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बिहार बदलाव के राह पर है। इसी बदलाव का एक प्रमाण है कि जो पूर्व में बाहुबली कहलाते थे, आजकल साहित्यकार बन चुके हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं भूतपूर्व डीएम जी कृष्णया की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व बाहुबली सांसद आनंद मोहन की। सहरसा मंडल कारा में सजा काट रहे पूर्व बाहुबली सांसद ने साहित्य के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करने की ठान ली है। अपनी पहली कविता संग्रह ‘कैद में आजाद कलम’ में जहां एक ओर उन्होंने बाजारवाद को नंगा किया है वहीं आम आदमी के दर्द को भी उकेरा है। इस संग्रह में कुल 26 कविताएं हैं। इनकी इस कविता संग्रह को लब्ध प्रतिष्ठित प्रकाशन राजकमल प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। अपनी कविताओं के जरिये श्री मोहन ने विरोधियों को भी यह संदेश भी दिया है कि वे झुकनेवालों में से नहीं हैं। प्रमाण के रुप में इस कविता को देखिये। कि मृत्युदंड की सजा सुन हार मान लूंगा मैं झुकी गर्दन उसकी सजा स्वीकार तंग काल-कोठरी में तिल-तिल घुट-घुट मरूंगा मैं समझा नहीं कि हार से भी रार ठान लूंगा मैं पर जीते जी उससे कभी हार नहीं मानूंगा मैं। बिहार में अब स्वास्थ्य यात्रा की बारी पटना(अपना बिहार, 28 जनवरी 2012) – बिहार में यात्राओं का सिलसिला चल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेवा यात्रा के बाद सूबे के स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे अब स्वास्थ्य चेतना यात्रा पर निकलने वाले हैं। मिली जानकारी के अनुसार श्री चौबे की यह यात्रा पूरे बिहार से होकर गुजरेगी। इनकी इस यात्रा के दौरान लोगों को राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में किये गये कारनामों के बारे बताया जायेगा। इसके अलावे लोगों की निशुल्क स्वास्थ्य जांच के बाद मुफ़्त में विटामिन की गोलियां और टानिक की बोतलें भी मिलेंगी। यह यात्रा 30 अप्रील तक चलेगी। नाव डूबने से तीन लोगों की मौत पटना(अपना बिहार, 28 जनवरी 2012) - बिहार में सारण जिले के डोरीगंज थाना क्षेत्र में दरौली घाट के समीप गंगा नदी में शुक्रवार को एक नौका के पलट जाने से तीन लोगों के डूब मरने की आशंका है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कुछ स्थानीय ग्रामीण जब एक छोटी नौका पर सवार होकर दूसरे किनारे जा रहे थे तभी बीच धार में उनकी नौका अनियंत्रित होकर उनकी नौका पलट गई। इस दुर्घटना में तीन लोगों के डूब मरने की आशंका है जबकि पांच अन्य तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए। सूत्रों ने बताया कि स्थानीय गोताखोरों की मदद से लापता लोगों की तलाश की जा रही है। राजघराने अब नहीं पैदा करते राजा : नीतीश पटना(अपना बिहार, 28 जनवरी 2012) – देश में लोकतंत्र है। इसी लोकतंत्र का परिणाम है कि अब राजा राजघरानों में पैदा नहीं होते। ये बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते गुरुवार को पटना जिले में पुनपुन प्रखंड में खैरूद्दीन चक डुमरी महादलित टोले में गणतंत्र दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहीं। अब जनता ही बहुमत देकर किसी को प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बनाती है। जनता तय करती है कि कौन विपक्ष में रहेगा और कौन सत्ता में। उन्होंने कहा कि राज्य में सभी महादलित टोले में राज्य सरकार ने झंडोत्तोलन कार्यक्रम का निर्णय किया है जिससे वहां के पिछड़े लोगों का मनोबल और स्वाभिमान बढे़गा। नीतीश ने कहा कि सरकार ने भूमिहीन महादलितों को तीन डेसीमिल जमीन देने का निर्णय किया है जिसके तहत मकान बनाने के लिए महादलितों को जमीन दी जा रही है। जहां सरकारी जमीन नहीं उपलब्ध है वहां खरीदकर महादलितों को जमीन उपलब्ध करायी जा रही है। कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी संबोधित किया। नजरिया – अपना आंबेदकर पैदा नहीं करने का फ़ल भुगते ओबीसी समाज देश में ओबीसी यानी पिछड़ा वर्ग की आबादी कुल आबादी का करीब 65 फ़ीसदी है। हालांकि यह हिसाब बहुत पुराना है और इसलिये विश्वसनीय भी नहीं है। फ़िर भी यह माना जा सकता है इसमें बहुत अधिक वृद्धि नहीं हुई होगी। देश में अनुसूचित जाति और जनजाति समाज के लोगों को उनकी आबादी के हिसाब से आरक्षण दिया गया है। उन्हें संपूर्ण आरक्षण दिया गया है। जबकि मंडल कमीशन के बाद भीख के रुप में ओबीसी को 27 प्रतिशत जो आरक्षण मिला है, वह केवल सरकारी नौकरियों एवं शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिये ही मान्य है। Read More>>> बतकही – गणतंत्र मुबारक हो बिहारवासियों आज के भारत में जो शासन व्यवस्था कायम है, उसे लोकतंत्र अथवा गणतंत्र कहें या फ़िर प्रजातंत्र? यह एक सवाल है। सवाल इसलिये कि आज लोकतांत्रिक व्यवस्था के बावजूद शासक वर्ग देह ऐंठकर चलता है, मानों जिनके वोट पर वह सत्तासुख के मजे ले रहा है, वे इंसान हैं ही नहीं। इसका एक प्रमाण बिहार से ही लिजीये। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आजकल जनता की सेवा करने के लिये सेवा यात्रा कर रहे हैं। बेचारे हेलीकाप्टर से घुम घुम कर जनता की सेवा करते फ़िर रहे हैं। जहां जाते हैं हेलिकाप्टर से उतरते हैं लोगों की सेवा में जूट जाते हैं। चलते हैं तो आगे पीछे सैंकड़ों बंदूकधारी तैनात रहते हैं। देखने से ही लग जाता है कि बिहार का राजा आया है। जनता बेचारी दूर रह जाती है। यहां यह बात गौर करने के लायक है कि आजकल नेताओं पर हमले बहुत बढ गये हैं। जार्ज बुश से लेकर शरद पवार और अब नीतीश कुमार भी इस श्रेणी में शामिल हो गये हैं। वैसे श्री कुमार पहले दो लोगों से अधिक महान हैं। वह इसलिये कि उन्हें तो केवल एक अकेले आदमी का विरोध झेलना पड़ा। हमारे सुशासन बाबू को को बिहार में जनता ने खुलेआम पत्थर मारे। वह एक बार नहीं, बल्कि दो—दो बार। अब यह संयोग ही है कि यह महान काम किसी और जिले की जनता ने नहीं बल्कि नालंदा की जनता ने किये हैं। अब सवाल यह उठता है कि बिहार में ऐसा क्या हो गया, जिसके कारण जनता ने सुशासन बाबू पर अपना गुस्सा निकाला। वैसे सेवा यात्रा के हर चरण में श्री कुमार को जनता के इस तरह की आगवानी को खुले दिल से स्वीकार करना पड़ा है। ये सारी घटनायें महज संयोग नहीं हैं। हकीकत यह है कि बिहार में लोकतंत्र नहीं, नीतीश तंत्र है। नीतीश तंत्र का मायने यह कि जनप्रतिनिधियों को कोई औकात नहीं है। कोई भी मंत्री खुद से कोई निर्णय नहीं ले सकता है। जबतक सीएम का हिस्सा तय नहीं हो जाता है तबतक सरकारी खजाने की एक पाई भी खर्च नहीं होती। अफ़सरों की स्थिति अच्छी है। लेकिन कुछेक आईएएस ही हैं, जो नीतीश तंत्र में स्वयं को फ़िट पा रहे हैं। अधिकतर वे हैं, जिन्हें हिस्सा का बंटवारा करने में महारत हासिल है। व्यक्ति आधारित राजनीति मौजूदा आर्थिक परिप्रेक्ष्य में किस कदर खतरनाक हो सकती है, श्री कुमार उसका एक बेहतर नमूना हैं। इसका उदाहरण यह कि बिहार में अरबों रुपये के साइकिल और पोशाक फ़र्जी तरीके से बंट गये और बिहार के मुख्यमंत्री छाती फ़ुलाकर कहते हैं कि यह भ्रष्टाचार तो हमने पकड़ा है फ़िर इसमें हमारी संलिप्तता कैसी। है न कमाल की बात। इसलिये बिहार में लोकतंत्र नहीं, नीतीश तंत्र है। नीतीश तंत्र में नीतीश समर्थक बिंदास हैं। इन बिंदासों में एक डा शर्मा हैं, जो दिल्ली में डेवलपमेंट संस्थान चलाते हैं। वैसे इनका एक संस्करण बिहार में भी मौजूद हैं। अंतर केवल नाम का है। बाकी सब एक समान है। दस्तावेज उपलब्ध हैं जो यह बतलाते हैं कि इन दोनों ने मिलकर बिहार को अबतक कैसे लूटा है। यानी बिहार में लूट तंत्र स्थापित हो चुका है। रामनाम जपने वाले एक रामभक्त ने बिहार में मची लूट को देखकर कहा कि – नीतीश नाम का लूट है, लूट सके सो लूट, उस वक्त पछतायेगा, जब ढोल जायेगा फ़ूट। लेकिन हम ऐसा वैसा कुछ नहीं कहने जा रहे हैं। हम तो आप सभी को केवल गणतंत्र की शुभकामनायें दे रहे हैं।
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खबरें बिहार के सतत विकास की |
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बिहार में अपराध |
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अपना बिहार और राज्य में प्रकाशित विभिन्न अखबारों में प्रकाशित खबरों के अनुसार कल दिनांक 27 जनवरी 2012 को घटित घटनाओं की संख्या
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शनिवार , 28 जनवरी 2012 |
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यह कोई नई बात नहीं है कि प्रेम के अनेक स्वरुप हो सकते हैं। लेकिन बात जब दो जवां दिलों के बीच के प्रेम की हो तो आंखों के सामने तरह-तरह की तस्वीरें अनायास ही घूमने लगती हैं। मसलन दो युवा जोड़ी एक-दूसरे के कमर में हाथ डाले या फ़िर हाथों में हाथ डाल कभी किसी समुद्र के किनारे तो कभी किसी पार्क में या फ़िर Read More>>> टेक्नोफ़ेंड युवाओं के नाम एक बिहारी का संदेश फेसबुक पर कुछ मित्र बिहार के बारे में केवल और केवल पोजिटिव ही सुनना चाहते हैं. मुझे भी बिहार में हो रहे सकारात्मक बदलाव महसूस हो रहे हैं पर इसका मतलब यह तो नहीं कि निगेटिव बातों को ढँक दिया जाए या पूरी शक्ति से उसे दबा दिया जाए. बिहार के कितने किसान, मजदूर, गाँवों में रहनेवाले अथवा शहर में ही रह रहे अपेक्षाकृत निम्न आय वर्ग के लोग फेसबुक अथवा सोशल मीडिया के संपर्क में हैं ? Read More>>> स्त्री विमर्श - नारी अस्मिता की खोज (कमलेश मेहरौल) भारत में सदियों से महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण भेदभावपूर्ण रहा है। उसे सदा से ही दोयम दर्जे का नागरिक समझने की परिपाटी रही है। परंतु, महिलाओं की सहभागिता भी समाज में पुरुषों के बराबर ही रही है। पितृ सत्तात्मक समाज ने महिलाओं को सदैव हाशिये पर रखा है, जिसके पीछे वह महिलाओं की जैविक संरचना को कारण बताता रहा है। जबकि महिलाओं ने हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर पुरुषों का साथ दिया, लेकिन कभी भी उसे उसके कार्य के लिये मान्यता प्रदान नहीं की गई। Read More>>> निराधार करती आधार और जनसँख्या रजिस्टर परियोजना का सच दिसम्बर १३ को वित्त की संसदीय समिति की जो रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश की गयी उसने ये जगजाहिर कर दिया की भारत सरकार की शारीरिक हस्ताक्षर या जैवमापन (बायोमेट्रिक्स) आधारित विशिष्ट पहचान अंक (यू.आई.डी./आधार परियोजना) असंसदीय, गैरकानूनी, दिशाहीन और अस्पष्ट है और राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के लिए खतरनाक है। बायोमेट्रिक पहचान तकनीक और ख़ुफ़िया तकनीक के बीच के रिश्तो की पड़ताल अभी बाकी है. Read More>>> शिक्षा के नामपर एक और महाघोटाला पटना(अपना बिहार, 15 जनवरी 2012) – बिहार में सब ठीक ठाक है। बांका और सासाराम जिले में सरकारी तफ़्तीश के दौरान यह सच सामने आया है कि करीब डेढ लाख छात्र-छात्राओं ने फ़र्जी नामांकन के आधार पर सरकारी साइकिल और पोशाक की राशि हड़प ली। मानव विकास संसाधन विभाग के सूत्रों की मानें तो पूरे बिहार में यह संख्या करीब 12 लाख है। सरकार की ओर से इसकी जिम्मेवारी लेते हुए राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिये हैं। इसके अलावे राज्य के मानव संसाधन विकास विभाग के मंत्री पी के शाही ने अब एक नया आदेश जारी किया है कि जबतक छात्र-छात्राओं की उपस्थिति 6 महीने तक नहीं रहेगी, तबतक उन्हें न तो साइकिल मिलेगी और न ही पोशाक दी जायेगी। वही विभाग के बड़बोले प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने सारा दोष बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों पर मढते हुए उनके खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। बहरहाल, सबसे बड़ा सवाल यह कि 12 लाख फ़र्जी छात्रों का नामांकन किसने और कैसे कर दिया। निश्चित तौर पर इसके लिये केवल छात्रों के अभिभावकों को जिम्मेवार ठहराया जाना पूर्णरुपेण अनुचित है। इसके अलावे एक संभावना यह भी बनती दिख रही है कि सरकार अब स्कूली बच्चों को पोशाक और साइकिल देने से पीछे हट रही है। इसलिये सरकारी तंत्र इस पूरे मामले को बढा-चढाकर बता रहा है। वैसे इस मामले की स्वीकृति ने सरकार के दावों की पोल तो खोल ही दी है। विशेष रिपोर्ट - ब्रह्मोश्वर मेहरबान तो लोगों को मिला सरकारी हथियार का लाइसेंस रोहतास(अपना बिहार, 24 जनवरी 2012) – माओवादियों से लड़ने में बिहार सरकार की तेज तर्रार पुलिस भी अपने आपको अक्षम पाती है। इसलिये बिहार सरकार ने आम आदमी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय लोगों को हथियार के लाइसेंस देना शुरु कर दिया है। रोहतास जिले के चेनारी में स्थानीय प्रशासन की ओर से बड़ी संख्या में हथियार का लाइसेंस दिया गया है। जिले के आरक्षी अधीक्षक मनु महाराज ने बताया कि यह लाइसेंस आदिवासियों को दिया गया है ताकि वे माओवादियों से अपनी संपत्ति और जान की सुरक्षा कर सकें। वैसे यह भी आश्चर्यजनक है कि जो आदिवासी अपने घर में दोनों शाम चूल्हा नहीं जला सकते हैं, वे भला हथियार कैसे खरीद सकते हैं। एक उल्लेखनीय जानकारी यह भी कि रोहतास जिले में बड़ी संख्या में गोंड़ जाति के लोग रहते हैं जो स्वयं को महाराणा प्रताप के वंशज यानी राजपूत कहते हैं और सरकार उन्हें अनुसूचित जाति के रुप में मान्यता दे रही है। माना जा रहा है कि स्थानीय प्रशासन के रुख में यह परिवर्तन वर्ष 1995 से लेकर 2001 तक बिहार में हुए नरसंहारों के मुख्य आरोपी ब्रह्मोश्वर मुखिया की उपस्थिति के कारण हुआ है। बताते चलें कि नीतीश कृपा के कारण इंसान के नाम पर दरिंदा ब्रह्मोश्वर मुखिया को जेल से रिहाई मिल चुकी है और इसका असर शाहाबाद के इलाकों में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है।
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मुकेश शंकर भारती, शोधार्थी, अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान, जेएनयू, नई दिल्ली |
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महिला सशक्तिकरण का मायने समझने की जरुरत (श्वेता सिंह) |

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अपनी बात - अपना बिहार के दो वर्ष पूरे |
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विशेष रिपोर्ट – नीतीश को उन्नीस साबित करने की संघ की तैयारी जोरों पर भले ही देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं और राजनीतिक उठापटक जारी है। लेकिन इससे भी अधिक उठापटक इन दिनों बिहार में चल रहा है। इस उठापटक की खासियत यह है कि यह उठापटक दोनों सत्तासीन दलों के बीच जारी है। मिली जानकारी के अनुसार बिहार के हर जिले में संघ द्वारा “शाखा” को पुनर्जीवित कर दिया गया है। read more>>> |
लाखों फ़र्ज़ी नामांकन से करोड़ों का घपला |
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मणिकांत ठाकुर बीबीसी संवाददाता, बिहार |
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बिहार के स्कूलों में कम-से-कम दस लाख ऐसे नाम दर्ज बताये जा रहे हैं, जिन्हें फ़र्ज़ी या डुप्लीकेट नामांकन माना जा रहा है. ख़ुद राज्य सरकार के आदेश पर इनमें से तीन लाख नाम स्कूल-रजिस्टर से हटाये जा चुके हैं. और यह सिलसिला अभी जारी है. स्कूलों में फ़र्ज़ी दाख़िला के ज़रिये किया गया अरबों रूपए का यह घपला इन दिनों यहाँ काफ़ी चर्चा में है. इस कारण राज्य सरकार के कई बहुप्रचारित दावों की बड़ी फजीहत हुई है. बिहार शिक्षा परियोजना के निदेशक और राज्य के शिक्षा सचिव राजेश भूषण से मैंने पूछा कि इतनी बड़ी तादाद में फ़र्ज़ी दाख़िला आख़िर हुआ कैसे ? उनका जवाब था - '' मुझे नहीं लगता है कि ये तादाद ज़्यादा है. राज्य में छह से चौदह वर्ष के दो करोड़ तेरह लाख बच्चों में से अबतक मात्र तीन लाख बच्चों का ही डुप्लीकेट नामांकन पाया गया है.लेकिन मैं ये मानता हूँ कि हमारे स्कूलों का प्रबंधन उतना प्रभावी नहीं है, जितना होना चाहिए. फिर भी गड़बड़ी दुरुस्त करने में सरकार जुट गयी है.'' Read More>>> |
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साहित्यकार बना जी कृष्णैया का हत्यारा |


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बिहार में महिला सशक्तिकरण - प्रचार बनाम जमीनी सच्चाई |
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63वें गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में बिहार में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बना नवगछिया का धरहरा गांव, जहां हर बेटी के जन्म लेने पर दस पेड़ लगाये जाते हैं(ऐसा दावा बिहार सरकार द्वारा किया गया है)। दूसरी नालंदा में बेबस महिला को पिटती सुशासनी पुलिस |
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63वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर गांधी मैदान में सेना की सलामी लेते राज्यपाल देवानंद कुंवर |
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जन संवाद यात्रा के दौरान बाढ पीड़ितों के साथ राज्य सरकार की वादाखिलाफ़ी के खिलाफ़ धरना देतीं मेघा पाटेकर |
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(1) कड़ी धूप में बादल के एक टुकड़े के नीचे धूप में उसके पाँव (2) सरो के दरख़्त जैसी रौशनी मेरे सामने है (3) तुमने मेरे पथरीले घर में क़दम रखा |
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इस हफ़्ते नवल की कविता |
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हत्यायें |
लूट/चोरी |
बलात्कार |
अपहरण |
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