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अपना बिहार निष्पक्षता हमारी पहचान
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अच्छी खबर- अब बिहारियों का होगा अपना ई-चौपाल यह एक अच्छी खबर है उन बिहारवासियों के लिये जो इंटरनेट की दूनिया में बिहार को खोजते हैं। बिहार फ़ाऊंडेशन की ओर से एक अनूठी पहल की जा है। यह पहल है ई-चौपाल की। यह चौपाल गांव में किसी पीपल अथवा नीम के पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर नहीं, बल्कि इंटरनेट पर लगाई जायेगी। इसकी खासियत यह होगी कि लोग इसके जरिये दिल खोलकर बातें साझा कर सकेंगे। बिल्कुल वैसे ही जैसे फ़ेसबुक अथवा गूगल प्लस और ट्विटर पर करते हैं। बिहार फ़ाऊंडेशन के जनसंपर्क अधिकारी सत्यजित नारायण सिंह ने अपना बिहार को बताया कि यह सुविधा बिहार फ़ाऊंडेशन के वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जायेगी। इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिये लोगों को सबसे पहले अपना आनलाइन पंजीकरन कराना होगा। इस वेबसाइट पर फ़ोटो, टेक्स्ट और वीडियो अपलोड करने के अलावे चैटिंग की व्यवस्था भी होगी। इन्होंने बताया कि इसके लिये उन्ही तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका उपयोग कर फ़ेसबुक अथवा ट्विटर का निर्माण किया गया है। बहरहाल, एक सच्चाई यह भी कि पिछले 3 वर्षों में बिहार फ़ाऊंडेशन अपना वेबसाइट ही पूर्ण नहीं कर सका है और इसकी सुरक्षा पद्धति भी अभी तक दुरुस्त नहीं हो सकी है। अभी हाल ही में ट्यूनिशियाई युवकों द्वारा बिहार फ़ाऊंडेशन का वेबसाइट हैक कर लिया गया था, जिसे बड़ी मुश्किलों के बाद रिकवर किया जा सका था। हालांकि वेबसाइट पर दर्ज सदस्यों का पूरा डाटाबेस करप्ट हो चुका है और इसे आजतक रिकवर नहीं किया जा सका है। कैसे होगा विकसित बिहार का सपना ? – कागज पर बने बोरिंग से हो रही कागजी खेती, 6 वर्षों से जारी है सब्सिडी के नाम पर लूट कैसे विकसित राज्य बनेगा बिहार? यह सवाल बेवजह नहीं है। हालत तो यह है कि अब बिहार में कागज पर ही बोरिंग लगाये जा रहे हैं और फ़िर कागजों पर इससे किसान सिंचाई भी कर रहे हैं और कागजों में ही हरित क्रांति भी लाई जा रही है। इसका एक प्रमाण यह कि पिछले 6 वर्षों से बिहार में सब्सिडी के नाम पर लूट का खेल जारी है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार इस लूट में सरकारी पदाधिकारियों से लेकर विभिन्न बैंकों के पदाधिकारी भी शामिल हैं। सूबे में मिलियन शैलो ट्यूबवेल परियोजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना और अनुदानित दर पर किसानों को कृषि उपकरणों दिये जाने की योजना के नाम पर लूट मची है। इस व्यापक लूट की बानगी यह कि बक्सर जिले के स्टेशन रोड स्थित नवीन हार्डवेयर नामक दूकान से इसी जिले के मिश्रवलिया गांव के निवासी इन्द्रदेव राम के नाम पर ट्यूबवेल उपकरणों की खरीद के बदले एक बैंक द्वारा अनुदान का भुगतान किया गया। मिली जानकारी के अनुसार यह खरीन 29 मार्च 2006 को की गई। इस खरीद की पुष्टि के लिये एक कैशमेमो भी जारी किया गया। इसी कैशमेमो के आधार पर बैंक से अनुदान का लाभ ले लिया गया। ताज्जुब इस बात का है कि इस कैशमेमो पर जारी करने की तारीख तो अंकित है, लेकिन इस पर न तो टिन नम्बर का जिक्र है और न ही वैट संख्या का। जब इस कैशमेमो की जांच की गई तो यह पाया गया कि बक्सर के स्टेशन रोड में नवीन हार्डवेयर नामक कोई दूकान है ही नहीं। सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि जिस इन्द्रदेव राम नामक व्यक्ति के नाम पर यह खरीद की गई, असल में उस नाम का कोई व्यक्ति मिश्रवलिया गांव में रहते ही नही हैं। यानी फ़र्जी नाम से फ़र्जी दूकान से फ़र्जी खरीद की गई और फ़िर बिहार में अनुदान घोटाले को अंजाम दिया गया। फ़र्जी खरीद के ऐसे अनंत मामले हैं। ठीक उसी प्रकार जैसे हरि अनंत, हरि कथा अनंता। हालांकि बक्सर जिले में करोड़ों रुपये के हुए इस घोटाले की जांच की गई। यह जांच भी तब हुई जब बक्सर जिले के समाज सेवी शिव प्रकाश राय ने इस संबंध में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखा और इनके पत्र पर संज्ञान लेते हुए श्री कुमार ने पूरे मामले को बिहार के वाणिज्य कर विभाग को भेज दिया। दिनांक 7 अगस्त 2010 और 9 अगस्त 2010 को बक्सर अंचल के वाणिज्य कर उपायुक्त प्रमोद कुमार ग्वालिया, केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के वाणिज्य कर पदाधिकारी दुर्गा प्रसाद मंडल और शशि भानू की संयुक्त जांच दल ने बक्सर जिले में गहन जांच की। कुल 8 मामलों की हुई जांच में यह तथ्य सामने आया कि अधिकांश खरीद फ़र्जी हैं। जांच दल ने यह पाया कि जिले में बड़ी संख्या में ऐसे अनुदान घोटाले किये गये हैं। सबसे अव्वल तो यह कि अधिकांश दूकानों, जिनके संबंध में कैशमेमो उपलब्ध कराये गये हैं, अधिकांश दूकानें अस्तित्व में ही नहीं है। कुछ दूकानों का अस्तित्व भी है तो उनका कहना है कि ये कैशमेमो फ़र्जी हैं और उनके द्वारा जारी ही नहीं किये गये। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार अकेले केवल बक्सर जिले में ही 25 ह्जार से अधिक कैशमेमो फ़र्जी पाये गये हैं। इस प्रकार इस तथ्य की पुष्टि होती है कि इस जिले में करोड़ों रुपये के अनुदान घोटाले को अंजाम दिया गया है। पूरे मामले को जगजाहिर करने वाले शिवप्रकाश राय ने अपना बिहार को बताया कि पिछले दिनों 4 जूलाई को बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने उन्हें अपने दूरभाष से फ़ोन कर पूरे मामले की जानकारी देने के लिये कहा। इन्होंने श्री राय से यह भी कहा कि सारे मामले को बैठकर सुलझाया जा सकता है। जबकि श्री राय ने उपमुख्यमंत्री की चाल को समझते हुए उनसे मिलने से अनिभिज्ञता जाहिर की। बहरहाल, श्री राय को अंदेशा है कि बिहार सरकार अब इस पूरे मामले को रफ़ा-दफ़ा करना चाहती है और उनपर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। अब इस कोशिश में सुशील कुमार मोदी स्वयं जूटे गये हैं। जाहिर तौर पर यह एक बानगी है यदि पूरे बिहार में अनुदान घोटाले की जांच की जाये तो यह घोटाला किसी 2जी स्पेक्ट्रम अथवा चारा घोटाले से कम नहीं है। गांव-गांव शराब बिकने से सरकार की आय में 517 फ़ीसदी इजाफ़ा बिहार सरकार के लिये अच्छी खबर। हाल के वर्षों में बिहार सरकार के खजाने में 517 फ़ीसदी वृद्धि हुई है। इस वृद्धि की वजह अधिक मात्रा में शराब बिकना है। कल इस आशय की जानकारी सूबे के शराब मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने संवाददाता सम्मेलन में दी। इन्होंने बताया कि निबंधन के मोर्चे पर सरकार की आय में 115 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है। शराब से पाप्त होने वाली आय में जबरदस्त वृद्धि का खुलासा करते हुए श्री यादव ने कहा कि वे नहीं चाहते हैं कि बिहार के लोग शराब पियें। शराब पीने से स्वास्थ्य को नुकसान होता है। सरकार जल्द ही मद्य निषेध रथयात्रा निकालेगी। इसके जरिये सूबे के लोगों को शराब पीने के कारण होने वाले नुकसान के बारे में बताया जायेगा। पांच सौ करोड़ रुपये की लागत से फ़ूड पार्क की स्थापना की तैयारी शुरु केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय तथा राज्य सरकार की खाद्य एवं फ़ल आधारित उद्योगों को बढावा देने वाली नीति तथा स्थानीय सांसद शाहनवाज हुसैन के प्रयास से भागलपुर में फ़ूड पार्क की स्थापना की तैयारी शुरु हो गई है। कोलकाता के कोवेंटन समूह ने प्रसिद्ध उद्योगपति किशोर वियानी के फ़्यूचर समूह की साझेदारी में इस क्षेत्र में फ़ूड पार्क की स्थापना करने जा रही है। इस परियोजना पर लगभग 200 करोड़ रुपये की पूंजी निवेश की संभावना व्यक्त की जा रही है। कोवेंटन समूह के प्रबंध निदेशक मयंक जालान के अनुसार फ़ूड पार्क के लिये 125 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है और इस परियोजना के पूरे होने से इस क्षेत्र के कृषि उत्पादकों को मूल्य संवर्द्धन का लाभ मिलेगा। बताया गया है कि इस परियोजना में जालान समूह 65 प्रतिशत और वियानी समूह लगभग 35 फ़ीसदी पूंजी निवेश करेगा। सूबे में विकेंद्रीकृत ऊर्जा वितरण जरूरी बिहार देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना नाकाम रही है। इस आशय की जानकारी भारत सरकार द्वारा जारी इस योजना के क्रियान्वयन संबंधी अद्यतन रिपोर्ट में दी गई है। ग्रीनपीस सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित एक कार्यशाला में अपने संबोधन में ग्रीनपीस की कार्यकर्ता अर्पणा उपाडा ने बताया कि सूबे को ऊर्जायुक्त बनाने हेतु विकेंद्रीकृत ऊर्जा वितरण प्रणाली अपनाया जाना चाहिये। इस अवसर पर ग्रीनपीस सोसायटी को ओर से सूबे में कराये गये सर्वेक्षण रिपोर्ट को जारी करते हुए अर्पणा ने बताया कि ग्रीनपीस द्वारा सूबे के दो जिलों के 15 प्रखंडों का मुआयना किया गया। इस मुआयने के बाद जो तथ्य सामने निकलकर आये हैं, उससे यही साबित होता है कि सूबे में ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को सही तरीके से अमम में नहीं लाया गया है। इन्होंने बताया कि राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण के सरकारी वेबसाइट पर जारी अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार इस योजना के तहत बिहार को सबसे अधिक बजट उपलब्ध कराया गया। इसके बावजूद अभी तक केवल 6651 गांवों का विद्युतीकरण कराया जा सका है। जिन इलाकों में इस योजना को अमलीजामा पहनाया गया है, वहां मांग के अनुरूप बिजली ट्रांसफ़र्मर उपलब्ध नहीं कराये जाने से लोगों को आये दिन समस्या झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा बीपीएल परिवारों को निशुल्क बिजली देने की योजना का क्रियान्व्यन भी सही तरीके से नहीं कराया जा सका है। इस अवसर पर अपने मुख्य संबोधन में प्राख्यात अर्थशास्त्री प्रोफ़ेसर नवल किशोर चौधरी ने कहा कि विकेंद्रीकरण द्वारा देश और सूबे में लोकतंत्र को बचाया जा सकता है। हालांकि यह दुर्भाग्य है कि सत्ता के विकेंद्रीकरण के बजाय सरकार में शामिल लोग इसे विरासत में मिली जागीर समझ रहे हैं। इन्होंने यह भी कहा कि ग्रीनपीस इनर्जी यानि स्वच्छ ऊर्जा आने वाले दिनों एकमात्र विकल्प बचेगा। इसलिये यह आवश्यक है कि इसे अभी से अपनाया जाये। इस अवसर पर हस्क पावर सिस्टम के प्रतिनिधि आलोक कुमार, एसडीआई बाबुल प्रसाद, सामाजिक कार्यकर्ता अशोक सिंह, समीर सिन्हा और रत्नाकर मिश्रा सहित अनेक गणमान्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किये। बाढ नियंत्रण के लिये ट्रिपल एफ़ बिहार सरकार ने सूबे को बाढ से बचाने के लिये बेसिवार 10 ट्रिपल एफ़ यानि फ़्लड फ़ाइटिंग फ़ोर्स गठित करने की घोषणा की है। इस घोषणा के मुताबिक राज्य सरकार ट्रिपल एफ़ की हर टीम में एक सेवानिवृत अनुभवी अभियंता अध्यक्ष, एक कार्यपालक अभियंता, एक सहायक अभियंता, दो कनीय अभियंता, एक राजपत्रित अधिकारी और एक सेक्शन फ़ोर्स के सदस्य शामिल होंगे। इस टीम की मुख्य जिम्मेवारी अपने-अपने संबंधित बेसिनों में होने वाली हलचल पर निगाह रखना होगा और आवश्यकता पड़ने पर वे राज्य सरकार को सुझाव दे सकेंगे। विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष – वन कर्मचारियों की कमी से जुझ रहा बिहार आजादी के समय बिहार में वनों का विस्तार करीब 37 फ़ीसदी था। जैसे-जैसे राज्य में शिक्षा और जनसंख्या में वृद्धि हुई, वन सिकुड़ने लगे। वर्ष 2000 में यानि बिहार विभाजन के पहले बिहार में वनों का विस्तार घटकर करीब 16 फ़ीसदी शेष रह गया था। फ़िर जब बाद में झारखंड अलग हुआ तब पृथक बिहार में वन केवल 6.87 फ़ीसदी हिस्से में सिमट कर रह गया। वैसे खास खबर यह कि खत्म होते जंगल को बचाने में राज्य का वन विभाग सक्षम नहीं है। सक्षम इसलिये नहीं है कि यह विभाग कर्मचारियों की कमी से जुझ रहा है। वन एवं पर्यावरण विभाग के वेबसाइट को देखें तो यह स्पष्ट होता है कि सूबे का वन विभाग किस तरह बदहाली का शिकार है। बदहाली का आलम यह कि विभाग के प्रधान वन संरक्षक का पद खाली पड़ा है। राज्य में चार पद मुख्य वन संरक्षक के लिये सृजित हैं। जबकि वर्तमान में केवल एक मुख्य वन संरक्षक ही तैनात हैं। हालांकि वन संरक्षकों की संख्या पर्याप्त है। बताते चलें कि ये सारे पद भारतीय वन सेवा के तहत सृजित हैं। जबकि बिहार वन सेवा के तहत कुल 63 पदाधिकारियों का पद सामान्य प्रशासनिक विभाग द्वारा स्वीकृत है। सुखद यह है कि इसके आलोक में 53 पदाधिकारियों की तैनाती की गई है। स्बसे बड़ा आश्चर्य यह कि जंगल की सुरक्षा की जिम्मेवारी मुख्य रुप से रेंज आफ़िसर और वन रक्षकों की होती है। इसके लिये सृजित पदों की संख्या क्रमशः 124 एवं 340 है। जबकि तैनात कर्म्चारियों की संख्या क्रमशः शून्य और 195 है। बहरहाल, विश्व पर्यावरण दिवस को लेकर राज्य सरकार द्वारा पूर्व में ही बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने की योजना की घोषणा की गई है। इस योजना के क्रियान्व्यन पर अरबों रुपये खर्च किये जायेंगे। सबसे बड़ा स्वाल यह कि कर्मचारियों की कमी झेल रहा सूबे का वन विभाग अपनी जिम्मेवारियों का निर्वाहन कर पायेगा? बिहार आगे बढा है, लेकिन अभी और आगे जाने की आवश्यकता – नरेंद्र जाधव केंद्रीय योजना आयोग के सदस्य नरेंद्र जाधव मानते हैं कि बिहार ने पिछले कुछ वर्षों में काफ़ी तरक्की किया है। लेकिन यह तरक्की काफ़ी नहीं है। अभी बिहार को बहुत आगे जाना है। पिछले दिनों पटना में एक अखबार के तत्वावधान में आयोजित विशेष कार्यक्रम में श्री जाधव ने अपने संबोधन में बताया कि बिहार में विकास दर 14.7 फ़ीसदी हो गया है। प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2006-07 की तुलना में 7600 रुपये से बढकर वर्ष 2009-10 में 11550 रुपये हो गया है। इस प्रकार बिहारवासियों की आय में 31 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है। लेकिन एक सच्चाई यह भी कि अभी भी बिहार में प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत का एक तिहाई ही है। श्री जाधव ने बताया कि बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में 42 फ़ीसदी लोग गरीब हैं, जबकि शहरी इलाकों में यह दर साढे 36 फ़ीसदी है। वही राष्ट्रीय स्तर पर 28.5 फ़ीसदी ग्रामीण गरीब और 25.7 फ़ीसदी शहरवासी गरीब हैं। इन्होंने यह भी बताया कि बिहार में साक्षरता दर में उत्साहजनक वृद्धि हुई है। वर्तमान में यह 74 फ़ीसदी है। लेकिन साथ ही यह भी चिंताजनक है कि महिला-पुरुष साक्षरता दर में 20 फ़ीसदी का अंतर बरकरार है। हालांकि श्री जाधव ने राज्य सरकार द्वारा शुरु किये गये साइकिल और पोशाक योजना की तारीफ़ करते हुए कहा कि यह सूबे में नई क्रांति का संवाहक बनेगा।
संपादकीय - नीतीश, लालू और बिहार का विकास वर्तमान में बिहार का जिक्र आने पर जो परिदृश्य उभरकर सामने आता है, उसमें राजधानी पटना की उंची इमारतें, चकाचक रोड, भीड़ के कोलाहल से गुंजायमान डाकबंगला रोड, देर रात तक गुलजार रहने वाला मौर्यालोक परिसर, मुख्यमंत्री, मंत्रियों एवं अधिकारियों के आलीशान बंगले और फ़िर 24 घंटे में कम से कम 22 घंटे बिजली रहने की गारंटी। यानि सबकुछ ठीक ठाक्। जब भी कोई विदेशी मेहमान आता है, पटना को देखता है और फ़िर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम का जयकारा लगाता है। अगले दिन बिहार के अखबार वाले इस जयकारे में अपनी चमचागिरी का तड़का लगाकर बिहार की बेहाल जनता के सामने खबर परोसते हैं। यह खबर कैसी होती है, इसका एक उदाहरण देखिये। अभी हाल ही में माइक्रोसाफ़्ट के मालिक बिल गेट्स और उनकी पत्नी मिलिंडा गेट्स बिहार आई थीं। दोनों ने बिहार के उन गावों का दौरा किया, जिन्हें, उनके चैरिटी संस्थान गेट्स फ़ाऊंडेशन ने गोद ले रखा है। जब श्री गेट्स ने गोद लिये गये गावों में चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा कर ली, तब पूर्व से तय कार्यक्रम के अनुसार उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भेंट की। इस बैठक में श्री गेट्स ने मुख्यमंत्री से शिकायती लहजे में कहा था कि राज्य की स्वास्थ्य संबंधी आधारभूत संरचना अत्यंत दयनीय है। प्रेस कर्मियों से पूछे गये एक सवाल के क्रम में उन्होंने कहा था कि – बिहार इज स्टील बिहाइन्ड सेंचुरिज। यानि बिहार अभी भी विकास के मामले में कई शताब्दियां पीछे है। अगले दिन जब खबर छपी तो, पुछिये मत। शायद ही कोई ऐसा अखबार रहा होगा, जिसने श्री गेट्स के इस बयान को छापा हो। सभी ने कहा – गेट्स सैल्यूटेड नीतीश फ़ार फ़ास्ट डेवलपमेंट आफ़ बिहार। वास्तविकता क्या थी और अखबारों ने क्या छापा, इसका अंदाज तो आसानी से लग जाता है। खैर, बात हो रही है बिहार के विकास की। असल में बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार बहुत ही तेज दिमाग के मालिक हैं। तेज इसलिये हैं क्योंकि बिहार की जनता में एकता नहीं है। इसकी हालत बिल्कुल उन बकरों की तरह है, जिनका एक साथी मांस विक्रेता द्वारा हलाल किया जा रहा हो और वे इस बात को सोचकर मगन हों कि अभी उनकी बारी नहीं आई है। अगर यकीन न आये तो दो दिनों के लिये पहले पटना में रह लिजीये और फ़िर दो दिनों के लिये आप लखीसराय या फ़िर कोई भी जिला चुन लिजीये, चले जाइये। पटना के निवासियों को इस बात से कोई मतलब नहीं है कि कटिहार जिले में क्यों केवल 2 घंटे बिजली है ? उसी प्रकार किसी खाते पीते घर को इस बात से कोई मतलब नहीं है कि उसका पड़ोसी क्यों भूखा है? जब कोई भूख से मर जाता है तो वह सोचता है कि चलो, अच्छा हुआ, कोई उसके घर का नहीं मरा न? बक्सर, रोहतास, औरंगाबाद और आरा के किसानों की तकलीफ़ कोई मिथिलांचल वाले नहीं समझना चाहते हैं कि आखिर क्यों सोन कैनाल में पानी नहीं दिया जा रहा है? उसी प्रकार मगध का वासी यह जानने की कोशिश भी नहीं करता कि कोशी 2008 के पीड़ितों का मकान बना या नहीं बना? ये तो बहुत दूर की बात रही। आज का बिहारी समुदाय किस कदर स्वार्थी हो गया है कि जब कोई व्यक्ति किसी कारणवश बेखौफ़ हो चुके अपराधियों की गोली का शिकार होता है तो वह सोचता है कि जरूर उसने भी किसी का खून किया होगा, तभी वह मारा गया। अभी एक दिन पहले ही राजधानी पटना के फ़ुलवारी प्रखंड में एक वार्ड पार्षद रेखा की हत्या गैंगरेप के बाद कर दी गई। जानते हैं, उसके अपने आस पड़ोस के लोगों ने क्या कहा। लोगों ने कहा कि बड़ा बनती थी, अब चली गई न दूनिया से। सवाल यह है कि आखिर क्यों बिहारी इतने असंवेदनशील होते जा रहे हैं। सरकार कहती है कि उसके विकास कार्यक्रमों ने जातिवाद की दीवार को ढाह दिया है। इसका प्रमाण वह बिहार विधान सभा चुनाव परिणाम को देती है। वैसे इस बात में कोई दम नहीं है। इसका सबसे बड़ा आधार यही है कि भूमिहार समाज में ही अनंत सिंह के स्थान पर बड़े से बड़े दिग्गज और इंसान बिहार में निवास करते हैं। यदि बिहार सरकार जातिवाद नहीं करती तो आज पटना के सीनियर एसपी और डीएम दोनों जाति के कुर्मी नहीं होते। दरअसल नीतीश कुमार ने बिहार में विकास शब्द की आड़ में सुशासन नहीं, बल्कि लूट का शासन चला रहे हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह कि आज बिहार में त्रिस्तरीय लूट व्यवस्था कायम हो गई है। पहले मुख्यमंत्री, मंत्री और राजधानी में बैठे अफ़सर लूटते हैं, फ़िर बारी आती है जिले और प्रखंड में बैठे अफ़सरों की। इन महानुभावों के लूटने के बाद जो धनराशि बचती है, उस पर पंचायती राज के प्रतिनिधियों और ठेकेदारों का अधिकार बनता है। अभी हाल ही में एक संवाददाता सम्मेलन में राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त जे के दत्ता ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार को आयोग की ओर से दी गई अनुशंसा में स्पष्ट तौर पर उल्लेखित किया है कि मुखिया को वित्तीय शक्ति देने से पंचायती राज व्यवस्था तार तार हुई है। सवाल यही है कि आखिर जब विकास हुआ है अथवा हो रहा है फ़िर भी इतनी खामियां क्यों हैं। सत्तापक्ष के नेताओं द्वारा यह कहा जाता है कि सूबे में 15 सालों के जंगलराज के दुष्प्रभाव को जाने में समय लगेगा। गाहे-बेगाहे सत्ता पक्ष के बिहार की बदहाली के लिए लालू राज पर दोषारोपण करते हैं। क्या वाकई में इन सबके लिये लालू राज जिम्मेवारी है कि पिछले 3 माह में राजधानी पटना में 38 युवाओं ने आत्महत्यायें कर लीं? क्या इसके लिये भी लालू ही जिम्मेवार हैं कि पिछले साढे पांच सालों में 1 लाख 99 हजार करोड़ रुपये के निवेश के बदले केवल 2000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है? क्या इसके लिये लालू यादव को दोषी ठहराया जा सकता है कि बिहार के विभिन्न विभागों द्वारा करीब साढे सोलह हजार करोड़ रुपये के खर्चे का हिसाब नहीं दिया गया है, जिसे सीएगी की नजर में वित्तीय अनियमितता और आम आदमी की नजर में घोटाला कहा जाता है? बहरहाल, नीतीश सरकार पर कोई सवाल उठता है तब सत्ता पक्ष के लोग बिहार की जनता को लालू राज का भय दिखाकर अथवा याद दिलाकर पूरे मुद्दे का राजनीतिकरण कर देते हैं। इसका एक प्रमाण यह देखिये कि बिहार सरकार में शामिल रहे रामाधार सिंह की तुलना लालू यादव से कर सुशील कुमार मोदी ने अपनी निम्न मानसिकता का परिचय दिया है। जबकि अभी भी बिहार सरकार में चार मंत्री ऐसे हैं, जिनके खिलाफ़ घोटाले के मामले लंबित पड़े हैं। इनमें से एक हमारे सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी हैं। सवाल यही है कि क्या नीतीश सरकार लालू नाम के सहारे बिहार की जनता को दिग्भ्रमित करने में सफ़ल रह पायेगी? वर्तमान परिवेश में संभव है कि इसका उत्तर सकारात्मक है, क्योंकि अभी भी समाज का जो वर्ग वोकल है, वह किसी न किसी रुप में नीतीश सरकार के सोशल इंजीनियरिंग से लाभान्वित है और उसके लिये तो घटिया कंपनी के द्वारा उत्पादित जैक आपूर्ति पर मुहर लगाकर करोड़ों लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले नीतीश कुमार किसी महापुरुष से कम नहीं। खैर, अब इनके दिन भी लदने वाले हैं। बस थोड़ा इंतजार और। सूबे में अभियंताओं के 6036 पद रिक्त सूबे के तीन सबसे बड़े एवं महत्वपूर्ण विभागों में अभियंताओं के 6036 पद रिक्त पड़े हैं। इस कारण सूबे का वांछित विकास बाधित है। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा अभियंताओं की नियुक्ति नहीं की जा रही है। महज खानापूर्ति के लिये समय समय पर संविदा के आधार पर अभियंताओं की नियुक्ति की औपचारिकता मात्र निभाई जा रही है। इस आशय की जानकारी अभियंत्रण सेवा समन्वय समिति के अध्यक्ष राजेश्वर मिश्रा ने दी। इन्होंने बताया कि राज्य के जल संसाधन विभाग में अभियंता प्रमुख के 4 पद स्वीकृत हैं। इसके आलोक में इस विभाग में इस पद पर एक भी अभियंता की तैनाती नहीं की गई है।i इसी प्रकार पथ निर्माण विभाग में अभियंता प्रमुख के 5 पद सृजित हैं और पांचों पद रिक्त पड़े हैं। वही लोक सवास्थ्य अभियंत्रण विभाग में अभियंता प्रमुख का एक पद सृजित है और आश्चर्य यह है कि यह पद भी रिक्त पड़ा है। श्री मिश्रा ने बताया कि मुख्य अभियंता स्तर के भी पद रिक्त पड़े हैं। जल संसाधन विभाग में 13, पथ निर्माण विभाग में 8 और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग में एक पद रिक्त पड़ा है। हालांकि संख्या के लिहाज से सूबे के इन विभागों में अधीक्षण अभियंताओं की तैनाती अपेक्षाकृत संतोषजनक कही जा सकती है। जल संसाधन विभाग में कुल 126 अधीक्षण अभियंताओं के पद सृजित हैं और कार्यरत अभियंताओं की संख्या 118 है। ऐसी ही सुखद स्थिति अन्य दो विभागों में भी है। श्री मिश्रा ने बताया कि सबसे अधिक पद सहायक अभियंताओं और कनीय अभियंताओं के पद रिक्त पड़े हैं। मसलन जल संसाधन विभाग में 619 सहायक अभियंताओं एवं 2923 कनीय अभियंताओं के पद रिक्त पड़े हैं। वही लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग में सहायक अभियंता के 144 पद और कनीय अभियंताओं के 392 पद रिक्त पड़े हैं। इन्होंने राज्य सरकार से मांग किया है कि सूबे में अभियंताओं के रिक्त पड़े पदों को तत्काल भरे जायें और इसके लिये नियमित नियुक्ति की जानी चाहिये। अब गिट्टी और अलकतरा नहीं, सीमेंट की बनेंगी सड़कें, पटना में जूटेंगे राष्ट्रीय विशेषज्ञ सूबे की सड़कें अब कम उम्र में ही दम नहीं तोड़ेंगे, इनकी मजबूती की वजह गिट्टी और अलकतरा नहीं, बल्कि सीमेंट, बालू और गिट्टी होगी। इस संबंध में सीआईआई और देश की प्राख्यात सीमेंट उत्पादक कंपनी एसीसी के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 5 अप्रैल को पटना में राष्ट्रीय विशेषज्ञों का जमावड़ा लगेगा। इस जमावड़े में राज्य के दो वरिष्ठ मंत्री पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव और ग्रामीण कार्य मंत्री डा भीम सिंह भी शामिल होंगे। इस आशय की जानकारी सीआईआई के स्थानीय प्रमुख अर्चनदेव ने संवाददाता सम्मेलन में दी। बिहार में मार्च लूट देखना है तो फ़ुलवारी चले आइये बिहार में भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुके मार्च लूट को सजीव देखना हो तो चले आइये पटना जिले के फ़ुलवारी शरीफ़ के ग्रामीण इलाकों में। इन दिनों इन गांवों के सड़कों का कायाकल्प किया जा रहा है। वर्षों से उपेक्षित बलम्मीचक से गंजपर तक के सड़क को रातों-रात बनाया जा रहा है। इसकी गुणवत्ता का अनुमान इसी मात्र से लगाया जा सकता है कि सड़क बनने के दो दिनों के अंदर ही सड़क उख़ड़ने लगी है। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो सड़क के कायाकल्प करने की जिम्मेवारी जिस व्यक्ति समूह को दी गई है, वे स्थानीय विधायक सह राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के मंत्री श्याम रजक के करीबी हैं। घटिया सड़क के निर्माण से स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश है। नहीं चालू हो सका सिन्हा लाइब्रेरी के समीप बना डीलक्स शौचालय राजधानी पटना के व्यस्ततम इलाकों में से एक डाकबंगला चौराहे के पास स्थित सिन्हा लाइब्रेरी के पास राज्य सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर डीलक्स शौचालय का निर्माण कराया था। यह डीलक्स शौचालय आज राज्य सरकार के कार्यशैली का सजीव प्रमाण दे रहा है। आज की तारीख में बनने के एक साल बाद भी इस शौचालय को आम जनता के उपयोग के लिये नहीं खोला गया है। यह शौचालय तो एक नमूना मात्र है। इस तरह के अनेक डीलक्स शौचालय आज राजधानी पटना की शोभा बढा रहे हैं। इन सबमें खासियत यह है कि अपवाद के रुप में एक-दो को छोड़कर सभी बंद पड़े हैं। किसान प्रजनकों को पहचानना और समर्थन देना समय की मांग ‘जीएम फ्री बिहार मूवमेंट’ द्वारा गांधी संग्रहालय में बीज किस्मों और भारतीय कृषि पर आयोजित एक कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए श्री उपेन्द्र नाथ वर्मा ने बताया कि पूरे बीज उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था के निजीकरण और एकाधिकरण से हमारी बौद्धिक संपदा अधिकार प्रभावित हो रहा है, जबकि किसानों द्वारा स्वयं तैयार किये गए बीज सहज कौशल के उदाहरण हैं. किसानों को सटीक लक्षण मालूम होते हैं जिनसे विभिन्न स्थितियों में उपयुक्त कृषि की जा सकती है. गांधी संग्रहालय में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होनें कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निजी कंपनियों भ्रम पैदा कर रहे हैं एवं हमारे पारंपरिक खेती के तरीकों से छेड़-छाड़ कर रहे हैं. "हमारे किसानों को ऐसे बीज चाहिए होते हैं जो फसल की उन्नत किस्में पैदा करें, उनकी विशिष्ट जरूरतों को पूरा करें और पर्यावरण का भी ख्याल रखें. और यह सब कुछ सिर्फ एक किसान ही पूरा कर सकता है.” बनारस के कुदरत कृषि ऋषि प्रकाश सिंह रघुवंशी ने स्वयं किसानों द्वारा तैयार लोकप्रिय धान एवं गेहूं की बीजों का प्रदर्शन करते हुए कहा कि देसी बीज प्राकृतिक धरोहर एवं उपहार हैं. प्रकृति में प्राकृतिक तरीकों से ही बीज का उत्पादन होता है. अतः हमें परंपरागत बीजों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए. रघुवंशी के द्वारा कुदरत प्रजातियों के गेहूं, चावल एवं डाल के उन्नत किस्म के बीज तैयार किये गए हैं. किसानों द्वारा ही तैयार ‘चिन्ना पोन्नी’, ‘मैसूर मेलिज’, एनएमएस-२’, ‘एचएमटी’ एवं ‘केए-१’ प्रदर्शित करते हुए कर्णाटक के ‘सेव आवर राईस कैम्पेन’ के संयोजक शांता कुमार ने सरकार से अनुरोध किया कि बीज तैयार करने वाले किसानों की पहचान अविलम्ब शुरू कर देनी चाहिए. उन्हें हर तरह का संरक्षण एवं समर्थन भी मिलना चाहिए. ऐसी स्थिति में यह महत्वपूर्ण है की एक बार फिर अपने किसानों की क्षमताओं को समझा जाए और उनके द्वारा तैयार किये गए किस्मों को समर्थन दिया जाए. “हमें नहीं भूलना चाहिए कि कृषि क्षेत्र में सारी उपलब्धियां किसानों द्वारा तैयार बीजों से ही मिली हैं.” ‘जीएम फ्री बिहार मूवमेंट’ के संयोजक पंकज भूषण ने कहा कि कृषि के निर्णय किसान ही लें तो बेहतर होगा. “हम सरकार को हर स्तर पर सहयोग करने के लिए तैयार हैं जिससे किसान प्रजनकों की जल्द-से-जल्द पहचान हो सके.” मानवसेवी स्व डा मोहन राय की स्मृति में पूर्णिया में बनेगा अत्याधुनिक अस्पताल अमेरिका सहित विश्व के अनेक देशों में अपनी काबलियत का लोहा मनाने वाले डा मोहन राय अब दूनिया में नहीं हैं। परंतु स्व राय की पत्नी डा विमला राय ने उनकी यादों को अक्षुण्ण रखने की दिशा में पहल करते हुए चूनापुर(स्व राय का पैतृक गांव) में अत्याधुनिक अस्पताल बनवाने के उद्देश्य से राज्य सरकार को करीब 65 डिसमिल जमीन दान में दिया। इस संबंध में स्व राय के अनुज आनन्द राय ने बताया कि आर्थिक रुप से पिछड़े पूर्णिया के लिये यह अस्पताल अत्यंत ही लाभकारी होगा। इन्होंने उम्मीद जतायी कि राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में तत्परता दिखाई जायेगी। पाठकों को बताते चलें कि स्व डा मोहन राय दूनिया के पहले सर्जन थे, जिन्होंने ब्लडलेस ओपेन हार्ट सर्जरी को सफ़लतापूर्वक अंजाम दिया था। स्व राय मुख्य रुप से अमेरिका में कार्यरत रहे, परंतु उन्होंने अपने जन्मस्थल को कभी नहीं त्यागा। इसका सबसे बड़ा प्रमाण है चूनापुर में स्थापित शशि-राम नारायण डीएवी पब्लिक स्कूल। इसके लिये स्व मोहन राय ने अपने जीवन काल में ही जमीन दान में दे दी थीं। इसके अलावा चूनापुर स्थित सरकारी मध्य विद्यालय के उन्नयन में भी इनका अमूल्य योगदान रहा। प्राकृतिक संसाधन के मामले में बिहार खाड़ी देशों से भी आगे, सरकारी साजिश का शिकार है बिहार प्राकृतिक संसाधन के मामले में बिहार खाड़ी देशों से भी अधिक समृद्ध है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि खाड़ी देशों में निकलने वाला तेल खत्म होने वाला संसाधन है। जबकि बिहार के पास प्रचुर मात्रा में जल संसाधन है, जो हर साल बढता है। राज्य के जाने-माने जल प्रबंधन विशेषज्ञ डा टी प्रसाद ने अपना बिहार को विशेष बातचीत में बताया कि यदि सरकारें इमानदारी से पहल करें तो नेपाल के सहयोग से बिहार देश का सबसे समृद्ध राज्य बन सकता है। इन्होंने बताया कि बिहार की अधिकांश नदियों का उद्गम स्थल नेपाल है। वर्ष 1946-47 में ही नेपाल में कोसी नदी पर हाई डैम बनाये जाने को लेकर सहमति बनी थी। जिसे वर्ष 1950 में क्रियान्वित किया जाना था। परंतु में बाद में साजिश के तहत इस परियोजना को पूरी तरह से क्रियान्वित नहीं किया गया। साजिश के बारे में विस्तार से बताते हुए डा प्रसाद ने कहा कि उस समय हाई डैम बनाने के बाद करीब 1800 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था। बिहार के तत्कालीन शासकों ने केंद्र प्रस्ताव को यह कहकर अस्वीकृत कर दिया था कि बिहार को कभी भी इतनी अधिक मात्रा में बिजली की आवश्यकता नहीं होगी। यही कारण रहा कि कोशी हाई डैम के बदले पंजाब के प्रथम मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह कैरो के कहने पर पंजाब में भाखड़ा नांगल हाई डैम बनाया गया था। इस कारण पंजाब में जल प्रबंधन की समस्याओं का समाधान हो सका था और पंजाब कृषि के मामले में अग्रणी राज्य बन गया। डा प्रसाद ने बताया कि कोसी नदी पर हाई डैम बनाये जाने से नेपाल में हाइड्रो पावर जेनरेशन के जरिये 50 हजार मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है। इसका फ़ायदा नेपाल और बिहार दोनों को हो सकता है। इन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने केवल 20 ह्जार मेगावाट बिजली उत्पादन के लिये अमेरिका से परमाणु समझौता किया, जबकि बिहार का सहयोग कर 50 हजार मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है। इसका दूसरा फ़ायदा यह होगा कि बिहार बाढ और सुखाड़ की समस्या से निजात पा सकेगा। इन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2008 में आये कोसी महाप्रलय को बाढ की संज्ञा नहीं दी जा सकती है। वास्तविकता यह है कि कोसी अफ़लक्स बांध को 9 लाख क्यूसेक पानी का दबाव सहने की क्षमता के लायक बनाया गया था। परंतु जब कुशहा तटबंध टूटा तब उस समय केवल डेढ लाख क्यूसेक पानी का ही दबाव था। यह पूरी तरह से तटबंध के रख-रखाव के प्रति बरती गई लापरवाही का परिणाम था। इन्होंने कहा कि सिल्ट यानि नदियों जमा होने वाला गाद कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिससे निजात न मिल सके। असल में नदियों के रखरखाव के मामले में बिहार सरकार भी केंद्र के साथ बराबर की दोषी है। इन्होंने उम्मीद जताया कि सरकार बिहार को बाढ और सुख़ाड़ से बचाने के लिये कुशल जल प्रबंधन की दिशा में ठोस कदम उठायेगी। साढे आठ लाख में बनेगी बिहार की अपनी आपदा नीति बिहार जैसे आपदा प्रभावित राज्य के पास अभी तक अपनी कोई अपनी आपदा नीति नहीं है। इस संबंध में भारत सरकार द्वारा जारी राष्ट्रीय आपदा नीति के तहत सभी राज्यों को अपने-अपने स्तर से आपदा नीति का निर्माण किया जाता है। नीति बनाये जाने में हो रही देरी के मद्देनजर पटना हाईकोर्ट से मिली डांट-फ़टकार के बाद अब राज्य सरकार ने आपदा नीति बनाने की जिम्मेवारी एक निजी संस्स्थान जी पी सिन्हा सेंटर फ़ार डिजास्टर एंड रुरल मैनेजमेंट को दी है। इसके बदले संस्थान को सरकार द्वारा साढे आठ लाख रुपये का भुगतान किया जाना है। इस संबंध में स्थानीय होटल पाटलिपुत्र अशोक में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यास जी ने कहा कि बिहार एक आपदा विशेष राज्य है और इससे निबटने के लिये प्रभावी नीति की आवश्यकता है। इन्होंने उम्मीद जतायी कि तय समयसीमा यानि 6 माह के भीतर संस्थान राज्य के लिये लाभकारी आपदा प्रबंधन नीति बना लेगी। इन्होंने बताया कि बिहार को एक ऐसी नीति चाहिये जिससे आपदा के न्यूनीकरण को सुनिश्चित किया जा सके। इस अवसर पर संस्थान की ओर से कार्य योजना की रुप रेखा प्रस्तुत की गई। कार्यशाला में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार के उपाध्यक्ष अनिल के सिन्हा, सदस्य एस सी झा, जी पी सिन्हा सेंटर फ़ार डिजास्टर एंड रुरल मैनेजमेंट के निदेशक राजन सिन्हा, यूएनडीपी के विशेषज्ञ कृष्णा वत्स और आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी गगन ने अपने विचार व्यक्त किये। बताते चलें कि संस्थान के निदेशक राजन सिन्हा बिहार आपदा प्रबंधन विभाग में पदाधिकारी रह चुके हैं और वर्तमान में ये स्वतंत्र रुप से संस्थान चला रहे हैं। घोषणा पत्र में अक्षय ऊर्जा पर किये गये अपने वायदे से पीछे हटी बिहार सरकार बिहार में जनता दल (यू)-बीजेपी सरकार द्वारा पेश किये गये बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ग्रीनपीस ने आज बिहार की इस गठबंधन सरकार पर आरोप लगाया कि उसने चुनाव के समय अक्षय ऊर्जा पर जो वायदे किये थे, वह अब उनसे पीछे हट गयी है। सरकार द्वारा पेश किये गये बजट से यह साबित हो गया है कि विधानसभा में भारी बहुमत मिलने के बावजूद यह सरकार राज्य में छायी ऊर्जा त्रासदी को खत्म करने के लिए साहसिक और दूरदर्शी कदम उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पायी है।
IGNOU- Town School Community College – now opens in Bihar Community Colleges are an alternative system of education which aims to empower individuals through appropriate skill development leading to gainful employment in collaboration with the local industry and community. They offer the advantage of tailoring programs to local needs and state-based requirements by using approaches that will be most acceptable to workers in the given community
Where the passion to excel in imparting education, vision to impact lives & mission to bridge the socio-economic divide, all converge to connect education with employment – this defines the spirit of Town Schools Community College. Town Schools has been awarded the status of Community College by IGNOU. Founded by educationists & professionals of exceptional caliber & experience, Mr. Om Pathak (IAS) & Mr. Anshul Pathak, has a mission to create human capital that is suitably skilled, is self-reliant to create livelihoods, is progressive and growth oriented & above all, is a good human being. All courses includes behavioral & attitudinal elements to inculcate the right values in the learners, encouraging the learner by doing, in real life work context.
IGNOU - Town Schools community colleges now reaches Bihar with 2 centers at Bhagalpur and Purea, both have the capacity & competency to offer need-based skill development certified programs in a range of employment sectors, like IT/ITES, Tally, Finance, Soft Skills, Retail-Sales, Hospitality Services, Travel & Reservation services, Security, Banking/Accounting & Teacher Education.
बिहारी ब्रेन का नया कमाल बिहार में विज्ञान की अलख जगाने वाले विभूति विक्रमादित्य ने वेब कैमरा आधारित सुरक्षा तकनीक का इजाद किया है। इस तकनीक के जरिये महंगे सीसीटीवी के बदले सस्ते वेब कैमरे से भी घर अथवा कार्यालय के महत्वपूर्ण स्थानों की निगाहेबानी की जा सकेगी। श्री विक्रमादित्य ने बताया कि उनकी तकनीक के अनुसार जैसे ही कोई अवांछित व्यक्ति उस कैमरे के सामने आयेगा, उसी वक्त घर के स्वामी अथवा जिम्मेवार व्यक्ति के पास उसकी तस्वीर ईमेल, एमएमएस के माध्यम से भेज दी जायेगी। अपने नयी तकनीक का डेमो करते हुए श्री विक्रमादित्य ने बताया कि बहुत जल्द ही वे इसे एक प्रोडक्ट के रुप में बाजार में लांच किया जायेगा। शिक्षा के क्षेत्र में यह कैसा सुधार ? बिहार सरकार द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि सूबे में शिक्षा के माहौल में सुधार हुआ है। इससे विपरीत जो आंकड़ा बिहार सरकार द्वारा आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में जारी किया गया है, उसके अनुसार सरकार ने योजना मद की तुलना में गैर योजना मद में अधिक खर्च किया गया है। मिसाल के तौर पर वर्ष 2007-08 में योजना मद में 6.56 फ़ीसदी खर्च की गई वही गैर योजना मद में पहली बार शिक्षा के बेहतरी के लिये 102 फ़ीसदी तक खर्च किया गया। इसी प्रकार वर्ष 2008-09 में योजना मद में 22.53 प्रतिशत, वर्ष 2009-10 में 25.86 और वर्ष 2010-11 में 19.08 फ़ीसदी खर्च किया गया है। पूरी विवरणी निम्नवत है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर योजना मद के पैसे क्यों नहीं खर्च किये गये? इसके क्या मायने हो सकते हैं। जब हमने इस संबंध में शिक्षा विभाग के ही एक बड़े अधिकारी से पूछा तो उन्होंने बताया कि नीतीश सरकार दरअसल बिहार में अपने राजनीतिक स्थिति को मजबूत करना चाहती थी और इसी वजह से उसने शिक्षा के क्षेत्र में बनाई गई महत्वपूर्ण योजनाओं को तिलांजलि देकर साईकिल और पोशाक योजना में पैसे खर्च किये। इसके लिये केंद्र की ओर से आवंटित राशि का भी उपयोग किया गया। बड़ी संख्या में नियुक्त हुए अस्थायी शिक्षकों के वेतन, छठे वेतन आयोग के बाद वेतन में हुई भारी वृद्धि के कारण ही गैर योजना मद में अधिक खर्च होने की बात कही गई है।
औद्योगिक सुरक्षा के लिये विशेष प्रयास जरूरी पूरे विश्व में प्रति सेकेंड एक मजदूर औद्योगिक दुर्घटना का शिकार होता है। इसका प्रतिकुल प्रभाव उत्पादन पर पड़ता है। इस संबंध में कल सीआईआई के तत्वावधान में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। अपने संबोधन में टाटा स्टील के पूर्व सुरक्षा प्रमुख मनोरंजन प्रसाद ने बताया कि वर्तमान में अनेक ऐसे सह उपकरण मौजूद हैं, जिनकी सहायता से औद्योगिक दुर्घटनाओं की संख्या में भारी कमी लाई जा सकती है। इन्होंने उद्यमियों को इन उपकरणों को उपलब्ध कराने का आहवान करते हुए कहा कि इसका सकारात्मक प्रभाव उनके उत्पादन पर पड़ेगा। इस अवसर पर सीआईआई के बिहार चैप्टर के उपाध्यक्ष निर्मल्य घोसाल ने अपने उद्बोधन में औद्योगिक सुरक्षा के संबंध में सीआईआई के द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सविस्तार जानकारी दी। कार्यशाला की अध्यक्षता वरिष्ठ पदाधिकारी अर्चनदेव ने किया। बिहार के बुलंद इरादों का गवाह बनेगा बिहार विज्ञान सम्मेलन तेजी से बदल रहे परिवेश में प्रगति के पथ पर अग्रसर बिहार के बुलंद इरादों का गवाह बनेगा बिहार विज्ञान सम्मेलन। बिहार ब्रेन सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित होने वाले चौथे विज्ञान महाकुंभ का आयोजन आगामी 11 से 13 फ़रवरी को मुजफ़्फ़रपुर जिले के सुप्रसिद्ध लंगट सिंह कालेज परिसर में किया जा रहा है। यह पहला मौका होगा, जब इस महाकुंभ में भाग लेने देश और विदेश के अप्रवासी भारतीय वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि विदेशी वैज्ञानिक भी शामिल होंगे। “अपना बिहार” से विशेष बातचीत में बिहार ब्रेन सोसायटी के संस्थापक सह अध्यक्ष विभूति विक्रमादित्य ने बताया कि इस अति महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्घाटन देश के जाने-माने वैज्ञानिक एवं पर्यावरणविद डा आर के पचौरी करेंगे। इन्होंने बताया कि इस बार सम्मेलन का थीम “Development Attitude of Product Development & Transforming Ideas into Implementation” रखा गया है। श्री विक्रमादित्य ने बताया कि इस बार के वैज्ञानिक महाकुंभ में अमेरिका, रुस और थाईलैंड के विदेशी विशेषज्ञों के अलावे बड़ी संख्या में अप्रवासी भारतीय वैज्ञानिक भी भाग लेंगे। इन्होंने बताया कि इस महाकुंभ से बिहार में विज्ञान के प्रति लोगों की सोच में बदलाव हो सकेगा और युवा वैज्ञानिक शोधों के प्रति आकर्षित होंगे। इसके अलावे पूरे विश्व के मानचित्र पर बिहार की छवि में सकारात्मक परिवर्तन भी हो सकेगा। बताते चलें कि श्री विक्रमादित्य स्वयं भी दक्षिण कोरिया में एक मल्टीनेशनल इलेक्ट्रानिक कंपनी में चीफ़ डिजायनर सह वैज्ञानिक रह चुके हैं। अखिल भारतीय विज्ञान कांग्रेस के तर्ज पर बिहार में विज्ञान का महाकुंभ आयोजित करने की योजना के बारे में इनका स्पष्ट मानना है कि बिहार में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है तो केवल इसे परखने और निखारने की। इन्होंने यह भी बताया कि इस बार उन्हें आईआईटी, पटना और नाइपर, हाजीपुर का सहयोग भी मिल रहा है। भविष्य के लिये अनेक सपने दे गया पटना का पुस्तक मेला पिछले दिन 12 दिनों तक पटना का गांधी मैदान जहां एक ओर एक निजी टेलीविजन चैनल द्वारा आयोजित शर्मसार करने वाली प्रतियोगिता समारोह का गवाह बना, जिसमें अनेक लोगों की मौत हुई और 50 से अधिक लोग गंभीर रुप से घायल हुए। वही दूसरी ओर उसी गांधी मैदान में पुस्तक मेला के आयोजन ने भविष्य के सपने दे गया। 12 दिनों तक पटनाइट्स ने जमकर किताबों की खरीदारी की। पुस्तक मेले के दौरान मीडिया लीडर कार्यक्रम के जरिये आशुतोष और श्रवण गर्ग जैसे धुरंधर मीडिया कर्मियों से पटना के युवाओं को मुखातिब होने का मौका मिला तो दूसरी ओर साहित्यकारों की उपस्थिति ने आने वाले कल के लिये सपनों का नया ताना-बाना बुना। युवा लेखक डा ध्रुव कुमार द्वारा जैन धर्म पर लिखित पुस्तक और रत्नेश्वर द्वारा लिखित कथा संग्रह लेफ़्टिनेंट हडसन ने युवा साहित्यकारों के लिये एक उम्मीद की किरण जगाई है। जिस तरीके से पटनावासियों ने पुस्तक मेले का आनंद लिया और किताबों की रिकार्ड बिक्री हुई, निश्चित तौर पर पटना को अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले के आयोजक का हकदार बनाता है। इन सब सुखद अनुभूतियों के बीच साहित्य के प्रति बिहार के युवाओं में घटती अभिरुचि के लिये यह आवश्यक है कि इस प्रकार के आयोजन हर 6 माह पर किये जायें। कदापि संभव है कि इससे बिहार की साहित्यिक विरासत और समृद्ध होगी। बिहार कान्केल्व 2010 शुरु, लालू राज में अफ़गानिस्तान बन गया था बिहार – मोदी पिछले 5 सालों के पहले बिहार में सरकारें तो थीं, लेकिन कोई शासन नहीं था। बीते पांच सालों में एनडीए ने राज्य में सरकार को स्थापित करने की कवायद की। इमानदारी के साथ की गई कवायद ने ही बिहार की जनता को विश्वास दिलाया और एनडीए को भारी जनादेश दिया। ये बातें राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिहार टाइम्स कान्केल्व 2010 के अवसर अपने उद्घाटन संबोधन में कहीं। श्री मोदी ने कहा कि अन्य राज्यों यथा आंध्र प्रदेश्म कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात आदि विकसित राज्यों में तो कोई भी आदमी मुख्यमंत्री बन सकता है और सरकार चला सकता है, लेकिन वह बिहार जो लालू राज में अफ़गानिस्तान बन चुका था, उसे विकास की पटरी पर लाना हर किसी के वश की बात नहीं थी। एनडीए सरकार ने बिहार् को विकास की पटरी पर ला खड़ा किया और अगले पांच सालों में यह देश के तमाम विकसित राज्यों को पीछे छोड़कर सबसे अधिक विकसित राज्य बन जायेगा। इन्होने बताया कि बिहार में हर चीज एक चैलेंज है। मसलन शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायती राज, जनवितरण प्रणाली आदि योजनाओं का लाभ आम आदमी तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नही है। बिहार सरकार ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ़ बिगुल फ़ूंक दिया है। इन्होंने जीत के लिये समावेशी राजनिति को श्रेय देते हुए कहा कि पिछले पांच सालों में एनडीए सरकार ने हर जाति और धर्म के लोगों के हित में काम किया। भारी जनादेश क रुप में जो चुनौतियां मिली हैं, राज्य सरकार उसका निर्वहन करने में सक्षम है। इससे पहले अपने संबोधन में बिहार टाइम्स के संपादक अजय ने बिहार की वर्तमान स्थितियों और चुनौतियों की सविस्तार जानकारी दी। उद्घाटन सत्र के बाद दूसरे सत्र में राज्य में हरित ऊर्जा की संभावनाओं पर विचार विमर्श में सेइकेई विश्वविद्यालय , जापान से आये विशेषज्ञ प्रो संजय कुमार ने कहा कि यदि सरकार चाहे तो बिजली की क्मी को सौर ऊर्जा के बूते दूर की जा सकती है। इसी विश्वविद्यालय के प्रो कुरुसावा ने सौर ऊर्जा के अधिकाधिक उपयोग के लिये किये जाने वाले उपायों के बारे में जानकारी दी। अमेरिका से आये प्रो एम जे वारसी ने अपने संबोधन में बताया कि अमेरिका के टेक्सास विश्वविद्यालय में स्थानीय कार्टुनिस्ट पवन के कार्टुनों पर विशेष अध्ययन किया जा रहा है। इन्होंने यह भी बताया कि बिहार में अनेक कमिया हैं, जिन्हें दूर करने की जवाबदेही और सामर्थ्य केवल बिहारियों में ही है। स्वीडेन से आये शिक्षाविद हरिशंकर शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि अब यह कहना फ़िजूल है कि बिहार एक गरीब राज्य है, क्योंकि गरीबी और पैसे का कोई संबंध नहीं है। इन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सवाल केवल पैसे का होता तो अमेरिका जैसे विकसित देशों में कोई समस्या होती ही नहीं। दोहा-कतर से आये शकील अहमद काकवी ने सबसे बड़ी आवश्यकता है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं को तकनीकी रुप से कुशल बनाने की। अपने संबोधन में दोहा निवासी बिलाल खान ने कहा कि बिहार विकसित बने, यह हम सबकी चाहत है और इसके लिये जरूरी है कि हम भेद मिटाकर संयुक्त रुप से पहल करें। गया में ज्मीन के अंदर बांध बनायेंगे प्रो कातो गया जिले में जमीन के अंदर बहने वाली फ़ल्गू नदी में जमीन के अंदर ही बांध बनाकर गयावासियों को जलसंकट से मुक्ति दिलाना चाहते हैं तोक्यो विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफ़ेसर डा मकोतो कातो। अपना बिहार के साथ विशेष बातचीत में डा कातो ने हमें बताया कि गया जिले में पानी की कमी ने उन्हें प्रेरित किया है कि जमीन के अंदर बांध बनाकर जलस्तर को उपर लाया जाये। इन्होंने बताया कि यदि राज्य सरकार सहयोग करे तो निश्चित तौर पर भूजल स्तर को 30 फ़ीट तक लाया जा सकता है। इससे लोगों को सहज रुप से पानी मिल सकेगा और पानी निकालने के लिये लगने वाली बिजली में काफ़ी कमी भी आयेगी। यशवंत ने रखी पत्रकारिता की लाज भडास फ़ार मीडिया के युवा संपादक यशवंत सिंह ने आज के पेड न्यूज के दौर में भी पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करते हुए इसकी लाज रख ली। कल बिहार कान्क्लेव 2010 के अवसर पर जब श्री सिंह का नाम उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी द्वारा प्रतीक चिन्ह लेने के लिये बुलाया गया, तो उन्होंने प्रतीक चिन्ह लेने से इन्कार कर दिया। इन्होंने बताया कि वे किसी भी प्रकार का सम्मान नहीं स्वीकार करते हैं। “अपना बिहार” के साथ विशेष बातचीत में श्री सिंह ने बताया कि आज के विकल्पविहीन पत्रकारिता के दौर में भी विकल्प है और आज के युवा चाहें तो यह काम आसानी से कर सकते हैं। आज के मीडिया का स्वरुप बदला है तो इसका मिजाज भी बदला है। विकीलिक्स के द्वारा किये जा रहे खुलासे इस बात के सबूत हैं कि जहां एक ओर कारपोरेट जगत का गुलाम बन चुकी पत्रकारिता है तो दूसरी ओर विकीलिक्स जैसे वेब पोर्टल भी पूरी अस्मिता के साथ जीवित हैं, जिन्होंने अपने घुटने नहीं टेके। कानून का राज स्थापित करने के लिये पुलिस में बड़े पैमाने पर बहाली सूबे में कानून का राज स्थापित करने के लिये राज्य सरकार बड़े पैमाने पर पुलिस जवानों की बहाली करेगी। पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सूबे की गिरती कानून व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की और इससे निबटने के लिये सख्त हिदायत दी। चार घंटे तक चली इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने पांच वर्षों में 45 हजार सिपाहियों की बहाली करने और 5 हजार दारोगा की बहाली के आदेश दिये। इसके अलावे मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में हरिजन थाना और महिला थाना खोलने का आदेश भी दिया। गांव में बहाल होंगे सरकारी साहुकार वित्तीय समावेशन के लक्ष्य यानि अधिक से अधिक लोगों तक बैंकिंग की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार बैंकों के साथ मिलकर सरकारी साहुकारों की नियुक्ति करेगी। इंटरनेट से लैस ये साहुकार अपने गांव अथवा मुहल्ले में लोगों को बैंक की सुविधा प्रदान करेंगे। इस आशय की जानकारी राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में दी। इन्होंने बताया कि प्रत्येक 2000 लोगों की आबादी के लिये ऐसे साहुकार नियुक्त किये जायेंगे। इसके लिये कुल 8947 गांवों की पहचान कर ली गई है, जहां वर्ष 2012 तक बैंक की सुविधा प्रदान कर दी जायेगी। श्री मोदी ने बताया कि राज्य में उद्योगों को बढावा देने के लिये अब राज्य के उद्यमियों को बिना गारंटर के ही एक करोड़ रुपये तक का लोन दिया जायेगा। इन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई क्रेडिग गारंटी फ़ंड ट्रस्ट स्कीम के तहत 20 करोड़ रुपये तक का कर्ज दिये जाने का प्रावधान है। यह देश के अन्य राज्यों में पूर्व से ही लागू है, लेकिन सूबे बिहार में इसे अब लागू किया जा रहा है। इन्होंने यह भी बताया कि बिहार के बैंकों में वर्तमान वित्तीय वर्ष के प्रथम छमाही में 1 लाख 762 करोड़ रुपये जमा हुए हैं और इसके विरुद्ध इन बैंकों द्वारा 31 हजार 912 करोड़ रुपये का लोन दिया गया। इस प्रकार इस वर्ष साख जमा अनुपात 31.37 फ़ीसदी रही। श्री मोदी ने यह भी बताया कि किसानों को दिये जाने लोन में तेजी लाने के लिये राज्य सरकार अगले तीन माह तक प्रत्येक 10 तारीख को राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालय में लोन मेले का आयोजन करेगी। इस बार इस मेले की खासियत यह होगी कि इसमें केसीसी के अलावे पशुपालन, मत्सय, पाल्ट्री, भूजल सिंचाई योजना और कृषि यंत्रों के लिये भी आन स्पाट लोन दिये जायेंगे। बदल रही है मीडिया की अवधारणा आज के बदलते दौर में मीडिया का स्वरूप बदला है और इसकी अवधारणा भी बदली है। अब इसका काम केवल जनता तक खबरें पहुंचाना ही नहीं, बल्कि समाज को एक दिशा देना भी है। ये बातें भाजपा के स्थानीय विधायक अरूण कुमार सिंह ने इन्टरनेशनल स्कूल आफ़ बिजनेस एंड मीडिया के तत्वावधान में आयोजित मीडिया माइंड प्रिंट्स 2010 के अवसर पर कहीं। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डा प्रमोद कुमार ने कहा कि आज मीडिया में रोजगार के अनेक विकल्प मौजूद हैं। इसलिये युवाओं के पास भी अपना मनपसंद विक्ल्प चुनने का अवसर है। कार्यक्रम के दौरान मीडिया से जुड़े अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे। आज से शुरु होगा पटना का पुस्तक मेला पटना के पुस्तक प्रेमियों के लिये पटना का पुस्तक मेला आज से शुरु होगा। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश के द्वारा किया जायेगा। इस पुस्तक मेले में 100 से अधिक की संख्या में देश के नामी-गिरामी प्रकाशक कंपनियां भाग लेंगी। मेले के दौरान कैरियर, साहित्य और मीडिया संबंधित अनेक इवेंट्स भी आयोजित किये गये हैं। पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढायेगा मीडिया प्रिंट्स इन्टरनेशनल स्कूल आफ़ बिजनेस एंड मीडिया के सौजन्य से पटना के युवाओं के लिये विशेष कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय तारामंडल में किया जा रहा है। इस संबंध में संस्थान के निदेशक डा प्रमोद कुमार ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस कार्यक्रम के दौरान युवाओं को मीडिया के बदल रहे स्वरुप से परिचित कराया जायेगा। इन्होंने बताया कि मीडिया का मतलब अब केवल पत्रकारिता तक ही सीमित नहीं रह गया है। इन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में ई-पत्रकारिता के नये दौर की शुरुआत होना है। इसके लिये भी युवाओं को विशेष रुप से तैयार रहना चाहिये। इस अवसर पर मीडिया प्रिंट्स से टीम समन्वयक उपासना रानी और मीडिया प्रभारी ओसामा जाफ़री भी उपस्थित थे। क्षेत्रीय विषमता और बिहार की बदहाली पर चर्चा करने आज जूटेंगे कई दिग्गज भारतीय राजनितिक आर्थिक अकादमिक संघ द्वारा अपना 14वां सम्मेलन स्थानीय ए एन सिन्हा सामाजिक शोध संस्थान में किया जा रहा है। आज से शुरु होने वाले इस दो दिवसीय कार्यक्रम में देश और दुनिया के 100 से अधिक विशेषज्ञ अपनी राय प्रकट करेंगे। इस संबंध में संस्थान के निदेशक प्रो डी एम दिवाकर ने संवाददाता सम्मेलन में जानकारी दी। इन्होंने बताया कि दो दिनों के दौरान विशेषज्ञ क्षेत्रीय आर्थिक विषमता, कृषि की विषमतायें और सभी सम्स्याओं के राजनीतिक पहलूओं पर अपना विचार प्रकट करेंगे। सूबे में खसरा उन्मूलन अभियान चलाया जायेगा – मिश्रा राज्य में खसरा उन्मूलन अभियान चलाया जायेगा। प्रथम तीन चरणों में इसे मगध प्रमंडल में पल्स पोलियो अभियान के तर्ज पर इस अभियान की शुरुआत की जायेगी। इस आशय की जानकारी राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव सी के मिश्रा ने संवाददाता सम्मेलन में दी। इन्होंने बताया कि प्रथम चरण में मगध प्रमंडल के गया, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद और नवादा के 64 प्रखंडों के 7 माह से 10 वर्ष के बच्चों को खसरा का टीका लगाने के लिये आंगनबाड़ी सेविकाओं की मदद ली जायेगी। हुनर कार्यक्रम में लूट का आरोप राज्य सरकार द्वारा अल्पसंख्यक महिलाओं के लिये चलाई जा रही महत्वाकांक्षी योजना हुनर कार्यक्रम में धांधली किये जाने का मामला प्रकाश में आया है। पूर्णिया जिले के जदयू के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष वसीम कमाली ने आरोप लगाया है कि जिन बच्चियों ने प्रशिक्षण लेने के लिये आवेदन किया था, उनका प्रशिक्षण केंद्र बहुत दूर था। इसके अलावा इन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सभी आवेदकों से पांच सौ रुपये की उगाही की गई है। केंद्रीय करों में बिहार के साथ नाइंसाफ़ी – मोदी पिछले एक साल तक सुसुप्तावस्था यानि सोये रहने वाले आईजीसी यानि इंटरनेशनल ग्रोथ सेंटर के एक साल पूरा होने पर आयोजित कार्यक्रम में राज्य के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने 12वें वित्त आयोग के सख्त निर्देशों के बावजूद 99-9 फ़ीसदी राशि का उपयोग किया। केवल 0-01 प्रतिशत राशि का व्यय नहीं कर पाने के कारण केंद्र ने केंद्रीय करों की हिस्सेदारी में कमी कर दी है। आद्री परिसर में आयोजित सालगिरह समारोह में श्री मोदी ने कहा कि 12वें वित्त आयोग ने केंद्रीय करों में बिहार की हिस्सेदारी 30-5 फ़ीसदी निर्धारित की थी और 13वें वित्त आयोग ने इसे बढाकर 32 फ़ीसदी करने की अनुशंसा की थी। इसके बावजूद बिहार को केवल 10-917 फ़ीसदी हिस्सेदारी ही मिल सकी। इन्होंने यह भी बताया कि 12वें वित्त आयोग के अनुशंसा के आधार पर स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुल 1819 करोड़ रुपये का अनुदान मिलना था, जिसमें से केवल 1439 करोड़ रुपये ही मिल सके। हालांकि श्री मोदी ने कहा कि 13वें वित्त आयोग के अनुशंसा के आधार पर वर्ष 2010 से लेकर वर्ष 2015 तक की अवधि में कुल 1 लाख 73 हजार करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। इससे पहले अपने संबोधन में नेशनल इन्स्टीच्युट आफ़ पब्लिक फ़िनांस एंड पालिसी, नई दिल्ली के प्रो पिनाकी चक्रवर्ती ने 13वें वित्त आयोग की अनुसंशाएं एवं बिहार के निहितार्थ विषय पर सविस्तार जानकारी दी। इनके अलावा आईआईएम, अहमदाबाद के प्रोफ़ेसर एरोल डिसूजा ने अपने संबोधन में निवेश के वातावरण और एकल खिड़की यानि सिंगल विंडो सिस्टम के महत्व पर जानकारी दी॥ अपने संबोधन में सीआईआई, बिहार चैप्टर के अध्यक्ष सत्यजित कुमार सिंह ने बिहार में तकनीकी-आर्थिक सर्वेक्षण तथा इसके लिये अकादमिक संस्थानों एवं व्यावसायिक संगठनों के बीच आपसी समन्वय पर बल दिया। इस अवसर पर आईजीसी इंडिया-बिहार के सलाहकार समिति के अध्यक्ष शैवाल गुप्ता ने आये अतिथियों का स्वागत किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डा चिरश्री दास गुप्ता ने दिया। बिहार के औद्योगिक विकास के राह में रोड़े दस साल पहले जब झारखंड अलग हुआ था तबसे यह लगने लगा था कि बिहार का औद्योगिक विकास एक दिवास्वप्न सरीखा है। पिछले दस सालों में जो भी सरकारें अस्तित्व में रही हैं, सभी ने औद्योगिक विकास के नाम पर केवल गाल बजाये हैं और आने वाले दिनों में भी इस प्रक्रिया को जारी रखा जायेगा। ये अलग बात है कि वर्ग प्रेम होने के नाते और जाति प्रेम होने के नाते न तो उद्यमी इस संबंध में आवाज उठाने का माद्दा रखते हैं और न ही मीडिया के लोग सरकार के विरोध में एक भी वाक्य लिखने को तैयार हैं। अब इसे इस राज्य का दुर्भाग्य ही कहा जाना चाहिये कि पिछले 5 सालों के शासन काल में करीन पौने दो लाख करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव बिहार सरकार के पास आये और केवल डेढ प्रतिशत प्रस्तावों को अमली जामा पहनाया जा सका। यानि शेष 98-5 फ़ीसदी प्रस्ताव या तो बिहार सरकार के उद्योग विभाग के फ़ाइलों में बंद पड़े हैं या फ़िर पुंजी लगाने को इच्छुक निवेशकों ने अपना मन बदल लिया है। अब बात करें प्रस्तावों की तो पाठकों को बता दें कि पिछले 5 सालों में बिहार सरकार को कुल 398 प्रस्ताव मिले हैं जिसमें 11 प्रस्ताव उन निवेशकों के हैं जिनकी इकाइयां पहले से ही काम कर रही हैं और वे अपनी इकाइयों का विस्तार करना चाहते हैं। यह बात काबिलेगौर है कि इनमें से 31 फ़ीसदी प्रस्ताव खाद्य एवं प्रसंस्करण क्षेत्र से संबंधित हैं। इनमें मक्का, लिची, केला, धान आधारित यानि राइस मिलों के प्रस्ताव शामिल हैं। कुल 16 फ़ीसदी प्रस्ताव बिजली से संबंधित हैं जिनकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा कोल लिंकेज और पानी का अभाव है। 22 प्रतिशत निवेशक चीनी मिल लगाने के इच्छुक हैं और सरकार की मानें तो इथनाल की अनुमति मिलने का इंतजार है। 14 प्रतिशत निवेशक सूबे में शिक्षा उद्योग स्थापित करना चाहते हैं यानि ये वे लोग हैं जो सूबे में कालेज और अन्य शिक्षण संस्थान खोलना चाहते हैं। पर्यटन के प्रति केवल 4 फ़ीसदी निवेशक उत्साहित हैं। जबकि विनिर्माण के क्षेत्र में केवल 13 प्रतिशत निवेशक ही इच्छुक हैं। अब यह भी एक सच्चाई है कि करीब 28 फ़ीसदी प्रस्ताव सरकार के अंतिम स्वीकृति की बाट जोह रहे हैं। इनमें से करीब 85 फ़ीसदी प्रस्तावों को मिले 2 साल से उपर हो चुके हैं। यानि पिछले दो सालों से राज्य सरकार के एस आई पी बी यानि राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड ने इनकी खोज खबर तक नहीं ली। 38 फ़ीसदी प्रस्ताव बिजली के अभाव में अस्तित्व में नहीं आ सकी हैं। 3 प्रतिशत ऐसे प्रस्ताव हैं जिन्हें स्वीकृति मिल चुकी है और निवेशक भी निवेश करने को तैयार हैं लेकिन बिहार सरकार की चपलता की वजह से अभी तक इन्हें जमीन नहीं मिल सका। वही खास बात यह है कि 32 फ़ीसदी प्रस्ताव दम तोड़ चुके हैं यानि इन्हें स्वीकृति मिल चुकी है और सभी परिस्थितियां अनुकूल हैं, इसके बावजूद निवेशकों ने अब दिलचस्पी लेना बंद कर दिया। बहरहाल बिहार के औद्योगिकीकरण के प्रस्ताव अभी भी सिंगल विंडो सिस्टम के जरिये आने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन अभी तक यह वन वे ट्रैफ़िक सरीखा ही है। यानि लोग निवेश का प्रस्ताव देते हैं और सरकार चुप्पी मारकर बैठी है। पिछले एक साल में राज्य सरकार और इसके दलाल सरीखे विशेषज्ञों एवं मीडिया का कहना रहा कि अभी निवेशक वेट एंड वाच की स्थिति में हैं और यदि नीतीश कुमार की वापसी हुई तो निवेश का जबर्दस्त दौर शुरु होगा। तो लो भाई, बिहार की तथाकथित जनता ने नीतीश कुमार को दुबारा गद्दी पर बिठा दिया और इस दिशा में नई सरकार द्वारा किये जाने वाले प्रयासों को लेकर आशावान है। कम से कम अब नीतीश कुमार के पास कोई बहाना नहीं होगा। लेकिन पाठकों को यह भी बता दें कि श्री कुमार की बहानेबाजी अव्वल दर्जे की होती है, इसलिये संभव है कि आने वाले सालों में कुछ और बहाने सुनने को मिलें। हो सकता है कि श्री कुमार यह कहें कि भाई पहले पांच साल हमने सुशासन स्थापित किया, फ़िर पांच साल उसे मजबूत किया और वर्ष 2015 में ये लोगों से कहेंगे कि इस बार भी मजदूरी दे दीजिये ताकि उद्योगों का जाल बिछा सकें। बेमिसाल है बिहार पुलिस, 18 दिनों से अपहृत व्यापारी की कोई खोज खबर नहीं जी हां, बिहार पुलिस बेमिसाल है। बेमिसाल इसलिये कि यदि कोई घटना पटना के सड़कों पर घट जाये तो संभव है कि बिहार पुलिस की तेजी पूरी दूनिया को पीछे छोड़ दे। लेकिन सुदूर गांवों में इनकी तेजी खत्म हो जाती है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि पिछले 18 नवंबर को पटना जिले के मसौढी के भगनावगंज थाने के बलियारी गांव के अपहृत व्यापारी सुनील चंद्र गुप्ता का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। इनकी पत्नी रीता देवी का कहना है कि नगौली गांव के नागेंद्र साव ने उन्हें बताया कि उनके पति को माओवादियों ने कब्जे में ले रखा है और पैसे देने पर छुट सकते हैं। इनका यह भी कहना है कि पुलिस कुछ नहीं कर रही है। जबकि स्थानीय पुलिस का कहना है कि यह एक व्यक्तिगत विवाद से संबंधित है और तहकीकात कर रही है। दूसरे राज्यों के तर्ज पर होगा सूबे का औद्योगिक विकास राज्य सरकार सूबे में औद्योगिक विकास के लिये कृतसंकल्पित है और पिछले पांच सालों में सूबे में इस दिशा में सकारात्मक माहौल बना है। इस परिस्थिति में औद्योगिकीकरण को तेजी से बढाने के लिये राज्य सरकार जल्द ही नई औद्योगिक नीति जारी करेगी। इसके लिये राज्य सरकार अन्य राज्यों के औद्योगिक नीतियों की मदद भी लेगी। इस आशय की जानकारी राज्य की उद्योग मंत्री डा रेणु देवी कुशवाहा ने बिहार चैम्बर आफ़ कामर्स के सभागार में चैम्बर के तत्वावधान में आयोजित स्वागत समारोह में दी। इससे पहले चैम्बर के अध्यक्ष पी के अग्रवाल ने उद्योग मंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि पिछले पांच साल में बिहार ने अपेक्षाकृत प्रगति की है। लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। असीमित निबंधन शुल्क से परेशान हैं सूबे के उद्यमी सूबे में कोई भी औद्योगिक इकाई स्थापित करना कागजी तौर पर जितना आसान दिखता है, वह उतना ही अधिक जटिल है। म्सलन यदि कोई व्यक्ति अपना उद्यम स्थापित करना चाहे और बैंक से लोन लेना चाहे तो उसके लिये यह सब इतना आसान नहीं होता है। समस्या केवल बैंकों से ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार की तरफ़ से भी है। इच्छुक उद्यमी को बैंकों से लोन लेने के समय दिये जाने मौर्टगेज डीड के निबंधन के नाम पर जो शुल्क राज्य सरकार द्वारा लिया जाता है, वह असीमित है। दूसरे शब्दों में यदि कोई व्यक्ति एक करोड़ रुपये का लोन लेना चाहे तो उसे मौर्टगेज डीड के निबंधन के लिये कम से कम 30 हजार रुपये खर्च करने होंगे। जबकि पड़ोसी राज्य बंगाल में यह बिल्कुल शून्य है। वही उत्तरप्रदेश में इसकी अधिकतम सीमा 10 हजार रुपये सीमित कर दी गई है। पंजाब में तो केवल ढाई रुपये में असीमित राशि का निबंधन कराया जा सकता है। बहरहाल वर्तमान में जो औद्योगिक नीति अस्तित्व में है, उसकी मियाद आगामी 31 मार्च 2011 को समाप्त हो रही है और सूबे में नयी औद्योगिक नीति बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। हालांकि राज्य सरकार ने अभी 6 महीने के विस्तार की बात कही है। विश्वास किया जाना चाहिये कि राज्य सरकार उद्यमियों के वित्तीय सहायता की दिशा में कोई ठोस कदम उठायेगी। देश के विकास में छोटे उद्यमियों की अहम भूमिका आज के बदलते दौर में देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत रखने में लघु एवं सुक्ष्म क्षेत्र के उद्यमियों की अहम भूमिका है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह कि देश के जीडीपी में इस क्षेत्र का योगदान 20 फ़ीसदी और रोजगार उपलब्ध कराने में 70 फ़ीसदी योगदान है। ये बातें सीआईआई के लघु एवं सुक्ष्म उद्य्मी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश डाल्टा ने सीआईआई के बिहार चैप्टर के तत्वावधान में आयोजित एसएमई फ़ोरम नामक कार्यक्रम में कहीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के विशेष सलाहकार विजय राघवन ने कहा कि बिहार सरकार छोटे उद्यमियों के प्रोत्साहन के लिये कृतसंकलिप्त है और नई औद्योगिक नीति में इस क्षेत्र के लिये विशेष प्रावधानों पर विचार किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक आर वेंकटाचलम, उद्योग विभाग के प्रधान सचिव शुभकीर्ति मजुमदार, वाणिज्य कर विभाग के प्रधान सचिव जे आर के राव, सीआईआई के पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रमुख कुरुस ग्रांट और सीआईआई प्रदेश अध्यक्ष सत्याजित सिंह सहित अनेक गणमान्य ने भी अपने विचार व्यक्त किये। तमसील की भव्य शुरुआत युवाओं की संस्था समर के तत्वावधान में बच्चों पर केंद्रित नाट्य महोत्सव तमसील की भव्य शुरुआत कल राजधानी के कालीदास रंगालय में हुई। प्रसिद्ध रंगमंच अभिनेता जावेद अख्तर ने अपने संबोधन में रंगमंच और बचपन के बीच के संबंधों पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि असल में रंगमंच एक ऐसी विधा है जिसमें साहित्य, संगीत और संस्कृति का अनुठा संगम होता है। आज की भागदौड़ की जिंदगी में वास्तविकता खत्म होती जा रही है, जो बच्चों में होनी चाहिये। आज के बच्चे टेलीविजय और इंटरनेट आदि से जुड़कर अकेले ही अपना बचपन खोते जा रहे हैं, उन्हें जीवन से परिचित कराने के लिये इस तरह के प्रयास किये जाने चाहिये। कल महोत्स्व के पहले दिन राजकीय मध्य विद्यालय, पहाड़ी के बच्चों द्वारा “नौकर” नाटक का मंचन किया गया। कन्या मध्य विद्यालय, नारायणी के बच्चों ने अंधेरी नगरी चौपट राजा, कमला नेहरु शिशु विहार के बच्चों ने ब्रहमराक्षस का नाई और बालक मध्य विधालय खाजेकला, पटना सिटी के बच्चों ने नगर में ढिंढोरा नामक नाटक प्रस्तुत किये। बिहार में परिवर्तन की चुनौतियां, 18 और 19 दिसंबर को लगेगा विदेशी मेहमानों का जमावड़ा सूबे में परिवर्तन की चुनौतियों पर चर्चा करने के लिये आगामी 18 और 19 दिसंबर को पूरी दूनिया से करीब 200 विदेशी मेहमान और गैर प्रवासी बिहारी पटना के मौर्य होटल में पधार रहे हैं। इस आशय की जानकारी कल बिहार टाइम्स के संपादक अजय कुमार ने संवाददाता सम्मेलन में दी। इन्होंने बताया कि इस मौके पर प्रोफ़ेसर मकोतओ कातो के नेतृत्व में जापानी प्रतिनिधिमंडल भी हिस्सा लेगा। इन्होंने बताया कि श्री कातो भूतत्व इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ हैं और गया में अंडरग्राउण्ड डैम कन्स्ट्रक्शन और अंडरग्राउंड जल संरक्षण आदि संभावनाओं पर काम करना चाहते हैं। श्री कुमार ने यह भी बताया कि ब्रिटेन के ग्लासोव विश्वविद्यालय में शिक्षक डा भास्कर चौबे उन वक्ताओं में से एक होंगे जो राज्य में सूचना क्रांति की नयी संभावनाओं पर जोर देंगे। इनके अलावा आईआईटी के पूर्व छात्र और ग्लोबल सैप आपरेशन के प्रमुख दीपक कुमार, वाशिंगटन विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर एम जे वारसी, जीसीएनएन स्वीडेन के हरि शंकर शर्मा, अस्ट्रेलिया के मनोज कुमार, कतर से शकील काकवी और बिलाल खान एवं लंदन के रवि रंजन कुमार सहित अनेक लोग भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में सम्मान फ़ाऊंडेशन के इरफ़ान आलम, कौशल्या फ़ाऊंडेशन के कौशलेंद्र और मुसहर समाज के बच्चों के लिये विशेष स्कूल चलाने वाले जे के सिंह भी भाग लेंगे। बदहाल हैं कोशी की नहरें भले ही राज्य सरकार विकास के कितने भी दावे क्यों न कर ले, लेकिन सच्चाई यह है कि कोशी के इलाके के नहर बदहाल हैं। सरकार का सिंचाई विभाग बड़ी-बड़ी कंपनियों को ठेका देकर किसानों को भगवान भरोसे छोड़ देती है, तो कंपनियां भी पेटी कांट्रैक्टरों के साथ मिलकर केवल सरकारी खजाने क दोहन करती हैं। बीरपुर निवासी राधे श्याम सिंह ने अपना बिहार को संदेश भेजकर यह गुहार लगाया है कि राज्य सरकार के मुखिया नीतीश कुमार उनके इलाके की सुध लें और बेहतर एवं सुंदर कोशी की बात छोड़ कम से कम पहले वाला कोशी ही बना दें। विकास का एक नमूना यह भी अभी दो महिने पहले ही दरभांगा के जाले प्रखंड के कमतौल कोठी से भोला टाकीज तक सरकार द्वारा खरंजा यानि ईंट सोलिंग की गई थी। उद्देश्य था कि लोगों को चलने में असुविधा न हो। परंतु यह विकास यहां के स्थानीय निवासियों में से किसी एक से नहीं देखा गया और किसी ने सारी ईंटें उखाड़ ली। हालांकि इस संबंध में स्थानीय निवासी किसी का नाम लेने से कतराते हैं, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक दबंग जदयू नेता ने यह करतूत की है। इसलिये स्थानीय प्रशासन भी मौन है। मुजफ़्फ़रपुर में किसानों के साथ धोखा राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा मुजफ़्फ़रपुर के किसानों के साथ धोखाधड़ी किये जाने का मामला प्रकाश में आया है। एक तरफ़ किसानों को अपने फ़सलों की बीमा कराये जाने के बावजूद सुखाड़ के कारण फ़सल बर्बाद होने के बाद भी बीमा का लाभ नहीं मिल सका है। इसके अलावा किसानों के लिये उपकरण के खरीदने के नामपर करीब 5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई है। मुजफ़्फ़रपुर से अपना बिहार के संवाददाता ने बताया है कि किसानों को दिये जाने वाले उपकरणों के लिये कागजी खरीद की गई है। 18-19 दिसंबर को होगा राजगीर महोत्सव का आयोजन बिहार सरकार द्वारा हर साल आयोजित होने वाला राजगीर महोत्सव इस बार 18-19 दिसंबर को आयोजित किया जायेगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मेले का उद्घाटन करेंगे। इस आयोजन में प्रसिदî |