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मोदी की तस्वीर पर सरकार की नजर : विश्वासघात बंद के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर वाला बैनर भाजपा कार्यकर्ताओं से छीनती बिहार पुलिस बाढ ने दिया दस्तक, गंडक के जलस्तर में तेजी से वृद्धि पटना(अपना बिहार, 19 जून 2013) – मानसून के आते ही बाढ ने सूबे में दस्तक दे दिया है। जहां एक ओर गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है वहीं कोशी नदी भी उफ़ान मारने लगी है। गंडक नदी में जलस्तर बढने के कारण दियारा इलाके में पानी तेजी से गांवों में फ़ैलने लगा है। पिपरासी प्रखंड के दर्जनों गांव टापू बन गये हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं। वही दोन क्षेत्र में भलुई नदी पर बनाया गया गाइड बांध पानी के तेज बहाव को बर्दाश्त नहीं कर सका। कल उसके टूट जाने का समाचार प्राप्त हुआ है। पूर्वी चंपारण में 9 वर्षीया मासूम के साथ दुष्कर्म, आरोपी गिरफ़्तार पटना(अपना बिहार, 19 जून 2013) – पूर्वी चंपारण के मेहसी थाना के एक गांव में वहशी दरिंदे ने 9 वर्षीया मासूम को अपना शिकार बनाया। मिली जानकारी के अनुसार पीड़िता सोमवार की रात शौच के लिए घर से बाहर निकली। गांव के ही मो इरफ़ान ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ अपना मुंह काला किया। जैसे ही घटना की जानकारी पीड़िता ने अपने परिजनों को दी, परिजन आक्रोशित हो गये। परिजनों ने आरोपी के घर पहूंचकर उसके पिता इस बात की शिकायत की। आरोपी के पिता ने पीड़िता के परिजनों के साथ दुर्व्यवहार किया। बाद में पीड़िता के फ़र्द बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी और पुलिस ने आरोपी मो इरफ़ान और उसके पिता को गिरफ़्तार कर लिया। विश्वास मत के दौरान होगा दिलचस्प मुकाबला , जदयू के दो दर्जन विधायक अब भी नीतीश से नाराज पटना(अपना बिहार, 19 जून 2013) – आज बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार विश्वास मत का प्रस्ताव पेश करेंगे। बताते चलें कि पिछले दिनों सोलह जून को उन्होंने राज्य की सत्ता से भाजपा को अलग करते हुए भाजपा के सभी 11 मंत्रियों को बर्खास्त करने की सिफ़ारिश राज्यपाल डा डी वाई पाटिल से किया था, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया था। श्री कुमार ने आज के दिन विश्वास मत हासिल करने का दावा किया था और इसके लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। आज के दिन विधानसभा में विश्वास मत का मुकाबला दिलचस्प होने का अनुमान है। दिलचस्प इसलिए कि बहमत हासिल करने के लिए जदयू को कागजी तौर पर कुल 122 विधायक चाहिए। वर्तमान में उसके पास 118 विधायक मौजूद हैं। तथाकथित तौर पर जदयू ने 4 निर्दलीय विधायकों को अपने पाले में कर लेने में सफ़लता हासिल कर लिया है। इसके अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भी अपना एकमात्र वोट नीतीश कुमार को देने का निर्णय लिया है। पार्टी के राज्य सचिव राजेंद्र सिंह के अनुसार भाजपा से अलग होने के बाद जदयू सेक्यूलर पार्टी बन गयी है और इस कारण उसके साथ खड़े होने में कोई बुराई नहीं है। बताया जा रहा है कि जदयू को लोजपा के एकमात्र विधायक विधायक का भी वोट मिलेगा। इस प्रकार कागजी तौर पर जदयू के पास पर्याप्त बहुमत है। लेकिन इस मुकाबले की दूसरी तस्वीर यह भी है कि भाजपा के 91 विधायक, राजद के 22 और दो निर्दलीय सरकार के खिलाफ़ वोट करेंगे। इस मुकाबले में सब्से अहम जानकारी यह कि जदयू के करीब दो दर्जन विधायक अपने पार्टी के सर्वेसर्वा यानी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नाराज चल रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जदयू के ये विधायक अपने ही दल के खिलाफ़ विधानसभा में वोट करेंगे। हालांकि सूबे के राजनीतिक विश्लेषक इसे कोरी कल्पना करार दे रहे हैं। बहरहाल, परिणाम चाहे कुछ भी हो। विश्वास मत के दौरान लंबे समय के बाद विपक्ष नजर आएगा। इस दौरान 3 घंटे तक गर्मागर्म बह्स का दौर भी चलेगा। निश्चित तौर पर आज जो बहस होना है, उसकी तासीर आने वाले दिनों में राजनीति के लिए महत्वपूर्ण होगी। भाजपा ने किया बंद के सफ़ल होने का दावा, नीतीश ने कहा खीस निकाल रहे भाजपाई पटना(अपना बिहार, 19 जून 2013) – विश्वासघात बंद को भाजपा नेताओं ने सफ़ल होने का दावा किया है तो दूसरी ओर जदयू के नेता इसे विफ़ल करार दे रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो भाजपा नेताओं पर सहानुभूति जताने के बहाने करारा वार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद अपना खीस निकाल रहे हैं। शुरु-शुरु में ऐसा होता है। बाद में उन्हें इसकी आदत हो जाएगी। उधर भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने बंद की सफ़लता के लिए बिहार की जनता को बधाई देते हुए कहा कि बंद के दौरान बिहार की जनता ने सरकार के खिलाफ़ आक्रोश का प्रदर्शन किया है। वही भाजपा के सांसद राजीव प्रताप रुडी ने कहा कि अहंकारी नीतीश कुमार को बिहार की जनता सबक सिखाएगी। जदयू-भाजपा के बीच हिंसक मुठभेड़, जदयू कार्यालय के पास हथियार रखा वाहन बरामद पटना(अपना बिहार, 19 जून 2013) – कल विश्वासघात दिवस के दौरान जदयू और भाजपा के नेता-कार्यकर्ता एक-दूसरे से भिड़ गये। दरअसल हुआ यह कि सुबह करीब दस बजे जदयू के प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन अपने समर्थकों के साथ पार्टी कार्यालय से निकले। वे भाजपा द्वारा आहूत विश्वासघात बंद का विरोध कर रहे थे। जैसे ही वे भाजपा कार्यालय के पास पहूंचे, भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध किया। देखते ही देखते दोनों के बीच का वाक युद्ध हिंसक हो गया और दोनों ने एक दूसरे पर जमकर प्रहार किया। हालांकि संख्या में अधिक होने के कारण भाजपाई जदयू कार्यकर्ताओं पर भारी पड़े और जदयू कार्यकर्ताओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। सबसे दिलचस्प यह कि करीब आधे घंटे तक पटना का वीरचंद पटेल पथ रणभूमि बना रहा और मौके पर खड़ी पुलिस मूक दर्शक बनी रही। बाद में दोनों पक्षों की ओर से एक-द्दूसरे के खिलाफ़ प्राथमिकी दर्ज कराया गया है। भाजपा की ओर से एक अल्पसंख्यक महिला ने मामला दर्ज कराया है कि जदयू के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और पीटा। इस घटना के ठीक बाद उस समय जदयू की स्थिति “काटो तो जान नहीं” वाली हो गयी जब जदयू कार्यालय के मुख्य द्वार के समीप एक वाहन में हथियार रखा पाया गया। स्थानीय सूत्रों की मानें तो जदयू की ओर से बदला लेने की तैयारी थी। लेकिन इससे पहले कि जदयू के दबंग अपनी दबंगता का प्रदर्शन करते स्थानीय मीडिया की नजर पड़ गयी और दबंग अपना मुंह छिपाकर भाग निकले। मौके पर पहूंची पटना पुलिस ने गाड़ी को अपने कब्जे में लिया। बाद में पुलिस ने जानकारी दी कि जब्त की गयी गाड़ी जदयू के गोपालगंज के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मुन्ना पटेल की है। बहरहाल, भाजपा ने हिंसात्मक झड़प के लिए नीतीश कुमार को जिम्मेवार ठहराया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय ने कल संवाददाताओं को बताया कि नीतीश कुमार के इशारे पर ही जदयू के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाजपा के कार्यकर्ताओं पर हमला किया। वहीं इस मामले में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि भाजपा के लोग जलन के मारे उन्मादी हो गये हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे घटना के समय कार्यालय में होते तो अपने दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं को ऐसा करने से जरुर रोकते। काम पर लौटते ही ललन सिंह ने किया भाजपा पर वार पटना(अपना बिहार, 19 जून 2013) – जदयू में घर वापसी करने के बाद कल सांसद राजीव रंजन सिंह ऊर्फ़ ललन सिंह ने भुमिहार धर्म का पालन करते हुए भाजपा पर पहला वार किया। श्री सिंह ने भाजपा पर कैलाशपति मिश्रा का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कैलाशपति मिश्रा ने ही बिहार में भाजपा को स्थापित किया था। लेकिन भाजपा के लोगों ने उन्हें जीते जी अपमानित किया था। इसी अपमान के कारण वे पटना नहीं रहना चाह्ते थे। विधायकों को धमका रहे नीतीश : लालू पटना(अपना बिहार, 19 जून 2013) – विश्वासमत पाने के लिए जदयू के विधायकों को डरा रहे हैं नीतीश। इस आशय की जानकारी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कल संवाददाता सम्मेलन में दी। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अपने दल के विधायकों और निर्दलीय विधायकों को डरा रहे हैं कि अगर सरकार के पक्ष में वोट नहीं किया तो वे विधानसभा भंग कर देंगे। श्री प्रसाद ने नीतीश कुमार को चुनौती दी कि अगर वाकई उनमें हिम्मत है तो वे विधानसभा भंग करें। जनता उन्हें सबक सिखाने को तैयार है। श्री प्रसाद ने कहा कि उनकी पार्टी ने विधानसभा में राज्य सरकार द्वारा पेश किये जाने वाले विश्वास मत का विरोध करने का निर्णय लिया है। राजद ने हमेशा ही नीतीश कुमार की सरकार का विरोध किया है और पिछले महीने परिवर्तन रैली के दौरान पार्टी ने सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया था। यह पूछे जाने पर कि क्या वे नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने में भाजपा का साथ देंगे। श्री प्रसाद ने कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनकी पार्टी के किसी नेता सरकार गिराने की कोई बात कही है। विधानसभा में विश्वासमत सरकार के द्वारा लाया जा रहा है और इसलिए उनकी पार्टी के विधायक विधानसभा में सरकार के खिलाफ वोट देंगे। श्री प्रसाद ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि दोनों चचेरे भाई हैं जो 8 वर्षों तक बिहार में रासलीला कर रहे थे और अब रामलीला कर रहे हैं। भाजपा द्वारा आहूत विश्वासघात बंद के दौरान भाजपा और जदयू समर्थकों के बीच हुई हिंसक झड़प के संबंध में श्री प्रसाद ने कहा कि इस घटना ने साबित कर दिया है कि दोनों दलों के नेताओं में किस तरह का अनुशासन है। उन्होंने इस घटना के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेवार ठहराते हुए कहा कि लोकतंत्र में किसी को भी विरोध करने और आंदोलन करने का अधिकार है। यदि कोई आंदोलन के नामपर अनैतिक या गलत करता है तो सरकार में प्रशासन की व्यवस्था है। यह प्रशासन की जिम्मेवारी है कि वह कानून व्यवस्था बनाये रखे। लेकिन नीतीश कुमार ने अपने दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं को सड़क पर लड़ने के लिए उतार दिया। राजद सुप्रीमो ने कहा कि जदयू कार्यालय के पास हथियार से भरी गाड़ी का बरामद होना साबित करता है कि सत्ता में बने रहने के लिए जदयू के नेता किसी भी हद तक जा सकते हैं। श्री प्रसाद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों लालकृष्ण आडवाणी के तोता हैं। दोनों ने आडवाणी के कहने पर ही भाजपा को अलग किया। उन्होंने कहा कि एक अंग्रेजी अखबार को दिये साक्षात्कार में शरद यादव ने कहा है कि अगर भाजपा लालकृष्ण आडवाणी को अपना नेता मान ले तो जदयू भाजपा के साथ वापस एनडीए में शामिल हो सकता है। श्री प्रसाद ने आरोप लगाते हुए कहा कि शरद यादव ने लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार करने से मना किया था। उस समय केंद्र में मुफ्ती मोहम्मद सईद गृहमंत्री थे। उन्होंने आडवाणी को गिरफ्तार किए जाने पर सहमति दे दी थी, लेकिन शरद यादव ने फोन कर उन्हें गिरफ्तार नहीं करने की बात कही थी। लेकिन बतौर मुख्यमंत्री मैंने अपने राज्य के हित को प्राथमिकता दी और आडवाणी को रोका। राजद सुप्रीमो ने कहा कि यह बिहार और देश की जनता जानती है कि किसने दंगाई लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार किया और किसने सिताबदियारा में उनके रथयात्रा को हरी झंडी दिखाया। राजद सुप्रीमो ने संवाददाता सम्मेलन में यह भी कहा कि देश को टूट से बचाने के लिए फासीवादी और सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता से दूर रखना आवश्यक होगा। इसके लिए पहले भी राजद ने संघर्ष किया है और भविष्य में भी करता रहेगा। प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह द्वारा नीतीश कुमार को सेकुलर कहे जाने के सवाल पर राजद सुप्रीमो ने कहा कि प्रधानमंत्री सीधे आदमी हैं और वे किसी के बारे में कड़वे वचन का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
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आईये हम सब मिलकर अपने बिहार को विकसित बिहार बनायें। |
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बिहार का पह्ला दैनिक हिंदी न्यूज पोर्टल - खबरें बिहार के सतत विकास की |
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बिहार में अपराध |
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अपना बिहार और राज्य में प्रकाशित विभिन्न अखबारों में प्रकाशित खबरों के अनुसार कल दिनांक 15 जून 2013 को घटित घटनाओं की संख्या
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गुरुवार, 19 जून 2013 |
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साहित्य में जाति की अवधारणा और प्रगतिशीलता का सच साहित्यकारों ने अपने ही मुख से स्वयं कबूला है कि यह समाज का दर्पण है। साहित्य पढ़कर ही किसी समाज की नब्ज टटोली जा सकती है। कहने वाले तो यह भी कहकर गये हैं कि जिस देश अथवा प्रांत अथवा समाज का अपना साहित्य नहीं होता है उसका अस्तित्व नहीं होता है। इस तथ्य के अनेक प्रमाण अभी भी मौजूद हैं। बतौर उदाहरण रामायण और महाभारत आज भी हिन्दू धर्म के अस्तित्व में बने रहने के प्रमाण हैं। मुगलों के शासन तक साहित्य का एक ही स्वरूप सामने था। हालांकि अपवाद के रूप में अमीर खुसरो का नाम लिया जा सकता है। कुछेक रचनाकार भी हुए हैं जिनके कारण साहित्य शासकों की जयगाथा होने के बावजूद जीवित रही। उस परिस्थिति से निकलकर साहित्य उस काल खंड तक पहूंची जब इस धरती पर कबीर और रहीम जैसे फक्कड़ जन साहित्यकार हुए। जिनकी रचनाओं ने हिन्दू धर्म के अस्तित्व पर सबसे अधिक प्रहार किया और पहली बार साहित्य अपने असली स्वरूप में सामने आया। जन साहित्य के रूप में। कबीर के दोहों में जीवन की सच्चाई थी और रहीम के दोहों ने समरस समाज बनाने की अभिलाषा। इन दोनों का प्रहार हिन्दू धर्म के लिए कितना मारक था इसका अनुमान इसी मात्र से लगाया जा सकता है कि इसी कालखंड में इन्हीं रचनाकारों की नकल करते हुए तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना की। महाभारत आदि की साहित्यिक रचना तो बाद के कालखंडों में तब हुई जब रामायण के जरिए ब्राहम्ण समाज अपने मकसद में कामयाब हो गया। इसके बाद जब देश अंग्रेजों का गुलाम बना और अंग्रेजों ने साहित्य व संस्कृति पर कब्जा कर ब्राह्म्णों के बौद्धिक वर्चस्व को चुनौती दे दी तब साहित्य को सरल बनाने की दिशा में पहल किया गया। जन सामान्य बनाने की कोशिशें शुरू हुई। ये कोशिशें केवल भाषायिक स्तर पर ही शुरू नहीं हुआ बल्कि सामाजिक स्तर पर भी हुआ। कहानियों के नायक-नायिका और अन्य पात्रों में दलितों और पिछड़ों को भी जगह दी गयी। भारतेंदु हरिश्चंद्र की खड़ी हिन्दी ने असरकारक भूमिका का निर्वहन करते हुए हिन्दी साहित्य को समाज में स्थापित किया। उन दिनों जब देश में तथाकथित प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की तैयारी चल रही थी तब शासकों ने यह महसूस किया कि अब केवल रोटी-बेटी के संबंध से ही काम नहीं चलेगा। अब एक दूसरे की भाषाओं को भी स्वीकारना होगा। नतीजा यह हुआ कि हिन्दी और ऊर्दू दोनों बहनें बन गयीं और साहित्यकारों ने जमकर अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ साहित्य का सृजन किया। प्रेमचंद भी इसी कड़ी के हिस्सा साबित हुए। उनकी रचनाओं में यही बेचैनी रही कि समाज में सवर्णों की स्वीकार्यता कैसे बढ़े। रामधारी सिंह दिनकर की कवितायें तो कभी भी भुमिहारवाद की परिभाषा से बाहर निकल ही नहीं सकी। बाबा नागार्जुन ने विद्रोह करने का सफल प्रयास किया जिसे अपवाद की संज्ञा दी जा सकती है। रेणु जी आजीवन सवर्ण समाज द्वारा पिछड़ी व अपेक्षाकृत संपन्न जातियों के उपर किये जाने वाले हमलों को अपनी पीठ पर सहते नजर आये। ूउसके बाद की पीढ़ी तो मानों सो गयी है। प्रगतिशीलता के नाम पर अनेक प्रयोग किये जा रहे हैं। दलित साहित्य अपनी पूरी ताकत के साथ सामने आया है लेकिन यह भी अपनी सीमाओं में बंधा है। ओबीसी साहित्य अभी शैशवास्था में है ऐसा कहना शायद इसके साथ न्याय नहीं होगा, लेकिन जब इस समाज के लोग ही इसके अस्तित्व पर सवाल उठायें तो कहना अतिश्योक्ति नहीं कही जायेगी। बहरहाल, साहित्य में एक बार फिर शासक, बाजार और ब्राह्म्णवाद का वर्चस्व है। मेरी नजर में यह प्रगतिशीलता नहीं है। यह तो बीते युग में वापसी के समान है। इस भय के कारण कि कहीं बहुसंख्यक आबादी अब अपनी बौद्धिक सत्ता न हासिल कर ले। बेहतरी इसी में है कि स्वयं को प्रगतिशील कहने वाले समाज के साथ चलें और लोगों को अपनी बात अपनी जुबान में अपने तरीके से कहने दें। बेहतरी इसलिए भी कि यदि ऐसा न हुआ तो निश्चित तौर इसका नुकसान हिन्दी साहित्य को उठाना पड़ेगा। माज खान की विशेष रिपोर्ट - नीतिश के सुशासन में यह क्या हो रहा है? बिहार में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है. नीतिश कुमार अपने सेक्यूलर छवि पर किसी भी तरह का दाग़ लगने नहीं देना चाहते. चाहे इसके लिए उन्हें अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा भी देना पड़े. लेकिन अल्पसंख्यक प्रेम की हामी भरने वाले नीतिश के सुशासन में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार जारी है. एक ऐसी ही कहानी से आपको रूबरू कराने जा रहे हैं… बिहार के वैशाली ज़िले के महुआ मकनपूर की विधवा ज़ाहिदा खातून इन दिनों काफी परेशान है. दरअसल, उनकी ज़मीन पर भू-माफिया पुलिस के गठजोड़ से कब्जा करने की ताबड़तोड़ कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उन्हें जब कोई सफलता नहीं मिली, तब पहले तो इन्हें डाराया-धमकाया. फिर पुलिस की मदद से उन्होंने ने ज़ाहिदा खातून समेत उनके बेटों पर झूठे मुक़दमें दर्ज करा दिए. हर मामले में सुस्त रहने वाली बिहार पुलिस इस मामले में चुस्त नज़र आने लगी. इन्होंने भी इस विधवा को परेशान करना शुरू कर दिया. जबकि ज़ाहिदा खातून पिछले 20 सालों से अधिक समय से यहां रह रही है. इस बंजर ज़मीन को इसने अपने खून-पसीने से सींचकर खेती के लायक बनाया और इस पर अब वो खेती-बाड़ी करती है. समय के साथ आज जब बिहार में ज़मीन की कीमत बढ़ती जा रही है, जिसके कारण भू-माफियाओं की नज़र इस ज़मीन पर पड़ गई और फिर उन्होंने इस विधवा को धमकी देना शुरू कर दिया. इसकी शिकायत ज़ाहिदा खातून ने पिछले दिनों अप्रैल महीने में वहां वर्तमान एसपी, डीएसपी सहित तमाम बड़े प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर दी ताकि इन भू-माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाए. लेकिन कार्रवाई तो दूर इन भू-माफियाओं ने पुलिस के गठजोड़ से दर्जनों की संख्या में गुंडों के साथ इस विधवा के घर पर हमला कर दिया. इस हमले में ज़ाहिदा खातून सहित उनकी बहू और बेटे को लहूलुहान हो गए. जिन्हें बाद में एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया. दूसरी तरफ, इतना कुछ होने के बाद भी पहले तो पुलिस एफआईआर दर्ज करने से इनकार करती रही, लेकिन हल्ला-हंगामा ज़्यादा होने पर न चाहते हुए भी उन्हें एफआरआर दर्ज करनी पड़ी. लेकिन पुलिस ने किसी की गिरफ्तारी नहीं की. इसके दूसरे दिन भू-माफियाओं ने ज़ाहिदा खातून व उनके बेटों के खिलाफ एक फर्जी मुक़दमा हरीजन एक्ट के तहत दर्ज कराया, जिस पर हमारी इसी पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया. 10 जून को ज़ाहिदा खातून के बेटे महताब आलम और मोहम्मद लाडले को गिरफ्तार करके सलाखों के पीछे डाल दिया गया. ज़ाहिदा खातून कहती हैं कि मेरे पास सारे कागजात मौजूद हैं जिसे एसडीएम सहित जहां भी ज़रूरत पड़ी, वहां देखा चुकी हूँ. लेकिन पुलिस ने कभी भी मेरा साथ नहीं दिया. बल्कि वो अब भी यह भू-माफियाओं के साथ मिलकर जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं. उनका कहना है कि उन्होंने हमारे घर के लड़कों को झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेजवा दिए हैं. अब हमारे घर में सिर्फ दो औरतें ही बची हैं. आगे बोलते-बोलते ज़ाहिदा खातून की आंखें नम हो जाती हैं. वो बहुत मायूसी के साथ कहती है कि ऐसा लगता है कि सरकार के सभी अधिकारियों को खरीदा जा चुका है. सच्चाई सुनने को कोई तैय्यार नहीं है. इन सबके बावजूद वो अपनी हार मानने को तैय्यार नहीं हैं. वो मानती हैं कि यह इंसाफ की लड़ाई है और वो इस लड़ाई को आखिरी सांस तक लड़ेंगी. उन्होंने अपनी बात भारत सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय, गृह सचिव (बिहार सरकार), पुलिस आयुक्त (बिहार) सहित ज़िला स्तर के सभी अधिकारियों से न्याय की गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन कहीं से कोई उम्मीद अभी नज़र नहीं आ रही है. इस संबंध में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के. रहमान खान के पास भी एक शिकायत भी दर्ज कराई गई थी जिसपर मंत्रालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बिहार सरकार को इससे आगाह किया है. लेकिन इसके बावजूद सरकार खामोश बैठी हुई है और पुलिस की तनाशाही बदस्तूर जारी है… आखिर में इस विधवा के निगाहें नीतीश कुमार की ओर देख रही हैं. उनका कहना है कि सुना है नीतीश कुमार न्याय प्रिय हैं वो निश्चित रूप से उनके साथ न्याय करेंगे. उन्होंने नीतीश कुमार से मांग की कि वो एसआईटी से पूरे मामले की जांच कराए. लेकिन अब देखना यह है कि अल्पसंख्यक प्रेम का दावा करने वाले नीतीश कुमार इस विधवा की मदद कैसे करते हैं… तुम कहते हो तो मैं मान लेता हूं कि हम इंसान नहीं विषधर हैं। पेट में अनाज का दाना नहीं रहने को न घर न जमीन जंगल पर भी तुम्हारा ही कब्जा है तुम कहते हो तो मैं मान लेता हूं कि हम इंसान नहीं विषधर हैं। मेरे एक हाथ में बंदूक है दूसरे में बम के गोले और बारूद जैसे तुम्हारे नंग धड़ंग देवी-देवताओं के आधा दर्जन हाथों में होते हैं तीर धनुष चक्र कृपाण और हमारा कटा हुआ एक सिर तुम कहते हो तो मैं मान लेता हूं कि हम इंसान नहीं विषधर हैं। तुम हमें रोज मारते हो कभी खेत में कभी बीच चौराहे पर अपने शाही दरबार में रोज हमारा हक मारते हो हमारे बच्चे भूख से बिलबिलाते हैं तुम मजे से छप्पन भोग लगाते हो तुम सदियों से ऐसा करते रहे हो हमने कभी कोई विरोध किया? तब भी अगर तुम कहते हो तो मैं मान लेता हूं कि हम इंसान नहीं विषधर हैं। |


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जयपुर के “भद्र” पुरोहित और उनकी दलीलें - जाबिर हुसेन, पूर्व राज्यसभा सांसद सह वरिष्ठ साहित्यकार |
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विशेष रिपोर्ट |


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झंडे केवल प्रतीक नहीं होते। वे निर्जीव होते हुए भी सजीव होते हैं। कारण झंडे के प्रति मनुष्य का लगाव होता है। फ़िर चाहे वह किसी देश का झंडा हो, जाति समुदाय या फ़िर दल का। कपड़े का एक टुकड़ा भावनाओं को अभिव्यक्त करता है। मंगलवार को सबकुछ बदला बदला सा था। सड़कों पर छोटी-बड़ी गाड़ियां आ जा रही थीं। आम दिनों की तरह सड़कों पर गाड़ियों की चिल्लम-पों नहीं थी। पटना के हृदयस्थली डाकबंगला चौराहे का नजारा सबसे अलग था। सड़क पर वे लोग बैठे थे जो दो दिनों पहले तक राज्य सरकार में साझेदार थे। कोई भाजपा कार्यकर्ता नीतीश कुमार मुर्दाबाद के नारे लगा रहा था तो कोई नीतीश कुमार के झंडे को अपने पैरों से रौंद रहा था। बीच सड़क सूबे के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सड़क पर बैठे थे। देखने वाले कह रहे थे कि यह तो आज वाले मोदी नहीं लालू राज वाले मोदी हैं। उनके अनुसार जब सूबे में लालू की सरकार थी तब सुशील मोदी ऐसे ही नजर आते थे। सड़क पर। आम जनता के साथ। चाहे वह बिजली की समस्या हो या फिर राजेंद्रनगर और कंकड़बाग के इलाके में जलजमाव की समस्या। मोदी जी ऐसे ही जनता के साथ खड़े नजर आते थे। जो लोग इस बात से भली भांति परिचित नहीं थे कि जदयू और भाजपा में वाकई में तलाक हो गया है वे यह दृश्य देखकर आश्चर्य कर रहे थे। एक नौजवान ने तो मोदी जी को देखकर उनके सामने ही कह दिया। अरे ई तो मोदी जी जमीन पर बैठे हैं। मोदी जी से पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय, सांसद राजीव प्रताप रूडी, शाहनवाज हुसैन और विधायक नीतिन नवीन सहित भाजपा के अनेक कद्दावर नेता सड़क पर उतरे। नीतीश कुमार के विरोध में नारे लगाये और फिर डाकबंगला चौराहे पर बैठ गये। जनता देखकर दांतों तले उंगली दबाती रही और मौके पर खड़े पुलिस वाले भी चुपचाप खड़े थे। जितने मुंह उतनी बातें। कोई पुलिस वाला कहता कि नीतीश कुमार ने यह गलत किया है। उसे उसकी सजा जरूर मिलेगी। आदमी को इतना अधिक घमंड नहीं करना चाहिए। कैसे दोनों मिलकर अच्छा कर रहे थे। कोई पुलिस वाला कहता कि अब लगता है कि बिहार फिर से दस साल पीछे चला गया है। बहरहाल, डाकबंगला चौराहे के आसपास की दुकानें बंद रहीं। मौर्यलोक परिसर की दुकानें भी दोपहर तक बंद रही। जैसे-जैसे दिन ढलता गया और भाजपा कार्यकर्ता सड़क से गायब होने लगे पटनावासी सड़क पर लौटने लगे। शाम होते-होते पटना का नजारा फिर से पहले जैसा हो गया। सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही तेज हो गयी। मौर्यलोक में रोजाना लगने वाले मेले की रौनक भी बढ़ गयी। लेकिन सड़क पर भाजपा और जदयू के झंडे जमीन पर पड़े थे। लोग उसे कुचलकर आ जा रहे थे। झंडे दिन की कहानी और सूबे की राजनीति की दास्तां सुना रहे थे। वह भी बिना कुछ कहे। पूरी ताकत के साथ। पटना गैंगरेप मामले में 4 के खिलाफ़ आरोप गठित पटना(अपना बिहार, 19 जून 2013) – पिछले वर्ष हुए पटना के राजवंशी नगर गैंगरेप मामले में 4 आरोपियों के खिलाफ़ आरोप गठित किया गया है। घटना के करीब एक साल बाद इस मामले में तदर्थ एडीजे रवि शंकर सिन्हा की अदालत ने मामले में आरोपी रहे राहुल लांबा ऊर्फ़ राहूल नेपाली, राहूल कुमार ऊर्फ़ रणविजय, सुशांत कुमार और दिनेश पासवान के खिलाफ़ आरोप गठित किया है। इस मामले में अगली सुनवाई पांच जुलाई को होगी। बताते चलें कि इस मामले में मुख्य आरोपी प्रशांत झा के खिलाफ़ आरोप गठित नहीं किया गया। पहले प्रशांत के बारे में कहा गया कि वह नाबालिग है और इस आधार पर उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड को ट्रांसफ़र किया गया। बाद में बोर्ड ने प्रशांत को बालिग घोषित कर दिया। इंसेफ़लाइटिस के कारण 7 और बच्चों ने तोड़ा दम पटना(अपना बिहार, 19 जून 2013) – मुजफ़्फ़रपुर में पिछले 3 दिनों में 7 और बच्चों ने दम तोड़ दिया। इस प्रकार अबतक इंसेफ़लाइटिस के कारण इस साल मरने वाले बच्चों की संख्या 51 हो गयी है। मिली जानकारी के अनुसार केजरीवाल अस्पताल में 3 और एसकेएमसीएच में 4 बच्चों ने दम तोड़ा है। केजरीवाल अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार अभी भी औसतन 5 नये मरीज रोजाना अस्पताल में लाये जा रहे हैं। वही जिले के सिविल सर्जन ने अपना बिहार को दूरभाष पर बताया कि उन्हें हाल के दिनों में हुई मौतों की कोई जानकारी नहीं है। उनके अनुसार अज्ञात बीमारी के कारण अबतक केवल 23 बच्चों की मौत हुई है। बिहार के सभी विधायकों से सीधी बात : फ़ैसले का समय आ गया है, बिहार आपकी ओर देख रहा है… आप सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और विश्वास है कि आपके अंदर यह भावना जीवित होगी कि आप पर जनता ने विश्वास किया है। यह आपके हाथ में है कि कल आप जब विधानसभा में अपना मत देंगे तब मत देने के बाद आप खुद से आंख मिला सकें। यह आलेख लिखने से पहले कई बातें मेरे मानस पटल पर एक साथ हलचल मचा रही थीं। कभी जस्टिस अमीरदास आयोग का भंग किया जाना तो कभी ब्रह्मेश्वर मुखिया को बाइज्जत बरी किया गया। पटना सहित पूरे बिहार में महिलाओं के साथ बलात्कार आम घटना हो चुकी है। मुजफ़्फ़रपुर में बच्चों के मरने का सिलसिला आजतक खत्म नहीं हुआ है। सब एक के बाद एक मुझे प्रेरित करने लगे कि मैं आप सभी से कहूं कि हां, अब फ़ैसले का समय आ गया है। लोकतंत्र के इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब एक लोकतांत्रिक तानाशाह को उसके अंजाम तक पहूंचाया जा सकता है। Read More>>> तलाक के बाद सबकी नजरें ‘क्रीम’ विभाग पर, विश्वासमत के बाद होगा असली जश्न भाजपा-जदयू गठबंधन के टूटने के बाद अब सबकी नजरें ‘क्रीम’ विभागों पर है। जिन विभागों पर सबसे अधिक दावेदारी है उनमें वित्त विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पथ निर्माण विभाग शामिल है। सत्ता के गलियारे में बह रही बयार को आधार मानें तो सबसे अधिक मारामारी वित्त विभाग को लेकर है। बताया जा रहा है कि सूबे में एकछत्र राज कायम करने वाले नीतीश कुमार यह विभाग अपने सबसे करीबी को देना चाहते हैं। Read More>>> किताबें नहीं बंटी, बंट गयी खजाने की रेवड़ी, बिहार में पुस्तक घोटाला - दूसरा भाग दोस्तों, बिहार में सुशासन है। सुशासन का प्रमाण यह कि नौनिहालों तक किताबें भले ही न पहूंची हों, लेकिन किताब के नाम पर सरकारी खजाने की रेवड़ी सबने मिलकर आपस में बांटी। सरकारी रेवड़ी का मतलब सरकारी राशि। पिछले चार वर्षों में बिहार राज्य पाठ्य पुस्तक प्रकाशन निगम ने किताबों का प्रकाशन कर उन्हें सरकारी स्कूलों तक भेजवाने के लिए टेंडर के जरिए ट्रांसपोर्टर का चयन किया। Read More>>> अपनी बात : नीतीश की धर्मनिरपेक्षता का “सच” दोस्तों, बिहार में एनडीए टूट चुका है और अब सत्ता पर जदयू का एकाधिकार हो चुका है। इस टूट के कई मायने हो सकते हैं। इसके अंजाम भी कई होंगे। लेकिन सबसे बड़ी बात यह हुई है कि कल “विकास” की राजनीति धाराशायी हो गयी। Read More>> संपादकीय – कायर नीतीश कुमार से नैतिकता की उम्मीद दोस्तों, अब यह लगभग तय हो चुका है कि एनडीए नरेंद्र मोदी के सवाल पर टूट चुका है। जहां एक ओर जदयू ने भाजपा को दो दिनों के अंदर पीएम पद का उम्मीदवार घोषित करने का अल्टीमेटम दे रखा है जो भाजपा के लिए किसी भी दृष्टिकोण से संभव नहीं है। एक वजह यह कि भाजपा खुद भी अभी आडवाणी के इस्तीफ़े के करंट से उबर नहीं सकी है। दूसरी वजह यह कि भाजपा में नरेंद्र मोदी के सवाल पर सभी एकमत नहीं हैं। Read More>>> Ignore Those Who Love to Hate: Hate Speech and Communal Politics Ram Puniyani Mahatma Gandhi, who laid down his life for communal harmony, who was murdered because he was espousing the cause of building bridges of amity between different religious communities had a statuette with three monkeys. One of the monkeys in this puts his hand on his mouth, signifying that we should not speak evil. पूरी रिपोर्ट पढें >>> नवल की कविता छोड़ यथार्थ नये ख्वाब सजायें, चलो मेरे मन आज फ़िर रोमानी हो जायें। समंदर की लहरों पर उनके साथ चलें आसमान में अपना आशियाना अपने लिए एक नई दुनिया बसायें चलो मेरे मन आज फ़िर रोमानी हो जायें। उनके महावर के रंग अब भी टेस हैं चूड़ियों की खनक अब भी सजीव है उनके जुल्फ़ों में गौना की रात वाली गमक अब भी जस की तस है चलो एक बार फ़िर उनके साथ जीवन पथ पर कुछ और सपने सजायें चलो मेरे मन आज फ़िर रोमानी हो जायें। बाल-बच्चों की जिम्मेवारी आने-जाने वालों की खिदमत टूटे छप्पर से घर बचाने की जद्दोजहद चूल्हे में उनके साथ अपना भी हाथ जलायें चलो मेरे मन आज फ़िर रोमानी हो जायें।
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· जदयू-भाजपा के बीच हिंसक मुठभेड़, जदयू कार्यालय के पास हथियार रखा वाहन बरामद · विधायकों को धमका रहे नीतीश : लालू · बाढ ने दिया दस्तक, गंडक के जलस्तर में तेजी से वृद्धि |


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आंखों देखी : बंद की कहानी, झंडे की जुबानी |
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इंसेफलाइटिस से मौत और मेरे कृत्रिम शब्द राजनीतिक इतिहास में काला दिन का होना कोई नई बात नहीं है। कम से कम भारतीय लोकतंत्र में तो इसके कई प्रमाण मौजूद हैं। इसलिए आज पटना की सड़कों पर भाजपा और जदयू के बीच जो कुछ हुआ वह अनोखा नहीं था। आज दिन भर भाजपा द्वारा आहूत बंद और राजद सुप्रीमो द्वारा बुलाये गये संवाददाता सम्मेलन में खबरों का संकलन करने के दौरान एक बुरी खबर मेरा इंतजार कर रही थी। मेरे मोबाइल पर एक फोन आया। आवाज अनजानी सी थी। पहले लगा कि जैसे किसी ने गलती से फोन लगा दिया हो। आवाज किसी महिला की थी। भर्राई हुई आवाज। लगा जैसे वह सिसक रही हो। Read More>> |
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