांठगांठ ने ऐसा कुछ नहीं किया । इसके लिए गत वर्ष सरकार की ओर से दी गयी कड़ी हिदायत भी बेअसर रही और जिला व्यवहार न्यायालयों तथा अनुमंडल न्यायालयों में बुनियादी सुविधाओं और आधारभूत संरचनाओं का निर्माण नहीं हो पाया।

28 वर्ष के हुए तेजप्रताप, धर्म निरपेक्ष भारत के प्रति जताया अपना संकल्प

पटना(अपना बिहार, 17 अप्रैल 2017) - रविवार को स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव 28 वर्ष के हो गये। अपने जन्मदिन को श्री यादव ने खास अंदाज में मनाया। खास बात यह रही कि इस मौके पर उन्होंने धर्म निरपेक्ष भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संकल्प लिया। वही दूसरी ओर उनके जन्मदिन पर रविवार को बधाई और आशीर्वाद देने वालों का तांता लगा रहा। सुबह से ही बारी-बारी से लोग उनके आवास पर फूलों का गुलदस्ता भेंटकर उन्हें जन्मदिन की बधाई देते रहे। इस अवसर पर कलाकारों के कई ग्रुप ने बधाई गीत गाये और उनके स्वस्थ सुखद ,दीर्घ जीवन की कामना की। साथ ही राजद प्रमुख लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी ने बेटे तेज प्रताप यादव को जन्मदिन पर बधाई दी। इसके पहले स्वास्थ्य मंत्री ने माता-पिता का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। तेजप्रताप यादव को जन्मदिन की बधाई देने वालों में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे, तनवीर हसन, मंत्री विजय प्रकाश, विधायक राहुल तिवारी और सुबोध राय भी शमिल थे। पार्टी नेता राकेश रंजन, उत्तर प्रदेश राजद अध्यक्ष अशोक सिंह, चंदेश्वर प्रसाद सिंह, अशोक सिन्हा सहित कई राजद कार्यकर्ताओं ने भी स्वास्थ्य मंत्री को बधाई दी। युवा राजद व छात्र राजद के पदाधिकारियों के साथ महुआ विधानसभा क्षेत्र के लोग भी बधाई देने पहुंचे।

अपनी पत्नी की फर्जी डिग्री के बारे में मुंह खोलें सुमो, राजद विधायक शक्ति सिंह यादव ने किया पलटवार

पटना(अपना बिहार, 16 अप्रैल 2017) - राजद ने पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी से सवाल किया है कि वह अपनी पत्नी की डिग्री के साथ उन बेनामी संपत्तियों के बारे में क्यों चुप हो गए जिसका खुलासा राजद ने किया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और विधायक शक्ति सिंह यादव ने मांग की है कि श्री मोदी की पत्नी की डिग्री की जांच होनी चाहिए। खुद श्री मोदी को भी बताना चाहिए कि उनकी पत्नी की डिग्री किस यूनिवर्सिटी की है।

श्री यादव ने कहा है कि श्री मोदी तो राजद प्रमुख की किसी भी संपत्ति को बेनामी नहीं बता पा रहे हैं। उनके पास जो भी है खुली किताब की तरह है और जनता व सरकार की जानकारी में है। लेकिन राजद ने जिन बेनामी संपत्तियों की चर्चा की है उसके बारे में श्री मोदी कोई सफाई नहीं दे पा रहे हैं। अब तक वह नहीं बता पाए कि श्री मोदी के परिजनों ने कब्जा की गई चर्च की जमीन को कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक क्यों नहीं खाली किया। राजेन्द्र नगर रोड नम्बर 13 में बने रहे आलीशान बंगले, सोहना रोड गुड़गांव के रीयल एस्टेट और उत्कर्ष स्फटिक लिमिटेड के बारे में भी वह कुछ नहीं बोल रहे हैं। बताएं कि इन सबके पीछे वह खुद या उनके परिजन हैं या नही?

श्री यादव ने आरोप लगाया है कि अरबों की बेनामी संपत्ति के पीछे न सिर्फ वह हैं बल्कि भाजपा के कई नेताओं का यही हाल है। अभी तो इतनी सी बात पर उनकी बोलती बंद हो गई। आगे अभी और खुलासे होने हैं। बड़ी बेनामी संपत्ति के पीछे उनके हाथ होने की चर्चा भाजपा के नेता भी करते हैं। कई सारे व्यवसायियों के साथ भी उनका खेल चल रहा है, जिसे भाजपा के ही नेता सर्वजनिक करने में लगे हैं।

फ्री वाई-फाई का केवल सदुपयोग कर सकेंगे युवा, सरकार ने की पूरी तैयारी

पटना(अपना बिहार, 16 अप्रैल 2017) - फ्री वाईफाई इंटरनेट सेवा से जुड़ने वाले उच्च शैक्षणिक संस्थानों में नेटवर्क की कोई समस्या ना आए इसके लिए जगह-जगह कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। ये कंट्रोल रूम इस बात का भी ख्याल रखेंगे कि कोई इस सुविधा का दुरूपयोग नहीं कर पाये। मिली जानकारी के मुताबिक 13 कॉलेजों के सिस्टम की मॉनिटरिंग के लिए एक कंट्रोल रूम होगा। कंट्रोल रूम में न्यूनतम दो कर्मचारी रहेंगे। कंट्रोल रूम से जुड़े कॉलेजों के नेटवर्क में कोई भी दिक्कत आएगी तो ये कर्मचारी तत्काल वहां जाकर ठीक करेंगे। गौरतलब है कि राज्य के 309 उच्च शैक्षणिक संस्थानों में से 165 संस्थान फ्री वाईफाई इंटरनेट सेवा से जुड़ चुके हैं। शेष कॉलेजों के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं का मोबाइल नंबर भी इस सेवा से शीघ्र जोड़े जाएंगे। इस फ्री वाईफाई इंटरनेट सेवा का उद्घाटन बिहार दिवस के मंच से 22 मार्च को हुआ था।

राज्य के 309 उच्च शैक्षणिक संस्थानों को इस सेवा से जोड़ना है। इनमें से एलएंडटी कंपनी द्वारा 287 शैक्षणिक संस्थानों में वाईफाई नेटवर्क बिछाने का काम पूरा किया जा चुका है। शेष कॉलेजों में विभिन्न व्यवधानों के कारण काम नहीं हो सका है। सूचना एवं प्रावैधिकी विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक फ्री वाईफाई इंटरनेट नेटवर्क के निर्बाध संचालन के लिए 13 कॉलेजों के बीच एक कंट्रोल रूम बनाने का फैसला लिया गया है। एलएंडटी के कर्मचारी इस कंट्रोल रूम में तैनात होंगे।

सुमो ने दी राजद नेता मनोज झा को मानहानि की धमकी

पटना(अपना बिहार, 16 अप्रैल 2017) - वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. मनोज झा को मानहानि के मुकदमे की धमकी दी है. बताते चलें कि सुशील मोदी लगातार कथित मिट्टी और मॉल घोटाले को लेकर लालू परिवार को निशाना बना रहे हैं. इसी क्रम में राजद की तरफ से बेनामी संपत्ति को लेकर अपने ऊपर लगे आरोपों पर बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदीने पलटवार किया है. सुशील कुमार मोदी ने एक क्षेत्रीय चैनल से बातचीत में कहा कि वह राजद के प्रवक्ता मनोज कुमार झा पर मानहानि का केस करेंगे. सुशील मोदी ने मनोज झा के आरोपों को बिल्कुल झूठा और बेबुनियाद करार दिया. उन्होंने कहा किअगर मेरी संपत्ति सिद्ध हो गयी तो मैं अपनी प्रोपर्टी लालू को दे दूंगा. श्री मोदी ने बताया कि वह राजद को बहस की खुली चुनौती पर कहा कि मैं खुद राजद कार्यालय में जाकर बहस करने को तैयार हूं. मुझे राजद की ओर समय और तारीख बता दी जाये. इससे पूर्व शुक्रवार को राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने संवाददाता सम्मेलन कर सुशील मोदी पर बेनामी संपत्ति जमा करने का आरोप लगाया था. राजद की ओर से कहा गया कि मोदी का राजेंद्र नगर रोड नंबर 13 में आलिशान महल है. इतना ही नहीं प्रवक्ता द्वारा यह भी कहा गया था कि सोहना रोड,गुड़गांव में भी सुशील मोदी का रियल स्टेट से संबंध है.

नंदकिशोर ने लालू-नीतीश को बताया आरक्षण विरोधी

पटना(अपना बिहार, 16 अप्रैल 2017) - बिहार विधान सभा की लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव को राजद प्रमुख लालू प्रसाद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आरक्षण विरोधी लगने लगे हैं। अपने बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि पिछड़े वर्ग के आरक्षण विधेयक का राज्य सभा में राजद, जदयू के विरोध ने लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के चाल, चरित्र और चेहरे को बेनकाब कर दिया है। श्री यादव ने कहा कि पिछड़े वर्ग के बीच अपना चेहरा चमकाने के लिए लालू प्रसाद और नीतीश कुमार हिमायती बने फिरते हैं। लेकिन पिछड़े वर्ग के आरक्षण को जब संवैधानिक दर्जा देने का विधेयक राज्य सभा में आया तो उनके दल ने इसका विरोध किया। पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के प्रति दोनों नेता सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाते हैं।

भाजपा ने सीएम को सराहा, दहेज कुप्रथा कानून को सख्ती से लागू करे सरकार

पटना(अपना बिहार, 16 अप्रैल 2017) - विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने दहेजबंदी को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आहवान का स्वागत किया। अपने बयान में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के अंदर शराबबंदी के बाद अब दहेज लेने वालों के घरों में शादी में जाने का वहिष्कार करने को कहा है, यह सामाजिक कुप्रथा को समाप्त करने की अच्छी बात हैं। लेकिन राज्य के अंदर एक साल में दहेज के लिए 987 बेटियां बलि चढ़ गयीं। नीतीश जी दहेज के लिए आज सूबे की 987 बेटियों की बलि चढ़ चुकी हैं, उसे रोकने के लिए कठोर कदम कब उठाएंगे। दहेज कानून बना हुआ है, उसका पालन नहीं हो रहा हैं, जिसके कारण हजारों जाने जा रहीं हैं, जिसे रोकने में नीतीश सरकार पूरी तरह से विफल साबित हो चुकें हैं। इसके लिए नीतीश कुमार पूरी तरह से जिम्मेवार हैं।

राजद ने सुशील मोदी को किया कटघरे में खड़ा, राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने हर आरोप का दिया जवाब, पूछे कई सवाल

पटना(अपना बिहार, 15 अप्रैल 2017) - राजद ने भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पर पलटवार करते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा किया। राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रोफेसर मनोज झा और प्रदेश अध्यक्ष डा. रामचंद्र पूर्वे ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सुशील मोदी खुद बेनामी संपत्ति के मालिक हैं और दूसरों पर झूठा व मनगढ़त आरोप लगाते रहते हैं। इस मौके पर प्रो झा ने श्री मोदी से कई सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि श्री मोदी ने कहानी मिट्टी से शुरू की थी और जब साक्ष्य और सबूत ने उन्हें कटघरे में खड़ा कर दिया तो उन्होंने बिलकुल चुप्पी साध ली। प्रो झा ने कहा कि सम्बंधित कंपनी और चिड़ियाघर के निदेशक ने साफ साफ सबूत रख उन्हें गलत सिद्ध कर दिया ।

प्रो झा ने कहा कि श्री मोदी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध और हमारे द्वारा प्रदत्त सूचनाओं को थोडा थोडा क्यूँ परोस रहें हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि श्री मोदी के पास नैतिक बल है तो एक बार सार्वजनिक तौर पर खुले आम बहस हो जाए। जगह और समय आप तय करें। गाँधी मैदान में करने से आपत्ति हो तो हम भाजपा कार्यालय में आकर भी बहस को तैयार हैं। प्रो. झा यही नहीं रूके। उन्होंने कहा कि हमने तो अपने सार्वजनिक जीवन और राजनीति में निरंतर शालीनता का निर्वहन किया है। जब पूरा बिहार और आपकी पार्टी के भी कुछ लोग आपकी पत्नी की शैक्षणिक डिग्री पर शक और शुबहा कर रहे थे तो हम चुप रहे। जांच की जद अगर बढ़ेगी तो उस मसले पर हमारी चुप्पी भी काम नहीं आएगी।

प्रो. झा ने कहा कि श्री मोदी के उपर दिल्ली और यूपी में कई बेनामी संपत्तियों के खुलासे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री मोदी के परिजन आॅडी कार में घुमते हैं, यह बात तो उनके ही दल के कहते हैं। उन्होंने कहा कि श्री मोदी के दल के कुछ करीबी लोग(दिल्ली और पटना के ) उत्कर्ष स्फटिक लिमिटेड के निदेशक को एक तरह का 'कवर' मानते हैं। उन्होंने कहा कि इस कंपनी में आपकी साझेदारी के चर्चे सरेआम हैं।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि श्री मोदी ने आरोप लगाने के क्रम में नैतिकता की सारी हदें पार कर दी। उन्होंने कहा कि चपरासी का बेटा भी मुख्यमंत्री बन सकता है और लालू प्रसाद ने यह साबित किया है। अब श्री मोदी तेजस्वी प्रसाद पर आरोप लगा रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि तेजस्वी 13 वर्ष की उम्र से क्रिकेट खेल रहे हैं। उन्होंने रणजी और फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेला है। उन्होंने जो कुछ अर्जित किया है, अपनी कमाई से किया है। प्रो. झा ने कहा कि यदि श्री मोदी को कोई शक हो तो वे अरूण जेटली या कीर्ति आजाद से जानकारी हासिल कर लें।

प्रो. झा ने कहा कि हमारी संस्कृति में बेटियों के शादी ब्याह के बाद उसके सरोकारों और संसाधनों को अलग नजरिए से देखा जाता है। श्री मोदी ने फरेब की राजनीति के चक्कर में वह रस्मो रवायत भी भुला डाली। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद की बेटियों जिन्हें श्री मोदी ने कटघरे में खड़ा किया, उनलोगों ने 2001 में अप्लाई किया था और तब उनका रिहायशी पता वही था क्योंकि राबड़ी जी, उनकी माँ मुख्यमंत्री थी. क्या यह गुनाह था।

सुमो ने फिर साधा लालू के बेटे-बेटियों पर निशाना

पटना(अपना बिहार, 15 अप्रैल 2017) - शुक्रवार को एक बार फिर भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बेटे-बेटियों पर निशाना साधा। हालांकि उन्होंने इस बात का कोई प्रमाण नहीं किया कि कोई धांधली हुई है। संवाददाता सम्मेलन में श्री मोदी ने कहा कि लारा डिस्ट्रीब्यूटर्स के नाम से एक कंपनी का पुनर्गठन 22 मार्च, 2010 को किया गया और डा. मीसा भारती, चन्दा यादव, राबड़ी देवी, रागिनी लालू इस कम्पनी के निदेशक नियुक्त किए गए जो अभी तक निदेशक बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि राजद प्रमुख के बड़े पुत्र तेज प्रताप 21 अप्रैल, 2010 को निदेशक नियुक्त किए गए परन्तु 2015 विधान सभा चुनाव परिणाम के बाद 9 नवम्बर, 2015 को हट गए। हालांकि तेज प्रताप इस कम्पनी में अभी भी 2 लाख 51 हजार शेयर के हिस्सेदार हैं। इसके अतिरिक्त मीसा भारती (1000) चन्दा यादव (2000) राबड़ी देवी (1 लाख 17 हजार) और रागिनी (1 लाख) शेयर के हिस्सेदार हैं। उन्होंने कहा कि तेज प्रताप यादव द्वारा 2010 में औरंगाबाद में 7 लोगों से 53 लाख 34 हजार रुपए की कुल 45-24 डिसमिल जमीन खरीदी गयी। 2 फरवरी, 2012 को इस जमीन को गिरवी रखकर मध्य बिहार ग्रामीण बैंक, औरंगाबाद से 2 करोड़ 29 लाख का कर्ज प्राप्त किया किया। उन्होंने कहा कि 2015 के विधान सभा चुनाव के समय चुनाव आयोग तथा बिहार सरकार के समक्ष सम्पत्ति का ब्यौरा देते समय इस सम्पत्ति के ब्यौरे को छिपा लिया गया। उन्होंने सवाल किया कि 2010 में 20 वर्ष की आयु में 45.24 डिसमिल जमीन खरीदने के लिए 53 लाख 34 हजार रुपए कहाँ से आये?

सभी स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की किताबें, निजी विद्यालय संचालक कर रहे गलत, बोले केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा

पटना(अपना बिहार, 15 अप्रैल 2017) - रालोसपा (उपेंद्र) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि अधिकतर निजी स्कूल छात्रों और अभिभावकों के साथ अन्याय करते हैं। केंद्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था की दिशा में काम कर रहा है। लर्निंग आउटकम डिजाइन किया गया है। इसमें यह तय है कि किस कक्षा को पास करने के बाद छात्र-छात्राओं को क्या आना चाहिए।

शुक्रवार को भारतीय नृत्य कला मंदिर में आयोजित डॉ. अंबेडकर जयंती का उद्घाटन करने के पश्चात श्री कुशवाहा ने कहा कि स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें ही चलें, यह नियम है। स्कूल दूसरी किताबें थोप नहीं सकते हैं। प्राइवेट स्कूलों के बारे में आवश्यक जानकारियां सीबीएसई द्वारा मंगाई जा रही है। शिक्षकों का बीएड होना जरूरी है। इन स्कूलों के शिक्षकों की सूची को वेबसाइट पर डाला जाएगा और आधार से जोड़ा जाएगा।

उन्होंने कहा कि बगैर परीक्षा पास किए छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रवेश देने के मुद्दे पर राज्य सरकारें फैसला लें। तय करें कि फेल होने वाले बच्चे को अगली कक्षा में दाखिला देना है या नहीं। सुझाव दिया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए राज्य सरकार पर्याप्त शिक्षक बहाल करे। डिग्री के आधार पर जो शिक्षक बन गए हैं और पढ़ा नहीं पा रहे हैं, उनकी स्क्रीनिंग कराएं। जो पास हों वे शिक्षक रहें, शेष को दूसरे विभागों में नौकरी दें। श्री कुशवाहा ने कहा कि भारतीय संविधान देश में सभी जाति व धर्म के लोगों का सबसे बड़ा ग्रंथ है। संविधान में वर्णित प्रा?वधानों का कार्यान्वयन हो गया होता तो वंचित समाज को लड़ाई नहीं लड़नी पड़ती। राष्ट्रीय प्रवक्ता पूर्व केंद्रीय मंत्री दसई चौधरी, सांसद रामकुमार शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष भूदेव चौधरी, विधायक सुधांशु शेखर, दलित-महादलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष फेकू राम, लक्ष्मी पासवान, जेपी वर्मा, सत्यानंद दांगी, कंचन चौधरी, भोला शर्मा, उर्मिला पटेल ने भी विचार रखा।

सरकार शीघ्र लागू करे सातवां वेतन आयोग, सरकारी कर्मियों ने की मांग

पटना(अपना बिहार, 15 अप्रैल 2017) - सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट को शीघ्र लागू करने की मांग कर्मचारियों ने उठायी है। कलेक्ट्रेट स्थित संघ भवन में शुक्रवार को आयोजित बैठक में यह मांग उठी। अमित कुमार सिंह की अध्यक्षता में गोपगुट के पथ व भवन कर्मचारी संघ की आयोजित इस बैठक में कमेटी का भी गठन किया गया। इसमें अमित कुमार सिंह को अध्यक्ष, धनेश्वर प्रसाद यादव, दिलीप कुमार सिंह, आशुतोष चन्द्रा, अजय कुमार ठाकुर, मंगल मांझी को उपाध्यक्ष बनाया गया। साथ ही कामेश्वर प्रसाद यादव सचिव व निखिल कुमार सिंह, मुन्ना भगत, वैरिस्टर सिंह संयुक्त सचिव बनाये गए। बैठक में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ गोपगुट के सचिव सैयद मो. नजमी, अर्जुन सिंह, लक्ष्मण मिस्त्री व अन्य थे। वहीं लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग कर्मचारी संघ का एक शिष्टमंडल पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता से मिलकर कर्मचारियों के वेतन विसंगंति को दूर करने के लिए एसीपी के आलोक में वेतन निर्धारण की मांग की।

मूल्यांकन कार्य नहीं करने वाले शिक्षकों पर प्राथमिकी गलत : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 15 अप्रैल 2017) - बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि राज्य के सभी शिक्षक अपनी मांग समान काम समान वेतन को लेकर परीक्षा कॉपियों के मूल्यांकन का वहिष्कार कर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार ने वेतन मांगने वाले 7625 शिक्षकों का वेतन रोका, 776 शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज कराया तथा 2 शिक्षकों को जेल भेजा।

डा. कुमार ने कहा कि राज्य के शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर मैट्रिक एवं इंटमीडिएट परीक्षा की कॉपियों के जांच का वहिष्कार किया, तो सरकार ने कई जिलों में डीईओ ने मैट्रिक की कॉपियों के मूल्याकंन की जिम्मेवारी मिडिल स्कूल और प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों को सौंप दी। जिस कारण कई जिलों में इस से विवाद हो गया और विरोध चल रहा है। साथ ही मिडिल एवं प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों के द्वारा जांच मात्र खानपूत्र्ति होगी और रिजल्ट भी दूषित होगा।

कृतज्ञतापूर्वक याद किये गये बाबा साहब, राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, जदयू, राजद और कांग्रेस ने भी धुमधाम से मनायी बाबा साहब की जयंती

पटना(अपना बिहार, 15 अप्रैल 2017) - कृतज्ञ बिहार ने संविधान निर्माता डा. भीम राव आंबेडकर को उनकी 126वीं जयंती के मौके पर कृतज्ञतापूर्वक याद किया। राज्य सरकार की ओर से मुख्य आयोजन पटना हाईकोर्ट के पास बाबा साहब की प्रतिमा के पास आयोजित की गयी। इस मौके पर राज्यपाल रामनाथ कोविंद एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभिनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर विधायक श्र्श्याम रजक, बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकतार्ओं ने भी बाबा साहब भीमराव अम्बेदकर की आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

वहीं प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में बाबा साहब की जयंती पूरे धुमधाम के साथ मनायी गयी। इस अवसर बड़ी संख्या में उपस्थित कांग्रेसजनों को सम्बोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डा. अशोक चौधरी ने कहा कि देश में समतामूलक समाज के निर्माण में डा0 भीमराव अम्बेडकर की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि महात्मा गाँधी एवं अम्बेडकर एक दूसरे के पूरक थे तथा संविधान के निर्माण में कांग्रेस पार्टी ने समाज के दबे, कुचले एवं बंचितों को आवाज देने एवं उन्हें अधिकार दिलाने का कार्य किया है। जयन्ती समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित विभाग के अध्यक्ष सह विधायक राजेश कुमार ने कहा कि आज देश में असहिष्णुता का वातावरण व्याप्त है तथा वत्र्तमान केन्द्र सरकार दलितों एवं अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव बरत रही है।

उधर राष्ट्रीय जनता दल के राज्य कार्यालय में भारत के संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीम राव अम्बेडकर साहब की 126 वीं जयन्ती समारोहपूर्वक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचन्द्र पूर्वे की अध्यक्षता में मनायी गई। इस अवसर पर बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। माल्यार्पण के बाद बाबा साहब के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचन्द्र पूर्वे ने कहा कि डॉ0 भीमराव अम्बेडकर ने समता, समानता, स्वतत्रंता एवं बन्धुत्व पर आधारित भारत को एक नया संविधान दिया, जिसकी सराहना पूरे विश्व में हुई। उन्होंने कहा कि आजादी के 70 वर्षों के बाद भी आज दलितों, पिछड़ों, अकलियतों और महिलाओं को उनका अधिकार नहीं मिल पाया है। इस अवसर पर प्रधान महासचिव सह विधायक मुन्द्रिका सिंह यादव, सहकारिता मंत्री आलोक कुमार मेहता, पूर्व सांसद मंगनी लाल मंडल, विधायक डॉ फैयाज अहमद, शक्ति सिंह यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. तनवीर हसन, डॉ. विनोद कुमार यादवेन्दु, पूर्व विधायक सुधांशु शेखर भास्कर, प्रो. उमाकांत यादव, रामाशीष यादव, रामावतार पासवान, प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन, प्रगति मेहता सहित सैंकड़ों गणमान्य नेताओं ने भी डा. भीमराव अम्बेडकर के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने प्रभु यीशु मसीह को नमन किया

पटना(अपना बिहार, 15 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुड फ्राइडे के अवसर पर प्रभु यीशु मसीह के बलिदान को स्मरण करते हुये उन्हें नमन किया और कहा कि प्रभु यीशु मसीह ने अपने जीवन और बलिदान के माध्यम से सम्पूर्ण मानवता को प्रेम, दया और निरीहों के प्रति करूणा भाव का संदेश दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिवेश में प्रभु यीशु मसीह के उपदेशों की प्रासंगिकता और बढ़ गयी है। उनके बताये मार्गों के अनुसरण से समस्त मानव समाज के कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। हम सबको प्रभु यीशु मसीह के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लेना चाहिये कि प्रभु यीशु मसीह के आदर्शों का पालन करें।

फुटपाथी कारोबारियों की चिंता करे सरकार : भाजपा

पटना(अपना बिहार, 15 अप्रैल 2017) - बिहार विधान सभा की लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नन्द किशोर यादव ने कहा है कि केन्द्रीय सरकार के एक्ट का पालन नहीं होने के कारण सूबे के फुटपाथी कारोबारी खानाबदोश की जिन्दगी जीने के मजबूर है। राजधानी पटना में अतिक्रमण की सबसे बड़ी समस्या का यह भी एक बड़ा कारण बना हुआ है।

श्री यादव ने कहा कि केन्द्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश भर के फुटपाथी दुकानदारों के जीवन-यापन में सुधार और उनकी दुकानदारी की यथोचित व्यवस्था के लिए स्ट्रीट वेंडर एक्ट 2014 लागू किया था। अन्य राज्यों में इस एक्ट का अनुपालन तो हुआ लेकिन बिहार सरकार इस एक्ट के तहत फुटपाथी वेंडरों की सुधि नहीं ले रही है। इससे पूर्व गठित बिहार राज्य फुटपाथ विक्रेता (जीविका संरक्षण एवं व्यापार विनियमन अधिनियम, 2012) के तहत कमिटी थी। टाउन वेंडिंग कमेटी का क्या हश्र हुआ किसी को नहीं मालूम। केन्द्र सरकार के शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय ने राज्य के 28 शहरों का सर्वेक्षण कर लगभग डेढ़ लाख वेंडर होने की बात कही थी जिसमें सिर्फ पटना में 30 हजार की संख्या है।

श्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार की उदासीनता के कारण राजधानी पटना की बुनियादी व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने की दिशा में कोई काम नहीं हो रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों पर फुटपाथी कारोबारी फैले हैं। उनकी उचित व्यवस्था नहीं हो रही है। वेंडर जोन बनाने और उनके लिए शौचालय व यूरिनल का निर्माण अधर में लटका है। वेंडर जोन बनने के कई महत्त्वपूर्ण फायदे हैं।

प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक स्थगित

पटना(अपना बिहार, 15 अप्रैल 2017) - भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष देवेश कुमार ने कहा कि प्रदेष भाजपा की किशनगंज में 24 और 25 अप्रैल को प्रस्तावित कार्यसमिति की बैठक स्थगित कर दी गई है। उन्होंने बताया कि लोकसभा एवं राज्यसभा से पारित जीएसटी विधेयक पर विचार के लिये बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों की 24 अप्रैल 2017 को आहुत विषेष बैठक के मद्देनजर ऐसा किया गया है । प्रदेश कार्यसमिति बैठक की अगली सूचना बाद में घोषित की जायेगी ।

नक्सलियों ने मचाया आतंक

औरंगाबाद(अपना बिहार, 14 अप्रैल 2017) - औरंगाबाद जिले व झारखंड के पिपरा थाना अंतर्गत पिथौरा गांव के समीप प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के हथियार बंद दस्ता ने दिन के उजाले में जम कर तांडव मचाया. सड़क निर्माण करा रही एक कंपनी के एक खउइ, 10 ट्रैक्टर, एक बाइक को मिट्टी तेल व पेट्रोल छिड़क कर जला डाला. इस घटना को गुरुवार की दोपहर में 15-20 की संख्या में रहे हथियार बंद नक्सलियों ने अंजाम दिया. मिली जानकारी के अनुसार पिपरा थाना क्षेत्र के पिथौरा गांव के समीप औरंगाबाद जिले के नवीन नगर निवासी ठेकेदार रामवृक्ष सिंह सड़क निर्माण का कार्य जेसीबी, ट्रैक्टर के माध्यम से करा रहे थे. इसी बीच 15 से 20 की संख्या में नक्सली पहुंचे और वहां कार्य कर रहे मजदूरों से मारपीट की और उन्हें भगा दिया. उसके बाद वाहन को जला दिया.

मैट्रिक की परीक्षा का मूल्यांकन कर रहे आठवीं के शिक्षक, दिलचस्प यह कि मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार करने वाले बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने जताया एतराज

पटना(अपना बिहार, 14 अप्रैल 2017) - राज्यभर के हाईस्कूल के शिक्षक कॉपियों के मूल्यांकन में मदद नहीं कर रहे हैं। कई जिलों में डीईओ ने मैट्रिक की कॉपियों के मूल्यांकन की जिम्मेवारी मिडिल और प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों को सौंप दी है। कई जिलों में नोटिस भी जारी किया जा चुका है। हालांकि पत्र में लिखा हुआ है कि बीएड करने वाले ट्रेंड शिक्षकों को ही कॉपियों के मूल्यांकन कार्य में लगाया जाए। जो कम से कम स्नातक और ट्रेंड हैं। पटना में आठ मूल्यांकन केन्द्र बनाए गए हैं। सभी जगह कॉपियों का मूल्यांकन कार्य प्रभावित है। पटना के डीईओ ने पत्र जारी कर लिखा है कि मूल्यांकन कार्य प्रभावित हो रहा है, इस वजह से मिडिल स्कूल के शिक्षकों को लगाया गया है। इस तरह का पत्र आरा, बांका, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, छपरा, नालंदा सहित तमाम जगहों के डीईओ ने जारी किया है। इसमें मिडिल स्कूलों के शिक्षकों को कॉपियों के मूल्यांकन के लिए पत्र जारी किया है। हालांकि डीईओ द्वारा जारी पत्र के बाद भी सभी मिडिल स्कूल के शिक्षकों ने अभी तक ज्वाइन नहीं किया है। इससे वे कन्नी कटा रहे हैं। ऐसी सूचना मिल रही है। मिडिल स्कूलों के संगठन वालों ने भी कॉपियों के मूल्यांकन से इनकार कर दिया है। माध्यमिक शिक्षक संघ और वित्तरहित शिक्षकों के मोर्चा का समर्थन कर रहे हैं। वहीं बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदारनाथ पांडेय का कहना है कि बोर्ड के नियमानुसार वैसे ही शिक्षक कॉपियों का मूल्यांकन कर सकते हैं जिनका कम से कम माध्यमिक में तीन साल पढ़ाने का अनुभव है। बिना अनुभव वाले शिक्षकों को कैसे कॉपियों का मूल्यांकन कराने की जिम्मेवारी सौंपी जा रही है। इसका जबाव सरकार को देना होगा। यह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। आंदोलन स्थगित, प्रशासन ने नहीं दी जुलूस निकालने की अनुमतिबिहार माध्यमिक शिक्षक संगठन की ओर से जिला प्रशासन से मौन जुलूस निकालने के लिए अनुमति मांगी गई थी। पर जिला प्रशासन ने शिक्षकों को अनुमति प्रदान नहीं की। इस वजह से आंदोलन को स्थगित कर दिया गया। यह जुलूस संघ कार्यालय जमाल रोड से कलेक्ट्रेट तक जाना था। अनुमति नहीं मिलने से शिक्षकों में काफी आक्रोश है। संघ के महासचिव केदारनाथ पांडेय और अध्यक्ष शत्रुघ्न प्रसाद ने कहा कि सरकार दमनात्मक कार्रवाई के माध्यम से आंदोलन रोकना चाहती है। इस तरह से आंदोलन रुकेगा नहीं बढ़ेगा।

सड़क निर्माण को लगे पंख, एक दर्जन से अधिक आरओबी का रास्ता साफ, प्रधानमंत्री सड़क योजना मामले में भी तेजी के आसार, रंग लाने लगी उपमुख्यमंत्री की कार्यशैली

पटना(अपना बिहार, 14 अप्रैल 2017) - सूबे में सड़क निर्माण से संबंधित योजनाओं को पंख लग गये हैं। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव की सक्रियता के कारण राज्य में दर्जनभर रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) के निर्माण का रास्ता साफ हो गया। इसके अलावा सहरसा शहर में भी एक नया आरओबी स्वीकृत हो गया। पहले से स्वीकृत एक दर्जन आरओबी में आठ के काम का आवंटन एजेंसी को कर दिया गया। दो आरओबी का टेंडर रद्द कर दिया गया। उनका दोबारा टेंडर होगा। इसके अलावा बचे दो आरओबी का मामला अभी टेंडर कमेटी के पास है। जल्द ही अब जमीन पर इसका काम शुरू हो जाएगा। सहरसा शहर के नवस्वीकृत आरओबी को छोड़ दें तो शेष 12 आरओबी से राज्य के सात जिलों को लाभ होगा। ये सभी आरओबी राष्ट्रीय उच्च पथ पर बनाए जाने हैं। इनमें दो फोरलेन के आरओबी होंगे शेष दो लेन के पुल होंगे। इन आरओबी की स्वीकृति दो साल पहले ही केन्द्र सरकार से मिल गई थी। लेकिन निर्माण का मामला फंसा हुआ था। टेंडर प्रक्रिया में काफी समय लग गया। लेकिन अब आठ पुलों का काम ऐजेंसी को आवंटित कर दिया गया है।

इन पुलों के बनने से सबसे अधिक लाभ छपरा जिले को होगा। उस जिले में चार पुल बनाए जाएंगे। हालांकि छपरा में एनएच 101 पर दो पुल बनने हैं, लेकिन इन्हें विभाग मात्र एक पुल ही मान रहा है। भोजपुर जिले के आरा शहर में बनने वाले आरओबी का शिलान्यास भी हो चुका है। इसके शिलान्यास के लिए केन्द्रीय पथ निर्माण मंत्रालय के राज्य मंत्री मनसुक एल मान्डवीय आरा गए थे। कटिहार जिले में दो पुल बनने हैं, तो वैशाली, मधेपुरा और बगहा में एक-एक पुल का निर्माण होना है।

उधर बिहार में अगले साल प्रधानमंत्री सड़क योजना पूरी हो जाएगी। बिहार में इस योजना के तहत कुल 55 हजार, 646 किलोमीटर सड़क बनाने का लक्ष्य था, जिसमें 44 हजार 42 किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं। 11 हजार 600 किलोमीटर सड़कें बननी बाकी हैं। जिसमें 9 हजार 400 किलोमीटर सड़कों के लिए राशि आवंटित हो चुकी हैं।

वित्तीय वर्ष 2016-17 में 6540 किलोमीटर सड़क बनाने का लक्ष्य था, लेकिन 6600 किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं। इसके लिए 5 हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किया गया था जिसमें 3 हजार करोड़ रुपये केन्द्र व 2 हजार रुपये राज्य ने दी। वित्तीय वर्ष 20117-18 में 7 हजार किलोमीटर सड़कें बनाने का लक्ष्य है, जिसके लिए 5500 करोड़ रुपये का बजट है, जिसमें 3300 करोड़ रुपये केन्द्र व 2200 करोड़ रुपये राज्य सरकार देगी। ग्रामीण कार्य विभाग का कहना है कि वर्ष 2018 के मार्च तक 7 हजार किलोमीटर सड़कें बन जाएगी और शेष बची सड़कें दिसंबर 2018 तक पूरी हो जाएगी। इसके बाद प्रधानमंत्री सड़क योजना की द्वितीय फेज शुरू होगी। इस फेज में ग्रामीण सड़कों को मेजर लिंक रूट व थ्रू रूट से जोड़ा जाएगा। बिहार में मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत 35 हजार किलोमीटर सड़कें हैं, जिसमें 6 हजार किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं। शेष सड़कें 5 साल में बनकर तैयार हो जाएंगी। अगले माह 7 हजार किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए टेंडर निकाला जाएगा। बरसात के बाद इन सड़कों का निर्माण युद्धस्तर पर शुरू होगा। मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत वर्ष 2016-17 में 1655.22 करोड़ रुपये के व्यय पर 2314 किलोमीटर सड़कों का कालीकरण कार्य किया गया है।

शंभूनाथ सिन्हा का कुशवाहा से मोह भंग, रालोसपा से दिया इस्तीफा

पटना(अपना बिहार, 14 अप्रैल 2017) - रालोसपा (उपेंद्र) के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष शंभूनाथ सिन्हा ने पद के साथ ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा को अपना इस्तीफा भेज दिया है। इस्तीफा में श्री सिन्हा ने लिखा है कि पिछले कुछ दिनों से वह पार्टी संगठन के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे थे। जिसकी वजह से वह राष्ट्रीय अध्यक्ष की अपेक्षाओं के अनुरूप पार्टी में योगदान नहीं दे पा रहे थे। लिखा है कि इस मुद्दे पर उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी बात रखी थी, लेकिन कोई अपेक्षित कदम नहीं उठाए जाने के कारण उनका पार्टी में बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया था। श्री सिन्हा ने बताया है कि वह अब स्वामी सहजानंद सरस्वती, डॉ श्रीकृष्ण सिंह तथा पं. रामानंद तिवारी जैसे महापुरुषों की नीतियों में आस्था रखने वाले लोगों को राज्यस्तर पर संगठित करेंगे। इसी क्रम में आने वाले दिनों में स्वामी सहजानंद सरस्वती विचार केंद्र के तत्वावधान में राज्यस्तरीय राजनैतिक नवनिर्माण सम्मेलन का आयोजन पटना में होगा। जिसमें भविष्य की राजनीतिक दिशा तय की जाएगी।

बाबा साहब की जयंती पर सुमो ने लालू को कोसा

पटना(अपना बिहार, 14 अप्रैल 2017) - भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की ओर से डा. अम्बेदकर की 126 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उनके परिवार को कोसते हुए कहा कि बिहार में जिन लोगों ने लगातार 15 साल तक राज किया वे जनता की गरीबी दूर करने के बजाय अपनी अमीरी बढ़ाने में लगे रहे। सामाजिक न्याय की ओट लेकर भ्रष्टाचार और गबन-घोटाले को बढ़ावा दिया गया। श्री मोदी ने कहा कि लालू परिवार ने राबड़ी देवी के मुख्यमंत्रित्व काल और लालू यादव के रेलमंत्री रहते यूपीए सरकार के दौरान सारी जमीनें लिखवाई। जिन लोगों से लालू परिवार ने जमीन लिखवाई उनमें केवल शराब फैक्ट्री और होटलों के पूंजीपति मालिक ही नहीं बल्कि उनमें मंत्री, विधायक और सांसद बनाने के एवज में राजनेता भी शामिल रहे हैं। आज बिहार का सबसे बड़ा जमीनदार लालू का परिवार है जो पिछले कुछ वर्षों में अकूत बेनामी सम्पति का मालिक बन बैठा है। शराब फैक्ट्री लगाने वाली कम्पनी एके इंफोसिस्टम की शहर की बेशकीमती जमीन हथियाने वाले लालू यादव खुलासे के चार दिन बाद भी चुप्पी साधे हुए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार में हिम्मत नहीं है कि अपने मंत्रियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करें और उनकी बेनामी सम्पतियों को जब्त करें। श्री मोदी ने कहा कि अम्बेदकर जयंती पर आज सबकों संकल्प लेना चाहिए कि किसी भी कीमत पर किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। समारोह को सम्बोधित करने वालों में श्री मोदी के अलावा विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंगल पाण्डेय, विधायक अरुण कुमार सिन्हा, नितिन नवीन, विश्वनाथ भगत और भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुबोध पासवान आदि प्रमुख थे।

बेरोजगार विरोधी पार्टी है भाजपा : तेजस्वी

पटना(अपना बिहार, 14 अप्रैल 2017) - उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने बीजेपी को बेरोजगार विरोधी पार्टी की संज्ञा दी है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि बेरोजगार विरोधी पार्टी को हमारी सरकार के खिलाफ बोलने को कुछ नहीं मिलता क्योंकि हम जुमले नहीं धरातल पर काम करते है। विकास कार्यों की बिहार में गंगा बह रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल के कुछ कागजी शेर हमारी सरकार की बेहतरीन परर्फ़ॉर्मन्स से इतने हैरान, परेशान व विचलित है कि उनको कुछ सुझ ही नहीं रहा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हम विकास कार्य उनकी पार्टी के विधायकों के क्षेत्रों में भी कर रहे है और विपक्षी विधायकगण खुले तौर पर महगठबंधन सरकार की प्रशंसा करते नहीं थक रहे है जिससे उन कागजी और हवाई नेताओं को अपच की गंभीर बीमारी हो गई है। उन्होंने कहा कि हम युवा है सिर्फ़ विकास और प्रगति की बात करना जानते है। नेगेटिव बातों में उलझना मेरी फितरत नहीं। नेगेटिव लोगों को उनकी नकारात्मकता मुबारक हो।

बाबा साहब की जयंती संकल्प दिवस के रूप में मनाएगी माले

पटना(अपना बिहार, 14 अप्रैल 2017) - भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर की 126 वीं जयंती को हमारी पार्टी सामाजिक बराबरी और अधिकार के संकल्प दिवस के बतौर मनाएगी. इसे विकेन्द्रित रूप से गांव-टोलों-मुहल्लों में मनाया जाएगा और जिला मुख्यालयों पर गोष्ठियां भी आयोजित की जाएंगी. उन्होंने कहा कि दलितों की घोर विरोधी भाजपा द्वारा आज डॉ. अंबेदकर को भी हड़पने की साजिश चल रही है. इसलिए जरूरी है कि डॉ. अंबेदकर के संदेश को सही अर्थों में गांव के दलित-गरीबों-नौजवानों में ले जाने का कार्यभार हमारे सामने है. डॉ. अंबेदकर यह मानते थे कि जाति व्यवस्था को तोड़े बिना दलितों की मुक्ति संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि सामाजिक गुलामी के खिलाफ डॉ. अंबेदकर सामाजिक बराबरी के आंदोलन के नेता थे.

उन्होंने कहा कि आज एक तरफ केंद्र अथवा बिहार सरकार गांधी अथवा अंबेदकर का नाम तो लेती है, लेकिन काम ठीक उलटा करती है. चंपारण सत्याग्रह की शतवार्षिकी मनाने वाली बिहार सरकार बकाये की मांग कर रहे मजदूरों-किसानों पर गोली चला रही है. वहीं, गौरक्षकों व आरएसएस द्वारा पूरे देश में दलितों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया गया है, और भाजपा डॉ. अंबेदकर को आधुनिक मनु कहकर उनके संघर्ष को खत्म कर देने पर आमदा है.

पूर्व मंत्री नरसिंह बैठा का निधन, मुख्यमंत्री ने की राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की घोषणा, लालू सहित अनेक नेताओं ने जताया शोक

पटना(अपना बिहार, 14 अप्रैल 2017) - पूर्व मंत्री नरसिंह बैठा के निधन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव सहित अनेक नेताओं शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व मंत्री नरसिंह बैठा के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार होगा। वे नरकटियागंज एवं बगहा से कॉग्रेस के विधायक रहे थे। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि वे एक प्रख्यात राजनेता एवं प्रसिद्ध समाजसेवी थे। उनके निधन से न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक क्षेत्रों में भी अपूरणीय क्षति हुयी है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शान्ति तथा उनके परिजनों, अनुयायियों एवं प्रशंसकों को दु:ख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

वहीं अपने शोक संदेश में राजद प्रमुख सह पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने कहा कि स्व. बैठा आजीवन गरीब-गुरबों के लिए संघर्ष करते रहे। उनके निधन से दलित राजनीति के साथ ही बिहार की राजनीति में अपूरणीय क्षति हुई है। वहीं बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने बिहार सरकार के पूर्व मंत्री नरसिंह बैठा के निधन पर गहरा दु:ख एवं शोक संवेदना व्यक्त किया है। उन्होंने अपने शोक सन्देश में कहा कि स्व. बैठा गरीबों के हितैषी, कुशल राजनीतिज्ञ, मृदुभाषी और समाजसेवी थे। वे बगहा विधानसभा क्षेत्र से 1957, 1962, 1967, 1969, 1972 और 1977 में विधायक चुने गए। वे राष्ट्रीय एससी झ्र एसटी आयोग के सदस्य भी रहे। उनके निधन से राजनीति के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुयी है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें एवं उनके परिवार को इस दु:ख की घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करें।

मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री ने दी बैसाखी की शुभकामनायें

पटना(अपना बिहार, 14 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने बैसाखी की शुभकामना राज्यवासियों को दी और कामना किया कि यह त्योहार किसानों में नया जोश एवं उमंग लायेगा। अपने बधाई संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि बैसाखी का पर्व किसानों के जीवन में उमंग और उल्लास का संदेश देता है। फसल तैयार होने पर खुशी व्यक्त करने वाला यह पर्व देश के विभिन्न भागों में विविध लोक पर्वों के रूप में मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पर्व पर हमें समाज में समरसता तथा पारस्परिक सौहार्द्र बढ़ाने और समर्पण की भावना से सेवा का संकल्प लेना चाहिए। वहीं उपमुख्यमंत्री ने अपने बधाई संदेश में कहा कि बैसाखी का पर्व देश के किसानों को समर्पित है। उन्होंने कामना किया कि नये फसल वर्ष में देश में खाद्यान्न उत्पादन में प्रचुर वृद्धि हो ताकि किसानों के घर में समृद्धि आये।

सत्ता की चाह में विपक्ष पका रहा ख्याली पुलाव : कांग्रेस

पटना(अपना बिहार, 14 अप्रैल 2017) - बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि आये दिन विपक्षी नेताओं के बयान जनता को भ्रमित करने वाले आ रहे हैं। वे लोग कभी बिहार में राजनीतिक अस्थिरता की बात बोलते हैं, तो कभी महागठबंधन में टूट की या फिर हमारी सरकार की स्थिरता पर मनगढ़ंत सवाल उठाते रहते हैं। जबकि यहाँ सबकुछ ठीकठाक चल रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता सत्ता की चाह में ख्याली पुलाव पका रहे हैं।

श्री सिंह ने कहा कि हमारी नीतीश सरकार स्थिर है , जो अपना कार्यकाल विकास के साथ सफलता पूर्वक पूरा करेगी। हमारे महागठबंधन में न तो कोई खींचतान है और न ही कोई टूट की गुंजाइश, बल्कि 2019 लोकसभा चुनाव के पहले यह राष्ट्रीय स्तर पर वृहत रूपधारण करेगा। बिहार की राजनीतिक स्थिति में कोई अस्थिरता नहीं है। यह बिल्कुल सामान्य स्थिति में है। विपक्ष ऐसे बयानों से जनता के बीच भ्रम फैलाकर अपने नापाक इरादों में कभी सफल नहीं हो सकती है, क्योंकि यहाँ की जनता विपक्ष के मंसूबों से अच्छी तरह वाकिफ है।

श्री सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका भी महत्ती होती है, लेकिन वह सकारात्मक होनी चाहिए। जबकि बिहार का विपक्ष नकारात्मक भूमिका में है। वे सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में ही मशगूल हैं, जिससे जनता को कोई लाभ होनेवाला नहीं है। विपक्ष को जनता के हित में नकारात्मक राजनीति छोड़कर सकारात्मक राजनीति करनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट से अनंत सिंह को बड़ी राहत, बिहार के भूमिहार जश्न में मस्त

पटना(अपना बिहार, 13 अप्रैल 2017) - सुप्रीम कोर्ट ने विधायक अनंत सिंह को बड़ी राहत देते हुए सीसीए की कार्रवाई को गलत बताया और कहा कि सभी को कानून का संरक्षण प्राप्त है। कल यह खबर आते ही बिहार के भूमिहारों में जश्न का माहौल देखा जा रहा है। बताते चलें कि बाढ़ नें दो यादवों की हत्या के बाद चर्चा में आए मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह पर सरकार का शिकंजा कस गया था। एक बार जेल भेजे जाने के बाद अनंत सिंह पर लंबित सभी फ़ाइलें खोल दी गयीं। लेकिन न्यायपालिका में रसूख के कारण अनंत सिंह को हर मामले में सफ़लता मिलती चली गयी। एक मामले छोड़ सभी में विधायक अनंत सिंह को जमानत मिलने के बाद यह चर्चा आम हो गयी थी कि अनंत सिंह जेल में कुछ ही दिनों के मेहमान है। विधायक अनंत सिंह जेल के अंदर से ही चुनाव लड़ा और विधान पार्षद नीरज कुमार को भारी मतों से हरा कर पुन: विधानसभा पर अपना दबदबा कायम रहा। बाद में पटना जिला प्रशासन ने समाज में शांति व्यवस्था का खतरा बताते हुए सीसीए की कार्रवाई की । हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन द्वारा लगाएं गये सीसीए को बहाल रखा और सीसीए के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया । सीसीए द्वारा पटना हाईकोर्ट द्वारा दिये गये फैसले के खिलाफ विधायक अनंत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किया। बुधवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पटना जिला प्रशासन द्वारा लगाए गये सीसीए कार्रवाई को गलत बताया और कहा कि सभी को कानून का संरक्षण प्राप्त है।

बिजली अनुदान को 2952 करोड़ स्वीकृत, मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 19 फैसलों पर लगी मुहर, बिहार सचिवालय भोजशाला प्रबंधक संवर्ग नियमावली का गठन

पटना(अपना बिहार, 13 अप्रैल 2017) - राज्य सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने के मकसद से अनुदान की राशि स्वीकृत करने का निर्णय बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में लिया। बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने बताया कि ऊर्जा विभाग के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं को विद्युत खपत में प्रति इकाई अनुदान की राशि के लिए कुल 2952.00 करोड़ (दो हजार नौ सौ बावन करोड़) रुपए अनुदान की स्वीकृति प्रदान प्रदान की गई।

उन्होंने कहा कि बैठक में कुल 19 मामलों पर मंत्रिपरिषद ने सहमति दी। उन्होंने बताया कि गृह विभाग (आरक्षी शाखा) के अन्तर्गत माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर एसएलपी सं-204/2010 एवं इससे उत्पन्न सिविल अपील सं-857/2016 में दिनांक-03.02.2016 को पारित न्यायादेश के अनुपालन के क्रम में 36वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के सफल उम्मीदवारों में से दो पदाधिकारियों को बिहार प्रशासनिक सेवा में नियुक्ति तिथि से बिहार पुलिस सेवा में पुन: नियुक्ति के मंत्रिपरिषद् के निर्णय के आलोक में अपर पुलिस अधीक्षक में उनसे कनीय को दी गयी प्रोन्नति की तिथि से प्रोन्नति देने हेतु दिनांक-31.12.2010 से दोनों पदाधिकारियों के पदस्थापन काल तक के लिये अपर पुलिस अधीक्षक के दो अधिसंख्य पदों की सृजन की स्वीकृति दी गई।

उन्होंने बताया कि लघु जल संसाधन विभाग के अन्तर्गत लघु जल संसाधन विभाग, बिहार में संविदा के आधार पर कार्यरत 135 (एक सौ पैंतीस) कनीय अभियंताओं (असैनिक/यांत्रिक) को अगले एक वर्ष तक के लिए पुनर्नियोजित करने की स्वीकृति दी गई। जबकि सामान्य प्रशासन विभाग के अन्तर्गत बिहार लोक सेवा आयोग, पटना में सृजित सहायक निदेशक, सांख्यिकी के एक पद को विलोपित करते हुए उसके स्थान पर सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी के एक पद के सृजन की स्वीकृति दी गई। श्री मेहरोत्रा ने बताया कि श्रम संसाधन विभाग के अन्तर्गत बिहार सचिवालय भोजशाला प्रबंधक संवर्ग नियमावली, 2017 के गठन की स्वीकृति दी गई।

श्री मेहरोत्रा ने बताया कि विधि विभाग के अन्तर्गत बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के लिए पटना उच्च न्यायालय, पटना में कार्यरत माननीय न्यायमूर्ति श्री समरेन्द्र प्रताप सिंह को कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत करने की स्वीकृति दी गई। साथ स्वास्थ्य विभाग के अन्तर्गत राज्य के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों के पीजी छात्रों द्वारा अन्य कोर्स में नामांकन लेने के उद्देश्य से नामांकित कोर्स बीच में छोड़ने की स्थिति में बंधेज राशि अधिरोपित करने एवं पीजी उतीर्ण होने के उपरान्त राज्य में तीन वर्ष की अनिवार्य सेवा प्रदान करने हेतु बंध पत्र हस्ताक्षरित कराने की व्यवस्था लागू करने की स्वीकृति तथा स्वास्थ्य विभाग के ही तहत डा. चंद्रशेखर कुमार तत्कालीन सिविल सर्जन, सिवान (संप्रति निलंबित) को सेवा से बर्खास्त करने की स्वीकृति दी गई।

प्रधान सचिव ने बताया कि नगर विकास एवं आवास विभाग के अन्तर्गत स्थानीय नगर निकाय कर्मियों के पंचम एवं षष्ठम वेतन पुनरीक्षण का लाभ प्रदान किए जाने के संबंध में, सुपौल जिलान्तर्गत त्रिवेणीगंज को नगर पंचायत घोषित करने के संबंध में, औरंगाबाद जिलान्तर्गत दाउदनगर नगर पंचायत को नगर परिषद् घोषित करने के संबंध में, नगर विकास एवं आवास विभाग सीतामढ़ी जिलान्तर्गत सुरसंड को नगर पंचायत घोषित करने के संबंध में तथा नगर विकास एवं आवास विभाग के ही तहत बिहार राज्य आवास बोर्ड के द्वारा आवंटित एवं भविष्य में आवंटित किये जाने वाले संपदाओं को लीज-होल्ड से फ्री-होल्ड में परिवर्तन करने हेतु एक कालिक परिवर्तन प्रभार शुल्क प्राप्त कर फ्री-होल्ड के रूप में निबंधित करने की स्वीकृति प्रदान की गई।

 

आधा दर्जन आरापियों की जमानत खारिज, बीएसएससी पेपर लीक मामला

पटना(अपना बिहार, 13 अप्रैल 2017) - बीएसएससी पेपर लीक मामले में कोर्ट ने नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए आधा दर्जन आरोपियों का जमानत खारिज कर दिया। बीएसएससी पेपर लीक मामले के आरोपी अरूण कुमार ,अनीश कुमार ,विनीत कुमार ,अविनाश कुमार सहित आधा दर्जन आरोपियों के नियमित जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई । दोनों पक्षों को सुनने के बाद एडीजे सह निगरानी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश मधुकर कुमार ने सभी का जमानत खारिज कर दिया । कोर्ट ने अपने आदेश में कहां हैं की केस डायरी में आएं साक्ष्य के अनुसार सभी का संगलिप्ता हैं। इसलिए न्यायहित में जमानत नहीं दिया जा सकता। अभी केस का अनुसंधान भी जारी हैं। नियमित जमानत याचिका खारिज होने के बाद बचाव पक्ष के वकील ने कहां की पटना हाईकोर्ट में अपील दाखिल करेंगे।

अपने मंत्रियों के भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करें नीतीश : सुमो

पटना(अपना बिहार, 13 अप्रैल 2017) - भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि एक ओर तो गांधी के बिहार में पदार्पण की सौंवी वर्षगांठ के दिन चम्पारण के किसानों-मजदूरों पर लाठी-गोली चला कर सरकार ने उन्हें आत्मदाह करने के लिए विवश किया तो दूसरी ओर अपने मंत्रियों के भ्रष्टाचार पर चुप्पी साध लिया है। गांधी विमर्श के नाम पर आरएसएस और भाजपा को गालियां दिलवाने वाली सरकार की मिट्टी, मॉल और जमीन घोटाले उजागर होने के बाद दिग्धी बंध गई है।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था सत्ता में बैठे लोगों को भ्रष्टाचार से कड़ाई से निबटना चाहिए और भ्रष्टाचार की अनदेखी करना घोर अपराध है। फिर अपने मंत्रियों के भ्रष्टाचार की अनदेखी कर क्या मुख्यमंत्री अपराध नहीं कर रहे हैं? रेलवे के दो होटलों के एवज में 200 करोड़ की बेशकीमती 2 एकड़ जमीन और शराब फैक्ट्री के बदले पूरी कम्पनी तथा करोड़ों की जमीन हथियाने वाले मंत्रियों तेज प्रताप और तेजस्वी यादव के भ्रष्टाचार पर मौन हो कर क्या मुख्यमंत्री गांधी के सपनों को साकार कर रहे हैं?

उन्होंने कहा कि करोड़ों की जमीन लूट में शामिल दोनों मंत्रियों ने आखिर मंत्री के तौर पर घोषित अपनी परिसम्पतियों में बेनामी जमीन और कम्पनियों का जिक्र क्यों नहीं किया? मुख्यमंत्री में अगर हिम्मत है तो मंत्रियों की बेनामी सम्पतियों को जब्त कर उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करें और गांधी के विचारों व आदर्शों को सच्चे अर्थों में स्थापित करें।

शांति ,प्रेम और भाईचारा विकास की कुंजी : तेजस्वी

पटना(अपना बिहार, 13 अप्रैल 2017) - शांति ,प्रेम ,सदभाव ,और भाईचारा विकास की कुंजी है। जहाँ पर प्रेम सदभाव रहता है, वहाँ पर विकास की गति तेज होती है। इसलिए आवश्यक है कि समाज मे हर कीमत पर आपसी भाईचारा बनाये रखें ,तभी समाज के अंतिम व्यक्ति के द्वार तक न्याय के साथ विकास पहुँच पायेगा और समावेशी विकास की अवधारणा पूर्ण होगी। ये बातें उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव सोनपुर के सबलपुर दियारा मे विद्यानिकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल का उदघाटन करने के बाद जनसभा को संबोधित करने के बाद कही।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि छपरा और सोनपुर से उनके परिवार का गहरा रिश्ता है। इस क्षेत्र का तेजी से विकास हो इसके लिये हम सब पूरी कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र मे तीन आरओबी निर्माण की स्वीकृत मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद के जन्मदिन के मौके पर आरा-छपरा और दीघा-सोनपुर सड़क पुल का उदघाटन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जनता से किये गये सभी वादों को पूरा कर रहा हूँ। इस क्रम में छपरा में सीआरएफ मद से एक फ्लाइओवर बना कर यातायात को सुगम किया जायगा। इससे जाम कि समस्या से लोगों को निजात मिलेगी। इस अवसर पर विधायक रामानुज प्रसाद ने भी अपने विचारों को रखा तथा विकास कार्यों मे तेजी लाकर राज्य को प्रगति के पथ पर ले जाने कि लिय राज्य सरकार की प्रशंसा की।

नगर निकाय चुनाव का हुआ एलान

पटना(अपना बिहार, 13 अप्रैल 2017) - राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकायों के लिए होने वाले मतदान के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक पहले चरण में 7 नगर निगमों, 31 नगर परिषदों, 63 नगर पंचायतों के लिए चुनाव होना है। इसके लिए 19 अप्रैल अधिसूचना जारी की जाएगी। वहीं प्रत्याशियों द्वारा विभिन्न पदों के लिए नामांकन जमा करने अवधि 19 अप्रैल से 27 अप्रैल तक निर्धारित की गयी है। जबकि नामांकन वापस लेने की तारीख 2 मई होगी। वहीं स्क्रूटनी एवं प्रत्याशियों की अंतिम सूची व चुनाव चिन्ह का आवंटन 3 मई तक किया जाएगा। आयोग के मुताबिक मतदान 21 मई को संपन्न होगा और मतगणत का कार्य 23 मई से प्रारंभ होगा।

प्रमंडलीय आयुक्त नगर निकाय चुनाव को लेकर नगर परिषद एवं नगर पंचायतों में मतदान एवं मतगणना प्रेक्षक की तैनाती करेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को निर्देश दिया कि वे आयोग की ओर से चुनाव प्रेक्षकों की तैनाती के लिए प्राधिकृत किए गए हैं।

आयोग के अनुसार प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा अपने क्षेत्र के जिलों में केवल नगर परिषदों एवं नगर पंचायतों के लिए प्रेक्षक नियुक्त किया जाएगा। आयोग ने कहा कि प्रेक्षक के रूप में संबंधित जिले को छोड़कर अपने अधीन अन्य जिलों के वरीय पदाधिकारियों जैसे उप विकास आयुक्त, अपर जिला दंडाधिकारी या उप सचिव या वरीय तकनीकी पदाधिकारी स्तर के पदाधिकारियों को नियुक्त करना होगा। नियुक्त किए गए प्रेक्षक चुनाव एवं मतगणना प्रक्रिया में किसी भी गड़बड़ी को जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका), प्रमंडलीय आयुक्त व राज्य निर्वाचन आयोग की नजर में लाएंगे। चुनाव समाप्त होने के बाद दो दिनों के अंदर प्रेक्षक अंतिम रिपोर्ट आयोग को देंगे। आयोग ने निर्देश दिया कि प्रेक्षकों की नियुक्ति कर उनका नाम, पदनाम एवं मोबाइल नंबर आयोग को 13 अप्रैल तक निश्चित रूप से उपलब्ध करा दिया जाए। आयोग सूत्रों ने बताया कि नगर निगम क्षेत्रों के चुनाव को लेकर आयोग ने सचिवालय स्तर के 42 पदाधिकारियों को प्रेक्षक नियुक्त किया है। इनमें संयुक्त सचिव, विशेष सचिव, अपर सचिव, विशेष कार्य पदाधिकारी व उप निदेशक स्तर के पदाधिकारी शामिल हैं।

कुलभूषण जाधव को हर हाल में बचाये सरकार : सदानंद

पटना(अपना बिहार, 13 अप्रैल 2017) - बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने पाकिस्तान के मिलिट्री कोर्ट से भारत के पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा सुनाने की कड़ी भर्त्सना एवं निंदा की है। उन्होंने कहा कि जाधव को बचाने के लिए केंद्र सरकार को सभी संभावनाओं पर काम करना चाहिए। श्री सिंह ने कहा कि हालाँकि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख जरुर अपनाया है। लेकिन सिर्फ इतने से काम नहीं चलेगा। जरुरत इस बात की है कि बिना समय गंवाए जाधव को बचाने के लिए केंद्र सरकार को कानूनी प्रयास तेज करना चाहिए। चाहे वह पाकिस्तान के मेजर जनरल के सैन्य ट्रिब्यूनल में अपील से लेकर राष्ट्रपति से दया याचिका तक का प्रयास हो या फिर संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में इस विषय को उठाने की कोशिश हो। क्योंकि इंटरनेशल कोर्ट से 1998 में पराग्वे, 1999 में जर्मनी और 2003 में मैक्सिको के नागरिकों को फांसी की सजा से राहत मिली है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी पाकिस्तान को घेरना चाहिए; ताकि वह जाधव को रिहा करने पर मजबूर हो जाये। श्री सिंह ने कहा कि कुलभूषण को पाकिस्तानी चंगुल से छुड़ाने के लिए भारत सरकार को जरुरत के अनुसार साम, दाम, दण्ड, भेद सहित सभी तरह की नीति को बेहिचक अपनानी चाहिए।

एकता दिवस के रूप में अपना जन्मदिन मनायेंगे तेजप्रताप

पटना(अपना बिहार, 13 अप्रैल 2017) - स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव आगामी 16 अप्रैल को अपना जन्मदिन एकता दिवस के रूप में मनायेंगे। मिली जानकारी के अनुसार इस मौके पर छात्र राजद द्वारा पूरे बिहार में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। बताते चलें कि श्री यादव ने डीएसएस यानी धर्म निरपेक्ष स्वयं सेवक संघ का गठन किया है जिसके तहत वे राज्य में युवाओं को धर्म निरपेक्षता के प्रति प्रोत्साहित करते हैं।

धान खरीद की जांच कराये सरकार : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 13 अप्रैल 2017) - विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि सरकार बताएं की मात्र 11 दिनों में सूबे के अंदर 6 लाख मैट्रिक टन धान की खरीद या गड़बड़ी हुई, जब कि पूरे वर्ष धान खरीद को लेकर सरकार सुस्त व बेखबर रहीं। क्या वर्ष 2016-17 में धान खरीद में गड़बड़ी हुई है, यह जांच का विषय है।

डा. कुमार ने कहा कि सरकार ने किसानों से पिछले साल 15 नवम्बंर से 10 जिलों में धान की खरीद शुरू की और आगे 1 दिसम्बंर से अन्य जिलों में धान की खरीद शुरू हुई। सरकार ने इस साल 31 मार्च तक 30 लाख टन धान खरीद करने का दावा कर रहीं हैं। लेंकिन 129 दिनों बीत जाने पर यानी 24 मार्च तकं 18 लाख टन धान ही खरीद का दावा करती रहीं।

डा. कुमार ने कहा कि राज्य खाद्य निगम के वेबसाइट पर जारी रिपोर्ट में के अनुसार 2 लाख 67 हजार 653 किसानों से 18 लाख 67 हजार 791. 075 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई। दूसरा सवाल वित्तीय वर्ष 2016-17 के समाप्त होने के अंतिम 14 दिनों में तीन दिन सार्वजनिक छुट्टी थीं, बचे 11 दिनों में सरकार ने 6 लाख मीट्रिक टन धान कैसे खरीद लीं, यह मामला शक के घेरे में हैं।

भाजपा को महागठबंधन में दरार की आशंका, लगाया राजनीतिक अस्थिरता का आरोप

पटना(अपना बिहार, 13 अप्रैल 2017) - प्रदेश भाजपा के नेताओं को सूबे में सत्तासीन महागठबंधन में दरार की आशंका नजर आ रही है। बिहार विधानसभा की लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा है कि बिहार गंभीर राजनीतिक अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है। इसका सरकारी कामकाज पर बुरा असर पड़ है। महागठबंधन में शामिल घटक दलों की राहें तो जुदा हैं ही राग भी अलग-अलग निकल रहे है।

श्री यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन के लिए कांग्रेस की ओर से पहल करने की पेशकश राजद से उनकी बन रही दूरी का संकेत है। महागठबंधन में टूट-फूट की आशंका को देखते हुए नौकरशाह भी किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में है। नित नये-नये घपले-घोटाले के उजागर होने से महागठबंधन में शामिल जदयू, राजद और कांग्रेस ने अलग-अलग राह पकड़ ली है। मिट्टी-मॉल घोटाला से जहां राजद अलग-थलग पड़ गयी है वही जदयू ने मदद के हाथ को खींच रखा है। कांग्रेस अपनी डफली बजाते हुए अपना अलग राग अलापने में व्यस्त है। महागठबंधन में शामिल तीनों दलों के मंत्रियों के फरमानों के अनुपालन को लेकर नौकरशाह पसोपेश में है। किसकी बात माने और किसकी नहीं।

श्री यादव ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चम्पारण सत्याग्रह के शताब्दी समारोह में घटक दलों के नेताओं का न दिखना उनमें उत्पन्न अंतर्विरोधों को दशार्ता है। कांग्रेस के आयोजन से जहां जदयू ने दूरी बना रखी है वही सरकारी आयोजन में राजद कोटे के मंत्रियों को तवज्जो नहीं दिया जा रहा है। तीनों दलों के बीच फूट के बीज का अंकुरण हो चुका है और आने वाले दिनों में कोई नया राजनीतिक गुल खिले तो इसे आश्चर्य की बात नहीं मानी जायेगी।

धुमधाम से मनायी जायेगी बाबा साहब की जयंती

पटना(अपना बिहार, 13 अप्रैल 2017) - प्रदेश कांग्रेस द्वारा भारतीय संविधान के निमार्ता बाबा साहब भीमराव अम्बेदकर की 126वीं जयन्ती दिनांक 14 अप्रैल 2017 को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम स्थित मुख्य सभागार में धुमधाम से मनायी जायेगी। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विनोद कुमार सिंह यादव ने बताया कि इस समारोह की अध्यक्षता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. अशोक चौधरी करेंगे। कांग्रेस पार्टी ने पिछले साल बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेदकर की 125वीं जयन्ती को सालों भर समारोहपूर्वक मनाते हुए संविधानिक मूल्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दिखाया है।

विनोद कुमार सिंह यादव ने कहा कि डा. अम्बेदकर ने अपने स्वयं के सिद्धान्तों को कांग्रेस पार्टी के दृष्टिकोण में देखा और उन्होंने भारत के संविधान में उन प्रत्येक सिद्धान्त को सम्मिलित करने में कांग्रेस के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने इन मूल्यों को और आगे बढ़ाया है। दुर्भाग्य से आज उन सारे सिद्धान्तों पर हमला किया जा रहा है। जाति, धर्म और वैचारिक सुझाव के आधार पर नागरिकों के हकों पर हमला किया जा रहा है। यह विशेष रूप से दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों सहित अन्य वर्गों को प्रभावित करता है। लाखों भारतीयों के कल्याण से समझौता करने के अलावा इन हमलों से भारत की आत्मा को कुचला जा रहा है। इसलिए अब यह और भी जरूरी है कि बाबा भीमराव अम्बेदकर जी के सिद्धान्तों को आम लोगों के बीच अधिक-से-अधिक फैलाव हो ताकि ऐसे विध्वंशकारी तत्वों को रोका जा सके। कांग्रेस पार्टी ऐसे लोगों के खिलाफ हमेशा ही संघर्ष करती रही है और करते रहेगी।

कोर्ट में पेश हुआ लड्डन मियां

पटना(अपना बिहार, 11 अप्रैल 2017) - सीवान में दैनिक हिन्दुस्तान के पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड का मुख्य आरोपित लड्डन मियां की सोमवार को सीजेएम कोर्ट में पेशी हुई। लड्डन फिलहाल मुजफ्फरपुर जेल में बंद है। सीबीआई कोर्ट मुजफ्फरपुर में राजदेव रंजन हत्याकांड का ट्रायल चल रहा है। सीजेएम कोर्ट के आदेश पर सोमवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच लड्डन को आर्म्स एक्ट के मामले में पेशी हुई। राजदेव रंजन की हत्या में प्रयोग की गई 7.6 एमएम की पिस्टल एक अन्य आरोपित सोनू कुमार के घर से बरामद हुई थी। गिरफ्तारी के बाद सोनू ने पुलिस को बताया था कि बरामद पिस्टल लड्डन मियां ने उसे दी थी।

इसी पिस्टल से राजदेव रंजन की हत्या की गई है। एफएसएल जांच में भी इस पिस्टल से गोली मारने की पुष्टि हो चुकी है। पिस्टल बरामदगी के मामले में टाउन थाने में एफआईआर दर्ज की गई। हत्याकांड की जांच सीबीआई कर रही है। इस कारण इस ट्रांसफर सीबीआई कोर्ट मुजफ्फरपुर हो गया है। जबकि बरामद पिस्टल मामले की जांच टाउन था&#