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अपना बिहार निष्पक्षता हमारी पहचान
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आठ बिहारी शिक्षकों को राष्ट्रपति पुरस्कार शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिये राज्य के 8 शिक्षकों को राष्ट्रपति पुरस्कार मिलेगा। इनमें विपिन उच्च विद्यालय बेतिया के सहायक शिक्षक डा मधुसूदन मणि त्रिपाठी, बी एस पी उच्च माध्यमिक विद्यालय,पटना की प्रधानाध्यापिका कृष्णा कुमारी, रामलखन सिंह याअव माध्यमिक उच्च विद्यालय,पट्ना की प्रधानाध्यापिका डा मंजूरानी वर्मा, राजकीय मध्य विद्यालय, गंडक कालोनी, बेतिया के प्रभारी प्रधानाध्यापक नागेंद्र नाथ शर्मा, उत्क्रमित मध्य विद्यालय, अररिया के प्रभारी प्रधानाध्यापक महेंद्र नारायण पंकज, आदर्श मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजमंगल सिंह, मध्य विद्यालय, समस्तीपुर की प्रधानाध्यापिका निशि गुप्ता और राजकीय मध्य विद्यालय वैशाली के प्रधानाध्यापक कपिलदेव प्रसाद शामिल हैं। इन सभी शिक्षकों को आगामी पांच सितम्बर को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। पटना विवि में नामांकन घोटाला पटना विवि के विभिन्न कालेजों एवं स्नातकोत्तर विभागों में नामांकन घोटाला किये जाने का मामला प्रकाश में आया है। कहीं निर्धारित सीटों से अधिक छात्रों का नामांकन लिया गया है तो कहीं आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया है। मानव संसाधन विकास विभाग ने निर्धारित सीटों से अधिक लिये गये नामांकन को रद्द करने का आदेश दिया है। इस निर्देश के बाद सैंकड़ों छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है, वहीं इस पूरे मामले में विवि पदाधिकारियों पर कार्रवाई होना तय है। शिक्षकेत्तर कर्मियों की हड़ताल समाप्त होने के बाद कालेजों में लौटी रौनक 50 दिनों तक चले शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के हड़ताल के समाप्त होने के बाद कल लंबे समय के बाद राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों सहित 250 अंगीभूत कालेजों में रौनक लौट गई है। हांलाकि गुरूवार के देर रात में ही राज्य सरकार की ओर से मानव संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह और शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ की ओर से डा विमल कुमार सिंह और महामंत्री गंगा प्रसाद झा ने 19 सुत्री मांगों के समर्थन में समझौते पर हस्ताक्षर किया। इस समझौते के मुताबिक 1 जनवरी 1996 से प्रभावी पंचम वेतनमान मे विभिन्न पदों दिनचर्या लिपिक, शार्टर, पुस्तकालय सहायक, पत्राचार लिपिक एवं सहायक के वेतनमान में हुई विसंगति का निराकरण करते हुए इस संबंध में राज्यादेश निर्गत किया जायेगा। इसके अलावे समझौते में राज्य सरकार द्वारा किये गये सभी दंडात्मक कार्रवाईयों को वापस ले लिया गया है। पैंसठ बाद रिटायर होंगे विवि शिक्षक पटना हाईकोर्ट ने राज्य के विवि शिक्षकों सेवा निवृति की सीमा को बढाते हुए 62 साल से 65 साल कर दिया है। न्यायाधीश नवनीत प्रसाद सिंह की एकल पीठ ने अपने फ़ैसले में अपना निर्णय सुनाया। अदालत ने कहा कि जो विवि शिक्षक 30 जून 2010 के पहले रिटायर हो चुके हैं, उन्हें यह लाभ नहीं मिल सकेगा। शिक्षकों का हड़ताल समाप्त राज्य के राजकीयकृत माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त हो गई है। इसके साथ ही हड़ताली शिक्षकों को जेल भरो आंदोलन भी समाप्त हो गया है। राज्य सरकार और बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ एवं बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के बीच लिखित समझौते के बाद हड़ताल समाप्ति की घोषणा की गई। इस समझौते के तहत सभी 11 सूत्री मांगों के संबंध में राज्य सरकार ने विचार करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा हड़ताली शिक्षकों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जायेगी। शिक्षा का अधिकार में हो समेकित समावेश शिक्षा का अधिकार कानून जैसे अनेक सरकारी दस्तावेज सामाजिक कुव्यवस्थाअ का मुंह चिढाने के लिये काफ़ी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है क्या वाकई में समाज के सभी तबके के लोग इस अधिकार के प्रति सजग हैं। जबतक इस बुनियादी समस्या को सुलझाने के लिये समाज के सभी लोग सामूहिक पहल नहीं करेंगे और समेकित समावेश को क्रियान्वित नहीं किया जायेगा, तबतक कानून को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सकता है। ये बाते राज्य के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो विनय कंठ ने शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के संदर्भ में आयोजित एक कार्यशाला में कहीं। इस अवसर पर प्रो डेजी नारायन ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कई अनेक बुनियादी समस्याओं से जुड़ा है। इसलिये आवश्यकता इस बात की है कि सभी समस्याओं को एक नजरिये से देखा जाये। इन्होंने यह भी कहा कि जबतक शिक्षा में अंतर रहेगा यानि सरकारी और सुविधा संपन्न परिवार के बच्चे कान्वेंट स्कूलों में और राज्य 80 प्रतिशत गरीब बच्चे सरकारी सुविधाविहीन विद्यालयों में पढेंगे, तबतक शिक्षा का अधिकार कानून एक दस्तावेज मात्र है। इस अवसर पर विजय कांत सिन्हा, संजीव राय, जदयू नेता गुलाम रसूल बलियावी, विनोदानंद झा, प्रदीप प्रियदर्शी और रघुपति जी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। बिहार सरकार का एक और फ़रमान, 1000 शिक्षकेत्तर कर्मचारी निलंबित, प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों को भी मिली धमकी पिछले पौने दो महीने से चली आ रही राज्य विभिन्न विश्वविध्यालयों के शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की मांगों को दरकिनार करते हुए बिहार सरकार ने 1000 शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मानव संसाधन विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिक्षकेत्तर कर्मचारियों से बातचीत करने का प्रयास विफ़ल रहा है और इस कारण जो अभी तक अपने कार्य स्थल से अनुपस्थित पाये गये हैं, उन्हें निलंबित किया जाता है। उधर शिक्षकेत्तर कर्मचारी भी इन्कलाबी मुद्रा में हैं। इनके एक प्रतिनिधि ने अपना बिहार को बताया कि अपने हक के लिये वे फ़ांसी पर भी झुलने को तैयार हैं। राज्य के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो नवल किशोर चौधरी ने राज्य सरकार के द्वारा लिये गये कदम को बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की संज्ञा दी है। इसके अलावा आंदोलनरत प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों पर भी सरकारी तलवार लटकने लगा है। विभाग से एक अधिसूचना जारी कर दी गई है। अनुपस्थित पाये जाने वाले शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जायेगा। बेकार गया सरकारी फ़रमान पिछले 39 दिनों से राज्य के 250 कालेजों में ताले लगे हैं और छात्र पेशोपेश में है कि कब उनकी पढाई शुरू हो। इससे इतर राज्य सरकार और हड़ताली शिक्षकेत्तर कर्मचारी दोनों अपने-अपने जिद पर अड़े हैं। हांलाकि राज्य सरकार ने साम, दाम, दण्ड और भेद चारों नीतियों को अमल में लाकर देख चुकी है। कल राज्य सरकार ने दण्ड की नीति के तहत आदेश जारी किया कि यदि हड़ताली शिक्षकेत्तर कर्मचारी काम पर लौटें नहीं उन्हें निलंबित कर दिया जायेगा। मानव संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने सभी विश्वविद्यालयों को आदेश दिया है कि सभी कर्मचारियों की उपस्थिति पुस्तिका प्रति दिन विभाग को भेजेंt ताकि अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के खिलाफ़ कार्रवाई की जा सके। उधर शिक्षकेत्तर कर्मचारी भी मर-मिटने की घोषणा कर रहे हैं। इन कर्मचारियों ने राज्य सरकार से दो टूक शब्दों में कहा है कि जबतक वह पिछले समझौतों के कार्यान्व्यन के लिये राज्यादेश जारी नहीं करेगी, तबतक एक भी शिक्षकेत्तर कर्मचारी न तो काम पर लौटेंगे और न ही सरकारी फ़रमान के आगे घुटने टेकने वाले हैं। बहरहाल अंदरूनी खबर यह है कि दोनों यानि राज्य सरकार और हड़ताली कर्मचारी इलेक्शन ईयर के कारण मजबूर हैं। राज्य सरकार द्वारा हड़ताली शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के आगे नाक रगड़ने और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का भाव खाना तो यही साबित करता है कि अब सरकार सरकार न रहे और कर्मचारी भी जान गये हैं कि आखिर इलेक्शन ईयर में सरकार के पास विकल्प भी क्या है। चाहे भले ही इनके तकरार से लाखों युवाओं का भविष्य खराब हो जाये तो हो जाये। सरकार को कुर्सी तो कर्मचारियों को केवल माल से मतलब है। सुपर थर्टी इज़ रियली सुपर – रशद अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत रशद हुसैन ने कल सुपर थर्टी का भ्रमण किया और वहां अध्ययनरत छात्रों के साथ अनुभवों को साझा किया। इस अवसर पर सुपर 30 के संचालक आनंद को बधाई देते हुए श्री हुसैन ने कहा कि यह वाकई काबिले तारीफ़ है कि गरीब और मजलुमों के बच्चे भी उच्च कोटि के इंजीनियर बन सकते हैं। शिक्षा विभाग ने किया कमाल, स्वर्गवासी को किया बहाल राज्य का मानव संसाधन विकास विभाग के पैर इन दिनों जमीन पर नहीं है। इसके अलावा चुनाव की घोषणा नजदीक देख राज्य सरकार की हड़बड़ी का एक कमाल यह कि मगही सहित सभी विभिन्न अकादमियों का पुनर्गठन के बहाने अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को कुर्सी देने के फ़िराक में एक स्वर्गवासी जदयू नेता को मगही अकादमी की 12 सदस्यीय कार्यसमिति का सदस्य बना दिया। चार अगस्त की तारीख में सरकार के उपसचिव ओंकारनाथ आर्य के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना के अनुसार इस कार्यसमिति के एक सदस्य रामनगीना सिंह “मगहिया” का नाम भी शामिल है, जिनकी मृत्यु पिछले साल एक अगस्त को हो गया है। एक पर एक ग्यारह और दो पर दो बारह बच्चे कल के भविष्य हैं और यदि भविष्य को सुंदर बनाना है तो बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इस प्रकार की अनेक बातें आये दिन सरकारी घोषणाओं में देखे जा सकते हैं। लेकिन पटना जिले के फ़ुलवारी प्रखंड के ब्रह्म्पुर गांव में एक आंगनबाड़ी केंद्र चलता है। इस केंद्र की आंगनबाड़ी सेविका सुनीता देवी ब्च्चों को प्ढाती हैं, एक पर एक ग्यारह और दो पर दो बारह्। इसके अलावा इस शिक्षिका की योग्यता का कमाल यह कि “अ” से अमरूद नही, अरमुद होता है। अंग्रेजी के वर्णमालाओं की इनकी जानकरी भी काबिले तारीफ़ है। आंगनबाड़ी शिक्षिका के पति द्वारिका प्रसाद सिंह मुख्यतः रियल एस्टेट के एजेंट हैं और जदयू के प्रतिष्ठित कार्यकर्ता भी हैं। इनके आलीशान तिमंजिले मकान के एक दुकाननुमा कमरे में यह आंगनबाड़ी केंद्र चलाया जा रहा है, जहां बच्चों के लिये न तो ब्लैक बोर्ड है और न ही कोई स्लेट्। जाहिर तौर पर जब बच्चों को ऐसे आयोग्य शिक्षक अथवा शिक्षिका पढायेंगी, तो इनके भविष्य की कल्पना आसानी से की जा सकती है। नालंदा विश्वविद्यालय विधेयक इसी म्हीने जी हां, यदि सब कुछ सकारात्मक रहा और महंगाई डायन ने संसद की कार्रवाई को अब और अधिक नहीं खाया, तो निश्चित तौर पर इसी सत्र में नालंदा अंतरराष्ट्रीय विवि विधेयक को संसद में लाया जायेगा। कल इस आशय की जानकारी देश के विदेश मंत्री एस एम कृष्णा और मुख्यमत्री नीतीश कुमार दिल्ली में हुई बैठक के बाद श्री कुमार ने संवाददाताओं को दी। इससे पहले नालंदा अंतरराष्ट्रीय विवि के मेंटरों के समूह की बैठक हैदराबाद हाऊस में संपन्न हुई, जिसकी अध्यक्षता नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने की। इस बैठक में सर्वसम्मति से केंद्र सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। बैठक में भाग लेने वालों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलवा जदयू सांसद एन के सिंह, राज्य सरकार के मानव संसाधन विकास विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह सहित अनेक देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। हड़ताली शिक्षाकर्मियों ने दी गिरफ़्तारी एक तरफ़ राज्य सरकार के मुखिया नालंदा में अंतरराष्ट्रीय विवि की स्थापना करने के लिये दिल्ली में बैठक कर रहे थे, ठीक उसी समय पटना के डाकबंगला चौराहे पर राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के आंदोलनरत शिक्षकेत्तर कर्मचारी अपने मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे। इसका आयोजन बिहार राज्य विवि एवं महा विद्यालय कर्मचारी महासंघ ने किया था। हांलाकि संख्या कम रह्ने और लाठी के जोर पर पुलिस ने जल्द ही डाकबंगला को मुक्त करा लिया और सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। बाद में इन्हें छोड़ दिया गया। विदित है कि राज्य के शिक्षकेत्तर कर्मचारी पिछले 1 महीने से हड़ताल कर रहे हैं और इस बीच विभागीय मंत्री के साथ बैठकें हो चुकी है, लेकिन कर्मचारी आंदोलन वापस लेने को तबतक तैयार नहीं है, जबतक कि उनके मांगों को नहीं मान लिया जाता। पढाई की मांग कर रहे छात्रों को मिली जेल (26 जुलाई 2010) पटना विश्वविध्यालय को भले ही आजादी के पहले पूरब का आक्सफ़ोर्ड कहा जाता हो, लेकिन पिछले चार दशकों से यह राजनीतिक हस्तियों की जननी के रुप में स्वयं को चरितार्थ करती आ रही है। आज के लालू प्रसाद हों या नीतीश कुमार या फ़िर सुशील कुमार मोदी, ये सभी इस कैम्पस के उपज हैं। वर्तमान में भी इस विवि कैम्पस को पढाई के लिये कम और राजनीति के लिये अधिक जाना जाता है। राज्य में शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के हड़ताल के कारण बाधित पढाई को नियमित करने की मांग कर रहे छात्रों पर सरकारी तंत्र ने एक बार फ़िर दमनात्मक कार्रवाई किया और पांच छात्र नेताओं को पकड़कर जेल भेज दिया। इनमें एआईएसएफ़ के उपाध्यक्ष विश्वजीत कुमार, एसएफ़आई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नरेश कुमार, छात्र लोजपा के संजीव सरदार और छात्र राजद के बब्लू सम्राट शामिल हैं। गरीब छात्रों की पढाई के लिये आगे आया एफ़ एफ़ ई राज्य के गरीब एवं प्रतिभावान छात्रों की पढाई के लिये स्व्यंसेवी संस्था फ़ाऊंडेशन फ़ार एक्सिलेंस ने पहल करते हुए उन होनहार छात्रों को मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढाई के लिये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है, जिनके माता-पिता अपने होनहार बच्चों को गुणवत्ता युक्त उच्च शिक्षा देने में असमर्थ हैं। एफ़ एफ़ ई के अंतरराष्ट्रीय संयोजक विष्णु शर्मा ने इस आशय की जानकारी अपना बिहार को दूरभाष के माध्यम से दी है। श्री शर्मा ने बताया कि योग्य छात्रों को अधिकतम 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता संस्था के द्वारा दी जायेगी। योग्य छात्रों के पहचान के लिये बिहार में पांच लोगों को अधिकृत किया गया है। इनमें डा अशोक घोष, सुपर 30 के संचालक आनंद कुमार, सम्मान फ़ाऊंडेशन के संस्थापक इरफ़ान आलम और शिक्षाविद डा नीना झा शामिल हैं। श्री शर्मा ने बताया कि पिछले 15 सालों में उनकी संस्था ने देश के करीब 11 हजार बच्चों को यह छात्रवृति प्रदान की है। इसके लिये देश एवं देश के बाहर रहने वाले भारतीयों से चंदा किया जाता है। इन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई छात्र/छात्रा इस छात्रवृति का लाभ उठाना चाह्ते हैं तो अधिकृत प्रतिनिधियों से संपर्क करें। के के पाठक के फ़ैसलों को निरस्त करने की स्वीकृति के बाद विवि शिक्षकों की हड़ताल समाप्त हांलाकि उनका मंसूबा मानव संसाधन विभाग के सचिव के के पाठक को शिक्षा महकमे से दूर करवाना था, लेकिन जब सरकार ने उन्हें यह आश्वस्त किया कि श्री पाठक के द्वारा लिये गये फ़ैसलों को लागू नहीं किया जायेगा, तब जाकर विवि शिक्षकों ने अपनी हड़ताल समाप्त की। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो कल हड़ताली विवि शिक्षकों के प्रतिनिधि के रुप में कांग्रेसी नेता रामजतन सिन्हा और अनेक नेताओं ने मानव संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह के साथ बैठक की और इस सम्झौते पर हस्ताक्षर किया कि राज्य सरकार विवि शिक्षकों के बकाये 300 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी तथा विवि शिक्षकों के रिटायरमेंट की उम्रसीमा 65 साल हो। बताते चलें कि पटना विवि में भौतिकी के विभागाध्यक्ष प्रो रामजतन सिन्हा राज्य के उन शिक्षकों में शामिल हैं जो हर महीने 70 हजार रुपये की पगार पाते हैं और एक भी क्लास नहीं लेने का रिकार्ड इनके नाम है। सचिव के के पाठक ने अपने एक आदेश में प्रो सिन्हा के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी थी। सीएम अंकल, कब मिलेगी हमारी साईकिल जिस साईकिल योजना को लेकर राज्य के मुख्यमत्री नीतीश कुमार फ़ूले नहीं समाते हैं, उसी साइकिल के लिये तरस रही हैं सोनपुर के शिशु संघ स्कूल की बच्चियां। स्थानीय जिलापदाधिकारी के जनता दरबार में हाजिरी लगाने के बाद भी जब इस स्कूल की बच्चियों को साइकिल नहीं मिली, तब इन लोगों ने सोनपुर अनुमंडल पदाधिकारी का घेराव किया और उन्हें इस संबंध में ज्ञापन सौंपा।
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