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जब हाजत पहुँच गये जननायक

- डा. निहोरा प्रसाद यादव

बात १९८२ की है। पूरे बिहार में सुखाड़ से अकाल पड़ गया था। इस अवस्था में पूरे देश के प्रेजायडिंग आॅफिसर्स का सम्मेलन बिहार में रखा गया था । इस सम्मेलन में करोडों रुपये पानी की तरह बहाये जा रहे थे। पटना को दुल्हन की तरह सजाया गया था। एक तरफ अकाल से बिहार की जनता परेशान थी वहीं दूसरी तरफ सम्मेलन पर पैसे पानी की तरह बहाए जा रहे थे। ऐसा महसूस हो रहा था कि यह सम्मेलन अकाल पीड़ितों को चिढ़ा रहा हो।

सरकार को सूचना थी कि ऐसे समय में कराये जा रहे सम्मेलन का विरोध हो सकता है। इसलिए पटना प्रशासन को सख्त निर्देश था कि ऐसी व्यवस्था की जाय ताकि इसके विरोध में परिन्दा भी पंख न मार सके। चारों तरफ प्रशासन सर्तक। जिन दलों एवं नेताओं पर संदेह था उस पर प्रशासन की कड़ी नजरे थी। ऐसी स्थिति में इस सम्मेलन का विरोध करना काफी कठिन कार्य हो गया था। जहाँ कहीं चार पांच कार्यकर्ता एकत्रित देखे जाते प्रशासन वहां पर मौजूद हो जाता। मुझे युवा लोक दल में महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। हमने भी मन बना लिया था कि चाहे जो भी परिणाम हो जनहित में इस सम्मेलन का विरोध आवश्यक है े ताकि संदेश बिहार के आम आवाम में जाये कि बिहार के इस संकट कि स्थिति में किस तरह संकट से उवारने के बजाय अनावश्यक रूप से करोडों रूपयों का खर्च किया जा रहा है।

उस दिन दिनभर हमलोग भी चौकस रहे। कहाँ और किस तरह विरोध किया जाय। नीतियाँ तय करते रहे। तय हुआ कि सूर्यास्त होते ही हम सभी एक-एक कर जीपीओ गोलंबर के पास इकठठे होंगे, क्योकि संध्या समय प्रशासन भी मान लेगा कि अब विरोध नहीं होगा। इसी नीति क तहत हमलोग सैकड़ों की संख्या में एकत्रित हुए। वहीं से सम्मेलन के विरोध में नारा लगते आगे बढ़ने लगे ज्योही थोडा कदम आगे बढे प्रशासन आकर घेरे में लेकर गिरफ्तार कर ली। कोतवाली थाना लाया गया। अपराधियों की तरह हाजत में डाल दिया गया। रात भर हाजत में ही रहे जब कर्पूरी ठाकुर को जानकारी मिली कि हम लोगों को हाजत में बंद रखा है ? प्रात: काल अचानक कर्पूरी जी हाजत के सामने खड़े दिखे। विश्वास नहीं हो रहा था कि इतने बड़े राजनेता हाजत के सामने आकर हमलोगों की पीड़ा को सहलायेंगे। ऐसा सोचा भी नहीं था। बड़े भावुक मन से उन्होंने कहा कि आपलोगों को हाजत में बंद कर दिया गया है यह न्यायोचित नहीं है।

जो नेता कार्यकतार्ओं के पीड़ा में शामिल होने हाजत पहुंच जाय, वह मामूली नहीं महान नेता हो सकते हैं। उनके इस व्यवहार से कार्यकर्ताओं के प्रति आगाध प्रेम झलकता था। कार्यकर्तार्ओं की पीड़ा देखने के बाद कर्पूरी जी के चेहरे पर पीड़ा स्पष्ट दिखाई देने लगती थी। हर संभव उनके पीड़ा को दूर करने की कोशिश करते थे। यही कारण रहा की कार्यकर्ता कर्पूरी जी को मात्र नेता ही नहीं अभिभावक भी मानते थे।

दृढ निश्चयी बिहार का दृढ निश्चय

- प्रवीण बागी

कौन कहता है आकाश में सुराख हो नहीं सकता / एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों । दुष्यंत कुमार की ये कालजयी पंक्तियाँ बिहार में शराबबंदी के पक्ष में बनी मानव श्रंखला को देखकर दिमाग में अनायास ही कौंध गई। 21 जनवरी 17 को बनी यह मानव श्रृंखला अभूतपूर्व और ऐतिहासिक थी। बिहार जैसे राज्य में शराबबंदी के पक्ष में 3 करोड़ से ज्यादा लोगों का सड़क पर आना किसी चमत्कार से कम नहीं। बिहार में ऐसे चमत्कार होते रहते हैं। ऐसे चमत्कार यह उम्मीद जगाते हैं कि बिहार भी बदल सकता है। बशर्ते कोई सही नेतृत्वकर्त्ता मिले।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वह कर दिखाया जो दुनिया में आज तक नहीं हुआ था।

कहते हैं कि आजतक दुनिया में इतनी लंबी और इतने अधिक लोगों की मानव श्रृंखला नहीं बनी थी। नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई शराबबंदी की मुहिम को सभी दलों ने समर्थन दिया। हाल में अपने पटना दौरे के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी नीतीश की इस मुहिम का पुरजोर समर्थन किया। इससे शराबबंदी के अभियान को और बल मिला। जब नीतीश कुमार ने शराबबंदी लागू की थी ,उस समय अलग -अलग वजहों से इसकी आलोचना की जा रही थी। लेकिन नीतीश आलोचनाओं से घबराये नहीं, डटे रहे। अपनी हर सभा में शराबबंदी के पक्ष में दलीलें देते रहे। इसका असर भी हुआ। शराबबंदी से गांवों में भी माहौल बदला।लोगों को समझ में आने लगा की शराब से फायदा नहीं है। और फिर कारवां बढ़ता गया। जिसका नतीजा 21 जनवरी को दिखा।

यह मानव श्रृंखला 11 हजार 400 किलोमीटर लंबी थी। हालाँकि कई जगह लोग दो -दो -तीन -तीन लाइन लगाए हुए थे। 45 मिनट से अधिक समय तक पूरे बिहार में लोग एक दूसरे का हाथ पकडे खड़े रहे। पटना के गांधी मैदान में नीतीश कुमार लालू प्रसाद का हाथ पकडे मानव श्रृंखला का हिस्सा बने। उधर सिवान में केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ,बीजेपी नेता सुशील मोदी, विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रेम कुमार ,सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल आदि नेता मानव श्रृंखला का हिस्सा बने।

आम लोगों में उत्साह था। पश्चिम चंपारण में एक डेयरी संचालक जय सिंह और यश सिंह ने ने 600 लीटर दूध की चाय बनाकर मानव श्रृंखला में शामिल लोगों को मुफ्त में पिलाई । यह भाव बता रहा था कि बिहार में अब शराब का दौर गुजरे जमाने की बात हो गई है। हालांकि कई जगह कुछ बच्चे -बच्चियां बेहोश हो गए। शुक्र है की इलाज से वे तुरंत ठीक हो गए।

इस ऐतिहासिक घटना को रिकार्ड करने के लिए 5 सेटेलाइटों से तस्वीर ली गई। इसके अलावा 40 ड्रोन ,कई हेलीकॉप्टर भी इस काम में लगे हुए थे। सभी तस्वीरों और रेकॉर्डिंग की पुष्टि के बाद गिनीज बुक में इसे दर्ज किया जायेगा। इतनी लंबी मानव श्रृंखला दुनिया ने नहीं देखी थी. बिहार ने अरसे बाद अपनी ताकत दिखाई है। यह जज्बा बना रहे तो बिहार को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता।(लेखक सूबे के वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं)

याद जयपाल सिंह मुंडा की...

- प्रवीण बागी

जो समाज अपने सपूतों को याद नहीं रखना, उनपर गर्व नहीं करता, वह अपनी जडों से कट जाता है। वह अपनी परंपरा, संस्कृति और धरोहर को भूल जाता है। झारखंड इसका ताजा उदाहरण है। 3 जनवरी जयपाल सिंह मुंडा की जयंती है। नयी पीढी शायद उनके नाम से अवगत न हो, लेकिन आदिवासी संस्कृति की दुहाई देनेवाले और आदिवासियों के नाम पर राजनीति' करनेवाले उन्हें जरूर जानते हैं। क्योंकि वे उन्हीं की कमाई खा रहे हैं। जयपाल सिंह मुंडा ने ही सबसे पहले आदिवासियों के लिए झारखंड नाम से अलग प्रदेश बनाने की मांग बुलंद की थी। उन्होंने झारखंड पार्टी बनाई थी। वे आक्सफोर्ड विवि से पढे थे। संविधान सभा के सदस्य थे।. प्रथम लोकसभा के सदस्य रहे।लगातार चुनाव जीतते रहे। एक समय बिहार विधानसभा में झारखंड पार्टी के 23 विधायक जीत कर पहुंचे थे। दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह को राज्यसभा में भेजनेवाले जयपाल सिंह ही थे। आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा और विधायिका तथा सरकारी नौकरियों में आरक्षण, जयपाल सिंह मुंडा की ही देन है। संविधान सभा में उन्होंने इसके लिए जोरदार बहस की थी। इसलिए लोगों ने उन्हें 'मरांग गोमके' का नाम दिया था, यानी सर्वोच्च नेता।यह उपाधी फिर किसी दूसरे नेता को नहीं मिली।

वे हॉकी के बेहतरीन खिलाडी थे। 1928 में एम्सटर्डम ओलंपिक में इन्हीं के कैप्टनशिप में भारत ने गोल्ड जीता था। हॉकी के जादूगर कहे जानेवाले मेजर ध्यानचंद उस टीम के हिस्सा थे। उन्हीं के चलते झारखंड में आज भी हॉकी लोकप्रिय है। गांव- गांव में लडके- लडकियां हॉकी खेलते दिख जाते हैं। 20 मार्च 1970 को उनका निधन हुआ था। जिस रांची में जयपाल सिंह का जन्म हुआ था, आज वहां उनका कोई स्मारक नहीं है। उनके नाम पर सिर्फ एक स्टेडियम है, जिसमें उनकी प्रतिमा है। उस प्रतिमा पर आज फूल चढाना चाहिये, इसकी जरूरत न सरकार को महसूस हुई न दूसरे राजनेताओं को । सिर्फ रांची की मेयर आशा लकडा को यह समझ में आया कि जयपाल सिंह क्या थे। उन्होंने श्रद्धांजलि दी। ऐसे राजनेताओं और समाज को आप क्या कहेंगे ?

जयपाल सिंह आदिवासियों के धर्मान्तरण के भी खिलाफ थे। उनकी शिक्षा इसाई मिशन के सहयोग से हुई थी।9 वीं क्लास के बाद ही मिशन की ओर से उन्हें पढने के लिए इंग्लैंड भेज दिया गया था।आक्सफोर्ड में पढने का खर्च भी मिशन ने ही उठाया था।जब वे लौटकर आये तो मिशन ने उन्हें इसाईयत के प्रचार- प्रसार के काम में लगाना चाहा, पर उन्होंने दृढतापूर्वक मना कर दिया। लेकिन अफसोस कि हिन्दू धर्म के ध्वजाधारकों को भी उनकी याद नहीं आयी। हम शमिंर्दा हैं मरांग गोमके'...... (लेखक वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं)

आदमियत की दुखती रग के निर्दोष राग को ढूँढ़ने का नया तरीका

- शहंशाह आलम

मेरा मानना है कि हर लेखक किसी पहाड़ी कबीले का सदस्य होता है। तभी तो हर लेखक जीवन को, जीवन से जुड़े संघर्ष को इतने निकट से देख पाता है। यह सही भी है। एक सच्चे लेखक का जीवन क्या है, कैसा है, कैसा होना चाहिए जैसे सवाल जब कभी मेरे भीतर उठे हैं, तो मुझे उत्तर यही मिलता रहा है कि हर लेखक को पहाड़ी कबीले का सदस्य होना चाहिए। इसलिए कि इस जीवन को कोई दूर किसी छोटे इलाके में रहकर अगर जीता है, तो असल जीवन तो वही है। वही जीवन जीवन के असल महत्व को दशार्ता है। जहाँ ऊँच-नीच का लफड़ा है भी तो उस लफड़े में मासूमियत रहती है। जबकि शहरी अथवा महानगरीय तामझाम ने जो छीना-झपटी हमें दी है, वह हमारा नाश करने के लिए काफी है। इस छीना-झपटी से मुक्ति तभी संभव है, जब हम कई सौ मील जाकर अपनी जड़ों से जुड़ेंगे और अपने असली जीवन को आत्मसात् करेंगे। कम-अज-कम हम लेखकों को ऐसा जरूर करना चाहिए। तभी हमारा लेखन हमारे अंतस का लेखन सिद्ध होगा। मैंने अपने समय के बेहद महत्वपूर्ण लेखकों में एक जाबिर हुसेन को अपने लेखन को सच्ची धार देने के लिए उस जीवन को जीते देखा है, जो जीवन बिना किसी शोर के धरती के उस टुकड़े से जुड़ा रहता आया है, धरती का जो टुकड़ा अपनी एक नई तरह के तीव्र संघर्ष से जुड़ा रहा और जीतता आया है। जाबिर हुसेन ऐसे जीवन के बारे में कहते हुए लिखते हैं, 'मैं चाक पर फैली रेत के समान हूँ। मुझे पता है, इस रेत से चाक पर कोई उपयोगी वस्तु आकार नहीं ले सकती। मैं खुद भी अपने जीवन में कोई आकार कहाँ ले पाया।' अब आप ही कहिए, एक चाक, जो एक कुम्हार के हाथों गति पाते हुए, मिट्टी-पानी पाते हुए कितनी ही चमत्कारिक वस्तुएँ देता है, एक लेखक अपनी कलम से उस चाक से कहीं अधिक चमत्कारिक रचनाएँ देता है। मैंने पहले ही लिखा है कि जाबिर हुसेन एक महत्वपूर्ण लेखक हैं और उनका महत्व इससे स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपने आस-पास के जीवन से जो लिया, उससे कहीं ज्यादा उस जीवन को वापस लौटाया है। अभी-अभी छपकर आई उनकी किताब 'चाक पर रेत' को पढ़कर आप भी यही कहेंगे बिना कोई शक किए। 256 पृष्ठों की यह किताब इस रेत से भरे समय से हमारे काम लायक बहुत सारा बढ़िया छानकर एक नया दरिया-बहाती है :

मछुआरों को पता है

समुद्र में

कब आएगा तूफान

कब आएगी लहरों में उछाल

कितनी ऊँची उठेंगी लहरें

कितनी दूर भीगेगी रेत

तहस-नहस होंगे कितने किनारे

मछुआरों को पता है, सब

जाल में फँसी मछलियों ने

बता दिया है उन्हें, सबकुछ

खतरों से

आगाह कर दिया है, उन्हें

मछुआरे नहीं बेचते हैं

अपना नमक

हमेशा ख़्याल रखते हैं

अपने 'शुभ-चिंतकों' का

तभी तो

समुद्री तूफान से पहले

मछुआरे

ढीले कर देते हैं, अपने जाल

और मछलियों को

दे देते हैं

समुद्र में लौटने की छूट ( 'मछुआरों को पता है', पृ.254 )।

जाबिर हुसेन 'चाक पर रेत' में शामिल अपनी गद्य-रचनाओं को अपने जीवन की रचनाएँ कहते हैं। उनकी ये रचनाएँ बिहार के बहाने अपने भारत के उन अभिशप्त गाँवों की हैं, जहाँ हिंसा है, प्रतिहिंसा है, यातनाएँ हैं, गैर-बराबरी का नंगा नाच है। वे अपनी रचनाओं के बारे में कहते हैं, 'ये सारी तहरीरें उस समय लिखी जाती रहीं, जब बिहार के गाँवों की जमीन दरक रही थी और सामाजिक रिश्तों की बुनियादें ढह रही थीं। गाँव के खेतिहर मजदूर, भवन-निर्माण से जुड़े कामगार, छोटे-मोटे व्यवसायी, दलित और उपेक्षित वर्गों के लोग, इन सब की आवाज बनकर आगे बढ़ना अपने आप में एक जोखिम भरा अभियान था।' यहाँ पर मुझे एक कंबोडियन कहावत याद आ रही है। वह कहावत कुछ यूँ है कि जब शीशा टूटकर पानी पर तैरने लगे तो बुराई जीत जाती है। मेरे ख़्याल से अभी बुराई हम पर भारी है। सच्चाई यह भी है कि जाबिर हुसेन की रचनाएँ बुराई को हराती रही हैं। सच्चाई यह भी है कि देश का और विश्व का सामान्य वर्ग किसी असहाय, रक्षा चाहने वाला जीवन जी रहा है। इनके दर्द का मरुथल आप जाबिर हुसेन का साहित्य पढ़कर महसूस सकते हैं। उनकी रचनाएँ कभी भी कुछ लोगों के अच्छे जीवन का उत्सव न मनाकर उनके अच्छे जीवन के लिए संघर्ष करती रही हैं, जिन्हें ठेल-ठालकर हमेशा पंक्ति में सबसे पीछे खड़ा किया जाता रहा है। असल बात यही है कि जाबिर हुसेन की रचनाएँ जलते लोकतंत्र का सीधा, साफ-सुथरा बयान हैं। सौ से अधिक गद्य-रचनाएँ और चार कविताओं के माध्यम से इस 'चाक पर रेत' में व्यक्ति-चित्र और हमारे जीने के रोजमर्रा के दिन से लिए गए आत्मविश्वास से लेखक द्वारा जो कुछ लिखा-रचा गया है, वह अद्भुत है और अपने पढ़ने वालों को संतुष्ट करता है। (लेखक सूबे के सुविख्यात युवा कवि हैं)

दंगल : एक आंच की रह गयी कसर

- नवल किशोर कुमार

हरियाणा के भिवानी शहर की महिला पहलवान बबीता फोगाट और गीता फोगाट की कामयाबी की कहानी आमिर खान ने अपनी फिल्म दंगल में बखूबी चित्रित किया है। हालांकि इसमें कई तरह की मनोरंजन के लिहाज से स्वीकार्य नाटकीयता है जो महावीर फोगाट के वास्तविक जीवन से मेल नहीं खाती हैं। इसके बावजूद इस फिल्म की खासियत यही है कि इस फिल्म में स्त्री पक्ष के साथ कई दृश्यों में नाइंसाफी की गयी है। नाइंसाफी का एक प्रमाण तो यह भी कि मुख्य पोस्टर में आमिर यानी महावीर फोगाट अपनी बेटियों के साथ नजर तो आते हैं लेकिन उनकी पत्नी शोभा कौर(साक्षी तंवर) को जगह भी नहीं मिलती है। इस नाइंसाफी की एक बड़ी वजह समाज का पुरूष प्रधान होना है।

फिल्म में महावीर फोगाट को एक कुंठित पिता के रूप में दिखाया गया है। चार बच्चियों का पिता कुंठित हो और वह अपनी बेटियों को पहलवान बनाये, आश्चर्य पैदा करता है। आश्चर्य इसलिए भी कि महावीर फोगाट मूल रूप से जाट हैं और जाटों के हर गोत्र के अपने खाप हैं। इन खापों में महिलाओं की स्थिति क्या होती है, यह किसी से छुपी हुई बात नहीं है। पूरी फिल्म में दो हिस्से हैं। एक हिस्सा महावीर फोगाट की महानता है तो दूसरा हिस्सा उसकी बेटियों की कामयाबी है। फिल्मकार ने दोनों हिस्सों को फिल्माने में सावधानी बरती है। यह भी कहा जा सकता है कि फिल्मकार की ईमानदारी के पीछे फोगाट परिवार की जीवटता है।

बहरहाल एक फिल्म के रूप में दंगल एक कामयाब प्रयास है। उम्मीद की जानी चाहिए कि स्त्री पक्ष के फिल्मांकन में फिल्मकार इसी तरह की ईमानदारी दिखायेंगे। कम से कम पिंक के फिल्मकार की आधी अधूरी ईमानदारी जैसी तो बिल्कुल भी नहीं।

नाम से ही बिदक रहे संस्कृति के ठेकेदार

- मुसाफिर बैठा

सबका ठेका लेकर बात कहना बड़ी बीमारी है जो करीना-सैफ के नवजात बेटे के तैमूरनाम को लेकर फेसबुक-ट्विटर जैसे सोशल मीडिया पर अनेक बेहूदे राष्ट्रवादियों पर तारी है।

तैमूर नाम मात्र से उन्हें भी परेशानी है जिन्हें इतिहास का मात्र कखग ज्ञात है। तैमूरलंग ने उस समय हमारी भौगोलिक भूमि पर आक्रमण किया और लूटपाट की जब हमारा समाज असभ्य था, हम एक राष्ट्र न थे, हमारी राष्ट्रीयता थी तो अलग अलग थी, खण्ड खण्ड थी, (वैसे, प्रैक्टिकली अभी भी हम एक राष्ट्र कहाँ हैं, हो भी नहीं सकते!) सामन्तों एवं राजाओं तथा हिन्दू ऊँच नीच वाला समाज था। हमारे शासक भी आम लोगों के लिए कमोवेश उतने ही क्रूर थे, जालिम थे जितना कि तैमूर लंग था। तैमूर लंग जैसों की विजय कमजोर साबित क्रूर शासकों पर एक बलशाली शासक का आधिपत्य था। ब्राह्मणी एवं सवर्णी व्यवस्था जो तैमूर जैसे विदेशी आक्रमणकारियों के पहले से चली आ रही है, उस पर इन बेहूदों को क्यों परेशान नहीं कर रही है जो तैमूर नाम मात्र से परेशान हैं?

ऐसे 'देशभक्त' क्या यह सर्टिफाई करेंगे कि उनकी वंश परंपरा में अत्याचारी-व्यभिचारी-जातिवादी लोग नहीं हुए हैं? अगर स्वीकार करेंगे तो उनके पास अपने बेहूदे पूर्वजों के लिए क्या आलोचना है?

फिर, जहाँ लाखों लोग भगवान के नाम पर अपना नाम रखे हुए हैं और अनेक तरह के कुकर्मों में लगे हैं उनके प्रति इन तैमूर-घृणागिरों के क्या विचार हैं? आप ईश्वर से जुड़ा नाम रखकर भी कुकर्म और अपराध करें तो आपके लिए क्या सजा हो?

नरेंद्र माने नरों का इंद्र अथवा ईश्वर है। तो क्या गुजरात कत्लेआम के समय प्रदेश का मुख्यमंत्री रहे इस नाम के व्यक्ति को आप सीधे कठघरे में रखेंगे? क्या एक मुख्यमंत्री के रहते राज्य में नरसंहार हो जाए तो उसे इसका दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए?

घृणा योग्य लोग ही ऐसी बेहूदी घृणा पालते हैं कि किसी नाम पर भी ओछा वितंडा खड़ा कर देते हैं।

मेरे नाम और सरनेम 'मुसाफिर' और 'बैठा' को लेकर अबतक अनेक बुद्धिजीवियों (राजेंद्र यादव शामिल) तक ने बेहूदगी भरा मजाक और परिहास किया है। राजेंद्र यादव से यदि मैं पूछता कि आपके नाम में 'राजा' और 'इंद्र' जो लगा है वह आपके कर्म और आचरण को किस तरह क्वालीफाई करता है, तो उन्हें कैसा लगता? मैं उनसे कह सकता था कि आप नास्तिक होकर भी इंद्र क्यों हो, क्यों विरोधाभास को साथ लेकर जी रहे हैं, अपनी बुद्धिजीविता और नास्तिकता की हानि कर रहे हैं।

जब किसी अपराधी का बच्चा नेक हो सकता है, जब नेक का बच्चा बदनेक और अपराधी हो सकता है तो किसी नाम को किसी मिथकीय, ऐतिहासिक अथवा वर्तमान व्यक्तियों के नाम-बदनाम होने से अच्छा-बुरा ठहरा देना कुबुद्धि है। ऐसे ही कुबुद्धि जन पत्थर को भी भगवान मानते हैं एवं कोरी कल्पना की मिथक कथाओं को इस वैज्ञानिक युग में भी जीते हैं। ऐसे दुर्बुद्धि से हम फेसबुक पर नाता न रखें, उन्हें अपनी वॉल पर बेहूदगी न उगलने दे। बेहूदे चिकना घड़ा होते हैं। काम से मतलब रखिये, नाम से नहीं। नाम जैसा भी हो काम अच्छा होना चाहिए। मोल करो तलवार का, पड़ी रहन दो म्यान! (लेखक सूबे के चर्चित युवा कवि हैं)

सनक में लिया गया है नोटबंदी का निर्णय...

- शिवानंद तिवारी

गत आठ नवंबर को प्रधानमंत्री जी ने पाँच और हजार के नोट रद्द किए जाने की घोषणा की थी।रिजर्व बैंक के मुताबिक उस दिन देश मे पाँच और हजार के 15.44 करोड़ नोट चलन में थे।आज एक महीना बाद रद्द किए गए नोटों मे से कल तक 11.5 करोड़ यानी कुल रद्द नोटों का 80 प्रतिशत बैंकों में वापस आ चुका है।भारत सरकार के राजस्व सचिव के मुताबिक इस माह के अंत तक यानी रद्द नोटों को बैंकों मे जमा करने की अंतिम मोहलत तक लगभग सारे रद्द नोट बैंकों में वापस आ सकते हैं।इसका अर्थ हुआ कि नगदी में काला धन होने का जो दावा किया जा रहा था वह गलत साबित हुआ।या वह कालाधन कम था जो भ्रष्ट बैंक पदाधिकारियों की सहायता से सफेद कर लिया गया।इस तरह नोटों को रद्द किए जाने का जो मुख्य मकसद प्रधानमंत्री जी ने बताया था वह गलत साबित हो रहा है।

नोटबंदी के पहले देश की आर्थिक हालत ठीकठाक थी।स्वंय सरकार का दावा था कि हम दुनिया में सबसे तेज गति से विकास करने वाले देश हैं।हमारी विकास की गति चीन से भी तेज है।पिछले दो-तीन वर्षों से देश का बड़ा हिस्सा सुखा से प्रभावित था।कुछ इलाकों मे तो पीने के पानी तक का संकट उपस्थित हो गया था।लेकिन इस वर्ष बारिश बहुत अच्छी हुई।खरीफ की बहुत अच्छी फसल हुई है।रबी की फसल भी अच्छी होगी इसकी संभावना दिखाई दे रही थी।

जब अर्थ व्यवस्था बिलकुल स्वस्थ हालत में दिखाई दे रही थी तो प्रधानमंत्री जी द्वारा उठाए गए इस कदम का औचित्य समझ के बाहर है।रिजर्व बैंक द्वारा देश मे जारी कुल मुद्रा का 86 प्रतिशत पाँच और हजार रूपए के नोटों के रूप में ही था।ठीकठाक चल रही अर्थव्यवस्था से इतनी बड़ी राशि निकाल लेना एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर से 86 प्रतिशत खून निकाल कर उसे अधमरा बना दिए जाने के समान है।

सनक में उठाए गए कदम से देश की अर्थव्यवस्था को कुल कितना नुकसान पहुँचा है इसका अंतिम आकलन तो बाद में होगा।लेकिन रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने कल जो आकलन बताया उसके अनुसार देश का विकास दर 7.6 से 7.1 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है।यानी राष्ट्रीय आमदनी में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आएगी।ए. एन. सिंहा संस्थान, पटना के अर्थशास्त्र के प्रो. डी. एम दिवाकर के अनुसार आर्थिक सर्वे के आधार पर 2015-6 के वर्तमान मूल्य के आधार पर हमारा सकल राष्ट्रीय आय 1,34,09,892 करोड़ रू. था। इसमे 0.5 प्रतिशत की गिरावट अर्थ है सकल घरेलू आय में 67,04,946 करोड़ की कमी या सकल घरेलू उत्पाद में यह 67,83,596 करोड़ है।दिवाकर जी के मुताबिक नोटों की छपाई तथा देश भर में उनको पहुँचाने की लागत लगभग 1,28,000 करोड़ तक आ सकती है। मनमोहन सिंह जी ने नोटबंदी के इस कदम से सकल राष्ट्रीय उत्पाद में दो प्रतिशत गिरावट की आशंका व्यक्त की है।

अत: यह कहा जा सकता है किसी सकारात्मक आर्थिक सोच के आधार पर नोटबंदी का यह निर्णय नहीं लिया गया है।इस फैसले के द्वारा मोदीजी गरीबों से तप करा रहे हैं और अमीरों को मौज। आगे आनेवाले दिनों में इस कदम का पुरा प्रभाव जब प्रत्यक्ष होगा तो जो भक्त आज उनका जयकारा लगा रहे हैं वही उनके प्राण के पीछे लगे दिखाई देंगे। (लेखक राज्यसभा के पूर्व सांसद हैं)

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संपादकीय : लालू के खिलाफ़ साजिश, नीतीश को कमजोर करने का षडयंत्र

दोस्तों, अब यह बात साफ़ हो गयी है कि लालू प्रसाद भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार के निशाने पर हैं। उनके खिलाफ़ आयकर का छापा इस बात को साबित करता है कि वे आरएसएस के सबसे बड़े विरोधी हैं। दिलचस्प यह है कि श्री प्रसाद के खिलाफ़ नरेंद्र मोदी सरकार की यह कार्रवाई नीतीश कुमार के लिए खास महत्वपूर्ण है। दरअसल श्री कुमार पूरे देश में नरेंद्र मोदी के बड़े और स्वीकार्य विरोधी के रुप में सामने आ रहे हैं। भाजपा श्री कुमार पर हमले कर उन्हें सहानुभूति का लाभ नहीं देना चाहती है, लिहाजा उसने लालू प्रसाद के खिलास साजिश रची है।

यह भी अत्यंत ही दिलचस्प है कि ठीक एक दिन पहले जब नीतीश कुमार से पत्रकारों ने श्री प्रसाद पर सुशील मोदी के आरोपों के बाबत पूछा था तो उन्होंने कहा था कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो केंद्र जांच करे। भाजपाई उनके इसी बयान को कार्रवाई का आधार बता नीतीश-लालू को अलग करने का प्रयास कर रहे हैं।

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब लालू प्रसाद भाजपाईयों की साजिश का शिकार हुए हैं। चारा घोटाले के संदर्भ में उनके खिलाफ़ आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा भी चलाया गया। इस क्रम में श्री प्रसाद के परिजनों का आवास और जमीन तक खोदा गया था। लेकिन तब सीबीआई उनके खिलाफ़ किसी तरह का सबूत खोजने में विफ़ल रही थी और आय से अधिक संपत्ति का मामला पटना हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।

बहरहाल लालू प्रसाद बड़े जीवट वाले राजनेता हैं। जो उनके सामाजिक न्याय के परिणाम के बारे में नहीं जानते हैं अथवा जानबुझकर जातिगत विद्वेष की वजह से उनकी आलोचना करते है, वे भूल जाते हैं कि लालू प्रसाद केवल व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचारधारा का नाम है, जिसके दायरे में बहुजनों का हित परिभाषित है। कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि लालू प्रसाद को खत्म करने का सपना कभी पूरा नहीं होगा। वजह यह कि जब-जब उनके उपर भाजपाई हमले हुए हैं, वे उतनी ही मजबूती के साथ पलटवार करने में कामयाब हुए हैं।

विधायकों की संपत्ति की हो जांच : पप्पू

पटना(अपना बिहार, 10 मई 2017) - जन अधिकार पार्टी (लो) के संरक्षक और सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा है कि सोलहवीं बिहार विधान सभा में 156 विधायक करोड़पति हैं, जबकि 130 विधायकों के खिलाफ जघन्य अपराध के मामले दर्ज हैं। इसमें जदयू, भाजपा, राजद, कांग्रेस आदि दलों के विधायक शामिल हैं। पत्रकार वार्ता में एडीआर की रिपोर्ट की कॉपी जारी करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा के 40, जदयू के 32, राजद के 28 और कांग्रेस के 13 विधायक करोड़पति हैं। 15वीं विधान सभा के साथ 16वीं विधान सभा में जीते कई विधायकों की संपत्ति में 10 गुना तक वृद्धि हुई है। इन विधायकों की संपत्ति की जांच प्रवर्तन निदेशालय से करवानी चाहिए, ताकि इनकी आय के स्रोत का पता चल सके।

श्री यादव ने कहा कि नक्सलियों और आतंकवादियों से ज्यादा खतरनाक भ्रष्टाचारी हैं। नक्सली या आतंकी कुछ लोगों को नुकसान पहुंचाता है। लेकिन एक भ्रष्टाचारी एक साथ लाखों लोगों को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने सभी पार्टियों के नेताओं से आग्रह किया वे अपराधी और भ्रष्टाचारी को टिकट नहीं दें। ऐसे नेताओं का बहिष्कार करें। लेकिन यह विडंबना है कि विभिन्न पार्टियों के 95 प्रतिशत आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार विधान सभा पहुंचने में सफल रहे थे। पत्रकार वार्ता में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व विधायक अजय कुमार बुलगानिन, रघुपति प्रसाद सिंह,श्याम सुंदर आदि मौजूद थे।

सुशील मोदी ने जज को दी गाली, कहा - भ्रष्टाचारी

पटना(अपना बिहार, 10 मई 2017) - बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने अपने आवास पर जनता दरबार के बाद मीडिया से बातचीत में एक बार फिर लालू प्रसाद पर निशाना साधा और झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. आर. प्रसाद पर गंभीर आरोप लगाये. उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद व्यवस्था को प्रभावित करने में माहिर हैं. उन्होंने कहा कि लालू से संबंधित मामलों की जांच के लिए सीबीआई की विशेष टीम गठित की जाये. सुशील मोदी ने कहा कि पूर्व सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा पर लालू का फेवर करने का आरोप लगाया. मोदी ने कहा कि लालू के काफी करीबी रहे रंजीत सिन्हा ने लालू की खूब मदद की, बदले में उपकृत भी हुए. सुशील मोदी ने कहा कि लालू ने सोनिया और मनमोहन पर दबाव बनाकर सिन्हा को सीबीआई का निदेशक तक बनवा दिया था.

पत्रकारों से बातचीत में सुशील मोदी ने कहा कि रेल मंत्री रहते हुए लालू ने रंजीत सिन्हा को आरपीएफ का डीजी और बिहार बिहार भवन का प्रमुख बना दिया था. लालू ने रंजीत सिन्हा को बहुत सारे लाभ पहुंचाए थे.सुशील मोदी ने एक बार फिर कहा कि लालू व्यवस्था को प्रभावित कर अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित की है. सुशील मोदी ने मणिपुर हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राकेश रंजन को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने से पहले कोलेजियम से विचार करने की मांग की. सुशील मोदी ने कहा कि रांची में हाइकोर्ट का जज रहते हुए रंजन ने लालू की भरपुर मदद की थी. ज्ञात हो कि हाल के दिनों में सुशील मोदी ने लालू परिवार पर कथित मॉल व जमीन घोटाले को लेकर लगातार हमला बोला है. सुशील मोदी ने लालू परिवार की बेनामी संपत्ति के सारे सबूत भी सार्वजनिक किये हैं.

शिवानंद तिवारी ने किया लालू का बचाव

पटना(अपना बिहार, 10 मई 2017) - राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव इन दिनों सूबे की सियासत में चर्चा के केंद्र में हैं. सुप्रीम कोर्ट ने जहां एक ओर लालू प्रसाद पर आपराधिक साजिश रचने का मुकदमा चलाने का फैसला दे दिया है, वहीं दूसरी ओर, एक नये चैनल द्वारा पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के साथ बातचीत के टेप वायरल होने से लालू चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं. वहीं पार्टी के साथ, कभी एक साथ रहे कई और नेताओं द्वारा लालू से सहानुभूति जताने और उनके समर्थन में बयान देने का सिलसिला जारी है. इसी क्रम में पूर्व राज्यसभा सांसद शिवानंद तिवारी ने कहा है कि बीजेपी लालू प्रसाद को टारगेट कर रही है. शिवानंद तिवारी ने कहा कि यदि लालू को सजा देने से भ्रष्टाचार खत्म हो जा तो उन्हें फांसी पर चढ़ा दो. शिवानंद तिवारी के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि बिहार की सियासत में एक बार फिर तूफान मचेगा. वहीं राष्ट्रीय जनता दल के एक विधायक सुरेंद्र यादव ने लालू प्रसाद से मुलाकात के बाद मीडिया को बयान दिया कि राजद चट्टान की तरह मजबूती के साथ लालू के साथ खड़ी है. सुरेंद्र यादव ने यह भी कहा कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है.

लालू को गाली देने वाले नित्यानंद पर मुकदमा दर्ज

पटना(अपना बिहार, 10 मई 2017) - बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद नित्यानंद राय पर समस्तीपुर जिले में अभियोग पत्र दायर किया गया है. नित्यानंद राय पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने का आरोप है. जानकारी के मुताबिक लालू पर किये गये अभद्र टिप्पणी को लेकर यह अभियोग पत्र दायर किया गया है. बता दें कि इससे पूर्व बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने लालू प्रसाद और साथ में बिहार के सीएम नीतीश कुमार को लेकर पांच दिन पहले एक विवादास्पद बयान दिया था. नित्यानंद राय ने लालू प्रसाद को रावण जैसा अहंकारी बताया था और कहा था कि उनका प्राण उनकी नाभि में बसता है. नित्यानंद राय ने कहा कि लालू का संरक्षक बनकर नीतीश कुमार बैठे हुए हैं.

गायों की सेवा से भाजपाईयों ने किया इन्कार, अदालत में मामले की सुनवाई शुरु

पटना(अपना बिहार, 10 मई 2017) - राजद प्रमुख लालू प्रसाद के अपने पार्टी के कार्यकतार्ओं से भाजपा के गाय के प्रति प्रेम की जांच के लिए भाजपा नेताओं के घरों के सामने दूध नहीं दे सकने वाली बूढ़ी गायों को बांधने के सलाह के बाद गत 6 मई को बिहार के वैशाली जिला की एक अदालत में भाजपा के एक स्थानीय नेता के एक परिवाद पत्र दायर किये जाने के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने उन पर पलटवार करते हुए आज कहा कि लालू और उनके कार्यकर्ता जब स्वयं को सबसे बड़ा गौ सेवक होने का दावा करते हैं, तो वर्षों गाय से दूध प्राप्त करने के बाद उसे हमारे दरवाजे क्यों छोड़ना चाहते हैं.

बताते चलें कि 4 मई को राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने अपनी पार्टी के कार्यकतार्ओं से कहा था कि भाजपा के लोग बूढ़ी और दूध नहीं दे पाने वाली गायों की सही मायने में देखभाल करते हैं या नहीं यह देखने के लिए उनके घरों के बाहर ऐसे मवेशियों को बांधे. नालंदा जिला के राजगीर में आयोजित राजद के प्रशिक्षण शिविर के बाद इस दल के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान लालू ने भाजपा और आरएसएस पर वोट हासिल करने के लिए गोरक्षा के मुद्दे को भुनाने के आरोप को सही साबित करने तथा गौमाता के प्रति उनके प्रेम की जांच के लिए अपनी पार्टी के कार्यकतार्ओं से भाजपा नेताओं के घर के सामने सड़क पर घूम रही बिना दूध देने वाली बूढ़ी गायों को बांधने की सलाह दी थी.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि भाजपा नेता और जो लोग आरएसएस से जुड़े हैं वे गोरक्षा के नाम पर अल्पसंख्यक को निशाना बना रहे हैं. वे दूध के लिए नहीं बल्कि वोट के लिए ऐसा कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि उनके ऐसा करने पर उन्हें अगर चार-छह डंडे भी खाने पडें तो उसे सहन कर लें. लाठी बर्दाश्त करें लेकिन गाय को भाजपा नेता के घर पर जरूर बांधें. गोमाता के प्रति प्रेम जताने वाली भाजपा के लिए अब ऐसा ही करना होगा. राजद प्रमुख लालू प्रसाद की इस सलाह के बाद गत छह मई को वैशाली जिला के भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष चंदेश्वर कुमार भारती ने अपने वकील लक्ष्मण कुमार सिन्हा किसलय के माध्यम मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में लालू और उनकी पार्टी राजद के चार अन्य कार्यकतार्ओं के खिलाफ भादंवि की धारा 323, 341, 379 और 504 के तहत एक परिवाद पत्र दायर किया गया था.

अनुशंसा पत्र के आधार पर बनाया जा रहा दोषी : मिश्र, सीबीआई ने की साजिश

पटना(अपना बिहार, 10 मई 2017) - उच्चतम न्यायालय द्वारा चारा प्रकरण के सबंध में दिये गये निर्णय को सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र ने कहा है कि हमारे संबंध में चारा प्रकरण से जो मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष सीबीआई ने झारखंड उच्च न्यायालय के निर्णय के विरूद्ध जो अपील की थी वह यह था कि झारखंड उच्च न्यायालय ने चारा प्रकरण से संबंधित चार मामले को उनके विरूद्ध चल रहे थे उसे निरस्त कर दिया था। उल्लेखनीय है चारा प्रकरण संबंधी 6 मामले उनके विरूद्ध सीबी आई द्वारा चलाये जा रहे थे, उनमें से मुख्य मामला आरसी20ए के संबंध में 30 सितम्बर 2013 को राँची स्थित निचली अदालत में निष्पादन कर उन्हें दोषी करार दिया था।

उन्होंने कहा कि जिन आरोपों के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया गया था वही आरोप चार दूसरे मामलों में झारखंड के दूसरे अदालतों में चल रहे थे। झारखंड उच्च न्यायालय के समक्ष उस निर्णय के बाद उनकी ओर से यह अपील की गयी थी कि जिन आरोपों के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया गया था उनमें मुख्य रूप से एक पदाधिकारी के सेवा विस्तार से संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री से अनुशंसा की गयी थी और उस अनुशंसा-पत्र को मुख्य आधार बनाया गया था और उसी आधार पर उन्हें षड्यंत्र पक्ष का भागीदार माना गया।उसी अनुशंशा पत्र को षडयंत्र पक्ष से जोड़ा गया उनके विरूद्ध सभी मामले इसी पर आधारित है सी॰बी॰आई ने स्वंय उच्चतम न्यायालय में मामले संबंधित हलफनामे में कहा था कि डा॰ मिश्र का चारा प्रकरण में निकासी विपत्र भुगतान संबंधी मामलों में कोई संलिप्तता नहीं है। वे केवल विधायक के रूप में विपक्ष के नेता थे। उनहोने केवल कुछ पदाधिकारियों को संरक्षण दिने की अनुशंशा की थी। जब सीबीआई स्वंय हलफना में चारा प्रकरण के अवैद्य निकासी में डा॰मिश्र की संलिप्तता से इन्कार किया है तो इस अवस्था में इस पूरे चारा प्रकरण में षड़यंत्र पक्ष से उन्हें उसी अनुशंशा पत्र के आधार पर जोड़ा गया। उन्होने एक पदाधिकारी की सेवा विस्तार की अनुशंसा मुख्यमंत्री से की थी, और इसी को सीबीआई ने षड़यंत्र से जोड़ दिया । इसी प्रपेक्ष में झारखंड उच्च न्यायालय के समक्ष डा॰ मिश्र की ओर से कहा गया कि जब उन्हें उन तथ्यों के आधार बनाकर दंडित किया जा चुका है तो फिर उसी अनुशंशा पत्र को आधार बनाकर अन्य चार मामले में उन्हें क्यों अभियुक्त बनाया जा रहा है। इससे यह साबित होता है कि अनुशंशा पत्र ही षड़यंत्र का मुख्य आधार है।

पेपरलीक का प्रयास नाकाम, पांच गिरफ्तार, नीट परीक्षा के ठीक पहले पकड़े गये धंधेबाज

पटना(अपना बिहार, 8 मई 2017) - रविवार को पटना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की और बिहार को एक बार फिर बदनाम होने से बचा लिया. बताते चलें कि सीबीएसई की ओर से नेशनल इलिजिबिलिटी कम एंट्रास टेस्ट (नीट) 2017 रविवार को देशभर में आयोजित की गयी. इसी बीच बिहार में इसका पेपर लीक होने की जानकारी सामने आयी. पटना में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है. इसमें दो डॉक्टर एक ड्राइवर, एक छात्र और एक सेंटर अधीक्षक शामिल हैं. सेंटर अधीक्षक का नाम अविनाश चंद्रा है जो क्राइस्ट चर्च स्कूल के केंद्र प्रभारी हैं. पटना पुलिस के एसएसपी मनु महाराज ने प्रेस कांफ्रेंस कर इसकी जानकारी दी. बताया जा रहा है कि इन 5 लोगों को गुड्डू नाम के व्यक्ति द्वारा गाइड किया जा रहा था जोकि बीएसएससी मामले में मुख्य आरोपी संजय गुरु का बेटा है.

पुलिस ने बताया है कि इन पांचों लोगों का मुख्य उद्देश्य बैंक से बाहर प्रश्नपत्र निकलते ही उसको लीक कर देना था. बैंक से प्रश्न पत्र बाहर निकलते ही ये लोग वैन में बैठ गये और सील तोड़कर प्रश्न पत्र को मोबाइल के सहारे बाहर भेजने का प्रयास करने लगे लेकिन पुलिस ने उनको गिरफ्तार कर लिया. इस में ड्राइवर की भी संलिप्तता थी जिस को गिरफ्तार किया गया है. अभीतक यह पता नहीं लग पाया है कि आरोपी पेपर लीक करने में कामयाब हो पाये थे या नहीं. परीक्षा को लेकर सख्त एहतियाती कदमों के बावजूद पेपर लीक की चर्चा गंभीर बात है. हालांकि, यह अफवाह है या सच, इसकी पुष्टि परीक्षा समाप्त होने के बाद ही की जा सकेगी. अधिकारी भी फिलहाल इस मामले पर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं. मालूम हो कि देशभर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और डेंटल कोर्स में एडमिशन के लिए सीबीएसइ का एन्ट्रेंस एग्जाम (नीट) रविवार को सुबह 10.00 बजे से 01 बजे तक हुई. पटना जोन के चार शहरों में नीट परीक्षा ली गयी. पटना के अलावा गया में परीक्षा केंद्र बनाया गया था. वहीं झारखंड में रांची और बोकारो में नीट आयोजित किया गया.

परीक्षा के लिए सीबीएसइ ने छात्रों से कहा था कि वे परीक्षा केंद्र पर सुबह 7.30 बजे तक पहुंच जाएं. सुबह 7.30 बजे से लेकर 9.30 बजे तक परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश दिया गया. परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र पर ही पेन दिए गये. एडमिट कार्ड के अलावा किसी प्रकार का कागजात अंदर नहीं ले जाने दिया गया. परीक्षा के पपेर लीक को रोकने व निष्पक्ष आयोजन के लिए कड़े एहतियाती कदम उठाए गये थे. ड्रेस कोड के अलावा अन्य सख्त नियम भी बनाए गए.

राजद प्रमुख की खामोशी से दिनभर सियासी गलियारे में बेचैनी, लालू से मिले अपर महाधिवक्ता, चरम पर कयासबाजी, नीतीश कुमार पर लालू का फोन टेप कराने का विपक्ष ने लगाया आरोप

पटना(अपना बिहार, 8 मई 2017) - लालू-शहाबुद्दीन आडियो टेप मामले में रविवार को भी सियासी तापमान गरम रहा। हालांकि राजद प्रमुख की ओर से खामोशी के कारण भी दिन भर सियासी गलियारे में बेचैनी बनी रही। उधर इस मामले में पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। पूर्व राज्यसभा सदस्य मंत्री शिवानन्द तिवारी ने टेप प्रकरण पर उनका बचाव किया और कहा कि बातचीत में दंगा रुकवाने की बात हो रही थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कोई नेता अगर बिहार में कोई नेता ये कहे कि जेल से उन्हें फोन नहीं आता तो वह झूठा है।

इन सबके बीच प्रधान अपर महाधिवक्ता चितरंजन सिन्हा ने लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की खबर भी सियासी गलियारे में चली। इस दौरान टेप प्रकरण को लेकर दोनों के बीच बातचीत की संभावना जतायी जा रही है। उधर राजद विधायक रामानुज प्रसाद ने रविवार को आरोप लगाते हुए कहा कि लालू प्रसाद का फोन टेप हो रहा है, जो बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि अब फोन पर बात करना सुरक्षित नहीं रहा है। विधायक ने इसे निजता पर हमला बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

वहीं इस मामले में सुशील कुमार मोदी ने भी कहा कि नीतीश कुमार लालू यादव सहित अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और विरोधियों के मोबाईल टेप करा रहें हैं। श्री नीतीश कुमार को इस टेप की पूरी जानकारी थी फिर भी उन्होंने लालू प्रसाद पर तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की और अब टेप मीडिया में लीक होने पर लालू को घूटने पर झूका रहें हैं ताकि वे उनके प्रधानमंत्री बनने के तथाकथित सपने को समर्थन करने के लिए बाध्य हो जाएं। जब नीतीश कुमार को इस टेप की पूरी जानकारी थी और लालू यादव ने बातचीत का कोई खंडन नहीं किया है तो अब जाँच किस बात की होगी?

भूमिहारों द्वारा दलितों को मंदिर में नहीं घुसने देने पर माले ने जताया विरोध

पटना(अपना बिहार, 8 मई 2017) - भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड के विशनपुर बघनगरी में भूमिहार जाति के सामंती मनबढ़ुओं द्वारा कौशल मांझी की शादी में बिलौकी की रस्म अदायगी व पूजा के लिए भोलेनाथ मंदिर में दलित समुदाय के पुरुष व महिलाओं के प्रवेश के दौरान उनपर बर्बर हमले की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा है कि यह बेहद शर्म का विषय है कि आजादी के इतने वर्षों बाद और बिहार में तथाकथित सामाजिक न्याय की सरकार के बावजूद मंदिरों में दलितों का प्रवेश बाधित किया जा रहा है. जब वे मंदिर प्रवेश करने की कोशिश करते हैं तो महिलाओं तक को बुरी तरह पीटा जा रहा है.

उन्होंने कहा कि सामंती मनबढु भाजपा के सामाजिक आधार के लोग हैं, जिन्हें तथाकथित सामाजिक न्याय की सरकार का भी संरक्षण हासिल है. इस जिले में पिछले 1 साल में दलित उत्पीड़न की कई लोमहर्षक घटनायें घटी हैं. पारू में सामंती मनबढ़ुओं ने दलित युवकों के मुंह में मोटरसाइकिल चोरी के झूूठे आरोप में मुंह में पेशाब कर दिया था, तो मुजफ्फरपुर के सेंट्रल स्कूल में अधिक नंबर लाने के कारण दलित छात्र को सामंती-अपराधी घराने के एक दूसरे छात्र ने बर्बर तरीके से पिटाई की थी और वैशाली जिले में बलात्कार के बाद हत्या की शिकार हुई डीका कुमारी भी मुजफ्फरपुर की ही थी.

इस गांव में भूमिहार जाति के सामंतों द्वारा दलितों के उत्पीड़न का लंबा इतिहास रहा है. 1990 में जब दलितों ने सामंतों के इशारे पर वोट देने से इंकार किया था, तब उनके साथ मारपीट की गयी व उनके घर जला दिए गए थे. भाजपा-जदयू के शासन में 2011-12 में सामंतों के खेत में बकरी चरने के आरोप में लोगों की पिटाई की गयी थी, पासवान जाति के दो बच्चों की हत्या भी कर दी गयी थी. लेकिन प्रशासनिक संरक्षण की वजह से मामले को रफा-दफा कर दिया गया. एक तरफ जहां भाजपा समर्थित सामंती-अपराधी दलितों पर लगातार हमले कर रहे हैं, तो दूसरी ओर दलित-गरीबों के वोट से सत्ता प्राप्त करने वाली नीतीश सरकार भी इन मसलों पर लगातार चुप्पी ही बरत रही है. यही वजह है कि सामंती-अपराधियों के मनोबल में कोई कमी नहीं आ रही है.

घटना की माले की जिलास्तरीय टीम ने जांच की, जिसमें राज्य कमिटी सदस्य शत्रुघ्न सहनी, सकरा प्रखंड के सचिव सुरेश यादव व कॉ. मुन्ना शामिल थे. जांच टीम ने कौशल मांझी और उनके परिजनों से मुलाकात की, जिनके उपर बर्बर तरीके से हमले किए गए थे. जांच टीम ने मांग की है कि सभी अपराधियों कामेश्वर मिश्र, श्री नाथ मिश्र, अमन कुमार, छेमनारायण मिश्र, शिवकुमार मिश्र आदि को अविलंब गिरफ्तार किया जाए.

जांच टीम ने पीड़ित मुसहर टोली में बैठक कर कहा कि मंदिर में प्रवेश से दलितों को रोकना घोर अन्याय व सामाजिक न्याय की धज्जियां उड़ाना है, इसलिए लोग संगठित होकर मंदिर प्रवेश करें और सामंती मनबढ़ुओं को पीछे धकेलने का काम करें. इस आह्वान पर आज 7 मई को बड़ी संख्या में दलित समाज के लोगों ने एकताबद्ध होकर मंदिर प्रवेश किया. आने वाले दिनों में इस अमानवीय घटना के खिलाफ संकल्प सभा आयोजित करने का भी फैसला किया गया है.

झूठ बोल रहे भाजपा के नेतागण : जदयू, बिहार को बदनाम करने की साजिश

पटना(अपना बिहार, 8 मई 2017) - जनता दल (यू0) के प्रदेश प्रवक्ता नवल शर्मा ने कहा कि बीजेपी ने रिपब्लिक चैनल को सत्ता संघर्ष का हथियार बना भारतीय पत्रकारिता को कलंकित कर दिया है। भाजपा सनसनीखेज तरीकों से 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले अपने संभावित प्रतिद्वंदियों को कमजोर करने के लिए मीडिया घरानों का उपयोग कर रही है। पूरा देश जानता है की शहाबुद्दीन को बिहार से तिहाड़ की यात्रा नीतीश की सरकार ने ही करायी है। अगर शहाबुद्दीन फैक्टर होता तो सीवान एसपी अभी तक अपने पद पर नहीं होते और जिस अधिकारी ने शहाबुद्दीन से मुठभेड़ किया वह एडीजी मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण पद पर नहीं रहते। यह सर्वविदित है की नीतीश कुमार किसी के दबाब में काम नहीं करते। इसलिए नीतीश की छवि से खिलवाड़ करने की भाजपा की सारी तिकड़में बेकार हैं। रिपब्लिक चैनल बीजेपी की अपनी दुकान है। बीजेपी बताए कि चैनल में सबसे ज्यादा पैसा बीजेपी सांसद राजीव चंद्रशेखर का लगा है या नहीं।

सोशल मीडिया के भंवर जाल में फंसा रहा मुद्दा, ट्वीटर पर दूसरे दिन भी ट्रेंड करता रहा हैश टैग लालूएक्सपोज्ड

पटना(अपना बिहार, 8 मई 2017) - रविवार को भी राजद प्रमुख लालू प्रसाद ट्वीटर एवं फेसबुक पर छाये रहे। हालांकि इसका दूसरा पहलू यह भी है कि रिपब्लिक चैनल द्वारा किये गये तथाकथित खुलासे के बाद उभरे सवाल सोशल मीडिया के भंवर जाल में फंसी रही। एक तरफ भाजपा और उसके समर्थक राजद प्रमुख लालू प्रसाद एवं उनके परिजनों पर ताबड़तोड़ हमला करते दिखे तो दूसरी ओर राजद प्रमुख के समर्थन में उतरे लोगों ने अर्णव गोस्वामी और भाजपा के नेताओं पर पलटवार किया। दिलचस्प यह रहा कि न तो लालू प्रसाद ने और न ही उनके किसी परिजन ने इस संबंध में अपनी ओर से कोई ट्वीट किया। स्वयं उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने भी दूसरों के ट्वीट से काम चलाया। अधिकांश ट्वीट संदेशों में पूरे प्रकरण को अर्णव गोस्वामी की खुराफात और भाजपा की साजिश करार दिया गया।

मंगल पांडेय को मिली हिमाचल की जिम्मेवारी

पटना(अपना बिहार, 8 मई 2017) - नित्यानंद राय के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मनोनयन के बाद खाली चल रहे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय को भाजपा ने हिमाचल प्रदेश की जिम्मेवारी सौंपी है। इस आशय की सूचना भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय के प्रभारी अरूण सिंह ने जारी की। इसके मुताबिक श्री पांडेय हिमाचल प्रदेश के प्रभारी बनाये गये हैं। उनके पहले श्रीकांत शर्मा हिमाचल प्रदेश के प्रभारी थे जो उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बनाये गये हैं।

शंकराचार्य संबंधी बयान पर बेचैनी बेवजह : शिवानंद

पटना(अपना बिहार, 8 मई 2017) - जदयू के पूर्व राज्यसभा सांसद शिवानंद तिवारी ने कहा है कि शंकराचार्य पर लालू के बयान से तिलमिलाहट क्यों ? उन्होंने कहा किआदि शंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी में देश के चारो दिशाओं में चार पीठ की स्थापना की थी।वर्ण आधारित, ब्राह्मण प्रधान समाज व्यवस्था के वे समर्थक थे। इसलिए लगभग बारह सौ वर्षों से उसी जाति के लोग इन पीठों के प्रमुख बनते रहे हैं। हिंदू समाज की एकता का लक्ष्य महान है।लेकिन ऊँच-नीच और छुआछूत के रहते यह एकता कैसे मुमकिन है।

श्री तिवारी ने कहा कि विडम्बना है कि हिंदू एकता का नारा देने वाले संगठन हिंदू समाज में जाति व्यवस्था को कायम रखते हुए एकता चाहते हैं। इनमे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सबसे प्रमुख है। इस संगठन में भी 1925 में इसकी स्थापना से लेकर आजतक सिर्फ़ एक अपवाद को छोड़कर इसके सभी प्रमुख एक ही जाति के हुए हैं। वह अपवाद भी क्षत्रिय के रूप में ही है।इसलिए ऐसे संगठन जो जाति आधारित ऊँच-नीच और छुआछूत की व्यवस्था को कायम रखते हुए जब हिंदू समाज की एकता की बात करते हैं तो शूद्र और दलित नेताओं द्वारा इसका विरोध उनका कर्तव्य बनता है।

विपक्षी दलों पर कीचड़ उछाल रही भाजपा : जदयू

पटना(अपना बिहार, 8 मई 2017) - बिहार प्रदेश जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा है कि विपक्षी पार्टियों पर कीचड़ उछालने के उनके अभियानों से लगता है कि बीजेपी अभी से 2019 में होने वाले आम चुनाव के 'मोड' में आ गई है। खुद शीशे के घर में रहने के बावजूद दूसरों के घरों पर पत्थर उछालने जैसे निर्लज्जतापूर्ण दुराग्रह का हौसला और किसमें हो सकता है! मप्र के खूनी व्यापमं से लेकर येदियुरप्पा तक और ललित मोदी प्रकरण में आकंठ डूबे होने से लेकर पंकजा मुंडे और एकनाथ खडसे तक जो पार्टी देश-दुनिया में कुख्यात रही है, उसकी ढेलेबाजी और कीचड़बाजी से थेथरई जैसा शब्द भी शरमा जाए। उन्हें सावधान रहना चाहिए, दूसरों को बदनाम करते-करते कहीं उनके चेहरे पर कालिख न पुत जाए।

जदयू प्रवक्ता ने कहा कि जो पार्टी केंद्र की सत्ता हासिल होने के बाद 2002 के खूनी दंगों, फर्जी इनकाउंटर के आरोपों, मालेगांव तथा समझौता एक्सप्रेस के आतंकी धमाकों जैसे दागों से मुक्त हुई हो, उसके द्वारा विपक्ष की पार्टियों पर हमला, बिल्ली के हज पर जाने के समान है। संदिग्ध मौतों की बड़ी संख्या के कारण दुनियाभर में कुख्यात मप्र के खूनी व्यापमं घोटाले में नाम आने के बावजूद मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के चहेते बने हुए हैं। इसी प्रकार, सुप्रीम कोर्ट में मामला चलते होने के बावजूद उमा भारती को केंद्रीय मंत्रिमंडल में बनाए रखा गया है। ऐसी पार्टी द्वारा दूसरों से शुचिता संबन्धी सवाल करना हास्यास्पद लगता है। 2019 के आम चुनाव की तैयारियों में लगी भाजपा जान ले कि पब्लिक सच-झूठ और नियत-बदनीयत का फर्क समझती है।

शहाबुद्दीन को लेकर भाजपा ने उठाया सवाल, मुख्यमंत्री से जवाब की मांग

पटना(अपना बिहार, 8 मई 2017) - एक बार फिर नेता प्रतिपक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने लालू यादव पर हमला किया। अपने बयान में उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के अध्यक्ष द्वारा जेल में बंद आरोपी से बातचीत करना कानून के साथ खिलबाड़ करना है। उन्होंने कहा कि लालू जी और शहाबुद्दीन के बातचीत से कई सवाल उठते हैं जिसका जबाव नीतीश कुमार को देना चाहिए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सवाल करते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि यह सब रोकने का काम नीतीश जी का है, जवाब भी नीतीश कुमार दें कि आपके राज्य में जेल के अंदर शहाबुद्दीन को मोबाइल कैसे मिल जाता है? एसपी लालू जी का कैसे हो सकता है और उसे लालू कैसे हटा सकते हैं? अगर लालू नहीं हटा सकते तो लालू ने शहाबुद्दीन की बातों को क्यों नहीं काटा जब वह एसपी को उनका आदमी बता रहा था? जहाँ लालू जी का एसपी हो वहाँ शहाबुद्दीन का राज्य क्यों नहीं होगा? इनके टेप से तो साबित हो गया है कि महागठबंधन की सरकार को जेल में बैठे अपराधी चला रहे हैं। नीतीश कुमार सिर्फ मूकदर्शक बने हैं। डॉ. कुमार ने कहा कि राजद के नेता सफाई दे रहे हैं कि सभी नेता अपने कार्यकतार्ओं से बात करते हैं तो राजद को यह भी समझना चाहिए कि नेता जेल में बंद कार्यकतार्ओं से बात नहीं करते। वह भी शहाबुद्दीन जैसे अपराधियों से।

अर्णव ने किया भ्रामक ट्वीट

पटना(अपना बिहार, 8 मई 2017) - राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर शहाबुद्दीन के साथ बातचीत का टेप जारी करने वाले निजी चैनल के पत्रकार अर्णव गोस्वामी ने रविवार को एक बार फिर भ्रामक ट्वीट किया। ट्वीट में कहा गया कि राजद प्रमुख अपने उपर लगे आरोपों का सायं चार बजे मीडिया के समक्ष जवाब देंगे। इस ट्वीट के बाद अर्णव ने श्री प्रसाद पर तंज कसते हुए कहा कि क्या श्री प्रसाद को शहाबुद्दीन ने मीडियाकर्मियों से बातचीत की अनुमति दे दी है। वहीं जवाब में राजद के अधिकारिक ट्वीटर हैंडलर पर संदेश प्रसारित किया गया कि अर्णव ने भ्रामक ट्वीट किया है।

दो अन्य विवि के कुलपतियों की नियुक्ति

पटना(अपना बिहार, 7 मई 2017) - कुलाधिपति सह राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के लिए प्रो. अवध किशोर राय को कुलपति तथा प्रो. फारूख अली को प्रतिकुलपति एवं जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के लिए डॉ. रवि प्रताप सिंह को नया प्रतिकुलपति नियुक्त किया है। नव-नियुक्त कुलपति एवं प्रतिकुलपतियों का कार्यकाल उनके प्रभार-ग्रहण की तिथि से प्रारंभ होकर तीन वर्षों का होगा।

टीके ने ली दो मासूमों की जान, परिजनों में आक्रोश

पटना(अपना बिहार, 7 मई 2017) - मुजफ्फरपुर के पटोरी गांव में खसरा और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) का टीका लगने के बाद दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक बच्चे बीमार हो गए। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि शुक्रवार को पटोरी गांव में मिजिल्स व जेई की रोकथाम के लिए बच्चों को टीका लगाया गया था। इस बीच शाम होते-होते सभी बच्चों को उल्टी व दस्त शुरू हो गया तथा कई बच्चों को बुखार की शिकायत की गई। इस बीच राजाबाबू दास के बेटे रंजीत दास (नौ माह) और गनौर सहनी के बेटे सोनू कुमार (डेढ़ वर्ष) की रात में मौत हो गई।

इधर, मुजफ्फरपुर की सिविल सर्जन ललिता सिंह ने शनिवार को बताया कि मेडिकल टीम को प्रभावित गांव रवाना कर दिया गया है तथा इस मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है। जांच के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। उन्होंने बताया कि बीमार बच्चों को मुजफ्फरपुर श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) में भतीर् कराया गया।

अर्णव के तमाशे पर खूब नाचे सुशील मोदी, लगायी राजभवन तक दौड़

पटना(अपना बिहार, 7 मई 2017) - भाजपाई सांसद के सहयोग से निजी न्यूज चैनल प्रारंभ करने वाले अर्णव द्वारा लालू-शहाबुद्दीन आडियो टेप मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी जमकर नाचे। यहां तक कि उन्होंने राजभवन तक की दौड़ लगायी। इससे पहले संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि आडियो पिछले वर्ष राम नवमी के दिन का है। उन्होंने खुलासा करते हुए कहा कि सीवान जेल में बंद दुर्दान्त अपराधी मो शाहबुद्दीन और लालू प्रसाद के टेलीफोन पर वार्ता का टेप सार्वजनिक होने के बाद प्रमाणित हो गया है अपराधियों के निर्देश पर बिहार की सरकार चल रही है। उन्होंने कहा कि आखिर जेल में 50 से ज्यादा मुकदमों का आरोपी एवं सजायाफ्ता कैसे जेल से लालू प्रसाद के लगातार सम्पर्क में रहता था और उसके कहने पर सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिए जाते थे।

श्री मोदी ने कहा कि अपराधी, राजनेता और सरकार के गठजोड़ का ही परिणाम है कि राज्य की अपराध की स्थिति दिन पर दिन खराब होती जा रही है। उन्होंने कहा कि टेप से यह भी प्रमाणित हो गया है कि शाहबुद्दीन जेल से सामानान्तर सरकार चला रहा था और बीडीओ /एसडीओ को धमकी दिया करता था। उन्होंने कहा कि एक ओर राज्य में शराबबंदी हो रही थी दूसरी ओर शाहबुद्दीन शराब के साथ पकड़े गए लोगों को छुड़ाने के लिए धमकी दे रहा था। श्री मोदी ने कहा कि राज्य के मंत्री अब्दूल गफूर ,राजद विधायकों के साथ शहाबुददीन से मिलने गए परन्तु मंत्री को बर्खास्त तो दूर की बात पूछताछ करने की भी हिम्मत नहीं जुटा पाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस दुर्दान्त अपराधी को राजद से निलंबित या बर्खास्त तो दूर की बात है उन्हे राजद की सर्वोच्च नीति निर्धारक राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सम्मानित सदस्य बना कर रखा गया है।

दहेजबंदी अभियान चलायेंगी जीविका से जुड़ी दीदियां

पटना(अपना बिहार, 7 मई 2017) - जीविका की दीदियां अब दहेज प्रथा के खिलाफ घर-घर अलख जगायेंगी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा आरंभ किये गये सामाजिक सुधार के अभियान में वह गांव से शहर तक पहुंचाने का काम करेंगी. राज्य में पांच लाख 80 हजार जीविका समूह हैं. हर समूह में 10 सदस्य जुड़े हुए हैं.

लोकसंवाद में मुख्यमंत्री के समक्ष दिया गया सुझाव अब एक अभियान का रूप लेने लगा है. ग्रामीण विकास सह संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि जीविका समूहों द्वारा राज्य में महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है. जीविका की दीदी राज्य में स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय निर्माण, राज्य में लागू हुई पूर्ण शराबबंदी अभियान और नीरा उत्पादन में सहयोग कर रही हैं. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. इस आंदोलन में समाज के हर तबकों को आगे आना होगा. इस कार्य में जीविका की दीदी भी शामिल होंगी. उनको भी दहेज मुक्त समाज निर्माण में जनजागृति फैलाने की जिम्मेवारी सौंपी जा रही है.

जीविका की दीदियों की पहुंच घर-घर की महिलाओं तक है. ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार के साथ दीदी लोग जागरूकता का काम करेंगी. मुख्यमंत्री की घोषणा को लेकर जीविका द्वारा इस दिशा में कार्ययोजना तैयार की जा रही है. जीविका की स्टेट प्रोग्राम मैनेजर अर्चना तिवारी ने बताया कि अभी तक मुख्यमंत्री की घोषणा को लेकर किसी तरह का दिशा निर्देश सरकार की ओर से प्राप्त नहीं हुआ है.

फिर भी जीविका द्वारा दहेज रहित विवाह और बाल विवाह को रोकने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है. इसके तहत दहेज प्रथा और बाल विवाह को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. यह कार्य योजना आगामी दो माह में तैयार हो जायेगी. उसके बाद दीदियों को दहेजमुक्त समाज बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जायेगा. प्रशिक्षण के बाद उनको बिना दहेज की शादियों को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया जायेगा. उन्होंने बताया कि जीविका की दीदियों द्वारा इस तरह के सामाजिक मुद्दों को लेकर काम किया जाता है.

 

 

 

चिराग ने बोला लालू पर हमला

पटना(अपना बिहार, 7 मई 2017) - लोजपा के केन्द्रीय संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जमुई सांसद चिराग पासवान ने लालु- शहाबुद्वीन आॅडियो प्रकरण जारी होने पर कहा है कि यह कोई नई बात नहीं है कि लालू जी अपराधियों को संरक्षण देने के लिए जाने जाते है, यह तो उनका पुराना रिकार्ड रहा है, यही वजह है कि 90 का दशक बिहार में जंगलराज कहलाता था । पहले तो अगर हम लोग बोलते थे की लालू जी निरंतर अपराधियों को संरक्षण देते है तो कहा जाता था कि विरोधी लोग सिर्फ टिका- टिप्पणी करते रहते है परन्तु आज जब यह सत्य प्रमाणिक तौर पर जनता के सामने आ गया है कि कैसे लालू जी शहाबुद्वीन जैसे संगीन अपराधी जिनपर हत्या, अपहरण, फिरौती जैसे संगीन अपराध एवं तेजाब से नहलाने सहित दर्जनों जघन्य अपराध दर्ज हो उनसे बात करते हुए तथा दिशा - निर्देश लेते हुए आॅडियों टेप जारी हुआ है इससे तो यह ही साबित होता है कि प्रदेश की सरकार अपराधी चला रहे है या यूॅ कहे कि पुरी की पुरी सरकार अपराधियों के चुंगल में है।

पटना नगर निगम के कर्मचारियों की मौत के खिलाफ माले-ऐक्टू ने किया प्रदर्शन.

पटना(अपना बिहार, 7 मई 2017) - पिछले दिनों आयकर गोलबंर पर पटना नगर निगम के दो कर्मचारियों जीतेन्द्र पासवान व दीपक चौधरी की मौत के खिलाफ आज भाकपा-माले की पटना जिला कमिटी व ऐक्टू ने संयुक्त रूप से नगर निगम कार्यालय पर आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया. प्रदर्शन का नेतृत्व पटना जिला कमिटी भाकपा-माले के सचिव अभ्युदय, राज्य कमिटी सदस्य नवीन कुमार, ऐक्टू नेता रणविजय कुमार, जिला कमिटी सदस्य पन्नालाल, अनुराधा सिंह, विभा गुप्ता, सुधीर कुमार, आइसा नेता बाबूसाहब आदि ने किया. इंटर काउंसिल के पास से यह जुलूस आरंभ हुआ और बुद्ध मार्ग होते हुए नगर निगम कार्यालय पहुंचा. नगर निगम कार्यालय पर प्रदर्शनकारियों ने घंटे भर नारेबाजी की और सभा आयोजित की गयी.

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा के प्रति नगर निगम बिलकुल संवेदनहीन बना हुआ है. काम के दौरान कर्मचारियों की लगातार मौतें हो रही हैं, लेकिन न तो सरकार और न ही नगर निगम प्रशासन इस पर कोई कदम उठा रहा है. यह पूरी तरह से अमानवीय और कर्मचारी विरोधी आचरण है.

प्रदर्शन के बाद माले व ऐक्टू के प्रतिनिधिमंडल ने 6 सूत्री ज्ञापन नगर निगम आयुक्त को सौेंपा. ज्ञापन के जरिए मांग की गयी है कि मृतकों के परिजनों को 10 लाख राशि मुआवजा के बतौर अविलंब प्रदान किया जाए और सरकारी नौकरी भी दी जाए. इसके लिए नगर निगम के सक्षम अधिकारी को नियुक्त किया जाए.

दूसरी मांग में बिहार में असंगठित कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम-11 के तहत मिलने वाली राशि भी सरकार से मांगी गयी है. प्रतिनिधिमंडल ने सभी दैनिक सफाई मजदूरों, मौसमी सफाई मजदूरों के लिए आवश्यक सुरक्षा का प्रबंध करने, पटना नगर निगम के मजदूरों को ईपीएफ से जोड़ने तथा इएसआई का लाभ देने, सभी सफाई मजदूरों को सप्ताह में कम से कम एक बार मेडिकल जांच करवाने व सफाई मजदूरों के लिए मास्क, बूट आदि का प्रबंध करने, अन्य सुरक्षात्मक व जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने तथा आयकर गोलबंर की घटना के लिए उच्चस्तरीय पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गयी है.

जिला सचिव अभ्युदय ने कहा कि नगर निगम आयुक्त से वार्ता सकारात्मक रही, लेकिन यदि हमारी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गयी तो हम और बड़े आंदोलन में जायेंगे.

अपराधियों को मिल रहा है सत्ता का संरक्षण : भगवान

पटना(अपना बिहार, 7 मई 2017) - जन अधिकार पार्टी (लो) के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री भगवानसिंह कुशवाहा ने कहा है कि महागठबंधन की सरकार अपराधियों के बल पर चल रही है। आज पटना में उन्होंने कहा कि राजद प्रमुख लालू यादव जेल में बंद अपराधी से फोन पर बात करते हैं। इससे स्पष्ट हो गया है कि अपराधियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। इस मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुप्पी कई आशंकाओं को जन्म दे रही है। श्री कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजद प्रमुख के खिलाफ काम के लिए बदले जमीन के कई मामले उजागर हुए हैं। इस मामले में नीतीश कुमार और लालू यादव दोनों मौन है। इससे दोनों के बीच मिलीभगत उजागर हो रही है।

प्रशिक्षण शिविर की सफलता के लिए बधाई

पटना(अपना बिहार, 7 मई 2017) - राजद के प्रदेश प्रवक्ता मनीष यादव ने कहा कि राजगीर में आयोजित तीन दिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक काफी सफल एवं अनुशासनपूर्वक संपन्न हुई। राजद की बेहद अनुशासित बैठक की शानदार सफलता से राज्य ही नहीं देश भर में नये बदलाव का संकेत गया जिसका उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के कुशल नेतृत्व और प्रबंधन को जाता है। प्रशिक्षण शिविर की व्यापक सफलता के लिए प्रदेश राजद श्री यादव को हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद देता है। श्री यादव ने कहा कि प्रशिक्षण शिविर में देश भर के प्रतिनिधियों ने देश के प्रख्यात विद्वानों को बेहद गंभीरतापूर्वक सुना और दक्षिणपंथी आरएसएस के राजनीति के दुष्प्रभाव और खतरों से देश की एकता और अखंडता को कायम रखने का गुर भी सीखा। आरएसएस और दक्षिणपंथी कट्टरपंथी राजनीति के खिलाफ प्रयोगशाला बनी बिहार की धरती से लालू प्रसाद ने देश भर के सेकुलर ताकतों को एकजुट कर 2019 में दिल्ली पर चढ़ाई का शंखनाद किया। श्री यादव ने कार्यक्रम के बेहतरीन कवरेज के लिए देश भर के मीडिया कर्मियों का आभार व्यक्त किया।

अर्वण के स्टंट से इतराये विपक्ष ने कहा - खतरे में महागठबंधन

पटना(अपना बिहार, 7 मई 2017) - विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने एक सजायाफ्ता कैदी शहाबुद्दीन से बात-चीत की, जिसका आॅडियो लोगों के सामने आ गया है। जिस से महागठबंधन पर खतरे की घंटी बजने लगी। इस मामाले में जदयू ने अपना पीछा छुड़ा चाहती हंै। सवाल यह है कि क्या एक सजायाफ्ता कैदी से बातें करने की अनुमति और अधिकार लालू प्रसाद को हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मामले में चुप न रहें। लालू पर अपराधिक मामला दर्ज हो, लालू का बेल खारीज करने के लिए सरकार पहल करें और पूरे मामले की जांच हों।

डा. कुमार ने कहा कि इस मामले में जदयू के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों में बातचीत की सत्याता की जांच की जायेंगी। सिर्फ इतना कहने से मात्र खनापूत्र्ति करना होगा और मामले से जदयू अपना पीछा नहीं छुड़ा सकती हैं। बचाव में राजद के नेता कह रहें हैं कि शहाबुद्दीन राजद कार्यसमिति के अभी भी सदस्य हैं।

डा. कुमार ने कहा कि लालू प्रसाद व उनके परिवार पर आए दिन आरोप लग रहे हैं। जिन में आय से अधिक संपति अपने बेटों के नाम बनाया। मॉल बनाने व कई कपंनियों के मालिक लालू के बेटों को बनाया गया। साथ ही जू में मिट्टी भराने सहित अनेकों आरोप लगाये गये हैं, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब तक अपनी चुप्पी साध ली है। अगर नीतीश इस पर कुछ बोलते हैं, तो उनकी सरकार गिर जायेंगी और वे सीएम पद से हट जायेंगे, इस लिए चुप हैं।

डा. कुमार ने कहा कि नीतीश जी आप बार-बार कहते रहे कि न्याय के विकास होगा। लेकिन जब आप की सरकार के सहयोगी दल राजद प्रमुख लालू प्रसाद आरोपों के घेरे में हैं, तब आप चुप क्यों है। कानून सबों के लिए समान हैं। आप अपनी सरकार बचाने के लिए लालू जी को पूरी छुट दे रखी हैं, आप न्याय करें और लालू के ऊपर लगाये गये सभी आरोपों की जांच करा कर, उन्हें सजा दिलाने का काम करें।

बनिया समाज के जातिगत सम्मेलन में शामिल हुए सुशील मोदी, सामने आया दोहरा राजनीतिक चरित्र

पटना(अपना बिहार, 7 मई 2017) - जातिगत राजनीति से खुद को दूर बताने वाले भाजपा विधानमंडल के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कल पटना में वैश्य समाज के सम्मेलन में शामिल हुए और इस मौके पर उन्होंने खूब राजनीति की। वहीं इस मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार में शिक्षा राज्य मंत्री अनुपमा जयसवाल ने देश के निर्माण में वैश्य समाज की भूमिका की चर्चा करते हुए कहा कि वैश्यों ने अपनी मेहतन और लगन से समाज बनाने का काम किया है। समाज की एकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि हम एक होकर ही बड़ा लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। समाज को हर परिस्थिति में अपने लक्ष्य के प्रगति प्रतिबद्ध होना चाहिए।

कार्यक्रम में आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए अखिल भारतीय जयसवाल सर्ववर्गीय युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व विधायक पवन जयसवाल ने कहा कि हमारी पूरी आबादी 27 फीसदी है, जबकि बिहार विधान मंडल के 318 सदस्यों में से वैश्य समाज के सदस्यों की संख्या मात्र 26 है। पूर्व सांसद राजनीति प्रसाद ने इस मौके पर कहा कि समाज के विकास में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके लिए समाज को प्रयास को प्रयास करना चाहिए। बेतिया के सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि वैश्य समाज सामाजिक कार्यों के लिए बराबर आगे रहा है। सामाजिक कार्यों के लिए आर्थिक मदद भी करता रहा है। सांसद रमा देवी ने राजनीतिक भागीदारी की चर्चा करते हुए कहा कि जनसंख्या के अनुपात में समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी अभी नहीं मिली है। इसके लिए मिलकर संघर्ष करना होगा।

अर्णव की साजिश से विपक्षी नेताओं के अरमानों को लगे पंख, लालू के बहाने नीतीश को घेरा

पटना(अपना बिहार, 7 मई 2017) - एक निजी न्यूज चैनल द्वारा राजद प्रमुख लालू प्रसाद और तिहाड़ जेल में बंद पूर्व सांसद शहाबुद्दीन का आडियो टेप आने के बाद सूबे का सियासी तापमान बढ़ गया। यह खबर जंगल में लगी आग की तरह फैली और देखते ही देखते एक साथ कई विपक्षी नेताओं ने लालू-नीतीश पर हमला तेज कर दिया। भाजपा के सुशील मोदी ने तो ट्वीट कर बिहार सरकार से एडवायजरी जारी करने की मांग की है। सुशील मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि शहाबुद्दीन को लालू ने बचाने की कोशिश की और इस मामले में नीतीश सबकुछ जानते हुए भी चुप क्यों रहे? टीवी रिपोर्ट में यह दिखाया गया है कि शहाबुद्दीन लालू से फोन पर बात करते हैं और सीवान के तत्कालीन एसपी के बारे में लालू को कुछ निर्देश देते हैं।

टेप के सामने आने के बाद बिहार में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गयी। जदयू नेता और प्रवक्त नीरज कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बिहार में पूरी तरह कानून का राज है। उन्होंने कहा कि नियमावली के तहत इसका सत्यापन किया जायेगा. किस मोबाइल से फोन हुआ है और क्या बात हुई है, इसकी जांच की जायेगी।

वहीं सुशील मोदी ने कहा कि टीवी चैनल लालू का परदाफाश कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। श्री मोदी ने मीडिया से बातचीत में इस मामले में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत करने और राज्यपाल से मुलाकात करने की बात कही।

वहीं, मामला सामने आने के बाद हम के अध्यक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है कि इससे साफ साबित हो गया है कि बिहार में सरकार पूरी तरह माफियाओं के संरक्षण में चल रही है। मांझी ने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। वहीं मामले पर मीडिया से बातचीत में राजद के वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह ने कहा है कि शहाबुद्दीन का लालू से बातचीत करना तो गलत है, लेकिन हमलोग शहाबुद्दीन को पार्टी से बाहर नहीं करेंगे। वह हमारी पार्टी में हैं और पार्टी में बने रहेंगे।

पशुओं के साथ क्रूरता को लेकर सरकार सख्त, सभी जिलों में पशु क्रूरता निवारण सोसायटी का गठन, मंत्रिपरिषद की बैठक में आठ प्रस्तावों पर सहमति

पटना(अपना बिहार, 6 मई 2017) - राज्य सरकार सूबे में पशुओं पर होने वाले अत्याचार को लेकर अब सख्त रवैया अपनायेगी। इस संबंध में शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में सभी जिलों में पशु क्रूरता निवारण सोसायटी के गठन के फैसले को स्वीकृति दी गयी। कैबिनेट सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने बताया कि बैठक में 8 मामलों पर निर्णय लिये गये।

उन्होंने बताया कि गृह विभाग (विशेष शाखा) के अन्तर्गत बिहार गृह रक्षा वहिनी सेवा नियमावली, 2005 के संबंध में लिये गये निर्णय के अनुसार सिपाही या उसके समकक्ष पदों पर न्यूनतम शैक्षणिक अर्हता इंटरमीडिएट या राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त समकक्ष परीक्षा की उत्तीर्णता रखी गई है। साथ ही सेवाकाल में बिहार गृह रक्षा वाहिनी के मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की अनुकम्पा के आधार पर गृह रक्षा वाहिनी सेवा के सिपाही/समकक्ष के पद पर नियुक्ति हेतु प्रक्रिया में आयुसीमा एवं शारीरिक मानदंड में शिथिलता देने की शक्ति महासमादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, बिहार को पुलिस महानिदेशक, बिहार के समान होगी। सेवाकाल में बिहार गृह रक्षा वाहिनी के मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की अनुकम्पा के आधार पर गृह रक्षा वाहिनी सेवा के वर्ग-घ के पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया में आयुसीमा में शिथिलता देने की शक्ति महासमादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, बिहार को पुलिस महानिदेशक, बिहार के समान होगी। आगे गृह विभाग (आरक्षी शाखा) के ही तहत बिहार अग्निशाम सेवा अधिनियम, 2014 के अन्तर्गत महत्त्वपूर्ण भवनों में अग्नि से सुरक्षा हेतु पद सृजन की स्वीकृति दी गई। इस बात की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि विभिन्न सरकारी भवनों में तीन अथवा दो की संख्या में अग्निशमन पदाधिकारी के पद सृजन की स्वीकृति हुई है। तद्नुसार मुख्य सचिवालय भवन, विकास भवन, सिंचाई भवन, विश्वेश्वरैया भवन, मुख्यमंत्री सचिवालय संवाद भवन तथा सूचना भवन हेतु तीन-तीन (एक फायर सब स्टेशन अफसर, दो फायरमैन) एवं नियोजन भवन, पटना हाईकोर्ट भवन तथा राज भवन हेतु दो-दो (एक फायर सब स्टेशन अफसर, एक फायरमैन) के पदों का सृजन किया गया है।

िवहीं जल संसाधन विभाग के अन्तर्गत जल संसाधन विभाग के अधीन बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायक केन्द्र , पटना के नियंत्रण में विश्व बैंक सम्पोषित बिहार कोसी बेसिन विकास परियोजना अन्तर्गत उत्कृष्टता केन्द्र के लिए गणितीय प्रतिमान केन्द्र के सुचारू संचालन हेतु एक समर्पित दल का तकनीकी/विशेषज्ञ सम्वर्ग के गठन की स्वीकृति दी गई। आपदा प्रबंधन विभाग के अन्तर्गत राज्य आपदा रिस्पांस बल में भारतीय सेना/नौसेना के सेवानिवृत्त कमीशन प्राप्त/जूनियर कमीशन प्राप्त/नन कमीशन प्राप्त अधिकारी एवं जवानों तथा बिहार गृह रक्षा वाहिनी (स्पेशल बटालियन) के जवानों की संविदा के आधार पर नियुक्ति के संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प सं० 698/आ०प्र०, दिनांक- 16.03.2010 की कंडिका 5 में वर्णित नियुक्ति प्रक्रिया में संशोधन की स्वीकृति तथा पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के अन्तर्गत बिहार राज्य के सभी जिलों में गठित पशु क्रूरता निवारण सोसाईटी को अधिसूचित करने की स्वीकृति दी गई।

फिर मिली बिहार को आधी बिजली, एक दिन पहले ही बिजेंद्र यादव ने किया था केंद्र से सस्ती और पूरी बिजली देने की मांग

पटना(अपना बिहार, 6 मई 2017) - शुक्रवार को बिहार को केन्द्रीय कोटे की मात्र आधी बिजली ही मिली। इस कारण राज्य सरकार को बाजार से बिजली खरीदकर सप्लाई करनी पड़ी। कोटा कम मिलने के कारण अन्य दिनों की तुलना में कम बिजली आपूर्ति हुई। दर्जन भर से अधिक ग्रिड को लोडशेडिंग करना पड़ा। बारी-बारी से बिजली आपूर्ति की गई।

गर्मी को देखते हुए गुरुवार को समाप्त हुए दो दिवसीय ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में बिहार ने केन्द्र से सस्ती और कोटे की पूरी बिजली देने की मांग की थी। ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा था कि बिहार को कोटे के अनुसार पूरी बिजली दी जाए। कोटा कम मिलने पर बिहार को उन यूनिटों से बिजली दी जाए जो सस्ती हों। केन्द्र सरकार ने बिहार की मांग पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा भी दिया, लेकिन गुरुवार को समाप्त हुए सम्मेलन के अगले ही दिन शुक्रवार को कोटे की आधी बिजली ही दी गई। बिहार को केन्द्रीय सेक्टर से 2942 मेगावाट बिजली आवंटित है पर इसमें से मात्र 1545 मेगावाट ही मिली। इस कारण बिहार को बाजार से 1360 मेगावाट बिजली खरीदनी पड़ी।

केन्द्रीय सेक्टर से कम बिजली मिलने का कारण तीन यूनिटों का ठप होना रहा। एनटीपीसी फरक्का यूनिट को ओवरहॉलिंग के कारण 29 अप्रैल को ही बंद कर दिया गया है। एनटीपीसी बाढ़ थर्मल पावर की यूनिट संख्या पांच चार मई को बंद हो गई। एनटीपीसी की ही तालचर की यूनिट संख्या दो कोयले की कमी के कारण बंद है। जबकि राज्य सरकार की अपनी इकाई कांटी थर्मल पावर की यूनिट संख्या दो कोयले की कमी के कारण बंद हो गई। कांटी की ही नई यूनिट तकनीकी खराबी के कारण नहीं चल सकी। मिली जानकारी के अनुसार केन्द्रीय कोटा 2942 मेगावाट तय है। जबकि केंद्र से केवल 1545 मेगावाट बिजली मिली।

इससे पहले बुधवार को नई दिल्ली में शुरू हुए देशभर के ऊर्जा मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन राज्य के ऊर्जा एवं वाणिज्यकर मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने वित्तीय वर्ष 2012-13 में 120 यूनिट प्रति व्यक्ति खपत से 2016-17 में 310 (अनुमान) यूनिट खपत होने को आधार बनाते हुए कहा था कि बिहार को केन्द्रीय सेक्टर से 2942 मेगावाट आवंटित है पर औसतन 2200 मेगावाट ही बिजली मिल पाती है। इसलिए जरूरत को पूरा करने के लिए केन्द्रीय सेक्टर की सस्ती बिजली दी जाए। एनटीपीसी की देशभर की उत्पादन इकाइयों के रेट अलग-अलग होते हैं। क्षेत्रीय विषमता को दूर करने के लिए नेशनल टैरिफ पॉलिसी बनाई जाए। इससे आने वाली इकाइयों से भी सस्ती बिजली मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा था कि बरौनी को अभी इस्टर्न कोल फील्ड से कोयला मिल रहा है। सेंट्रल कोल फील्ड से कोयला मिलने पर बरौनी की बिजली पर एक रुपए प्रति यूनिट कम खर्च होने से बिहारवासियों को सस्ती बिजली मिलेगी। उत्पादन इकाइयों से गृह राज्य को 50 फीसदी बिजली मिलनी है। कहलगांव से अभी मात्र 74.7 मेगावाट बिजली मिल रही है। अविलंब 750 मेगावाट बिजली दी जाए। बीआरजीएफ की 9165 करोड़ में से मात्र 4949 करोड़ ही मिला है, जबकि खर्च 6202 करोड़ हो चुका है। बकाया राशि का भुगतान अविलंब किया जाए।

राष्ट्रपति पद के लिए साझा उम्मीदवार : जदयू

पटना(अपना बिहार, 6 मई 2017) - राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्षी दलों ने भी ताल ठोंका है। जदयू के राष्ट्रीय महासचिव के सी त्यागी ने पटना में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री सह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के नेतृत्व में सभी गैर भाजपाई दलों के बीच बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की ओर से जल्द ही राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार की घोषणा होगी। वहीं राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर लग रहे आरोपों के संबंध में पूछने पर उन्होंने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रदेश नेता ही अपनी बात रख सकते हैं।

सुशील मोदी ने खरीदे फर्जी कंपनी के शेयर : राजद, मनोज झा ने किया खुलासा

पटना(अपना बिहार, 6 मई 2017) - राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. मनोज झा ने भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी पर गंभीर आरोप लगाया है। राजद के प्रदेश अध्यक्ष डा. रामचंद्र पूर्वे के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि सुशील मोदी ने जिस कंपनी के शेयर खरीदे वह फर्जी है। उसका कोई डाटा नहीं है। दस्तावेज जारी करते हुए प्रो. झा ने कहा कि श्री मोदी द्वारा जिस कंपनी का शेयर खरीदा गया वह फर्जी कंपनी मनी लाउड्रिंग यानी ब्लैक मनी को व्हाईट में बदलने का काम करती है

श्री मोदी पर हमला करते हुए प्रो. झा ने कहा कि श्री मोदी ने अपने पुस्तैनी सम्पत्ति को भी छुपाया। साथ ही साथ ही शेयर की खरीदारी में भी घाल मेल किया। दस्तावेज जारी करते हुए उन्होंने कहा कि सुशील मोदी ने जमीन-खरीद का जो ब्यौरा दिया है, उसमें काफी घालमेल है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्री मोदी के भाई के नाम से भी कई कंपनियां हैं जो फर्जी काम करती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सभी मामलों की जांच करने की मांग की।

सर्वेक्षण रिपोर्ट ने खोली पोल : नंद किशोर

पटना(अपना बिहार, 6 मई 2017) - बिहार विधान सभा की लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा है कि बड़ी-बड़ी बात करने वाले मुख्यमंत्री नीतीष कुमार की स्वच्छता सर्वेक्षण ने कलई खोल दी है। न केवल टाप 10 बल्कि टाप 100 में भी बिहार का कोई शहर नहीं आ सका। साफ-सफाई और जनसुविधाओं का अभाव झेल रही राजधानी पटना तो 262वें स्थान पर फेंका गयी है।

श्री यादव ने आज यहां कहा कि हद तो यह हो गयी कि मुख्यमंत्री का गृह जिला नालंदा का मुख्यालय बिहारशरीफ 147वें पायदान पर है, जिसे बिहार का सबसे साफ-सुथरा शहर माना गया। भारतीय गुणवत्ता परिषद ने देष के 434 शहरों का सर्वेक्षण किया जिसमें बिहार के 27 जिले शामिल थे। गुरूपर्व के अवसर पर राज्य सरकार ने अपनी पूरी मषीनरी को साफ-सफाई के काम में झोंक कर वाह वाही लूटने का प्रयास किया था लेकिन उसके बाद वहीं ढाक के तीन पात ने असलियत को उजागर कर दिया। साफ-सफाई, सीवरेज निर्माण और सौन्दर्यकरण के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद सर्वेक्षण का यह ह्यसर्टिफिकेटह्ण राज्य सरकार का असली चेहरा दिखाता है। दरससल राजधानी में यूरिनल और शौचालय बनाने की योजना कागज पर ही दौड़ती रही है। 70 के दषक में सार्वजनिक स्थानों पर बनाये गये 50 मूत्रालय कब के ध्वस्त हो गये। 2013 से लेकर अब तक कई बार यूरिनल बनाने का योजना बनी लेकिन वह फाइलों तक सिमटी रही। 130 अल्ट्रा माडर्न डीलक्स शौचालय निर्माण की योजना भी खटाई में फूल रही है।

श्री यादव ने कहा कि पटना नगर निगम तो महागठबंधन और विषेष कर जदयू का राजनीतिक अखाड़ा बना हुआ है। शह-मात के खेल में महापौर और निगम प्रषासन के उलझे रहने के कारण शहर का बेड़ा गर्क हो रहा है। केन्द्र सरकार द्वारा कराये गये सर्वेक्षण का प्रमाण पत्र राजधानी की वास्तविकता का सही आईना है। बिहार में निकायों के चुनाव की बजी दुदुभी के बीच सर्वेक्षण रिपोर्ट सरकार के दावे को पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। राज्य सरकार की लापरवाही से बनी राजधानी की नारकीय स्थिति ने पटना को स्मार्ट सिटी की श्रेणी में जाने पर भी आषंका पैदा कर दी है।

निर्भया के जैसे ही अन्य पीड़िताओं को भी मिले इंसाफ : मीसा, बिलकिस बानो मामले में उम्र कैद क्यों, पूछा सवाल

पटना(अपना बिहार, 6 मई 2017) - निर्भया मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये फैसले का स्वागत करते हुए राजद सांसद डा. मीसा भारती ने कहा है कि केवल एक मामले में फैसला आ जाने से सूरत नहीं बदलेगी। आवश्यकता है कि बलात्कार के सभी मामलों में त्वरित निष्पादन हो और दोषी पाये जाने पर आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो। दूरभाष पर बातचीत में उन्होंने कहा कि निर्भया मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। इस फैसले पर अब बिना कोई देरी किये अमल होना चाहिए ताकि हैवानियत करने वालों को उनके किये की सजा मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि देश की न्यायिक व्यवस्था में और सुधार की आवश्यकता है ताकि बलात्कार के अन्य मामलों में भी पीड़ितों एवं उनके परिजनों को इंसाफ मिल सके। उन्होंने कहा कि गुजरात की बिलकिस बानो रेप में भी निर्भया के जैसे ही दरिंदगी की गयी थी। बिलकिस बानो की तीन साल की बच्ची को उसके हाथ से छीन कर पत्थर पे पटक कर मार दिया था। इतना ही नहीं उसकी छोटी बहन, माँ का उसके सामने बलातकार किया गया। उस समय वह 5 माह की गर्भवती थी । उसके साथ 10 लोगो ने बलातकार किया था। डा. भारती ने कहा कि बिलकिस बानो को भी इंसाफ मिलना चाहिए।

तेज प्रताप को पेट्रोल पंप का आवंटन गलत, सुमो ने लगाया आरोप, वर्ष 2011 में हुआ था आवंटन, केंद्र सरकार से शिकायत करेंगे सुमो

पटना(अपना बिहार, 6 मई 2017) - भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया है कि गलत दस्तावेज के आधार पर वर्ष 2011 में लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव ने पेट्रोल पंप का आवंटन करा लिया. उन्होंने इसके लिए भारत पेट्रोलियम के तत्कालीन पदाधिकारियों को भी दोषी ठहराया. सुशील मोदी ने कहा कि इस मसले पर वह 11 मई को पेट्रोलियम मंत्री धमेंद्र प्रधान से भी बातचीत करेंगे. सुशील मोदी ने लालू परिवार पर हमला बोलते हुए कहा कि लालू परिवार ने राजनीति को व्यापार बना दिया है. सुशील मोदी ने कहा कि तेज प्रताप की ओर से 2011 में पेट्रोल पंप के लिए आवेदन दिया गया, जबकि जमीन तेज प्रताप के नाम नहीं थी. कत्याल परिवार ने 136 डिसमिल जमीन तेजस्वी को लीज पर सौंपी. उसी जमीन को तेज प्रताप ने अपने नाम से दिखाकर पेट्रोल पंप का आवंटन करा लिया.

सुशील मोदी ने कहा कि पंप लेने की प्रक्रिया से पहले एक शपथ-पत्र देना पड़ता है, जिसमें यह लिखा जाता है कि उक्त आवेदक किसी भी निजी और सरकारी पद पर आसीन नहीं होगा. साथ ही, किसी भी तरह के सरकारी पद का लाभ नहीं लेगा. सुशील मोदी ने पूछा है कि आखिर कैसे तेज प्रताप यादव सरकारी गाड़ी का प्रयोग करते हैं और सरकार से वेतन और भत्ते लेते हैं ? सुमो ने संवाददाताओं से कहा कि मंत्री पद की सुविधा उठाना गैरकानूनी है. तेज प्रताप यादव ने जो अपने संपत्ति का उल्लेख किया है उसमें इस पेट्रोल पंप का जिक्र नहीं है.

कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने फूंका पीएम का पुतला

पटना(अपना बिहार, 6 मई 2017) - पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा दो भारतीय जवानों के सिर काटने की घटना के मद्देनजर एवं केन्द्र सरकार द्वारा इस घ्पटना के विरोध में अब तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं करने के विरोध में बिहार प्रदेश महिला कांग्रेस द्वारा भारतीय जनता पार्टी के बीरचन्द पटेल पथ स्थित प्रदेश कार्यालय के समक्ष देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला दहन किया गया।बिहार प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्षा अमिता भूषण के निदेश पर इस पुतला दहन कार्यक्रम का नेतृत्व प्रदेश महिला कांग्रेस की वरीय उपाध्यक्ष प्रो. वीणा कर्ण ने किया। बिहार प्रदेश महिला कांग्रेस की उपाध्यक्ष प्रो. वीणा कर्ण के नेतृत्व में इस पुतला दहन कार्यक्रम में विधान पार्षद तनवीर अख्तर, महिला कांग्रेस की उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता जयन्ती झा, सुधा मिश्रा, अनामिका झा, नीलम सिन्हा, सुनीता साक्षी, सुनन्दा सिंह, रानी रविदास, धीरू यादव, राजेन्द्र चौधरी व अन्य कांग्रेसजन शामिल थे।

क्रिकेट के विकास में रूचि ले सरकार : कांग्रेस

पटना(अपना बिहार, 6 मई 2017) - बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि वह सूबे में क्रिकेट के विकास को गंभीरता से ले। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति की पहल से बिहार क्रिकेट एसोसिएशन को सालों बाद बीसीसीआई की फुल मेम्बरशिप की मान्यता मिली, जिसकी मुक्तकंठ से सराहना हुयी है। इसका इंतजार बिहार के क्रिकेट खिलाड़ियों और प्रेमियों को एक लम्बे अरसे से भी था। श्री सिंह ने कहा कि बिहार में क्रिकेट की शुरूआत 1935 ई. से हुयी थी, लेकिन यह हम बिहार वासियों के लिए बड़े दु:ख की बात है कि आज भी बिहार में क्रिकेट का समुचित विकास नहीं हो पाया है। वर्ष 2000 में बिहार, उप्र और मप्र के बँटवारा के बाद उप्र और मप्र में क्रिकेट का विकास यथावत रहा। परंतु बिहार में लोढ़ा समिति के मानकों के आधार पर अब जाकर क्रिकेट विकास के रास्ते पर चला है। इससे बिहार के क्रिकेट नौनिहालों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना कैरियर बनाने का मौका मिलेगा। यह बिहार नए औद्योगिक विकास का द्वार भी खोलेगा।

स्वार्थ छोड़ देशहित में एकजुट हों सभी समाजवादी : तेजस्वी

पटना(अपना बिहार, 3 मई 2017) - उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने कहा कि देश को सांप्रदायिकता के संकट से मुक्ति दिलाने के लिए अगर समाजवादी नेता व दल एकजुट नहीं हुए तो देश कभी माफ नहीं करेगा। कार्यक्रम के बाद प्रेस कान्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि बिहार में दो बड़े नेताओं ने अपने ईगो को छोड़कर राज्यहित व देशहित में महागठबंधन बनाकर देश को दिशा दी है। हमारा प्रयास है कि देशभर में सभी क्षेत्रीय दल व समाजवादी नेता एकजुट हों। बसपा नेता मायावती ने साथ आने की बात कहकर इसे मजबूती प्रदान की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सिर्फ भ्रम और अफवाह की राजनीति करती है, संघर्ष से हम डरने वाले नहीं है। भाजपा भूल जाती है कि हममें लालू प्रसाद का खून है। चुनाव में अंतत: सत्य की जीत होगी। उन्होंने कहा कि हम किसी राजनीतिक दल को रोकने की नहीं, बल्कि देश को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। श्री यादव ने राष्ट्रीय स्तर पर बनने वाले महागठबंधन के नेतृत्व को लेकर कहा कि इस संबंध में बाद में विचार होगा, पहले सब एकजुट तो हो जाएं। उन्होंने कहा कि बुधवार को कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम में विविध विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विचार रखा जाएगा। प्रशिक्षण के बाद जिला स्तर पर कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

तीन कुख्यात नक्सली गिरफ्तार, बिहार पुलिस को मिली बड़ी सफलता

पटना(अपना बिहार, 3 मई 2017) - गया जिला के लुटुआ थाना क्षेत्र से पुलिस ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है. सीआरपीएफ के 169वीं बटालियन के सहायक कमांडेंड अविनाश कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर लुटुआ थाना क्षेत्र में तलाशी अभियान के दौरान कल गिरफ्तार किए गए माओवादियों के नाम विशेश्वर भारती, अशोक और छोटू भारती हैं. अविनाश कुमार ने बताया कि इन माओवादियों के पास से विभिन्न हथियार के पांच कारतूस, नक्सली साहित्य और विस्फोट में इस्तेमाल किए जाने वाले तार जब्त किए गए हैं. उन्होंने बताया कि गिरफ्तार माओवादियों से उनकी नक्सली वारदातों में संलिप्तता के बारे में पूछताछ की जा रही है.

ओवैसी को पटना हाईकोर्ट से मिली राहत, विवादास्पद बयान को लेकर दायर हुआ था मुकदमा

पटना(अपना बिहार, 3 मई 2017) - एआईएमआईएम सुप्रीमो असाउद्दीन ओवैसी को पटना हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने निचली अदालत में पेश होने के आदेश पर रोक लगाते हुए सूचक को नोटिस जारी की है। मंगलवार को न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की एकलपीठ ने ओवैसी की ओर से दायर अपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। ओवैसी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 29 जुलाई, 2015 को न्यूज चैनल पर ओवैसी के बयान को प्रसारित किया गया। इस न्यूज को देख हाजीपुर सिविल कोर्ट के वकील राजीव कुमार शर्मा ने एक परिवाद पत्र आईपीसी की धारा 124 ए तथा 153 ए के तहत परिवाद दायर किया। परिवाद पत्र पर एसडीजेएम ने 11 जुलाई. 2016 को संज्ञान लेकर कोर्ट में हाजिर होने का समन जारी किया। यह बताया गया कि ओवैसी द्वारा दिए गए बयान से सूचक को गहरा आधात पहुंचा, क्योंकि देश के खिलाफ बयान दिया गया था। इस कारण दो विभिन्न समुदाय में तैनाव फैल गया। संज्ञान आदेश की वैद्यता को कोर्ट में चुनौती दी गई। इसमें कहा गया कि बिहार में केस दायर करने का कोई औचित्य नहीं बनता है, क्योंकि बयान बिहार के बाहर दिया गया है। देशभर में बयान को प्रसारित किया गया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला भी दिया गया। साथ ही कहा गया कि थोड़ी देर के लिए दिए गए बयान को सही मान भी लिया जाए तो कोई अपराध नहीं बनता।

अदालत ने आवेदक की ओर से दी गई पहली दलील को एक सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि हाजीपुर में केर दायर करना गलत नहीं है। कोर्ट ने आवेदक की दूसरी दलील को फिलहाल मंजूर करते हुए कहा कि दिए गए बयान से दोनों समुदाय में कोई टकराव उत्पन्न नहीं हुआ।

दो और पुलिस पदाधिकारियों का तबादला

पटना(अपना बिहार, 3 मई 2017) - राज्य सरकार ने प्रदेश के दो पुलिस महानिरीक्षकों का तबादला कर दिया है. गृह विभाग द्वारा जारी की गयी एक अधिसूचना के अनुसार पटना रेल उपमहानिरीक्षक के पद पर कार्यरत मंजू झा का तबादला मुंगेर क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक के पद पर किया गया है. गया के पुलिस उपमहानिरीक्षक के पद पर कार्यरत सौरभ कुमार का स्थानांतरण पूर्णिया क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक के पद पर किया गया है. सौरभ कुमार अगले आदेश तक अपने कार्यों के अतिरिक्त कोशी क्षेत्र, सहरसा के पुलिस उपमहानिरीक्षक के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे. पटना के पुलिस उपमहानिरीक्षक के पद पर कार्यरत राजेश कुमार अगले आदेश तक अपने कार्यों के अतिरिक्त मगध क्षेत्र, गया के अतिरिक्त पुलिस उपमहानिरीक्षक के प्रभार में भी रहेंगे. उल्लेखनीय है कि गत 29 अप्रैल को बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को और भी सुदृढ करने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन में फेरबदल करते हुए भारतीय पुलिस सेवा के 15 पदाधिकारियों का तबादला कर दिया था.

बेरोजगारी को लेकर सीपीआई करेगी राज्यव्यापी आंदोलन

पटना(अपना बिहार, 3 मई 2017) - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने बिहार में दो बड़े राज्यव्यापी आन्दोलन चलाने का निर्णय लिया है। पहला आंदोलन जुलाई में बेरोजगारी की समस्या को लेकर होगा और दूसरा आंदोलन समाज के विभिन्न हिस्सों की आम समस्याओं को लेकर राज्य भर में सभी समाहरणालयों के सामने दो दिनों का अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में जनसत्याग्रह के माध्यम से होगा। इसके साथ ही रूस की अक्टूबर समाजवादी क्रांति की शताब्दी का राज्यस्तरीय समापन समारोह पटना में 7 नवम्बर को आयोजित किया जायेगा। यह निर्णय पार्टी की राज्य परिषद की दो दिवसीय बैठक में, जो 29 और 30 अप्रैल को यहां सम्पन्न हुई, लिया गया। बैठक में आन्दोलन से संबंधित एक राजनीतिक प्रस्ताव पारित किया गया।

बैठक के बाद पार्टी के राज्य कार्यालय से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि नवउदारवादी आर्थिक नीतियों की वजह से आम जनता की आर्थिक परेषानियाँ बढ़ती जा रही है। आर्थिक समस्याओं के साथ-साथ अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक एवं राजनीतिक-वैचारिक समस्याओं का सामना भी समाज के विभिन्न तबकों को करना पड़ रहा है। इन समस्याओं के समाधान के लिए समाज के भिन्न-भिन्न तबके अलग-अलग तरीके से अपना-अपना असंतोष और आक्रोष जाहिर कर रहे हैं। आन्दोलित लोगों की भावनाओं को बेजा फायदा उठाकर जातिवादी एवं साम्प्रदायिक शक्तियाँ जनाक्रोश को गलत दिशा की ओर मोड़ देती है और जनता की समस्याएं अनसुलझी रह जाती है। यह आन्दोलन जुलाई माह में होगा। जून महीना में आन्दोलन का प्रचार-प्रसार होगा। आम जनता से आंदोलन में शामिल होने की अपील की जायेगी। आन्दोलन की रूप-रेखा तैयार करने के लिए सात सदस्यीय एक कमिटी बनायी गई है। अक्टूबर महीना के प्रथम सप्ताह में सभी समाहरणालयों के सामने दो दिनों का जनसत्याग्रह आयोजित किया जायेगा। यह जनसत्याग्रह समाज के विभिन्न हिस्से की समस्याओं जैसे भूमिहीन बेघरों को आवसभूमि और मकान, महंगाई, बेरोजगारी, कृषि उपज का लाभकारी दाम, समान षिक्षा, समान काम केलिए समान वेतन, दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा, आंगनबाड़ी एवं आशाकर्मी महिलाओं के सरकारी कर्मचारी का दर्जा, खाद्य सुरक्षा आदि को लेकर होगा। इसकी तैयारी अगस्त-सितम्बर में पूरी की जायेगी। पन्द्रह दिनों तक सितम्बर में पार्टी की सभी शाखाएं गांवों में पदयात्रा करेगी। इसके अतिरिक्त राज्यकेन्द्र से राज्य के भिन्न-भिन्न हिस्से के लिए सात जीप जत्थे निकलेंगे।

राज्य परिषद ने पार्टी संगठन को चुस्त-दुरूस्त करने, सक्रिय करने और उसका विस्तार करने के संबंध में महत्वपूर्ण फैसले लिये। राज्य के पूर्णियां प्रमंडल, मगध प्रमंडल और पटना प्रमंडल के पुराना शहाबाद के जिलों में पार्टी का विस्तार, करने, मजबूत करने, सक्रिय करने आदि कार्यों की देख-भाल और विचार करने के लिए अलग-अलग तीन बैठकें करने का निर्णय हुआ इन तीनों क्षेत्र के लिए राज्य नेतृत्व की तीन अलग-अलग कमिटियाँ बनायी गई।

सुशील मोदी ने ठोंका राजद पर मानहानि का मुकदमा

पटना(अपना बिहार, 3 मई 2017) - पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने पटना के सीजेएम कोर्ट में राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा व प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन के खिलाफ आईपीसी की धारा 499 व 500 के तहत आधारहीन, बेबुनियाद व तथ्यहीन आरोप लगा कर प्रतिष्ठा को आधात पहुंचाने के मामले में क्रिमिनल कम्पलेनेट केस संख्या 6893/2017 के तहत मानहानि का मुकदमा दर्ज किया है। श्री मोदी ने कोर्ट से इस मामले में संज्ञान लेकर अभियुक्तों को कड़ी से कड़ी सजा देने का आग्रह किया है ताकि आगे से जिम्मेवारी के पद पर बैठे किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का कोई कुत्सित प्रयास नहीं कर सके।

श्री मोदी ने अपनी शिकायत में कहा है कि राजद प्रवक्ताओं ने पटना में प्रेस कान्फ्रेंस कर जानबूझ कर आम जनता के बीच उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए उन पर आधारहीन, बेबुनियाद व तथ्यहीन आरोप लगाया जो देश के अनेक अखबारों में प्रकाशित हुआ। अभियुक्तों ने अपने बयान में पटना के राजेन्द्र नगर रोड न.-13 में आलीशान मकान होने, उत्कर्ष स्फटिक नामक कम्पनी द्वारा चर्च की 7.5 एकड़ जमीन पर कब्जा कर मॉल बनाये जाने, परिवार के लोगों को दिल्ली, मुम्बई में आॅडी और बीएमडब्ल्यू जैसी महंगी गाड़ियों में घुमने तथा दिल्ली व कोलकाता की कई कम्पनियों में काला धन लगे होने का अनर्गल आरोप लगा कर प्रतिष्ठा को आधात पहुंचाया।

सुशील मोदी ने फिर लगाया लालू प्रर आरोप, नीतीश राज को कहा घोटाला राज

पटना(अपना बिहार, 3 मई 2017) - एक बार फिर पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर निशाना साधा। किशनगंज में भाजपा की एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान अपने संबोधन में श्री मोदी ने नीतीश कुमार के राज को घोटालों के राज की संज्ञा दी। इससे पहले उन्होंने राजद प्रमुख को बिहार का रॉबर्ट वार्डा करार देते हुए कहा कि उन्होंने मंत्री पद देने से लेकर नौकरी देने में सबसे जमीन लिखवा ली। उन्होंने कहा कि तेजप्रताप आज हजारों करोड़ रुपये की भूमि के जमींदार हैं। किशनगंज में आयोजित बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में जा रहे पूर्व उपमुख्य मंत्री सुशील कुमार मोदी ने जिला अतिथि गृह में मीडियाकर्मियों से बातें करते हुए यह आरोप लगाया।

इस मौके पर मोदी ने कहा कि भाजपा पूरे देश में अकेली ऐसी पार्टी है जो पंचायत से लेकर देश में कार्यकतार्ओं को प्रशिक्षण देती है। शेष पार्टी तो कभी-कभी यह काम करती है। उन्होंने कहा कि बिहार में घोटाला - दर -घोटाला हो रहां है। टॉपर घोटाला, पेपर लीक घोटाला, मिट्टी घोटाला, मॉल घोटाला, दलित छात्रवृत्ति घोटाला हुई। भाजपा ने सीएम नीतीश कुमार को घोटालों की सूची भी दिया है लेकिन वह शुतुरमुर्ग की तरह सिर झुकाए हुए है।

उन्होंने कहा कि सीमंचल के किसी जिले में विकास नहीं हो रहा। विधायक चाहे भाजपा का हो या राजद व जदयू का किसी को किसी के प्रश्न का अहमियत विधान सभा में नहीं दिया जाता है। मुस्लिम लोगों खासकर पशमंदा की हालत खराब है। मुस्लिम समाज का नेतृत्व मुट्ठी भर के लोग कर रहे हैं। इसलिए आजता वे लोग काफी पीछे चल रहे है। इस मौके पर विधायकों में तारकिशोर प्रसाद, विनोद सिंह , एमएलसी अशोक अग्रवाल , पूर्व एमएलसी राजवंशी सिंह , पूर्व विधायक विभाषचंद्र चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज राय , चन्द्रभूषण ठाकुर , बबन झा , छाया तिवारी , सीमा झा आदि नेता मौजूद थे

जदयू सासंद के घर पर हमला मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं

पटना(अपना बिहार, 3 मई 2017) - बीते रविवार को जदयू की राज्यसभा सांसद कहकशां परवीन के भागलपुर के इशाकचक मोहल्ले में स्थित आवास पर हमलावरों ने बम फेंका था। घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस संबंध में भागलपुर रेंज के डीआईजी विकास वैभव ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। प्रथम दृष्टया यह रंगदारी का मामला प्रतीत होत है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। बताते चलें कि उक्त घटना में छह लोग जख्मी हो गये थे। जख्मी लोगों में सांसद के संबंधी, बॉडीगार्ड व समर्थक थे।

जन आंदोलनों से हारेगा आरएसएस : शर्मा, माले नेता रमेश चंद्र पांडेय के निधन पर शोक सभा आयोजित

पटना(अपना बिहार, 3 मई 2017) - भाकपा-माले के वरिष्ठ नेता व बिहार के चर्चित व पुराने किसान नेता रमेशचंद्र पांडेय के निधन पर आज पटना के आइएमए हॉल में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. इस मौके पर माले के वरिष्ठ नेता रामजतन शर्मा ने कहा कि केवल जन आंदोलनों से ही आरएसएस को हराया जा सकता है.

इससे पहले श्री शर्मा ने कहा कि रमेशचंद्र पांडेय बिहार में माले द्वारा गठित बिहार प्रदेश किसान सभा के संस्थापक नेताओं में थे और नक्सलबाड़ी के उभार के दौर में तब के स्थापित कम्युनिस्ट नेता सत्यनारायण सिंह से बेहद निर्मम वैचारिक संघर्ष चलाते हुए जौहर व विनोद मिश्र के नेतृत्व वाली भाकपा-माले से आ जुड़े थे. वे जीवनपर्यंत एक आदर्श कम्युनिस्ट बने रहे और आज हम सबके लिए प्रेरणास्रोत के हैं.

उन्होंने कहा कि पांडेय ऐसे दौर में हमें छोड़कर गए, जब देश में एक तरफ सांप्रदायिक उन्माद की राजनीति चल रही है, तो दूसरी ओर किसानों पर कई तरह से हमले किए जा रहे हैं. देश में कृषि संकट लगातार बढ़ता जा रहा है और किसानों का जीवन बदतर होता जा रहा है. रमेशचंद्र पांडेय किसानों की मुक्ति की लड़ाई लड़ने वाले योद्धा थे, दलित-गरीबों की मुक्ति लड़ाई लड़ रहे थे. इस लड़ाई को और मजबूती से आगे बढ़ाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

इस मौके पर माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि पांडेय कम्युनिस्ट आंदोलन के भीतर की वैचारिक बहसों की उपज थे और सीपीआई व सीपीआइएम होते हुए माले तक पहुंचे थे. उनकी समझदारी थी कि सांप्रदायिक ताकतों को जोड़-तोड़ के जरिए नहीं, बल्कि जनांदोलनों के आवेग से ही पीछे धकेला जा सकता है. लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि काफी नुकसान उठाने की बजाए आज भी कुछेक वाम पार्टियां एक बार फिर भाजपा को रोकने के नाम पर कांग्रेस की पिछलग्गू बन रही है. लेकिन इतिहास ने हमें यह सबक दिया है कि कांग्रेस अथवा अन्य दूसरी बुर्जुआ वर्ग की पार्टियों का पिछलग्गू बनकर कम्युनस्टिों को केवल नुकसान उठाना पड़ा है और भाजपा को भी इस तरीके से नहीं रोका जा सकता है.

पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद ने कहा कि पांडेय किसानों के नेता थे. आज केंद्र व बिहार सरकार चंपारण सत्याग्रह का जश्न तो मना रही है, लेकिन चंपारण सत्याग्रह की मूल आत्मा को खत्म करने पर तुली हुई है. न तो गरीबों-भूमिहीनों को जमीन मिल रही है, न बटाईदारों का पंजीकरण हो रहा है. ऐसे में कॉ. पांडेय के बताए रास्ते पर और मजबूती से चलने की जरूरत है. चंपारण सत्याग्रह के मूल में जमीन का सवाल था, लेकिन ये सरकारें इन विषयों पर एक शब्द तक बोलती तक नहीं है.

मीना तिवारी ने कहा कि 1967 में नक्सलबाड़ी का किसान विद्रोह हुआ और उसकी चिंगारी भोजपुर पहुंची, तो उससे रमेशचंद्र पांडेय अछूते न रह सके. दरअसल उनके बड़े भाई विंदेश चंद्र पांडेय, रमाकांत द्विवेदी रमता, बबन तिवारी, परमहंस तिवारी, सुराजी तिवारी आदि सीपीआइ-एम के सभी प्रतिष्ठित नेता नक्सलवादी विद्रोह से गहरे तौर पर प्रभावित हुए और सीपीआइ-एम के भीतर इन लोगों ने गंभीर बहस छेड़ दी. भोजपुर में मास्टर जगदीश के नेतृत्व में हरिजनिस्तान बनाओ आंदोलन से भी पांडेय काफी प्रभावित हुए. भाकपा-माले के प्रति उनका आकर्षण व लगाव काफी गहरा होता गया. श्रद्धांजलि सभा में विधायक सुदामा प्रसाद, किसान महासभा के राज्य अध्यक्ष विशेश्वर प्रसाद यादव, सरोज चौबे, शशि यादव, कृपा नारायण सिंह, गोपाल रविदास, मधु आदि उपस्थित थे.

पुलिस महकमे में व्यापक फेरबदल, 14 वरीय आईपीएस पदाधिकारियों का तबादला

पटना(अपना बिहार, 30 अप्रैल 2017) - बिहार सरकार के गृह विभाग आरक्षी शाखा द्वारा शनिवार को जारी सूचना के मुताबिक बिहार के 14 वरिष्ठ आइपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया है. जारी सूची के मुताबिक इसमें कई अधिकारियों को महत्वपूर्ण पोस्ट दिया गया है. जानकारी के मुताबिक डीआइजी और वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी विकास वैभव को भागलपुर का डीआइजी बनाया गया है. विकास वैभव को सरोकारी और संवेदनशील छवि के साथ तेज तर्रार पुलिस पदाधिकारी के रूप में जाना जाता है. देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत पर उनके द्वारा लिखे जाने वाले शोधपरक लेख साइलेंट पेजेज आॅफ इंडिया पर लाखों लोग पढ़ते हैं. उस पेज के माध्यम से कई शोधार्थी लाभान्वित होते हैं. एसके सिंघल को एडीजी हेड क्वार्टर के साथ राजेश कुमार को पटना का डीआइजी बनाया गया है. महानिदेशक के पद पर प्रमोशन पा चुके सुनील कुमार को बिहार पुलिस अकादमी का महानिदेशक बनाया गया है. साथ ही इसके अलावा उन्हें बिहार सैन्य पुलिस का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है. सूची के मुताबिक अपर पुलिस महानिदेशक, कानून व्यवस्था आलोक राज को विशेष शाखा का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है. वहीं दूसरी ओर एके को अपर पुलिस महानिदेशक सह अपर असैनिक सुरक्षा आयुक्त नियुक्त किया गया है.

सूबे में हीट एक्शन प्लान बनाने का निर्देश, सीएम ने की समीक्षा बैठक

पटना(अपना बिहार, 30 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में 1 अणे मार्ग में आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक की गयी। आहुत समीक्षा बैठक में राज्य में अग्निकाण्ड की स्थिति, लू की स्थिति, भूगर्भ जल की स्थिति, पेयजल की स्थिति के साथ-साथ अग्नि सुरक्षा के विभिन्न बिन्दुओं पर विस्तृत चर्चा की गयी। बैठक में समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री द्वारा निर्देश दिया गया कि राज्य में हीट एक्शन प्लान शीघ्र तैयार कर लिया जाय। इस संबंध में हीट एक्शन प्लान से संबंधित एडवाइजरी शीघ्र जिलों को भेजने का निर्देश दिया गया। गर्मी में पेयजल की उपलब्धता के लिये एसओपी बनाया गया है। एसओपी के अनुसार लोगों तक पानी पहुॅचाने का निर्देश दिया गया। पानी पहुॅचाने के लिये रूट का निर्धारण करने का निर्देश दिया गया। पेयजल पानी टैंकर एवं अन्य माध्यमों से उपलब्ध कराने हेतु सारी तैयारी ससमय पूर्ण करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में गर्मी/लू की स्थिति को देखते हुये एडवाइजरी जारी कर पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे-मध्याह्न बारह बजे से लेकर अपराह्न तीन से चार बजे तक लोगों को खाना नहीं बनाने, बाहर कम निकलने, गाड़ियों का परिचालन कम करने आदि के लिये अनुरोध करने का निर्देश दिया गया। सरकारी योजनाओं में कार्य कर रहे मजदूरों के काम की भी अवधि गर्मी को देखते हुये तय करने हेतु एडवाइजरी जारी करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा आपदा की स्थिति में फौरन लोगों को राहत देने का निर्देश दिया गया।

बैठक में आपदा प्रबंधन हेतु उच्चस्तरीय राज्य समिति की बैठक सप्ताह में दो बार करने का निर्देश दिया गया। साथ ही जिला में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन समिति जिसमें जिला के पुलिस अधीक्षक, अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन), जिला समादेष्टा (गृह रक्षावाहिनी), परिवहन, स्वास्थ्य, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण, अग्निषमन, बिजली विभाग के अधिकारी शामिल हों, को गठित करने का निर्देश दिया गया तथा इस समिति की बैठक अनिवार्य रूप से प्रतिदिन करने का निर्देष दिया गया।

बैठक में भूगर्भ जलस्तर की स्थिति की समीक्षा की गयी। समीक्षा के क्रम में निर्देष दिया गया कि चापाकलों की स्थिति को दिखवा लिया जाय तथा आवश्यकतानुसार मरम्मति कार्य किया जाय। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाय। पानी को टैंकरों एवं अन्य माध्यम से लोगों को उपलब्ध कराने हेतु मार्ग निर्धारण तथा अन्य सभी तैयारियॉ शीघ्र करने का निर्देश दिया गया। अग्नि सुरक्षा के मद्देनजर बैठक में अग्निषमन सुविधाओं की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गयी। अग्निषमन सेवायें हेतु पानी की व्यवस्था की समीक्षा के क्रम में अग्निशामालय एवं पुलिस थाना में हाईडेंट की व्यवस्था की समीक्षा की गयी। समीक्षा के क्रम में नलकूपों को भी कार्यरत करने का निर्देष दिया गया। साथ ही गॉव के सार्वजनिक कुओं का सर्वे कर उनका जीर्णोद्धार करने का निर्देष दिया गया ताकि आवष्यकता पड़ने पर पानी उपलब्ध कराया जा सके। बैठक में जलस्रोतों का मैपिंग करने का भी निर्देष दिया गया।

बैठक में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व्यासजी, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, पुलिस महानिदेशक अग्निशमन सेवायें पी.एन. राय, प्रधान सचिव आपदा प्रबंधन प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चन्द्रा, सचिव लोक स्वास्थ्य सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

सत्ता और वोट के लिए नीतीश ने किया आत्मसमर्पण : पप्पू

पटना(अपना बिहार, 30 अप्रैल 2017) - जन अधिकार पार्टी (लो) के संरक्षक और सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सत्ता और वोट के लिए घोटालों के आरोपी लालू यादव के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि नीतीश यदि प्रधानमंत्री बनने का सपना देखते हैं तो उन्हें पहले बेनामी संपत्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। पिछले 27 वर्षों में अकूत संपत्ति जमा करने वाले नेताओं और अधिकारियों की बेनामी संपत्ति की सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय से जांच करवानी चाहिए। श्री यादव ने कहा कि लालू यादव का परिवार कॉरपोरेट घराना हो गया है। कॉरपोरेट होना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन उन्हें यह बताना चाहिए कि ये संपत्ति उन्होंने कैसे और कहां से अर्जित की। लालू यादव और सुशील मोदी के आरोप-प्रत्यारोप में बिहार के असली मुद्दे गुम हो गए हैं। लोग दिग्भ्रमित हो गये हैं। मुख्यमंत्री को दोनों की संपत्ति की जांच करवानी चाहिए।

सुमो के दावों में दम नहीं : शिवानंद, लालू प्रसाद को बदनाम करना सुशील मोदी का एकमात्र मकसद

पटना(अपना बिहार, 30 अप्रैल 2017) - पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने कहा कि भाजपा नेता सुशील मोदी के दावे में दम नहीं है। लालू प्रसाद से जुड़े मामलों को 2008 में ललन सिंह (मंत्री) के साथ मैंने दस्तावेज के साथ उठाया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ज्ञापन भी दिया गया। जांच के लायक नहीं समझते हुए इस पर संज्ञान नहीं लिया गया।

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सुशील मोदी का मकसद अपनी पार्टी में उपस्थिति दर्ज कराना नहीं, बल्कि विस चुनाव में करारी मात खा चुकी भाजपा का यह षड्यंत्र है। महागठबंधन की जीत में लालू प्रसाद की अहम भूमिका रही है। वे गरीब-गुरबों के नेता हैं, इसलिए उनकी छवि खराब करने की कोशिश हो रही है। ऐसा लग रहा मानों लालू प्रसाद को फांसी चढ़ा देने से देश का भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा।

श्री तिवारी ने कहा कि दरअसल सुशील मोदी की आदत सबको बदनाम करने व झूठ बोलने की है। इस कारण वे बड़े नेता नहीं बन पाए। एक बार मेरे बेटे पर एक हजार करोड़ का कारोबार करने का आरोप लगाया था, जबकि एक करोड़ का भी व्यापार नहीं था। आपराधिक चरित्र के एक भाजपा नेता की हत्या में अप्रत्यक्ष मेरे परिवार को घसीटने की कोशिश की गई। रघुनाथ झा हों या कांति सिंह, किसने किसको जमीन दी, मंत्री बनाया, टिकट दिया, पूछने वाले मोदी कौन हैं। तीन साल से केंद्र में भाजपा सरकार है तो क्यों नहीं जांच करा। दुकानदारी चला रहे मोदी का कोई खरीदार नहीं है। सीएम, जदयू या कांग्रेस की चुप्पी से यह नहीं समझा जाना चाहिए कि महागठबंधन में दरार है।

जिस जमीन की राजिस्ट्री वह अवैध कैसे : मनोज, सामाजिक न्याय की धारा का अपमान कर रहे सुशील मोदी

पटना(अपना बिहार, 30 अप्रैल 2017) - राजद प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि सुशील मोदीजी जी फरेब की राजनीति करते करते मर्यादा की तमाम सीमायें त्याग चुके हैं और पूरा बिहार जानता है कि फर्जी और बेनामी के माध्यम से आर्थिक रूप से 10 हजार करोड़ के मालिक बनने के बाद अब मानसिक दीवालियेपन के शिकार हैं। राजद प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों के साथ बातचीत में श्री झा ने कहा कि श्री मोदी ने जिस जमीन का जिक्र किया है कानून का पालन करते हुए एक वैध दस्तावेज के आधार पर है और इससे सिर्फ उन्हें परेशानी हो सकती है जो अवैध तरीकों के अभ्यस्त हों। उन्होंने कहा कि अगले 48 घंटे में राजद श्री मोदी के बड़े काले कारनामे को जनता के बीच लायेगी।

श्री झा ने कहा कि लालूजी इमानदार हैं तो उनका सबकुछ उनके नाम से हैं और पब्लिक डोमेन में है। आप बेईमान हैं इसलिए बेनामी के साथ हैं। उन्होंने कहा कि हम तो आग्रह करेंगे कि खुले के खुलासे के इस खेल में अपने भाइयों की अवैध तो छोडिये वैध की ही जानकारी दे दीजिये। हम तो अपने स्तर पर आपके बेनामी कनेक्शन एक एक कर बिहार के लोगों के सामने लायेंगे ही। श्री झा ने कहा कि भाषा की मयार्दा के मामले में वो इतना गिर चुके हैं कि आज उन्होंने एक पूर्व मंत्री के बेटे के बारे में 'नालायक' शब्द का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि बिहार की आवाम आहत है कि झूठ और पाखंड के सहारे वो बिहार की राजनीति के विमर्श को पतन की ओर ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के बारे मे उनकी ओछी टिपण्णी से पूरा दलित और पिछड़ा अत्यंत पिछड़ा समाज आहत और चोटिल महसूस का रहा है। हमें पता है कि मनुवादी अभिजात्य की जिस धारा का आप प्रतिनिधित्व करते हैं उसे सन 1990 से ही परेशानी है।

इग्नू ने बीएड सीटों की घटायी संख्या, जदयू ने जताया एतराज

पटना(अपना बिहार, 30 अप्रैल 2017) - सूबे में सत्ताधारी जदयू ने भारत सरकार द्वारा संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय :इग्नू: में बीएड की पहले से निर्धारित 1300 सीटों को घटाकर अब मात्र 25 कर दिए जाने पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे पुन: बहाल किए जाने की मांग की है। जदयू के वरिष्ठ नेता और बिहार विधान सभा में उपनेता श्याम रजक ने आरोप लगाया कि बिहार के भागलपुर, पटना, सहरसा एवं दरभंगा में संचालित इग्नू के चार क्षेत्रीय केन्द्रों में पूर्व से निधार्िरत बीएड की 1300 सीटों को घटाकर गत जनवरी माह से मात्र 25 कर दिया गया है जो कि बिहार जैसे पिछड़े राज्य के युवाओं के लिए न्यायोचित नहीं है। उन्होंने इसके लिए केंद्र की राजग सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह नरेंद्र मोदी सरकार की कथनी और करनी में अंतर को परिलक्षित करता है।

वहीं जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने इसी प्रकार की राय व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर पुरानी व्यवस्था को बहाल किए जाने की मांग की है। बताते चलें कि इन्दिरा गांधी नेशनल इंस्टीच्यूट(ईग्नू)जो भारत सरकार द्वारा संचालित है,ने भागलपुर,पटना,सहरसा एवम दरभंगा में संचालित चार क्षेत्रीय केन्द्र को आवंटित की गई बीएड की पूर्व से निर्धारित 1300सीटों में 98फिसदी की कटौती कर दी। इग्नू की नई अधिसूचना जनवरी2017से प्रभावी हो गया है जिसमें पटना क्षेत्रीय केन्द्र के लिए मात्र 25सीटों पर ही आवेदन मांगा गया है। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे पिछड़े राज्य जिसमे युवाओं को जो विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में कार्यरत है,कम शैक्षणिक शुल्क पर बीएड कोर्स के लाभ से वंचित किया जाना न्यायोचित नही है।

जगन्नाथ मिश्र को आयी भूमि सुधार की याद

पटना(अपना बिहार, 30 अप्रैल 2017) - अपने शासनकाल में भूमि सुधार को ठंढे बस्ते में रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र ने अब यह स्वीकार किया है कि सामाजिक न्याय के लिए भूमि सुधार आवश्यक है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि भूमि सुधार पर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है। इस राज्य के ग्रामीण क्षेत्र का विकास करने और किसानों की हालत सुधारने तथा कृषि कार्य को बढ़ावा देने की दृष्टि से यह आवश्यक है कि पूरी ताकत के साथ भूमि सुधार कार्यक्रम को कार्यान्वित किया जाय। ऐसा देखा गया है कि कानून के खिलाफ होने पर भी भूमि की बहुत-सी बेनामी काश्तकारी चल रही है। फलत: वास्तविक भू-धारी कृषि का विकास करने के लिये सरकार से मिलनेवाली नगदी ऋण और अन्य प्रोत्साहनों से वंचित रह जाते हैं। इसलिये यह आवश्यक है कि जिन क्षेत्रों में जो किसान वास्तविक रूप से कार्य कर रहे हैं, उन्हें कानूनी अधिकार देने के लिये अधिकार के अभिलेख सही ढंग से तैयार किये जाएं और अभिलेखों को अद्यतन बनाया जाय।

उन्होंने कहा कि 1990 से पूर्व की सरकार ने सर्वेक्षण करके जानकारी प्राप्त करने तथा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लोगों को कौन-सी जमीन दी गई थी और जिन्हें जमीन दी गई थी, उन्हें उक्त जमीन पर दरअसल कब्जा दिया गया या नहीं एक समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर कब्जा दिलाने की व्यवस्था की थी। वह निर्णय अभीतक कार्यान्वित नहीं हुआ है। साथ ही भूमि सीमा कानूनों के अंतर्गत सीमा से फाजिल जमीन का पता लगाकर उसका वितरण करना था, किन्तु अभीतक न्यायालयों से 2 लाख एकड़ से संबंधित मुकदमें लम्बित पड़े हैं।

लोजपा की दो दिवसीय बैठक दादरा नगर हवेली में शुरू, बेटे संग रामविलास ने किया उद्घाटन

पटना(अपना बिहार, 30 अप्रैल 2017) - लोजपा के राष्ट्रीय कार्यकारणी की दो दिवसीय बैठक दादरा नगर हवेली में शनिवार को शुरू हो गई। बैठक का उदघाटन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने किया और बैठक को मुख्य रूप से लोजपा केन्द्रीय संसदीय के बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जमुई सांसद श्री चिराग पासवान ने संबोधित किया तथा दलित सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद रामचन्द्र पासवान, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल खालीक, बिहार के प्रदेष अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस, मणिपुर सरकार में मंत्री करमश्याम सिंह, युवा लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय सर्राफ आदि मौजूद रहे।

दागता रहूंगा लालू पर गोला : सुमो, फिर दुहराया मंत्री व टिकट के लिए जमीन लेने का आरोप

पटना(अपना बिहार, 30 अप्रैल 2017) - राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर मैं गोला दागता रहूंगा। ये बातें वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कही। एक बार फिर उन्होंने श्री प्रसाद पर टिकट देने व मंत्री पद के एवज में जमीन और मकान देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री कांति सिंह ने छह जनवरी 2005 को तेज प्रताप व तेजस्वी को चितकोहरा में तीन मंजिला मकान सहित 9.39 डिसमिल जमीन गिफ्ट के रूप में दे दी। सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जमीन के रजिस्ट्री दस्तावेज में लिखा है कि दानकर्ता से दानप्राप्त कर्ता का लंबे समय से नजदीक का संबंध है और उनकी सेवा से खुश होकर यह जमीन दान में दी जा रही है।

श्री मोदी ने सवाल उठाया कि उस समय 15-16 साल लालू प्रसाद यादव के पुत्रों की उम्र रही होगी। उन्होंने कहा कि तेज प्रताप बांसुरी बजाते थे और तेजस्वी क्रिकेट खेलते थे, तब उन्होंने कांति सिंह की कौन-सी सेवा की, जिसके बदले उन्हें जमीन व मकान गिफ्ट में दे दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांति सिंह यह कहना चाहती हैं कि उनके पुत्र ऋषि कुमार नालायक हैं और उन्होंने उनकी सेवा नहीं की। वहीं श्री मोदी ने पूर्व राज्यसभा सांसद शिवानंद तिवारी के आरोपों का जवाब देने से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि जो राजनीति में कहीं नहीं हैं, उनके सवालों का जवाब क्या देना।

खाद्य आयुक्त की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लगायी फटकार

नई दिल्ली/पटना(अपना बिहार, 29 अप्रैल 2017) - सूखा प्रभावित राज्यों में फूड कमिश्नर की नियुक्ति नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सरकार को फटकार लगायी है. न्यायाधीश एमबी लोकुर और न्यायाधीश एनवी रमन्ना की खंडपीठ ने बिहार समेत 10 राज्यों के मुख्य सचिव को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत फूड कमिश्नर नियुक्त करने का आदेश दिया.गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को इन राज्यों के मुख्य सचिव पेश हुए. सुनवाई के दौरान बिहार सरकार की खिंचाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार खाद्य आयोग के दो सदस्यों की नियुक्ति नहीं कर पा रही है और पूछा कि क्या सरकार के लिए लोगों को खाना मुहैया कराना जरूरी नहीं है? राज्य ने आयोग के पांच सदस्यों की नियुक्ति कर दी है, लेकिन बाकी दो सदस्यों की नियुक्ति क्यों नहीं हो पा रही है.

नहीं पहुंचा विधान परिषद में छेड़छाड़ का आरोपी भाजपाई पार्षद

पटना(अपना बिहार, 29 अप्रैल 2017) - हाल ही में संपन्न हुए बजट सत्र के दौरान बिहार विधान परिषद में लोजपा सदस्या नूतन सिंह के साथ सदन के अंदर छेड़छाड़ मामले की सुनवाई एक बार फिर टल गयी। बताते चलें कि आरोपी भाजपाई विधान पार्षद लाल बाबू प्रसाद सदन की आचरण समिति के समक्ष एक बार फिर पेश नहीं हुए। अब इस मामले में समिति की अगली बैठक 8 मई को होगी। इससे पहले हुए दो बैठकों में भी श्री प्रसाद समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुए थे।

जनता को गुमराह कर रहे सुशील मोदी : जगदानंद

पटना(अपना बिहार, 29 अप्रैल 2017) - सुशील मोदी बेगानी शादी में दीवाना बनने का प्रयास कर रहे हैं। वे जनता के बीच गलत तरीके से भ्र्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। शुक्रवार को राजद के वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह ने कहा कि श्री मोदी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुनाथ का नाम लेकर आरोप लगाया है कि राजद प्रमुख ने उनसे जमीन लेकर उन्हें मंत्री बनाया। जबकि सच्चाई यह है कि श्री झा वर्ष 1972 से विधायक व दस वर्षों तक सांसद रहे। जिस समय श्री मोदी हाफ-पैंट में घुमते थे तब श्री झा विधानसभा में सदस्य बने थे। वर्ष 1990 में जब लालू प्रसाद सत्ता में आये तब इसमें श्री झा का बहुत बड़ा त्याग था। श्री झा तब सरकार में सबसे कद्दावर मंत्री थे।

श्री सिंह ने बताया कि वर्ष 2000 में जब श्री झा बेतिया के सांसद बने तब गोपालगंज में बने अपने एक आवास को उन्होंने गिफ्ट किया। तब उसकी कीमत केवल 1 लाख 95 हजार थी। श्री मोदी इसकी कीमत 15 करोड़ बताकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। वहीं इस संबंध में श्री झा के पुत्र व पूर्व विधायक अजीत कुमार झा ने कहा कि राजद प्रमुख के साथ उनके परिवार का लंबा रिश्ता रहा है। यह रिश्ता विचार का रिश्ता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी जमीन हम किसी को भी दें, इससे किसी को क्या फर्क पड़ता है।

वहीं कांति सिंह द्वारा राजधानी पटना के दानापुर में जमीन लीज पर दिये जाने के मामले में स्वयं कांति सिंह ने बताया कि जब वर्ष 2005 में राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री नहीं रहीं और उन्हें एक अणे मार्ग खाली करना था तब उनके पास गायों को रखने का संकट था। ऐसे में उन्होंने अपने परिवार की जमीन किराये पर श्री प्रसाद को दी। बाद में जब पैसे की तंगी हुई तब वर्ष 2010 में हमलोगों ने वह जमीन श्री प्रसाद को बेच दी। उन्होंने कहा वे वर्ष 1996 में ही केंद्र सरकार में मंत्री बनी थीं। जगदानंद सिंह ने कहा कि श्री मोदी राजद के द्वारा किये जा रहे उनके खुलासे से मानसिक दिवालियेपन के शिकार हो गये हैं और जनता को भरमाने का प्रयास कर रहे हैं।

कब रूकेगा मौतों का यह अंतहीन सिलसिला, तेजप्रताप ने केंद्र से पूछा सवाल

पटना(अपना बिहार, 29 अप्रैल 2017) - देश के जवान सीमा पर और देश के अंदर मारे जा रहे हैं। जबकि जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ के अलावा केंद्र में भी एक ही तरह का नारा लगाने वालों की सरकार है। फिर इन मौतों का जिम्मेवार कौन है। स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव ने केंद्र सरकार से पूछ है कि छत्तीसगढ़ में बीजेपी एक दशक से सत्ता में है। पिछले तीन सालों से केंद्र में भी सरकार है फिर नक्सली हमले अब तक क्यों नहीं रुके? श्री यादव ने प्रधनमंत्री से पूछा कि अभी कुछ दिन पहले आपने नोटबंदी किया फिर असफलताएं छुपाने के लिए कहा की नोटबंदी से नक्सलवाद की कमर टूटी है, लेकिन अब सुकमा में सीआरपीएफ के जवानों की मौत बताती है कि नोटबंदी से नक्सलवाद की कमर नहीं टूटी। उधर, कश्मीर में भी नोटबंदी से पत्थरबाजों में कोई कमी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि जवानों को शहादत पर कबतक हमसब श्रद्धांजलि देकर शांत बैठे रहेंगे, सेना के परिवारों को भी श्रद्धांजलि नहीं न्याय की दरकार है। उन्होंने कहा कि यह तो 56 इंच की बेइज्जती है। उन्होंने कहा कि देश को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की कड़ी निंदा नहीं बल्कि कड़ी कार्रवाई चाहिए। अब पानी सिर के उपर से गुजर रहा है।

विप सभापति मामले में संशय बरकरार, राजद प्रमुख ने कहा - समय आने पर आपस में मिलकर होगा फैसला

पटना(अपना बिहार, 29 अप्रैल 2017) - बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह का कार्यकाल आगामी 8 मई को समाप्त हो रहा है। इससे पहले यह कयास लगाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार श्री सिंह के दुबारा सभापति बनाये जाने के पक्ष में हैं जबकि राजद की ओर से इस पद के लिए दावा ठोंका गया है। वहीं इस मामले में एक बार फिर संशय की स्थिति बनती दिख रही है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने शुक्रवार को पत्रकारों से इस संबंध में कहा कि समय आने पर इस संबंध में महागठबंधन के सभी घटक दलों के नेताओं द्वारा फैसला किया जाएगा। बताते चलें कि राजद ने पहले से ही इस मामले में अपना अलग रूख अख्तियार कर रखा है। हालांकि जदयू खेमे में श्री सिंह के नाम पर अपरोक्ष रूप से सहमति दी जा रही है। जदयू के विधान पार्षद सह प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी संकेतों में यह स्पष्ट करते हुए कहा कि श्री सिंह का कार्यकाल बेदाग रहा है। बताते चलें कि श्री सिंह भाजपा के विधान पार्षद हैं। पिछली बार उन्हें विधान परिषद का सभापति तब बनाया गया था जब सूबे में भाजपा सरकार में शामिल थी। उस समय जदयू की ओर से विधान सभा के अध्यक्ष और विधान परिषद में सभापति पद का बंटवारा हुआ था।

नीतीश राज में अपराधी बेलगाम : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 29 अप्रैल 2017) - विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आपके राज में अपराध रूकने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन हत्या, लूट, बैक लूट, बलात्कार, छेड़खानी, अपहरण, फिरौती, रंगदारी, भ्रष्टाचार आदि की घटनाएं हो रहीं हैं। और आप चेन की वंशी बजा रहे हैं। राज्य की चिंता अब आपको नहीं है,, आप लगातार दौरे पर अपनी राजनीतिक छवि बनाने में लगे हुए हैं।

डा. कुमार ने कहा कि राज्य के अंदर विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है, क्यों सूबे के अधिकारी दिन-रात आपके दौरे में लगे हुए हैं। इसमें कहां से विकास होगा। आपने कभी विकास के कामों की विभागीय समीक्षा की है ? राज्य को पूरी तरह से अपराधियों के हाथों सौंप दिया और आप दौरे पर हैं।

डा. कुमार ने कहा कि सराण में बंधक बैंक से पांच लाख रुपये लूट लिए गये। वैशाली के महुआ में स्वर्ण व्यवसायी की गोली मार कर हत्या कर दी गयीं। रोहतास में एक व्यक्ति को गोली मार कर जान ले ली गयीं। आरा में लोजपा के जिला सचिव को गोली मारी गयीं। परवत्ता (गोगरी) के पूर्व विधायक नईम अख्तर ने 2 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी। गया में 40 हजार रुपये घूस लेते जेई पकड़ा। यह सभी घटानएं एक दिन यानी 27 अप्रैल की हैं।

डा. कुमार ने कहा कि मधुबनी में व्यवसायी को गोली मार कर 26 अप्रैल को हत्या कर दी गयीं। इसके एक दिन पहले 25 अप्रैल को मुगेर में अधिवक्ता को गोली कर हत्या की गयीं। बेगूसराय में पीएचईडी कर्मी को गोली मार कर हत्या हुई। बांका में निर्माण कंपनी पर नक्सलियों का हमला। 24 अप्रैल को सीवान में गोली मार कर 17 लाख रुपये की लूट हुई। इसी दिन हाजीपुर में गोली मार कर सवा चार लाख रुपये की लूट हुई। आरा में गुड़ व्यवसायी से 3 लाख रुपये लूट लिए। मुजफ्फरपुर में 7 लाख रुपये के लिए एक छात्र का अपहरण कर फिरौती मांगी गयीं।

डा. कुमार ने कहा नीतीश राज में आए दिन आपराधिक घटनाएं हो रहीं हैं। पूरा राज्य आज अपराधियों के हाथों में चल रहा है। सूबे के अंदर से अमन-चैन समाप्त हो गया है। नीतीश जी अब भी संभल जाए, नही ंतो जनता आपको सत्ता से उखाड़ फेंकेगी।

जलापूर्ति योजनाओं के लिए केन्द्र ने दिये 250 करोड़: नंदकिशोर

पटना(अपना बिहार, 29 अप्रैल 2017) - बिहार विधान सभा की लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा है कि भारत सरकार ने बिहार में जलापूर्ति योजनाओं के लिए 250 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। गत वर्ष इस मद में 236 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गयी और बाद में 55 करोड़ अतिरिक्त राशि दी गयी। यानी बीते वित्तीय वर्ष में जलापूर्ति योजना के मद में कुल 291 करोड़ रुपए बिहार को मिले।

श्री यादव ने आज यहां कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद बिहार में विविध योजनाओं के मद में केन्द्र से धन की वर्षा हो रही है। लेकिन राज्य सरकार इसका सदुपयोग कर पाने में विफल है। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना के तहत जितनी राशि भारत सरकार देती है उतनी ही राशि राज्य सरकार को देनी है। लेकिन राज्य सरकार अपने दायित्व का निर्वहन शत प्रतिशत नहीं कर पा रही है। मुख्यमंत्री के सात निश्चय का एक सूत्र हर घर नल का जल शिगूफा के अलावा कुछ नहीं है क्योंकि केन्द्र सरकार की जलापूर्ति योजना का राज्य सरकार ने नाम बदला है। इस मद में राशि का आवंटन तो भारत सरकार करती है।

श्री यादव ने कहा कि भारत सरकार एक-एक गांव में पेयजल की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए कृत संकल्पित है। बिहार को पिछले वित्तीय वर्ष में जलापूर्ति योजना के कार्यान्वयन के लिए केन्द्र सरकार से दो बार धन का आवंटन बताता है कि बिहार के विकास के प्रति एनडीए सरकार का नजरिया क्या है। इस साल भी जरूरत पड़ी तो केन्द्र सरकार और भी राशि प्रदान करेगी। बशर्ते राज्य सरकार सही तरीके से इसका उपयोग करे और निर्धारित समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र भेजती रहे।

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को कुचले मोदी सरकार

पटना(अपना बिहार, 28 अप्रैल 2017) - बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कुपवाड़ा के सैनिक कैंप पर हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पड़ोसी देश के द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को कड़ाई से कुचले मोदी सरकार। पिछले एक साल में सैनिकों के कैम्पों पर आतंकवादियों के हमले में वृद्धि हुयी है, जिसका माकूल जवाब हमारी सरकार के द्वारा उन्हें नहीं मिल पा रहा है।

श्री सिंह ने कहा कि वर्ष 2016 में 29 नवम्बर को नागरोटा में हुए आतंकी हमले में हमारे 7 सैनिक मारे गए, 18 सितम्बर को उड़ी आर्मी कैंप में हुए फिदायीन हमले में 19 सैनिक हताहत हुए और जनवरी में पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हुए हमले में 3 जवान शहीद हुए थे। इससे पहले 5 दिसंबर, 2014 को उड़ी के सेना मुख्यालय पर आतंकी हमले में 17 सैनिक शहीद हुए थे। श्री सिंह ने कहा कि सैनिक कैम्पों पर हुए उपरोक्त हमलों का जवाब हमारी केंद्र सरकार सिर्फ 29 सितम्बर, 2016 को पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में ही दिया है।

बेतुकी राजनीति से अपने कारनामे छिपा रहे सुमो : राजद, नवीन किशेर सिन्हा ने लगाया था मोदी पर पैसे लेकर मंत्री बनाने का आरोप

पटना(अपना बिहार, 28 अप्रैल 2017) - राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा है कि सुशील मोदी चरित्र हनन की राजनीति कर रहे हैं। राजद द्वारा उनसे पूछे गये उनके बेनामी संपति के बारे में अब तक उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है और अपने काले कारनामों पर से ध्यान हटाने के लिए बेतुका बयानबाजी द्वारा राजनेताओं के उपर कीचड़ उछाल कर राजनीति को गंदा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि रघुनाथ झा जी जब 1972 में विधान सभा सदस्य बने थे तो सुशील मोदी जी हाथ पैंट पहन कर पटना विश्वविद्यालय में लेफ्ट-राईट करते थे। 1980 में रघुनाथ झा जी मंत्री बने, उस समय सुशील मोदी जी विधायिकी का एबीसीडी सीख रहे थे। मीडिया में बने रहने के लिए आज उन्होंने पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्रीमती कांति सिंह पर लांक्षण लगाने का काम किया है।

राजद नेता ने कहा कि पैसा लेकर मंत्री और विधायक बनाने का धंधा सुशील मोदी जी ही करते हैं। उन्हें यह बताना चाहिए कि उप मुख्यमंत्री बनने के एवज में उन्होंने अपने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को कितनी राशि भेंट की थी। दिवंगत भाजपा नेता नवीन किशोर सिन्हा ने सुशील मोदी पर पैसा लेकर मंत्री बनाने का आरोप लगाया था। इसी प्रकार अनेक भाजपा नेताओं ने सुशील मोदी पर पैसा लेकर टिकट बेचने का भी आरोप लगाया था। भाजपा में जब मोदी जी की चलती थी तो इन्होंने कई वैसे वरिष्ठ नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने का काम किया जो उनकी सेवा नहीं किये। राजद नेता ने कहा है कि मोदी जी बिहार की राजनीति को गंदा नहीं कीजिये अन्यथा बिहार की जनता आपको माफ नहीं करेगी।

दहेजबंदी के लिए राजनीतिक दल करें पहल : कांग्रेस

पटना(अपना बिहार, 28 अप्रैल 2017) - बिहार कांगेस के उपाध्यक्ष एवं विधान पार्षद रामचन्द्र भारती ने राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से दहेजबंदी को लेकर पहल कहने का आहवान किया है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दहेज विरोधी अभियान समाज को बदलने वाला अभियान है। इसके लिए यह आवश्यक है कि सभी दल इस आशय का शपथ लें कि जिस विवाह में दहेज का लेन-देन हुआ हो वे उसका बहिष्कार करेंगे। उन्होनें कहा कि दहेज जैसे सामाजिक अभिशाप को समाप्त करने के लिए राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ जन समर्थन भी आवश्यक है।

हरदिल अजीज थे विनोद खन्ना : मुख्यमंत्री, सांसद सह अभिनेता विनोद खन्ना के निधन पर लालू सहित अनेक नेताओं ने जताया शोक

पटना(अपना बिहार, 28 अप्रैल 2017) - सांसद सह मशहूर फिल्म अभिनेता रहे विनोद खन्ना के निधन पर सूबे के राजनेताओं ने भी शोक व्यक्त किया। अपने शोक संदेश में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वे एक चर्चित अभिनेता एवं लोकप्रिय सांसद थे। उनके निधन से राजनीतिक एवं फिल्मी जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। 1980 के दशक में वे फिल्म प्रेमियों के दिलों पर छाये रहे। उन्होंने फिल्म अभिनय के साथ राजनीति क्षेत्र में भी लोकप्रियता हासिल की थी। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शान्ति तथा उनके परिजनों, अनुयायियों एवं प्रशंसकों को दु:ख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

वहीं अपने शोक संदेश में राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि विनोद खन्ना ने अपने अभिनय से हिन्दी फिल्म जगत को नयी ऊंचाई दी। उनके निधन से देश ने एक हंसमुख और जिंदादिल अभिनेता खो दिया है। उन्होंने राजनीति के क्षेत्र में भी अपार लोकप्रियता हासिल की। उनका जाना देश के लिए अपूरणीय क्षति है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने अपने शोक संदेश में कहा कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री, सांसद व अभिनेता विनोद खन्ना के निधन से फिल्म जगत को गहरा आघात पहुंचा है। अभिनेता विनोद खन्ना जी काफी जिंदादील इंसान थे । विलेन के रोल से अपनी अभिनय को फिल्मी पर्दे पर उतारने वाले आज के सफल अभिनेताओं में आदर से विनोद खन्ना का नाम लिया जाता है। उन्होंने अपने कम समय में पुरी दुनिया को अपने सफल अभिनय से सभी को दिवाना बना दिये थे । लेकिन उन्हें गंभीर बीमारी कैंसर हो जाने के कारण उनका आकस्मिक निधन हो गया । जिससे समस्त देशवासियों को गहरा दुख पहुंचा है।

स्व. खन्ना के निधन पर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, सांसद डा. मीसा भारती, वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार सहित अनेक नेताओं ने शोक व्यक्त किया।

माले नेता की हत्या निंदनीय : कुणाल

पटना(अपना बिहार, 28 अप्रैल 2017) - भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने बेगूसराय जिले बलिया प्रखंड के मकसुदनपुर के 25 वर्षीय माले नेता संजू राम पर जानलेवा हमले की कड़ी भत्र्सना करते हुए कहा है कि नीतीश शासन में सामंती ताकतों के मनोबल में कोई कमी नहीं आई है. संजू राम शहीद महेश राम के भाई हैं, जिनकी हत्या पिछले साल उन्हीं सामंती ताकतों ने किया था, जिन्होंने संजू राम पर जानलेवा हमला किया है. इस जानलेवा हमले में संजू राम को तीन गोली लगी है. उन्हें बेगूसराय अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहां फिलहाल वे खतरे से बाहर हैं.

उन्होंने कहा कि दरअसल मकसुदनपुर में सीलिंग की जमीन को लेकर भूस्वामियों ने दलित-गरीबों के खिलाफ पिछले 1 साल से हमला कर रखा है. पिछले साल 21 मार्च की शाम में भाकपा-माले के दो नेताओं क्रमश: महेश राम (उम्र-25 वर्ष) व रामप्रवेश राम (उम्र-27 वर्ष) की बर्बर तरीके से हत्या कर दी गयी थी, जिसके पीछे प्रशासन व भाजपा संरक्षित सामंती-अपराधियों का नापाक गठजोड़ काम कर रहा था.

इन दोनों नेताओं ने मकसुदनपुर में भूमि आंदोलन का सफल नेतृत्व किया था, जिसके कारण वे सामंती ताकतों की आंखों के किरकरी बने हुए थे. 1980-81 में ही गांव के तकरीबन 134 परिवारों को 120 एकड़ 68 डिसमिल जमीन का पर्चा मिला था. नवंबर 2015 में पहले जिलाधिकारी और फिर हाईकोर्ट से 100 एकड़ जमीन पर गरीबों की जीत हुई. लोग उसपर खेती करने लगे थे. इसी से बौखलाए हुए सामंती-अपराधियों ने महेश राम व रामप्रवेश राम पर हमला किया.

महेश राम व रामप्रवेश राम की हत्या के उपरांत कल 26 अप्रैल की शाम में संजू राम पर हमला किया गया. उन पर हमला करने वाली वही ताकतें हैं, जिन्होंने महेश राम व रामप्रवेश राम की हत्या की थी. महेश राम व रामप्रवेश की हत्या में शामिल नामजद अभियुक्तों में अब भी 9 लोग फरार हैं. जेल में बंद 6 अभियुक्तों में 3 को बेल भी मिल चुका है. इन घटनाओं का मुख्य आरोपी सुरेन्द्र चौधरी, छोटेलाल चौधरी व जितेन्द्र चौधरी जेल से ही अपराध को संगठित कर रहे हैं. यह सरकार व प्रशासन की असफलता व सामंत ताकतों की पक्षधरता का ही नतीजा है कि ऐसी ताकतों का मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है.

दिल्ली में जदयू की हार पर भाजपा ने सीएम पर साधा निशाना

पटना(अपना बिहार, 28 अप्रैल 2017) - दिल्ली एमसीडी चुनाव में जदयू का खाता भी नहीं खुलने पर प्रदेश भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा। विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी आपने पूरी ताकत के साथ दिल्ली में एमसीडी चुनाव में लगा दिया, लेकिन जनाधार नहीं होने के कारण आप अपने पार्टी उम्मीदवारों की जमानत तक नहीं बचा सकें। सच तो यह है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी का जादू पूरे देश में छाया हुआ है। दिल्ली में पार्षद चुनाव में इतना खराब हाल हैं, तो अगले चुनावों में आपकी पार्टी का क्या होगा, दिल्ली का सपना देखना छोड़ दें।

डा. कुमार ने कहा कि दिल्ली एमसीडी चुनाव में आपने 96 उम्मीदरों को खड़ा कराया, लेकिन एक उम्मीदवार की जमानत तक नहीं बचा सकें। दिल्ली में आपने कई रोड शो किये और आपके पार्टी के कई नेताओं ने दिन-रात चुनाव में लगे रहें, लेकिन भाजपा के बढ़ते जनाधार के कारण वहां की जनता ने पूरी तरह से नकार दिया।

डा. कुमार ने कहा कि दिल्ली के तीनों नगर गिगमों में भाजपा की शानदार जीत हुई है। भाजपा को कुल 181 सीटों पर जीत मिली, वहीं आप पार्टी को 48 सीट तथा कांग्रेस को मात्र 30 सीटें मिलीं। यह माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का लहर चल रहा है। राजद अध्यक्ष लालूु प्रसाद ने कहा कि यह ईवीएम का कमाल है। यह तो माननीय नरेन्द्र मोदी जी के बढ़ते जनधार और प्रधानमंत्री जी की बढ़ती लोकप्रियता का परिणाम है की जनता ने वोट दिया।

डा. कुमार ने कहा कि बिहार में भी आपकी सरकार राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद व कांग्रेस के बल पर चल रही है। राज्य के अंदर आपका जनाधार समाप्त होता चुका हैं। लालू व कांग्रेस की बैसाखी पर आपकी सरकार चल रही है। राज्य के अंदर विकास के काम ठप हैं और अपने प्रचार की राजनीति करने में लगे हुए हैं। इस बार राज्य की जनता आपको पूरी तरह से नकार देगी और सब का साथ सब का विकास करने वाली पार्टी भाजपा (एनडीए) को पूर्ण बहुमत से राज्य की जनता सरकार में लायेंगी।

अब सरकार रखेगी रियल एस्टेट कारोबारियों पर नजर, उपभोक्ता के हित में बिहार भू- संपदा ( विनियमन और विकास) नियमावली -2017 पर कैबिनेट की मुहर

पटना(अपना बिहार, 28 अप्रैल 2017) - बिल्डरों और डेवलपरों के द्वारा उपभोक्ताओं का शोषण रोकने को राज्य सरकार ने नया निर्णय लिया है। गुरूवार को कैबिनेट की बैठक में बिहार भू- संपदा ( विनियमन और विकास) नियमावली -2017 पर सहमति दी गयी। बताते चलें कि भारत सरकार द्वारा भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2016 के अधिसूचित होने के उपरांत बिहार में भी सख्त नियमावली की जरूरत थी ताकि बिल्डर्स/डेवलपर्स आम उपभोक्ता के हितों को नुकसान न पहुँचा सकें। इस संदर्भ में आज बिहार भू-संपदा ( विनियमन और विकास) नियमावली-2017 पर कैबिनेट की मुहर लगी जो केन्द्रीय तथा कई अन्य राज्यों से बेहतर स्वरूप में अधिसूचित हुआ है तथा इस नियमावली के प्रभावी होने से उपभोक्तओं के हितों की अधिकतम रक्षा के साथ-साथ रियल एस्टेट मे लेन-देन में निष्पक्षता सहित इसके क्षेत्र में भी बढ़ोतरी होगी।

कैबिनेट की बैठक के बाद प्रधान सचिव- नगर विकास एवं आवास चैतन्य प्रसाद ने बताया कि अधिनियम के माध्यम से प्रत्येक राज्य में एक रियल एस्टेट रेगुलेटरी आथोरिटी बनाने का प्रावधान किया गया है, जिसके समक्ष किसी भी बिल्डर के विरूद्ध शिकायत के निवारण हेतु उपभोक्ता द्वारा अपना मामला दायर किया जा सकता है। आवासीय एवं व्यावसायिक दोनों तरह के नई परियोजनाओं के लिए यह अधिनियम तो लागू होगा ही, साथ ही निर्माणाधीन इमारतों अथवा परियोजनाओं पर भी यह अधिनियम लागू होगा। ऐसी सभी अंचल सम्पदाओं को प्राधिकार में निबंधित करना होगा जिसमें भूमि का आकार 500 वर्ग मीटर से अधिक हो अथवा अपार्टमेंट में फ्लैट की संख्या 8 या उससे अधिक हो। सभी अंचल संपदा की परियोजनाओं को निबंधन प्राधिकार के साथ करने के बाद ही कोई डेवलपर उक्त परियोजना को विज्ञापित करने, विपणन करने बिक्री करने इत्यादि के लिए सक्षम हो सकेगा। परियोजनाओं के निबंधन के लिए डेवलपर को परियोजना का पूर्ण विवरण यथा स्ंलवनजए भूमि की स्थिति, मंजूरियाँ, स्वामित्व के अभिलेख, ठेकेदार, आर्किटेक्ट, इंजीनियर का विवरण एवं उनका ट्रैक रिकॉर्ड, आवंटन पत्र ।आदि के विवरण का प्रारूप जमा करना होगा और प्राधिकार के वेबसाईट पर प्रदर्शित किया जाएगा।

अधिनियम के द्वारा यह अनिवार्य किया गया है कि क्मअमसवचमत को परियोजना में जो भी राश्ष प्राप्त होती है, उसका 70 प्रतिशत एक अलग बैंक खाता में जमा करेगा और परियोजना के अभियंता, वास्तुविद् एवं चार्टर्ड काउंटेंट के प्रमाण पत्र के आधार पर उसी अनुपात में राशि की निकासी कर सकेगा, जिस अनुपात में परियोजना का औसत काम पूरा हुआ हो। डेवलपर उपभोक्ता के बुकिंग राशि या एडवांस राशि के रूप में अपार्टमेंट/प्लॉट के मूल्य का 10 प्रतिशत से अधिक की राषि नहीं ले सकेगा।

ढाई करोड़ रुपए का सॉफ्टवेयर करेगा सोशल मीडिया पर निगहबानी, कैबिनेट की बैठक में लिया गया निर्णय

पटना(अपना बिहार, 28 अप्रैल 2017) - राज्य सरकार सोशल मीडिया पर विशेष निगाह रखने जा रही है। कदापि यह संभव है कि यदि आपने सरकार के बारे में कोई भी ऐसी-वैसी टिप्पणी की जो सरकार को नागवार गुजरे तो सरकार आपके पास चंद मिनटों में पहुंच जायेगी। असल में राज्य सरकार ने गुरूवार को एक नयी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की बैठक में लिये गये निर्णय के अंर्तगत सोशल मीडिया एवं नयी सूचना तकनीक के माध्यम से विभिन्न सामयिक एवं महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर आम नागरिकों के मूड परसेप्शन एवं फीड बैक को जानने-समझने सरकार की योजनाओं/नीतियों/उपलब्धियों को सही रूप से प्रचार प्रसार करने हेतु मनोनयन के आधार पर तीन वर्षों के लिये आॅरेकल सोशल रिलेशनशिप मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर के दो करोड़ अड़तालीस लाख चालीस हजार रुपए पर क्रय एवं संचालन हेतु निविदा के माध्यम से एजेन्सी के चयन की स्वीकृति प्रदान की गई।

विस्तार से बात करें तो आॅरेकल सोशल रिलेशनशिप मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर एक ऐसी सेवा है जिसका उपयोग कर विभिन्न सोशल मीडिया उपक्रमों अर्थात फेसबुक, ट्वीटर और व्हाट्सअप पर निगाह एक साथ रखी जा सकती है। सामान्य शब्दों में इसे युं भी समझा जा सकता है कि व्हाट्सअप पर जारी एक संदेश पहली बार किसी उपभोक्ता द्वारा किस इंटरनेट सेवा प्रदाता और किसी भौगोलिक क्षेत्र से जारी किया गया, यह आसानी से पता लगाया जा सकता है। सामान्य तौर पर यह एक जटिल काम है और आवश्यकता पड़ने पर सरकारी तंत्र को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

इस एक सॉफ्टवेयर के जरिए सरकार जहां एक ओर सोशल मीडिया के संदेशों पर नजर रख सकेगी और साथ ही आवश्यकता पड़ने पर वह ऐसे लोगों का डाटाबेस भी बनायेगी जिन्हें सरकार असामाजिक तत्वों की श्रेणी में श्रेणीबद्ध करना चाहेगी।

इस पूरे सॉफ्टवेयर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह प्लेटफार्म फ्री है। यानी इसका इस्तेमाल मैक और विण्डोज के अलावा एंड्रायड सभी तरह के आपरेटिंग सिस्टम के साथ समेकित रूप से की जा सकती है। रोबोटिक यूजर्स और फेक यूजर्स की पहचान भी आसानी से हो सकेगी।

बहरहाल राज्य सरकार ने इस साफ्टवेयर का इस्तेमाल अपने प्रचार-प्रसार के लिए भी करने का निर्णय लिया है। इस एक सॉफ्टवेयर के जरिए वह अपनी तमाम जानकारियां किसी भी प्लेटफार्म पर आसानी से एक साथ प्रसारित कर सकेगी और साथ ही उनका प्रबंधन भी। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा खरीदी जा रही नयी तकनीक सोशल मीडिया में अभिव्यक्ति की आजादी का पैमाना भी निर्धारित कर सकेगी। मौजुदा हालात में यह सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

सुमो ने फिर लगाया लालू पर आरोप

पटना(अपना बिहार, 28 अप्रैल 2017) - भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार की संपत्ति को लेकर एक और नया खुलासा किया है. सुशील मोदी ने आरोप लगाते हुए कहा कि कांति सिंह को केंद्र में मंत्री बनवाने के लिए लालू यादव ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी के नाम 95 डिसमिल जमीन करवा ली थी. उन्होंने खुलासा करते हुए कहा कि करोड़ों की जमीन 99 साल के लिए मात्र 1250 रुपये महीने की लीज पर दी गयी है. सुशील मोदी ने कहा कि लीज का टर्म एंड कंडिशन भी ऐसा कि 99 सालों तक सभी तरह के करों का भुगतान भी कांति सिंह ही करेंगी.

भाजपा नेता सुशील मोदी ने रघुनाथ झा के बाद कांति सिंह को केंद्र में मंत्री बनाने के लिए उनकी जमीन पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के नाम पर लिखवाने का राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद पर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 13 मार्च 2006 को कांति सिंह, उनके पति केशव प्रसाद सिंह व बेटे ऋषि कुमार द्वारा दानापुर के सगुना मोड़ स्थित जमीन राबड़ी देवी के नाम किया गया. सुशील मोदी ने कहा कि करोड़ों की यह जमीन राबड़ी देवी के नाम पर 99 साल तक के लिए मात्र 1250 रुपये प्रति माह की दर से लीज पर दी गयी है.

सरकारी कर्मियों की बल्ले-बल्ले, महंगाई भत्ते में चार फीसदी की वृद्धि, 21 प्रस्तावों पर कैबिनेट ने लगायी मुहर

पटना(अपना बिहार, 28 अप्रैल 2017) - राज्य सरकार के कर्मियों के लिए खुशखबरी। गुरूवार को राज्य मंत्रिपरिषद ने महंगाई भत्ते में चार फीसदी की वृद्धि संबंधी प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी। राज्य सरकार के नये निर्णय के बाद अब उन्हें 132 की बजाय 136 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा. सरकार कर्मियों को इससे एक हजार से तीन हजार रुपये प्रतिमाह का लाभ होगा। कैबिनेट में हुए फैसले से सेवानिवृत कर्मियों सहित बिहार के 6.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। इस संबंध में कैबिनेट सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने बातया कि कैबिनेट के इस फैसले से सरकार के खजाने पर 561.30 करोड़ का भार बढ़ेगा। अन्य महत्वपूर्ण फैसलों में वहीं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार में दो सिविल जज के पद के सृजन को स्वीकृति प्रदान की गयी। साथ ही सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग में ओएसडी के तीस पदों पर अगले तीन साल के लिए सेवा विस्तार देने का भी निर्णय लिया।

श्री मेहरोत्रा ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में 21 मामलों पर निर्णय लिये गये। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा एल०पी०ए० संख्या-1489/2011 एवं सिविल रिभ्यू संख्या-344/ 2016 तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा एस०एल०पी० संख्या-32079/2015 में पारित आदेश के अनुपालन में अनौपचारिक शिक्षा कार्यक्रम के अन्तर्गत कार्यरत भूतपूर्व अनौपचारिक शिक्षा अनुदेशकों को शिक्षा विभाग सहित राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधीन समुह-घ के विधिवत स्वीकृत एवं रिक्त पदों के विरूद्ध नयी नियुक्ति के माध्यम से समायोजित करने की स्वीकृति प्रदान दी गई।

श्री मेहरोत्रा ने बताया कि वित्त विभाग के अन्तर्गत बिहार राज्य के डिग्रीधारी फिजियोथेरॉपिस्ट एवं अकुपेशनल थेरॉपिस्ट (शिक्षण संवर्ग सहित) की सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 67 वर्ष किए जाने के स्वीकृति प्रदान की गई। वित्त विभाग के अन्तर्गत बिहार आकस्मिकता निधि के स्थायी काय, जो 350 करोड़ रुपए है, को 30 मार्च, 2018 तक के लिए अस्थायी रूप से बढ़ाकर 6403.42 करोड़ रुपए करने की स्वीकृति प्रदान की गई। नगर विकास एवं आवास विभाग के अन्तर्गत बिहार भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) नियमावली, 2017 की स्वीकृति प्रदान की गई।

कैबिनेट सचिव ने बताया कि ग्रामीण कार्य विभाग के तहत बिहार ग्रामीण पथ परियोजना के तहत मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना अन्तर्गत 27 छवद.प्।च् जिलों में 250 से अधिक की आबादी वाले अनजुड़े टोलों/बसावटों को बारहमासी एकल सम्पर्कता प्रदान करने हेतु विश्व बैंक के के साथ भारत सरकार द्वारा वित्तीय एकरारनामा करने तथा राज्य सरकार द्वारा परियोजना एकरारनामा के लिए सहमति की स्वीकृति प्रदान की गई। श्री मेहरोत्रा ने बताया कि मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग (निबंधन) के अन्तर्गत राज्य में ई-स्टांप की व्यवस्था लागू करने, स्टॉक होल्डिंग कारपोरेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड को एजेन्सी के रूप में नामित करने एवं ई-कॉलेक्टिंग तकनीक के माध्यम से विभिन्न प्रकार की शुल्क राशि प्राप्त करने एवं सरकारी कोष में जमा कराने की स्वीकृति प्रदान की गई।

अधर में लटका विधायकों का आशियाना : नंद किशोर

पटना(अपना बिहार, 28 अप्रैल 2017) - बिहार विधान सभा की लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा है कि विधायकों के लिए मॉडर्न आवास निर्माण योजना अधर में लटक गयी है। राजधानी पटना में दो स्थानों पर विधायकों के लिए सवा तीन सौ आवास बनने हैं। श्री यादव ने कहा कि राजधानी में जन-सुविधाओं को उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल राज्य सरकार अब विधायकों के आवास निर्माण की योजना को निर्धारित समय के भीतर पूरा करने में भी सरकार पिछड़ गयी है। राजधानी के आर.ब्लॉक और वीरचंद पटेल पथ पर पुराने बंगलों व दरवानुमा फ्लैट को तोड़कर 325 मॉडर्न आवास का निर्माण किया जाना है। इसके निर्माण कार्य पर 450 करोड़ रूपया खर्च होना है। आर ब्लॅक में 75 आवास विधान परिषद के सदस्यों के लिए बनना है जबकि शेष वीरंचद पटेल पथ पर विधान सभा के सदस्यों के लिए होगा।

श्री यादव ने राज्य सरकार की कार्य पद्धति पर सवालिया निषान उठाते हुए कहा कि वीरंचद पटेल पथ पर बिहार विधान सभा के सदस्यों के लिए प्रस्तावित माडर्न आवास निर्माण के लिए निविदा की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पायी है जबकि इसके निर्माण कार्य की निर्धारित अवधि दिसम्बर 2017 है। प्रस्तावित माडर्न आवास के आसपास कम्युनिटी सेंटर, शापिंग कम्पलेक्स, अस्पताल आदि बनना है। पुराने बंगले और फ्लैट को तोड़ दिये जाने से जनता के प्रतिनिधि आवासविहीन हो गये हैं और राजधानी में खोजे उन्हें किराये पर आवास नहीं मिल पा रहा है। जनप्रतिनिधियों के लिए निर्धारित समय पर आशियाना देने में राज्य सरकार की विफलता बताती है कि वह आम के साथ-साथ खास वर्ग की कितनी चिंता करती है।

हर हाल में मिले वन्य प्राणियों को सुरक्षा : मुख्यमंत्री, बिहार राज्य वन्यप्राणी पर्षद की 7वीं बैठक संपन्न

पटना(अपना बिहार, 27 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सूबे के वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। वन एवं पर्यावरण मंत्री तेज प्रताप यादव के साथ श्री कुमार ने बिहार राज्य वन्य प्राणी पर्षद की 7वीं बैठक राज्य में वन्यप्राणी प्रक्षेत्र में वर्तमान परिदृष्य एवं क्रियाकलापों की समीक्षा की गयी। बैठक में मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया गया।

बैठक में वाल्मिकी टाइगर रिजर्व में की जा रही अधिवास प्रबध्ांन, बाघों की बढ़ रही संख्या, इको टूरिज्म, स्वायल कनजर्वेषन, वाइल्ड लाइफ मॉनिटरिंग, फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट सहित गंडक में घड़ियाल संरक्षण, पक्षी आश्रयणी, नेषनल डॉल्फिन रिसर्च सेंटर की स्थापना के साथ-साथ अन्य बिंदुओं पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि गंडक नदी में घड़ियाल संरक्षण का फेज-2 कार्यक्रम की शुरूआत की जा चुकी है। बैठक में बरैला झील पक्षी आश्रयणी, भीम बांध आश्रयणी पर विस्तृत चर्चा की गई। नीलगाय एवं जंगली सुअर के विभिन्न जिलों में असंतुलित आबादी से समस्या का प्रबंधन करने पर चर्चा की गयी। भागलपुर के गंगा एवं कोसी नदी के दियारा क्षेत्र में संकटग्रस्त गरूड़ पक्षी प्रजाति का बचाव कार्य किया जा रहा है। गंगा नदी में इनलैंड वाटरवेज प्रोजेक्ट के प्रस्तावित क्रियान्वयन से डॉल्फिन एवं जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल आघात के संबंध में चर्चा की गयी। मुख्यमंत्री द्वारा समीक्षा के क्रम में निर्देष दिया गया कि आश्रयणियों में स्वच्छता का पूरा ख्याल रखा जाये।

वन्य प्राणी पर्षद की 7वीं बैठक में कैमूर वन्य प्राणी आश्रयणी-रोहतासगढ़ में रोपवे निर्माण को सषर्त स्वीकृति दी गई, साथ ही कुषेष्वर-स्थान पक्षी आश्रयणी, बरैला झील पक्षी आश्रयणी, कॉवर झील पक्षी आश्रयणी के संबंध में मुख्यमंत्री द्वारा निर्देष दिया गया कि पॉच सदस्यीय समिति बनाकर उक्त सभी आश्रयणियों का क्षेत्र भ्रमण किया जाय तथा सभी स्टेक होल्डरों से बातचीत की जाय। गौतम बुद्ध आश्रयणी गया में एनएच- 2 का उन्नयन कार्य शर्तों के साथ अनुमति हेतु अनुशंसा की गयी।

बैठक में विधान पार्षद नीरज कुमार, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, प्रधान सचिव वन एवं पर्यावरण विवेक कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, मुख्य वन संरक्षक, मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक, मुख्यमंत्री के विशेष कार्यपदाधिकारी गोपाल सिंह सहित वन्यप्राणी पर्षद के सभी गणमान्य सदस्य उपस्थित थे।

देश में सवर्णों के लिए बने आयोग : नीतीश

पटना(अपना बिहार, 27 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से देश में सवर्णों के लिए राष्ट्रीय आयोग बनाने की मांग की है। वे बुधवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में वीर कुॅवर सिंह शहादत दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में कुंवर सिंह के योगदान को जानने एवं समझने की जरूरत है। इनकी बड़ी भूमिका है, 23 अगस्त 1857 से 22 अप्रैल 1858 तक उन्होंने इतिहास में एक लंबी मार्च की। आजादी की लड़ाई में इतनी बड़ी लंबी मार्च का मिसाल देखने को कम मिलता है। लखनऊ से लौटते वक्त गंगा नदी पार करने के क्रम में उनकी बांह में गोली लगी और उन्होंने जख्मी बांह को तलवार से काटकर गंगा को अर्पित कर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जगदीशपुर आजाद था। 23 अप्रैल 1858 विजयोत्सव का माहौल था। अपने जन्म और मृत्यु दोनों वक्त उनका जगदीशपुर आजाद ही रहा। उनमें कुषल नेतृत्व एवं अभूतपूर्व संगठन क्षमता मौजूद था। दानापुर में सैनिक छावनी में सक्रिय भागीदारी कर उनका नेतृत्व किया। नौ महीने तक लौंग मार्च के दौरान उन्होंने मिल, ली ग्राण्ड, डगलस आदि अंगे्रजी फौजों को पराजित किया। मिजार्पुर, रेवा, बांदा, काल्पी, कानपुर होते हुये लखनऊ और फिर जगदीशपुर आये। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही रोमांचित करने वाली बात है इसलिये बाबू वीर कुॅवर सिंह की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। राष्ट्रीय स्तर पर उनको मान्यता मिलनी चाहिये। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष 2018 में 160वां विजयोत्सव मनाया जायेगा। 160वें वर्षगांठ का आयोजन ज्ञान भवन में भव्य आयोजित किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि डुमरांव में वीर कुॅवर सिंह की जो प्रतिमा बनकर तैयार है, उसका अनावरण करना मेरे लिये गर्व की बात होगी। इस अवसर पर जदयू प्रदेष अध्यक्ष सह सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह, जदयू नेता श्याम रजक, उद्योग मंत्री जयकुमार सिंह, पूर्व मंत्री गौतम सिंह, विधायकगण, विधान पार्षदगण सहित बड़ी संख्या में अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

बालश्रम समाज के लिए धब्बा : विजय प्रकाश

पटना(अपना बिहार, 27 अप्रैल 2017) - प्रदेश के श्रम संसाधन मंत्री विजय प्रकाश ने कहा है कि बाल अधिकारों का उल्लंघन होना धब्बा है। विकास की ऊंचाइयों को छूने के बाद भी इस धब्बे को पूरी तरह हटाया नहीं जा सका है। नतीजतन अब भी हर 11 में से एक बच्चा बाल श्रमिक है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकारी, अर्द्धसरकारी और गैर सरकारी संगठनों को एकीकृत प्रयास करना होगा। इस कुरीति को मिटाने का संकल्प लेना होगा।

बुधवार को एक होटल में चाइल्ड लेबर फ्री जोन बनाने के लिए संस्था स्टॉप चाइल्ड लेबर (एससीएल) तथा एमवी फाउंडेशन द्वारा परामर्श के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया था। कार्यशाला का उद्घाटन करने के पश्चात मंत्री विजय प्रकाश ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में 6.5 करोड़ बच्चे बाल श्रमिक के रूप में काम कर रहे हैं। इसमें से 11 फीसदी बच्चे बिहार के हैं। बाल श्रमिकों के मामले में बिहार देश में दूसरे स्थान पर है। बाल श्रम हमारे समाज के लिए अभिशाप है। इसको पूरी तरह समाप्त करना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य को बाल श्रम मुक्त देखने का संकल्प दोहराया है। व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से सामाजिक एवं व्यवहार बदलाव की रणनीति पर काम किया जा रहा है। इससे बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने और उनके विकास में मदद मिलेगी। बिहार सरकार द्वारा श्रम विभाग के साथ 13 अन्य विभागों में समन्वय स्थापित कर राज्य कार्ययोजना बनाई गई है। स्टेट कन्वीनर नवलेश कुमार सिंह तथा अन्य ने भी विचार व्यक्त किया।

दिल्ली एमसीडी चुनाव का परिणाम आते ही खुली महागठबंधन की पोल, अलग-अलग लड़ने से मिली हार : लालू, वार्ड का चुनाव भी नहीं जीत सकते पीएम बनने का सपना देखने वाले नीतीश, मांझी ने बोला हमला, वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा - हार से सीख लेने की जरूरत

पटना(अपना बिहार, 27 अप्रैल 2017) - दिल्ली एमसीडी चुनाव का परिणाम आते ही बिहार का सियासी पारा भी गरम हो गया। चुनाव में भाजपा को मिली निर्णायक जीत के बाद बिहार में महागठबंधन की गांठ भी खुलती दिखी। स्वयं राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जबतक अलग-अलग लड़ेंगे यही हाल होगा। हम एकता की पहल करते रहेंगे। वहीं दूसरी ओर राजद विधायक भाई वीरेंद्र की ओर से जदयू पर तंज कसते हुए कहा गया है कि जदयू द्वारा बिहार की जनता का पैसा दिल्ली में लुटाया गया है। चुनाव नतीजों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश कुमार वार्ड का चुनाव जीत नहीं सकते, लेकिन सपना देखते हैं प्रधानमंत्री बनने का।

वहीं दिल्ली एमसीडी का परिणाम सामने आने के बाद जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि दिल्ली एमसीडी चुनाव नतीजों से निराश होने की जरूरत नहीं है। बल्कि, सीख लेने की जरूरत है। श्री सिंह ने सभी पार्टियों को मतभेद भुलाकर आपस में समन्वय करने की बात कही। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो सबको एक साथ लेकर चल सके। दूसरी ओर राजद के प्रवक्ता मनोज झा ने कहा है कि आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल अपनी करनी का खामियाजा भुगत रहे हैं। जबकि जदयू के नेता श्याम रजक ने कहा कि दिल्ली एमसीडी चुनाव नतीजों से अब सबको सबक लेने की जरूरत है, सबको एक साथ आना होगा। जहां-जहां सब अलग-अलग चुनाव लड़े हैं, वहां सबको हार का मुंह देखना पड़ा है। वहीं बिहार विधान सभा में लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा है कि एमसीडी चुनाव में भाजपा की जीत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति असीम विष्वास और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के प्रभावशाली व चमत्कारी नेतृत्व पर जनता की मुहर है। इससे दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल सरकार का सिंहासन हिल उठा है। श्री यादव ने दिल्ली नगर निगम के चुनाव में भाजपा को मिली अपार सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को बधाई देते हुए कहा कि दो-ढाई साल के भीतर दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य में इतना जबरदस्त बदलाव आम जनता का भाजपा के प्रति बढ़ता विश्वास है। श्री यादव ने महागठबंधन के नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव में जदयू ने एक सौ सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़ किये थे। उनके जीताने के लिए पचास से अधिक विधायक और आधे दर्जन से अधिक मंत्री बिहार का कामकाज छोड़कर एक पखवारे तक दिल्ली में डटे थे। बिहार की जनता की गाढ़ी कमाई का चुनाव प्रचार में करोड़ो रूपया फूंका गया लेकिन दिल्ली के वोटरों ने जदयू उम्मीदवारों की जमानत जब्त कर दी।

आज फिर सुमो की पोल खोलेंगे मनोज झा

पटना(अपना बिहार, 25 अप्रैल 2017) - सुशील मोदी उन तथ्यों को सनसनी बनाकर पेश कर रहे हैं जो पहले से ही सरकार एवं जनता के बीच है। हम उन तथ्यों को सामने ला रहे हैं जिन्हें श्री मोदी ने जानबुझकर रहस्य बना रखा है और जनता के साथ बेईमानी की है। राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि श्री मोदी अब यह समझ चुके हैं कि उन्होंने रांग नंबर डायल कर दिया है। उन्होंने कहा कि राजद अब श्री मोदी के सारे काले कारनामों की पोल जनता के सामने खोलेगा। उन्होंने कहा कि मंगलवार को वे एक बार फिर श्री मोदी के द्वारा किये गये बड़े घोटाले की पोल खोलेंगे।

राजद के आरोपों को सुमो ने नकारा, कहा - मेरा काम राजनीति है कोई व्यवसाय नहीं

पटना(अपना बिहार, 25 अप्रैल 2017) - राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. मनोज झा द्वारा आशियाना होम्स एवं मनी लॉन्ड्रिंग के खुलासे के बाद बैकफुट पर आते हुए सोमवार को भाजपा के नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि उनका काम राजनीति करना है न कि कोई व्यवसाय। संवाददाता सम्मेलन में श्री मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद अब उनके रिश्तेदारों पर दबाव बना रहे हैं ताकि वे उनका मुंह बंद कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि इधर-उधर की बातों को छोड़ श्री प्रसाद को उनके सवालों का जवाब देना चाहिए।

राजद प्रवक्ता द्वारा लगाये गये आरोपों के जवाब में श्री मोदी ने कहा कि वे स्वयं किसी भी कंपनी में न तो हिस्सेदार हैं और न ही निदेशक। जिन कंपनियों के बारे में राजद द्वारा आरोप लगाया जा रहा है, उन सवालों का जवाब उनके मालिक ही दे सकते हैं। उन्होंने एक बार फिर कहा कि श्री प्रसाद एबी एक्सपोर्ट्स के बारे में बताना चाहिए कि इस कंपनी में 98 फीसदी शेयर तेजस्वी यादव का है। क्या श्री प्रसाद इस सच से इन्कार करेंगे? बताते चलें कि बीते रविवार को राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा और पूर्व सांसद जगदानंद सिंह ने श्री मोदी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने उपमुख्यमंत्रित्व काल में अपने रिश्तेदारों की कंपनी को आर्थिक मदद पहुंचायी थी। राजद नेताओं ने यह भी आरोप लगाया था कि श्री मोदी का संबंध काले धन को सफेद करने वाली कंपनियों से जुड़ा रहा है।

राजनीति को गंदा मत करिए मोदी जी, जगदानंद सिंह ने दी सलाह

पटना(अपना बिहार, 25 अप्रैल 2017) - राजद के कद्दावर नेता व पन्द्रह वर्षों तक राजद सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे पूर्व सांसद जगदानंद सिंह ने सोमवार को भाजपा नेता सुशील मोदी को गंदी राजनीति से बाज आने की सलाह दी। राजद के प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि चिड़ियाघर प्रशासन द्वारा मिट्टी खरीद मामले की जांच को खारिज करने से पहले श्री मोदी को वह वक्त याद करना चाहिए जब वे स्वयं वन एवं पर्यावरण मंत्री थे। उन्होंने कहा कि आजादी के पहले से वन एवं पर्यावरण विभाग बिना टेंडर के की कार्य करता आया है।

श्री सिंह ने कहा कि वे स्वयं भी सूबे में वन एवं पर्यावरण विभाग के मंत्री रहे हैं। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद वर्ष 1955 में इस संबंध में यह सवाल उठाया गया था कि वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा बिना टेंडर के ही कार्य क्यों कराया जाता है। लेकिन तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा तय किये गये मानदंडों के आधार पर ही आजतक विभाग द्वारा कार्यों का निष्पादन होता है।

पूर्व सांसद ने कहा कि चिड़ियाघर में मिट्टी की आपूर्ति आवश्यक कार्य के लिए की गयी थी और यह सरकारी जांच में स्पष्ट है। रही बात बिना टेंडर के मिट्टी आपूर्ति की तो यह विभाग की परंपरा के मुताबिक है। उन्होंने कहा कि यदि यह गलत है तो श्री मोदी के मंत्रित्व के काल में वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा कुल 175 करोड़ रुपए खर्च किये गये, क्या वह भी घोटाला था। श्री सिंह ने कहा कि श्री मोदी गंदी राजनीति कर रहे हैं। उन्हें इससे बचना चाहिए।

आंदोलनरत शिक्षक अभ्यर्थियों की मांगें माने सरकार : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 25 अप्रैल 2017) - विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि टीईटी-एसटीईटी के उत्र्तीण अभ्यर्थियों की बहाली सरकार ने अभी तक नहीं की है। साथ ही विभिन्न संगठन जो हड़ताल पर हैं, सरकार बुला कर उन से वार्ता कर उनकी मांगों को जल्द से जल्द मान लें। बिहार विद्याालय परीक्षा समिति के द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी-एसटीईटी) में उत्र्तीण अभ्यर्थियों का सरकार ने नियोजन नहीं किया, जिस कारण जो सभी सड़कों पर हैं। बीएसएससी परीक्षार्थियों ने अपने रिजल्ट की मांग को लेकर आज राजधानी में अर्द्धनग्न प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता के बरक्स बिहार के सवाल

- नवल किशोर कुमार

पटना । नीति आयोग के शासी निकाय की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जहां एक ओर बिहार के हक का सवाल उठाया तो दूसरी ओर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही विषमता को लेकर केंद्र को चेताया भाी। अपने संबोधन में श्री कुमार ने राष्ट्रीय स्तर पर बन रही अपनी राजनीतिक छवि को नया आयाम भी दिया। मसलन उन्होंने कहा कि कि बदले हुए आर्थिक एवं सामाजिक परिवेश में देश के विकास के लिए समावेशी सोच एवं दृष्टि की आवश्यकता है। श्री कुमार के मुताबिक प्रत्येक भारतीय को आवश्यक रूप से प्रतिष्ठापूर्ण और आत्मसम्मान से जीवन जीने का अवसर उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित करना हम सबका कर्तव्य है। सतत विकास के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लघु, मध्यम एवं दीर्घकालीन रणनीति का सूत्रण किया जाना चाहिए जो राज्यों के बीच असमानता के स्तर पर आधारित हो। इससे सार्वभौमिक, एकीकृत, रूपान्तरित एवं आकांक्षात्मक विकास की लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय विषमताओं का सवाल पूरी मजबूती के साथ उठाया और कहा कि यद्यपि 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर सभी राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गयी है, परन्तु आयोग द्वारा राज्यों के बीच क्षैतिज वितरण के लिए जो मानक तय किये गये हैं, उसके चलते विभिन्न राज्यों पर पड़ रहे प्रभाव में बहुत ज्यादा भिन्नता है। उदाहरण के लिए बिहार को 13वें वित्त आयोग के फामूर्ले के आधार पर राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी 32 प्रतिशत रहने पर भी पूर्व के वर्ष के वृद्धि दर (15 प्रतिशत) के आधार पर वित्तीय वर्ष 2015-16 में 48,118 करोड़ रुपए की प्राप्ति का आकलन था। नये फामूर्ले पर बिहार को वित्तीय वर्ष 2015-16 में 50,748 करोड़ रुपए की प्राप्ति केन्द्रीय करों के हिस्से के रूप में होगी। इस प्रकार बिहार के लिए मात्र 5 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी में बढ़ोतरी करीब 30 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के इस अत्यंत असमान प्रभाव को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।

बहरहाल श्री कुमार के इस चिंता से केंद्र सरकार को स्वयं को अलग नहीं करना चाहिए कि राज्यों के बीच निधि के बँटवारा हेतु 14वें वित्त आयोग ने जो फार्मूला दिया है उसके आधार पर कुल राशि में बिहार का हिस्सा 10.9 प्रतिशत से घटकर 9.665 प्रतिशत हो गया है। मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि बिहार भौतिक एवं सामाजिक आधारभूत संरचना की दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा है और यहॉं की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। बिहार राज्य की इन विशेष आवश्यकताओं को भी देखे जाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में केन्द्र सरकार द्वारा गठित रघुराम राजन समिति की अनुशंसाओं का सवाल भी उठाया। इस समीति ने राज्यों के लिए समग्र विकास सूचकांक प्रस्तुत किया था एवं जिसके अनुसार देश के 10 सर्वाधिक पिछड़े राज्यों को चिन्ह्ति किया गया था। इन राज्यों में बिहार भी सम्मिलित है। प्रतिवेदन में उल्लेखित था कि सर्वाधिक पिछड़े राज्यों की विकास की गति बढ़ाने के लिये केन्द्र सरकार अन्य रूप में केन्द्रीय सहायता उपलब्ध करा सकती है। इस पृष्ठभूमि में हमारा अनुरोध है कि केन्द्र सरकार, सर्वाधिक पिछड़े राज्यों के लिये विभिन्न केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में केन्द्रांश के प्रावधान को 90 प्रतिशत करे ताकि इन राज्यों को केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में राज्याशों की प्रतिबद्धताओं में बचत हो सकेगी एवं इन्हें अपने संसाधनों का उपयोग अन्य विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं में करने का अवसर मिल सकेगा।

बिहार को उसका हक दे केंद्र, नीति आयोग की बैठक में नीतीश ने दी गुजरात नहीं, पूरे देश का ध्यान रखने की सलाग

पटना(अपना बिहार, 24 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से बिहार को उसका वाजिब हक देने की मांग की। साथ में उन्होंने कहा कि बदले हुए आर्थिक एवं सामाजिक परिवेश में देश के विकास के लिए समावेशी सोच एवं दृष्टि की आवश्यकता है। श्री कुमार रविवार को राष्ट्रपति भवन के प्रेक्षागृह में आयोजित नीति आयोग के शासी परिषद् की तीसरी बैठक को सम्बोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को आवश्यक रूप से प्रतिष्ठापूर्ण और आत्मसम्मान से जीवन जीने का अवसर उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित करना हम सबका कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लघु, मध्यम एवं दीर्घकालीन रणनीति का सूत्रण किया जाना चाहिए जो राज्यों के बीच असमानता के स्तर पर आधारित हो। इससे सार्वभौमिक, एकीकृत, रूपान्तरित एवं आकांक्षात्मक विकास की लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती है।

नीति आयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि भारत के संघीय ढाँचे में सभी राज्यों की पहल एवं सहभागिता से समस्याओं का निराकरण करने तथा लोकोपयोगी नीतियों के क्रियान्वयन के लिए बेहतर समन्वय का माहौल पैदा करने में नीति आयोग अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि यह बैठक हमें यह अवसर प्रदान करती है कि हम अपनी समस्याओं पर एक मंच पर विचार विमर्श करें और उनका समाधान ढूंढे। राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं, नीतियों तथा क्षेत्रों की रणनीतियों के साथ-साथ राज्यों द्वारा उठाये जा रहे सामयिक विषयों पर सकारात्मक चर्चा हो। केन्द्र तथा राज्यों के बीच महत्वपूर्ण विषयों पर आम सहमति बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि यद्यपि 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर सभी राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गयी है, परन्तु आयोग द्वारा राज्यों के बीच क्षैतिज वितरण के लिए जो मानक तय किये गये हैं, उसके चलते विभिन्न राज्यों पर पड़ रहे प्रभाव में बहुत ज्यादा भिन्नता है। उदाहरण के लिए बिहार को 13वें वित्त आयोग के फार्मूले के आधार पर राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी 32 प्रतिशत रहने पर भी पूर्व के वर्ष के वृद्धि दर (15 प्रतिशत) के आधार पर वित्तीय वर्ष 2015-16 में 48,118 करोड़ रूपये की प्राप्ति का आकलन था। नये फार्मूले पर बिहार को वित्तीय वर्ष 2015-16 में 50,748 करोड़ रूपये की प्राप्ति केन्द्रीय करों के हिस्से के रूप में होगी। इस प्रकार बिहार के लिए मात्र 5 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी में बढ़ोतरी करीब 30 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के इस अत्यंत असमान प्रभाव को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।

बिहार जैसे पिछड़े राज्य के लिए यह चिन्ता का विषय है कि राज्यों के बीच निधि के बॅंटवारा हेतु 14वें वित्त आयोग ने जो फार्मूला दिया है उसके आधार पर कुल राशि में बिहार का हिस्सा 10.9 प्रतिशत से घटकर 9.665 प्रतिशत हो गया है। मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि बिहार भौतिक एवं सामाजिक आधारभूत संरचना की दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा है और यहाॅं की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। बिहार राज्य की इन विशेष आवश्यकताओं को भी देखे जाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में आधारभूत संरचना की कमी को देखते हुए भारत सरकार द्वारा 12वीं पंचवर्षीय योजना में विशेष योजना (बी॰आर॰जी॰एफ॰) के तहत 12000 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई थी। इसमे नयी परियोजनाओं के लिये 10500 करोड़ रूपये तथा पुरानी चालू योजनाओं को पूरा करने के लिये 1500 करोड़ रूपये कर्णांकित किये गये थे। इसमें 9597.92 करोड़ रूपये की नयी परियोजनाओं की स्वीकृति नीति आयोग द्वारा दी गयी थी। अभी भी 902.08 करोड़ रूपये की राशि के विरूद्ध परियोजनाओं की स्वीकृति हेतु नीति आयोग के पास प्रस्ताव लंबित है। इसके विरूद्ध ऊर्जा प्रक्षेत्र की स्वीकृत परियोजनाओं में लागत में हुई वृद्धि से संबंधित 856.81 करोड़ रूपये का प्रस्ताव तथा पथ प्रक्षेत्र की एक परियोजना-लागत राशि 391 करो़ड़ रूपये का प्रस्ताव नीति आयोग के स्तर पर स्वीकृति हेतु लंबित है। मुख्यमंत्री ने बीआरजीएफ के अन्तर्गत लंबित राशि को शीघ्र विमुक्त करने का अनुरोध किया ताकि योजनाओं को ससमय पूरा किया जा सके।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने गैर-उग्रवाद प्रभावित जिलों में भी 250 से अधिक आबादी वाले बसावटों को जोड़ने की योजना को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में शामिल करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में दोहरे अंक का विकास दर हासिल करने के बावजूद भी हम विकास के प्रमुख मापदंडों मसलन गरीबी रेखा, प्रति व्यक्ति आय, औद्योगीकरण और सामाजिक एवं भौतिक आधारभूत संरचना में राष्ट्रीय औसत से नीचे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि हमारी तरह कई अन्य राज्य भी पिछड़े हैं। ऐसे पिछड़े राज्यों को एक समय सीमा में पिछड़ेपन से उबारने और राष्ट्रीय औसत के समकक्ष लाने के लिए सकारात्मक नीतिगत पहल की जरूरत है। जिन राज्यों को विशेष श्रेणी के राज्य का दर्जा मिला है वे विकास के मामले में प्रगति किये हैं। अतः पिछड़ेपन से निकल कर विकास के राष्ट्रीय औसत स्तर को प्राप्त करने के लिए बिहार को और इस जैसे अन्य पिछड़े राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमने लगातार केन्द्र सरकार के समक्ष अपनी मांग को रखा है।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने इसी संदर्भ में केन्द्र सरकार द्वारा गठित रघुराम राजन समिति की अनुशंसाओं की तरफ ध्यान आकृष्ट किया। इस समीति ने राज्यों के लिए समग्र विकास सूचकांक प्रस्तुत किया था एवं जिसके अनुसार देश के 10 सर्वाधिक पिछड़े राज्यों को चिन्ह्ति किया गया था। इन राज्यों में बिहार भी सम्मिलित है। प्रतिवेदन में उल्लेखित था कि सर्वाधिक पिछड़े राज्यों की विकास की गति बढ़ाने के लिये केन्द्र सरकार अन्य रूप में केन्द्रीय सहायता उपलब्ध करा सकती है। इस पृष्ठभूमि में हमारा अनुरोध है कि केन्द्र सरकार, सर्वाधिक पिछड़े राज्यों के लिये विभिन्न केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में केन्द्रांश के प्रावधान को 90 प्रतिशत करे ताकि इन राज्यों को केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में राज्याशों की प्रतिबद्धताओं में बचत हो सकेगी एवं इन्हें अपने संसाधनों का उपयोग अन्य विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं में करने का अवसर मिल सकेगा। साथ ही इन राज्यों को केन्द्रीय प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों में छूट मिलने से निजी निवेश के प्रवाह को गति मिलेगी तथा रोजगार के नए अवसर सृजित हो सके। केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में मार्गदर्शिका के अनुसार लोगों को योजना के क्रियान्वयन में लगाया जाता है और इसके लिए उन्हें मानदेय दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर समेकित बाल विकास कार्यक्रम के तहत आंगनवाड़ी सेविका/सहायिका, मध्याह्न भोजन के तहत रसोईया आदि। समय-समय पर इनके द्वारा अपने मानदेय को बढ़ाने की माँग की जाती है। ऐसे लोग बड़ी संख्या में होने के कारण संगठित रूप से भी अपनी माँगों को रखते है एवं पूरा नही होने पर विरोध भी करते है। इस कारण योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और योजनाओं के मूल उद्देश्यों पर मानदेय संबंधी मामला हावी हो जाता है। कुछ मामलों में केन्द्र सरकार द्वारा लम्बी अवधि से मानदेय में वृद्धि नही करने के कारण, केन्द्र द्वारा निर्धारित मानदेय के अतिरिक्त बिहार जैसे अल्प संसाधन वाले राज्य कोे अपने संसाधनों से भी राशि देनी पड़ रही है। इस संबंध में माननीय मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि अगर केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में ऐसे लोगों को लम्बी अवधि तक लगाया जाता है तो इनके मानदेय में एक निर्धारित अन्तराल पर यथोचित वृद्धि की जानी चाहिए और इसका पूर्ण वित्तीय भार केन्द्र सरकार को वहन करना चाहिए।

खुलासा : दलित होने का दंश झेल रहे बीएसएससी के पूर्व अध्यक्ष सुधीर कुमार, हर हाल में दोषी साबित करने में जुटी एसआईटी

पटना(अपना बिहार, 24 अप्रैल 2017) - बीएसएससी पेपर लीक मामले में जांच कर रही एसआईटी खुद ही सवालों के घेरे में उलझ गयी है। अब यह सवाल महत्वपूर्ण होता जा रहा है कि निलंबित अध्यक्ष सुधीर कुमार को हर हाल में दोषी साबित करने में क्यों जुटी है एसआईटी। जिस तरह की कोशिशें अब तक एसआईटी ने श्री कुमार के मामले में किया है, उससे यही लगता है कि वह इसी बहाने दलितों और पिछड़ों को महत्वपूर्ण जिम्मेवारी के योग्य नहीं हैं, साबित करना चाहती है।

खैर सुधीर कुमार से सोमवार को फुलवारी जेल में जाकर एसआईटी पूछताछ कर सकती है। पूछताछ करने के लिए उसे निगरानी कोर्ट से इजाजत मिल गई है। पहले वह श्री कुमार को एसआईटी रिमांड पर लेकर पूछताछ करना चाहती थी मगर उसे कोर्ट से रिमांड पर लेने की इजाजत नहीं मिली थी।

दिलचस्प यह है कि इस पूरे मामले में पुलिस ने दिल्ली के उस प्रोफ़ेसर के द्वारा कोर्ट में दिये गये इकबालिया बयान को सच मान लिया है, जिसके बारे में श्री कुमार ने प्रश्नपत्र सेट करवाने की बात कही थी। मिली जानकारी के अनुसार उस प्रोफ़ेसर ने कोर्ट में श्री कुमार के कथन को गलत करार दिया। जबकि यह जानना अत्यंत ही सहज है कि बीएसएससी का अध्यक्ष रहते हुए श्री कुमार ने किस व्यक्ति को प्रश्नपत्र सेट करने की जिम्मेवारी दी। मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने एसआईटी को इस बाबत दस्तावेज भी दिये। लेकिन कोर्ट में उक्त प्रोफ़ेसर के इन्कार के बाद एसआईटी अब एक बार फ़िर से सुधीर कुमार पर शिकंजा कसना चाहती है।

एसआईटी ने यह मान लिया है कि सुधीर ने प्रश्न-पत्र सेट करने वाले प्रोफेसर का नाम व पता गलत बताया। उसे शक है कि ष्री कुमार ने प्रश्न-पत्र अनंतप्रीत सिंह बरार से ही सेट करवाया होगा। उसका कहना है कि श्री बरार से श्री कुमार की काफी पटती थी। प्रश्न-पत्रों का आंसर सीट बरार ने ही तैयार किया था। बाद में बरार के दिए आंसर सीट को सुधीर का भांजा आशीष हजारीबाग स्थित घर से लाकर वाट्सएप पर वायरल कर दिया था।

यानी एसआईटी की पूरी कहानी तैयार है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब इस पूरे मामले में एसआईटी के पास पूरी जानकारी है फ़िर वह किस बात का इंतजार कर रही है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि एसआईटी उनलोगों को माफ़ कर देना चाहती है जिनके बारे में सच्चाई पहले ही सामने आ चुकी है। खासकर उस सफ़ेदपोश की सच्चाई जो सीएम के दायें हाथ माने जाते हैं।

बिहार को उसका हक दे केंद्र, नीति आयोग की बैठक में नीतीश ने दी गुजरात नहीं, पूरे देश का ध्यान रखने की सलाग

पटना(अपना बिहार, 24 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से बिहार को उसका वाजिब हक देने की मांग की। साथ में उन्होंने कहा कि बदले हुए आर्थिक एवं सामाजिक परिवेश में देश के विकास के लिए समावेशी सोच एवं दृष्टि की आवश्यकता है। श्री कुमार रविवार को राष्ट्रपति भवन के प्रेक्षागृह में आयोजित नीति आयोग के शासी परिषद् की तीसरी बैठक को सम्बोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को आवश्यक रूप से प्रतिष्ठापूर्ण और आत्मसम्मान से जीवन जीने का अवसर उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित करना हम सबका कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लघु, मध्यम एवं दीर्घकालीन रणनीति का सूत्रण किया जाना चाहिए जो राज्यों के बीच असमानता के स्तर पर आधारित हो। इससे सार्वभौमिक, एकीकृत, रूपान्तरित एवं आकांक्षात्मक विकास की लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती है।

नीति आयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि भारत के संघीय ढाँचे में सभी राज्यों की पहल एवं सहभागिता से समस्याओं का निराकरण करने तथा लोकोपयोगी नीतियों के क्रियान्वयन के लिए बेहतर समन्वय का माहौल पैदा करने में नीति आयोग अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि यह बैठक हमें यह अवसर प्रदान करती है कि हम अपनी समस्याओं पर एक मंच पर विचार विमर्श करें और उनका समाधान ढूंढे। राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं, नीतियों तथा क्षेत्रों की रणनीतियों के साथ-साथ राज्यों द्वारा उठाये जा रहे सामयिक विषयों पर सकारात्मक चर्चा हो। केन्द्र तथा राज्यों के बीच महत्वपूर्ण विषयों पर आम सहमति बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि यद्यपि 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर सभी राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गयी है, परन्तु आयोग द्वारा राज्यों के बीच क्षैतिज वितरण के लिए जो मानक तय किये गये हैं, उसके चलते विभिन्न राज्यों पर पड़ रहे प्रभाव में बहुत ज्यादा भिन्नता है। उदाहरण के लिए बिहार को 13वें वित्त आयोग के फार्मूले के आधार पर राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी 32 प्रतिशत रहने पर भी पूर्व के वर्ष के वृद्धि दर (15 प्रतिशत) के आधार पर वित्तीय वर्ष 2015-16 में 48,118 करोड़ रूपये की प्राप्ति का आकलन था। नये फार्मूले पर बिहार को वित्तीय वर्ष 2015-16 में 50,748 करोड़ रूपये की प्राप्ति केन्द्रीय करों के हिस्से के रूप में होगी। इस प्रकार बिहार के लिए मात्र 5 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी में बढ़ोतरी करीब 30 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के इस अत्यंत असमान प्रभाव को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।

बिहार जैसे पिछड़े राज्य के लिए यह चिन्ता का विषय है कि राज्यों के बीच निधि के बॅंटवारा हेतु 14वें वित्त आयोग ने जो फार्मूला दिया है उसके आधार पर कुल राशि में बिहार का हिस्सा 10.9 प्रतिशत से घटकर 9.665 प्रतिशत हो गया है। मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि बिहार भौतिक एवं सामाजिक आधारभूत संरचना की दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा है और यहाॅं की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। बिहार राज्य की इन विशेष आवश्यकताओं को भी देखे जाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में आधारभूत संरचना की कमी को देखते हुए भारत सरकार द्वारा 12वीं पंचवर्षीय योजना में विशेष योजना (बी॰आर॰जी॰एफ॰) के तहत 12000 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई थी। इसमे नयी परियोजनाओं के लिये 10500 करोड़ रूपये तथा पुरानी चालू योजनाओं को पूरा करने के लिये 1500 करोड़ रूपये कर्णांकित किये गये थे। इसमें 9597.92 करोड़ रूपये की नयी परियोजनाओं की स्वीकृति नीति आयोग द्वारा दी गयी थी। अभी भी 902.08 करोड़ रूपये की राशि के विरूद्ध परियोजनाओं की स्वीकृति हेतु नीति आयोग के पास प्रस्ताव लंबित है। इसके विरूद्ध ऊर्जा प्रक्षेत्र की स्वीकृत परियोजनाओं में लागत में हुई वृद्धि से संबंधित 856.81 करोड़ रूपये का प्रस्ताव तथा पथ प्रक्षेत्र की एक परियोजना-लागत राशि 391 करो़ड़ रूपये का प्रस्ताव नीति आयोग के स्तर पर स्वीकृति हेतु लंबित है। मुख्यमंत्री ने बीआरजीएफ के अन्तर्गत लंबित राशि को शीघ्र विमुक्त करने का अनुरोध किया ताकि योजनाओं को ससमय पूरा किया जा सके।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने गैर-उग्रवाद प्रभावित जिलों में भी 250 से अधिक आबादी वाले बसावटों को जोड़ने की योजना को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में शामिल करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में दोहरे अंक का विकास दर हासिल करने के बावजूद भी हम विकास के प्रमुख मापदंडों मसलन गरीबी रेखा, प्रति व्यक्ति आय, औद्योगीकरण और सामाजिक एवं भौतिक आधारभूत संरचना में राष्ट्रीय औसत से नीचे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि हमारी तरह कई अन्य राज्य भी पिछड़े हैं। ऐसे पिछड़े राज्यों को एक समय सीमा में पिछड़ेपन से उबारने और राष्ट्रीय औसत के समकक्ष लाने के लिए सकारात्मक नीतिगत पहल की जरूरत है। जिन राज्यों को विशेष श्रेणी के राज्य का दर्जा मिला है वे विकास के मामले में प्रगति किये हैं। अतः पिछड़ेपन से निकल कर विकास के राष्ट्रीय औसत स्तर को प्राप्त करने के लिए बिहार को और इस जैसे अन्य पिछड़े राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमने लगातार केन्द्र सरकार के समक्ष अपनी मांग को रखा है।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने इसी संदर्भ में केन्द्र सरकार द्वारा गठित रघुराम राजन समिति की अनुशंसाओं की तरफ ध्यान आकृष्ट किया। इस समीति ने राज्यों के लिए समग्र विकास सूचकांक प्रस्तुत किया था एवं जिसके अनुसार देश के 10 सर्वाधिक पिछड़े राज्यों को चिन्ह्ति किया गया था। इन राज्यों में बिहार भी सम्मिलित है। प्रतिवेदन में उल्लेखित था कि सर्वाधिक पिछड़े राज्यों की विकास की गति बढ़ाने के लिये केन्द्र सरकार अन्य रूप में केन्द्रीय सहायता उपलब्ध करा सकती है। इस पृष्ठभूमि में हमारा अनुरोध है कि केन्द्र सरकार, सर्वाधिक पिछड़े राज्यों के लिये विभिन्न केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में केन्द्रांश के प्रावधान को 90 प्रतिशत करे ताकि इन राज्यों को केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में राज्याशों की प्रतिबद्धताओं में बचत हो सकेगी एवं इन्हें अपने संसाधनों का उपयोग अन्य विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं में करने का अवसर मिल सकेगा। साथ ही इन राज्यों को केन्द्रीय प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों में छूट मिलने से निजी निवेश के प्रवाह को गति मिलेगी तथा रोजगार के नए अवसर सृजित हो सके। केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में मार्गदर्शिका के अनुसार लोगों को योजना के क्रियान्वयन में लगाया जाता है और इसके लिए उन्हें मानदेय दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर समेकित बाल विकास कार्यक्रम के तहत आंगनवाड़ी सेविका/सहायिका, मध्याह्न भोजन के तहत रसोईया आदि। समय-समय पर इनके द्वारा अपने मानदेय को बढ़ाने की माँग की जाती है। ऐसे लोग बड़ी संख्या में होने के कारण संगठित रूप से भी अपनी माँगों को रखते है एवं पूरा नही होने पर विरोध भी करते है। इस कारण योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और योजनाओं के मूल उद्देश्यों पर मानदेय संबंधी मामला हावी हो जाता है। कुछ मामलों में केन्द्र सरकार द्वारा लम्बी अवधि से मानदेय में वृद्धि नही करने के कारण, केन्द्र द्वारा निर्धारित मानदेय के अतिरिक्त बिहार जैसे अल्प संसाधन वाले राज्य कोे अपने संसाधनों से भी राशि देनी पड़ रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि अगर केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में ऐसे लोगों को लम्बी अवधि तक लगाया जाता है तो इनके मानदेय में एक निर्धारित अन्तराल पर यथोचित वृद्धि की जानी चाहिए और इसका पूर्ण वित्तीय भार केन्द्र सरकार को वहन करना चाहिए।

खुलासा : दलित होने का दंश झेल रहे बीएसएससी के पूर्व अध्यक्ष सुधीर कुमार, हर हाल में दोषी साबित करने में जुटी एसआईटी

पटना(अपना बिहार, 24 अप्रैल 2017) - बीएसएससी पेपर लीक मामले में जांच कर रही एसआईटी खुद ही सवालों के घेरे में उलझ गयी है। अब यह सवाल महत्वपूर्ण होता जा रहा है कि निलंबित अध्यक्ष सुधीर कुमार को हर हाल में दोषी साबित करने में क्यों जुटी है एसआईटी। जिस तरह की कोशिशें अब तक एसआईटी ने श्री कुमार के मामले में किया है, उससे यही लगता है कि वह इसी बहाने दलितों और पिछड़ों को महत्वपूर्ण जिम्मेवारी के योग्य नहीं हैं, साबित करना चाहती है।

खैर सुधीर कुमार से सोमवार को फुलवारी जेल में जाकर एसआईटी पूछताछ कर सकती है। पूछताछ करने के लिए उसे निगरानी कोर्ट से इजाजत मिल गई है। पहले वह श्री कुमार को एसआईटी रिमांड पर लेकर पूछताछ करना चाहती थी मगर उसे कोर्ट से रिमांड पर लेने की इजाजत नहीं मिली थी।

दिलचस्प यह है कि इस पूरे मामले में पुलिस ने दिल्ली के उस प्रोफ़ेसर के द्वारा कोर्ट में दिये गये इकबालिया बयान को सच मान लिया है, जिसके बारे में श्री कुमार ने प्रश्नपत्र सेट करवाने की बात कही थी। मिली जानकारी के अनुसार उस प्रोफ़ेसर ने कोर्ट में श्री कुमार के कथन को गलत करार दिया। जबकि यह जानना अत्यंत ही सहज है कि बीएसएससी का अध्यक्ष रहते हुए श्री कुमार ने किस व्यक्ति को प्रश्नपत्र सेट करने की जिम्मेवारी दी। मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने एसआईटी को इस बाबत दस्तावेज भी दिये। लेकिन कोर्ट में उक्त प्रोफ़ेसर के इन्कार के बाद एसआईटी अब एक बार फ़िर से सुधीर कुमार पर शिकंजा कसना चाहती है।

एसआईटी ने यह मान लिया है कि सुधीर ने प्रश्न-पत्र सेट करने वाले प्रोफेसर का नाम व पता गलत बताया। उसे शक है कि ष्री कुमार ने प्रश्न-पत्र अनंतप्रीत सिंह बरार से ही सेट करवाया होगा। उसका कहना है कि श्री बरार से श्री कुमार की काफी पटती थी। प्रश्न-पत्रों का आंसर सीट बरार ने ही तैयार किया था। बाद में बरार के दिए आंसर सीट को सुधीर का भांजा आशीष हजारीबाग स्थित घर से लाकर वाट्सएप पर वायरल कर दिया था।

यानी एसआईटी की पूरी कहानी तैयार है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब इस पूरे मामले में एसआईटी के पास पूरी जानकारी है फ़िर वह किस बात का इंतजार कर रही है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि एसआईटी उनलोगों को माफ़ कर देना चाहती है जिनके बारे में सच्चाई पहले ही सामने आ चुकी है। खासकर उस सफ़ेदपोश की सच्चाई जो सीएम के दायें हाथ माने जाते हैं।

विधान परिषद में महिला पार्षद से छेड़छाड़ करने वाले के बुलावे पर पटना आयेंगी पीएम की परित्यकता पत्नी

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - बजट सत्र के दौरान लोजपा की विधान पार्षद नूतन सिंह के साथ छेड़छाड़ करने वाले भाजपाई पार्षद लाल बाबू प्रसाद के बुलावे पर पीएम नरेंद्र मोदी की परित्यकता पत्नी जसोदा मोदी बेगूसराय में साहू-तेली समाज के एक कार्यक्रम को संबोधित करेंगी। इस आशय की जानकारी स्वयं लाल बाबू प्रसाद ने दी। बताते चलें कि यह पहला अवसर है जब जसोदा मोदी बिहार आ रही हैं। उनके आगमन को लेकर सूबे के भाजपाइयों में बहुत उत्साह देखा जा रहा है।

मई के अंत में आएगा इंटर का रिजल्ट

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के इंटर की कॉपियों का मूल्यांकन काफी तेजी से हो रहा है। कई जिलों से मूल्यांकन समाप्त होने की सूचना मिल रही है। ऐसे में बोर्ड की कोशिश है कि मई अंतिम सप्ताह तक इंटरमीडिएट का रिजल्ट प्रकाशित कर दिया जाए। भभुआ में मूल्यांकन समाप्त हो गया है। इसी तरह से पटना के आठों केन्द्रों पर मूल्यांकन कार्य समाप्ति की ओर है। कुछ जगह जहां कॉपियों बची हुई हैं, वहां शिक्षकों को भेजा जा रहा है। पटना के केन्द्रों पर मुख्य तौर पर भौतिकी और अंग्रेजी की कॉपियां बची हुई हैं। बीएन कॉलेजिएट स्कूल में अंग्रेजी की कॉपियों का मूल्यांकन समाप्त हो गया है। यहां के अंग्रेजी के शिक्षकों को जेडी वीमेंस कॉलेज भेजा गया है। कॉलेज आॅफ कॉमर्स में भी शिक्षकों को लगाया गया है। यहां पर अंग्रेजी और भौतिकी में अधिक कॉपियां बची हुई थीं।

अब बोर्ड को उम्मीद है कि तय सीमा के अंदर कॉपियों का मूल्यांकन समाप्त हो जाएगा। अगर कुछ भाषा विषय की कॉपियों के मूल्यांकन में थोड़ा विलंब होगा। हालांकि उम्मीद है कि माह के अंत तक कॉपियों का मूल्यांकन समाप्त हो जाएगा। मई के तीसरे सप्ताह या अंतिम सप्ताह तक रिजल्ट आ जाएगा।

धान घोटाले के छह साल बाद खुली सरकार की नींद, पटना हाईकोर्ट के न्यायादेश के बाद पहल, एसआईटी का गठन

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - धान के बदले चावल देने में घोटाला करने वाले मिलरों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है। पटना उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित एसआईटी का प्रमुख एडीजी सीआईडी विनय कुमार को बनाया गया है। सीआईडी के अधीन गठित एसआईटी में सात पुलिस अफसरों को शामिल किया गया है। इनमें एडीजी के अलावा आईजी अजिताभ कुमार, एसपी नवीन चंद्र झा और संजय कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार सिन्हा के अलावा दो डीएसपी सोनेलाल सिंह और वीरेन्द्र कुमार सिन्हा को रखा गया है।

धान के बदले चावल की आपूर्ति में गड़बड़ी से जुड़ा मामला वर्ष 2011-12, 2012-13 और 2013-14 का है। इस दौरान राज्यभर में मिलरों से संबंधित 1202 मामले दर्ज किए गए हैं। पटना उच्च न्यायालय के आदेश के तहत एसआईटी में शामिल अधिकारियों का तबादला बगैर कोर्ट की इजाजत के नहीं होगा। मामले की जांच सही ढंग से और जल्द कराने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी दो तरह से मामलों की जांच करेगी। एक करोड़ रुपए से ऊपर की गड़बड़ी वाले मामलों का पर्यवेक्षण, जबकि इससे कम के मामलों की एसआईटी मॉनिटरिंग करेगी। इसके अलावा जिन मामलों का अनुसंधान बंद हो चुका है, उन मामलों को दोबारा खोला जाएगा। केस के अनुसंधानकर्ता जिला पुलिस के इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के ही अधिकारी होंगे। एसआईटी को इस मामले से जुड़ी तमाम एजेंसियों को कागजात उपलब्ध कराने के साथ जांच में पूरा सहयोग करना है।

जंग के दो वर्ष पहले ही चाचा-भतीजी के बीच युद्धाभ्यास शुरू

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - वर्ष 2014 में राजद छोड़कर भाजपा में गये रामकृपाल यादव और उनकी मुंहबोली भतीजी यानी डा. मीसा भारती के बीच दो वर्ष बाद होने वाले राजनीतिक जंग की तैयारी दोनों ओर से शुरू हो गयी है। बताते चलें कि वर्ष 2014 के चुनाव में डा. मीसा भारती को श्री यादव के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। बाद में उन्हें नरेंद्र मोदी ने लालू प्रसाद का साथ छोड़ने एवं उनकी बेटी को हराने का इनाम देते हुए अपने मंत्रिमंडल में बतौर राज्यमंत्री शामिल किया।

हार के बाद भी डा. भारती ने पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र में अपना राजनीतिक संघर्ष जारी रखा। बाद में जब वर्ष 2015 में राजद को विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने का मौका और वह सरकार में शामिल हुई तब यह अनुमान लगाया जा रहा था कि नीतीश मंत्रिमंडल में डा. भारती को भी शामिल किया जाएगा। लेकिन अपने इरादों के प्रति अटल लालू प्रसाद की सबसे बड़ी बेटी ने राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने के कयासबाजियों को धत्ता बताते हुए अपनी राजनीति को जारी रखा। इसका इनाम राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने उन्हें राज्यसभा भेजकर दिया।

हालांकि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से डा. भारती का पाटलिपुत्र की जनता से मिलना-जुलना कम ही रहा। लेकिन उन्होंने अब इसकी भरपाई करना शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो उन्होंने अपने आपको पाटलिपुत्र की जनता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। वहीं सूत्रों की मानें तो उनके चाचा यानी रामकृपाल यादव भी इस बार जमकर तैयारी में जुटे हैं। इसकी वजह संभवत: यह कि पिछली बार नरेंद्र मोदी की लहर ने उन्हें विजयश्री दिलवा दिया था और तब लालू प्रसाद सत्ता से दूर भी थे। लेकिन इस बार स्थितियां बदल सकती हैं। लिहाजा चाचा और भतीजी दोनों के बीच चुनावी युद्ध का पूर्वाभ्यास जारी है।

जेल से निकलते ही लालू पर बरसे पप्पू

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - जेल से बाहर निकलते ही जन अधिकार पार्टी (लो) के संरक्षक और सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उनके पुत्रों पर हमला बोला। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ साजिश रचने वालों के विरुद्ध वे 5 करोड़ की मानहानि का मुकदमा करेंगे। केंद्रीय कारा बेउर से बाहर निकलने के बाद पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है कि थाने से बेल मिलने वाले मुकदमे में हाईकोर्ट से जमानत लेनी पड़ी। श्री यादव ने कहा कि वे कोर्ट का सम्मान करते हैं और कोर्ट पर उन्हें पूरा भरोसा है।

सांसद ने आरोप लगाया कि रेलमंत्री रहते हुए लालू यादव ने अरबों की बेनामी संपत्ति अर्जित की। रेलमंत्री के अधिकार का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने अपने पुत्र और अन्य परिजनों के नाम से बेनामी संपत्ति अर्जित की। सांसद श्री यादव ने कहा कि गरीब परिवार से आने वाले लालू यादव ने सत्ता में आते ही अरबों की संपत्ति कैसे अर्जित कर ली, इसकी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त, आर्थिक अपराध एवं प्रवर्तन निदेशालय और रेलमंत्री को अलग-अलग भेजे पत्रों की कॉपी मीडिया को जारी करते हुए कहा कि काली कमाई को सफेद करने वाले लालू यादव और उनके परिजनों की साजिश का खुलासा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव ने चुनाव के दौरान दायर अपने शपथ पत्र में संपत्ति से जुड़े तथ्यों को छुपाया था। शपथ पत्र में गलत और अधूरा ब्योरा देने के कारण तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के निर्वाचन को रद करना चाहिए।

राष्ट्रपति चुनाव के सिलसिले में सोनिया गांधी से मिले सीएमम जदयू नेता केसी त्यागी का बयान

पटना(अपना बिहार, 22 अप्रैल 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस बैठक में दोनों के बीच राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर भी चर्चा हुई। विपक्ष द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए एक ही उम्मीदवार खड़ा करने पर बातचीत हुई। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने बताया कि हमारी पार्टी विपक्ष की एकजुटता की पक्षधर है। उन्होंने कहा, 'जेडीयू का मानना है कि विपक्ष को मिलकर एक राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार की घोषणा करनी चाहिए। विपक्ष की सबसे वरिष्ठ नेता होने की वजह से सोनिया गांधी को आगे आकर राजनैतिक दलों से बातचीत कर