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इरफ़ान की आगवानी के लिये सिलिकान वैली तैयार

बिहार उद्यमिता के उभरते सितारे के इरफ़ान की आगवानी के लिये अमेरिकी सिलिकान वैली तैयार है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इरफ़ान 29 अप्रैल को सन फ़्रांसिस्को पहुंचेंगे जहां उनकी आगवानी एओडीबी के संस्थापक रमेश यादव करेंगे। अपने प्रवास के दौरान इरफ़ान पालो अल्टो के डा प्रभु गोयल, गूगल के संगीता दास, टाई के मुख्यालय सांता क्लारा में कंवल रेखी और माऊंटेन विव्यू में शबीर भाटिया के साथ मिलेंगे।(रिपोर्ट- नवल)

 

कैसे पूरे हों अरमान जब बैंक करें परेशान

आखिर विकसित बिहार का सपना कैसे पूरा हो सकता है जब बिहार में धन उगाहने वाले बैंक अपनी सामाजिक जिम्मेवारियों का परित्याग कर बिहार की उद्यमिता का गला घोंट्ते रहें और राज्य सरकार हाथ पर हाथ धर कर बैठी रहे। जी हां, हम बात कर रहे हैं बिहार के उद्यमियों की। एक तो वैसे ही बिहार के बारे में एक आम धारणा बन गई है कि बिहार में उद्यमिता का अभाव है। अब जबकि बिहार विकास के मार्ग पर अग्रसर है और राज्य के युवा उद्यमी अपने बिहार को विकसित बिहार बनाने की दिशा में पहल करना चाहते हैं तब बिहार के बैंक उनके राह में पहाड़ खड़ा कर रहा है।

 

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से सभी बैंकों को यह निर्देश जारी किया गया है कि सभी लघु उद्यमियों को 10 लाख रुपये तक के लोन बिना किसी थर्ड पार्टी गारंटर के दिये जायें। सूक्ष्म एवं लघु उद्यमिता विकास संस्थान, भारत सरकार, पटना के निदेशक डी के सिंह ने अपना बिहार से विशेष बातचीत में यह जानकारी दी कि राज्य के बैंकों ने 1107 आवेदनों में से केवल 75 आवेदकों को ही लोन दिये। इन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि वर्ष 2009-10 में टास्क फ़ोर्स समिति के द्वारा कुल 1107 प्रस्ताव राज्य के विभिन्न बैंकों को दिये गये। बैंकों ने कुल 170 प्रस्तावों को ही अपनी स्वीकृति दी जबकि केवल 75 उद्यमियों को ही लोन दिये। इन्होंने यह भी बताया कि टास्क फ़ोर्स समिति एक सशक्त समिति होती है जिसके अध्यक्ष विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी होते हैं। इसके अलावा इस समिति में लीडिंग बैंक के मैनेजर और जिला उद्योग केंद्र के अध्यक्ष होते हैं। यह समिति आवेदकों से प्राप्त प्रस्तावों पर गहन अध्ययन करने के बाद ही उन्हें बैंकों के पास अनुशंसित करती है।

 

बहरहाल राज्य में बैकों के नकारात्मक रवैये का ही परिणाम रहा है कि बिहार में साख जमा अनुपात 30 प्रतिशत से भी कम है। सबसे आश्चर्यजनक यह है कि राज्य सरकार इस पूरे मामले में हाथ-हाथ रखकर बैठी है। बताते चलें कि पटना के पूर्व जिलाधिकारी बी राजेंदर ने वर्ष 2002-03 में पटना जिले में प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत बैंकों के नकारात्मक रवैये को देखते हुए जिले के लीडिंग बैंक पंजाब नेशनल बैंक के सभी शाखाओं से जिला प्रशासन के डिपोजिट किये गये पैसों को निकालकर दूसरे बैंक में हस्तांतरित करने का आदेश दिया था। श्री राजेंदर के इसी आदेश का परिणाम रहा कि एक सप्ताह के अंदर में पीएनबी ने करीब 78 प्रतिशत आवेदकों के लोन को न केवल स्वीकृति दी बल्कि उन्हें लोन के पैसे भी दे दिये।(रिपोर्ट-नवल)

 

बिहार के बुनकरों की समस्या गंभीर

बिहार में बुनकरों की संख्या करीब दो लाख है। यदि राज्य सरकार चाहे तो बिहार इस उद्योग में अपनी खोयी प्रतिष्ठा को वापस पा सकता है। लेकिन सुशासन में भी यह महज एक ख्वाब ही है। कल भागलपुर में बुनकरों की आम सभा को संबोधित करते हुए मो नजाहत अंसारी ने अफ़सोस जताते है कि राज्य सरकार औद्योगिकी विकास के मामले में केवल बयानबाजी करती है, हकीकत में करती कुछ भी नहीं है।(भागलपुर से अमरेश की रिपोर्ट)

 

बिहार के विकास का सहभागी हैं सीआईआई

सीआईआई के प्रदेश अध्यक्ष सत्यजीत सिंह का कहना है कि सीआईआई बिहार के विकास में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिये राज्य के आईटीआई संस्थानों में जंग लगे उपकरणों को बदलेगा ताकि युवा आधुनिकतम यंत्रों के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। इसके लिये सीआईआई के बैनर तले श्री सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने राज्य से श्रम संसाधन मंत्री अवधेश नारायण सिंह के साथ मुलाकात की और उन्हें इस सहभागिता के बारे में अवगत कराया।

 

देश के 3 लाख रिक्शाचालकों को नयी राह दिखा रहे हैं इरफ़ान

 

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