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अपने ही फ़ैलाये झुठ में फ़ंस गये सुशील कुमार मोदी

उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी इन दिनों स्वयं से परेशान हैं। इनकी परेशानी का आलम यह है कि अब जब भी ये बिहार के विकास के संबंध में आंकड़े देने का प्रयास करते हैं तो उसे सत्यापित करने के लिये कुछ ऐसे आंकड़े देने लगते हैं जिनका बिहार से कोई खास संबंध नहीं होता है। कल आद्री परिसर में एक वेबसाइट के लोकार्पण कार्यक्रम में श्री मोदी ने कहा कि पिछले पांच सालों में बिहार ने काफ़ी तरक्की की है। यदि बिहार का सकल घरेलू उत्पाद दर में वर्तमान दर से ही आगामी वृद्धि होती रहे तो आगामी 11 सालों में महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्य को पीछे छोड़ा जा सकता है। हांलाकि वित्तमंत्री महोदय ने यह बताना शायद उचित नहीं समझा कि इस साल राज्य का आर्थिक विकास दर पौने पांच फ़ीसदी हो गया है और दूसरे स्थान पर रहने वाला बिहार अब देश में 14वें स्थान पर खिसक गया है। हांलाकि श्री मोदी ने यह सफ़ाई भी अवश्य दी कि अगले 11 सालों में महाराष्ट्र का सकल घरेलू उत्पाद साढे तीन गुणा हो जायेगा।

इसके अलावा वित्तमंत्री ने यह भी स्पष्ट करने का प्रयास किया कि 1960-65 के बाद वर्ष 2005-10 में बिहार के विकास की गति तेज हुई है। सुनहरे अतीत की चर्चा करते हुए श्री मोदी ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य था जहां 110 साल पहले चीनी मिल लगाया गया था। इसके अलावे आजादी के पहले पूरे बिहार में चीनी मिलों का जाल सा बिछ गया था। लेकिन आजादी के बाद बिहार का चीनी उद्योग लगभग खत्म सा होने लगा। हांलाकि एक बार फ़िर श्री मोदी इस सच्चाई को स्वीकार नहीं किया कि पिछले पांच सालों में भी एक भी चीनी मिल नहीं लगाया गया है। कृषि क्षेत्र में 17 फ़ीसदी ॠणात्मक वृद्धि होने की सच्चाई बताना भी श्री मोदी भूल गये।

बहरहाल वित्तमंत्री के तौर पर श्री मोदी ने अब यह स्वीकार करना शुरू कर दिया है कि अभी तक विकास के जितने दावे उनकी सरकार ने किये थे, उनमें से अधिकांश फ़र्जी थे। यह सच्चाई अब सामने आ रही है, जब राज्य में चुनाव होने वाले हैं।

सुख़ाग्रस्त क्षेत्रों में गरीबों के लिये बने विशेष राहत नीति

पिछले 4 सालों से सुखाड़ और बाढ के कारण राज्य में कृषि दुष्प्रभावित हुई है। इस कारण ग्रामीन इलाकों में रोजगार के अवसर घटे हैं और इसका प्रतिकुल असर अन्न उपलब्धता पर हुई है। इसलिये आपदाग्रस्त इलाकों में भूख के साथ जी रहे लोगों की सहायता के लिये विशेष राहत नीति बनाया जाना चाहिये। इस आशय की जानकारी सर्वोच्च न्यायालय के आयुक्त के सलाहकार रुपेश ने कल संवाददाता सम्मेलन में दी। इन्होंने बताया कि विगत 4 अगस्त को जहानाबाद जिले के घोषी प्रखंड के अहियासा पंचायत के नौसहराचक गांव में किरण देवी नामक महिला की मौत भूख से हो गई। इस संबंध में रित्विज कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने इस गांव का विशेष जांच किया और जांच के दौरान इस सच्चाई को पाया कि मृतका का परिवार भूख के साथ जी रहा था।

रुपेश ने बताया कि स्थानीय प्रशासन की कारगुजारियां अत्यंत रोचक है। स्थानीय प्रशासन द्वारा मृतका किरण देवी के परिवार को उसके जीवन काल में अनाज नहीं दिया गया,लेकिन मरणोपरांत उसके परिवार को को उसके श्राद्ध कर्म के लिये डालडा, गेहूं, चीनी, पत्तल आदि दिये गये।

पटना हवाई अड्डे पर तलवार लटकना तय

पटना स्थित जयप्रकाश अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के कुख्यात हवाई अड्डों में शामिल हो गया है। यदि भारतीय विमानन प्राधिकरण के शर्तों को पूरा करने का प्रयास किया जाये तो निश्चित तौर पर पटना की ऐतिहासिकता पर इसका कुप्रभाव पड़ेगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार नये स्थान के लिये कम से कम 1000 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। इसके लिये विकल्प के रुप में पटना जिले में बिहटा, संपतचक या फ़िर नालंदा का चयन किया जा सकता है। हांलाकि बिहटा में इन्डियन एयरफ़ोर्स बेस होने के कारण रक्षा मंत्रालय से अनुमति मिलना संभव प्रतीत नहीं होता है। यदि हवाई अड्डा नालंदा में स्थानांतरित कर दिया जायेगा तो यात्रियों को 75 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी।

मनरेगा को प्रभावी बनायेगा ई-शक्ति कार्ड – नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कल ई-शक्ति कार्ड और स्काडा पद्धति का लोकार्पण करते हुए कहा कि इन योजनाओं से बिहार में विकास के रास्ते प्रशस्त हो सकेंगे। अलग-अलग कार्यक्रमों में अपने संबोधन में श्री कुमार ने कहा कि बिहार टेक्नोलाजी का उपयोग बेहतर शासन के लिये किया जा रहा है, जिसका अनुकरण पूरा देश करता है। ई-शक्ति कार्ड और बायोमेट्रिक यंत्र के जरिये मनरेगा मजदूरों के मजदूरी का हिसाब-किताब रखने में आसानी होगी।

बिहार के विकास में फ़िर आगे आया डीएफ़आईडी

अंग्रेजी हुकुमत का डीएफ़आईडी का बिहारी मोह एक बार फ़िर चुनाव के समय उमड़ आया है। सुर्खियों में बने रहने के लिये और बिहार के लोगों को यह आश्वस्त करने के लिये कि बिहार बदल रहा है एवं विदेशी संस्थाये नीतीश सरकार के पक्ष में खड़ी हैं, एक कार्यक्रम का आयोजन होटल मौर्या में 26 अगस्त को किया गया। इस अवसर पर राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बताया कि राज्य के 28 नगर निकायों के विकास के लिये डीएफ़आईडी 6 सालों में 425 करोड़ रुपये खर्च करेगा। हांलाकि श्री मोदी इस बात को भूल गये कि वर्ष 2008 में जब बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन की शुरुआत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डीएफ़आईडी मिनिस्टर डगलस अलेक्जेंडर ने संयुक्त रुप से किया था, तभी इसकी घोषणा श्री अलेक्जेंडर ने कर दिया था। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर डीएफ़आईडी ने अबतक बिहार के विकास के लिये कितना पैसा खर्च किया है और कितनी धनराशि का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया है या फ़िर केवल 425 करोड़ रुपये के लोभ में बिहार सरकार ने राज्य को ब्रितानिया हुकुमत का उपनिवेश बना दिया है? गौरतलब है कि डीएफ़आईडी और राज्य सरकार के बीच लायजनिंग करने वाला शख्स (नाम समय आने पर जगजाहिर किया जायेगा) एक पूर्व केंद्रीय मंत्री का रिश्तेदार है और इसके तार बहुत दूर तक जुड़े हैं। अपना बिहार इस संबंध में साक्ष्य एकत्रित कर रहा है कि अबतक कितने करोड़ रुपये की धनराशि किकबैक के रुप में बिहारी नेताओं के हिस्से में आई हैं।

विवि और महाविद्यालय के शिक्षकेत्तरकर्मियों को नया वेतनमान

राज्य सरकार ने राज्य के विवि एवं अंगीभूत महाविद्यालयों के शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के पुनरीक्षित वेतन की नयी संरचना को स्वीकृति प्रदान कर दिया है। छठे वेतनमान की नई संरचना पहली जनवरी 2006 से लागू होगी। कल कैबिनेट की बैठक में कई फ़ैसले लिये गये। इनमें सचिवालय सहायकों को संयुक्त सचिव बनाया जाना, श्रम संसाधन के बीमा चिकित्क्सकों की सेवानिवृति की उम्रसीमा 62 साल करने, पुलिस आधुनिकीकरण पर 62-50 करोड़ रुपये खर्च करने और बंद पड़े तीन चीनी मिलों को निजी हाथों में देने से हुई क्षतिपूर्ति के लिये 1-05 अरब रुपये देने आदि निर्णय शामिल है।

ई टेंडरिंग का उद्घाटन

जल संसाधन मंत्री बिजेंद्र यादव ने कल विभाग में ई टेंडरिंग सिस्टम का उद्घाटन किया। अब विभाग में 25 लाख से उपर के टेंडर इन्टरनेट के माध्यम से जारी किये जायेंगे। सरकार का मानना है कि इस प्रणाली के कारण पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आयेगी और कोई भी व्यकित जहां चाहे वहां से ही टेंडर डाल सकता है। इस अवसर पर विभाग के प्रधान सचिव अजय नायक और अभियंता प्रमुख देवी रजक सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे।

सड़क पर उतरे बिहार के उद्यमी

विद्युत अधिभार वसूले जाने के विरोध में राज्य के बड़े उद्यमियों ने अब सड़क पर राज्य सरकार के खिलाफ़ जंग का ऐलान कर दिया है। कल पटना के सड़क पर उद्यमियों ने धरना दिया। इस अवसर बीआईए के उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, पूर्व अध्यक्ष के पी एस केशरी, बिहार चैम्बर आफ़ कामर्स के अध्यक्ष पी के अग्रवाल और सीआईआई के राज्य अध्यक्ष सत्यजीत सिंह सहित बड़ी संख्या में उद्यमियों ने बिहार सरकार से अधिभार वापस लेने की मांग की।

ईंधन अधिभार के खिलाफ़ राज्य के उद्यमी देंगे धरना

बिहार राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा ईंधन अधिभार वसूल किये जाने के विरोध में राज्य के उद्यमी धरना और प्रदर्शन करेंगे। इस आशय की जानकारी बीआईए के उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने सवाददाता सम्मेलन में दी। इन्होंने बताया कि ईंधन अधिभार वसूले जाने तानाशाही निर्णय से राज्य के औद्योगिक इकाईयों की स्थिति चरमरा जायेगी। इस अवसर पर बिहार चैम्बर आफ़ कामर्स के उपाध्यक्ष तेज बहादुर सिंह जैन और सीआईआई के अध्यक्ष सत्यजीत कुमार सिंह भी उपस्थित थे।

भूख से मरने के कगार पर है रामसखिया

नाम रामसखिया देवी, ग्राम पलंगा गंज पर मुसहरी, प्रखंड फ़ुलवारी, जिला पटना। रामसखिया देवी का परिवार पिछले 3 महीने से भूखमरी का शिकार है। इसकी एक वजह यह है कि इसका एकमात्र बेटे की मौत हो चुकी है और बहु अपने मायके में जा बैठी है। दो पोतियों और एक पोता को सीने से लगाये रामसखिया अपने पड़ोसियों के दया पर जिंदा है। राशन-किरासन कूपन घर के एक पुराने बक्से में पड़े हैं। पिछले 6 महीने से राशन का वितरण नहीं किया गया है। इस पूरे परिवार की मजबूरी का आलम यह है कि 6 साल का रौशन( रामसखिया देवी का पोता) स्कूल के बजाय चाय नाश्ते के दूकान पर पहूंच गया है। इन सबके बावजूद रामसखिया देवी इस आस के साथ जिंदा है कि कोई तो आयेगा जो उसके परिवार की दूर्दशा पर रहम खायेगा।

तो यह है नालंदा विश्वविद्यालय का सच

प्रस्तावित नालंदा विश्वविद्यालय की एक सच्चाई यह है कि यह राजनीतिक अखाड़ा बनता जा रहा है। एक तरफ़ राज्य सरकार के मुखिया नीतीश कुमार द्वारा इस परियोजना का श्रेय लेने की जी तोड़ कोशिश की जा रही है तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह द्वारा परिवारवाद का उत्कृष्ट नमूना पेश किया जा रहा है। प्राप्त ठोस जानकारी के अनुसार इस विश्वविद्यालय के लिये बनाये गये सालहकारों की टीम के अध्यक्ष नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने प्रधानमंत्री की बेटी उपिंदर सिंह और उनकी मित्र नयनजोत लाहिड़ी को सलाहकारों की टीम में शामिल किया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री की बेटी के एक और मित्र गोपा सब्बरवाल को प्रस्तावित विवि का रेक्टर घोषित किया गया है, जिनकी तनख्वाह साढे तीन लाख रुपये प्रतिमाह होगी।

सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि प्रस्तावित नालंदा विवि में बौद्ध धर्म दर्शन और भाषा साहित्य की पढाई की जानी है। लेकिन अबतक दूनिया के कई सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को मिलाकर जो 19 लोगों की सलाहकार टीम बनाई गई है, उनमें से 90 फ़ीसदी सदस्यों को बौद्ध धर्म दर्शन अथवा भाषा साहित्य से कोई वास्ता नहीं है। लंदन स्कूल आफ़ इकोनामिक्स के प्रोफ़ेसर मेघनाद देसाई भी इन्हीं लोगों में शामिल हैं, जो नीतीश कुमार की चमचागिरी के लिये बिहार में विख्यात हैं। हैरत की बात यह है कि राजनीतिक अखाड़े में परिवारवाद के स्पष्ट सबूत होने के बावजूद जदयू सांसद एन के सिंह जैसे लोग भी खामोश हैं।

राज्यसभा में पेश हुआ नालंदा विवि विधेयक

बिहार को ज्ञान स्थली के रुप में फ़िर से स्थापित करने के उद्देश्य से नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्व विद्यालय की स्थापना के लिये एक विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया। कल विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने इस विधेयक को पेश किया। इस प्रस्तावित विवि में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्ध दर्शन, इतिहास और भाषा साहित्य आदि विषयों की पढाई की जायेगी।

विदित है कि बिहार के नालंदा में प्रस्तावित इस विवि की स्थापना के लिये फ़िलीपींस में 15 जनवरी 2007 को हुए दूसरे पूर्व एशियाई सम्मेलन में निर्णय लिया गया था। 25 अक्टूबर 2009 को थाईलैंड में आयोजित सार्क देशों के सम्मेलन में इस प्रस्ताव का समर्थन किया गया। इसके लिये 26 जून 2007 को एक अंतरराष्ट्रीय समिति का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष के रुप में नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को मनोनीत किया गया।

राज्यसभा में पेश विधेयक के अनुसार यह विवि पीपीपी माडल के तहत काम करेगा,लेकिन इसका उद्देश्य मुनाफ़ा कमाना नहीं होगा। भारत के राष्ट्रपति इसके विजिटर होंगे तथा वे किसी अन्य को विजिटर मनोनीत कर सकेंगे। इस विवि के संचालन की जिम्मेवारी एक एकेडमिक काऊंसिल करेगी। इस संचालन समिति में चांसलर, कुलपति तथा सदस्य देशों के पांच सदस्य शामिल होंए। इसके अलावे विदेश मंत्रालय के सचिव स्तर के एक अधिकारी, बिहार सरकार द्वारा मनोनीत दो प्रतिनिधि, केंद्रीय मानव संसाधन विकास विभाग का एक अतिरिक्त सचिव स्तर का अधिकारी आदि शामिल होंगे।

अनुचित है उद्यमियों पर बिजली बोर्ड की ज्यादती – सिन्हा

बिहार राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा कामर्शियल बिजली उपभोक्ताओं के लिये प्रति यूनिट 69 पैसे के दर से ईंधन अधिभार वसूल किये जाने के निर्णय से तिलमिलाये राज्य के उद्यमियों और व्यावसायियों ने संयुक्त बैठक कर इस निर्णय के खिलाफ़ एक स्वर में विरोध किया है। संभवतः यह पहला मौका है जब राज्य के उद्यमियों और व्यवसायी वर्ग ने एक साथ राज्य सरकार के किसी निर्णय का विरोध किया है।

विदित है कि बिहार राज्य विद्युत विनियामक आयोग द्वारा दिनांक 30 मार्च 2010 और 19 मई 2010 को जारी आदेश में बिहार राज्य विधुत बोर्ड को किसानों, बीपीएल परिवारो और कुटीर उद्योगों को छोड़कर शेष सभी प्रकार के उपभोक्ताओं को 69 पैसे प्रति यूनिट की दर से ईंधन अधिभार वसूलने का निर्देश दिया था।

बैठक में अपने मुख्य संबोधन में बिहार इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रसाद सिन्हा ने कहा कि आयोग को कोई भी निर्णय लेने से पहले बिहार के उन उद्यमियों और व्यवसायियों से विचार-विमर्श करना चाहिये था, जिनके प्रयासों के कारण आज बिहार में उद्योगों की संभावनायें दिख रही हैं। इन्होंने यह भी कहा कि एनटीपीसी द्वारा एक खास अवधि तक अन्य श्रोतों से कोयला खरीदे जाने कारण ईंधन मद में वृद्धि के बाद अब वर्तमान में ईंधन अधिभार वसूला जाना न्यायसंगत नहीं है।

इस अवसर पर बिहार चैम्बर आफ़ कामर्स के अध्यक्ष पी के अग्रवाल ने कहा कि एक लम्बी अवधि के बाद राज्य में सकारात्मक माहौल बना है। इस परिस्थिति में जबकि अभी रुग्ण उद्योगों को सजीव बनाने और नये उद्यमियों को विशेष सहायता दिये जाने की आवश्यकता है, बिजली बोर्ड द्वारा मनमाने ढंग से ईंधन अधिभार वसूले जाने से विकास की गति पर विराम लगा सकता है।

आईटी उद्योग के लिये बिहार सबसे बेहतर

राज्य सरकार ने पिछले साढे चार सालों में आईटी के क्षेत्र में स्वान(स्टेट वाईड एरिया नेटवर्क), डाटा केंद्र और वसुधा केंद्र जैसी अनेक योजनाओं का सफ़लतापूर्वक क्रियान्वयन कर यह साबित कर दिया है कि आईटी उद्योग के बिहार सबसे बेहतर विकल्प है। इस सच्चाई को अब देश की कई जानी-मानी आईटी कंपनियों ने भी मान लिया है। ये बातें राज्य के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डा अनिल कुमार ने होटल मौर्या में आयोजित ई-गवर्नेंस समिट के अवसर पर अपने संबोधन में कहीं।

इस अवसर पर आईटी के क्षेत्र में बिहार में संभावना विषयक विशेष रिपोर्ट को जारी करते हुए डा कुमार ने बताया कि बिहटा में आईटी पार्क के लिये राज्य सरकार द्वारा एक एकड़ जमीन और दो करोड़ रुपये दिये जा चुके हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री डा शकील अहमद के विशेष पहल पर यह पार्क बन भी चुका है लेकिन वर्तमान केंद्रीय यूपीए सरकार के टालमटोल की नीति के कारण अभी इसे सुचारु नहीं किया जा सका है। इन्होंने यह भी बताया कि राज्य में दूसरा आईटी पार्क बोधगया में खोला जायेगा। हांलाकि राज्य सरकार के विभागीय मंत्री इस बात को भूल गये कि बिहटा में आईटी पार्क नहीं, बल्कि आईआईटी कैम्पस का निर्माण किया गया है।

राज्य में आईटी पालिसी के सवाल पर डा अनिल कुमार ने बताया कि पिछले साल नवंबर माह से ही आईटी पालिसी का प्रारुप मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अवलोकन के लिये प्रेषित किया जा चुका है। डा कुमार को विश्वास है कि जल्द ही इस पालिसी को कैबिनेट की बैठक में लाया जायेगा और इसपर मुहर लग जायेगी। इससे पहले अपने संबोधन में विभागीय प्रधान सचिव डा अरुण कुमार सिंह ने आईटी के क्षेत्र में बिहार सरकार द्वारा किये गये कार्यों की सविस्तार जानकारी दी।

इस अवसर पर प्रोग्नोसिस समूह के सीईओ संदीप रंजन ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि बिहार ने देर से ही सही, लेकिन पिछले साढे चार सालों में इसने देश के अन्य राज्यों से अपेक्षाकृत अधिक तरक्की की है। अपने संबोधन में बिहार आईटी एसोशिएसन के अध्यक्ष प्रभात कुमार सिन्हा ने राज्य में आईटी पालिसी के शीघ्र मंजूरी की आशा व्यक्त की। इन्होंने कहा कि देरी के बावजूद बिहार में ई-गवर्नेंस को अत्याधिक गुणवत्तापूर्वक तरीके से क्रियान्वित किया गया है, जो पूरे देश में एक मिसाल है।