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अपना बिहार निष्पक्षता हमारी पहचान
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ट्रेजरी घोटाले की सुनवाई शुरु राज्य में 11412 करोड़ रुपये के ट्रेजरी घोटाले की सुनवाई कल शुरु हुई। राज्य के मुख्य सचिव अनूप मुखर्जी की याचिका पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है। सुनवाई आज भी जारी रहेगी। पटना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रेखा मनहर लाल दोशित और न्यायाधीश एस के कटरियार की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। राज्य सरकार की ओर से उच्चतम न्यायालय के वरीय अधिवक्ता एल नागेश्वर राव ने अदालत को बताया कि चुंकि महालेखाकार की रिपोर्ट विधानसभा के लोक लेखा समिति के समक्ष विचाराधीन है। इस परिस्थिति में यह मामला न्यायालय में नहीं चलाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के प्रावधानों के तहत सीएजी की रिपोर्ट लोक लेखा समिति की संपत्ति होती है और जबतक लोक लेखा समिति द्वारा इसपर कार्रवाई का निर्देश न दे उसपर कार्रवाई संभव नहीं है। अतः सीएजी की रिपोर्ट को आधार बनाकर कोई कार्रवाई न्यायोचित नहीं है। अदालत को यह भी बताया गया कि यह मामला केवल राजग शासनकाल का ही नहीं, बल्कि 2002 से 2008 तक संबंधित है। जबकि नीतीश सरकार वर्ष 2005 में सत्तासीन हुई थी। इसलिये केवल नीतीश सरकार को आरोपित किया जाना सही प्रतीत नहीं होता है। श्री राव ने कहा कि यह मामला राजनीति से प्रेरित होता है। साथ ही प्रसिद्धी हासिल करने का तरीका भी हो सकता है। राज्य के महाधिवक्ता पी के शाही ने अदालत को बताया कि महालेखाकार की रिपोर्ट में कहीं घोटाले का जिक्र नहीं किया गया है, बल्कि वर्ष 2002 से 2008 तक हुए विभिन्न सरकारी योजनाओं में हुए व्यय का खर्च या डीसी बिल का ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराने का जिक्र किया गया है। उन्होंने अदालत तो बताया कि मनरेगा सहित विभिन्न योजनाओं में हुई अनियमितता के संबंध में राज्य सरकार अपने स्तर से कार्रवाई कर रही है। अदालत को यह भी बताया गया कि राज्य सरकार की ओर से अबतक 4 हजार करोड़ रुपये का डीसी बिल जमा कर दिया गया है। हाईकोर्ट से संबंधित 40 लाख का डीसी बिल भी अभी तक जमा नहीं किया गया। महाधिवक्ता श्री शाही ने बताया कि सरकार को वक्त दिया जाना चाहिये ताकि वह लंबित विपत्रों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर सके और जब संतुष्ट न हो तो आगे कार्रवाई कर सकती है। अदालत को यह भी बताया गया कि एक जनहित याचिका के आधार पर ही बिना प्रतिवादी को जवाब का मौका दिये बगैर सीबीआई जांच का आदेश दे दिया गया जो न्यायोचित नहीं है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि अनेक राज्यों में भी डीसी बिल लंबित हैं, लेकिन उन राज्य सरकारों पर कोई कार्रवाई नहीं किया गया है। अदालत में राज्य सरकार का बचाव कर रहे वकीलों का वक्तव्य और सच्चाई कल पटना उच्च न्यायालय में राज्य सरकार के वकीलों द्वारा राज्य सरकार को बचाने हेतु दिये गये दलीलों की सच्चाई क्या है, इस संबंध में प्रस्तुत है अपना बिहार की विशेष रिपोर्ट :-
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