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जब हाजत पहुँच गये जननायक

- डा. निहोरा प्रसाद यादव

बात १९८२ की है। पूरे बिहार में सुखाड़ से अकाल पड़ गया था। इस अवस्था में पूरे देश के प्रेजायडिंग आॅफिसर्स का सम्मेलन बिहार में रखा गया था । इस सम्मेलन में करोडों रुपये पानी की तरह बहाये जा रहे थे। पटना को दुल्हन की तरह सजाया गया था। एक तरफ अकाल से बिहार की जनता परेशान थी वहीं दूसरी तरफ सम्मेलन पर पैसे पानी की तरह बहाए जा रहे थे। ऐसा महसूस हो रहा था कि यह सम्मेलन अकाल पीड़ितों को चिढ़ा रहा हो।

सरकार को सूचना थी कि ऐसे समय में कराये जा रहे सम्मेलन का विरोध हो सकता है। इसलिए पटना प्रशासन को सख्त निर्देश था कि ऐसी व्यवस्था की जाय ताकि इसके विरोध में परिन्दा भी पंख न मार सके। चारों तरफ प्रशासन सर्तक। जिन दलों एवं नेताओं पर संदेह था उस पर प्रशासन की कड़ी नजरे थी। ऐसी स्थिति में इस सम्मेलन का विरोध करना काफी कठिन कार्य हो गया था। जहाँ कहीं चार पांच कार्यकर्ता एकत्रित देखे जाते प्रशासन वहां पर मौजूद हो जाता। मुझे युवा लोक दल में महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। हमने भी मन बना लिया था कि चाहे जो भी परिणाम हो जनहित में इस सम्मेलन का विरोध आवश्यक है े ताकि संदेश बिहार के आम आवाम में जाये कि बिहार के इस संकट कि स्थिति में किस तरह संकट से उवारने के बजाय अनावश्यक रूप से करोडों रूपयों का खर्च किया जा रहा है।

उस दिन दिनभर हमलोग भी चौकस रहे। कहाँ और किस तरह विरोध किया जाय। नीतियाँ तय करते रहे। तय हुआ कि सूर्यास्त होते ही हम सभी एक-एक कर जीपीओ गोलंबर के पास इकठठे होंगे, क्योकि संध्या समय प्रशासन भी मान लेगा कि अब विरोध नहीं होगा। इसी नीति क तहत हमलोग सैकड़ों की संख्या में एकत्रित हुए। वहीं से सम्मेलन के विरोध में नारा लगते आगे बढ़ने लगे ज्योही थोडा कदम आगे बढे प्रशासन आकर घेरे में लेकर गिरफ्तार कर ली। कोतवाली थाना लाया गया। अपराधियों की तरह हाजत में डाल दिया गया। रात भर हाजत में ही रहे जब कर्पूरी ठाकुर को जानकारी मिली कि हम लोगों को हाजत में बंद रखा है ? प्रात: काल अचानक कर्पूरी जी हाजत के सामने खड़े दिखे। विश्वास नहीं हो रहा था कि इतने बड़े राजनेता हाजत के सामने आकर हमलोगों की पीड़ा को सहलायेंगे। ऐसा सोचा भी नहीं था। बड़े भावुक मन से उन्होंने कहा कि आपलोगों को हाजत में बंद कर दिया गया है यह न्यायोचित नहीं है।

जो नेता कार्यकतार्ओं के पीड़ा में शामिल होने हाजत पहुंच जाय, वह मामूली नहीं महान नेता हो सकते हैं। उनके इस व्यवहार से कार्यकर्ताओं के प्रति आगाध प्रेम झलकता था। कार्यकर्तार्ओं की पीड़ा देखने के बाद कर्पूरी जी के चेहरे पर पीड़ा स्पष्ट दिखाई देने लगती थी। हर संभव उनके पीड़ा को दूर करने की कोशिश करते थे। यही कारण रहा की कार्यकर्ता कर्पूरी जी को मात्र नेता ही नहीं अभिभावक भी मानते थे।

दृढ निश्चयी बिहार का दृढ निश्चय

- प्रवीण बागी

कौन कहता है आकाश में सुराख हो नहीं सकता / एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों । दुष्यंत कुमार की ये कालजयी पंक्तियाँ बिहार में शराबबंदी के पक्ष में बनी मानव श्रंखला को देखकर दिमाग में अनायास ही कौंध गई। 21 जनवरी 17 को बनी यह मानव श्रृंखला अभूतपूर्व और ऐतिहासिक थी। बिहार जैसे राज्य में शराबबंदी के पक्ष में 3 करोड़ से ज्यादा लोगों का सड़क पर आना किसी चमत्कार से कम नहीं। बिहार में ऐसे चमत्कार होते रहते हैं। ऐसे चमत्कार यह उम्मीद जगाते हैं कि बिहार भी बदल सकता है। बशर्ते कोई सही नेतृत्वकर्त्ता मिले।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वह कर दिखाया जो दुनिया में आज तक नहीं हुआ था।

कहते हैं कि आजतक दुनिया में इतनी लंबी और इतने अधिक लोगों की मानव श्रृंखला नहीं बनी थी। नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई शराबबंदी की मुहिम को सभी दलों ने समर्थन दिया। हाल में अपने पटना दौरे के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी नीतीश की इस मुहिम का पुरजोर समर्थन किया। इससे शराबबंदी के अभियान को और बल मिला। जब नीतीश कुमार ने शराबबंदी लागू की थी ,उस समय अलग -अलग वजहों से इसकी आलोचना की जा रही थी। लेकिन नीतीश आलोचनाओं से घबराये नहीं, डटे रहे। अपनी हर सभा में शराबबंदी के पक्ष में दलीलें देते रहे। इसका असर भी हुआ। शराबबंदी से गांवों में भी माहौल बदला।लोगों को समझ में आने लगा की शराब से फायदा नहीं है। और फिर कारवां बढ़ता गया। जिसका नतीजा 21 जनवरी को दिखा।

यह मानव श्रृंखला 11 हजार 400 किलोमीटर लंबी थी। हालाँकि कई जगह लोग दो -दो -तीन -तीन लाइन लगाए हुए थे। 45 मिनट से अधिक समय तक पूरे बिहार में लोग एक दूसरे का हाथ पकडे खड़े रहे। पटना के गांधी मैदान में नीतीश कुमार लालू प्रसाद का हाथ पकडे मानव श्रृंखला का हिस्सा बने। उधर सिवान में केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ,बीजेपी नेता सुशील मोदी, विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रेम कुमार ,सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल आदि नेता मानव श्रृंखला का हिस्सा बने।

आम लोगों में उत्साह था। पश्चिम चंपारण में एक डेयरी संचालक जय सिंह और यश सिंह ने ने 600 लीटर दूध की चाय बनाकर मानव श्रृंखला में शामिल लोगों को मुफ्त में पिलाई । यह भाव बता रहा था कि बिहार में अब शराब का दौर गुजरे जमाने की बात हो गई है। हालांकि कई जगह कुछ बच्चे -बच्चियां बेहोश हो गए। शुक्र है की इलाज से वे तुरंत ठीक हो गए।

इस ऐतिहासिक घटना को रिकार्ड करने के लिए 5 सेटेलाइटों से तस्वीर ली गई। इसके अलावा 40 ड्रोन ,कई हेलीकॉप्टर भी इस काम में लगे हुए थे। सभी तस्वीरों और रेकॉर्डिंग की पुष्टि के बाद गिनीज बुक में इसे दर्ज किया जायेगा। इतनी लंबी मानव श्रृंखला दुनिया ने नहीं देखी थी. बिहार ने अरसे बाद अपनी ताकत दिखाई है। यह जज्बा बना रहे तो बिहार को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता।(लेखक सूबे के वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं)

याद जयपाल सिंह मुंडा की...

- प्रवीण बागी

जो समाज अपने सपूतों को याद नहीं रखना, उनपर गर्व नहीं करता, वह अपनी जडों से कट जाता है। वह अपनी परंपरा, संस्कृति और धरोहर को भूल जाता है। झारखंड इसका ताजा उदाहरण है। 3 जनवरी जयपाल सिंह मुंडा की जयंती है। नयी पीढी शायद उनके नाम से अवगत न हो, लेकिन आदिवासी संस्कृति की दुहाई देनेवाले और आदिवासियों के नाम पर राजनीति' करनेवाले उन्हें जरूर जानते हैं। क्योंकि वे उन्हीं की कमाई खा रहे हैं। जयपाल सिंह मुंडा ने ही सबसे पहले आदिवासियों के लिए झारखंड नाम से अलग प्रदेश बनाने की मांग बुलंद की थी। उन्होंने झारखंड पार्टी बनाई थी। वे आक्सफोर्ड विवि से पढे थे। संविधान सभा के सदस्य थे।. प्रथम लोकसभा के सदस्य रहे।लगातार चुनाव जीतते रहे। एक समय बिहार विधानसभा में झारखंड पार्टी के 23 विधायक जीत कर पहुंचे थे। दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह को राज्यसभा में भेजनेवाले जयपाल सिंह ही थे। आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा और विधायिका तथा सरकारी नौकरियों में आरक्षण, जयपाल सिंह मुंडा की ही देन है। संविधान सभा में उन्होंने इसके लिए जोरदार बहस की थी। इसलिए लोगों ने उन्हें 'मरांग गोमके' का नाम दिया था, यानी सर्वोच्च नेता।यह उपाधी फिर किसी दूसरे नेता को नहीं मिली।

वे हॉकी के बेहतरीन खिलाडी थे। 1928 में एम्सटर्डम ओलंपिक में इन्हीं के कैप्टनशिप में भारत ने गोल्ड जीता था। हॉकी के जादूगर कहे जानेवाले मेजर ध्यानचंद उस टीम के हिस्सा थे। उन्हीं के चलते झारखंड में आज भी हॉकी लोकप्रिय है। गांव- गांव में लडके- लडकियां हॉकी खेलते दिख जाते हैं। 20 मार्च 1970 को उनका निधन हुआ था। जिस रांची में जयपाल सिंह का जन्म हुआ था, आज वहां उनका कोई स्मारक नहीं है। उनके नाम पर सिर्फ एक स्टेडियम है, जिसमें उनकी प्रतिमा है। उस प्रतिमा पर आज फूल चढाना चाहिये, इसकी जरूरत न सरकार को महसूस हुई न दूसरे राजनेताओं को । सिर्फ रांची की मेयर आशा लकडा को यह समझ में आया कि जयपाल सिंह क्या थे। उन्होंने श्रद्धांजलि दी। ऐसे राजनेताओं और समाज को आप क्या कहेंगे ?

जयपाल सिंह आदिवासियों के धर्मान्तरण के भी खिलाफ थे। उनकी शिक्षा इसाई मिशन के सहयोग से हुई थी।9 वीं क्लास के बाद ही मिशन की ओर से उन्हें पढने के लिए इंग्लैंड भेज दिया गया था।आक्सफोर्ड में पढने का खर्च भी मिशन ने ही उठाया था।जब वे लौटकर आये तो मिशन ने उन्हें इसाईयत के प्रचार- प्रसार के काम में लगाना चाहा, पर उन्होंने दृढतापूर्वक मना कर दिया। लेकिन अफसोस कि हिन्दू धर्म के ध्वजाधारकों को भी उनकी याद नहीं आयी। हम शमिंर्दा हैं मरांग गोमके'...... (लेखक वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं)

आदमियत की दुखती रग के निर्दोष राग को ढूँढ़ने का नया तरीका

- शहंशाह आलम

मेरा मानना है कि हर लेखक किसी पहाड़ी कबीले का सदस्य होता है। तभी तो हर लेखक जीवन को, जीवन से जुड़े संघर्ष को इतने निकट से देख पाता है। यह सही भी है। एक सच्चे लेखक का जीवन क्या है, कैसा है, कैसा होना चाहिए जैसे सवाल जब कभी मेरे भीतर उठे हैं, तो मुझे उत्तर यही मिलता रहा है कि हर लेखक को पहाड़ी कबीले का सदस्य होना चाहिए। इसलिए कि इस जीवन को कोई दूर किसी छोटे इलाके में रहकर अगर जीता है, तो असल जीवन तो वही है। वही जीवन जीवन के असल महत्व को दशार्ता है। जहाँ ऊँच-नीच का लफड़ा है भी तो उस लफड़े में मासूमियत रहती है। जबकि शहरी अथवा महानगरीय तामझाम ने जो छीना-झपटी हमें दी है, वह हमारा नाश करने के लिए काफी है। इस छीना-झपटी से मुक्ति तभी संभव है, जब हम कई सौ मील जाकर अपनी जड़ों से जुड़ेंगे और अपने असली जीवन को आत्मसात् करेंगे। कम-अज-कम हम लेखकों को ऐसा जरूर करना चाहिए। तभी हमारा लेखन हमारे अंतस का लेखन सिद्ध होगा। मैंने अपने समय के बेहद महत्वपूर्ण लेखकों में एक जाबिर हुसेन को अपने लेखन को सच्ची धार देने के लिए उस जीवन को जीते देखा है, जो जीवन बिना किसी शोर के धरती के उस टुकड़े से जुड़ा रहता आया है, धरती का जो टुकड़ा अपनी एक नई तरह के तीव्र संघर्ष से जुड़ा रहा और जीतता आया है। जाबिर हुसेन ऐसे जीवन के बारे में कहते हुए लिखते हैं, 'मैं चाक पर फैली रेत के समान हूँ। मुझे पता है, इस रेत से चाक पर कोई उपयोगी वस्तु आकार नहीं ले सकती। मैं खुद भी अपने जीवन में कोई आकार कहाँ ले पाया।' अब आप ही कहिए, एक चाक, जो एक कुम्हार के हाथों गति पाते हुए, मिट्टी-पानी पाते हुए कितनी ही चमत्कारिक वस्तुएँ देता है, एक लेखक अपनी कलम से उस चाक से कहीं अधिक चमत्कारिक रचनाएँ देता है। मैंने पहले ही लिखा है कि जाबिर हुसेन एक महत्वपूर्ण लेखक हैं और उनका महत्व इससे स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपने आस-पास के जीवन से जो लिया, उससे कहीं ज्यादा उस जीवन को वापस लौटाया है। अभी-अभी छपकर आई उनकी किताब 'चाक पर रेत' को पढ़कर आप भी यही कहेंगे बिना कोई शक किए। 256 पृष्ठों की यह किताब इस रेत से भरे समय से हमारे काम लायक बहुत सारा बढ़िया छानकर एक नया दरिया-बहाती है :

मछुआरों को पता है

समुद्र में

कब आएगा तूफान

कब आएगी लहरों में उछाल

कितनी ऊँची उठेंगी लहरें

कितनी दूर भीगेगी रेत

तहस-नहस होंगे कितने किनारे

मछुआरों को पता है, सब

जाल में फँसी मछलियों ने

बता दिया है उन्हें, सबकुछ

खतरों से

आगाह कर दिया है, उन्हें

मछुआरे नहीं बेचते हैं

अपना नमक

हमेशा ख़्याल रखते हैं

अपने 'शुभ-चिंतकों' का

तभी तो

समुद्री तूफान से पहले

मछुआरे

ढीले कर देते हैं, अपने जाल

और मछलियों को

दे देते हैं

समुद्र में लौटने की छूट ( 'मछुआरों को पता है', पृ.254 )।

जाबिर हुसेन 'चाक पर रेत' में शामिल अपनी गद्य-रचनाओं को अपने जीवन की रचनाएँ कहते हैं। उनकी ये रचनाएँ बिहार के बहाने अपने भारत के उन अभिशप्त गाँवों की हैं, जहाँ हिंसा है, प्रतिहिंसा है, यातनाएँ हैं, गैर-बराबरी का नंगा नाच है। वे अपनी रचनाओं के बारे में कहते हैं, 'ये सारी तहरीरें उस समय लिखी जाती रहीं, जब बिहार के गाँवों की जमीन दरक रही थी और सामाजिक रिश्तों की बुनियादें ढह रही थीं। गाँव के खेतिहर मजदूर, भवन-निर्माण से जुड़े कामगार, छोटे-मोटे व्यवसायी, दलित और उपेक्षित वर्गों के लोग, इन सब की आवाज बनकर आगे बढ़ना अपने आप में एक जोखिम भरा अभियान था।' यहाँ पर मुझे एक कंबोडियन कहावत याद आ रही है। वह कहावत कुछ यूँ है कि जब शीशा टूटकर पानी पर तैरने लगे तो बुराई जीत जाती है। मेरे ख़्याल से अभी बुराई हम पर भारी है। सच्चाई यह भी है कि जाबिर हुसेन की रचनाएँ बुराई को हराती रही हैं। सच्चाई यह भी है कि देश का और विश्व का सामान्य वर्ग किसी असहाय, रक्षा चाहने वाला जीवन जी रहा है। इनके दर्द का मरुथल आप जाबिर हुसेन का साहित्य पढ़कर महसूस सकते हैं। उनकी रचनाएँ कभी भी कुछ लोगों के अच्छे जीवन का उत्सव न मनाकर उनके अच्छे जीवन के लिए संघर्ष करती रही हैं, जिन्हें ठेल-ठालकर हमेशा पंक्ति में सबसे पीछे खड़ा किया जाता रहा है। असल बात यही है कि जाबिर हुसेन की रचनाएँ जलते लोकतंत्र का सीधा, साफ-सुथरा बयान हैं। सौ से अधिक गद्य-रचनाएँ और चार कविताओं के माध्यम से इस 'चाक पर रेत' में व्यक्ति-चित्र और हमारे जीने के रोजमर्रा के दिन से लिए गए आत्मविश्वास से लेखक द्वारा जो कुछ लिखा-रचा गया है, वह अद्भुत है और अपने पढ़ने वालों को संतुष्ट करता है। (लेखक सूबे के सुविख्यात युवा कवि हैं)

दंगल : एक आंच की रह गयी कसर

- नवल किशोर कुमार

हरियाणा के भिवानी शहर की महिला पहलवान बबीता फोगाट और गीता फोगाट की कामयाबी की कहानी आमिर खान ने अपनी फिल्म दंगल में बखूबी चित्रित किया है। हालांकि इसमें कई तरह की मनोरंजन के लिहाज से स्वीकार्य नाटकीयता है जो महावीर फोगाट के वास्तविक जीवन से मेल नहीं खाती हैं। इसके बावजूद इस फिल्म की खासियत यही है कि इस फिल्म में स्त्री पक्ष के साथ कई दृश्यों में नाइंसाफी की गयी है। नाइंसाफी का एक प्रमाण तो यह भी कि मुख्य पोस्टर में आमिर यानी महावीर फोगाट अपनी बेटियों के साथ नजर तो आते हैं लेकिन उनकी पत्नी शोभा कौर(साक्षी तंवर) को जगह भी नहीं मिलती है। इस नाइंसाफी की एक बड़ी वजह समाज का पुरूष प्रधान होना है।

फिल्म में महावीर फोगाट को एक कुंठित पिता के रूप में दिखाया गया है। चार बच्चियों का पिता कुंठित हो और वह अपनी बेटियों को पहलवान बनाये, आश्चर्य पैदा करता है। आश्चर्य इसलिए भी कि महावीर फोगाट मूल रूप से जाट हैं और जाटों के हर गोत्र के अपने खाप हैं। इन खापों में महिलाओं की स्थिति क्या होती है, यह किसी से छुपी हुई बात नहीं है। पूरी फिल्म में दो हिस्से हैं। एक हिस्सा महावीर फोगाट की महानता है तो दूसरा हिस्सा उसकी बेटियों की कामयाबी है। फिल्मकार ने दोनों हिस्सों को फिल्माने में सावधानी बरती है। यह भी कहा जा सकता है कि फिल्मकार की ईमानदारी के पीछे फोगाट परिवार की जीवटता है।

बहरहाल एक फिल्म के रूप में दंगल एक कामयाब प्रयास है। उम्मीद की जानी चाहिए कि स्त्री पक्ष के फिल्मांकन में फिल्मकार इसी तरह की ईमानदारी दिखायेंगे। कम से कम पिंक के फिल्मकार की आधी अधूरी ईमानदारी जैसी तो बिल्कुल भी नहीं।

नाम से ही बिदक रहे संस्कृति के ठेकेदार

- मुसाफिर बैठा

सबका ठेका लेकर बात कहना बड़ी बीमारी है जो करीना-सैफ के नवजात बेटे के तैमूरनाम को लेकर फेसबुक-ट्विटर जैसे सोशल मीडिया पर अनेक बेहूदे राष्ट्रवादियों पर तारी है।

तैमूर नाम मात्र से उन्हें भी परेशानी है जिन्हें इतिहास का मात्र कखग ज्ञात है। तैमूरलंग ने उस समय हमारी भौगोलिक भूमि पर आक्रमण किया और लूटपाट की जब हमारा समाज असभ्य था, हम एक राष्ट्र न थे, हमारी राष्ट्रीयता थी तो अलग अलग थी, खण्ड खण्ड थी, (वैसे, प्रैक्टिकली अभी भी हम एक राष्ट्र कहाँ हैं, हो भी नहीं सकते!) सामन्तों एवं राजाओं तथा हिन्दू ऊँच नीच वाला समाज था। हमारे शासक भी आम लोगों के लिए कमोवेश उतने ही क्रूर थे, जालिम थे जितना कि तैमूर लंग था। तैमूर लंग जैसों की विजय कमजोर साबित क्रूर शासकों पर एक बलशाली शासक का आधिपत्य था। ब्राह्मणी एवं सवर्णी व्यवस्था जो तैमूर जैसे विदेशी आक्रमणकारियों के पहले से चली आ रही है, उस पर इन बेहूदों को क्यों परेशान नहीं कर रही है जो तैमूर नाम मात्र से परेशान हैं?

ऐसे 'देशभक्त' क्या यह सर्टिफाई करेंगे कि उनकी वंश परंपरा में अत्याचारी-व्यभिचारी-जातिवादी लोग नहीं हुए हैं? अगर स्वीकार करेंगे तो उनके पास अपने बेहूदे पूर्वजों के लिए क्या आलोचना है?

फिर, जहाँ लाखों लोग भगवान के नाम पर अपना नाम रखे हुए हैं और अनेक तरह के कुकर्मों में लगे हैं उनके प्रति इन तैमूर-घृणागिरों के क्या विचार हैं? आप ईश्वर से जुड़ा नाम रखकर भी कुकर्म और अपराध करें तो आपके लिए क्या सजा हो?

नरेंद्र माने नरों का इंद्र अथवा ईश्वर है। तो क्या गुजरात कत्लेआम के समय प्रदेश का मुख्यमंत्री रहे इस नाम के व्यक्ति को आप सीधे कठघरे में रखेंगे? क्या एक मुख्यमंत्री के रहते राज्य में नरसंहार हो जाए तो उसे इसका दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए?

घृणा योग्य लोग ही ऐसी बेहूदी घृणा पालते हैं कि किसी नाम पर भी ओछा वितंडा खड़ा कर देते हैं।

मेरे नाम और सरनेम 'मुसाफिर' और 'बैठा' को लेकर अबतक अनेक बुद्धिजीवियों (राजेंद्र यादव शामिल) तक ने बेहूदगी भरा मजाक और परिहास किया है। राजेंद्र यादव से यदि मैं पूछता कि आपके नाम में 'राजा' और 'इंद्र' जो लगा है वह आपके कर्म और आचरण को किस तरह क्वालीफाई करता है, तो उन्हें कैसा लगता? मैं उनसे कह सकता था कि आप नास्तिक होकर भी इंद्र क्यों हो, क्यों विरोधाभास को साथ लेकर जी रहे हैं, अपनी बुद्धिजीविता और नास्तिकता की हानि कर रहे हैं।

जब किसी अपराधी का बच्चा नेक हो सकता है, जब नेक का बच्चा बदनेक और अपराधी हो सकता है तो किसी नाम को किसी मिथकीय, ऐतिहासिक अथवा वर्तमान व्यक्तियों के नाम-बदनाम होने से अच्छा-बुरा ठहरा देना कुबुद्धि है। ऐसे ही कुबुद्धि जन पत्थर को भी भगवान मानते हैं एवं कोरी कल्पना की मिथक कथाओं को इस वैज्ञानिक युग में भी जीते हैं। ऐसे दुर्बुद्धि से हम फेसबुक पर नाता न रखें, उन्हें अपनी वॉल पर बेहूदगी न उगलने दे। बेहूदे चिकना घड़ा होते हैं। काम से मतलब रखिये, नाम से नहीं। नाम जैसा भी हो काम अच्छा होना चाहिए। मोल करो तलवार का, पड़ी रहन दो म्यान! (लेखक सूबे के चर्चित युवा कवि हैं)

सनक में लिया गया है नोटबंदी का निर्णय...

- शिवानंद तिवारी

गत आठ नवंबर को प्रधानमंत्री जी ने पाँच और हजार के नोट रद्द किए जाने की घोषणा की थी।रिजर्व बैंक के मुताबिक उस दिन देश मे पाँच और हजार के 15.44 करोड़ नोट चलन में थे।आज एक महीना बाद रद्द किए गए नोटों मे से कल तक 11.5 करोड़ यानी कुल रद्द नोटों का 80 प्रतिशत बैंकों में वापस आ चुका है।भारत सरकार के राजस्व सचिव के मुताबिक इस माह के अंत तक यानी रद्द नोटों को बैंकों मे जमा करने की अंतिम मोहलत तक लगभग सारे रद्द नोट बैंकों में वापस आ सकते हैं।इसका अर्थ हुआ कि नगदी में काला धन होने का जो दावा किया जा रहा था वह गलत साबित हुआ।या वह कालाधन कम था जो भ्रष्ट बैंक पदाधिकारियों की सहायता से सफेद कर लिया गया।इस तरह नोटों को रद्द किए जाने का जो मुख्य मकसद प्रधानमंत्री जी ने बताया था वह गलत साबित हो रहा है।

नोटबंदी के पहले देश की आर्थिक हालत ठीकठाक थी।स्वंय सरकार का दावा था कि हम दुनिया में सबसे तेज गति से विकास करने वाले देश हैं।हमारी विकास की गति चीन से भी तेज है।पिछले दो-तीन वर्षों से देश का बड़ा हिस्सा सुखा से प्रभावित था।कुछ इलाकों मे तो पीने के पानी तक का संकट उपस्थित हो गया था।लेकिन इस वर्ष बारिश बहुत अच्छी हुई।खरीफ की बहुत अच्छी फसल हुई है।रबी की फसल भी अच्छी होगी इसकी संभावना दिखाई दे रही थी।

जब अर्थ व्यवस्था बिलकुल स्वस्थ हालत में दिखाई दे रही थी तो प्रधानमंत्री जी द्वारा उठाए गए इस कदम का औचित्य समझ के बाहर है।रिजर्व बैंक द्वारा देश मे जारी कुल मुद्रा का 86 प्रतिशत पाँच और हजार रूपए के नोटों के रूप में ही था।ठीकठाक चल रही अर्थव्यवस्था से इतनी बड़ी राशि निकाल लेना एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर से 86 प्रतिशत खून निकाल कर उसे अधमरा बना दिए जाने के समान है।

सनक में उठाए गए कदम से देश की अर्थव्यवस्था को कुल कितना नुकसान पहुँचा है इसका अंतिम आकलन तो बाद में होगा।लेकिन रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने कल जो आकलन बताया उसके अनुसार देश का विकास दर 7.6 से 7.1 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है।यानी राष्ट्रीय आमदनी में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आएगी।ए. एन. सिंहा संस्थान, पटना के अर्थशास्त्र के प्रो. डी. एम दिवाकर के अनुसार आर्थिक सर्वे के आधार पर 2015-6 के वर्तमान मूल्य के आधार पर हमारा सकल राष्ट्रीय आय 1,34,09,892 करोड़ रू. था। इसमे 0.5 प्रतिशत की गिरावट अर्थ है सकल घरेलू आय में 67,04,946 करोड़ की कमी या सकल घरेलू उत्पाद में यह 67,83,596 करोड़ है।दिवाकर जी के मुताबिक नोटों की छपाई तथा देश भर में उनको पहुँचाने की लागत लगभग 1,28,000 करोड़ तक आ सकती है। मनमोहन सिंह जी ने नोटबंदी के इस कदम से सकल राष्ट्रीय उत्पाद में दो प्रतिशत गिरावट की आशंका व्यक्त की है।

अत: यह कहा जा सकता है किसी सकारात्मक आर्थिक सोच के आधार पर नोटबंदी का यह निर्णय नहीं लिया गया है।इस फैसले के द्वारा मोदीजी गरीबों से तप करा रहे हैं और अमीरों को मौज। आगे आनेवाले दिनों में इस कदम का पुरा प्रभाव जब प्रत्यक्ष होगा तो जो भक्त आज उनका जयकारा लगा रहे हैं वही उनके प्राण के पीछे लगे दिखाई देंगे। (लेखक राज्यसभा के पूर्व सांसद हैं)

Daily News

हाजत में रखने के बाद दिया सम्मान, मामला दो उद्यमियों को हाजत में रखने का

पटना(अपना बिहार, 24 मार्च 2017) - राज्य सरकार के रंग ढंग भी अजीब हैं। बुधवार को जिन दो उद्यमियों को पटना पुलिस ने केवल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सवाल पूछने पर आठ घंटे तक हाजत में रखा, गुरूवार को सरकार ने दोनों की सुध ली। उद्योग विभाग के प्रधान सचिव के मुताबिक एक उद्यमी नेमिकुमार के स्टार्ट अप प्रोपोजल पर बिहार सरकार द्वारा सक्रियतापूर्वक अग्रेतर कार्रवाई प्रारंभ है। वहीं नेमिकुमार को बताया गया कि उनके स्टार्ट अप प्रोपोजल के आवेदन को 1 मार्च, 2017 को प्रीलिमिनरी स्क्रूटनी कमिटी में रख गया था जहाँ इंडियन इंस्टीच्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी को प्रोपोजल के संदर्भ में इंक्यूवेटर का एसाइनमेंट प्रस्तावित किया गया और इस निर्णय की जानकारी उक्त इंस्टीच्यूट को 7 मार्च, 2017 को दी गई इस निदेश के साथ कि प्रोपोजल पर अग्रेतर कार्रवाई की जाए। सवाल उठाने वाले दूसरे उद्यमी सुरेश शर्मा को प्रधान सचिव उद्योग ने उनकी अपेक्षाओं को सुना तथा उन्हें जानकारी दी कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का परीक्षण कर तदनुसार उसका निष्पादन किया जाएगा। प्रधान सचिव ने उद्यमियों की अपेक्षाओं के समयबद्ध निष्पादन की प्राथमिकता के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता की बात कही।

सरकारी दवाओं को लेकर विधानसभा में हंगामा

पटना(अपना बिहार, 24 मार्च 2017) - विधानसभा में भाजपा के वरिष्ठ नेता नंदकिशोर यादव ने गुरुवार को राज्य के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की अनुपलब्धता का मामला उठाया और सरकार से जवाब देने की मांग की। शून्यकाल शुरू होते ही श्री यादव ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

विपक्षी नेताओं ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने पिछले दिनों कहा था कि तीन-चार माह में दवा की आपूर्ति करा दी जाएगी, लेकिन कई माह बीत गए, स्थिति जस कि तस है। इसी मुद्दे पर रालोसपा के ललन पासवान समेत भाजपा सदस्यों में-अरुण कुमार सिन्हा, विजय कुमार सिन्हा, अशोक कुमार सिंह, संजय सरावगी, विजय कुमार खेमका, तारिकशोर प्रसाद और राणा रणधीर ने कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर सदन में चर्चा कराने की मांग की, लेकिन इसे नियमानुकूल नहीं मानते हुए अमान्य कर दिया गया। श्री यादव ने कहा कि सरकार बताए कि अस्पतालों में दवा के अभाव में कब तक मरीज मरते रहेंगे।

भाजपा के अन्य सदस्य सरकार से तुरंत जवाब देने की मांग को लेकर अपनी सीट से ही शोरगुल करने लगे। इस पर संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि भाजपा सदस्य मामला कार्य संचालन नियमावली के तहत नियमानुसार उठाएं तो सरकार संज्ञान में लेगी और उस पर जवाब भी देगी। कार्यस्थगन प्रस्ताव अमान्य होने पर भी मुद्दा उठाना ठीक नहीं है। भाजपा सदस्य कुछ देर तक इस मुद्दे पर शोरगुल करने के बाद शांत होकर अपनी सीट पर बैठ गए।

पशुओं के इलाज के लिए दवाओं की खरीद के सवाल पर पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि खरीद की नई व्यवस्था लागू होने पर राज्य के पशु चिकित्सालयों में दवाओं की कमी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार अगले वित्तीय वर्ष से मुख्यालय स्तर से ही निविदा करके दवाओं की दर तय कर देगी और इसकी सूचना जिलों को भेज दी जाएगी। जिलों में पशु चिकित्सक सीधे दुकानदार से दवा खरीद सकेंगे। आगे से उनको जिला स्तर पर टेंडर प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

करेंगे महात्मा गांधी के सपनों को पूरा, मोतिहारी में बोले सीएम, चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह को किया संबोधित

पटना(अपना बिहार, 24 मार्च 2017) - महात्मा गांधी हिन्दुस्तान को धर्म निरपेक्ष और स्वावलंबी राष्ट्र के रूप में देखना चाहते थे। हम सब मिलकर उनके सपनों को पूरा करेंगे। ये बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरूवार को मोतिहारी के मुंशी सिंह महाविद्यालय में सर्व सेवा संघ द्वारा आयोजित चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में कही। उन्होंने कहा कि चम्पारण सत्यग्रह का सौंवा साल है। 10 अप्रैल 1917 को गॉधी जी बिहार आये थे। 15 अप्रैल 1917 को गॉधी जी चम्पारण की धरती पर आये थे। उन्होंने कहा कि चम्पारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष के अवसर पर पूरे साल चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह मनाया जायेगा। 10 अप्रैल से इसकी शुरूआत होगी। 10 अप्रैल को पटना में गॉधी विचारधारा पर राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन होगा। इसमें आये हुये विद्वानों द्वारा आपस में विचारों का आदान-प्रदान किया जायेगा। आज के परिप्रेक्ष्य में क्या किया जाना चाहिये, इस पर आपलोग विमर्श करें। पूरे देश के परिप्रेक्ष्य में क्या किया जाय, इस पर विमर्श करें ताकि देश आगे बढ़े, मानवता की सेवा हो। पर्यावरण का ख्याल रखते हुये आगे बढ़ें, विकास करें। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पर्यावरण के साथ लोग छेड़छाड़ कर रहे हैं, इसका पूरी पृथ्वी पर असर पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा चिंता का विषय है गंगा की अविलरता। केन्द्र सरकार द्वारा नमामी गंगा प्रोजेक्ट को आगे रखा गया है। पहले के सरकार द्वारा भी विषय पर कार्य किया गया था। गंगा की अविरलता एवं निमर्लता के संबंध में बात की गयी थी। उन्होंने कहा कि जब मनमोहन सिंह जी की सरकार थी, तब उस वक्त मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गंगा रिवर अथॉरिटी का गठन हुआ था। उन्होंने कहा कि गंगा रिवर अथॉरिटी की पहली बैठक से ही मेरे द्वारा गंगा की अविरलता का प्रश्न लगातार उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार गंगा में बाढ़ आयी थी, जिसका मुख्य कारण गंगा में गाद का जमा होना था। अभी हाल में ही इस विषय पर पटना में सेमिनार का आयोजन किया गया था। इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुयी थी। उन्होंने कहा कि आयोजित सेमिनार में श्री झुनझुनवाला द्वारा कहा गया था कि फरक्का बराज को हटाना संभव नहीं होगा। उस वक्त मैंने कहा था कि हमने फरक्का बराज हटाने के लिये नहीं बल्कि गंगा की अविलरता बनाये रखने के लिये सेमिनार का आयोजन किया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार निमर्लता पर ज्यादा ध्यान दे रही है, अविरलता पर नहीं। सेमिनार में आये लोगों ने गंगा नदी को फरक्का बराज तक देखा। देखा कि गंगा नदी में किस तरह से सिल्ट डिपॉजिट हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वर्ष चम्पारण सत्याग्रह का सौंवा साल एवं सिख धर्म के 10वें गुरू गुरू गोविंद सिंह जी महाराज का 350वां प्रकाश पर्व है। उन्होंने कहा कि पूर्ण शराबबंदी लागू करने के लिये इससे अच्छा अवसर नहीं हो सकता था। उन्होंने कहा कि पहले कुछ पीने वाले बुराई करते थे, अब वे भी कहते हैं कि बहुत अच्छा काम हुआ। उन्होंने कहा कि एक जगह महिलाओं के कार्यक्रम में एक महिला ने बताया कि पहले मेरे पति शराब पीकर घर आते थे। घर में झगड़ा-झंझट करते थे, देखने में क्रूर लगते थे। पर अब शराबबंदी के बाद शाम में सब्जी लेकर आते हैं, हंसते हुये आते हैं तथा देखने में सुंदर लगते हैं, कितना बड़ा परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि जब कोई अच्छा काम करोगे तो पहले लोग मजाक उड़ायेंगे, फिर विरोध करेंगे और फिर साथ चल देंगे। उन्होंने कहा कि 21 जनवरी 2017 को जब मानव श्रृंखला का आह्वान किया गया तो चार करोड़ से ज्यादा लोगों ने इसमें भाग लिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग चिंता करते हैं कि कानून सख्त बनाया है। कानून से नहीं, जन चेतना से पूर्ण शराबबंदी लागू होगी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बिहार दिवस का कार्यक्रम भी शराबबंदी एवं नशामुक्ति को समर्पित है। उन्होंने कहा कि हम किसी चीज को पकड़ते हैं तो उसे तार्किक अंत तक ले जाते हैं।

इससे पहले कार्यक्रम की शुरूआत में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गॉधी, कस्तुरबा गॉधी, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, राज कुमार शुक्ल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को चरखा एवं अंगवस्त्र भेंट किया गया। आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने चम्पारण सत्याग्रह की कहानी, चम्पारण में महात्मा गॉधी एवं सर्वोदय जगत पुस्तक का विमोचन किया।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, वरिष्ठ गॉधीवादी एवं पूर्व सांसद रामजी सिंह, तुषार गॉधी, डॉ. एस.एन. सुब्बाराव, सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष महादेव विद्रोही ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जल पुरूष राजेन्द्र सिंह, प्रसिद्ध समाजसेवी मेधा पाटेकर, नव निवार्चित विधायक वीरेन्द्र यादव, स्वामी अग्निवेश, पी.वी. राजगोपाल, बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति अमरेन्द्र नारायण यादव सहित अन्य विशिष्ट अतिथि, गॉधीवादी, गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

ईवीएम पर कांग्रेस ने उठाया सवाल

पटना(अपना बिहार, 24 मार्च 2017) - बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि आज ईवीएम मशीन सवालों के घेरे में है। उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के चुनाव परिणामों के बाद यह विवाद और बढ़ गया है, लेकिन ईवीएम मशीन में वोटर वेरीफाईड पेपर आॅडिट ट्रायल के लिए चुनाव आयोग के द्वारा मांगे गए 3100 करोड़ रुपये को केंद्र सरकार अभी तक नहीं दी है, जिस वजह से ईवीएम से वोटिंग की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार जनता को बताए कि चुनाव आयोग को यह राशि अब तक क्यों नहीं दी गयी है ?

श्री सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग को ईवीएम के साथ वीवीपीएटी कराने को कहा था। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए चुनाव आयोग ने 2014 में केंद्र सरकार से 3100 करोड़ रुपये की मांग की थी। जब सरकार से धन नहीं मिला तो खुद मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन मुहैया कराने के लिए पत्र लिखा। बावजूद इसके चुनाव आयोग को अभी तक यह राशि नहीं मिल पायी है, जबकि चुनाव आयोग को विवादों से बचाने के लिए यह आवश्यक है।

श्री सिंह ने कहा कि ऐसे में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के द्वारा ईवीएम पर प्रश्न खड़ा करना आधारहीन नहीं कहा जा सकता है। इस विषय पर अपने विरोधियों की आवाज को दबाने के बजाय मोदी सरकार को अविलम्ब चुनाव आयोग को धन मुहैया कराना चाहिए, ताकि प्रजातंत्र में जनता का विश्वास बना रहे।

उपमुख्यमंत्री के लक्ष्य में बाधक बन रहे अधिकारी

पटना(अपना बिहार, 24 मार्च 2017) - सूबे में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव पथ निर्माण विभाग के मंत्री भी हैं। इनकी कार्यकुशलता और समयबद्ध तरीके से कार्य करने की नीति के कारण ही राज्य में कई पथ परियोजनायें तय समय सीमा के अंदर निर्माण की ओर अग्रसर हैं। वहीं एक सच्चाई यह भी है कि राज्य में अनेक परियोजनाओं को लेकर विभागीय अधिकारी उनके लक्ष्य को बाधित करने में लगे हैं। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार श्री यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट कच्ची दरगाह-महानार पुल सह सड़क परियोजना हेतु जमीन अधिग्रहण के मामले में भी विभागीय अधिकारियों द्वारा लेटलतीफी की जा रही है। हालांकि इस मामले में श्री यादव ने अपने स्तर से इसकी कई बार समीक्षा की है।

वहीं सूबे में निर्माणाधीन अनेक राष्ट्रीय राजमार्गों के मामले में विभागीय अधिकारियों की सुस्ती का हाल यह है कि बार-बार स्मार पत्र दिये जाने के बाद क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है। इस मामले में श्री यादव ने विभागीय स्तर पर समीक्षा बैठक के दौरान कई निर्देश जारी किये। ऐसे ही कई मामलों को लेकर श्री यादव के निर्देश पर विभाग द्वारा भवन प्रमंडल, पटना सिटी, गया, जहानाबाद, नालंदा, औरंगाबाद, सीतामढ़ी, मधुबनी, शेखपुरा, अररिया और सुपौल के अधिकारियों को राजमार्गों के सीमांकन में पड़ने वाले भवनों का मूल्यांकन कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया था। यह काईवाई 24 अगस्त 2016 को ही की गयी थी। बाद में 20 सितंबर 2016, 27 अक्टूबर 2016, 30 नवंबर 2016 और 19 जनवरी को स्मार पत्र भेजे गये। लेकिन संबंधित अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। लिहाजा 16 मार्च को एक बार फिर स्मार पत्र भेजकर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गयी है। बहरहाल दिलचस्प यह भी है कि उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ही भवन निर्माण विभाग के मंत्री भी हैं। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी उन्हें पूर्ण सहयोग प्रदान नहीं कर रहे हैं।

कृतज्ञ राजद ने किया लोहिया को याद

पटना(अपना बिहार, 24 मार्च 2017) - महान समाजवादी नेता एवं चिंतक डा. राम मनोहर लोहिया जी की 107 वीं जयन्ती के मौके पर राजद नेताओं ने उन्हें कृतज्ञतापूर्वक याद किया। इस मौके पर राजद के प्रदेश कार्यालय में जयंती समारोह मनाया गया जिसकी अध्यक्षता राजद के प्रदेश अध्यक्ष डा. रामचंद्र पूर्वे ने की। इस अवसर पर अपने संबोधन में डा. पूर्वे ने कहा कि डा. लोहिया अनवरत गांव की दशा एवं वहां की प्रतिभा को सुधारने व निखारने के लिए सतत संर्घर्ष करते रहे। उन्होंने हमेशा व्यक्ति केन्द्रित राजनीति के जगह देश केन्द्रित राजनीति को प्राथमिकता दिया। वहीं पूर्व केन्द्रीय डा. रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि आज के राजनीतिक शून्यता के दौर में सामाजिक एवं राजनीतिक नैतिकता का हा्रस हो गया है। ऐसे में आज डा. लोहिया का विचार एक प्रकाश स्तंभ के रूप में दिखता है। जबकि प्रधान महासचिव सह विधायक मुन्द्रिका सिंह यादव ने कहा कि डॉ. लोहिया ने सामाजिक न्याय की लड़ाई को जमीन पर उतारा। आजादी के बाद राजनीतिक शूचिता उनके लिए सर्वोपरि था। वे जीवन पर्यन्त समाजवाद तथा गरीबों, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हित के लिए संघर्ष करते रहे। डॉ. लोहिया के आदर्शो पर चलकर राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। इस लड़ाई को मुकाम तक पहूँचाना डॉ. लोहिया के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार यादवेन्दु, विधायक विरेन्द्र कुमार सिन्हा, शोभा प्रकाश कुशवाहा, मदन शर्मा, आभालता, देवमुनी सिंह यादव, प्रदेश महासचिव देवकिशुन ठाकुर सहित बड़ी संख्याम ें राजद कार्यकर्ताओं ने डा. लोहिया के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा बिहार

पटना(अपना बिहार, 24 मार्च 2017) - ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि जल्द ही बिहार बिजली के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा। गुरूवार को विधान परिषद में ऊर्जा विभाग के 109 अरब, 5 करोड़, 3 लाख 31 हजार की अनुदान मांग पर चर्चा के बाद सरकार का पक्ष रखते मंत्री बिजेंद्र यादव ने कहा कि वर्ष 2018 तक राज्य का अपना बिजली उत्पादन 2650 मेगावाट हो जाएगा। अभी यह 525 मेगावाट है। उन्होंने बताया कि कांटी ताप विद्युत प्रतिष्ठान की 195 मेगावाट की एक इकाई , बरौनी की 110 मेगावाट की एक इकाई एवं 250 मेगावाट की दो इकाई एवं नवीनगर की 660 मेगावाट की दो इकाई से उत्पादन शुरू हो जाएगा। 2005 में बिहार का अपना उत्पादन शून्य था।

उन्होंने कहा कि राज्य में दिसंबर 2018 तक हर घर में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य है। राज्य में पिछले तीन वर्षों से बिजली दर में वृद्धि नहीं की गयी है। मंत्री ने पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश एवं राजस्थान की बिजली दरों का उल्लेख करते हुए बताया कि बिहार में सस्ती बिजली उपलब्ध करायी जा रही है। उन्होंने विपक्ष पर हताश होने का आरोप लगाया। मंत्री के संबोधन के दौरान विपक्ष ने सदन का बहिष्कार किया। सदन में ऊर्जा विभाग के अनुदान मांग को ध्वनिमत से स्वीकृति प्रदान की गयी। सदन में वाणिज्यकर, पर्यटन एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के अनुदान मांग पर भी चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि 2005 में ग्रिड उपकेंद्र की संख्या 45 थी, जो बढ़कर 106 हो गयी है। यह मार्च 2018 तक 152 हो जाएगा। वहीं, शक्ति उपकेंद्र की संख्या 268 से बढ़कर 674 हो चुकी है और यह मार्च 2018 में 792 हो जाएगी। मंत्री ने कहा कि दीन दयाल उपाध्याय ग्राम विद्युत योजना के लिए कुल स्वीकृत राशि 5827.23 करोड़ है। इसमें राज्यांश 2330.90 करोड़ है। ऐसे में क्यों नहीं इसका नाम बदलकर दीन दयाल उपाध्याय मुख्यमंत्री ग्राम विद्युत योजना कर दिया जाए।

राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने दी भगत सिंह को श्रद्धांजलि

पटना(अपना बिहार, 24 मार्च 2017) - शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह के शहादत दिवस पर उन्हें नमन किया । उनकी अमर कुर्बानियों को यादकर उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित की गयी। शहीद-ए-आजम के शहादत दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मुख्य राजकीय समारोह का आयोजन पटना के गॉधी मैदान के निकट शहीद-ए-आजम भगत सिंह के प्रतिमा स्थल प्रांगण में आयोजित किया गया, जहॉ पर राज्यपाल रामनाथ कोविन्द एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शहीद-ए-आजम की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर जदयू विधायक सह पूर्व मंत्री श्याम रजक, सामाजिक कार्यकर्ता चन्द्रिका सिंह दांगी, शिवशंकर निषाद, मुकेश कुमार सिंह, रवीश कुमार, कुलवंत सिंह सलूजा सहित अनेकों सामाजिक, राजनीतिक कार्यकता तथा गणमान्य व्यक्तियों ने शहीद-ए-आजम की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हे नमन किया तथा सपुष्प श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सशस्त्र पुलिस बल द्वारा शोक सलामी अर्पित कि गयी तथा उपस्थित लोगो ने दो मिनट का मौन रखकर शहीद-ए-आजम को श्रद्धांजलि अर्पित की।

जनता पर लाठी चलाना बंद करे सरकार : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 24 मार्च 2017) - विधानसाा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी आप के राज में अब लोग बुनियादी सुविधाएं मांगतें हैं, तो उन पर पुलिस की लाठी चार्ज होती हैं। आपके सात निश्चय में नली, गली, नल का जल की मांग करने वाले बिहार वार्ड सदस्य महासंघ प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठी चार्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों पर भी जमकर लाठी जार्च कर घायल कर दिया। लाठी चार्ज की घटना का कड़े शब्दों में डा. कुमार ने निंदा की है।

डा. कुमार ने कहा कि बिहार वार्ड सदस्य महासंघ की प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री के सात निश्चय में पक्की नली-गली व हर घर को नल का जल योजनाओं की राशि के स्वतंत्र फंड के रूप में इस्तेमाल की इजाजत मिले, वार्ड सदस्यों की प्रमुख मांगों में ग्रामीण योजना का फंड सीधे वार्ड के खाते में दिया जाएं। जिस वार्ड में काम हो, उसे उस वार्ड के सदस्यों के निगरानी में कराया जाएं। वार्ड के सदस्यों को पेंशन व भत्ता की सुविधा दी जाएं। प्रखंड विकास पदाधिकारियों के साथ हर महीने मीटिंग तय की जाएं एवं कार्यों की समीक्षा की जाएं हैं।

डा. कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के सात निश्चय को पूरा करने के लिए बिहार वार्ड सदस्य महासंघ उक्त मांगों को लेकर राजधानी में बुधवार को प्रदर्शन कर रहे महिला, पुरूषों को पुलिस ने खदेड़-खदेड़ कर पीटा। साथ ही 106 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। सरकार तुरंत वार्ड सदस्यों को बिना शत्र्त रिहा करें तथ इनकी मांगों को मांगों को मान लें।

सरकार का किसान विरोधी चेहरा उजागर : नंद किशोर

पटना(अपना बिहार, 24 मार्च 2017) - बिहार विधान सभा की लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा है कि धान की खरीद में राज्य सरकार पूरी तरह फिसड्डी साबित हुई है। वित्तीय वर्ष के समाप्त होने में मात्र एक सप्ताह शेष है और राज्य सरकार अब तक मात्र 14 लाख मीट्रिक टन ही धान खरीद सकी है।

श्री यादव ने कहा कि पिछले सात वर्षों के भीतर इस साल सबसे कम धान की खरीद हुई है। गत वर्ष इस मामले में राज्य सरकार की हुई किरकिरी के कारण सरकार ने संभावित अपनी विफलताओं के मद्देनजर धान की खरीद का लक्ष्य ही घोषित नहीं किया। पिछले वित्तीय वर्ष में 30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य सरकार ने निर्धारित किया था लेकिन साढ़े 18 लाख टन ही धान खरीद सकी थी। इस साल धान की रिकार्ड तोड़ उपज लगभग 85 लाख टन हुई लेकिन राज्य सरकार के निकम्मेपन के कारण बिचैलिये हावी रहे और किसानों को औने-पौने दर पर अपनी उपज को बेचने को मजबूर होना पड़ा।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में गड़बड़ घोटाला

- प्रमोद रंजन

डाइरेक्ट पीएचडी में अधिकांश सीटें अनारक्षित होती हैं। केंद्रीय विश्विद्यालयों के होस्टलों में ओबीसी आरक्षण आज तक नही है। दर्जनों सरकारी संस्थान उच्च शिक्षा/उच्च स्तरीय शोध के लिए हजारों लोगों को भारी-भरकम वजीफा देते हैं। कथित शोध कार्य के लिए प्रोजेक्ट के नाम पर अरबों रुपये की राशि दी जाती है। यह सब पूरी तरह अनारक्षित है। हां, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद में एससी-एसटी को थोड़ी सी रकम आवंटित की जाती है।

सुखदेव थोराट साहब ने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद मे पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप के लिए एससी-एसटी के लिए कुछ राशि अलग से रखने का प्रावधान लड़-भीड़ कर करवा दिया था। ध्यान रहे, वह प्रवधान आरक्षण नही है। वह आपका अधिकार नही है। परिषद की कृपा पर निर्भर है, अतिरिक्त पैसा होगा तो वह आपको कुछ देगी, पैसा कम पड़ने पर कथित उच्च स्तरीय शोध के लिए, सिर्फ कथित उच्च तबके को मिलेगा।

पिछले वर्ष इस संस्थान ने पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप के लिए 2162.26 लाख रुपये आवंटित किये। इसमें से सवर्णों को दिए गए 1600 लाख रुपये और दलितों को सिर्फ 329.04 लाख। ओबीसी को कुछ नही। इससे पिछले वर्षों मे यह आकड़ा और शर्मनाक था। जो उच्च शिक्षा में सीटों को नियमसंगत किये जाने का विरोध कर रहे हैं, उनसे जरा पूछिये कि उपरोक्त मुद्दों पर उनकी राय क्या है? क्या उन्होंने इनके लिए कभी प्रदर्शन किया है?

उच्च शिक्षा में नामांकन तो महज एक सीढ़ी है। असली खेल तो यूनिवर्सिटी मे नौकरी पाने और इन मलाईदार वजीफों, प्रोजेक्टों का है। सीटें बढ़ेंगी तो ये वजीफे भी बढेंगे। बिना आरक्षण के ये सारी सुविधाएं उन्ही को मिलेंगी। अगर सीटें नियमसंगत रहेंगी तो हमारे उच्च अध्ययन संस्थान बेहतर बनेंगे। कमजोर तबकों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का इससे भला होगा, वे काबिल बन सकेंगे और सदियों की प्रताड़ना से उबर सकेंगे।

एक मसला यह भी कि साल 2005-06 में, यानी उच्च शिक्षा में पिछडा वर्ग के लिए आरक्षण लागू होने से पहले जेएनयू में कुल 5264 पढते थे। आरक्षण विरोधियों की मांग पर सभी यूनिविर्सिटियों की भांति जेएनयू में भी सीटें बढायीं गयीं बल्कि जेएनयू में इसके लिए तत्परता कुछ ज्यादा ही रही। पिछले साल (2015-16) जेएनयू प्रशासन द्वारा पेश की गई वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार आज यहां पढने वाले विदयार्थियों की संख्या 8432 है। आरक्षण मिला 27 फीसदी और सीटें बढीं 60 फीसदी। किसके लिए? कोई भी समझ सकता है कि यह बढोत्तरी द्विज तबके के लिए की गई थी।

जाहिर है इससे दलित, पिछडों और आदिवासियों की संख्या भी बढी, लेकिन उनके लिए रोजगार के अवसर बंद रहे। प्राध्यापकों की नियुक्ति में यह अघोषित नियम है कि सामान्य सीट पर सवर्ण की ही बहाली होगी। अनुसूचित जाति-जनजाति व अन्य पिछडों को 50 फीसदी रिजर्व सीटों में ही ठेल दिया जाता है। इस नियम का इतनी कडाई से पालन किया जाता है कि एक भी अपवाद मिलना कठिन है। अब जब, सामान्य सीटों पर इनकी नियुक्ति होनी ही नहीं है तो इन बढी हुई सीटों का कोई खास लाभ इन तबकों को मिलने से रहा।

हां, फिलहाल आप इन्हें ज्ञान अर्जित करने की पटटी पढाने से बाज आएं। आप स्वयं क्यों नहीं ठनठन गोपाल बुद्धत्व प्राप्त करते? क्यों सवर्ण होने के कारण सामान्य सीटों को अपनी बपौती बनाए बैठे हैं?

बहरहाल, जेएनयू में सीटें बढी तो शिक्षक और स्टॉफ भी बढे। 2005-06 में जेएनयू में कुल 396 प्राध्यापक थे, जो 2015-16 में बढकर 614 हो गए। यह बढोत्तरी भी लगभग उसी अनुपात में हैं, जिस अनुपात में छात्र-छात्राआओं की संख्या बढी है। लेकिन मजा यह है कि इन दस सालों में अस्टिटेंट प्रोफेसरों के पद नहीं बढाए गए। अस्टिटेंट प्रोफेसर के पद में आरक्षण है, प्रोफेसर के पद पर नहीं।(लेखक फारवर्ड प्रेस वेब पत्रिका के प्रबंध संपादक हैं)

आइये गढ़ें नया बिहार : मुख्यमंत्री, चौथे बिहार उद्यमिता सम्मेलन स्टार्टअप बिहार 2017 का उद्घाटन

पटना(अपना बिहार, 22 मार्च 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उद्यमियों का आहवान करते हुए कहा कि यह मौका हम सभी के लिए जब हम सब मिलकर नया बिहार गढ़ सकते हैं। श्री कुमार मंगलवार को पटना के एस के मेमोरियल सभागार में आयोजित चौथे बिहार उद्यमिता सम्मेलन स्टार्टअप बिहार 2017 का उद्घाटन करने के बाद उद्यमियों को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इंटरनेट का जमाना है। युवाओं को ज्ञान अर्जित करने के लिये इंटरनेट की आवश्यकता पड़ती है, इसे देखते हुये जितने भी सरकारी विष्वविद्यालय एवं महाविद्यालय हैं, उनमें मुफ्त वाई-फाई की सुविधा दी जायेगी। कल बिहार दिवस के अवसर पर यह योजना लागू होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस योजना का पॉचवां अवयव पॉच सौ करोड़ रुपए का वेंचर कैपिटल फंड बनाने का था। युवा उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिये इस फंड को बनाया गया। उन्होंने कहा कि 2016 में नीति बनी थी, जिसे 2017 में सुधार के बाद 17 मार्च से लागू कर दिया गया। हम युवा उद्यमियों को विभिन्न प्रकार से मदद प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि युवा उद्यमियों के लिये विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में इनकुवेशन सेंटर की स्थापना की जा रही है। अब तक के आइडिया के आधार पर नीति का निर्माण किया गया है तथा उसका इम्प्लीमेंटेषन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सहायता के लिये आवेदन करने वाले सभी युवा उद्यमियों का सभी स्तर पर सहायता किया जायेगा। बगैर युवाओं के देश का भला नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि बिहार में सर्वाधिक युवा आबादी है। अगर हम युवाओं को शिक्षित करें, उनेक उद्यमिता को बढ़ावा दे तो एक से बढ़कर एक काम हो सकता है। मुख्यमंत्री ने युवा उद्यमियों द्वारा सहायता के लिये दिये जा रहे आवेदन प्रक्रिया को सभी प्रकार से पारदर्शी बनाने के लिये कहा गया। उन्होंने कहा कि सभी चीजों को पारदर्शी बनाइये। मापदण्ड तथा मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्षी हो।

मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में आये हुये युवा उद्यमियों से कहा कि आप रोजगार तलाष नहीं रहे हैं बल्कि आप दूसरों को रोजगार देंगे, इससे अच्छा और क्या होगा। किसके अंदर क्या क्षमता है, कोई नहीं जानता। उन्होंने कहा कि सभी के क्षमताओं का विकास होना चाहिये। बिहार में हर क्षेत्र में काफी संभावनायें हैं। हमें उद्यमिता को बढ़ावा देना है। बिहार के युवाओं में इतना दम है कि अगर उन्हें पता चले कि चांद पर काम मिल रहा है तो चांद पर भी चले जायेंगे। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में इसी धरती से शासन चलता था। यह भगवान बुद्ध, महावीर की धरती है। यह ज्ञान की भूमि है। यहॉ पर सिख धर्म के 10वें गुरू गुरू गोविंद सिंह जी महाराज का जन्म हुआ था। इसी धरती पर राष्ट्रपिता महात्मा गॉधी ने सत्याग्रह की शुरूआत की थी। यह गॉधी के चम्पारण सत्याग्रह की भूमि है। चाणक्य, आर्यभट्ट यहीं के हैं। शून्य का सृजन यहीं हुआ था। यह धरती महान है।

इस अवसर पर उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, पद्मश्री प्रो. अनिल गुप्ता, प्रधान सचिव उद्योग डॉ. एस. सिद्धार्थ, बिहार उद्यमी संघ के अध्यक्ष कौशलेन्द्र, बिहार उद्यमी संघ के सचिव अभिषेक कुमार ने भी समारोह को संबोधित किया।

आयोजित सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप पॉलिसी 2017 का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नीरज कुमार दास, आशुतोष कुमार, मृत्युंजय कुमार, श्वेता सिंह, कीर्ति प्रख्यात कष्यप सहित अन्य उद्यमियां को पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री ने बिहार उद्यमिता सम्मेलन के अवसर पर लगाये विभिन्न प्रदर्शनियों का निरीक्षण किया।

अगले वर्ष तक 2650 मेगावाट होगा उत्पादन

पटना(अपना बिहार, 22 मार्च 2017) - ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि मार्च 2018 तक बिहार का अपना बिजली उत्पादन 2650 मेगावाट हो जाएगा। अभी यह 525 मेगावाट है। उन्होंने बताया कि कांटी ताप विद्युत प्रतिष्ठान की 195 मेगावाट की एक इकाई , बरौनी की 110 मेगावाट की एक इकाई एवं 250 मेगावाट की दो इकाई एवं नवीनगर की 660 मेगावाट की दो इकाई से उत्पादन शुरू हो जाएगा। 2005 में बिहार का अपना उत्पादन शून्य था। श्री यादव मंगलवार को विधानसभा में भोजनावकाश के बाद ऊर्जा विभाग के 109 अरब, 5 करोड़, 3 लाख 31 हजार की अनुदान मांग पर चर्चा के बाद सरकार का पक्ष रख रहे थे।

उन्होंने कहा कि 2005 में ग्रिड उपकेंद्र की संख्या 45 थी, जो बढ़कर 106 हो गयी है। यह मार्च 2018 तक 152 हो जाएगा। वहीं, शक्ति उपकेंद्र की संख्या 268 से बढ़कर 674 हो चुकी है और यह मार्च 2018 में 792 हो जाएगी। मंत्री ने कहा कि दीन दयाल उपाध्याय ग्राम विद्युत योजना के लिए कुल स्वीकृत राशि 5827.23 करोड़ है। इसमें राज्यांश 2330.90 करोड़ है। ऐसे में क्यों नहीं इसका नाम बदलकर दीन दयाल उपाध्याय मुख्यमंत्री ग्राम विद्युत योजना कर दिया जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य में दिसंबर 2018 तक हर घर में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य है। राज्य में पिछले तीन वर्षों से बिजली दर में वृद्धि नहीं की गयी है। मंत्री ने पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश एवं राजस्थान की बिजली दरों का उल्लेख करते हुए बताया कि बिहार में सस्ती बिजली उपलब्ध करायी जा रही है। उन्होंने विपक्ष पर हताश होने का आरोप लगाया। मंत्री के संबोधन के दौरान विपक्ष ने सदन का बहिष्कार किया। सदन में ऊर्जा विभाग के अनुदान मांग को ध्वनिमत से स्वीकृति प्रदान की गयी। सदन में वाणिज्यकर, पर्यटन एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के अनुदान मांग पर भी चर्चा हुई।

वित्तरहित शिक्षकों को समान काम समान वेतन दें सरकार

पटना(अपना बिहार, 22 मार्च 2017) - विधान सभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि राज्य के शिक्षकों से सरकार सभी तरह का काम लेती है। सरकार शिक्षकों को समान काम समान वेतन नहीं दे रहीं हैं। राज्य के वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के 9 सूत्री मांगें को नेता प्रतिपक्ष ने आज विधान सभा में शून्य काल में उठाया और सरकार से मांग की उनकी मांगों का तुरंत मान लें। राज्य के वित्तरहित शिक्षकों भूखमरी के कगार पर पहुंच चुकें हैं। इंटमीटियट छात्रों के परीक्षा के मूल्यांकन कॉपी की जांच का वित्तरहित शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर वष्किार किया, जिस कारण सूबे के 14 लाख छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है, सरकार इनकी मांगों को अविलम्बं मान लें।

डा. कुमार ने कहा कि अनुदानित 240 सम्बंद्ध डिग्री महाविद्यालयों एवं अनुदानित 515 प्रस्वीकृत इंटरमीडिएट महाविद्यालयों की मांगें वर्षों से सरकार के यहां लंबित है। इनकी मांगों में कार्यारत शिक्षकों -शिक्षकेतर कर्मचारियों को समान काम समान वेतन एवं अन्य सुविधाएं दी जांए। वर्ष 2012 एवं 2013 के स्वीकृत एवं अनदान एवं तीन वर्षों 2014 से 2016 तक के बकाये अनुदान को यथाशीघ्र एकमुश्त दिया जाएं।

डा. कुमार ने कहा कि बिहार राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) 2015 के तहत सभी शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की सेवा स्थाई की जाएं। सेवा निवृत के बाद शिक्षकों -शिकक्षकेत्तर कर्मचारियों पेंशन एवं अन्य सुविधाएं दी जांए। वित्तरहित इंटरमीडियट महाविद्यालयों के सभी कर्मचारियों की सेवा निवृत की आयु 65 वर्ष की जाएं।

शिक्षकों ने छोड़ी जिद, कापियों के मूल्यांकन कार्य में लेंगे भाग

पटना(अपना बिहार, 22 मार्च 2017) - बकाये वेतन की मांग को लेकर पहले कापियों का मूल्यांकन नहीं करने की जिद पर अड़े शिक्षकों ने जिद छोड़ दी है। मिली जानकारी के मुताबिक एक अप्रैल से शुरू हो रहे मैट्रिक की कॉपियों के मूल्यांकन कार्य में बिहार प्रदेश माध्यमिक शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ शामिल होगा। यह निर्णय छात्रहित को ध्यान में रखते हुए महासंघ ने मंगलवार को अपने कार्यालय में हुई बैठक में लिया। महासंघ के प्रांतीय संयोजक राजकिशोर प्रसाद साधु ने कहा कि छात्रों के कॅरियर का ख्याल रखते हुए महासंघ के शिक्षक कॉपी जांच में अपना योगदान करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर समय पर कॉपी की जांच नहीं की गयी, तो रिजल्ट में देर होगी। इससे लाखों बच्चों का नामांकन प्रभावित हो जाएगा।

बलियावी के बयान पर सदन में हंगामा, हज सब्सिडी खत्म करे सरकार, फायदा उठाती हैं एयरलाइंस कंपनियां, इस्लाम नहीं करता है आतंकवाद का समर्थन

पटना(अपना बिहार, 22 मार्च 2017) - बिहार विधान परिषद में विपक्ष ने उस समय खूब हंगामा किया जब जदयू के सदस्य सह पूर्व सांसद गुलाम रसूल बलियावी ने भाजपा पर यह आरोप लगाया कि वह आतंकवाद की राजनीति करती है, इसलिए सबसे बड़े आतंकवादी भाजपाई हैं। दरअसल श्री बलियावी मंगलवार को सदन में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के बजट पर वाद-विवाद में अपना पक्ष रख रहे थे। विपक्ष द्वारा तीन तलाक का सवाल उठाये जाने पर श्री बलियावी ने कहा कि कोई भी धर्म और मजहब व्यक्तिगत सवाल है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्यों में जनता अपना जनादेश इसलिए नहीं देती है कि वह विकास के तमाम सवालों को दरकिनार कर मियां-बीवी के बीच का झगड़ा निबटाये। उन्होंने कहा कि तीन तलाक के नाम पर राजनीति करने वालों को पहले तीन तलाक की पूरी प्रक्रिया से वाकिफ होना। इस्लाम में महिलाओं को तमाम सुरक्षा और अधिकार प्रदान किये गये हैं।

वहीं हज सब्सिडी के सवाल पर श्री बलियावी ने कहा कि वे स्वयं इस बात के समर्थक हैं कि किसी भी धर्म के मामले में सरकारी राशि का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जिस दिन हज सब्सिडी बंद हो जाएगी तब देश की एयर लाइंस कंपनियां बंद हो जायेंगी। उन्होंने कहा कि हज सब्सिडी का सबसे अधिक लाभ एयरलाइंस कंपनियों को होता है।

जबकि आतंकवाद के सवाल पर श्री बलियावी ने कहा कि इस्लाम आतंकवाद का समर्थन नहीं करता है। उन्होंने कहा कि लखनऊ में जिस व्यक्ति का एनकाउंटर आतंकी के रूप में किया गया है, अभी तक पुलिस उसे आतंकी साबित नहीं कर पायी है। श्री बलियावी के इस बयान पर भाजपा के सदस्यगण भड़क गये और उनके उपर आातंकवादियों को समर्थन देने का आरोप लगाया।

चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी सम्मेलन में जुटेंगे दिग्गज, मुख्यमंत्री करेंगे उद्घाटन

पटना(अपना बिहार, 22 मार्च 2017) - आगामी 23-24 मार्च को मोतिहारी के एमएस कालेज परिसर में चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर देश-विदेश के एक हजार से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे। इस आशय की जानकारी अखिल भारतीय सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष महादेव विद्रोही ने दी। उन्होंने बताया कि इस मौके पर मेघा पाटेकर, पी.वी. राजगोपाल, अंशु गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार, अवधेश कुमार, नई दिल्ली स्थित राजघाट से जुड़े रजनीश कुमार, पद्मश्री तुलसी मुंडा, स्वामी अग्निवेश और राजेंद्र सिंह सहित कई नामी गिरामी लोग भाग लेंगे। सम्मेलन के दौरान भूदान की समस्या और महात्मा गांधी के सत्याग्रह के विषय पर विस्तारपूर्वक चर्चा की जाएगी।

वित्त रहित शिक्षकों की बल्ले-बल्ले, राज्य सरकार ने जारी की तीन वर्षों की एकमुश्त राशि

पटना(अपना बिहार, 22 मार्च 2017) - वित्त रहित शिक्षा के तहत कार्य करने वालों के लिए खुशखबरी। राज्य सरकार ने छह वर्षों से बकाये अनुदान में से तीन वर्षों के अनुदान का भुगतान करने को राशि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को आवंटित कर दिया है। इस आशय की घोषणा शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी ने बिहार विधान परिषद में एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने फिलहाल राशि की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए तीन वर्षों के बकाये अनुदान के भुगतान के लिए करीब 3 अरब 7 करोड़ रुपए का आवंटन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को कर दिया गया है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि 31 अप्रैल तक शिक्षकों व शिक्षकेत्तर कर्मियों का भुगतान सुनिश्चित हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि शेष तीन वर्षों की बकाये राशि का भुगतान एक वर्ष के अंदर कर दिया जाएगा।

वहीं इस मामले में शिक्षा मंत्री की घोषणा का सत्ता पक्ष के सदस्यों द्वारा सराहना की गयी वहीं कई सदस्यों ने उनसे प्रबंधन समितियों द्वारा तमाम तरह की अड़चनें पैदा करने का सवाल भी उठाया। जबकि प्रतिपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि शिक्षा मंत्री वित्त विभाग कें पेंच को नहीं जानते हैं। उन्होंने कहा कि 31 अप्रैल तक शिक्षकों का भुगतान नहीं हो सकेगा। इसके जवाब में डा. चौधरी ने कहा कि श्री मोदी बेवजह की नकारात्मक राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वित्त रहित संस्थाओं की प्रबंधन समितियों को लेकर संवेदनशील है और इसलिए यह प्रावधान किया गया है कि इस बार जो समितियां 14 दिनों के अंदर शिक्षकों को भुगतान नहीं करेंगी, ऐसी समितियों को चिन्हित कर उन्हें दी गयी राशि वापस ले ली जाएगी। इस मामले में केदार पांडेय ने राज्य सरकार से वित्त रहित शिक्षा नीति के तहत कार्य करने वालो कर्मियों के लिए सेवा शर्त नियमावली बनाने की मांग की।

बिजली दर में वृद्धि जनता पर कहर : नंद किशोर

पटना(अपना बिहार, 22 मार्च 2017) - बिहार विधान सभा की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा है कि राज्य सरकार अप्रैल से बिजली दर में दुगुनी से अधिक वृद्धि कर जनता पर एक और कहर ढाने की तैयारी में जुटी है। इसका सीधा असर गरीब जनों से लेकर खेत-खलिहान तक पड़ेगा।

श्री यादव ने आज यहां कहा कि राज्य में शराबबंदी के बाद खाली हुए खजाने को भरने के लिए सरकार ने पहले तो नाना प्रकार के नये करों के जरिये जनता-जनार्दन की कमर तोड़ी और अब रही सही कसर विद्युत दर में वृद्धि कर पूरी करने वाली है। राज्य सरकार के विद्युत दर में वृद्धि के प्रस्ताव का सीधा असर एक ओर जहां खेत-खलिहान पर पड़ेगा तो उद्योग-धंधे भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। शहरी क्षेत्र के घरेलू उपभोक्ताओं से विद्युत दर में दुगनी वृद्धि कर राषि वसलूने की तैयारी चल रही है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग के समक्ष आम उपभोक्ताओं के अलावा उद्योग, व्यापार से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी गहरी आपत्ति दर्ज कर दी है लेकिन सरकार कान में तेल डाले सोयी है। सरकार की एक मात्र सोच सिर्फ यही है कि शराबबंदी से सरकारी राजस्व को कोई पांच हजार करोड़ रुपए प्रतिवर्ष लग रहे चूने की भरपाई कैसे हो ।

श्री यादव ने कहा कि अभी शहरी क्षेत्र के घरेलू उपभोक्ताओं को एक सौ यूनिट बिजली की खपत करने पर प्रति यूनिट तीन रूपया लिया जाता है जिसे बढ़ा कर 6 रूपया 30 पैसा करने के प्रस्ताव है। स्पष्ट है कि इसका सीधा आम जन-जीवन पर पड़ेगा और उपभोक्ता सामग्री की कीमतों में वृद्धि होगी। खेती पर इसकी ज्यादा भार पड़ेगी और उत्पादन पर असर पड़ेगा।

बच्चेदानी घोटाला करने वालों को माफ नहीं करेगी सरकार : तेज प्रताप, जल्द शुरू होंगे बंद आयुर्वेद कॉलेज, भ्रूण जांच करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही सरकार

पटना(अपना बिहार, 22 मार्च 2017) - राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत आपरेशन के नाम पर गर्भाशय निकालने के मामले में राज्य सरकार 709 पीड़ितों को 50-50 हजार रुपए मुआवजे के तौर पर दे रही है। इसके लिए राशि का आवंटन कर दिया गया है। वहीं इसकी वसूली दोषी चिकित्सकों से की जानी है। इसके अलावा इन दोषी चिकित्सकों को राज्य सरकार माफ नहीं करेगी। ये बातें स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव ने मंगलवार को बिहार विधान परिषद में रजनीश कुमार और रामचंद्र भारती के संयुक्त प्रश्न के जवाब में कही। उन्होंने सदन को बताया कि अबतक हुए जांच में आठ जिलों के कुल 33 चिकित्सकों को दोषी पाया गया है और उनका निबंधन रद्द करने के लिए प्रावधानों के तहत मेडिकल काउंसिल आॅफ इंडिया को अनुशंसा की गयी है।

वहीं इस मामले में प्रतिपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने पीड़ितों को दो आयुवर्ग में विभाजित कर 40 वर्ष से कम उम्र की पीड़ित महिलाओं को ढाई लाख रुपए और और उससे अधिक उम्र की पीड़ित महिलाओं को डेढ़-डेढ़ लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया था। लेकिन राज्य सरकार ने अपनी मर्जी से मुआवजे की राशि कम कर दी। मंगल पांडेय के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य में कुल 2278 पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्र हैं। इन केंद्रों का समय-समय पर प्रावधानों के तहत सिविल सर्जन द्वारा जांच की जाती है। उन्होंने बताया कि राज्य में वर्ष 2012 में 194 केंद्रों को नियमों के प्रतिकुल पाया गया और उनके खिलाफ मुकदमा किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इन केंद्रों के संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

वहीं आयुर्वेदिक कालेजों के संबंध में राजकिशोर प्रसाद द्वारा पूछे गये तारांकित प्रश्न के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया कि राज्य में कुल पांच आयुर्वेदिक कालेजों में से चार कालेज पूरी तरह बंद हैं और इन कालेजों पठन-पाठन नहीं हो रहा है। इस कारण राज्य के छात्रों को दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन कालेजों को वर्ष 2007 में सरकार के निर्णय के आलोक में बंद किया गया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे इस पूरे मामले की समीक्षा स्वयं कर रहे हैं और जल्द ही इन कालेजों में पठन-पाठन शुरू हो सकेगा।

जबकि निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों का आर्थिक शोषण किये जाने के सवाल पर श्री यादव ने कहा कि राज्य में कुल सरकारी निबंधित अस्पतालों की संख्या 1815 है और निजी अस्पतालों की संख्या 1351 है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों का शोषण करने संबंधी शिकायत मिली है। उन्होंने कहा कि इस मामले में एक मामला पटना हाईकोर्ट में में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि न्यायादेश आने के बाद ऐसे अस्पतालों पर समुचित कार्रवाई की जाएगी।

वहीं सूरजनंदन प्रसाद के तारांकित सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सूबे में चिकित्स शिक्षा को समुन्नत करने के लिए सरकार पूरी तरह संकल्पित है और इसके लिए वर्ष 2016-17 में कुल 1055 करोड़ रुपए का उपबंध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सूबे के पांच जिलों यथा मधुबनी, सीतामढ़ी, बेगूसराय, महुआ और भोजपुर में नये मेडिकल कालेज खोलने का निर्णय लिया है।

हमारी तहजीब में बसी है उर्दू : राज्यपाल

पटना(अपना बिहार, 22 मार्च 2017) - हमारे समाज में अदब की बहुत अहमियत है। खास तौर से उर्दू अदब को चार चाँद लगाने में किसी एक मजहब के लेखकों का योगदान नहीं, बल्कि हिन्दू, मुस्लिम, सिख सबने अपने लेखन से उर्दू को समृद्ध किया है। उर्दू जुबान पूरी दुनियाँ को प्रेम का पैगाम देती है। उर्दू एक भाषा मात्र नहीं, बल्कि इसमें हमारी पूरी तहजीब बसी हुई है। इस भाषा को जहाँ इस मुल्क के लेखकों ने समृद्ध किया है, वहीं दूसरे मुल्कों में रह रहे उर्दू-लेखकों एवं शायरों के योगदान को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वे मुल्क से बाहर रहते हुए भी, अपनी उर्दू भाषा से प्रेम करते हैं और अपने लेखन से इसे विकसित करने में एक अहम भूमिका निभाते हैं। ये बातें राज्यपाल राम नाथ कोविन्द ने बिहार उर्दू अकादमी द्वारा आयोजित विश्व उर्दू सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कही।

राज्यपाल ने कहा कि बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में उर्दू विभाग कार्यरत हैं, जिनमें अच्छे शिक्षकों के अलावा मेहनती बच्चे-बच्चियाँ भी हैं। हम यह आशा करते हैं कि सभी शिक्षक, उर्दू पढ़ने वाले बच्चों का एक ऐसा समूह तैयार करेंगे, जो आगे चलकर उर्दू जुबान-व-अदब के विकास में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान करेंगे। इस भाषा के विकास के लिए सभी उर्दू भाषा-भाषी अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में इसका प्रयोग करें और अपने बच्चों को शुरू में ही उर्दू की शिक्षा अवष्य दिलायें, ताकि वे अपनी तहजीब से भी जुड़ कर गौरव महसूस कर सकें।

श्री कोविन्द ने कहा कि सरकार उर्दू भाषा व साहित्य की तरक्की के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। बिहार उर्दू अकादमी भी एक ऐसी सक्रिय संस्था है, जो उर्दू के विकास के लिए कतिपय कार्य रही है। उन्होंने स्वतंत्रता-आन्दोलन में उर्दू अदीबों की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इंकलाब जिन्दाबाद का नारा तब सबमें जोश भरता था। राज्यपाल ने कहा कि उर्दू की तरक्की में सभी धर्मों, जातियों और संस्कृति के लोगों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। श्री कोविन्द ने कहा कि उर्दू जुबान और अदब बेहतर ढ़ंग से बिहार में फल-फूल रही है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ. अब्दुल गफूर ने कहा कि उर्दू के जरिये षिक्षा देनेवाली संस्थाओं को सुदृढ़ीकृत किये जाने की जरूरत है।

कार्यक्रम में बोलते हुए उर्दू भाषा प्रोन्नयन की राष्ट्रीय परिषद् के निदेशक प्रो. इरतजा करीम ने कहा कि उर्दू भाषियों को उर्दू की तरक्की के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए। कनाडा से आये शायर जावेद दानिश ने भी उद्घाटन-सत्र में अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में स्वागत-भाषण बिहार उर्दू अकादमी के सचिव श्री मुष्ताक अहमद नूरी ने एवं धन्यवाद-ज्ञापन मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विष्वविद्यालय, पटना के पूर्व कुलपति प्रो. एजाज अली अरशद ने किया।

योगी कार्ड से सांप्रदायिक धु्रवीकरण को बढ़ावा : सदानंद

पटना(अपना बिहार, 21 मार्च 2017) - बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि उप्र में भाजपा के योगी कार्ड से सांप्रदायिक ध्रवीकरण को बढ़ावा मिलेगा। जो न तो देश की राजनीति के लिए हितकारी है और न ही सर्वधर्म समभाव समाज के लिए लाभकारी। भाजपा के ऐसे कदमों से देश के धर्मनिरपेक्षता की मूल भावना को चोट पहुँचेगी। आपसी प्रेम, भाईचारा और सौहादर््य के वातावरण के बिगड़ने का बराबर खतरा रहेगा। सिंह ने कहा कि भाजपा ने योगी कार्ड को उप्र में खेलकर जिस कट्टरता को बढ़ावा दे रही है उससे यहाँ भी पाकिस्तानी संस्कृति वाली कट्टरवाद पनपने लगेगी। जो आनेवाले समय में देश के लिए घातक साबित होगा। धर्मान्धता और कट्टरता से आज तक पूरे विश्व में कहीं भी किसी समुदाय का भला नहीं हुआ है। उप्र में योगी युग की शुरूआत कर क्या भाजपा क्षणिक सत्ता प्राप्ति के लिए देश को साम्प्रदायिकता की ओर नहीं धकेल रही है? क्या कालांतर में इससे देश पर पड़ने वाले दुष्परिणाम की कल्पना भाजपा ने की है?

श्री सिंह ने कहा कि योगी आदित्यनाथ भाजपा के फायरब्रिगेड के नेता हैं। उनके उप्र के मुख्यमंत्री बनने से दूसरे संप्रदाय के लोगों में भय व्याप्त हो रहा है। वह भय सबका साथ, सबका विकास के नारा से दूर होने वाला नहीं है। क्योंकि योगी और फकीर शासन-प्रशासन के लिए नहीं होते हैं। देशवासियों के पास अभी भी समय है कि वे भाजपा के असली चेहरे को समझें और साम्प्रदायिक धु्रवीकरण को रोकने के लिए कांग्रेस के हाथ को मजबूत करें।

मुख्यमंत्री को सौंपा 2.5 करोड़ का चेक

पटना(अपना बिहार, 21 मार्च 2017) - सोमवार को विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिये 2.5 करोड़ रुपए का चेक सौंपा। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक सह अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम अभय कुमार उपाध्याय, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम मुख्य अभियंता वषिष्ठ नारायण, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के सचिव आनंद प्रकाश श्रीवास्तव, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के मुख्य लेखा पदाधिकारी हेमंत कुमार उपस्थित थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुलिस महानिदेशक सह अध्यक्ष सह प्रबंध निदेषक बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में 2.5 करोड़ रुपए का चेक देने के लिये धन्यवाद दिया।

सदन में भिड़े तेजस्वी-सुमो, जमकर हुआ हंगामा, सत्ता पक्ष के एक सदस्य ने कहा - सुशील मोदी मानसिक रूप से असंतुलित, भाजपाइयों ने भी जमकर काटा बवाल

पटना(अपना बिहार, 21 मार्च 2017) - सोमवार को बिहार विधान परिषद में एक बार फिर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव और प्रतिपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी आपस में भिड़ गये। हालत यह हो गयी कि दोनों पक्षों के लगभग सभी सदस्य अपने-अपने आसन पर खड़े हो गये और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने लगे। सभापति अवधेश नारायण सिंह ने बार-बार सदस्यों से सदन की मर्यादा बनाये रखने की अपील की। उनके बार-बार अनुरोध किये जाने के बाद सदस्य शांत हुए और सदन की कार्यवाही शुरू हो सकी।

दरअसल मंगल पांडे के तारांकित सवाल का जवाब देने के क्रम में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि वे भाजपा के सात वर्षों का बिगाड़ा हुआ अब बना रहे हैं। श्री पांडे ने कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल सह सड़क के निर्माण को लेकर सवाल पूछा था। इसके जवाब में श्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने 60 फीसदी से अधिक जमीन अधिग्रहित कर संवेदक को दे दिया है। उन्होंने बताया कि कुल 313 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। इसमें से 186 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि इस पुल का निर्माण आगामी 2020 तक कर लिया जाएगा। यह लक्ष्य पूर्व से ही निर्धारित है।

इस पर श्री पांडे ने पूरक पूछते हुए कहा कि सवा साल बीत जाने के बाद भी आजतक एक पाया नहीं खड़ा हो पाया है, ऐसे में तीन वर्षों के अंदर पुल और सड़क का निर्माण कैसे हो जाएगा। जवाब में श्री यादव ने कहा कि विपक्ष काल्पनिक सवाल कर रहा है। प्रावधानों के मुताबिक पुल का निर्माण कार्य 45 फीसदी जमीन अधिग्रहण करने के बाद सवंदेक को देना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने साठ फीसदी से अधिक जमीन अधिग्रहित कर कार्य शुरू करने का निर्देश जारी कर दिया है।

वहीं विपक्ष द्वारा लेटलतीफी का सवाल किये जाने पर तेजस्वी यादव ने कहा कि सात वर्षों तक भाजपा के मंत्री ही पथ निर्माण विभाग के मंत्री रहे। अपने कार्यकाल में उन लोगों ने सैंकड़ों पुल तो बनवाये लेकिन एप्रोच रोड नहीं बनवाया। इस कारण पुल बेकार हो गये। उन्होंने कहा कि वे भाजपा कोटे के पथ निर्माण विभाग मंत्रियों का बिगाड़ा हुआ अब बना रहे हैं।

श्री यादव के इस कथन पर भाजपा के सदस्य भड़क गये। सुशील मोदी ने कहा कि तेजस्वी जी, आपके माता-पिता के राज में सड़कों का क्या हाल था, यह सब जानते हैं। इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने हंगामा किया। वहीं सत्ता पक्ष के ही एक सदस्य ने श्री मोदी को मानसिक रूप से असंतुलित करार दे दिया। इस पर विपक्ष भी हंगामा करने लगा। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सूबे में जब उनकी सरकार थी तब भाजपा के लोग सरकार चलने कहां देते थे। बार-बार राष्ट्रपति शासन लगाया जाता था। उन्होंने कहा कि तब केंद्र सरकार बिहार की सड़कों के लिए राशि का आवंटन ही नहीं करती थी।

अपनी चिंता करें रामविलास-उपेंद्र : राजद

पटना(अपना बिहार, 21 मार्च 2017) - राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा है कि केन्द्रीय मंत्री रामबिलास पासवान जी और उपेन्द्र कुशवाहा जी बिहार की महागठबंधन की चिन्ता न कर अपनी चिन्ता करें, जिन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया भी नहीं। जबकि एनडीए के अन्य घटक दलों के नेताओं को विधिवत रूप से आमंत्रित किया गया था। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ जब भाजपा एवं एनडीए के घटक दलों के नेताओं की उपस्थिती में लखनऊ में मुख्यमंत्री पद का शपथ ले रहे थे, तो पटना में दोंनों केंद्रीय मंत्री नमो के प्रति अपनी भक्ति दिखा कर अपना सीआर ठीक करा रहे थे।

श्री गगन ने कहा कि यदि रामबिलास जी और उपेन्द्र जी को बिहार में एनडीए के जीत का इतना ही भरोसा है तो पहले वे अपने-अपने लोक सभा क्षेत्रों से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ लें तो उन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी हो जायेगी। श्री गगन ने कहा कि यदि उनमें साहस है तो उसी उत्तर प्रदेश मे विधान सभा भंग कर योगी आदित्य नाथ के के नेतृत्व में पुन: चुनाव कराकर देख लें। वहां की ठगी जनता उन्हे 1980 वाली स्थिती में पहुंचा देगी।

किसी को हवाईजहाज तो किसी को कार आवंटित

पटना(अपना बिहार, 21 मार्च 2017) - सूबे में आसन्न नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के विभिन्न पदों के प्रत्याशियों के लिए राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव चिन्ह निश्चित कर लिया है। सोमवार को आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक कुल 48 चुनाव चिन्हों पर अंतिम रूप से सहमति बनी। इसके मुताबिक प्रत्याशियों को कार से लेकर हवाई जहाज तक आवंटित किया गया है। आवंटित चिन्हों में स्टोव, कैंची, शंख, काठगाड़ी, फॉक, कुल्हारी, जग, चुड़ियां, स्लेट, चम्मच , अंगुठी, बल्ला, किताब, चरखा, केतली आदि शामिल किया गया है।

जदयू विधायक की गिरफ्तारी को ले विपक्ष ने काटा बवाल, सूबे में भी श्मशान की राजनीति करेगी भाजपा : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 21 मार्च 2017) - बिहार विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को जदयू के विधायक मेवालाल की गिरफ्तारी की मांग को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया. अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक विपक्ष अपनी मांगों के समर्थन में वेल में जा पहुंचा. वहीं इससे पूर्व जब सदन की कार्यवाही चलने लगी तक विपक्ष ने गृह विभाग से संबंधित एक सवाल पर हंगामा करने लगा. विपक्ष अध्यक्ष के बार-बार गुजारिश करने के बाद भी वेल में पहुंचकर हंगामा करता रहा. विपक्षी सदस्यों ने मेवालाल की गिरफ्तारी को लेकर नारेबाजी भी की.

सबसे पहले विपक्षी सदस्यों ने प्रश्नकाल में मेवालाल की गिरफ्तारी को लेकर मामला उठाया. उसके बाद जैसे ही सत्तापक्ष के सदस्यों ने टोका-टाकी की, उसके बाद हंगामा शुरू हो गया. गौरतलब हो कि जदयू के विधायक मेवालाल पर नियुक्ति घोटाले का आरोप है. वहीं दूसरी दूसरी ओर विधानसभा परिसर में आज सुबह में विपक्ष ने हंगामा किया. साथ प्रतिपक्ष के नेता प्रेम कुमार ने मीडिया को बताया कि श्मशान बनाम कब्रिस्तान को लेकर बीजेपी बिहार में आंदोलन करेगी.

पिछड़े राज्यों के विकास से ही देश की तरक्की : जदयू, देश को चाहिए नीतीश मॉडल

पटना(अपना बिहार, 21 मार्च 2017) - प्रदेश जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा है कि पिछड़े और विकासशील राज्यों को आगे बढ़ाकर तथा मानव विकास पर फोकस करके ही देश की तरक्की हो सकती है। केवल विकसित राज्यों और बड़े कारपोरेट घरानों के बल पर चुनौतियों का मुकाबला नहीं किया जा सकता है। नीतीश कुमार जी के 11 वर्ष से ज्यादा के शासनकाल में इन सबको लेकर कई अनूठे प्रयोग हुए हैं और जिनकी सफलता से प्रेरित होकर कई राज्य उनका अनुकरण भी कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में देश में मानव विकास और राज्यों की तरक्की का बिहार मॉडल या नीतीश मॉडल उभर कर सामने आया है। देशहित में इसे खुले मन से अपनाने की जरूरत है।

जदयू प्रवक्ता ने कहा कि श्री कुमार के शासन में संसाधनों का बेहतरीन इस्तेमाल बिहार में किया गया है। बिहार का "प्रति निवेश हासिल" देश में सर्वाधिक है। इसे न केवल बिहार में बनाए रखने, बल्कि अन्य पिछड़े और विकासशील राज्यों की तरक्की के लिए पूरे देश में आगे बढ़ाने की जरूरत है। जबतक तरक्की की राह में पीछे छूट गए राज्य और लोग आगे नहीं बढ़ेंगे, देश की तरक्की और मजबूती भी अधूरी ही रहेगी। विश्वव्यापी संकट के इस बदलते समय में, जबकि बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाएं धराशायी हो रही हैं, सबको साथ लेकर तरक्की हासिल करने का यह नीतीश मॉडल ही भारत का भविष्य संवारने वाला और असली विकास का सही विकल्प हो सकता है।

शिक्षा की समृद्धि विकास की आधारशिला : मिश्र

पटना ब्यूरो । आगामी बिहार दिवस के आलोक में पूर्व मुख्यमंत्री डा जगन्नाथ मिश्र ने अपने बयान में कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में समृद्धि ही विकास की असली आधारशिला है। उन्होंने कहा कि कहा कि 1912 में बिहार राज्य की स्थापना हुई थी। राज्य सरकार द्वारा बिहार दिवस मनाये जाने के इस अवसर पर उन्होंने कहा है कि शिक्षा की समृद्धि ही विकास की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से समृद्ध रहने वाले सभी स्तर के शिक्षण संस्थान धीरे-धीरे आज बुरी अवस्था में चले गये हैं। पिछले कुछ वषों में बिहार में बहुआयामी विकास का दौर शुरू हुआ है। यह अच्छी बात है कि राज्य सरकार शिक्षा को प्राथमिकता तो दी है परन्तु शिक्षा में लगातार गुणात्मक हज्रस लगातार जारी है। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा को हर तरह से मजबूत किये बगैर बिहार का विकास संभव नहीं है। अन्य राज्यो की श्रेणी में बिहार विकास के मामले में खरा नही उतरता, इसलिए बिहार दिवस के अवसर पर आम लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य की प्राप्ति का प्रयास करना है।

डा. मिश्र ने कहा कि किसी भी राज्य एवं समाज के विकास का आधार स्तम्भ शिक्षा ही हो सकता हैं। बिहार के विकास का सपना तभी पूरा होगा जब आधारभूत संरचना शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर होगा। आज प्राथमिेक से लेकर उच्च शिक्षा की स्थिति अत्यन्त दयनीय बनी हुई है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अधिकतर छात्र जिनके माता-पिता सक्षम हैं वे अपने बच्चों को दूसरे राज्यों में शिक्षा ग्रहण कराना पसंद करते हैं। शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में जाना और इस राज्य में आना राष्ट्रीय एकता के विकास में एक सकारात्मक कदम हो सकता है परन्तु शिक्षण संस्थानों की खास्ता हालत की वजह से छात्रों का बाहर जाना एक दुखद पहलू है।

सरकार का महिला सशक्तीकरण का दावा झूठा : ऐपवा

पटना(अपना बिहार, 21 मार्च 2017) - अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएषन (ऐपवा) के बैनर तले आज हजारों महिलाओं ने बिहार में छात्राओं और उसमें भी खासकर दलित व कमजोर वर्ग की छात्राओं के लिए मुकम्मल शिक्षा की व्यवस्था, छात्राओं-महिलाओं पर बढ़ती हिंसा-बलात्कार के मामले में पुलिस-प्रशासन द्वारा अपराधियों को बचाने की कोशिशों पर रोक लगाने और पीड़ितों के न्याय के सवाल पर पटना में मुख्यमंत्री के समक्ष आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया. गेट पब्लिक लाइब्रेरी से आरंभ होने वाले इस प्रदर्शन का नेतृत्व ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, बिहार राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे, राज्य सचिव शशि यादव, राज्य सह सचिव अनीता सिन्हा और राज्य उपाध्यक्ष सोहिला गुप्ता ने किया.

गेट पब्लिक लाइब्रेरी से हजारों की तादाद में महिलाओं ने गगनचुंबी नारे लगाते हुए विधानसभा की ओर मार्च किया और गर्दनीबाग धरनास्थल पर एक सभा का आयोजन किया. इस सभा को ऐपवा नेताओं के अलावा माले विधायक दल के नेता महबूब आलम व सुदामा प्रसाद ने भी संबोधित किया.

सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि नीतीश सरकार लड़कियों को पंख लगाने का दावा करते हैं, लेकिन हकीकत में इसका ठीक उलटा हो राह है. आज जब लड़कियां शिक्षा के प्रति जागरूक हुई हैं, उनके उपर कई तरह के हमले किए जा रहे हैं. न तो पर्याप्त स्कूल हैं और जो स्कूल हैं भी वहां किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं है. जो सरकारी वि़द्यालय चल रहे हैं वे भी लड़कियों को ज्ञान व क्षमता प्रदान करने की स्थिति में नहीं हैं. स्कूली शिक्षा के बाद लड़कियां घर बैठ जाने को मजबूर हैं क्योंकि कॉलेज की पढ़ाई के लिए नजदीक में कोई कॉलेज नहीं है और बड़े शहर भेजने की क्षमता हर मां-बाप में नहीं है. जो कॉलेज जिला मुख्यालयों में हैं; वे भी संसाधन, शिक्षक, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी का घोर अभाव झेल रहे हैं.

बागमती नदी बांध परियोजना पर लगे अविलंब रोक : माले

पटना(अपना बिहार, 21 मार्च 2017) - भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल व अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव धीरेन्द्र झा ने कहा है कि दशकों पुरानी विनाशकारी बागमती बांध परियोजना पर बिहार सरकार और मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन किसानों व ग्रामीणों को लगातार धोखा दे रही है. फरक्का बांध पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली नीतीश सरकार का रवैया बागमती बांध परियोजना पर ठीक उलटी है. सरकार का यह तरीका बेहद निंदनीय है. माले राज्य सचिव ने कहा कि दशकों पुरानी बागमती पर बांध को लेकर जन समुदाय में व्यापक आक्रोश है. लोग इस विनाशकारी परियोजना का लगातार विरोध कर रहें हैं और आंदोलन चला रहे हैं. आंदोलन के दबाव में प्रशासन पीछे हटता है, लेकिन अगले ही दिन फिर कहीं दूसरी जगह बांध निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाता है.

उन्होंने कहा कि पिछले महीने बागमती बांध निर्माण कार्य को तत्काल रोकने, परियोजना का रिव्यू करवाने और वास-चास बचाओ, जमीन बचाओ-बागमती बचाओ संघर्ष मोर्चा के संयोजक जितेन्द्र यादव सहित कई आंदोलनकारियों पर लादे गए फर्जी मुकदमे को अविलंब वापस लेने के सवाल पर मुजफ्फरपुर में एक सप्ताह का सत्याग्रह चला था. आंदोलन के दबाव में जिला प्रशासन ने इन तीनों मसलों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया. लेकिन वात्र्ता में बनी सहमति से मुकरते हुए जिला प्रशासन ने कटरा प्रखंड के नवादा में बांध निर्माण के कार्य को जारी रखा. फिर से आंदोलनकारियों ने 9 मार्च को हजारों की संख्या में बेनीबाद में एनएच 57 का जाम किया और एक बार फिर से प्रशासन को पीछे हटने के लिए मजबूर किया. प्रशासन पीछे भी हटा, लेकिन अपनी पुरानी आदत के मुताबिक गायघाट के महेशवारा में बांध निर्माण का कार्य पुन: आरंभ कर दिया गया.

श्री कुणाल ने कहा कि इस रवैये के खिलाफ हजारों की संख्या में एक बार फिर से 19 मार्च को ग्रामीणों व किसानों ने प्रतिवाद किया. मामले को सुलझाने की बजाए प्रशासन ने उलटे आंदोलनकारियों पर कई तरह के फर्जी मुकदमे लाद दिए. आगामी 22 मार्च को भाकपा-माले और अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर से पूरे बिहार में राज्यव्यापी प्रतिवाद का आयोजन किया गया है.

उन्होंने कहा कि परियोजना की समीक्षा के रिव्यू कमिटी का गठन का सवाल बेहद न्यूनतम जनवादी मांग है, जिसे भी बिहार सरकार अनसुनी कर रही है. ऐसी स्थिति में फरक्का पर नीतीश के दिखावे और बागमती पर चल रहे आंदोलन पर खामोशी के सवाल को बौद्धिक जगत मे चर्चा का विषय बनाने हेतु पटना में आगामी 29 मार्च को एक जनसुनवाई का आयोजन किया गया है. जिसमें बागमती नदी के एक्सपर्ट, जल विशेषज्ञ और कई बुद्धिजीवियों को आमंत्रित किया गया है.

वैश्विक चुनौतियों का एकमात्र समाधान अहिंसा, राष्ट्रपति ने किया अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव का समापन

पटना(अपना बिहार, 20 मार्च 2017) - पूरा विश्व चुनौतियों एवं संकट के दौर से गुजर रहा है। कैसे मानव सभ्यता को बचाये रखा जाय। इस संबंध में बौद्ध धर्म एवं इसका संदेश प्रासंगिक हैं। ये बातें राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राजगीर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव के समापन के अवसर पर अपने संबोधन में कही। उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कोई कर्म या कुकर्म नहीं बल्कि मानसिक कुरीतियॉ हैं। आतंकवाद सकारात्मक नहीं नकारात्मक है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म सम्राट अशोक को चंड-अषोक से धम्म-अशोक की तरफ ले गया। सही मार्ग बुद्ध का मध्यम मार्ग है। उन्होंने तक्षशिला, विक्रमशिला, नालंदा तथा ओदंतपुरी शिक्षण केन्द्रों का भी नाम लिया तथा बताया कि यह वह शिक्षण केन्द्र थे, जहॉ सभी प्रकार की शिक्षा दी जाती थी। तृतीय शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 12वीं सदी तक नालंदा विश्वविद्यालय उत्कृष्ट शिक्षण केन्द्र के रूप में विख्यात रहा था, जहॉ खुले दिमाग से प्रश्नों को पूछा एवं वाद-विवाद किया जाता था। इससे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का गया हवाई अड्डा पर भव्य स्वागत किया गया। राज्यपाल रामनाथ कोविंद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा राष्ट्रपति का गया हवाई अड्डा पर फूलों का गुलदस्ता भेंटकर स्वागत किया गया।

आदित्यनाथ पर टिप्पणी अशोभनीय

पटना(अपना बिहार, 20 मार्च 2017) - भाजपा के वरिष्ठ नेता सह लोक लेखा समिति के सभापति नंदकिशोर यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की चुनी हुई सरकार और संवैधानिक तरीके से निर्वाचित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर उल-जलूल टिप्पणी कर महागठबंधन के कुछ नेता जनभावनाओं की खिल्ली उड़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में नकार दिये गये ऐसे नेता गठबंधन की बैसाखी के सहारे सत्ता तक क्या पहुंच गये हैं, खुद को देश का प्रधानमंत्री और दूसरे प्रदेशों के मुख्यमंत्री तय करने की एजेंसी मानने लगे हैं। अपने बूते किसी एक राज्य की सरकार तक बनाने की राजनैतिक हैसियत नहीं रखने वाले ये नेता उस अभिभावक की तरह पेश हो रहे हैं जो परीक्षा शुरू होने से पहले ही छात्र को परिणाम से डराते रहते हैं। ये वही लोग हैं जो नरेन्द्र मोदी जी से सत्ता संभालने वाले दिन से ही हिसाब मांग रहे थे। जब जनता ने नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा किये गये कार्यों की मार्किंग कर अपार बहुमत से सरकार बनाने का जनादेश दे दिया तो अब जनभावनाओं की खिल्ली उड़ाई जा रही है।

नंद किशोर ने तेजस्वी के बयान का किया विरोध

पटना(अपना बिहार, 20 मार्च 2017) - पूर्व पथ निर्माण मंत्री नन्दकिशोर यादव ने डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के बयान का कड़ा प्रतिकार करते हुए कहा कि राज्य की एनडीए सरकारके सात सालों में राज्य में 1150 पुलों का निर्माण हुआ। एनडीए शासन के साढे सात साल पूरा होते-होते सूबे में 45 बड़े पुलों का निर्माण शुरू हो चुका था जबकि पिछले 100 सालों में राज्य में सिर्फ 21 बड़े पुल बने थे। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के निर्देशन में तब के भाजपा मंत्रियों ने छोटे-छोटे पुलों का निर्माण कर रहे पुल निर्माण निगम का टर्न ओवर तीन अंकों से 1300 करोड़ और 89 करोड़ के शुद्ध लाभ पर पहुंचा दिया। 11 करोड़ के घाटा से 89 करोड़ का फायदा और 57 करोड़ के टर्नओवर से 1300 करोड़ का टर्नओवर। यह तब की भाजपा मंत्रियों के अनुभव एवं राज्य की सुदृढ़ आर्थिक स्थिति का परिणाम था। उन्होंने कहा कि अगर पुल को जोड़ने के लिए एप्रोच रोड नहीं बनाने की नीति होती तो आज अरवल-सहार, बेतिया-गोपालगंज, गया में फलगु पर छह लेन पुल के साथ राज्य में बड़े-बड़े पुलों से गाड़ियां नहीं गुजरती। आरा-छपरा और दीघा सड़क पुल का उद्धाटन की तारिख तय करने वाले डिप्टी सीएम को फीता काटने का मौका नहीं मिलता।

किसान सम्मान योजना की राशि में तीन गुना वृद्धि

पटना(अपना बिहार, 20 मार्च 2017) - किसान सम्मान योजना के लिए चयनित किसानों को मिलने वाली राशि में दो से तीन गुना वृद्धि की गई है। राज्यस्तर पर चयनित 38 किसानों को अब पचास-पचास हजार रुपये मिलेंगे। पहले इन्हें 25 हजार दिये जाने की व्यवस्था थी। इसी तरह प्रखंड स्तर के किसानों को दस और जिला स्तर के किसानों को 25 हजार दिये जाएंगे। निबंधन शुल्क खत्म करने के बाद राज्य सरकार ने किसानों की योजना में रुचि जगाने के लिए यह नई व्यवस्था की है।

किसान सम्मान योजना के तहत लगभग तीन हजार किसानों को सम्मानित किया जाना है। यह योजना रबी मौसम में शुरू होगी। पहले इसे खरीफ मौसम में ही शुरू करना था। आवेदन भी मांगे गये, लेकिन बहुत कम किसानों ने आवेदन किया। इसका मुख्य कारण है कि योजना में सम्मानित होने वाले किसानों को दी जाने वाली राशि बहुत कम थी। साथ ही आवेदन के साथ दो सौ रुपये का शुल्क लगा दिया गया था। अब विभाग ने दोनों परेशानी दूर कर दी है।

नई योजना पुरानी योजना से बिल्कुल अलग है। यह आत्मा मॉडल के समान है। हालांकि हूबहू आत्मा मॉडल भी नहीं है। इसके तहत हर प्रखंड में पांच फसलों के लिए एक-एक किसान सम्मानित किये जाएंगे। जिला स्तर पर भी पांच किसान और राज्य स्तर पर हर जिले से एक किसान सम्मानित होंगे।

बताते चलें कि यह योजना दस साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन एक साल ही चल सकी। पुरस्कार राशि अधिक होने के कारण बड़ी संख्या में अनियमितता की शिकायत मिलने लगी। लिहाजा सरकार ने इसे बंद कर दिया। पुरानी योजना के तहत प्रखंड जिला और राज्यस्तर पर एक-एक किसान ही सम्मानित होते थे। राज्य स्तर पर सम्मानित होने वाले किसान को पांच और जिला स्तर के किसानों को एक-एक लाख रुपये दिये जाते थे।

विकलांगों के अपमान का सवाल टाल गये लोजपा सुप्रीमो, लालू-नीतीश पर बोला हमला, राम मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट के फैसले का इंतजार जरूरी

पटना(अपना बिहार, 20 मार्च 2017) - केन्द्रीय मंत्री व लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम विलास पासवान ने कहा है कि नीतीश कुमार और लालू प्रसाद मिलकर भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मुकाबला नहीं कर सकते हैं। देश में फिलहाल नरेन्द्र मोदी से लोकप्रिय नेता कोई नहीं है। वहीं इससे पहले अपने बयान में विपक्षी नेताओं को लंगड़ा कहने के मामले में पूछे जाने पर श्री पासवान ने सवाल को अनसुना कर दिया।

श्री पासवान रविवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार में हमेशा टकराव की खबरें आती रहती हैं। रघुवंश सिंह के आरोपों से सारी बात खुल गई है। सरकार ढाई साल भी चल जाए तो बहुत है। पहले नीतीश कुमार और लालू प्रसाद एक हो जाएं तब तो विपक्ष एकजुट होगा। बिहार से बाहर इन नेताओं की कोई हैसियत नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लालू-नीतीश की यूपी में कोई पहचान नहीं है। इसलिए इन्होंने वहां कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं किया। अभी यदि बिहार में चुनाव हो जाए तो परिणाम इनके विपरीत होगा। कहा कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता को देखते हुए मणिपुर छोड़कर कहीं भी लोजपा ने अपने प्रत्याशी खड़े नहीं किये। भाजपा यदि वहां लोजपा से मिल कर लड़ती तो नौ सीटों का अतिरिक्त फायदा होता।

एक सवाल पर कहा कि वे विकास और भ्रष्टाचार हटाने के कॉमन एजेंडे पर एनडीए में हैं। प्रधानमंत्री ने भी पूरे चुनाव में राम मंदिर का मुद्दा नहीं उठाया। बल्कि बार-बार विकास और बाबा साहेब का नाम लिया। वैसे भी हर दल का अलग-अलग एजेंडा होता है। मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट का फैसला मानना चाहिए। मौके पर सांसद चिराग पासवान, रामचंद्र पासवान और प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस आदि कई नेता मौजूद थे।

महात्मा बुद्ध के विचार आज भी प्रासंगिक : मुख्यमंत्री

पटना(अपना बिहार, 20 मार्च 2017) - महात्मा बुद्ध के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करते हुये कहा कि सौभाग्य की बात है कि यही वह जगह है, जहॉ पहली बार बौद्ध सम्मेलन आयोजित किया गया था। महात्मा बुद्ध का राजगीर से गहरा संबंध रहा है। ज्ञान की प्राप्ति के पहले एवं ज्ञान प्राप्ति के बाद वे यहीं वषार्वास किये थे। 21वीं सदी में बौद्ध धर्म की प्रासंगिकता पर हो रहे आयोजन में दुनिया के अनेक देशों के लोग विमर्ष कर रहे हैं, जिसका उद्घाटन परम पावन दलाईलामा जी ने किया है। वर्ष 2013 में पटना में 2550वें महापरिनिर्वाण के अवसर पर बुद्ध स्मृति पार्क बनाया गया था, जिसका उद्घाटन भी परम पावन दलाईलामा जी ने किया था। नालंदा महाविहार में अनेक मूल्कों के लोग षिक्षा ग्रहण करने के लिये आते थे। इसकी षिक्षा प्रणाली अद्भूत थी। इस महाविहार को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही थी। नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया जाय, इसके लिये काफी प्रयास किया गया था। समिति द्वारा वोट के जरिये इसे वर्ल्ड हेरिटेज घोषित किया गया। बिहार सरकार की पहल पर नव नालंदा महाविहार की स्थापना की गयी, जिसे बाद में भारत सरकार ने इसे अपनाया और डिम्ड यूनिवर्सिटी के रूप में अंगीकार किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा, अशांति के वातावरण एवं हर जगह अविश्वास, असहिष्णुता एवं नफरत के माहौल में बौद्ध धर्म सही राह दिखा सकता है। महात्मा बुद्ध ने शांति एवं मध्य मार्ग की बात कही थी। महात्मा बुद्ध के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब नालंदा महाविहार को पुनर्जीवित किया जा रहा था तो मैंने कहा था कि यहॉ कॉन्फिलक्ट रिजॉल्यूशन सेंटर की आवश्यकता है, जहॉ तमाम देशों के विवादों को बैठकर सुलझाया जा सके। बिहार सरकार इसके लिये अलग से जमीन उपलब्ध कराने को भी तत्पर है। उन्होंने कहा कि यह काफी प्रसन्नता की बात है कि बिहार में सहिष्णुता और सौहार्द्र का माहौल है। राजगीर अपने आप में अनेक धर्मों का संगम स्थल है। सम्राट बिंबिसार ने महात्मा बुद्ध को अपने रॉयल गार्डेन में निवास कराया था, जो वेणुवन के नाम से प्रसिद्ध है। भगवान महावीर का भी यहॉ से गहरा नाता रहा है। हिन्दू धर्म, सूफी संत, सिखों के धर्मगुरू गुरूनानक देव जी का भी यह निवास स्थान रहा है। सिखों के 10वें गुरू, गुरू गोंविद सिंह जी महाराज का 350वां प्रकाश पर्व बिहार में धूमधाम से मनाया गया। यहॉ सिख धर्म के इस पर्व में सभी धर्मों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो बिहार में सहिष्णुता एवं शांति का परिचायक है। कालचक्र पूजा अभी हाल ही में सम्पन्न हुआ है, जिसमें 93 मूल्कों के बौद्ध धर्मावलंबी आये थे। उन्होंने कहा कि बिहार में शांति, सद्भाव एवं सहिष्णुता का वातावरण है।

वहीं इस मौके पर राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने सर्वप्रथम कला, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार को विष्वविद्यालय की सहायता के लिये धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म कोई धर्म नहीं बल्कि जीने का एक तरीका है, स्वखोज करने का एक माध्यम है तथा वैज्ञानिक धर्म है।

समारोह को कुलपति नवनालंदा महाविहार एम.एल. श्रीवास्तव, सारनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति नवांग सेमटेन ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार, सांसद कौशलेन्द्र कुमार, इस्लामपुर के विधायक चन्द्रसेन प्रसाद, हिलसा के विधायक अत्री मुनी उर्फ शक्ति सिंह यादव, राजगीर के विधायक रवि ज्योति कुमार, अस्थावां के विधायक जीतेन्द्र कुमार, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

सुमो ने लगाया दोषियों को बचाने का आरोप

पटना(अपना बिहार, 20 मार्च 2017) - भाजपा के वरिष्ठ नेता सह सीएम पर के बड़े दावेदार सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि दुराचार के आरोपी कांग्रेस नेता ब्रजेश पाण्डेय को गिरफ्तार नहीं कर नीतीश कुमार की पुलिस उनकी एनटीसिपेटरी बेल मिलने का इंतजार कर रही है। मेवालाल चौधरी की बेल जब निचली अदालत से रिजेक्ट हो गई तो अब उन्हें हाईकोर्ट जाने का पुलिस मौका दे रही है। इसी प्रकार ब्रजेश पाण्डेय के मामले में भी पुलिस उन्हें अग्रिम बेल मिलने की प्रतीक्षा कर रही है। पुलिस के सामने से फरार निखिल प्रियदर्शी और उसके पिता को भी बिहार की नहीं बल्कि 90 दिन बाद उत्तराखंड की पुलिस ने गिरफ्तार किया। क्या मुख्यमंत्री अब भी कहेंगे कि वे किसी को बचाते या फंसाते नहीं है?

श्री मोदी ने कहा कि मेवालाल चौधरी के बारे में सब कुछ जानते हुए भी नीतीश कुमार ने उन्हें न केवल बिहार कृषि विश्वविद्यालय का कुलपति बल्कि जदयू का टिकट देकर विधायक भी बनाया। राज्यपाल की ओर से गठित जस्टिस महफूज आलम जांच कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद मुख्यमंत्री के संरक्षण के कारण ही जदयू विधायक को खुला घुमने की छूट मिली हुई है।

श्री मोदी ने कहा कि बीएसएससी पर्चा लीककांड के आरोपी आईएएस अधिकारी सुधीर कुमार को तो अधिकृत छुट्टी के दौरान हजारीबाग जाकर पुलिस गिरफ्तार कर लेती है मगर मेवालाल चौधरी और ब्रजेश पाण्डेय को पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटा रही है। क्या इससे स्पष्ट नहीं है कि मुख्यमंत्री जिसे फंसाना चाहते है पुलिस उसे तत्परता से गिरफ्तार कर लेती है मगर जिसे बचाना चाहते हैं उसका नाम लेने से भी बचती है? उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और सरकार न किसी को फंसाती है, न किसी को बचाती है जैसे जुमले को छोड़कर सरकार अविलम्ब मेवालाल चौधरी और ब्रजेश पाण्डेय को बचने का मौका देने के बजाय उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करें।

तेज प्रताप यादव पर लगाया गया आरोप भ्रामक : महाजन

पटना(अपना बिहार, 20 मार्च 2017) - कथित तौर पर स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव के ओएसडी द्वारा एएनएम बहाली के लिए बीएसएससी के पूर्व सचिव परमेश्वर राम को मोबाइल पर संदेश भेजने संबंधी विवाद को स्वास्थ्य विभाग ने सिरे से खारिज किया है। विभाग के प्रधान सचिव आर. के. महाजन के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी शंकर प्रसाद के द्वारा एएनएम की बहाली में बिहार कर्मचारी चयन आयोग को पैरवी की गई है। यह समाचार तथ्यहीन तथा भ्रामक है। उन्होंने पुरजोर खंडन करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग, समाचार पत्रों एवं विभिन्न न्यूज चैनल में प्रकाशित एवं चलाये जा रहे इस मसाचार का पुरजोर खण्डन करता है कि शंकर प्रसाद, स्वास्थ्य मंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी हैं। श्री प्रसाद स्वास्थ्य मंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी नहीं हैं। इस प्रकार यह समाचार तथ्यहीन एवं भ्रामक है। वस्तुस्थिति है कि श्री प्रसाद, भारतीय संचार सेवा के वरीय पदाधिकारी हैं। इनकी सेवा प्रतिनियुक्ति के आधार पर बिहार सरकार को सौंपी गई है। श्री प्रसाद का पदस्थापन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा स्वास्थ्य विभाग में विशेष कार्य पदाधिकारी के रूप में वर्ष 2013 में किया गया है।

मिशन 2019 के लिए भाजपा ने नेताओं को सौंपा होमवर्क

पटना(अपना बिहार, 20 मार्च 2017) - यूपी में मिली जीत को बिहार में दुहराने के लिए मिशन 2019 के तहत भाजपा ने तैयारी शुरू कर दी है। शनिवार को इस संबंध में विशेष बैठक के बाद रविवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को होमवर्क सौंप दिया है। इसके मुताबिक अगले एक पखवारे के भीतर राज्य के 63 हजार मतदान केन्द्रों पर भाजपा की बूथ कमिटियों को सुदृढ़ कर लेने का आह्वान किया है । इस कार्य के लिये पंचायत से जिला स्तर तक 5 से 11 सदस्यीय मार्गदर्शक मंडल का गठन किया जायेगा ।

श्री राय ने भाजपा मुख्यालय में पार्टी के जिलाध्यक्षों , आजीवन सहयोग निधि योजना के प्रभारियों एवं पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार जैसे राज्य में जातिवाद के समुद्र में कमल खिलाना है । इसके लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गरीबों के लिये चलायी गई विविध योजनाओं के लाभार्थियों का विधान सभा स्तर पर सम्मेलन किया जायेगा । गरीब हमारे भगवान हैं इनकी सेवा ही हमारा धर्म है । सेवा का मतलब इनका सम्मान एवं इनका सर्वांगीण विकास है।

उन्होंने केन्द्र सरकार और पार्टी की ओर से पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशताब्दी वर्ष के लिये किये जा रहे कार्यक्रमों और इसकी सफलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 22 मार्च को जिला स्तर और 26 मार्च को मंडल स्तर की बैठक होगी । दोनों बैठकों में सांसद, विधायक, चुनाव लड़े प्रत्याशी और प्रदेष कार्यसमिति के सदस्यों को बुलाना सुनिश्चित किया जायेगा । साथ ही 6 अप्रैल 14 अप्रैल तक बाबा साहब भीमराव अम्बेदकर जयंती पखवारा के साथ-साथ पार्टी का स्थापना दिवस भी मनाया जायेगा ।

गोद लेकर गांवों को भूल गये सांसद : श्रवण

पटना(अपना बिहार, 19 मार्च 2017) - ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गांवों को गोद लेकर सांसद भूल गए। गोद लेने वालों की भी कुछ जिम्मेवारी होती है। उन गांवों के लालन-पालन की जिम्मेवारी लें। केंद्र इनके विकास के लिए अतिरिक्त फंड की व्यवस्था करे। श्री कुमार शनिवार को भोजनावकाश के बाद विधान परिषद में वित्तीय वर्ष 2017-18 के आय-व्यय पर विभागवार सामान्य वाद-विवाद के बाद सरकार की ओर से उत्तर दे रहे थे। उन्होंने बताया कि राज्य के लोकसभा के सभी 40 व राज्य सभा के 16 में 13 सांसदों ने ग्राम पंचायतों का चयन किया है।

श्री कुमार ने कहा कि राज्य के सभी गांवों को 2020 तक साधन संपन्न बनाने का लक्ष्य है। केंद्र सरकार की उपेक्षा से राज्य में दो माह से मनरेगा का कार्य बंद है। केंद्र सरकार पर मजदूरी मद में 294 करोड़ एवं सामग्री मद में 158 करोड़ बकाया है। इससे मजदूरी का भुगतान लंबित है। मंत्री ने बताया जनवरी 2016 से अबतक लगभग 14 लाख अपूर्ण इंदिरा आवासों को पूर्ण कराने वाला बिहार देश का पहला राज्य है।

श्री कुमार ने बताया कि जीविका के तहत अबतक 5.80 लाख स्वयं सहायता समूह एवं 32,431 ग्राम संगठन एवं 368 संकुल स्तरीय संघों का गठन किया जा चुका है। इससे 71 लाख से अधिक परिवार जुड़े हैं। वर्ष 2018-19 तक दस लाख स्वयं सहायता समूह गठित करने का लक्ष्य है। राज्य में कुल 81 प्रतिशत से भी ज्यादा आधार पंजीयन किया जा चुका है। शेष के लिए एक हजार स्थायी पंजीयन केंद्र खोले जा रहे हैं। चर्चा में विजय कुमार मिश्र, राजन कुमार सिंह, राम लषण राम रमण, सुमन कुमार, सुबोध कुमार, रजनीश कुमार, रीना यादव, संजय प्रसाद, राजेश कुमार व शिव प्रसन्न यादव शामिल हुए।

वहीं जल संसाधन मंत्री ललन सिंह ने कहा कि बांधों को बचाने के लिए नदियों में पुलों के पास गाइड बांध बनेंगे। इनका निर्माण इस साल बाढ़ के पहले ही हो जाएगा। ऐसे लगभग दो दर्जन स्थान चिह्नित किये गये हैं जहां गाइड बांध बनाया जाएगा। ये सभी स्थल कोसी, गंडक और कमला बलान नदियों पर हैं। 20 से 25 ऐसे पुल हैं जहां गाइड बांध बनाना बेहद जरूरी है। मंगल पांडेय के एक अल्पसूचित प्रश्न का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि इस योजना को लेकर विकास आयुक्त के साथ बैठक हुई थी। बैठक में नदियों में संरचना का निर्माण करने वाले जल संसाधन विभाग के अलावा पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। उसी बैठक में फैसला हुआ था कि नदियों में जितने भी पुल या फिर दूसरी तरह की संरचना बनी हैं उनके दोनों तरफ गाइड बांध जरूर बनाए जाएं। जिन पुलों के पास गाइड बांध बने हैं उनकी सुरक्षा का भी ध्यान दिया जाए। इससे नदियों में गाद जमा होने की समस्या कम होगी। साथ ही बाढ़ के समय तटबंधों पर दबाव भी कम होगा।

योगी आदित्यनाथ को बधाई

पटना(अपना बिहार, 19 मार्च 2017) - विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को विधायक दल के नेता चुने जाने और यूपी के सीएम बनाये जाने पर बधाई देते हुए कहा है कि अब यूपी अपराध मुक्त राज्य बनेगा। यूपी में अब चैमुखी विकास होगा, हर क्षेत्र में विकास ही विकास होगा। साथ ही केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा को उप मुख्यमंत्री बनाये जाने पर बधाई दी है। डा. कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आशाओं और उनके मार्ग दर्शन पर यूपी पूरे देश का उत्तम प्रदेश बनेगा। साल 2019 लोकसभा चुनाव में फिर भाजपा सहित एनडीए की सरकार केन्द्र में बनेगीं।

कानून का राज कायम रखने को सरकार सक्रिय

पटना(अपना बिहार, 19 मार्च 2017) - प्रभारी गृह मंत्री बिजेन्द्र यादव ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाये रखने को लेकर सरकार तत्पर है। साथ ही राज्य में अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस सक्रिय है। सभी जिलों में एसपी को निर्देश दिया गया है कि निर्माण कार्य में लगी एजेंसियों को सुरक्षा दी जाए। साथ पुलिस आधुनिकीकरण के लिए भी कई तरह के प्रयास किये जा रहे हैं।

श्री यादव शनिवार को विधान परिषद में भाजपा के नवल किशोर यादव के अल्पसूचित और लाल बाबू प्रसाद के तारांकित प्रश्न का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि पुलिस के आधुनिकीकरण की दिशा में आधुनिक नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन बनाए जा रहे हैं। ऐसी व्यवस्था हो रही है कि सभी थाने एक दूसरे से आपस में जुड़ जाएं।

उन्होंने कहा कि पुलिस को आधुनिक संयंत्रों से लैस किया जा रहा है। साथ ही नई तकनीकी आधारित सुविधाएं बहाल की जा रही हैं। इसके अलावा थानों में सीसीटीवी कैमरे भी लगाये जा रहे हैं। पुलिस बैरक और थाना भवनों का निर्माण तो पहले से ही चल रहा है। नवल किशोर यादव के सवाल पर कहा कि बिहारशरीफ में स्वर्ण व्यवसायी व बाढ़ में पेट्रोल पंप मैनेजर की हत्या के मामले में कुछ आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जो फरार हैं उनकी गिरफतारी के लिए छापेमारी की जा रही है। इसी तरह लाल बाबू प्रसाद के प्रश्न का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सारण में एक निर्माण कंपनी के मैनेजर की हत्या के मामले में केस का सुपरिवीजन कर लिया गया है। केस को सत्य पाया गया है।

पेपरलीक मामले को सदन में हंगामा, विपक्ष ने की पैरवी करने वाले मंत्रियों की बर्खास्तगी की मांगा, मंत्रियों ने कहा - जनप्रतिनिधि होने के नाते पैरवी करना गुनाह नहीं

पटना(अपना बिहार, 19 मार्च 2017) - बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग के पेपर लीक मामले में नया खुलासा होने के बाद बिहार में विपक्ष को एक नया मुद्दा मिल गया है. विपक्ष इसे लेकर सदन से लेकर सड़क तक आंदोलन करने की तैयारी में है. बजट सत्र के दौरान आज विपक्ष ने जमकर हंगामा किया. बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेताओं ने बीएसएसी मामले में मंत्री आलोक मेहता और कृषणनंदन वर्मा की बरखास्तगी की मांग को लेकर अंदर से बाहर तक जमकर हंगामा किया.

बीजेपी नेताओं ने तत्काल इन दोनों मंत्रियों को बरखास्त करने की मांग की . इतना ही नहीं, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि दोनों मंत्रियों को तत्काल सरकार पहले हटाये. साथ ही मोदी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के ओएसडी शंकर प्रसाद को भी घेरे में लेते हुए जांच करने की बात कही. गौरतलब हो कि पैरवी करने वालों में तेज प्रताप यादव के ओएसडी शंकर प्रसाद का नाम भी सामने आया है. हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही एक घंटे पहले स्थगित करनी पड़ी. वहीं दूसरी ओर विपक्ष के हंगामे के बीच सहकारिता मंत्री और बीएसएससी के गिरफ्तार सचिव परमेश्वर राम को मैसेज करने के आरोपों में घिरे आलोक मेहता ने मीडिया से कुछ नहीं कहा. आलोक मेहता ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा कि वे लोग सार्वजनिक जीवन में हैं और लोग पैरवी के लिये आते रहते हैं. वहीं दूसरी ओर कृष्णनंदन वर्मा ने कहा कि मैं एक सामाजिक आदमी हूं और कई लोग मिलने के लिये आते रहते हैं. इस घोटाले की परत खुलने के बाद बिहार सरकार के कई मंत्री घिरते नजर आ रहे हैं वहीं राजनीति पूरी तरह गरमायी हुई है.

प्रदेश भाजपा ने शुरू की मिशन 2019 की तैयारी

पटना(अपना बिहार, 19 मार्च 2017) - यूपी में मिली प्रचंड जीत से उत्साहित सूबे के भाजपाइयों ने मिशन 2019 की तैयारी शुरू कर दी। शनिवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि किसी भी आंदोलन की सफलता नेतृत्व , मुद्दा और संगठन पर निर्भर करता है । सन 74 के जे.पी. आंदोलन में संगठन को छोड़ बाकी दो सूत्र तो थे लेकिन आज भारतीय जनता पार्टी के पास तीनों सूत्र मौजूद है ।

श्री मोदी ने पूर्व सांसद, पूर्व विधायकों, पूर्व विधान पार्षदों और विधान सभा का चुनाव लड़े प्रत्याशियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश के पास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसा सबल और प्रभावकारी नेतृत्व है तो जनकल्याण के सैकड़ों मुद्दे भी । रही बात संगठन की तो हम ऐसा मजबूत संगठन बनायेंगे जिसमें सभी वर्गों का समावेष होगा । संगठन अन्य दलों की तुलना में काफी मजबूत होगा । बैठक की अध्यक्षता करते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि देश को चतुर्दिक प्रकाशमान करने वाली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की योजनाएं धरातल पर उतर आयीं हैं और दिखने लगी है। बीते बिहार विधान सभा चुनाव के वक्त अफवाहों के बाजार ने चुनावी माहौल को दूषित किया था । उन्होंने 6 से 14 अप्रैल तक पार्टी का स्थापना दिवस मनाने और बाबा साहब भीमराव अम्बेदकर की जयंती के अवसर पर राज्य भर में विविध कार्यक्रमों की रूपरेखा बतायी।

बिहार विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की कार्य योजनाओं को आम कार्यकर्ता गांव-देहात तक प्रचारित करे । पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंगल पाण्डेय ने आजीवन सहयोग निधि के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि पार्टी के कार्यक्रमों को जमीन पर उतारने में धन की आवश्यकता पड़ती है, जिसमें सबों का सहयोग अपेक्षित है । उन्होंने दायित्वान कार्यकतार्ओं से धन संग्रह के कार्य में तत्परतापूर्वक लग जाने का आह्वान करते हुए कहा कि आगामी 6 अप्रैल को पार्टी के स्थापना दिवस के बाद पार्टी के भावी कार्यक्रमों के बारे में अंतिम निर्णय किया जायेगा । वहीं पार्टी के संगठन महामंत्री नागेन्द्र जी ने कहा कि पं दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा और उनके एकात्म मानववाद के संदेश से आम लोगों को अवगत कराना है । बैठक में एक दर्जन से अधिक पूर्व सांसद, दर्जनों पूर्व विधायक और पूर्व प्रत्याशी उपस्थित थे ।

यादव जाति के अपमान पर छात्र राजद ने सुशील मोदी का फूंका पुतला

पटना(अपना बिहार, 19 मार्च 2017) - छात्र राष्ट्रीय जनता दल के द्वारा बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी जी के द्वारा यादव समाज को गाली और यादव समाज को आतंकवादी कहने के विरोध में पटना के कारगिल चैक सहित बिहार के सभी जिलों में आक्रोश मार्च और सुशील मोदी का पुतला दहन किया गया और सुशील मोदी को पार्टी से बर्खास्त करने और माफी मांगने की मांग छात्र राष्ट्रीय जनता दल ने किया है। कार्यक्रम का नेतृत्व छात्र राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष आकाश यादव ने किया और कहा कि यादव समाज के लोग कृष्ण के वंशज हैं। हमने दानवों और अहंकारियों का सर्वनाश करने का कर्तव्य पहले भी किया है और आगे भी करते रहेंगे और भाजपा का काम ही मानवता को ठेस पहुंचाना और एकता को तोड़ना।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से छात्र राजद के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रकाश यादव, पटना महानगर अध्यक्ष सैफ अली, पटना महानगर उपाध्यक्ष गौरव हेला, संजय सहनी, पटना जिला उपाध्यक्ष कारू यादव, विशाल यादव, अब्दुल अजीज, विजय यादव, पटना विश्वविद्यालय अध्यक्ष राहुल यादव, सरफराज अहमद, अहमद हुसैन अज्जू, शिव कश्यप, प्रिंस राज, प्रदीप यादव, फारूख हासमी, सरफराज अख्तर, मोहित यादव, हर्ष राज सहित सैंकड़ो छात्र राजद कार्यकर्ता शामिल थे।

जे. पी. सेनानी सम्मान पेंशन राशि में वृद्धि करे सरकार : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 19 मार्च 2017) - विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि जे.पी सेनानी सम्मन पेंशन योजना की राशि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तत्काल बढ़ाएं। जे. पी लोकतंत्र सेनानी संगठन के लोग अपनी 7 सूत्री मांगों को लेकर गर्दनीबाद धरना स्थल पर बैठे हैं। जिन के समर्थन में डा. कुमार भी धरना में शामिल हुए। उन्होंने कहा है कि जे. पी सेनानी की मांगों को सरकार तुरंत मान लें।

डा. कुमार ने कहा कि 1974 में आपात काल के दौरान जे.पी. सेनानियों ने जेल गये थें। उनकी 7 सूत्री मांगों में सम्मान पेंशन योजना 2009 को बिहार विधान सभा में विधिवत पारित किया गया था, उसके मद में बजटीय प्रावधान किया जाएं। राज्य सरकार भी जे. पी. सम्मान पेंशन राशि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा की गई वृद्धि के अनुरूप क्रमश: 15 हजार रुपये एवं 25 हजार रुपये प्रति माह किया जाएं।

एसडीओ बनायेंगे राशन कार्ड : मंत्री

पटना(अपना बिहार, 18 मार्च 2017) - सूबे के खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन सहनी ने कहा है कि नया राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया प्रखंड विकास पदाधिकारी को पूरी करनी है। लेकिन इसे अंतिम तौर पर जारी अनुमंडल पदाधिकारी करेंगे। निर्धारित आवेदन पत्र में पूरी जानकारी भरकर कोई भी नया राशन कार्ड बनवा सकते हैं या पुराने कार्ड में संशोधन करा सकते हैं।

विधानसभा में डॉ. विजय कुमार सिन्हा व अन्य सदस्यों के ध्यानाकर्षण प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि बिहार लोक सेवा अधिकार अधिनियम 2011 के तहत तीन नई सेवाएं नया राशन कार्ड बनाने, राशन कार्ड में संशोधन व इसके प्रत्यर्पण को शामिल किया गया। साल 2011 की जनगणना के अनुसार 8.57 करोड़ लाभुकों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभ दिया गया जो ग्रामीण जनसंख्या का 85 फीसदी व शहरी का 74 फीसदी है। 2014 में छूटे हुए नाम जोड़ने के लिए अभियान चलाया गया तो 96 लाख से अधिक लोगों को लाभ हुआ। बावजूद इसके छूटे हुए लाभार्थियों को जोड़ने के लिए आरटीपीएस में इसे लाया गया है।

राज्य सरकार दे रही बीमा की आधी राशि : आलोक

पटना(अपना बिहार, 18 मार्च 2017) - सहकारिता मंत्री आलोक मेहता ने कहा कि केन्द्र सरकार ने किसानों के लिए पहले से जारी फसल बीमा योजना को भी प्रधानमंत्री के नाम कर लिया है। लेकिन राज्य को इसके लिए पूरा पैसा नहीं दिया जाता है। बिहार सरकार को भी इस योजना के लिए 50 प्रतिशत धन लगाना पड़ रहा है।

श्री मेहता शुक्रवार को विधान परिषद में वर्ष 17-18 के आय-व्ययक पर वाद-विवाद में सरकार का जवाब दे रहे थे। कहा कि बीमा के प्रीमियम की राशि भी केन्द्र नहीं दे रहा है। फिर भी खरीफ और रबी के 27 लाख किसानों का बीमा कराया गया है। वैद्यनाथन कमेटी की अनुशंसाओं को लागू करने के लिए बकाया 389 करोड़ का भुगतान भी नहीं हुआ है। सहकारी क्षेत्र की अधिकतर योजनाओं में केन्द्रांश नहीं मिल रहा है। वर्ष 17-18 में बीमित किसानों के लिए प्रीमियम अनुदान के लिए दो अरब 45 करोड़ 56 लाख का प्रावधान किया गया है।

मंत्री ने कहा कि नोटबंदी में सहकारी बैंकों द्वारा रुपए जमा लेने पर रोक लगाकर केन्द्र ने बिहार के 1.19 करोड़ किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया। केला, आम आदि फल पकाने के लिए कार्बाइड के बदले इथिलीन गैस आधारित संयंत्र बिदुपुर में स्थापित किया जाएगा। चंपारण समेत आसपास के क्षेत्र में गन्ना किसानों के लिए गुड़ आधारित उद्योग लगाए जाएंगे।

सुपौल, दरभंगा और सारण में तीन सहकारी बैंक स्थापित होंगे। आईसीडीपी योजना के तहत कृषि आधारित उद्योगों के लिए 250 करोड़ दिए जाएंगे। नौगछिया में केला के रेशे पर आधारित कपड़ा उद्योग, सब्जी उत्पादकों के लिए फेडरेशन की स्थापना की जाएगी। हर जिले में सहकारी भवन बनाने के लिए 24 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकार के जवाब के दौरान विपक्ष ने वॉकआउट किया।

गया में नक्सलियों का तांडव

पटना(अपना बिहार, 18 मार्च 2017) - गया जिले के मोहनपुर प्रखंड के जयप्रकाश नगर गांव में हल्दिया पाइप लाइन परियोजना में लगे वाहनों में नक्सलियों ने आग लगा दी। नक्सलियों ने गुरुवार की देर रात इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस को शुक्रवार की सुबह इसकी सूचना मिली। परियोजना में लगे कर्मचारी संतोष सिंह और गिरधारी साव के मुताबिक रात में डेढ़ बजे 20 की संख्या में नक्सली आए। सबों ने अपने चेहरे बांध रखे थे। सभी के हाथों में छोटे हथियार थे। नक्सलियों ने धमकी देते हुए कहा कि तुम्हारे ठेकेदार को पहले भी लेवी के लिए कहा था। लेकिन उसने बात नहीं मानी। नक्सलियोें ने पांच ट्रैक्टर, एक हेडर और एक जेसीबी को आग के हवाले कर दिया। मना करने पर तीन कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की। नक्सलियों ने धमकी दी है कि जबतक उन्हें लेवी नहीं मिलेगी काम पूरा नहीं होने दिया जाएगा। हल्दिया गैस पाइन परियोजना का काम गेल इंडिया करा रही है। घटना की जानकारी मिलने पर मोहनपुर थानाध्यक्ष नीरज कुमार दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए हैं।

मोबाइल ने खोला सफेदपोशों का राज

पटना(अपना बिहार, 18 मार्च 2017) - बीएसएससी पर्चा लीक प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। रिमांड पर आए बोर्ड के पूर्व सचिव परमेश्वर राम के मोबाइल से एसआईटी को बिहार के मंत्री-विधायक, पूर्व सांसद और एक बड़े आईएएस अफसर के नंबर मिले हैं। मिली जानकारी के अनुसार इस बार जिस आईएएस का नाम सामने आया है उनकी चर्चा पहले नहीं हुई थी। इसका खुलासा तब हुआ जब परमेश्वर के मोबाइल के डाटा को रिकवर किया गया। एसआईटी ने सॉफ्टवेयर की मदद से यह डाटा रिकवर किया। इससे पता चला है कि राजनीतिक गलियारे से भी दर्जनों बार परमेश्वर के पास पैरवी आई। एक पूर्व सांसद का भी नाम इसमें है जिन्होंने अपने करीबियों के लिए पूर्व सचिव से कई बार पैरवी की। उन्होंने अलग-अलग अभ्यर्थियों के नाम भेजे हैं। वे उत्तर बिहार से सांसद रहे थे।

मिली सूचना के मुताबिक सबसे ज्यादा करीब 35 अभ्यर्थियों की पैरवी जेल में बंद आनंद शर्मा के मोबाइल से की गई है। आनंद शर्मा जमीन कारोबारी है। परमेश्वर को भी इसने जमीन दिलाई थी। सूत्रों के मुताबिक मोबाइल में सौ से अधिक अभ्यर्थियों के नंबर मिले हैं। एसआईटी सूत्रों की मानें तो 5 अभ्यर्थियों से गुरुवार को पूछताछ भी हो गई है। उन्होंने अपने पैरवीकारों के नाम का खुलासा किया है। संभव है एसआईटी जल्द ही उनपर शिकंजा कसे। उनके नाम भी कागज पर एसआईटी ले आई है।

वहीं इस मामले में बीएसएससी के निलंबित अध्यक्ष सुधीर कुमार ने गुरुवार को विशेष न्यायाधीश से एसआईटी को पुलिस रिमांड पर नहीं देने की गुहार लगायी है। गुरुवार को सुधीर निगरानी के विशेष कोर्ट में पेश हुए। सुधीर के वकील ने निगरानी की विशेष कोर्ट में आवेदन दायर किया है जिसमें विशेष न्यायाधीश ब्रज मोहर्न ंसह से गुहार लगायी गयी है कि एसआईटी को पुलिस रिमांड न दिया जाए। रिमांड देने से पहले उनके आवेदन पर सुनवाई की जाए।

आवेदन में कहा गया है कि 24 फरवरी 2016 को एसआईटी ने गिरफ्तार किया था और तभी से वे न्यायिक हिरासत में जेल में हैं। इधर, खबर मिल रही है कि एसआईटी सुधीर कुमार से पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। कानूनन 15 दिनों के अंदर ही अभियुक्त से पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर ले सकती है। जबकि सुधीर कुमार पिछले 22 दिनों से न्यायिक हिरासत में फुलवारी जेल में हैं। वकील की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक केस का हवाला भी दिया गया है। सुधीर कुमार के वकील ने विशेष न्यायाधीश से अनुरोध किया कि अगर एसआईटी पुलिस रिमांड के लिए आवेदन देती है तो इससे पहले उनके आवेदन पर सुनवाई करने का मौका दिया जाए।

बिहार दिवस के मौके पर फ्री वाई-फाई का शुभारंभ

पटना(अपना बिहार, 18 मार्च 2017) - बिहार दिवस के मौके पर राज्य के उच्च शैक्षणिक संस्थानों में फ्री वाईफाई इंटरनेट सेवा का उद्घाटन बिहार दिवस के मंच से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 22 मार्च को करेंगे। 210 शैक्षणिक संस्थानों को फ्री वाईफाई नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। शेष कॉलेजों में काम तेजी से चल रहा है। राज्य के 308 उच्च शैक्षणिक संस्थान जिनमें तकनीकी कॉलेज, विश्वविद्यालय भी शामिल हैं, को इस सेवा से जोड़ा जाना है। सूचना एवं प्रावैधिकी विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक सबसे अधिक 100 वायरलेस एक्सेस प्वाइंट मगध विश्वविद्यालय में लगे हैं। इसके बाद चाणक्या लॉ कॉलेज में 75 वायरलेस एक्सेस प्वाइंट लगाए गए हैं। प्रति कॉलेज एक्सेस प्वाइंट की संख्या करीब 20-25 आ रही है। एक एक्सेस प्वाइंट से 255 स्मार्ट फोन एक साथ फ्री वाईफाई से जुड़ सकेंगे। इस सेवा से एक समय में कॉलेजों में तीन से पांच हजार और विश्वविद्यालय परिसर तथा बड़े शैक्षणिक संस्थानों में एक बार में आठ से दस हजार छात्र-छात्राएं अपने स्मार्ट फोन को जोड़ सकेंगे। 210 शैक्षणिक संस्थानों में फ्री वाईफाई का एक्सेस प्वाइंट लगाने के साथ ही परीक्षण कर लिया गया है। इनमें से 160 कॉलेजों के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के मोबाइल नंबर बेल्ट्रान के पास पहुंच गए हैं।

जाति और धर्म के आधार पर जनता को भटकाना बंद करे भाजपा, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बोला हमला

पटना(अपना बिहार, 18 मार्च 2017) - भाजपाई हरेक मुद्दे को धार्मिक रंग देकर संविधान और उसकी प्रस्तावना का खंडन करते हैं। प्रस्तावना ही नहीं, उसकी भावना और हर शब्द में छुपे अवधारणा और मार्गदर्शन का भी अपमान करते हैं। जन सरोकार और विकास के मुद्दों को जातीय या धार्मिक रंग देकर ये लोग जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास करते रहते हैं। ये बातें उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने शुक्रवार को अपने बयान में कही।

उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है। क्यों नहीं बिहार भाजपा के सदस्य प्रधानमंत्री से माँग करते हैं कि एक नीतिगत निर्णय लेकर पूरे देश में श्मशानों की घेराबंदी एवं श्मशान घाटों के निर्माण करने की स्वीकृति दें। केंद्र सरकार एक नीतिगत निर्णय लेकर बड़ी आसानी से इनकी समस्या का समाधान कर सकती है। यही नहीं, बिहार में भी तो भाजपा की 8 साल तक सरकार रही, तब क्यों नहीं वे कुंभकर्णी सुप्तावस्था से बाहर आए? और अब जब वे कुंभकर्णी निद्रा से बाहर आए हैं तो सामाजिक सद्भाव को निगलने को व्याकुल हैं?

श्री यादव ने कहा कि हम विकासशील और प्रगतिशील राजनीति में यकीन रखते है। हम 'संवाद' की बात करते हैं, तो ये 'विवाद' की बात करते है। हम 'विकास' के लिए कदम बढ़ाते हैं, तो ये 'विनाश' थोपने को व्याकुल रहते हैं। हम 'जोड़ने' की बात करते हैं तो ये 'तोड़ने' की। हम 'कायदे' की बात करते हैं, तो ये राजनीतिक 'फायदे' की। हम 'समावेश' चाहते हैं, तो ये 'विद्वेष'।

उन्होंने कहा कि भाजपा के नफरत फैलाने वाले नेताओं से पूछना चाहिए कि देश के 14 से अधिक भाजपा शासित राज्यों में से इन्होंने कितने राज्यों में कितने श्मशान घाटों का जीर्णोद्धार करवाया है? एक भी नहीं। इसके लिए कितने करोड़ आवंटित किए हैं? एक घैला भी नहीं। फिर किस मुँह से वे यहाँ यह माँग उठा रहे हैं, जब इनकी खुद की सरकारें किसी और ही मार्ग पर चल रही हैं?

उन्होंने कहा कि ये लोग विध्वंसकारी एजेंडे पर चल रहे हैं। बहुसंख्यक वर्ग को अल्पसंख्यक वर्ग के विरुद्ध बर्गला कर, ध्रुवीकरण की राजनीति कर, वोटों की अनैतिक खेती करते हैं। मंदिर मस्जिद के आधार पर देश को बाँट अब ये बिजली को भी बाँटने लगे हैं। श्मशान पर घमासान करके ये हवा, पानी, जल, आकाश, अग्नि को भी बाँट देंगे। इनमें और अंग्रेजों की नीति में कोई अंतर नहीं है।

बीएसएससी घोटाले में नेताओं की संलिप्तता गंभीर : माले

पटना(अपना बिहार, 18 मार्च 2017) - भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने बीएसएससी घोटाले में राजद, जदयू और भाजपा के नेताओं तथा बिहार सरकार के कई मंत्रियों व विधायकों की बीएसएससी घोटाले में संलिप्तता को बेहद गंभीर बताया है. उन्होंने कहा कि यह घोटाला बिहार का व्यापम है, जो इन पार्टियों के एकताबद्ध राजनीतिक संरक्षण में खुलकर लंबे समय से चल रहा है. जनता को ठगने के लिए महागठबंधन व भाजपा के नेता एक-दूसरे के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं, लेकिन इस घोटाले ने एक बार फिर से साबित किया है कि ये दोनों गठबंधन जनता के अधिकरों की हकमारी में एक-दूसरे से होड़ कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी शुरू से ही इस घोटाले के राजनीतिक संरक्षण की सीबीआई जांच की मांग करते रही है. टॉपर घोटाले में भी हमने पूरे बिहार में आंदोलन चलाया और कहा कि राजनीतिक संरक्षण से ही असली समस्या सामने आएगी. लेकिन नीतीश सरकार इस मांग से अब तक भागते रही है और केवल छोटी मछलियों को ही निशाना बनाते रही है.

नौकरशाहों के पक्ष में उतरी भाजपा

पटना(अपना बिहार, 18 मार्च 2017) - परीक्षा प्रश्न पत्र लीक मामले में सुधीर राकेश की गिरफ्तारी के विरोध में राजभवन मार्च करने को लेकर आईएएस अधिकारियों को राज्य सरकार द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किये जाने के खिलाफ भाजपा ने बिहार विधानमंडल में कड़ा विरोध जताया. बताते चलें कि बीएसएससी के पूर्व अध्यक्ष सुधीर कुमार की गिरफ्तरी के विरोध में गत 27 फरवरी आईएएस एसोसिएशन की बिहार शाखा के सदस्यों ने राजभवन मार्च किये फिल्ड में कार्यरत आईएएस अधिकारियों खासतौर पर जिलाधिकारियों को राज्य सरकार द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.बिहार आईएएस एसोसिएशन के उक्त मार्च में करीब 28 अधिकारियों ने भाग लिया था जिनसे यह पूछा गया है कि क्या उन्होंने इसके लिए अनुमति ली थी. बिहार विधानसभा में आज भाजपा सहित राजग के अन्य घटक दलों के सदस्यों ने आईएएस अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भेजे जाने पर सदन के बीच आकर कड़ा विरोध जताते हुए सरकार विरोधी नारेबाजी की. बिहार विधान परिषद की आज की कार्यवाही शुरू होने पर भाजपा सदस्य लाल बाबू प्रसाद द्वारा इसको लेकर लाये गए कार्यस्थगन प्रस्ताव को सभापति अवधेश नारायण द्वारा अस्वीकृत कर दिये जाने पर सदस्यों ने अपनी सीट से खडे होकर पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से कराये जाने के आईएएस एसोसिएशन की मांग का समर्थन किया.

इस मामले में बिहार विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी ने अपने कक्ष में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बिहार में कांग्रेस शासनकाल की तरह आपातकाल लग जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उक्त नोटिस आईएएस अधिकारियों को अपमानित करने तथा उनके द्वारा किसी के पक्ष में मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्रियों के मौखिक आदेश को नहीं मानने के कारण उन्हें धमकाने और उन पर दबाव बनाने के लिए जारी किया गया है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आईएएस अधिकारियों को भी विरोध जताने और अपनी बात रखने का अधिकार है, पर सरकार द्वारा उन्हें सबक सिखाने की मंशा से उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. श्री मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्य का विकास कार्य बाधित नहीं हो, इसे ध्यान में रखते हुए आईएएस अधिकारियों के साथ टकराव की स्थिति नहीं उत्पन्न होने देने का सुझाव दिया.

इस बीच बिहार आईएएस एसोसियेशन के अध्यक्ष दीपक कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें उक्त नोटिस के बारे में मीडिया के जरिये जानकारी मिली है. उल्लेखनीय है कि सुधीर की गिरफ्तारी के विरोध में और पेपर लीक मामले की सीबीआई से जांच की मांग को लेकर राज्यपाल रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी से मुलाकात की थी.

पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि और पेंशन के सवाल पर पक्ष-विपक्ष एकजुट

पटना(अपना बिहार, 18 मार्च 2017) - सूबे में त्रिस्तरीय पंचायती राज निकायों के जन प्रतिनिधियों के मानदेय को बढ़ाकर सम्मानजनक करने एवं उनके लिए पेंशन लागू करने के सवाल पर शुक्रवार को विधान परिषद में पक्ष-विपक्ष सब एकजुट दिखा। जदयू की सदस्या रीना यादव के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर हालांकि विभागीय मंत्री कपिलदेव कामत ने सदन को आवश्वस्त किया कि सरकार जल्द ही इस विचारे में विचार करेगी। वहीं इससे पहले इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वर्तमान में पंचायत प्रतिनिधियों को जो मानदेय दिया जा रहा है, वह सम्मानजनक नहीं है। सरकार सामने बैठी है। उसे गंभीरतापूर्वक इस मामले में विचार करना चाहिए। वहीं विपक्ष की ओर से सुशील कुमार मोदी ने पूर्व में इस मद में जारी राशि का भुगतान पंचायत प्रतिनिधियों को नहीं किये जाने का सवाल उठाया। जबकि भाजपा के ही रजनीश कुमार ने भी सरकार से पंचायत जन प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि एवं पेंशन शुरू करने की मांग की। इस क्रम में डा. दिलीप चौधरी, संजय कुमार और मनोरमा देवी सहित अनेक सदस्यों ने अपनी बातें सदन में रखी।

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर हाईकोर्ट सख्त, शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को किया तलब

पटना(अपना बिहार, 18 मार्च 2017) - सूबे में चलने वाले प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर पटना हाइकोर्ट काफी खफा है. कोर्ट ने निजी स्कूलों द्वारा बेतहाशा फीस बढ़ाए जाने के मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को तलब किया है. पटना हाइकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन की खंडपीठ ने संजीव कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि अन्य राज्यों की तरह बिहार में इसके लिये रेगुलेटरी बॉडी क्यों नहीं है ? कोर्ट ने पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था बनाये रखने के लिये शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को कोर्ट में तलब किया है. जानकारी के मुताबिक कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 6 सप्ताह बाद फिर होगी.

पटना हाइकोर्ट को यह जानकारी दी गयी कि प्राइवेट स्कूलों में फीस को नियंत्रण करने के लिये राज्य में कोई नियंत्रक इकाई नहीं है. बताया जा रहा है कि जबकि इसे लेकर तमिलनाडु, राजस्थान और अन्य राज्यों में इस तरह की फीस बढ़ोतरी पर पूरी तरह लगाम लगाने की लिये एक कमेटी का गठन किया गया है. मामले में याचिकाकर्ता संजीव कुमार के अधिवक्ता ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को हाइकोर्ट ने गंभीरता से लिया है. साथ ही इस मामले में बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को तलब भी किया है.

केंद्र ने माना - नदियों में बढ़ रहा गाद, मुख्यमंत्री नीतीश ने किया है गाद को लेकर फरक्का तोड़ने की मांग

नई दिल्ली/ पटना(अपना बिहार, 18 मार्च 2017) - गंगा नदी की अविरलता बरकारार रखने को लेकर फरक्का बराज को तोड़ने की मांग कर रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के तथ्यों को अब केंद्र सरकारने भी स्वीकार कर लिया है। केंद्र सरकार जल्दी ही एक नदी तलछट प्रबंधन नीति का विकास करेगी। यह बात केंद्रीय जल आयोग के चेयरमैन नरेन्द्र कुमार ने शुक्रवार को नई दिल्ली में भारतीय नदियों में तलछट प्रबंधन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए कही। श्री कुमार ने कहा कि पूर्व में कई समितियां गठित की गई जिन्होने तलछट की समस्या पर अध्ययन किया और नदियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त उपाय सुझाये। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन इस दिशा में एक और आगे बढ़ता हुआ कदम होगा और विभिन्न हितधारकों के बीच व्यापक विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप एक व्यापक नीति विकसित होगी। श्री कुमार ने कहा कि तलछट प्रबंधन की एक पद्धति का निर्माण करना आवश्यक है जो कि पर्यावरण के अनुकूल हो और व्यावहारिक, तकनीकी, तथा आर्थिक रूप से भी संभव हो।

श्री कुमार ने कहा कि साल दर साल गाद जमते जमते बहुत गंभीर अनुपात में पहुंच गई है। उन्होने कहा कि अब यह सामान्य तौर पर महसूस हो रहा है कि बाढ़ प्रवण नदियां बढ़ रही हैं और उनके बहाव की क्षमता में बदलाव हो रहा है जिससे बाढ़ का स्तर बढ़ रहा है। श्री कुमार ने कहा कि नदी प्रबंधन एजेंसियों द्वारा किए जाने वाली सामान्य प्रथाओं का प्रदर्शन है कि अब तक का तलछट प्रबंधन, सीमित वैज्ञानिक ज्ञान पर आधारित है। उनका यह विचार था कि तलछट प्रबंधन के लिए एक अलग दृष्टिकोण वांछनीय है, जिसमें तलछट का ज्ञान और प्रबंधन भी शामिल हो और उपलब्ध वैज्ञानिक ज्ञान का व्यापक अनुप्रयोग हो।

बहरहाल बिहार सरकार ने हाल ही में राजधानी पटना में गंगा नदी में गाद की समस्या को लेकर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से गाद प्रबंधन नीति बनाने अथवा फरक्का बराज तोड़ने की मांग की थी। उन्होंने इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाने की बात कही थी।

विप चुनाव में जदयू की जीत, राजद की हार

पटना(अपना बिहार, 17 मार्च 2017) - बिहार विधान परिषद के चार सीटों के लिए हुए चुनाव में जदयू अपने दोनों सीटों को जीतने में कामयाब रही। वहीं राजद को दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। बिहार विधान परिषद के तहत कराए निर्वाचन में गया स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी अवधेश नारायण सिंह विजयी घोषित किये गये। उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी बैजूनाथ कुमार सिंह ने बताया कि सिंह के निर्वाचन की घोषणा कर दी गयी। बताते चलें कि अवधेश नारायण सिंह विधान परिषद के सभापति हैं और गया स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा जीत दर्ज की है। वहीं सारण स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी प्रो वीरेंद्र यादव ने दिग्गज महाचंद्र प्रसाद सिंह को हराया। इसके अलावा गया शिक्षक सीट पर रालोसपा और कोसी शिक्षक सीट पर जदयू को जीत पहले ही मिल चुकी है।

कैंसर रोगियों को नहीं होगी बाहर जाने की जरूरत : तेजप्रताप

पटना(अपना बिहार, 17 मार्च 2017) - स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव ने कहा कि पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में राज्य कैंसर इंस्टीट्यूट बनेगा। इसके साथ ही दूसरे चरण में भागलपुर में भी तीसरे लेवल का कैंसर केयर सेंटर की स्थापना होगी। आईजीआईएमएस में कैंसर इंस्टीट्यूट बनाने पर राज्य सरकार का 120 करोड़ रुपये खर्च होंगे। स्वास्थ्य मंत्री विधान परिषद में गुरुवार को वाम दल के केदार नाथ पांडेय के एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर सरकार की ओर से वक्तव्य दे रहे थे। उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य में कैंसर बीमारी के इलाज की सुविधा कम है। लेकिन सरकार का प्रयास है कि जल्द से जल्द बेहतर इलाज की व्यवस्था की जा सके ताकि कैंसर के इलाज के लिए राज्य के रोगियों को बाहर नहीं जाना पड़े।

उन्होंने कहा कि सरकार की गंभीर प्रयास है कि पीएमसीएच में कैंसर के मरीजों के लिए सेंकाई की व्यवस्था हो सके। इसके लिए अस्पताल के रेडियोलोजी विभाग में नये कोबाल्ट सोर्स की व्यवस्था की जा रही है। सरकार ने इसके लिए 70 लाख रुपये की स्वीकृति दे दी है। उन्होंने कहा कि कैंसर मरीजों के इलाज के लिए महावीर कैंसर अस्पताल में भी व्यवस्था है। राज्य सरकार यहां कैंसर का इलाज कराने वाले रोगियों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से सहायता राशि देती है।

शिक्षा के क्षेत्र में इतिहास रच रहा बिहार : चौधरी

पटना(अपना बिहार, 17 मार्च 2017) - शिक्षा एवं सूचना प्रावैधिकी मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने कहा कि राज्य में शिक्षा में आधी आबादी की हिस्सेदारी बढ़ी है। 2017 की मैट्रिक की परीक्षा में 49 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 44 प्रतिशत बालिकाएं शामिल हुई है। यह 2007 में मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य में पोशाक एवं साइकिल योजना लागू करने का परिणाम है। डॉ. चौधरी गुरुवार को विधान परिषद में भोजनावकाश के बाद शिक्षा, सूचना प्रावैधिकी, पर्यावरण एवं वन, समाज कल्याण विभाग के आय-व्यय पर विभागवार सामान्य वाद-विवाद के बाद सरकार की ओर से उत्तर दे रहे थे।

डॉ. चौधरी ने कहा कि वर्ष 2016 में शुरू किए गए कदाचार मुक्त परीक्षा का क्रम इस बार भी जारी रहा। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा नौ प्रमंडलों में परीक्षा केंद्र एवं क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। 2005 से अद्यतन मैट्रिक व इंटर की परीक्षा के सभी अंकपत्र एवं प्रमाण पत्र आॅनलाईन कर दिए गए हैं। प्राथमिक शिक्षा में बदलाव के साथ माध्यमिक शिक्षा को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। केंद्र द्वारा राशि उपलब्ध नहीं कराने के बावजूद नियोजित शिक्षकों के वेतन का भुगतान राज्य मद से 2100 करोड़ उपलब्ध कराकर किया गया। डॉ. चौधरी ने कहा कि आज 6-14 आयु वर्ग के लगभग 99 प्रतिशत बच्चे स्कूलों में नामांकित है। उच्च शिक्षा में प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन का निर्णय लिया गया है। इस वर्ष पूर्णिया, नालंदा और मुंगेर में तीन नये विश्वविद्यालयों की स्थापना की गयी है।

चर्चा में संजय प्रसाद, सूरजनंदन कुशवाहा, केदारनाथ पांडेय, रजनीश कुमार, नवल किशोर यादव, रामवचन राय भी शामिल हुए। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के उत्तर के दौरान सदन का बहिष्कार किया। डॉ. चौधरी ने कहा कि विपक्ष अपनी जिम्मेवारियों का निर्वाह नहीं कर रहा है।

नमो ने बिहार को ठगा, विधान परिषद में विशेष पैकेज के सवाल पर सरकार का बयान, भड़का विपक्ष, सरकार पर भ्रामक आंकड़े देने का आरोप

पटना(अपना बिहार, 17 मार्च 2017) - एक करोड़ 65 लाख करोड़ रुपए का महापैकेज की बात कह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार को ठगा है। ये बातें जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह ने गुरूवार को विधान परिषद में जदयू के सदस्य नीरज कुमार के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बिहार के लिए घोषित सवा लाख करोड़ का पैकेज पहले से चल रही योजना की रीपैकेजिंग है। केन्दीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने भी सीएम नीतीश कुमार को लिखे पत्र में इसे स्वीकार किया था। खास बात यह है कि रीपैकेजिंग के सवा लाख करोड़ के पैकेज में भी अब तक मात्र 28 हजार 117 करोड़ रुपये ही मिले हैं। केन्द्र के नए बजट में मात्र लगभग दस हजार करोड़ रुपये की ही व्यवस्था है। एक लाख आठ हजार करोड़ रुपये की ऐसी योजनाएं पैकेज में हैं जो या तो पहले से चल रही हैं या प्रस्तावित हैं। छह हजार करोड़ रुपये की योजनाओं का तो अब तक कोई आधार ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि श्री जेटली ने पैकेज की घोषणा के बाद इसकी जानकारी सीएम को पत्र लिखकर दी थी। बाद में सीएम ने पत्र लिखकर पूछा था कि इस पैकेज का असली आकार क्या है? कितनी समय सीमा में लाभ राज्य को प्राप्त होगा तथा इसका तरीका क्या होगा? केन्द्र सरकार ने जवाब तो भेजा लेकिन उन बिन्दुओं की चर्चा नहीं की गई, जो सीएम द्वारा उठाए गए थे।

श्री सिंह ने कहा कि पैकेज में घोषित योजनाओं के चयन में राज्य सरकार से राय नहीं ली गई, लेकिन कुछ योजनाओं में राज्यांश की शर्त लगा दी गई। पीएम पैकेज की योजनाओं को पूरी तरह केन्द्र के पैसे से पूरा करना चाहिए था। पैसा नहीं मिलने के कारण एनएच की 42 हजार 385 करोड़ की योजनाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। 1350 किमी सड़कों की स्वीकृति भी अभी नहीं मिली है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में दस योजनाएं चिह्नित की गई, इनमें एक पर भी काम शुरू नहीं हुआ। नागरिक उड्डयन के तहत पटना में एयर पोर्ट के लिए दो हजार करोड़ और गया, रक्सौल तथा पूर्णियां में हवाई अड्डों के विकास के लिए सात सौ करोड़ रुपये की घोषणा थी। राज्य सरकार ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी लेकिन केन्द्र से पैसा नहीं मिला।

इसी तरह भागलपुर में विक्रमशीला विश्वविद्यालय और बोध गया में आईआईएम के लिए जमीन अधिग्रहण की जा रही है, लेकिन केन्द्र से अब तक पांच सौ करोड़ रुपये नहीं मिले। पीएमसीएच के साथ भागलपुर और गया मेडिकल कॉलेजों के लिए घोषित 600 करोड़ रुपये का भी पता नहीं है। कृषि, रेलवे ऊर्जा, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्रों की योजनाएं भी ऐसी ही पड़ी हैं।

केंद्रीय कर्मियों के हड़ताल का दिखा असर

पटना(अपना बिहार, 17 मार्च 2017) - राज्य में तैनात तमाम केन्द्रीय कर्मचारी अपनी 21 सूत्री मांगों के समर्थन में गुरुवार को हड़ताल पर रहे। आयकर विभाग, जीपीओ, आरएमएस समेत सभी विभागों में कामकाज ठप रहा। हड़ताली कर्मियों ने आयकर गोलंबर, लोकनायक भवन आदि स्थानों पर धरना-प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। हड़ताल के समर्थन में राज्य के सभी प्रधान डाकघरों, उपडाकघरों में ताले लटके रहे। जीपीओ परिसर में आयोजित सभा में संयुक्त डाक संघर्ष समिति के संयोजक उपेन्द्र तिवारी, अध्यक्ष बीके मिश्र, विंध्याचल सिंह, सुनील वर्मा आदि नेताओं ने कहा कि अनुकम्पा नियुक्ति पर पांच प्रतिशत की सीलिंग हटाने, सेवा काल में पांच प्रोन्नतियां देने, दैनिक वेतनभोगी मजदूरों का वेतन संशोधित करने व बकाया वेतन का भुगतान करने आदि मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।

केन्द्रीय कर्मचारी महासंघ की राज्य समिति से जुड़े सैकड़ों सदस्यों ने कामकाज ठप रखा और कार्यालय गेट के समक्ष मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। आयोजित सभा में महासंघ के अध्यक्ष सीडी सिंह, महासचिव अरुण पांडेय, जागेश्वर साह, अमिताभ रंजन, शमशाद अली, बालेश्वर उपाध्याय, एसके वर्मा आदि नेताओं ने कहा कि श्रम कानूनों में सुधार, नई पेंशन नीति खत्म करने आदि मांगों पर सम्मान जनक समझौता नहीं होने पर बेमियादी हड़ताल की जाएगी।

शुद्ध पेयजलापूर्ति को केंद्र देगा ढाई सौ करोड़

पटना(अपना बिहार, 17 मार्च 2017) - फ्लोराइड, आर्सेनिक और आयरन प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल के लिए 2017-18 में केंद्र सरकार से बिहार को 250 करोड़ रुपए मिलेगा। गुरुवार को पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय दिल्ली में बिहार के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में यह आवंटन तय हुआ। 2016-17 की तीसरी किश्त के रूप में बिहार को करीब 52 करोड़ रुपए और देने पर भी सहमति बनी।

दिल्ली में आयोजित इस बैठक में मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्यव्रत साहू, निदेशक राजेश कुमार और एडवाइजर दिनेश कुमार के सामने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की प्रधान सचिव अंशुली आर्या तथा अन्य अधिकारियों ने बिहार में चल रही योजनाओं का ब्यौरा रखते हुए अधिक से अधिक आवंटन का दावा किया। बताया गया कि राज्य सरकार ने इस मद में 350 करोड़ रुपए आवंटित किया है, लिहाजा केंद्र भी पर्याप्त धनराशि दे ताकि अधिक से अधिक लोगों को स्वच्छ पानी मुहैया कराया जाए।

वर्ष 2016-17 में केंद्र सरकार ने बिहार के लिए इस मद में 236 करोड़ रुपए आवंटित किया था, जिसमें से 228 करोड़ विभाग को मिल चुके हैं। अब तीसरी किश्त के रूप में भी बिहार को 20 करोड़ रुपए दिया जाना तय हुआ है। इसी प्रकार विश्व बैंक परियोजना के तहत इस वर्ष बिहार को 50 करोड़ रुपए मिले हैं तीसरी किश्त के रूप में और 32 करोड़ रुपए मिलना तय हुआ है। ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत बिहार के करीब दो लाख घरों में पीएचईडी ने हर घर नल का जल योजना के तहत पानी का कनेक्शन दे दिया है।

छत्तीसगढ़ से फिर करेंगे शराब के खिलाफ मुहिम का आगाज

पटना(अपना बिहार, 17 मार्च 2017) - जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छत्तीसगढ़ में शराबबंदी मुहिम का आगाज कर सकते हैं। गुरुवार को वहां से आए सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में सीएम ने 25-26 मार्च को शराबबंदी पर छत्तीसगढ़ में होने वाली आम सभा में शामिल होने के संकेत दिए। बिहार में लागू शराबबंदी से प्रभावित होकर पटना आए समाजसेवियों के साथ सीएम प्रदेश कार्यालय में लगभग सवा घंटे बैठे। इसमें सीएम ने शराबबंदी पर अपने विचार खुलकर बताए। कहा कि इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही शराबबंदी के बारे में सोचा करता था। 17-18 वर्ष की आयु में ही देखा करता था कि कैसे लोग शराब के चंगुल में फंसकर बर्बाद हो रहे हैं। लोगों का घर-परिवार तबाह हो जाता था।

जननायक कपूर्री ठाकुर ने अपने शासनकाल में शराबबंदी लागू की। लेकिन वह अधिक कारगर नहीं हो सकी। 2015 में विधानसभा चुनाव के पहले जीविका के सम्मेलन में भाषण समाप्त कर बैठ गया तो कुछेक महिलाओं ने शराबबंदी की मांग की। तब आश्वस्त किया कि अगर सरकार में आया तो शराबबंदी लागू करूंगा। लेकिन चुनाव में इसकी अधिक चर्चा नहीं की। जैसे ही सरकार में आया, पहले एक अप्रैल से गांवों में और फिर शहरों में पांच अप्रैल से पूरे बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की। सीएम ने कहा कि महात्मा गांधी शराबबंदी के पक्षधर थे। शराबबंदी से राज्य में कम हुए आपराधिक वारदातों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे समाज में खुशहाली आई है। लोग अपनी मेहनत की कमाई रहन-सहन व बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर रहे हैं।

सीएम ने शराबबंदी के पक्ष में काम कर रहे सामाजिक संगठनों की तारीफ भी की। बैठक में मौजूद छत्तीसगढ़ जदयू के प्रदेश जदयू अध्यक्ष मनमोहन अग्रवाल ने कहा कि हमारी पार्टी पूरे देश में शराबबंदी की मांग कर रही है। बिहार की तरह छत्तीसगढ़ में भी शराबबंदी लागू हो, इसके लिए सामाजिक संगठनों का साथ मिल रहा है। रायपुर में 25-26 मार्च को दो दिनी सम्मेलन में शामिल होने पर सीएम ने कहा है कि विधानमंडल सत्र चालू है। लेकिन किसी एक दिन शामिल होने की कोशिश करूंगा। बैठक में छत्तीसगढ़ से आए चंद्रशेखर, अरुण कुमार, अनिता वर्मा के अलावा जदयू के राष्ट्रीय सचिव रवीन्द्र सिंह, प्रदेश महासचिव डॉ नवीन कुमार आर्य व अनिल कुमार मौजूद थे।

हुई आलोचना तो नरम पड़े रघुवंश

पटना(अपना बिहार, 17 मार्च 2017) - अपने ही दल के नेताओं की नाराजगी सामने आने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद यादव महागठबंधन पर दिये गये अपने ताजा बयान को लेकर बैकफुट पर आ गए हैं. रघुवंश प्रसाद ने कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति नहीं बल्कि बुराई का 'गर्दा उड़ाने' की बात कही थी. मेरे बयान का गलत मतलब निकाला गया. उन्होंने कहा कि मैं फ्रंट का सिपाही हूं. राजनीति का मतलब बुराई को खत्म करना है. राजद नेता रघुवंश प्रसाद ने बुधवार को एक स्थानीय समाचार चैनल से बातचीत के दौरान यह बातें कहीं. उन्होंने कहा कि बुराई से लड़ने के खिलाफ हम सिपाही हैं तो हम बुराई को खत्म करेंगे और सिपाही भी तो दुश्मन को ही मारता हैं. इस दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बयानों पर प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बयानों को पढ़कर ही वे कुछ बोलेंगे. दरअसल, राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने मंगलवार को यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन की शर्मनाक पराजय को लक्ष्य कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा था. पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए मंगलवार को कहा था कि वह राजद के एक सिपाही हैं. सेनापति का आदेश हुआ तो गर्दा झाड़ देंगे. जिसपर बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने बुधवार को प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि रघुवंश प्रसाद सिंह का बयान फूहड़ है और उन्हें ऐसे बयान नहीं देने चाहिए. राबड़ी ने बयानबाजी को लेकर जदयू नेताओं को भी बयान न देने की सलाह दी थी. वहीं दूसरी ओर तेजस्वी भी रघुवंश की बयानबाजी से पूरी तरह नाखुश दिखे. तेजस्वी यादव ने रघुवंश प्रसाद को दो टूक में कहा कि उनके बयान को पार्टी सपोर्ट नहीं करती. वो ऐसे बयान न दें नहीं तो उन पर कारवाई संभव है. तेजस्वी ने कहा कि रघुवंश प्रसाद के बयान से भाजपा को फायदा पहुंच रहा है. अगर बात बढ़ेगी तो उम्मीद है राष्ट्रीय अध्यक्ष उन पर जरूर कार्रवाई करेंगे.

विप के सभापति पद को लेकर महागठबंधन में दरार, राजद ने ठोंका दावा, अवधेश नारायण सिंह के पक्ष में जदयू-कांग्रेस

पटना(अपना बिहार, 17 मार्च 2017) - बिहार में विधान परिषद की चार सीटों पर हुए चुनाव परिणाम आने के बाद महागठबंधन में विधान परिषद के सभापति पद को लेकर ठन गयी है. एनडीए के नेताओं की मानें तो विधान परिषद में वर्तमान सभापति अवधेश नारायण सिंह नीतीश कुमार के पसंदीदा बताये जाते हैं. नीतीश कुमार दोबारा अवधेश नारायण सिंह को ही सभापति की कुर्सी पर देखना चाहते हैं. वहीं दूसरी ओर विधान परिषद सदस्य और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के एक बयान से महागठबंधन में सभापति की कुर्सी को लेकर ठन गयी है. दूसरी ओर एनडीए नीतीश कुमार द्वारा अवधेश नारायण सिंह को ही दोबारा सभापति बनाये रखने के फैसले से काफी उत्साहित है और आशा जता रही है कि नीतीश कुमार इस तरह की परंपरा बनाये रखेंगे.

विधान परिषद में मीडिया से बातचीत करते हुए राबड़ी देवी ने इस पर आपत्ति जाहिर की है. राबड़ी देवी का कहना है कि राजद कोटे से किसी व्यक्ति को सभापति चुना जाना चाहिए. राबड़ी ने साफ किया है कि सभापति पद पर उन्हें या उनकी पार्टी को अवधेश नारायण सिंह बिल्कुल मंजूर नहीं हैं. वहीं इस मसले पर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बयान दिया है कि सभापति का मसला महागठबंधन के नेता मिल बैठकर करेंगे. जदयू की ओर से विप के सदस्य और प्रवक्ता नीरज ने कहा है कि नीतीश कुमार हमेशा उच्च परंपरा को कायम रखने वाले व्यक्ति हैं. वहीं कांग्रेस नेता ने कहा है कि महागठबंधन यदि ठीक से चुनाव लड़ती तो परिणाम कुछ और होता.

सीबीआई करे ए.एन.एम बहाली में धांधली की जांच

पटना(अपना बिहार, 17 मार्च 2017) - विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज में लगातार घोटाले हो रहे हैं। राज्य के अंदर ए.एन.एम. की बहाली में धांधली हुई है, जिसे बीएसएससी के पूर्व सचिव ने स्वीकार किया है। डा. कुमार ने कहा कि बीएसएससी पेपर लीक कांड का दायरा बढ़ कर अब ए.एन.एम. बहाली तक तो चला ही गया, साथ ही दो और आई.ए.एस. का नाम भी जुड़ने लगा। आज तक राज नेताओं के नाम का खुलासा भी नहीं किया गया। आई.ए.एस. एसोसिएशन के द्वारा पूर्व में भी सीबीआइ की जांच की मांग की जा चुकी है। डा. कुमार ने कहा कि इस घोटाले के बढ़ते दायरे और उच्याधिकारियों के साथ राज नेताओं की संलिप्ताको देखते हुए इस घोटाले की सीबीआइ जांच की मांग पुन: की गयीं।

जदयू के संजीव ने लगायी हैट्रिक, कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीते

पटना(अपना बिहार, 16 मार्च 2017) - विघान परिषद चुनाव में तीसरी बार रिकार्ड मतों से जदयू प्रत्याशी संजीव कुमार सिंह ने जीत दर्ज की। मतगणना में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी प्रो. जगदीश चन्द्र को 6,013 मतों से पराजित किया। इन्हें कुल आठ हजार तीन सौ नौ मत मिले जबकि भाजपा प्रत्याशी को 2 हजार 2 सौ 96 मत पर ही सिमटना पड़ा। मतगणना दो चक्र में प्रथम वरीयता के आधार पर की गयी। पहले चक्र की मतगणना में ही जदयू प्रत्याशी संजीव कुमार सिंह ने जीत की ओर अपनी बढ़त बना ली थी। पहले चक्र के गणना में इन्हें 5,017 मत मिले। वहीं दूसरे चक्र में भी अपनी बढ़त बनाए रखते हुए 3 हजार 292 मत प्राप्त कर निर्वाचित घोषित किए गये।

निवार्ची पदाधिकारी सह प्रमंडलीय आयुक्त टीएन बिन्देश्वरी ने संजीव कुमार सिंह को निर्वाचित घोषित करते हुए प्रमाण पत्र प्रदान किया। मतगणना में कुल 12 हजार 12 मतों की गिनती में 11 हजार 29 मत वैध पाए गये। जदयू प्रत्याशी संजीव कुमार सिंह को कुल 8,309 मत मिले। भाजपा प्रत्याशी प्रो. जगदीश चंद्र को 2,296 एवं निर्दलीय प्रत्याशी नितेश कुमार को 424 मत मिले हैं। 981 मत रद्द पाए गये वहीं दो मत नोटा के पक्ष में डाले गए हैं। मतगणना का काम 14 टेबलों पर किया गया। मौके पर चुनाव प्रेक्षक प्रेम सिंह मीना, जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह सहयक निवार्ची पदाधिकारी पंकज कुमार पाल, उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रामलला प्रसाद सिंह, डीडीसी रामशंकर, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी श्वेता कुमारी, डीपीआरओ रविन्द्र कुमार आदि मौजूद थे।

गंगा बचाने को बिहार करेगा आंदोलन, गाद प्रबंधन की नीति बनाये या फरक्का तोड़े केंद्र, विधान परिषद में बोले जल संसाधन मंत्री

पटना(अपना बिहार, 16 मार्च 2017) - सूबे के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार नदियों में बढ़ते गाद के प्रबंधन की नीति बनाए अथवा फरक्का बांध को तोड़े। उन्होंने कहा कि गंगा की अविरलता को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया जाएगा। इसके लिए दिल्ली में राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। इसमें देश-विदेश के जल-विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा। श्री सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने गंगा की स्थिति का अध्ययन कराया है। फरक्का से जैसे-जैसे अप स्ट्रीम में बढ़ते हैं गाद के कारण नदी की गहराई कम होती जाती है। वह बुधवार को विधान परिषद की दूसरी पाली में वित्तीय वर्ष 2017-18 के आय-व्यय पर जल संसाधन, योजना एवं विकास, लघु जल संसाधन विभाग को लेकर सामान्य वाद-विवाद के बाद सरकार की ओर से उत्तर दे रहे थे।

श्री सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने 317 कटाव निरोधक योजनाएं बनायी हैं। इन पर 1206 करोड़ खर्च होंगे। बाढ़ पूवार्नुमान के लिए तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। पांच नदी बेसिन का रियल टाइम डाटा एकत्र किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में 53.53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित होने की संभावना है। वर्तमान में 29.6 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता है।

इसके अतिरिक्त 8.46 लाख सिंचाई क्षमता का ह्रास भी हुआ है। सरकार 2017-18 में तीन लाख 48 हजार 255 हेक्टेयर में ह्रासित सिंचाई क्षमता को दुरुस्त करेगी और चार लाख आठ हजार 298 हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित करेगी। मंत्री के उत्तर के दौरान विपक्ष ने सदन का बहिष्कार किया। इसके पूर्व वाद-विवाद में राधा चरण साह, कृष्ण कुमार सिंह, दिलीप कुमार चौधरी, नीरज कुमार शामिल हुए।

वाद-विवाद पर चर्चा के दौरान नीरज कुमार ने विपक्ष की टोका-टाकी के बीच कहा कि आपके आइटम बॉय ने जो बातें कही है उसके बारे में भी पूछेंगे। इसके बाद सत्ता व विपक्ष के बीच जमकर नोक-झोंक हुई। भाजपा के लालबाबू प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री हमारे आइटम बॉय नहीं हैं, वे देश के प्रधानमंत्री है, उनके खिलाफ कोई शब्द नहीं सुनना चाहते हैं। शोर- शराबे के बीच उप सभापति हारुन रशीद ने हस्तक्षेप किया फिर पुन: संबोधन शुरू हुआ।

अबतक 20 भ्रष्टाचारियों की संपत्ति जब्त

पटना(अपना बिहार, 16 मार्च 2017) - राज्य सरकार के प्रभारी मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि निगरानी ने राज्य में अब तक 55 लोकसेवकों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति को लेकर कार्रवाई की है। इनमें से 20 सेवकों की करोड़ों की संपत्ति जब्त भी की गई है। श्री यादव बुधवार को विधान परिषद में भाजपा के मंगल पांडेय के एक तारांकित प्रश्न का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जितने भी भ्रष्ट लोकसेवक पकड़े गये हैं, उनमें 20 का मामला विशेष न्यायालय में चल रहा है। इनमें 19 संपत्ति जब्ती के खिलाफ उच्च न्यायालय में चले गये। उच्च न्यायालय से अब तक सात के मामले में फैसला हुआ है। कोर्ट ने मात्र एक पर कार्रवाई को निरस्त किया। शेष सभी की संपत्ति जब्त कर ली गई है। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट लोक सेवकों पर सरकार निरंतर कार्रवाई कर रही है। जो मामले कोर्ट में हैं उसको लेकर कोर्ट पर दबाव नहीं बनाया जा सकता है। प्रश्नकर्ता श्री पांडेय ने जानना चाहा था कि राज्य सरकार ने कितने भ्रष्ट लोक सेवकों पर कार्रवाई की है। साथ ही बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम 2009 के प्रावधानों के अनुसार एक वर्ष में भ्रष्ट लोक सेवकों की संपत्ति जब्त करना चाहती है या नहीं।

सदस्यों के सवाल को लेकर गरम हुए शिक्षा मंत्री

पटना(अपना बिहार, 16 मार्च 2017) - बुधवार को विधान परिषद में शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी उस समय गरम हो गये जब सदस्यों ने आगामी 21 मार्च से मैट्रिक परीक्षा की कापियों मूल्यांकन कराये जाने को लेकर सवाल उठाया। हालत यह रही कि उपसभापति हारूण रशीद के बार-बार समझाने के बावजूद डा. चौधरी ने यह कहते हुए अपनी भड़ास निकाली कि सवाल उठाने वाले सदस्य केवल शिक्षकों की चिंता कर रहे हैं जबकि राज्य सरकार बच्चों की चिंता कर रही है। उनका कहना था कि राज्य सरकार जल्दी से जल्दी मैट्रिक की पूरक परीक्षा करवाना चाहती है ताकि बच्चों का एक साल बर्बाद न हो।

दरअसल वामपंथी सदस्य केदार पांडे ने शून्य काल के दौरान यह सवाल उठाया कि इंटर परीक्षा की कापियों की जांच पहले से चल रही है। इसके अलावा इसी महीने के अंत तक स्कूलों में साइकिल व पोशाक के लिए राशि का वितरण किया जाना है। इतना ही नहीं आगामी 22 मार्च को बिहार दिवस का आयोजन भी है। इस काम में भी शिक्षकों को लगाया गया है। इसके अलावा अब उन्हें सरकार 21 मार्च से मैट्रिक की कापियों के मूल्यांकन के कार्य में लगा रही है। इससे शिक्षक दुविधा में हैं। इस सवाल को लेकर नवल किशोर यादव सहित अनेक सदस्यों ने अपनी बातें रखीं।

इस मामले में परंपरा के अनुसार उपसभापति ने डा. अशोक चौधरी से सूचना ग्रहण करने की बात कही। परंतु डा. चौधरी ने सवाल उठाने वाले सदस्यों से कहा कि साइकिल और पोशाक राशि का वितरण इस बार आरटीजीएस के जरिए सीधे छात्र-छात्राओं के खाते में भेजा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है।

सरकार ने स्वीकार की लेटलतीफी, हर घर नल का जल योजना के क्रियान्वयन में हो रही देरी

पटना(अपना बिहार, 16 मार्च 2017) - राज्य सरकार ने स्वीकार किया है कि सात निश्चय में से एक हर घर नल का जल योजना के क्रियान्वयन में देरी हुई है। बुधवार को विधानसभा में मिथिलेश तिवारी के तारांकित प्रश्न के जवाब में पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत ने कहा कि कई प्रक्रियाओं के कारण योजना के क्रियान्वयन में देरी हो रही है। अब पंचायतों को राशि दे दी गई है। 2020 तक गांवों के हर घर को नल से जल उपलब्ध करा दिया जाएगा।

उनके जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सात निश्चय धोखा है कहते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इससे पहले मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि हर घर नल का जल योजना की शुरूआत 27 सितम्बर 2016 को हुई थी। गांवों में पंचायती राज विभाग, शहरों में नगर विकास और आर्सेनिक फ्लोराइड से प्रभावित वाले इलाकों में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के माध्यम से इस योजना का क्रियान्वयन होना है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में पंचायती राज विभाग को 83 अरब 74 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। योजना के क्रियान्वयन के लिए वार्ड विकास समिति गठित की गई है। शिक्षण-प्रशिक्षण का काम चल रहा है। कागजी प्रक्रिया के बाद अब पंचायतों को राशि दे दी गई है। 2019-20 तक गांव के हर घर में नल से जल पहुंचा दिया जाएगा।

प्रश्नकर्ता सदस्य ने पूरक प्रश्न में जानना चाहा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में 15 दिन बाकी रह गया है। अब तक कितने ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचा और 15 दिनों में कितने घरों में पानी पहुंचेगा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. प्रेम कुमार, नंदकिशोर यादव व संजय सरावगी ने कहा कि सात निश्चय के बल पर सरकार ने जनादेश हासिल किया है। लेकिन मंत्री सवाल को टाल रहे हैं। रटा-रटाया जवाब पढ़ रहे हैं। सदस्यों ने सदन में मौजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस मसले पर जवाब देने की मांग की। विस अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार ने अपने जवाब में माना कि इसके क्रियान्वयन में देरी हुई है। पंचायतों को पैसा मिल गया है और अब काम शुरू होगा।

महागठबंधन में बिखराव चरम पर : सुमो

पटना(अपना बिहार, 16 मार्च 2017) - यूपी में भाजपा को मिली ऐतिहासिक जीत से गदगद पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि बिहार में जदयू-राजद और कांग्रेस का कथित महागठबंधन बिखराव् की ओर अग्रसर है। चार दिन पहले वैशाली के राधोपुर में आयोजित सरकारी कार्यक्रम से न केवल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर गायब थी बल्कि चारो तरफ राजद के झंडे लहरा रहे थे। राजद के अलावा सरकार में शामिल सहयोगी दल जदयू और कांग्रेस के किसी मंत्री और विधायक तक को कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया था। इसी प्रकार मुख्यमंत्री के यात्रा कार्यक्रम में भी कहीं उपमुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम आने के बाद लालू यादव के इशारे पर राजद के वरिष्ठ नेता और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. रघुवंश प्रसाद सिंह ने सपा-कांग्रेस गठबंधन की हार के लिए नीतीश कुमार को जिम्मेवार ठहराया। नोटबंदी के मुद्दे पर भी महागठबंधन के दल आपस में बंटे रहे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जहां नोटबंदी का समर्थन कर रहे थे वहीं कांग्रेस और राजद विरोध में धरना और प्रदर्शन के कार्यक्रम आयोजित कर रहे थे।

श्री मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव नतीजे आने के बाद नीतीश कुमार ने अपने स्टैंड को सही करार देते हुए कहा कि नोटबंदी का कड़ा विरोध करने के कारण ही सपा-कांग्रेस की इतनी बुरी हार हुई है। दरअसल महागठबंधन कई मुद्दों पर न केवल बंटा हुआ है बल्कि अब बिखराव की ओर भी बढ़ चला है। जो हालात पैदा हुए हैं वैसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए अपना कार्यकाल पूरा करना संभव नहीं लग रहा है।

आधार कार्ड से जोड़े जायेंगे लाभुक : मुख्यमंत्री

पटना(अपना बिहार, 16 मार्च 2017) - बिहार विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही होली की छुट्टी के बाद आज शुरू हो गयी. बक्सर के भाजपा जिलाध्यक्ष के साथ मारपीट के मुद्दे पर आज भाजपा सदस्यों ने विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. भाजपा नेता अरुण सिन्हा ने सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले कहा था कि वह अपने जिलाध्यक्ष के साथ हुई मारपीट को लेकर कार्य स्थगन प्रस्ताव लायेगी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज विधान परिषद में कहा कि फर्जी राशन कार्ड पर नियंत्रण के लिए उन्हें आधार कार्ड से जोड़ा जा रहा है. उन्होंने कहा कि दूसरे कई राज्यों में राशन कार्ड को आधार से जोड़ने का लाभ दिखा है. बताते चलें कि होली के अवकाश के पहले सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी थी. पटना का हाल का चर्चित सेक्स स्कैंडल सहित अन्य मुद्दों पर सदन में हंगामा होता रहा.

रघुवंश के बयान को राजद ने ही नकारा, राबड़ी देवी ने कहा - फूहड़ बयानबाजी छोड़ें महागठबंधन के नेतागण, तेजस्वी ने भी दी रघुवंश को चेतावनी

पटना(अपना बिहार, 16 मार्च 2017) - राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह की ओर से सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ दिये गये ताजा और आक्रामक बयान को लेकर पहली बार पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार की ओर से नाराजगी जाहिर की गयी है. रघुवंश प्रसाद की बयानबाजी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने बुधवार को प्रतिक्रिया देते हुए उनके बयान को फूहड़ बताया और कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता को महागठबंधन के खिलाफ ऐसा बयान नहीं देने चाहिये. वहीं उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने रघुवंश प्रसाद के ताजा बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आगे भी ऐसा बयान आया तो उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करूंगा.

राबड़ी देवी ने महागठबंधन नेताओं की ओर से जारी बयानबाजी के बीच जदयू नेताओं को भी बयान न देने की सलाह दी है. राबड़ी देवी ने कहा कि नीतीश कुमार नहीं बल्कि बिहार में भाजपा पीड़ा में है क्योंकि वो सत्ता में नहीं है. उन्होंने कहा कि भाजपा और उसके कुछ नेता सुशील मोदी और मंगल पांडेय जैसे नेताओं को सत्ता की पीड़ा है. राबड़ी देवी ने कहा कि हमारा गठबंधन मजबूत है जो किसी भी कीमत पर नहीं टूटेगा.

उल्लेखनीय है कि राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह सीएम नीतीश कुमार पर यूपी चुनाव के दौरान से ही लगातार हमलावर हैं. इसी कड़ी में वैशाली के महनार में उन्होंने कहा था कि यूपी चुनाव में मौन रह कर और केंद्र की नोटबंदी अभियान का समर्थन कर नीतीश कुमार ने महागठबंधन धर्म पालन नहीं किया है बल्कि भाजपा का समर्थन किया है जिसके चलते भाजपा की यूपी में अपार जीत हुई है.

शराबबंदी के नाम पर गरीबों पर कहर बरपा रही पुलिस : माले

पटना(अपना बिहार, 16 मार्च 2017) - भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि बिहार में आए दिन दलित-गरीबों-महिलाओं पर पुलिस और दबंगों का कहर लगातार बरप रहा है, लेकिन नीतीश सरकार इन सब घटनाओं की चिंता से मुक्त होकर शराबबंदी राग में मस्त है. होली के दरम्यान भी दबंगों व पुलिस के कहर से गरीबों को कोई राहत नहीं मिली.

एक तरफ शराबबंदी की आड़ में गरीबों पर पिछले कई महीनों से लगातार हमले किए जा रहे हैं, दूसरी ओर जब होली के समय शराब के नशे में धूत दबंगों और शराब विक्रेताओं ने महादलित गरीबों-महिलाओं पर जगह-जगह हमले किए तो नीतीश सरकार का प्रशासन कहीं नजर ही नहीं आया. फतुहा में होली के समय जब सतीश राम सहित अन्य महादलित युवकों ने अवैध शराब की बिक्री पर सवाल उठाया तो, शराब विक्रेताओं ने उन दोनों युवकों की बर्बर तरीके से पिटाई की. यह बिहार में कैसा शासन चल रहा है?

उन्होंने कहा कि पटना जिले के दुल्हिनबाजार के इचीपुर में होली के मौके पर गोइठा जैसे मामूली सवाल को लेकर महादलित महिलाआें के साथ दबंगों के इशारे पर दुल्हिनबाजार के थाना प्रभारी ने गंभीर रूप से मार-पिटाई की और कई के सर फाड़ दिए. पिटाई में 70 वर्षीय सुषमी देवी, मनोरमा देवी, बालकेश्वरी देवी सहित एक दर्जन से ज्यादा महिलाएं घायल हो गयीं. माले राज्य सचिव ने मांग की है कि दुल्हिनबाजार थाना प्रभारी को अविलंब हटाया जाए.

बिहटा के मुसेपुर पंचायत के चमरटोली में महिलाओं के साथ छेड़खानी का विरोध करने पर दबंगों ने दर्जन भर महादलित परिवारों का सर फाड़ दिया. इसी प्रकार, अरवल जिले के करपी के नेवना गांव में भी 14 मार्च को शराब के नशे में धूत राजद समर्थित दबंगों ने मुसहर जाति के टोला पर हमला बोल कर कई घरों में तोड़-फोड़ की, सुशील मांझी के घर में आग लगा दिया और उनकी बुरी तरह से पिटाई कर दी. सुशील मांझी फिलहाल पीएमसीएच में भर्ती हैं. इस हमले में कुल 10 लोग घायल हैं, 3 घरों के चापाकल तोड़ दिए गए, बर्तन भी तोड़ा गया. हमले में 4 महिलायें भी बुरी तरह जख्मी हुई हैं.

होमगार्ड जवानों को मिले सभी सुविधायें : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 16 मार्च 2017) - विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि राज्य की सेवा वर्षों से कर रहें बिहार रक्षा वाहिनी स्वयं सेवक संघ की मांगों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज तक नहीं मानने के कारण रक्षा वाहिनी की सड़कों पर उतरने को विवश हो चुकी हैं। सरकार इनकी सेवाएं वर्षों से ले रहीं हैं, लेकिन पुलिस को मिलने वाली सुविधाओं से इन्हें वचिंत रख कर उनके साथ अन्याय कर रहीं हैं। नेता प्रतिपक्ष ने विधान सभा में रक्षा वाहिनी का मामला उठाया और कहा कि सरकार उनकी मांगों को तत्काल मान लें।

डा. कुमार ने कहा कि रक्षा वाहिनी अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर दो चरणों में आंदोलन शुरू करने की घोषणा कर चुकी हैं, ऐसे में सरकार को तुरंत चाहिए की इनकी वर्षों से लंबित मांगों को तत्काल मान कर रक्षा वाहिनी के लोग को राज्य सरकार के पुलिस के समान काम समान सभी सुविधाएं दी जांए। देश में मध्यप्रदेश, हरियाण, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली सहित अन्य राज्यों में माननीय सर्वोच्य न्यालय व माननीय उच्य न्यायल के फैसले को लागू कर दिया है। समान काम समान वेतन को बिहार सरकार लागू करें।

डा. कुमार ने कहा कि माननीय सर्वोच्य न्यायलय व माननीय उच्य न्यायलय के फैसलों को लागू करें। रिक्त तृतीय व चतुर्थ वर्गिय पदों पर शत प्रतिशत गृह रक्षा वाहिनी की नियुक्ति की जाएं। सेवानिवृत गृह रक्षकों की एक मुस्त मिलनेवाली राशि एक लाख 50 हजार रुपये बढ़ा कर 10 लाख रुपये की जाएं तथा 10 वर्षों की प्रतिबंधन हटाया जाए।

डा. कुमार ने कहा कि रक्षा वाहिनी को सेवानिवृत की आयु सीमा 60 वर्ष की जाएं। 1990 से बकाये राशि का भुगतान सरकार तुरंत करें। मृत्य के पश्चात अनुग्रह राशि 4 लाख से बढ़ा कर 10 लाख रुपये दी जांए। रक्षा वाहिनी को प्रतिमाह 5 दिन का भत्ता सहित अवकाश दिया जाएं। रक्षा वहिनी की मांगों को सरकार तुरंत मान लें ताकी रक्षा वाहिनी के लोग आंदोलन पर न जाएं।

गोवा, मणिपुर में भाजपा ने किया जनादेश का अपहरण : सदानंद

पटना(अपना बिहार, 16 मार्च 2017) - प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र में बैठी भाजपा सरकार ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर गोवा और मणिपुर में जनादेश का अपहरण किया है। इन दो राज्यों के राज्यपालों ने केंद्र के प्रतिनिधि के बदले भाजपा के प्रतिनिधि के रूप में काम किया है। इससे गोवा, मणिपुर के लोकमत का अपमान हुआ है।

श्री सिंह ने कहा कि किसी राज्य के विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलती है तो ऐसी स्थिति में सरकारिया आयोग ने स्पष्ट रूप उस राज्य के राज्यपाल के हाथों में तीन विकल्प दिया है। पहला, कि कोई चुनाव पूर्व गठबंधन है और उसे ज्यादा सीटें मिली हैं तो उसे सरकार बनाने के लिए बुलाया जायेगा। दूसरा, यदि ऐसा नहीं है तो सबसे बड़ी पार्टी को बुलाया जायेगा। तीसरा, चुनाव बाद किये गए गठबंधन को बुलाने का प्रावधान किया गया है। सभी जानते हैं कि गोवा, मणिपुर में पहला विकल्प नहीं हैे दूसरे विकल्प में दोनों जगह कांग्रेस सबसे ज्यादा सीटें जीतकर बड़ी पार्टी है; जिसे दोनों राज्यों के राज्यपालों को सरकार बनाने के लिए बुलाना चाहिए। लेकिन दूसरे विकल्प के मौजूद होते हुए भी वहाँ के राज्यपालों ने तीसरे विकल्प में भाजपा को आमंत्रण देकर जनादेश की धज्जियाँ उड़ा दी।

श्री सिंह ने कहा कि गोवा में तो भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर दो जगहों से चुनाव हारे उनके कैबिनेट के छ: मंत्री भी हार गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि गोवा में भाजपा के खिलाफ जनादेश है। बावजूद इसके जनादेश का हरण कर पुन: भाजपा की सरकार बना दी गई। मणिपुर में भी भाजपा ने वही किया है, जो प्रजातांत्रित व्यवस्था पर कुठाराघात है।

रेशम उत्पादन को बढ़ावा देगी सरकार

पटना(अपना बिहार, 12 मार्च 2017) - राज्य में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार मुख्यमंत्री तसर विकास परियोजना के तहत पुख्ता कदम उठा रही है। इसके लिए वन विभाग द्वारा वन भूमि पर लगाए गए तसर पौधों के संपोषण कार्य पर 7.74 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इतनी राशि की मंजूरी चालू वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए दी गई है। योजना का एक मकसद रेशम उद्योग के मानचित्र पर बिहार को लाना भी है। उत्तम कोटि के रेशम वस्त्रों में बिहार के तसर धागों की काफी मांग है। जारी राशि अलग-अलग चरणों में लगाए गए तसर के पौधों के संपोषण कार्य पर खर्च होगी। इसमें वर्ष 2014-15 में लगाए गए तसर पौधों के 2015-16 में पहले संपोषण की बकाया राशि भी शामिल है। इसके लिए 2.46 करोड़ रुपए दिए गए हैं। यह राशि 4170 हेक्टेयर में लगाए जाने वाले शेष पौधों पर व्यय की जाएगी। वहीं, वर्ष 2016-17 में लगाए गए कुल तसर पौधों का वर्तमान वित्तीय वर्ष में दूसरे संपोषण के लिए 3 करोड़ रुपए दिए गए हैं।

नीतीश ने दिया महागठबंधन को धोखा : रघुवंश

पटना(अपना बिहार, 12 मार्च 2017) - उत्तर प्रदेश में चुनाव के नतीजों के ठीक बाद राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बड़ा हमला बोला है. रघुवंश प्रसाद ने मीडिया से बातचीत में नीतीश पर धोखा देने का आरोप लगाया है. रघुवंश ने साफ कहा कि पहले तो नोटबंदी पर नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की, फिर उन्होंने उत्तरप्रदेश चुनाव में बीजेपी की मदद की. डा. सिंह ने कहा कि नीतीश ने यूपी ने चुनाव प्रचार ना कर लोगों को गुमराह किया और जनता को सीधे धोखा देने का काम किया.

वहीं रघुवंश प्रसाद के बयान के बाद जदयू ने भी पलटवार किया है. जदयू का साफ कहना है कि नीतीश कुमार को यूपी में बने महागठबंधन में शामिल नहीं किया गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जदयू के नेता श्याम रजक ने आरोप लगाते हुए कहा है कि यूपी में जो संगठन बना और जो रणनीति बनी, उसमें नीतीश कुमार को शामिल नहीं किया गया. जदयू की ओर से कहा गया कि यूपी चुनाव के लिये शरद यादव ने काफी कोशिशें की लेकिन लोगों ने सीधे नाकार दिया. वहीं जदयू प्रवक्ता और विधान पार्षद संजय सिंह ने कहा कि महागठबंधन के चुनाव से बाहर रहने के कारण यूपी में बीजेपी को यह जीत मिली है.

पटना में बनेगा अमर शहीद जुब्बा सहनी के नाम पर पार्क, मुख्यमंत्री ने की घोषणा

पटना(अपना बिहार, 12 मार्च 2017) - अमर शहीद जुब्बा सहनी की 73वीं शहादत दिवस के अवसर पर रविन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने शहीद जुब्बा सहनी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद जुब्बा सहनी की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में हम सब यहॉ शहीद जुब्बा सहनी की शहादत को याद करने एवं उनके प्रति आदर प्रकट करने के लिये उपस्थित हुये हैं। उन्होंने कहा कि जुब्बा सहनी कम उम्र में ही आजादी की लड़ाई के तरफ आकर्षित हुये थे। उनमें आत्मसम्मान का आभास था। उनके जीवन का उदाहरण देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी भी अंग्रेजों के अत्याचार को बर्दाश्त नहीं किया। उन्होंने आजादी की लड़ाई के अनेक कार्यक्रमों में भाग लिया। 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में उनके योगदान को हमेषा याद रखा जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान मीनापुर थाना के दारोगा वॉलर हुआ करते थे। मीनापुर थाना के समक्ष गोली लगने से एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर प्रदर्शन किया जा रहा था। जुब्बा सहनी के नेतृत्व में लोग थाना के चारों तरफ जमा हो गये। लोगों द्वारा थाना को घेर लिया गया तथा थाना के फर्निचर के साथ-साथ थाना में आग लगा दी गयी। दारोगा वॉलर का हथियार भी छिन लिया गया तथा दारोगा वॉलर को बॉधकर आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना के बाद अंगे्रजों द्वारा लोगों पर काफी अत्याचार किया गया। इस घटना के लिये बहुत सारे लोगों पर मुकदमा चला परंतु जुब्बा सहनी गिरफ्तार नहीं किये जा सके। जुब्बा सहनी ने स्वयं कोर्ट में उपस्थित होकर हाजिरी दी तथा कहा कि मैंने ही दारोगा वॉलर को जलाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद जुब्बा सहनी विचार से गॉधीवादी थे। उन्होंने जो किया, उसे स्वीकार किया। उन्होंने सच्ची बात कबूल की। उन पर मुकदमा चला तथा उन्हें फॉसी पर चढ़ा दिया गया। 11 मार्च को ही उनको फॉसी दी गयी थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी को ऐसे लोगों से सीखना चाहिये। हमें आजादी मिली है, यह ऐसे ही नहीं मिली है। इसके लिये अनेक शहीद हुये, अनेक ने जेल की यात्रा की। लोगों ने कुर्बानियॉ दी, यात्नायें सही, तब जाकर हमें आजादी मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी की लड़ाई के दो मुख्य मूल्य थे- न्याय और सम्मान का। इससे कभी समझौता नहीं करना चाहिये। हम सभी को जुब्बा सहनी से सीख लेनी चाहिये। यह बिहार के लिये गौरव की बात है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2015 में राज्य सरकार की तरफ से निषाद समाज के सभी सहजातियों को एक साथ करते हुये उनको अनुसूचित जनजाति में शामिल करने हेतु केन्द्र को अनुशंसा भेजी गयी थी। भारत सरकार ने इस पर सर्व कराने के लिये कहा है। ए.एन. सिन्हा इन्स्टीच्यूट को सर्वे करने की जिम्मेवारी दी गयी है। संस्थान द्वारा सर्वे किया जा रहा है। संस्थान को जल्द से जल्द सर्वे का कार्य पूरा करने के लिये कहा गया है। उन्होंने कहा कि हम अपना काम पूरी प्रतिबद्धता से करते हैं। हम जो कहते हैं, उसे करते हैं। 2015 में महिलाओं की आवाज पर शराबबंदी लागू किया। उस पर लगे रहते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले अमर शहीद जुब्बा सहनी से संबंधित समाचार अखबार में पढ़ा कि शहीद सहनी के वंशज भूखे रहने को मजबूर हैं। हमने तुरंत कार्रवाई करने को कहा। शहीद जुब्बा सहनी के वंशज मुनिया देवी को डॉक्टर द्वारा देखा जा रहा है। वे पीएमसीएच के आईसीयू में भर्ती हैं। हमने जिलाधिकारी से कहा है कि शहीद जुब्बा सहनी के परिवार के बारे में पूरी जानकारी लें। अगर परिवार का कोई सदस्य अभाव में होगा तो सरकार उसको दूर करने का पूरा प्रयास करेगी। जो भी संभव हो सकेगा, हम सहयोग करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पटना में एक पार्क का नामांकरण शहीद जुब्बा सहनी के नाम पर किया जायेगा। साथ ही उस पार्क में शहीद जुब्बा सहनी की मूर्ति लगेगी। आयोजित कार्यक्रम को वित मंत्री अब्दुलबारी सिद्दीकी, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन सहनी, सहकारिता मंत्री आलोक मेहता सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधायक विद्यासागर सिंह निषाद, विधान पार्षद ललन सर्राफ सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने दी होली की बधाई

पटना(अपना बिहार, 12 मार्च 2017) - राज्यपाल रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यवासियों को होली की शुभकामनायें दी और आशा व्यक्त किया कि होली का यह पवित्र त्योहार राज्यवासियों की जिन्दगी में खुशियों का नया रंग लेकर आयेगा और राज्य एवं राज्यवासियों की जिन्दगी में खुशहाली आयेगी। राज्यपाल श्री कोविन्द ने अपने शुभकामना-संदेश में कहा है कि उमंग और उल्लास के इस पावन पर्व के दिन हम आपसी रंजिषों को भूलकर प्रेम और सद्भाव के रंगों में रंग जाते हैं। इस त्योहार से हमारी सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता सुदृढ़ होती है। वहीं अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि बुराई पर अच्छाई के विजय का प्रतीक यह पवित्र त्योहार होली एक अद्भूत त्योहार है। इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लोग एक दूसरे के प्रति प्रेम-सद्भाव का व्यवहार बिना किसी भेदभाव के करते हैं। लोग आपस में मिलकर खुशियाँ बाँटते है। होली सामाजिक समरसता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से होली का त्योहार पारस्परिक प्रेम, आपसी भाईचारा एवं सामाजिक सद्भाव के साथ मनाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग होली के त्योहार को आपसी मेल-जोल, भाईचारा और सदभाव के वातावरण में मिलजुल कर मनायें और होली की खुशियों को आपस में मिल कर बॉटें।

जीत से भाजपा गदगद, महागठबंधन खेमे में उदासी, विरोधी मतों में बिखराव से भाजपा को मिली सफलता : अशोक

पटना(अपना बिहार, 12 मार्च 2017) - यूपी चुनाव में मिली करारी हार को बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सह शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी ने स्वीकार कर लिया है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा विरोधी मतों के बिखराव से भाजपा को सफलता मिली है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बहन मायावती एवं आरएलडी के बीच भाजपा विरोधी मतों का बँटवारा हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान उत्तर प्रदेश में सपा - कांग्रेस के गठबन्धन की हार की गहन समीक्षा कर कांग्रेसजनों को उचित दिशा निदेश देगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हार-जीत लगी रहती है तथा सभी राजनैतिक दलों को इसे जनता की आवाज जानकर विनम्रता से स्वीकार करना चाहिये। उन्होंने कहा कि 1984 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सारे देश में केवल दो ही क्षेत्रों में सफलता मिली थी तथा कांग्रेस पार्टी को 400 से अधिक सीटों पर स्व. राजीव गाँधी के नेतृत्व में सफलता मिली थी।

डा. चौधरी ने कहा कि पंजाब विधान सभा में कांग्रेस की शानदार जीत हुई है तथा गोवा एवं मणिपुर में भी कांग्रेस अबतक की गणना के अनुसार बढ़त बनाये हुए है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड के चुनाव परिणाम को कांग्रेसजनों को विनम्रता पूर्वक स्वीकार कर, अपनी खामियों को दूर कर फिर नई ऊर्जा से जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में लग जाना चाहिये।

नमो के कारण भाजपा को मिली जीत : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 12 मार्च 2017) - बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा है कि पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लहर से भाजपा की अपार जीत हुई है और अब साल 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार देश में बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि यूपी, उत्तराखंड, गोवा व मणीपुर में भाजपा की जीत नमो लहर का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को कोटी-कोटी बधाई। पूरे देश में नमो लहर चल रहीं है। पूरा देश अब कांग्रेस मुक्त भारत बनाना चाह रहीं है। डा. कुमार ने कहा कि केन्द्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार लगभग तीन सालों में पूरे देश के अंदर जो विकास का काम किया है, यह जीत उन्हीं का परिणाम है। गांव-गांव में विकास हो रहीं है। देश के अंदर कालेधन, भ्रष्टाचार व आतंकवादियों को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री जी ने नोटबंदी लगाया था, उसे जनमत ने पूरा समर्थन दिया है।

डा. कुमार ने कहा कि अब बिहार की बारी है, जब भाजपा गठबंधन यहां भी पूर्ण बहुमत की सरकार बनायेंगी। जनता को अब सिर्फ भाजपा के सब का साथ, सब का विकास पर ही भरोसा है। जो दल जनता के साथ धोखा देने का काम कर रहीं हैं, उन्हें जनता अब नकार रहीं है।

नक्सलियों ने किया दुस्साहस, इश्तेहार चिपका दी पुलिस को खुली चुनौती

नवादा/पटना(अपना बिहार, 11 मार्च 2017) - हाल में हुए अर्धसैनिक बलों के आॅपरेशन में मारे गये चार नक्सलियों का बदला लेने के लिये नक्सली संगठन बौखलाये हुए हैं. मिली जानकारी के मुताबिक बिहार के नवादा जिले में गुरुवार देर रात नक्सलियों ने एक मध्य विद्यालय पर इससे संबंधित परचा चिपकाया और प्रशासन को खुली चेतावनी दी. नक्सलियों ने पर्चा में साफ लिखा है कि पुलिस की मदद करने वाले और मुखबिरी करने वालों को मौत की सजा देंगे. गांववालों के लिये अघोषित रूप से मौत का फरमान जारी करते हुए नक्सलियों ने परचा चिपकाया है. पर्चा को पुलिस ने सूचना के बाद बरामद कर लिया. हालांकि इस घटना के बाद नवादा के सिरदला थाना के कुशाहन गांव में दहशत का आलम है.

बताते चलें कि हाल में अर्धसैनिक बलों ने नवादा और गया की सीमा पर नक्सलियों से हुए मुठभेड़ में चार नक्सलियों को मार गिराया था. अब नक्सली संगठनों ने अपने साथियों की मौत का बदला लेने का एलान किया है. पर्चा से स्पष्ट है कि कुशाहन गांव के लोगों ने नक्सलियों के बारे में पुलिस को गुप्त सूचना दी थी. नक्सलियों ने पर्चा में लिखा है कि गांववालों से उन्हें कोई मतलब नहीं है लेकिन वे गद्दारों को सजा जरूर देंगे. नक्सलियों ने अपने शहीद साथियों के परिजनों के लिये मुआवजे का भी एलान किया है. घटना के बाद प्रशासन ने सभी संबंधित थानों को अलर्ट भेज दिया है.

राजेंद्र मेनन बने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

पटना(अपना बिहार, 11 मार्च 2017) - मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन पटना हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किये गए हैं। केन्द्रीय विधि विभाग ने इस आशय की अधिसूचना जारी कर दी है। वहीं, पटना हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता मध्यप्रदेश के नए मुख्य न्यायाधीश बनाए गए हैं। जबकि पटना हाईकोर्ट के एक अन्य जज न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह केरल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए हैं।

जदयू के प्रदेश कार्यालय में खेली गयी होली

पटना(अपना बिहार, 11 मार्च 2017) - जदयू के प्रदेश कार्यालय में अवस्थित युवा वाटिका में युवा जदयू की ओर से आयोजित होली मिलन समारोह में यह नजारा था। मंत्री से लेकर विधायक, विधान पार्षद व नेताओं का जमावड़ा लगा। सबों ने एक-दूसरे को रंग-अबीर लगाए, मिष्ठान्न खाए और प्रदेशवासियों से अमन-चैन से होली मनाने की अपील भी की। युवा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुशवाहा की अगुवाई में आयोजित होली मिलन समारोह में सांस्कृतिक मंडली की ओर से राधे-कृष्ण, सुदामा की आकर्षक झांकी निकाली गई। समारोह में नगर विकास मंत्री महेश्वर हजारी व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह, विधायक वशिष्ठ सिंह, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, पूर्व सांसद मीना सिंह, प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद, नवल शर्मा, निखिल मंडल व अरविन्द निषाद, प्रदेश महासचिव डॉ. नवीन कुमार आर्य, युवा जदयू के प्रवक्ता ओमप्रकाश सिंह सेतु, महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष अंजुम आरा, नंदकिशोर कुशवाहा, डॉ. निहोरा प्रसाद यादव, हुलेश मांझी, शगुन सिंह, राघव धर्मेन्द्र सिंह आदि उपस्थित थे।

युवा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी नेताओं को अंगवस्त्र से सम्मानित किया। कार्यक्रम में गरीब महिलाओं को वस्त्र दिए गए। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि शराबबंदी के बाद बिहार की यह पहली होली है। बिहारवासी प्रदेश को नशामुक्त बनाने का संकल्प लेकर सामाजिक सौहार्द के साथ शांतिपूर्ण होली मनाएं।

पूर्वानुमानों के रंग में रंगी रही सूबे की सियासत

पटना(अपना बिहार, 11 मार्च 2017) - देश के पांच राज्यों में संपन्न हुए चुनाव की पूर्णाहूति शनिवार को मतगणना के साथ हो जाएगी। यह तभी तय हो पायेगा कि किस राज्य में किसकी सरकार बनेगी और कौन विपक्ष में बैठेगा। लेकिन एग्जिट पोल के पूर्वानुमानों ने बिहार की राजनीति को अपने रंगों में रंग दिया। हालांकि पिछली बार मिले अनुभवों से सीखते हुए भाजपा ने इस बार जश्न मनाने में कंजूसी दिखाायी। भाजपा के प्रदेश कार्यालय में जश्न मनाने से परहेज किया गया। अधिकांश नेतागण पूर्वानुमानों का पोस्टमार्टम करने में दिन भर लगे। इन सबके बीच नेताओं के चेहरे पर संभावित जीत की खुशी भी झलक रही थी।

वहीं राजद खेमे में माहौल सामान्य रहा। हालांकि वहां भी बातचीत के केंद्र में यूपी चुनाव का पूर्वानुमान ही रहा। हालांकि अधिकांश राजद कार्यकर्ता और नेता यह कहते नजर आये कि यूपी में बिहार वाला परिणाम सामने आयेगा। उनका कहना था कि जिस तरह से बिहार चुनाव के पहले एग्जिट पोल के परिणामों में भाजपा को बढ़त दिखायी जा रही थी और भाजपा के लोग जश्न मनाने में जुटे थे, जबकि मतगणना के पहले चरण पोस्टल बैलेट की गिनती में मिली बढ़त के बाद वे पटाखे भी फोड़ने लगे थे लेकिन जैसे-जैसे गिनती बढ़ती गयी वे जीत से दूर होते गये। राजद के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन के अनुसार इस बार भी भाजपा को मुंह की खानी पड़ेगी।

राजद और भाजपा से अलग जदयू के प्रदेश कार्यालय का नजारा एकदम अलग रहा। जदयू कार्यकर्ताओं ने जमकर होली खेली। इस मौके पर पकवान और होली के गीतों के बीच यूपी चुनाव की चर्चा भी जोरों पर रही। अधिकांश नेता भाजपा की हार की भविष्यवाणी करते नजर आये।

बहरहाल यूपी सहित देश के पांच राज्यों में शनिवार को होने वाली मतगणना को लेकर उत्साह सोशल मीडिया पर भी दिखा। जहां एक ओर भाजपा समर्थक पूर्वानुमानों को लेकर उत्साह से लबरेज रहे तो उनके विरोधी खेमे के लोग यह दलील देने में व्यस्त रहे कि एक्जिट पोल में जीत हर बार भाजपा को ही मिलती है और इसकी वजह देश की मीडिया पर उसका अघोषित एकाधिकार है। हालांकि कई ऐसे भी नजर आये जिन्हें पूर्वानमुमानों में सत्यता प्रभावित कर रही थी और वे सपा और कांग्रेस को आत्ममंथन की सलाह दे रहे थे।

विप चुनाव के लिए 63 फीसदी मतदान, 15 मार्च को होगी मतों की गिनती

पटना (अपना बिहार, 10 मार्च 2017) - बिहार विधान परिषद की चार सीटों के लिए औसतन 63 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान के साथ ही चुनाव में शामिल 52 उम्मीदवारों का भाग्य मतपेटी में बंद हो गया। सभी चारों सीटों के लिए मतगणना 15 मार्च को होगी। कोसी शिक्षक क्षेत्र के लिए सर्वाधिक 87 प्रतिशत मतदान निर्वाचन आयोग के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए सर्वाधिक 87 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं, गया स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 49 प्रतिशत, गया शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 58 प्रतिशत तथा सारण स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 56 प्रतिशत मतदान हुआ। निर्वाचन आयोग के अनुसार सभी निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। किसी भी जिले से मतदान को लेकर किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। सभी प्रमुख दलों के नेता हैं चुनाव मैदान में सभी चार सीटों के चुनाव में राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता चुनाव मैदान में हैं। इनमें विधान परिषद के सभापति व भाजपा प्रत्याशी अवधेश नारायण सिंह व प्रो. जगदीशचंद्र, जदयू के वीरेंद्र नारायण यादव व संजीव कुमार सिंह, कांग्रेस प्रत्याशी अजय कुमार सिंह व हृदय नारायण यादव, राजद प्रत्याशी पुनीत कुमार व दिनेश प्रसाद यादव, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के संजीव श्याम सिंह, लोजपा के डॉ. डीएन सिन्हा, हम पार्टी के डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह सहित अन्य प्रमुख प्रत्याशी शामिल हैं।

आरक्षण बचाने को एकजुटता जरूरी : मुख्यमंत्री, राजद प्रमुख ने कहा - गरीब गुरबों का हौसला बढ़ाते थे रामलखन बाबू, सामाजिक विकास में रामलखन यादव की भूमिका महत्वपूर्ण

पटना (अपना बिहार, 10 मार्च 2017) - भूतपूर्व मंत्री रामलखन यादव को कृतज्ञ बिहार ने गुरूवार को उनकी जयंती के मौके पर श्रद्धांजलि दी। पटना में श्री कृष्ण चेतना परिषद में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार की प्रगति, सामाजिक उत्थान एवं सामाजिक चेतना जागृत करने में स्व. रामलखन सिंह यादव का जो योगदान रहा है, उसे भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि राज्य में आधारभूत संरचनाओं को विकसित करने में भी उनका अमूल्य योगदान था। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी रामलखन बाबू का अविस्मरणीय योगदान था। समाज के पिछड़े वर्ग के लोग शिक्षा के क्षेत्र में काफी पिछे थे। उन्होंने कहा कि रामलखन बाबू ने शिक्षा के प्रति प्रेरणा जगायी। उनके नाम पर दर्जनों विद्यालय एवं महाविद्यालय स्थापित हुये। उन्होंने कहा कि समाज की तरक्की बिना शिक्षा के संभव नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. रामलखन सिंह यादव जी के संबंध में बाल्यकाल एवं युवावस्था से ही सुनने और जानने का अवसर मिला। बाद में बहुत करीब से उनके विचारों एवं मान्यताओं से अवगत होने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि जब 1985 में मैं पहली बार विधायक बना तो विधानसभा की एक कमिटी बनी थी, जिसके अध्यक्ष स्व. रामलखन सिंह यादव थे। उन्होंने कहा कि पॉच सदस्यीय कमिटी में एक सदस्य मैं भी था। यह कमिटी एक मामले की जॉच के लिये बनी थी। इस दौरान उनके काम को नजदीक से देखने का अवसर मिला कि वे किस गहराई एवं सूक्ष्म तरीके से काम करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के नवनिर्माण में भी रामलखन बाबू की जबर्दस्त भूमिका थी। आजादी की लड़ाई में तो उनकी भूमिका थी ही, कॉग्रेस पार्टी को मजबूत आधार देने में भी उनकी भूमिका रही। उन्होंने कहा कि रामलखन सिंह यादव कॉग्रेस के साथ थे किन्तु जब उन्हें लगा कि कॉग्रेस द्वारा उनकी योग्यता को नजर अंदाज किया गया तो जनता दल की ओर से 1991 में चुनाव लड़े और विजयी हुये। उनके स्वभाव में स्नेह था और युवा पीढ़ी को आगे बढ़ाने की ललक थी। उनसे बहुत कुछ सीखने एवं समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि बिहार के बुनियादी ढ़ॉचे को विकसित करने में उनका काफी योगदान था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामलखन सिंह यादव ने अपने सार्वजनिक जीवन में राज्य को अपने स्तर से जितना बढ़ाने की कोशिश की, उसे हमलोग और आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी जिनके हाथों में शक्ति है और जिनका आरक्षण पर निगाह है, इसके लिये सामाजिक एकरूपता एवं एकजुटता बनी रहनी चाहिये। उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ों और जनजाति को जो अधिकार है, उस पर कोई आघात न हो। उन्होंने कहा कि समाज को बॉटने की कोशिश नही होनी चाहिये बल्कि सौहार्द्र एवं प्रेम की कोशिश होनी चाहिये।

इस मौके पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि रामलखन बाबू गरीब-गुरबों के नेता थे। उन्होंने उस समय गरीब-गुरबों को ताकत दी थी जब सूबे में सामंती ताकतें शीर्ष पर थीं। उन्होंने कहा कि स्व. यादव ने जहां एक ओर अपनी राजनीतिक मुहिम को जारी रखा तो दूसरी ओर उन्होंने शिक्षा के जरिए वंचित समाज को आगे लाने का काम किया। आरक्षण पर किये जा रहे हमले की चर्चा करते हुए श्री प्रसाद ने कहा कि शोषक वंचितों के अधिकारों को छीन लेना चाहते हैं, लेकिन ऐसा होने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा आरएसएस की गोद में बैठकर देश को तबाह करने पर तुली है।

इस अवसर पर आयोजित समारोह को पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री अवधेश कुमार सिंह, न्यायमूर्ति राजेन्द्र प्रसाद सिंह, पूर्व सांसद प्रकाश चन्द्र, विधायक राजवर्द्धन, विधायक रविन्द्र यादव, विधायक श्याम रजक, विधायक भोला यादव, विधायक रेखा देवी, विधान पार्षद एवं जदयू प्रवक्ता नेता संजय सिंह,पूर्व विधान पार्षद गुलाम गौस राजद के पटना जिला अध्यक्ष देवमुनी सिंह यादव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

बिहार में महागठबंधन अटूट : लालू

पटना (अपना बिहार, 10 मार्च 2017) - राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा है कि महागंठबंधन में चट्टानी एकता है. लोग कहते थे कि महागंठबंधन की सरकार नहीं चलेगी. विधानसभा चुनाव के समय न राजद का वोट जदयू को मिलेगा, न जदयू का वोट राजद को, लेकिन सब कुछ गलत साबित हुआ. महागंठबंधन के खिलाफ जितनी छेनी लगेगी, महागंठबंधन उतनी ही मजबूत होगी और निखरेगी. रामलखन सिंह यादव की जयंती समारोह में श्री प्रसाद ने कहा कि उनकी ओर से कोई तकलीफ नहीं है. महागंठबंधन की सरकार से पूरी जनता खुश है. सरकार इसी तरीके से काम करती रहेगी. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि जब से मेरे छोटे भाई नीतीश जो भी कटुता थी उसे खत्म करके आये तो नीतीश-लालू की जोड़ी का संदेश गया है. हमारी शक्ति के साथ कोई दूसरी शक्ति मुकाबले को तैयार नहीं है. लोगों ने महागंठबंधन को भरोसा दिया है. हमें उस पर खरा उतना है. लालू प्रसाद ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय हमने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया. वे सरकार बनने के बाद रात-दिन महागंठबंधन का जो कमिटमेंट है उसे पूरा कर रहे हैं. घरों तक पीने का पानी, शौचालय, सड़क, बिजली पहुंचाने का काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि रामलखन सिंह यादव के आदर्शों को अपनाने और उस पर चलने का आह्वान भी किया. लालू ने कहा कि हमलोग जो राजनीति में है उसमें रामलखन सिंह यादव का बड़ा योगदान है. उन्हें शेर ए बिहार कहा जाता था. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अद्भूत काम किया. न सिर्फ स्कूल-कॉलेज खोले, बल्कि युवाओं को पढ़ने के लिए प्रेरित किया.

शराब पकड़े जाने पर जलायी जायेंगी गाड़ियां, मद्य निषेध मंत्री ने किया एलान

पटना (अपना बिहार, 10 मार्च 2017) - सूबे मद्य निषेध म