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कहते हैं कि मनुष्य का जन्म ही मानवता के लिये होता है, क्योंकि मनुष्य का एकमात्र गुण जो उसे सबसे अलग करता है वह मानवता है। यधपि इस भूलोक पर जन्म लेने वाला हर मनुष्य परम पिता ईश्वर का प्रतीक होता है। परंतु काल समय-समय पर मनुष्य की परीक्षा लेता है। सुख और दुख के दो किनारों के बीच मनुष्य अपना जीवन जीता है। मनुष्य जन्मजात कर्मयोगी होता है। समय के फ़ेर में मनुष्य कभी कभार समय का दास बन जाता है। परंतु कुछ मनुष्य ऐसे होते हैं जिनके लिये जीवन एक कालखंड न होकर एक सुनहरा एवं प्रेरणादायक इतिहास बन जाता है। ऐसे महामानव सही अर्थों में वसुधैव कटुम्बकम के पर्याय माने जाते हैं। इनकी कमी तो दिल को दुखाती अवश्य हैं लेकिन उनकी यादें जीवन में नया जोश उत्पन्न करती हैं।
ऐसे ही हरदिल अजीज थे बिहार की मिट्टी के लाल डा मोहन राय्। पेशे से हृदय रोग चिकित्सक डा राय का जन्म बिहार के पूर्णिया जिले के चुनापुर गांव में हुआ था। मध्यम वर्गीय परिवार में जन्म लेने के बावजूद बालक मोहन ने प्रारंभ से ही बड़े ख्वाब देखे। 18 साल की उम्र में ही एक साधारण किसान के बेटे मोहन ने भागलपुर कालेज में दाखिला लिया। अपनी प्रतिभा के कारण ये इंटर की परीक्षा में प्रधम स्थान प्राप्त करने में सफ़ल रहे। प्रारंभ में इन्होंने बिहार इन्स्टीच्युट आफ़ टेक्नोलाजी, सिंदरी में नामांकन लिया परंतु मानवसेवी मन ने दो सप्ताह में ही दरभंगा मेडिकल कालेज में दाखिला लेने को मजबूर कर दिया। यहां युवा मोहन का अवतरण डा मोहन राय के रुप में हुआ। विश्वविद्यालय में स्वर्ण पदक विजेता रहे डा राय ने फ़िर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मन में पूरे विश्व को अपना कटुम्ब बनाने की दृढ इच्छा थी सो ये अमेरिका चले आये। यहां अपनी विलक्षण प्रतिभा के बल पर इन्हें शत प्रतिशत छात्रवृति मिली। कार्डियक थ्रोसेज सर्जन के रुप में डा राय ने अमेरिका के प्राख्यात चिकित्सा संस्थानों यथा क्लीवलैंड के क्लीवलैंड क्लिनीक, मायो क्लिनीक रोचस्टर, क्लीवलैंड के माऊंट सिनाई हास्पीटल और डेट्रायट स्थित हेनरी फ़ोर्ड हास्पीटल में अपनी सेवायें दी।
डा राय ने केवल अमेरिका में ही लोगों के जीवन की रक्षा नहीं की बल्कि पूरे विश्व के असंख्य हृदय रोगियों की सेवा की। इन्होंने भारत में मुंबई के सुप्रसिद्ध ब्रीच कैंडी हास्पीटल, नानावती हास्पीटल आदि हास्पीटल में निशुल्क सेवा की। भारत में ओपेन हर्ट सर्जरी तकनीक को लाने का श्रेय डा मोहन राय को ही जाता है और पहली बार भारत में इन्होंने ही इसकी शुरुआत सफ़लता से की थी।
अपनी प्रतिभा एवं मानवसेवी होने के कारण डा राय अब तक केवल चिकित्सक मात्र नहीं थे। अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन आदि देशों में हृदय रोगियों के भगवान कहे जाने वाले डा राय अपने जन्म स्थल बिहार की मिट्टी को नहीं भुले थे। जब कभी वे अपने गांव आते हर बार वे हजारों लोगों की सेवा मुफ़्त में करते थे। डा राय पूर्णिया को एक आदर्श शहर के रुप में देखना चाहते थे। इसलिये डा राय ने पूर्णिया में अनेक स्कूल, हास्पीटल और कारखाने लगवाये। आज जो कुछ भी पूर्णिया शहर में दिखता है उसमें डा राय का योगदान अवश्य है।
अपने दोस्तों राजा के रुप में प्रसिद्ध डा मोहन राय वास्तव में दिल के राजा थे। मृदुल वाणी उनके व्यक्तित्व को और निखार देता था। यह दुर्भाग्य रहा कि मात्र 65 वर्ष की आयु में ही इस महामानव ने इस भूलोक का त्याग कर दिया लेकिन उनकी यादें अमर हैं। बिहार के पूर्णिया से लेकर अमेरिका तक उनकी यादों के फ़ूल निरंतर सुगंध दे रहे हैं। जीवन संगिनी विमल यादव के साथ डा मोहन राय ने आदर्श जीवन का चित्रण इस भूलोक पर किया। उनके दो संतान डा मोना और डा अशोक अपने पिता के कर्मपथ पर अग्रसर हैं।
अपना बिहार इस महामानव के प्रति कृतज्ञतापूर्वक श्राद्धांजलि अर्पित करता है। आईये हम भी डा राय मे मनुष्यत्व का अनुसरण करें। |

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अपना बिहार निष्पक्षता हमारी पहचान
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