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Text Box: बिहार के महानायक

स्व डा मोहन राय

राजधानी में व्यवसायियों पर जान बचाने का संकट

जी हां, राज्य में अप्रराध नियंत्रण का दावा उस समय झुठा साबित हो गया जब अपराधियों ने कल दिनदहाड़े एक व्यवसायी शैलेश कुमार के घर में घुसकर गोली मार दी और फ़िर बड़े आराम से चलते बने। प्राप्त जानकारी के अनुसार राजधानी पटना के इंद्रापुरी इलाके में हरनौत के मूल निवासी एवं किराना व्यवसायी शैलेश कुमार के इंद्रपुरी रोड नंबर 2 में अवस्थित आवास में अपराधी घर में घुसकर शैलेश पर गोलीबारी शुरु कर दिया। इस घटना में शैलेश को चार गोलियां लगीं और उनकी मौत घटनास्थल पर ही हो गई। इस घटना की पुष्टि करते हुए पाटलिपुत्रा थाना प्रभारी गदाधरनाथ मिश्र ने बताया कि इस मामले की तहकीकात चल रही है।(पट्ना से नवल की रिपोर्ट)

 

व्यवसायियों ने खोली ई-फ़ाईल की पोल

राज्य सरकार आगामी 15 जुलाई से राज्य में ई-फ़ाईल को अनिवार्य बनाने जा रही है। इस आशय की जानकारी राज्य के कामर्शियल टैक्स के कमिश्नर एस मजुमदार ने बिहार चैम्बर आफ़ कामर्स के तत्वावधान में आयोजित एक कार्यशाला में दी। इन्होंने बताया कि जो व्यवसायी आगामी 15 जून के ई-फ़ाईल प्रणाली के द्वारा अपने करों का भुगतान नहीं करेंगे, उनपर आर्थिक जुर्माना भी किया जायेगा।

वहीं दूसरी ओर कार्यशाला में उपस्थित व्यवसायियों ने राज्य सरकार के प्रयास् को अधूरा बताते हुए साबित कर दिया कि इसमें अनेक खामियां हैं, जिनका निराकरण किए बगैर इसे अनिवार्य बनाना न्यायसंगत नहीं होगा। बिहार चैम्बर आफ़ कामर्स के सदस्य एस एस खदरिया ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में इन्ट्री टैक्स और सेवा करों के प्रविष्टियों को दर्ज करने की सूविधा प्रदान नहीं की गई है। श्री खदरिया के इस आशंका के उत्तर में पहले तो कार्यशाला में आये सरकारी अधिकारियों ने बंगले झांकना शुरू कर दिया और मिट्टी पलीद होते देख कामर्शियल टैक्स के कमिश्नर एस मजुमदार ने आश्वासन दिया कि अगले 3 माह के अंदर इस असूविधा को दूर कर लिया जायेगा। श्री खदरिया यही नहीं रूके। इन्होंने यह भी बताया कि सीएसटी और वैट को अलग-अलग एडजस्ट किये जाने की सूविधार सरकारी अधिनियम में प्रावधान किया गया है, तब विभाग द्वारा प्रस्तावित ई-फ़ाईल में एक साथ दर्शाने की अनिवार्यता न केवल अधिनियम के विरुद्ध है बल्कि अप्रायोगिक भी है। इस खामी के संबंध में भी श्री मजुमदार ने 10 से 15 दिनों का समय मांगा।

इससे पहले सरकारी अधिकारियों ने कार्यशाला में उपस्थित व्यवसायियों को लाईव डेमो के माध्यम से ई-फ़ाईल की पुरी प्रक्रिया के बारे में बताने का प्रयास किया। परंतु शुरूआत में ही एक तकनीकी समस्या के कारण सरकारी अधिकारियों की हालत पतली हो गई जब एक अन्य सदस्य प्रवीन रमण ने बताया कि जो फ़ार्मेट उपलब्ध कराया गया है वह एक्सेल का है और इसमें प्रविष्टियों को दर्ज करने के बाद इसे सीएसवी फ़ार्मेट में संरक्षित करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में ॠणात्मक आंकड़े दर्ज नहीं हो पाते हैं, इसलिये इसे उचित नहीं माना जा सकता है। इस संबंध में श्री मजूमदार ने पहले तो यह कहकर टालने का प्रयास किया कि रिटर्न भरते समय कोई भी आंकड़ा ॠणात्मक नहीं होता है, लेकिन जब सदस्यों ने यह साबित कर दिया तब सिवाय झेंपने के श्री मजूमदार के पास कोई चारा नहीं था।

कार्यशाला के प्रारंभ में बिहार चैम्बर आफ़ कामर्स के अध्यक्ष पी के अग्रवाल ने विषय प्रवेश कराते हुए राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-फ़ाईल की खूबियों का बखान किया। लेकिन साथ ही इन्होंने यह भी कहा कि जबतक इसमें व्याप्त खामियों को दूर नहीं कर लिया जाता है, तबतक इसे अनिवार्य बनाना तर्कसंगत नहीं है। बताते चलें कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत राज्य के व्यवसायियों को दोहरी जिम्मेवारी का निर्वाह करना होगा। पहला तो यह एसबीआई के द्वारा सारे करों का भुगतान करना होगा तथा इससे पहले सारे विपत्रों को इन्टरनेट के माध्यम से प्रेषित करना होगा और दूसरी जिम्मेवारी सारे विपत्रों की हार्ड कापी भी जमा करना होगा। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि डिजिटल सिग्नेचर की व्यवस्था नहीं की गई है। इस संबंध में कामर्शियल टैक्स के कमिश्नर ने 9 महीने का समय मांगा। (पटना से नवल की रिपोर्ट)

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