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बुधवार, 18 जनवरी 2017

Text Box: सावित्री ताई की बहादुर बेटियां

विषमताओं के बावजूद घरेलू कामगारों का जीवन सुधारने की मुहिम, मुजफ्फरपुर की संगीता सुभाषिणी की संघर्ष यात्रा

दोस्तों, मुजफ्फरपुर शहर की रहने वाली संगीता सुभाषिणी की खासियत यही है कि अपनी निजी जिंदगी में तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी है। अपनी निजी जिंदगी की परेशानियों के समानांतर उन्होंने समाज के उस तबके के विकास का अभियान शुरू किया, जिसकी उपयोगिता तो हर संभ्रांत परिवार में है, लेकिन कद्र कोई नहीं करता है। वह संगीता ही हैं, जिनके कारण मुजफ्फरपुर शहर में चूल्हा-चौका करने वाली करीब चार हजार महिलायें आज न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि समाज में अपनी उपस्थिति भी पूरी मजबूती के साथ स्थापित कर रही हैं।

संगीता बताती हैं कि पहले घरों में काम करने वाली महिलाओं को मुजफ्फरपुर शहर में हेय दृष्टि से देखा जाता था। इसके अलावा उन्हें नियमित रूप से मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया जाता था। जबकि यह सभी जानते हैं कि कोई भी महिला किसी दूसरे के घर के में चूल्हा-चौका जैसा काम किस हालात में करती है। सामाजिक रूप से यह पेशा कभी सम्मानजनक पेशा नहीं माना गया। इस पेशे को अपनाने वाली महिलाओं में अधिकांश वंचित तबके की होती हैं जिनके पास रोजगार का कोई विकल्प नहीं होता है। संगीता बताती हैं कि वर्ष 2008 में उन्होंने 'संबल' संस्था की स्थापना की। तब मकसद यही था कि ऐसी महिलाओं को सशक्त बनाया जाय।

लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं था। जिन घरों में महिलायें दाई का काम करती थीं, उनके मालिकों का व्यवहार एकदम क्रूर था। यहां तक कि स्थानीय पुलिस प्रशासन भी ऐसी महिलाओं की शिकायत पर ध्यान नहीं देती थी। चुनौती यही थी कि ऐसी महिलाओं को उनका अधिकार सम्मान के साथ दिलाया जाय। संबल के बैनर तले महिलायें एकजुट होती गयीं और फिर अहिंसात्मक तरीके से अन्याय के खिलाफ आंदोलन छेड़ा गया।

संगीता के मुताबिक आज उनके संगठन में चार हजार से अधिक महिलायें जुड़ी हैं। इसके अलावा आसपास के इलाकों में उन्होंने अपने प्रशिक्षित प्रतिनिधियों को जिम्मेवारी दे रखी है। ये प्रतिनिधि अपने-अपने इलाकों में घरेलू नौकरानियों एवं दाईयों, आदि का पूरा रिकार्ड रखती हैं। साथ ही उनके साथ होने वाले किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ सूचना मिलने पर पूरी जानकारी संगीता सुभाषिणी को देती हैं। इसके बाद सुभाषिणी महिलाओं को एकजुट कर आपस में रणनीति तय करती हैं। इसके बाद ही अहिंसात्मक तरीके से कार्रवाई की जाती है।

संगीता ने बताया कि वर्ष 2012 से पहले उन्होंने संबल नामक अपनी संस्था का पंजीकरण नहीं कराया था। इसके पीछे की वजह बताते हुए वे कहती हैं कि उनकी मंशा महिलाओं को एकजुट कर उन्हें जागरूक बनाना था। किसी तरह का लाभ कमाना उनका उद्देश्य नहीं था। लेकिन इसका एक दुष्परिणाम यह हुआ कि स्थानीय प्रशासन द्वारा संबल के द्वारा उठाये गये सवालों को नजर अंदाज किया जाने लगा। अंत में सभी महिला सदस्यों ने आपस में मिलकर स्वयंसेवी संस्था के रूप में पंजीकृत कराने का निर्णय लिया।

अपने द्वारा किये गये प्रयासों के परिणाम के बारे में संगीता बताती हैं कि अब स्थिति पूरी तरह बदल गयी है। अब तो उनके पास वे महिलायें भी आती हैं, जो मालकिन कहलाती हैं और अपनों के द्वारा विभिन्न प्रकार की हिंसा की शिकार होती हैं। हमारी संस्था से जुड़ी महिलायें उनका उत्साह बढ़ाती हैं और अन्याय के खिलाफ उनका साथ देती हैं। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक सुकून देने वाली बात यह है कि अब दाई के रूप में काम करने वाली महिलायें 'अप्प दीपो भव' की तर्ज पर स्वयं जागरूक होती जा रही हैं। वे अब अपनी आय का अधिक हिस्सा अपने बच्चों को पढ़ाने-लिखाने में खर्च करती हैं।

बहरहाल संगीता सुभाषिणी का निजी जीवन भी अनगिनत चुनौतियों का पर्याय रहा है। हालांकि उनका जन्म मुजफ़्फरपुर के बड़े उद्यमियों में से एक स्व प्रह्लाद दास अग्रवाल के घर में हुआ था। उनके पिता उत्तर बिहार में कंक्रीट के ह्यूम पाईप का उत्पादन करने वाले पहले उद्यमी थे। इसके अलावा वे मुजफ़्फरपुर नगर कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे थे। समाज के प्रति उनके समर्पण और जनता से उनका लगाव इस कदर था कि वे आजीवन मुजफ़्फरपुर नगर निगम की स्थायी समिति के सदस्य रहे। इसके अलावा वे मुजफ़्फरपुर नगर निगम के अध्यक्ष भी निर्वाचित हुए थे।

इस तरह एक उच्च आयवर्गीय परिवार में जन्म लेने के बावजूद संगीता को समाज सेवा अपने पिता से विरासत में मिली। मुजफ़्फरपुर शहर में ही प्राथमिक शिक्षा और इसी शहर के बिहार यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की। इकोनामिक्स उनका पसंदीदा विषय रहा। लेकिन उन दिनों ही समाज के साथ खड़े होने की भावना प्रबल हो उठी और संगीता ने कानून की पढाई की। संगीता बताती हैं कि उन दिनों ही उनके एकमात्र भाई की हत्या कर दी गयी। इस कारण परिवार पर संकट का पहाड़ टूट पड़ा।

विषमता के समानांतर संगीता ने अपने जीवन का एक नया रास्ता चुना। उन्होंने मुजफ़्फरपुर से प्रकाशित दैनिक "प्रात: कमल" में पत्रकार के रुप में काम करना शुरू किया। यह वह समय था जब मुजफ़्फरपुर जैसे शहर में लड़कियों के लिए नौकरी करने की बात सोचना भी कल्पना के परे था। अपने पत्रकारिक जीवन में संगीता ने अपनी रिपोर्टों से पूरे शहर का ध्यान आकृष्ट किया। खासकर एक दबंग नेता के द्वारा एक महिला के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या को लेकर संगीता के द्वारा की गयी रिपोर्टिंग ने उन्हें एक मुकम्मिल पत्रकार के रुप में स्थापित किया। उन दिनों ही उनकी मुलाकात अक्खड़ स्वभाव के पत्रकार अनिल गुप्ता से हुई। वे भी प्रात: कमल के लिए काम करते थे। फिर एक दिन ऐसा भी आया जब संगीता और अनिल ने शादी कर अपनी दुनिया बसा ली। संगीता बताती हैं कि यह एक नये जीवन की शुरूआत थी। अनिल गुप्ता के साथ देश के कई शहरों में उन्होंने पत्रकार के रुप में अनेक पत्र-पत्रिकाओं के लिए काम किया। लेकिन उनका दिल मुजफ़्फरपुर में बसता था और तबसे उनका संघर्ष जारी है। वे कहती हैं कि जबतक उनके शरीर में रक्त का एक कतरा भी शेष है, वे अपने उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रयत्नशील रहेंगी। हालांकि वे चाहती हैं कि सरकार और समाज सभी महिलाओं के अस्तित्व को पूर्णता में स्वीकार करें और उन्हें अपना जीवन जीने दे। इसी में समाज की बेहतरी है।

उल्लेखनीय है कि जून ,२०११ में जेनेवा में हुए अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के १००वें अधिवेशन में घरेलू कामगार स्त्रियों के संगठन का भी कन्वेंशन हुआ औरदुनिया भर में १० करोड़ के आसपास घरेलू कामगार महिलाओं को सम्मानजनक श्रममूल्य और वातावरण दिलाने का संकल्प लिया गया. इसके बाद भारत में भी इन महिलाओं की सुध लेने की सरकारी कोशिशें तेज हुईं . तमिलनाडु , महाराष्ट्र , कर्नाटक, केरला आदि राज्यों में सीमित अर्थों में ही सही इन महिलाओं के लिए सरकारी प्रयास सुनिश्चित हुए, हालांकि सम्मानजनक भुगतान और दूसरी सुरक्षाओं की लड़ाई अभी जारी है. धीरे झ्रधीरे केंद्र सरकार पर भी दवाब बन रहा है कि वह इन महिलाओं के लिए एक मुक्कमल बिल लेकर आये. इस सब के बीच मुजफ्फरपुर की ये महिलाएं, जिन्हें २०० से ५०० रुपये तक एक घर से मिलता है चौका वर्तन के लिए , देश और दुनिया भर में चल रही अपने लिए लडाइयो को नहीं जानती हैं. उन्हें भरोसा है तो अपनी सुभाषिणी दीदी पर , जिन्होंने इन महिलाओं के लिए एक नया नाम भी दिया है , दमिता.यह नाम दलित नाम के करीब इस मायने में है कि ये लगभग उतने ही हाशिये पर जीती है और अलग इस मायने में कि दलितों के साथ जुड़ा छुआ झ्रछूत इनके साथ नहीं है . चौका -बर्तन करे में कहीं १०० रूपया मिलअइछइ त कहीं २००, इतना में केना पेट भरतइ अ केना अपन बाल बच्चा के पढ़बइ. अब दीदी के सहयोग से हम सब भी अपन हक ला आवाज उठावे के चाहिछिअइ, शायद हामरो सब के परिवर्तन आ जतइ यह विश्वास सिर्फ राजवती देवी के साथ उन दर्जनों महिलाओं को हैं , जो संबल में सुभाषिणी जी के साथ सक्रिय हैं.

अपनी कार्यकतार्ओं को सुभाषिणी न सिर्फ उनके हक के लिए लड़ना सिखा रही है, बल्कि सामजिक बुराइयों के खिलाफ भी खड़ा कर रही है, जिसका असर मुजफ्फरपुर के चर्चित शराब बंदी आन्दोलन में दिखा . जिला स्तर पर सरकारी सुविधाओं को हासिल करने में भी इन ने एकजुटता दिखाई है. अपने संसाधनों से संचालित यह संगठन एक लम्बी लड़ाई लड़ने की स्थिति में नहीं है लेकिन लम्बी लड़ाई के जज्बे से भरा है . सुभाषिणी जी हालांकि प्रदेश सरकार और खासकर मुख्यमंत्री से अपील करती हैं कि दूसरे राज्यों की तरह बिहार में भी वे दमिताओं के हक में कुछ कदम उठाएं . वे देश के दूसरे हिस्सों में चल रही इस लड़ाई से इन महिलाओं को जोड़ने की तैयारी में भी हैं.(साभार : स्त्रीकाल डाट काम)

याद जयपाल सिंह मुंडा की...

- प्रवीण बागी

जो समाज अपने सपूतों को याद नहीं रखना, उनपर गर्व नहीं करता, वह अपनी जडों से कट जाता है। वह अपनी परंपरा, संस्कृति और धरोहर को भूल जाता है। झारखंड इसका ताजा उदाहरण है। 3 जनवरी जयपाल सिंह मुंडा की जयंती है। नयी पीढी शायद उनके नाम से अवगत न हो, लेकिन आदिवासी संस्कृति की दुहाई देनेवाले और आदिवासियों के नाम पर राजनीति' करनेवाले उन्हें जरूर जानते हैं। क्योंकि वे उन्हीं की कमाई खा रहे हैं। जयपाल सिंह मुंडा ने ही सबसे पहले आदिवासियों के लिए झारखंड नाम से अलग प्रदेश बनाने की मांग बुलंद की थी। उन्होंने झारखंड पार्टी बनाई थी। वे आक्सफोर्ड विवि से पढे थे। संविधान सभा के सदस्य थे।. प्रथम लोकसभा के सदस्य रहे।लगातार चुनाव जीतते रहे। एक समय बिहार विधानसभा में झारखंड पार्टी के 23 विधायक जीत कर पहुंचे थे। दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह को राज्यसभा में भेजनेवाले जयपाल सिंह ही थे। आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा और विधायिका तथा सरकारी नौकरियों में आरक्षण, जयपाल सिंह मुंडा की ही देन है। संविधान सभा में उन्होंने इसके लिए जोरदार बहस की थी। इसलिए लोगों ने उन्हें 'मरांग गोमके' का नाम दिया था, यानी सर्वोच्च नेता।यह उपाधी फिर किसी दूसरे नेता को नहीं मिली।

वे हॉकी के बेहतरीन खिलाडी थे। 1928 में एम्सटर्डम ओलंपिक में इन्हीं के कैप्टनशिप में भारत ने गोल्ड जीता था। हॉकी के जादूगर कहे जानेवाले मेजर ध्यानचंद उस टीम के हिस्सा थे। उन्हीं के चलते झारखंड में आज भी हॉकी लोकप्रिय है। गांव- गांव में लडके- लडकियां हॉकी खेलते दिख जाते हैं। 20 मार्च 1970 को उनका निधन हुआ था। जिस रांची में जयपाल सिंह का जन्म हुआ था, आज वहां उनका कोई स्मारक नहीं है। उनके नाम पर सिर्फ एक स्टेडियम है, जिसमें उनकी प्रतिमा है। उस प्रतिमा पर आज फूल चढाना चाहिये, इसकी जरूरत न सरकार को महसूस हुई न दूसरे राजनेताओं को । सिर्फ रांची की मेयर आशा लकडा को यह समझ में आया कि जयपाल सिंह क्या थे। उन्होंने श्रद्धांजलि दी। ऐसे राजनेताओं और समाज को आप क्या कहेंगे ?

जयपाल सिंह आदिवासियों के धर्मान्तरण के भी खिलाफ थे। उनकी शिक्षा इसाई मिशन के सहयोग से हुई थी।9 वीं क्लास के बाद ही मिशन की ओर से उन्हें पढने के लिए इंग्लैंड भेज दिया गया था।आक्सफोर्ड में पढने का खर्च भी मिशन ने ही उठाया था।जब वे लौटकर आये तो मिशन ने उन्हें इसाईयत के प्रचार- प्रसार के काम में लगाना चाहा, पर उन्होंने दृढतापूर्वक मना कर दिया। लेकिन अफसोस कि हिन्दू धर्म के ध्वजाधारकों को भी उनकी याद नहीं आयी। हम शमिंर्दा हैं मरांग गोमके'...... (लेखक वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं)

आदमियत की दुखती रग के निर्दोष राग को ढूँढ़ने का नया तरीका

- शहंशाह आलम

मेरा मानना है कि हर लेखक किसी पहाड़ी कबीले का सदस्य होता है। तभी तो हर लेखक जीवन को, जीवन से जुड़े संघर्ष को इतने निकट से देख पाता है। यह सही भी है। एक सच्चे लेखक का जीवन क्या है, कैसा है, कैसा होना चाहिए जैसे सवाल जब कभी मेरे भीतर उठे हैं, तो मुझे उत्तर यही मिलता रहा है कि हर लेखक को पहाड़ी कबीले का सदस्य होना चाहिए। इसलिए कि इस जीवन को कोई दूर किसी छोटे इलाके में रहकर अगर जीता है, तो असल जीवन तो वही है। वही जीवन जीवन के असल महत्व को दशार्ता है। जहाँ ऊँच-नीच का लफड़ा है भी तो उस लफड़े में मासूमियत रहती है। जबकि शहरी अथवा महानगरीय तामझाम ने जो छीना-झपटी हमें दी है, वह हमारा नाश करने के लिए काफी है। इस छीना-झपटी से मुक्ति तभी संभव है, जब हम कई सौ मील जाकर अपनी जड़ों से जुड़ेंगे और अपने असली जीवन को आत्मसात् करेंगे। कम-अज-कम हम लेखकों को ऐसा जरूर करना चाहिए। तभी हमारा लेखन हमारे अंतस का लेखन सिद्ध होगा। मैंने अपने समय के बेहद महत्वपूर्ण लेखकों में एक जाबिर हुसेन को अपने लेखन को सच्ची धार देने के लिए उस जीवन को जीते देखा है, जो जीवन बिना किसी शोर के धरती के उस टुकड़े से जुड़ा रहता आया है, धरती का जो टुकड़ा अपनी एक नई तरह के तीव्र संघर्ष से जुड़ा रहा और जीतता आया है। जाबिर हुसेन ऐसे जीवन के बारे में कहते हुए लिखते हैं, 'मैं चाक पर फैली रेत के समान हूँ। मुझे पता है, इस रेत से चाक पर कोई उपयोगी वस्तु आकार नहीं ले सकती। मैं खुद भी अपने जीवन में कोई आकार कहाँ ले पाया।' अब आप ही कहिए, एक चाक, जो एक कुम्हार के हाथों गति पाते हुए, मिट्टी-पानी पाते हुए कितनी ही चमत्कारिक वस्तुएँ देता है, एक लेखक अपनी कलम से उस चाक से कहीं अधिक चमत्कारिक रचनाएँ देता है। मैंने पहले ही लिखा है कि जाबिर हुसेन एक महत्वपूर्ण लेखक हैं और उनका महत्व इससे स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपने आस-पास के जीवन से जो लिया, उससे कहीं ज्यादा उस जीवन को वापस लौटाया है। अभी-अभी छपकर आई उनकी किताब 'चाक पर रेत' को पढ़कर आप भी यही कहेंगे बिना कोई शक किए। 256 पृष्ठों की यह किताब इस रेत से भरे समय से हमारे काम लायक बहुत सारा बढ़िया छानकर एक नया दरिया-बहाती है :

मछुआरों को पता है

समुद्र में

कब आएगा तूफान

कब आएगी लहरों में उछाल

कितनी ऊँची उठेंगी लहरें

कितनी दूर भीगेगी रेत

तहस-नहस होंगे कितने किनारे

मछुआरों को पता है, सब

जाल में फँसी मछलियों ने

बता दिया है उन्हें, सबकुछ

खतरों से

आगाह कर दिया है, उन्हें

मछुआरे नहीं बेचते हैं

अपना नमक

हमेशा ख़्याल रखते हैं

अपने 'शुभ-चिंतकों' का

तभी तो

समुद्री तूफान से पहले

मछुआरे

ढीले कर देते हैं, अपने जाल

और मछलियों को

दे देते हैं

समुद्र में लौटने की छूट ( 'मछुआरों को पता है', पृ.254 )।

जाबिर हुसेन 'चाक पर रेत' में शामिल अपनी गद्य-रचनाओं को अपने जीवन की रचनाएँ कहते हैं। उनकी ये रचनाएँ बिहार के बहाने अपने भारत के उन अभिशप्त गाँवों की हैं, जहाँ हिंसा है, प्रतिहिंसा है, यातनाएँ हैं, गैर-बराबरी का नंगा नाच है। वे अपनी रचनाओं के बारे में कहते हैं, 'ये सारी तहरीरें उस समय लिखी जाती रहीं, जब बिहार के गाँवों की जमीन दरक रही थी और सामाजिक रिश्तों की बुनियादें ढह रही थीं। गाँव के खेतिहर मजदूर, भवन-निर्माण से जुड़े कामगार, छोटे-मोटे व्यवसायी, दलित और उपेक्षित वर्गों के लोग, इन सब की आवाज बनकर आगे बढ़ना अपने आप में एक जोखिम भरा अभियान था।' यहाँ पर मुझे एक कंबोडियन कहावत याद आ रही है। वह कहावत कुछ यूँ है कि जब शीशा टूटकर पानी पर तैरने लगे तो बुराई जीत जाती है। मेरे ख़्याल से अभी बुराई हम पर भारी है। सच्चाई यह भी है कि जाबिर हुसेन की रचनाएँ बुराई को हराती रही हैं। सच्चाई यह भी है कि देश का और विश्व का सामान्य वर्ग किसी असहाय, रक्षा चाहने वाला जीवन जी रहा है। इनके दर्द का मरुथल आप जाबिर हुसेन का साहित्य पढ़कर महसूस सकते हैं। उनकी रचनाएँ कभी भी कुछ लोगों के अच्छे जीवन का उत्सव न मनाकर उनके अच्छे जीवन के लिए संघर्ष करती रही हैं, जिन्हें ठेल-ठालकर हमेशा पंक्ति में सबसे पीछे खड़ा किया जाता रहा है। असल बात यही है कि जाबिर हुसेन की रचनाएँ जलते लोकतंत्र का सीधा, साफ-सुथरा बयान हैं। सौ से अधिक गद्य-रचनाएँ और चार कविताओं के माध्यम से इस 'चाक पर रेत' में व्यक्ति-चित्र और हमारे जीने के रोजमर्रा के दिन से लिए गए आत्मविश्वास से लेखक द्वारा जो कुछ लिखा-रचा गया है, वह अद्भुत है और अपने पढ़ने वालों को संतुष्ट करता है। (लेखक सूबे के सुविख्यात युवा कवि हैं)

दंगल : एक आंच की रह गयी कसर

- नवल किशोर कुमार

हरियाणा के भिवानी शहर की महिला पहलवान बबीता फोगाट और गीता फोगाट की कामयाबी की कहानी आमिर खान ने अपनी फिल्म दंगल में बखूबी चित्रित किया है। हालांकि इसमें कई तरह की मनोरंजन के लिहाज से स्वीकार्य नाटकीयता है जो महावीर फोगाट के वास्तविक जीवन से मेल नहीं खाती हैं। इसके बावजूद इस फिल्म की खासियत यही है कि इस फिल्म में स्त्री पक्ष के साथ कई दृश्यों में नाइंसाफी की गयी है। नाइंसाफी का एक प्रमाण तो यह भी कि मुख्य पोस्टर में आमिर यानी महावीर फोगाट अपनी बेटियों के साथ नजर तो आते हैं लेकिन उनकी पत्नी शोभा कौर(साक्षी तंवर) को जगह भी नहीं मिलती है। इस नाइंसाफी की एक बड़ी वजह समाज का पुरूष प्रधान होना है।

फिल्म में महावीर फोगाट को एक कुंठित पिता के रूप में दिखाया गया है। चार बच्चियों का पिता कुंठित हो और वह अपनी बेटियों को पहलवान बनाये, आश्चर्य पैदा करता है। आश्चर्य इसलिए भी कि महावीर फोगाट मूल रूप से जाट हैं और जाटों के हर गोत्र के अपने खाप हैं। इन खापों में महिलाओं की स्थिति क्या होती है, यह किसी से छुपी हुई बात नहीं है। पूरी फिल्म में दो हिस्से हैं। एक हिस्सा महावीर फोगाट की महानता है तो दूसरा हिस्सा उसकी बेटियों की कामयाबी है। फिल्मकार ने दोनों हिस्सों को फिल्माने में सावधानी बरती है। यह भी कहा जा सकता है कि फिल्मकार की ईमानदारी के पीछे फोगाट परिवार की जीवटता है।

बहरहाल एक फिल्म के रूप में दंगल एक कामयाब प्रयास है। उम्मीद की जानी चाहिए कि स्त्री पक्ष के फिल्मांकन में फिल्मकार इसी तरह की ईमानदारी दिखायेंगे। कम से कम पिंक के फिल्मकार की आधी अधूरी ईमानदारी जैसी तो बिल्कुल भी नहीं।

नाम से ही बिदक रहे संस्कृति के ठेकेदार

- मुसाफिर बैठा

सबका ठेका लेकर बात कहना बड़ी बीमारी है जो करीना-सैफ के नवजात बेटे के तैमूरनाम को लेकर फेसबुक-ट्विटर जैसे सोशल मीडिया पर अनेक बेहूदे राष्ट्रवादियों पर तारी है।

तैमूर नाम मात्र से उन्हें भी परेशानी है जिन्हें इतिहास का मात्र कखग ज्ञात है। तैमूरलंग ने उस समय हमारी भौगोलिक भूमि पर आक्रमण किया और लूटपाट की जब हमारा समाज असभ्य था, हम एक राष्ट्र न थे, हमारी राष्ट्रीयता थी तो अलग अलग थी, खण्ड खण्ड थी, (वैसे, प्रैक्टिकली अभी भी हम एक राष्ट्र कहाँ हैं, हो भी नहीं सकते!) सामन्तों एवं राजाओं तथा हिन्दू ऊँच नीच वाला समाज था। हमारे शासक भी आम लोगों के लिए कमोवेश उतने ही क्रूर थे, जालिम थे जितना कि तैमूर लंग था। तैमूर लंग जैसों की विजय कमजोर साबित क्रूर शासकों पर एक बलशाली शासक का आधिपत्य था। ब्राह्मणी एवं सवर्णी व्यवस्था जो तैमूर जैसे विदेशी आक्रमणकारियों के पहले से चली आ रही है, उस पर इन बेहूदों को क्यों परेशान नहीं कर रही है जो तैमूर नाम मात्र से परेशान हैं?

ऐसे 'देशभक्त' क्या यह सर्टिफाई करेंगे कि उनकी वंश परंपरा में अत्याचारी-व्यभिचारी-जातिवादी लोग नहीं हुए हैं? अगर स्वीकार करेंगे तो उनके पास अपने बेहूदे पूर्वजों के लिए क्या आलोचना है?

फिर, जहाँ लाखों लोग भगवान के नाम पर अपना नाम रखे हुए हैं और अनेक तरह के कुकर्मों में लगे हैं उनके प्रति इन तैमूर-घृणागिरों के क्या विचार हैं? आप ईश्वर से जुड़ा नाम रखकर भी कुकर्म और अपराध करें तो आपके लिए क्या सजा हो?

नरेंद्र माने नरों का इंद्र अथवा ईश्वर है। तो क्या गुजरात कत्लेआम के समय प्रदेश का मुख्यमंत्री रहे इस नाम के व्यक्ति को आप सीधे कठघरे में रखेंगे? क्या एक मुख्यमंत्री के रहते राज्य में नरसंहार हो जाए तो उसे इसका दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए?

घृणा योग्य लोग ही ऐसी बेहूदी घृणा पालते हैं कि किसी नाम पर भी ओछा वितंडा खड़ा कर देते हैं।

मेरे नाम और सरनेम 'मुसाफिर' और 'बैठा' को लेकर अबतक अनेक बुद्धिजीवियों (राजेंद्र यादव शामिल) तक ने बेहूदगी भरा मजाक और परिहास किया है। राजेंद्र यादव से यदि मैं पूछता कि आपके नाम में 'राजा' और 'इंद्र' जो लगा है वह आपके कर्म और आचरण को किस तरह क्वालीफाई करता है, तो उन्हें कैसा लगता? मैं उनसे कह सकता था कि आप नास्तिक होकर भी इंद्र क्यों हो, क्यों विरोधाभास को साथ लेकर जी रहे हैं, अपनी बुद्धिजीविता और नास्तिकता की हानि कर रहे हैं।

जब किसी अपराधी का बच्चा नेक हो सकता है, जब नेक का बच्चा बदनेक और अपराधी हो सकता है तो किसी नाम को किसी मिथकीय, ऐतिहासिक अथवा वर्तमान व्यक्तियों के नाम-बदनाम होने से अच्छा-बुरा ठहरा देना कुबुद्धि है। ऐसे ही कुबुद्धि जन पत्थर को भी भगवान मानते हैं एवं कोरी कल्पना की मिथक कथाओं को इस वैज्ञानिक युग में भी जीते हैं। ऐसे दुर्बुद्धि से हम फेसबुक पर नाता न रखें, उन्हें अपनी वॉल पर बेहूदगी न उगलने दे। बेहूदे चिकना घड़ा होते हैं। काम से मतलब रखिये, नाम से नहीं। नाम जैसा भी हो काम अच्छा होना चाहिए। मोल करो तलवार का, पड़ी रहन दो म्यान! (लेखक सूबे के चर्चित युवा कवि हैं)

सनक में लिया गया है नोटबंदी का निर्णय...

- शिवानंद तिवारी

गत आठ नवंबर को प्रधानमंत्री जी ने पाँच और हजार के नोट रद्द किए जाने की घोषणा की थी।रिजर्व बैंक के मुताबिक उस दिन देश मे पाँच और हजार के 15.44 करोड़ नोट चलन में थे।आज एक महीना बाद रद्द किए गए नोटों मे से कल तक 11.5 करोड़ यानी कुल रद्द नोटों का 80 प्रतिशत बैंकों में वापस आ चुका है।भारत सरकार के राजस्व सचिव के मुताबिक इस माह के अंत तक यानी रद्द नोटों को बैंकों मे जमा करने की अंतिम मोहलत तक लगभग सारे रद्द नोट बैंकों में वापस आ सकते हैं।इसका अर्थ हुआ कि नगदी में काला धन होने का जो दावा किया जा रहा था वह गलत साबित हुआ।या वह कालाधन कम था जो भ्रष्ट बैंक पदाधिकारियों की सहायता से सफेद कर लिया गया।इस तरह नोटों को रद्द किए जाने का जो मुख्य मकसद प्रधानमंत्री जी ने बताया था वह गलत साबित हो रहा है।

नोटबंदी के पहले देश की आर्थिक हालत ठीकठाक थी।स्वंय सरकार का दावा था कि हम दुनिया में सबसे तेज गति से विकास करने वाले देश हैं।हमारी विकास की गति चीन से भी तेज है।पिछले दो-तीन वर्षों से देश का बड़ा हिस्सा सुखा से प्रभावित था।कुछ इलाकों मे तो पीने के पानी तक का संकट उपस्थित हो गया था।लेकिन इस वर्ष बारिश बहुत अच्छी हुई।खरीफ की बहुत अच्छी फसल हुई है।रबी की फसल भी अच्छी होगी इसकी संभावना दिखाई दे रही थी।

जब अर्थ व्यवस्था बिलकुल स्वस्थ हालत में दिखाई दे रही थी तो प्रधानमंत्री जी द्वारा उठाए गए इस कदम का औचित्य समझ के बाहर है।रिजर्व बैंक द्वारा देश मे जारी कुल मुद्रा का 86 प्रतिशत पाँच और हजार रूपए के नोटों के रूप में ही था।ठीकठाक चल रही अर्थव्यवस्था से इतनी बड़ी राशि निकाल लेना एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर से 86 प्रतिशत खून निकाल कर उसे अधमरा बना दिए जाने के समान है।

सनक में उठाए गए कदम से देश की अर्थव्यवस्था को कुल कितना नुकसान पहुँचा है इसका अंतिम आकलन तो बाद में होगा।लेकिन रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने कल जो आकलन बताया उसके अनुसार देश का विकास दर 7.6 से 7.1 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है।यानी राष्ट्रीय आमदनी में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आएगी।ए. एन. सिंहा संस्थान, पटना के अर्थशास्त्र के प्रो. डी. एम दिवाकर के अनुसार आर्थिक सर्वे के आधार पर 2015-6 के वर्तमान मूल्य के आधार पर हमारा सकल राष्ट्रीय आय 1,34,09,892 करोड़ रू. था। इसमे 0.5 प्रतिशत की गिरावट अर्थ है सकल घरेलू आय में 67,04,946 करोड़ की कमी या सकल घरेलू उत्पाद में यह 67,83,596 करोड़ है।दिवाकर जी के मुताबिक नोटों की छपाई तथा देश भर में उनको पहुँचाने की लागत लगभग 1,28,000 करोड़ तक आ सकती है। मनमोहन सिंह जी ने नोटबंदी के इस कदम से सकल राष्ट्रीय उत्पाद में दो प्रतिशत गिरावट की आशंका व्यक्त की है।

अत: यह कहा जा सकता है किसी सकारात्मक आर्थिक सोच के आधार पर नोटबंदी का यह निर्णय नहीं लिया गया है।इस फैसले के द्वारा मोदीजी गरीबों से तप करा रहे हैं और अमीरों को मौज। आगे आनेवाले दिनों में इस कदम का पुरा प्रभाव जब प्रत्यक्ष होगा तो जो भक्त आज उनका जयकारा लगा रहे हैं वही उनके प्राण के पीछे लगे दिखाई देंगे। (लेखक राज्यसभा के पूर्व सांसद हैं)

इंसाफ की बाट जोहते-जोहते मर गया सूचक, मामला बथानी टोला नरसंहार का

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - देश में इंसाफ की प्रक्रिया कितनी जटिल है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि 11 जुलाई 1996 को रणवीर सेना द्वारा बथानी टोला में 21 दलितों की हत्या मामले में अभी तक इंसाफ नहीं हो सका है। त्रासदी यह है कि इंसाफ की बाट जोहते-जोहते इस मामले के मुख्य सूचक श्रीकिशुन चौधरी की मौत हो गयी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या पीड़ितों को मरणोपरांत इंसाफ मिलेगा।

बताते चलें कि 11 जुलाई 1996 को घटित बथानी टोला नरसंहार के दौरान हत्यारों ने श्रीकिशुन चौधरी की पत्नी और दुधमुंही बेटी की हत्या कर दी थी। इस मामले में प्रमुख गवाह रहे नईमुद्दीन ने बताया कि बीते 8 जनवरी को करीब 40 वर्षीय श्रीकिशुन चौधरी की मौत हो गयी। वे बड़हरा में स्वास्थ्य केंद्र में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी थे।

उल्लेखनीय है कि बथानी टोला मामले में निचली अदालत में 24 मार्च 2000 को 64 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। आरा की निचली अदालत ने 5 मई 2010 को ऐतिहासिक फैसले में तीन अभियुक्तों को फांसी और 20 अभियुक्तों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाया था। फांसी की सजा का आदेश पाने वालों में अजय सिंह सिंह भी शामिल था जिसके उपर श्रीकिशुन चौधरी की मासूम बच्ची की हत्या का आरोप था। दो अन्य आरोपियों में मनोज सिंह और नरेंद्र सिंह शामिल था।

निचली अदालत के द्वारा फैसला सुनाये जाने के बाद आरोपियों ने अदालत के फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी। 17 अप्रैल 2012 को पटना हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश नवनीति प्रसाद सिंह और अश्विनी कुमार सिंह की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए सभी आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। सूबे के राजनीतिक गलियारे में हाईकोर्ट के फैसले का व्यापक विरोध हुआ और यही कारण रहा कि राज्य सरकार ने एक दिन बाद यानी 18 अप्रैल 2012 को ही हाईकोर्ट के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का एलान किया। इसके अलावा सूचक स्व. श्रीकिशुन चौधरी और मो. नइमुद्दीन ने भी अपनी तरफ से हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी। इनलोगों के प्रयास के कारण 16 जुलाई 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया और तबसे यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।

बहरहाल मामले की सुनवाई में हो रही देरी के संबंध में मो. नईमुद्दीन ने बताया कि अब पीड़ित परिवारों की हिम्मत टूटने लगी है। उन्होंने कहा कि जब वे लोग ही नहीं रहेंगे जिनके अपनों की हत्या रणवीर सेना के हत्यारों ने कर दी थी, फिर यदि इंसाफ मिलेगा तो उससे क्या होगा।

दलाई लामा ने नीतीश को सराहा

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - करीब एक पखवारे तक बोधगया में आायोजित 34वें कालचक्र पूजा के सफल आयोजन के लिए तिब्बतियों के धर्मगुरू दलाई लामा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आभार व्यक्त किया है और उनकी सराहना की। मुख्यमंत्री को भेजे अपने पत्र में श्री लामा ने कहा कि यह एक बहुत बड़ा आयोजन था जिसमें विश्व भर के बौद्ध धर्मावलम्बि जुटे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पूरे आयोजन में श्री कुमार ने हर पहलू का सबसे बेहतर प्रबंधन किया और उनके प्रयासों के कारण ही कालचक्र पूजा भव्य स्वरूप धारण कर सका। दलाई लामा ने अपने पत्र में बिहारवासियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

सैनिकों का मनोबल तोड़ रहे सेना अध्यक्ष : मीसा

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - राजद सांसद डा. मीसा भारती ने कहा है कि थल सेना प्रमुख विपिन रावत जवानों की शिकायत पर ध्यान देने के बजाय उनका मनोबल तोड़ रह रहे हैं। अपने बयान में उन्होंने कहा कि थल सेना अध्यक्ष ने सेवादारी/सहायक की शर्मनाक परम्परा को खत्म करने को लेकर एक शब्द नहीं कहा। उल्टा फरमान जारी कर दिया कि कोई सिपाही अन्याय के विरुद्ध सोशल मीडिया पर बोलेगा तो सजा होगी। यानि कल जो दुश्मन के विरुद्ध दहाड़ेंगे, आज चुपचाप अपनों से ही, बिना आवाज उठाए, कठपुतली बनकर, अन्याय अपमान सहें।

डा. भारती ने कहा कि हमारी संस्कृति में शहीदों को भगवान के बराबर स्थान दिया गया है। आज जो जवान किसी के कुत्ते घुमा रहे हैं, जूते चमका रहे हैं, गाड़ी धो रहे हैं, सब्जी ला रहे हैं, कल देश की सेवा करते शहीद भी हो सकते हैं। क्या हम देश के प्रहरियों को सम्मान भरा जीवन, बेहतर भोजन और अन्यायपूर्ण व्यवस्था व भ्रष्ट अफसरों से सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं कर सकते?

उन्होंने कहा कि थल सेना अध्यक्ष जवानों को शिकायत-सुझाव पेटी का उपयोग करने की सलाह दे रहे हैं जबकि ऐसे पेटियों की क्या हालत होती है और उसपर क्या कार्रवाई होती है, वह भी सब जानते हैं। जाहिर है, स्थानीय अफसर की ही इसपर कार्रवाई की जिम्मेदारी होती है। जब अधिकतर शिकायत उनके विरुद्ध ही होगी तो इंसाफ की उम्मीद करना बेमानी ही है।

दलित महिला को पूर्व वार्ड पार्षद ने जिंदा जलाया

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - मुजफ्फरपुर जिले के काँटी थाना क्षेत्र में अपराध थमने का नाम नही ले रहा है। काँटी क्षेत्र के टरमा चौक के समीप दलित बस्ती में बिन्देश्वर चौधरी की पत्नी राजकली देवी नामक महिला को घर में जिन्दा जला दिया गया। घटना के बारे में मृतक के पुत्र का कहना है की पूर्व से भी दुकान हटाने हेतु विश्वनाथ चौधरी नामक वयक्ति से झगड़ा होता रहा है और उक्त व्यक्ति के द्वारा महिला का हाथ भी तोड़ दिया गया था। आसपास के लोगों की मानें तो देर रात लगभग 11 बजे घटना स्थल से गोलीबारी की आवाज आ रही थी। जब लोगों ने देखा तो फूस की दुकान सहित महिला पूरी तरह से जल चुकी थी। घटना स्थल से बरामद रस्सी तथा महिला के अवशेष को देखते हुए महिला के पुत्र का कहना है की जिन्दा अवस्था में महिला के हाथ पैर बांध कर जला दिया गया है। सूत्रों के अनुसार विश्वनाथ चौधरी समेत 5 पर नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी गयी जिसमे से 1 पूर्व जिला पार्षद प्रेम चौधरी की गिरफ़्तारी होने की सुचना है। अब सवाल यह उठता है की क्या काँटी में पुलिस अपराधियो से डरती है क्या जो रात के घटना पर सुबह के 7 बजे पहुँची। मामले के बारे में स्थानीय थानाप्रभारी चुप्पी तोड़ने का नाम नही ले रहे है जिससे पुलिस भी सन्देह के घेरे में दिखती नजर आ रही है।

संपादकीय : कब संवेदनशील होगी सरकार?

दोस्तों, सरकारी लापरवाही के कारण दुखद घटनायें होती हैं। सरकार मातम भी मनाती है। औपचारिकता के लिए विशेष टीम के द्वारा घटनाओं की जांच भी करायी जाती है। लेकिन फ़लाफ़ल कुछ नहीं निकलता है। सरकारी अमला असंवेदनशील बना रहता है। यकीन नहीं आता है कि वही पटना जिसने दशमेश गुरु श्री गुरुगोविन्द सिंह के 350वें जन्मोत्सव को इतने धुमधाम के साथ मनाया कि पूरी दुनिया में बिहार के साथ-साथ नीतीश कुमार को प्रशंसा मिली। उसी पटना में 24 लोग बेमौत ही काल के गाल में समा गये।

सवाल उठता है कि क्या सरकार यह नहीं जानती थी कि पतंगोत्सव में बड़ी संख्या में लोग गंगा नदी के उस पार जाते हैं। जबकि पतंगोत्सव का कार्यक्रम सरकारी था। सरकार की ओर से यह विशेष अवसर उपलब्ध कराया गया था। इसके बावजूद सुरक्षा को लेकर कोई तैयारी नहीं थी। हादसा हुआ और लोग देखते ही देखते मरने लगे। संभव था कि यदि मौके पर सुरक्षा का इंतजाम होता तो लोगों को बचाया जा सकता था, लेकिन सरकारी अमला कुंभकर्णी निद्रा में सोया रहा।

यह पहला मौका नहीं है जब स्थानीय प्रशासन की लापरवाही से पटनावासियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इससे पहले छठ हादसा, गांधी मैदान में रावण वध के दौरान हुआ हादसा सरकारी तंत्र की खामियों को उजागर कर चुका है। इसके बावजूद यदि तंत्र संवेदनशील नहीं हो रहा है तो इसके पीछे सबसे बड़ी वजह कसूरवारों को सजा नहीं दिया जाना है। इसके पूर्व हुए हादसों के लिए किसी को भी प्रत्यक्ष तौर पर कसूरवार नहीं माना गया और न ही किसी को सजा मिली। यदि सरकार ने अपने तंत्र के कसूरवारों को पहले ही सजा दिया होता तो संभव था कि वे संवेदनशील होते और हादसे के शिकार लोगों को बचाया जा सकता था।

बहरहाल सरकार और सरकारी अमला दोनों संवेदनशीलता के बजाय हादसे के होने का इंताजार करने के आदी हो चुके हैं। किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि इस नाव हादसे के लिए भी किसी को जिम्मेवार नहीं माना जाय और जिला प्रशासन व सरकार दोनों अपने आंखों पर पट्टियां बांध लें। रही बात जनता की तो हादसों में जनता का बेमौत मरना नियति बन चुकी है।

खास खबर : रहस्यमयी है नीतीश कुमार का 21 जनवरी

दोस्तों, आगामी 21 जनवरी को बिहारवासी एक नया कीर्तिमान बनायेंगे। यह कीर्तिमान होगा शराबबंदी के पक्ष में खड़े होने का। मख्यमंत्री नीतीश कुमार के आहवान पर राज्य के सभी जिलों में मानव श्रृंखला का निर्माण किया जाएगा। सबसे दिलचस्प यह है कि 21 जनवरी का राजनीतिक इतिहास क्या है और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है, कोई नहीं जानता है। यहां तक कि सत्तासीन जदयू के वरिष्ठ नेतागण भी यह नहीं जानते हैं कि आखिर इसी दिन शराबबंदी के पक्ष में मानव श्रृंखला का निर्माण क्यों किया जा रहा है।

गौरतलब है कि भारत के राजनीतिक इतिहास में 21 जनवरी एक सामान्य दिन की तरह दर्ज है। अलबत्ता अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई महत्वपूर्ण घटनायें घटित हुई हैं लेकिन किसी भी घटना का शराब से कोई लेना-देना नही है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि तीन दिनों के बाद यानी 24 जनवरी को ही जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती है जिन्होंने बिहार में पहली बार शराबबंदी लागू की थी। हालांकि जदयू के ही नेतागण यह मानते हैं कि 21 जनवरी को होने वाले कार्यक्रम का जननायक की जयंती से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं विश्लेषक भी यह मानते हैं कि जननायक की शराबबंदी नीतीश कुमार की शराबबंदी से पूर्णतया अलग थी। इसलिए उनकी स्मृति में मानव श्रृंखला का निर्माण कर नीतीश कुमार स्वयं को इतिहास पुरूष साबित करने के अवसर से चूकना नहीं चाहेंगे।

वहीं इसी महीने की 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस और 30 जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती है। इतिहास में इन दोनों तारीखों का उल्लेखनीय महत्व है। 30 जनवरी का महत्व इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि बिहार इस वर्ष को चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष के रूप में मना रहा है। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से खास तैयारी भी की गयी है। इसके अलावा महात्मा गांधी ने भी शराबबंदी के खिलाफ अभियान चलाया था। विश्लेषक मानते हैं कि नीतीश कुमार की मानव श्रृंखला का प्रत्यक्ष तौर पर महात्मा गांधी से भी कोई लेना-देना नहीं है।

बहरहाल विश्व में सबसे लंबी मानव श्रृंखला 11 दिसंबर 2004 को बांग्लादेश में बनायी गयी थी। तब बांग्लादेश आवामी लीग के नेतृत्व में 14 पार्टियों ने चुनाव कराने की मांग को लेकर मानव श्रृंखला का निर्माण किया था। यह मानव श्रृंखला 1050 किलोमीटर लंबी थी और इसमें पचास लाख लोग शामिल हुए थे।

संपादकीय : प्रकाश पर्व की लख-लख बधाई...

कहने की आवश्यकता नहीं है कि दुनिया के सभी धर्मों में एक साझी खासियत यही है कि सभी धर्म जीवन का मार्ग दिखाते हैं। सभी धर्मों के अपनी-अपनी संस्कृति अपने पर्व त्यौहार हैं। इन त्यौहारों के अपने महत्व भी हैं। ऐसा ही एक आनंददायक पर्व है दशमेश गुरू, श्री गुरू गोविन्द सिंह जी का 350वां प्रकाश पर्व। इस पांच दिवसीय आयोजन का जिस तरह से गुरू की धरती पाटलिपुत्र में किया गया, वह न केवल काबिलेतारीफ है, बल्कि आने वाले समय में इसे एक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार और उसका पूरा तंत्र बधाई की पात्र है।

अब यदि गुरू गोविन्द सिंह की महिमा की बात करें तो तथाकथित उनके चमत्कारों को छोड़ दें तो यह एक निर्विवाद सत्य है कि उन्होंने हिन्दू समाज में आयी जड़ता को समाप्त किया था। उनका खालसा पंथ तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह था तो श्रम के सहारे जीने वाले वंचित तबकों के नवजागरण की प्रक्रिया भी। अपने पंथ के सहारे गुरू गोविन्द सिंह ने यह साबित किया कि समाज में जातिपाति सब सत्ता हड़पने का हथियार मात्र है और यही वजह रही कि उनके पंच प्यारों में सब के सब दलित व पिछड़े समाज के थे। सिक्ख धर्म की इसी विशेषता संविधान निर्माता बाबा साहब डा. भीम राव आंबेडकर को उस समय प्रभावित किया था जब उन्होंने धर्म बदलना चाहा था। लेकिन उस समय तक सिक्ख धर्म में भी जाति व्यवस्था के विकार आ गये थे, जिसके कारण बाबा साहब ने बौद्ध धर्म को चुना।

असल में गुरू गोविन्द सिंह ने भारतीय सामाजिक व्यवस्था को एक नया आयाम दिया जो बाद में आजादी के बाद अपने पूर्ण रूप में सामने आया। उन्होंने यह स्थापित किया कि देश की बागडोर केवल द्विज और क्षत्रिय नहीं बल्कि वे भी संभाल सकते हैं जो असाध्य श्रम करते हैं। आज पूरा सिक्ख धर्म इसी बुनियाद पर टिका है। श्रम के सहारे सिक्ख धर्मावलम्बियों ने अपने आपको न केवल देश में बल्कि दुनिया के हर हिस्से में स्थापित किया है। इनकी उद्यमिता उस समय मिसाल बनी जब देश अन्नाभाव से गुजर रहा था। देश में पहली हरित क्रांति सिक्ख धर्मावलम्बियों के प्रांत पंजाब में हुआ तो इसकी वजह उनकी उद्यमिता ही रही।

बहरहाल गुरू गोविन्द सिंह ने आम इंसानों को सदियों से आ रही संर्कीणता को समाप्त करने की पहल की। ऐसे अदम्य साहस वाले इंसान की 350वीं जयंती पर पूरे देश को बधाई और यह उम्मीद कि आने वाले समय में हम सभी देशवासी गुरू गोविन्द सिंह की जातिविहीन सामाजिक व्यवस्था का निर्माण करेंगे और उनके द्वारा बतायी गयी उद्यमिता को आधार बनाकर राष्ट्र के नवनिर्माण में अपनी भूमिका का निर्वहन करेंगे।

गुरू गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाश पर्व की लख-लख बधाई

धर्मनिरपेक्षता की पहचान बना दशमेश गुरू का 350वां प्रकाश पर्व

दोस्तों, बिहार की राजधानी पटना का अपना शानदार इतिहास रहा है। कभी मगध की राजधानी रही इस धरती पर अनेक सभ्यता और संस्कृतियां पनपीं। 1984 के सिक्ख दंगे और अपवाद स्वरूप हुए सांप्रदायिक हिंसक झड़पों को छोड़ दें तो राजधानी पटना का स्वरूप हमेशा से धर्मनिरपेक्ष रहा है। फिर चाहे वह छठ का अनुष्ठान हो, नवरात्र का उत्सव हो या फिर मकदुम साहब का उर्स। हर धर्म-मजहब के लोग एक-दूसरे के आयोजन में हाथ बढ़ाते हैं। यहीं नजारा एक बार फिर दशमेश गुरू श्री गुरू गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाश पर्व के मौके पर देखने को मिल रहा है।

यहां तक कि गुरूद्वारे में जाकर शीश नवाने वालों में भी गैर सिख धर्मावलम्बियों की संख्या फिलहाल अधिक है। राज्य सरकार द्वारा किये गये अनेक प्रयासों के कारण पूरी राजधानी प्रकाशपर्व के रंग में रंग गयी है। गैर सिख धर्मावलम्बी भी गुरूद्वारे में जाकर स्वयं को ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनाने को उतर गये हैं। सूबे के जाने-माने गांधीवादी चिंतक डा. रजी अहमद के मुताबिक आजादी के बाद यह सबसे बड़ा आयोजन है जिसमें एक साथ लाखों लोग भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि 50 वर्ष पहले जब गुरू गोविन्द सिंह जी का 300वां प्रकाश पर्व मनाया गया था तब पटना सिटी के इलाके में भीड़ थी, लेकिन शेष पटना इससे अछूता ही था। लेकिन इस बार मानों पूरा पंजाब उतर आया है। डा. रजी के मुताबिक सफल आयोजन के लिए राज्य सरकार बधाई की पात्र है।

सबसे अधिक दिलचस्प यह है कि पटना सिटी जाने के लिए मुख्य मार्ग के दोनों किनारों पर कई बड़े मुहल्ले हैं जहां मुसलमान रहते हैं। लेकिन प्रकाश पर्व के श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो, इसके लिए उनलोगों ने भी अपने हिसाब से सड़क को साफ रखने से लेकर श्रद्धालुओं को हर प्रकार की सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। आलमगंज निवासी मो. निशात के मुताबिक पूरा पटना सिटी ही धर्म निरपेक्ष भारत का वास्तविक स्वरूप पेश करता है। जिस स्थान पर तख्त श्री हरिमंदिर है, वहीं बगल में मुगलकालीन मस्जिद भी है और बगल में ही एक जैन मंदिर भी। उन्होंने बताया कि इनके इलाके में बड़ी संख्या में अलग-अलग धर्मों के लोग एक साथ बिना किसी क्लेश अथवा विवाद के रहते हैं। छठ के मौके पर हम सड़क साफ करने से लेकर घाट तक की सफाई करते हैं। इसी प्रकार हमारे हिन्दू पड़ोसी ईद के मौके पर हमारे साथ होते हैं।

बहरहाल प्रकाश पर्व अपने पूरे परवान पर है। आगामी 5 जनवरी को गुरू गोविन्द सिंह की जयंती के बाद इसका समापन होगा। राज्य सरकार के इंतजाम मेहमानों को आकर्षित कर रहे हैं तो दूसरी ओर पटना सिटी की धर्म निरपेक्षता उन्हें सबसे अधिक प्रभावित भी कर रही है। यह स्थिति जब है जबकि प्रकाश पर्व को लेकर राज्य सरकार ने पटना सिटी के इलाके में सुरक्षा के लिहाज से तमाम तरह के उपाय कर रखे हैं और इस कारण स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है। अपने परेशानी को उसके हाल पर छोड़ पटना सिटी के लोग फिलहाल अपना धर्म-मजहब की बंदिशों को छोड़ मेहमानबाजी में जुटे हैं।

सीएम ने किया जन सुझावों का स्वागत, झपकी लेते रहे माननीय

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरूवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद सभाकक्ष में लोक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर पथ निर्माण कार्य, भवन निर्माण, ऊर्जा, ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण, नगर विकास एवं आवास, पंचायती राज, जल संसाधन, लघु जल संसाधन, उद्योग, गन्ना उद्योग, विज्ञान एवं प्रावैधिकी, सूचना प्रावैधिकी एवं पर्यटन विभाग से संबंधित मामलों पर लगभग 20 लोगों द्वारा मुख्यमंत्री को अपना सुझाव दिया गया और मुख्यमंत्री ने उनके सुझावों का स्वागत किया। खास बात यह रही कि जब श्री कुमार लोगों से सुझाव ले रहे थे तभी उनके कबीना सहयोगी मसलन शिक्षा मंत्री डा अशोक चौधरी, उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार आदि नींद की झपकी ले रहे थे।

मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम सभी को नववर्ष की बधाई एवं शुभकामनायें दी। आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम में बांका से अरशद-उल-कादरी अंश, मुजफ्फरपुर से जितेन्द्र कुमार, भोजपुर से राजेन्द्र प्रसाद, नालंदा से अजीत कुमार सिन्हा, नवादा से अजीत कुमार, नालंदा से सुरेन्द्र कुमार सिंह, मधुबनी से गणेश साह, बोधगया से संजय कुमार, पटना से मधुसूदन कुमार सिन्हा, पटना से रंजीत कुमार, मुजफ्फरपुर से धनंजय कुमार श्रीवास्तव, लखीसराय से मो. कमाल हसन, पटना से अमृता सिंह, पटना से विरेन्द्र दयाल, पश्चिम चम्पारण से दीपू मधेशिया, सीतामढ़ी से गोविन्द शर्मा सहित अन्य ने अपने-अपने सुझाव एवं राय मुख्यमंत्री को दिये। प्राप्त सुझाव एवं राय पर संबंधित विभाग के प्रधान सचिव/सचिव ने वस्तुस्थिति को स्पष्ट किया। लोगों से प्राप्त सुझाव एवं राय पर मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों के प्रधान सचिव/सचिव को कार्रवाई करने हेतु निर्देषित किया। लोगों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक शिकायत निवारण कानून लागू किया गया हैं। लोगों को अगर शिकायत हो तो अनुमंडल एवं जिला में बनाये गये लोक शिकायत निवारण केन्द्र पर जाये और अपना षिकायत दर्ज करायें। षिकायतों का तुरंत निष्पादन होगा। उद्योग विभाग से संबंधित चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमी अच्छा उत्पाद बनायें। उद्योग लगाने के लिये सरकार सभी संभव सहायता देगी। आप गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बनायें। सरकार उत्पादों के ब्रांडिंग में मदद करेगी।

लोक संवाद कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, उद्योग मंत्री जयकुमार सिंह, ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार, नगर विकास एवं आवास मंत्री महेश्वर हजारी, पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत, गन्ना उद्योग मंत्री खुर्षीद उर्फ फिरोज अहमद, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री कृष्ण नंदन प्रसाद वर्मा, पर्यटन मंत्री अनीता देवी, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, प्रधान सचिव मंत्रिमण्डल समन्वय ब्रजेश मेहरोत्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चन्द्रा, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा सहित संबंधित विभागों के प्रधान सचिव/सचिव उपस्थित थे।

प्रकाश पर्व में सभी करें सहयोग : मुख्यमंत्री

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दशमेश गुरू, गुरू गोविन्द सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व के सफलतापूर्वक आयोजन में सभी से सहयोग मांगा है। गुरूवार को लोक संवाद कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रकाष पर्व में आप सभी का सहयोग चाहिये। उन्होंने कहा कि देश भर से और यहां तक कि देश के बाहर से लोग आ रहे हैं। बिहार के बारे में अच्छी सोच के साथ वे लौटें इसमें सबका सहयोग अपेक्षित है और आप सब से भी यही हमारी अपेक्षा है और आग्रह है। उन्होंने कहा कि श्री गुरू गोविन्द सिंह जी के 350वें जन्म उत्सव के अवसर पर दुनिया भर से लोग आये हुये हैं, मेरी यही इच्छा है कि पूरे बिहार को प्रकाशपर्व मय बना दें।

कहां से आती और कहां जाती है राजनेताओं की कमाई?

नीतीश कुमार की कमाई का हिसाब

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - राजनीति में दिखावा करना भी एक अति महत्वपूर्ण उपक्रम है। इसका एक प्रमाण यह भी कि दस लाख का सूट पहनने वाले प्रधानमंत्री अभी भी अपने आपको गरीब ही बताते हैं। वहीं दिखावे की इस राजनीति में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कम नहीं हैं। उनके ही द्वारा दिये गये आंकड़े उनके दिखावे की कलई खोलती है। यह अत्यंत ही दिलचस्प है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की संपत्ति पिछले साल की तुलना में दो लाख कम हो गयी है, जबकि बेटे निशांत की संपत्ति में 13 लाख रुपये की कमी आयी है।

मसलन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी संपत्ति विवरणी में इस बार बताया है कि उनके पास वर्तमान में कुल 56 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति है, इसमें दिल्ली में 1000 वर्गफुट में बने एक फ्लैट, जिसकी वर्तमान कीमत 40 लाख रुपये है, के अलावा 10 गायें और पांच बछड़े हैं।

जबकि वर्ष 2004 में जब वे लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे और तब जो उन्होंने अपनी संपत्ति का विवरण चुनाव आयोग को दिया था, उसके अनुसार तब उनके पास करीब 43 लाख रुपए की संपत्ति थी। इसमें उनका वह घर भी शामिल है जो उन्होंने दिल्ली के संसद विहार कालोनी में खरीदा था। उस समय इस मकान की कीमत 11 लाख 69 हजार रुपए थी। जबकि वर्तमान में नीतीश कुमार इसकी कीमत 40 लाख बता रहे हैं। इस प्रकार यदि श्री कुमार की संपत्ति में से इस मकान को हटा दें तो उनके पास केवल 16 लाख रुपए की चल-अचल संपत्ति है। वहीं 2004 में उनके द्वारा दिये विवरणी में से इस मकान को हटा दें तब भी उनकी संपत्ति करीब 32 लाख रुपए थी।

चल अचल संपत्ति के साथ ही नकदी, आभूषण आदि का खेल भी बहुत निराला है मसलन जारी दस्तावेज के मुताबिक मुख्यमंत्री के पास 42566 रुपये नकद हैं. यह पिछले साल की तुलना में यह करीब दो हजार रुपये अधिक है। उनके तीन बैंक खातों में लगभग 78 हजार रुपये जमा हैं। उनके पास दो गाड़ियां (एक इको स्पोर्ट्स और एक हुंडइ की आइ 10 कार) हैं। जबकि वर्ष 2004 में उनके पास केवल 9500 रुपए थे। इसके अलावा 12,200 रुपए के स्वर्णाभूषण और केवल एक मारूति कार 800 थी। दिलचस्प यह कि जहां एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सीएम होने के बावजूद अपनी संपत्ति के हिसाब से गरीब होते दिखते हैं तो दूसरी ओर उनके बेटे निशांत हैं जो बिना किसी रोजी-रोजगार के ही अपने पिता से अमीर हैं। इनके बेटे के पास एक करोड़ 11 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति है। मुख्यमंत्री के नाम पर न तो कहीं खेतिहर जमीन वर्ष 2004 में थी और न ही वर्तमान में है। यहां तक कि पटना में भले ही उनके नाम से दो-दो शानदार बंगला है, लेकिन अपने लिए एक धुर जमीन भी नहीं है।

करें सकारात्मक पहल : ड्रामेबाज पीएम से देश को करायें आजाद

दोस्तों, नया साल आ चुका है। आइये इसका स्वागत इस सकारात्मक पहल के साथ करें कि हम अपने प्यारे देश को ड्रामेबाज पीएम की ड्रामेबाजी से मुक्त करायें। वर्ष 2016 में देश और दुनिया ने कई बदलाव देखे। एक बड़ा बदलाव डोनाल्ड ट्रंप के रुप में सामने आया। हालांकि इसका नफ़ा और नुकसान दोनों इस नये वर्ष में पता चलेगा। लेकिन हिन्दुस्तान कराह रहा है। नोटबंदी के तुगलकी फ़रमान के बाद पूरे देश में हाहाकार मची है। किसान, मजदूर से लेकर मध्यम वर्ग तक सभी ड्रामेबाज पीएम नरेंद्र मोदी के ड्रामे से परेशान है।

यह नरेंद्र मोदी का ड्रामा ही है कि उन्होंने वर्ष 2016 के अंतिम दिन देश को संबोधित किया। कदापि इसका एक मकसद यह भी रहा कि नये साल की पहली सुबह जब लोग अखबार खोलें तो लोगों को पीएम की ड्रामेबाजी दिखायी दे। वैसे यह पूरे तरीके से हास्यास्पद रहा कि पीएम ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर देश का आम बजट लोगों के सामने रख दिया। उन्होंने नोटबंदी के पचास दिन के बाद अपनी विफ़लताओं को अपने नये ड्रामे से ढंकने की कोशिश की। मसलन प्रधानमंत्री मोदी ने गर्भवती महिलाओं के लिए 6 हजार रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ये पैसे उनके खातों में सिधे जमा कराया जाएगा। नोटबंदी की चर्चा करते हुए ड्रामेबाज पीएम ने कहा कि यह देश के लिए शुद्धि यज्ञ था। भ्रष्ट्राचार, कालाधन और जाली नोटों के जाल ने साधारण आदमी को भी मजबूरन घूस देना पड़ता था। करोड़ों देशवासी इससे बाहर निकलना चाहते थे।

वित्त मंत्र अरुण जेटली को व्यर्थ साबित करते हुए पीएम मोदी ने आम जनता को फ़िर से झांसा देते हुए कहा कि स्वतंत्रता के इतने साल के बाद भी लाखों गरीबों के पास अपना घर नहीं है। मध्यम वर्ग की पहुंच से भी घर दूर हो गया था। ये घर खरीद सकें इसके लिए सरकार ने आवास योजना में दो बड़े फैसले लिये हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नये घर देने के लिए दो नयी स्कीम बनायी गयी है। इसके तहत 2017 में 9 लाख के कर्ज में 4 फीसदी और 12 लाख के कर्ज पर 3 फीसदी की छूट मिलेगी। शहरों में रहने वालों को झांसा देने के बाद पीएम ने गांव के लोगों को भी झांसा दिया और कहा कि गांवों में बनने वाले घरों की संख्या को बढ़ा दिया गया है। जितने घर बनने वाले थे उससे 33 फीसदी ज्यादा घर बनेंगे। 2017 में जो लोग गांव में अपने घर का निर्माण करना चाहते हैं। उन्हें 2 लाख रुपये तक के ऋण में 3 प्रतिशत ब्याज की छूट दी जायेगी।

बहरहाल मामला देश का है और देश के लिए सकारत्मकता इसी में है कि इसे ड्रामेबाजी करने वाले पीएम के आतंक से मुक्त करायें। लोकतांत्रिक पद्धति में पांच वर्ष की मजबूरी है लिहाजा ढाई वर्ष तक पीएम की ड्रामेबाजी पूरे देश को बर्दाश्त करनी होगी। लेकिन यह समय भी कट जायेगा और देश ड्रामेबाजी से अलग विकास की असली राह पर अग्रसर होगा। इस सकारात्मक उम्मीद के साथ आप सभी को अपना बिहार परिवार की ओर से नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

सूबे में शराब का निर्माण पूर्णत: बंद

नोटबंदी से देश का विकास दर घटा : मीसा

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - राजद सांसद डा. मीसा भारती ने कहा है कि नोटबंदी के कारण देश के विकास पर बुरा असर पड़ा है। आईएमएफ के अनुसार भारत का विकास दर 7.6% से घटकर 6.6% हो जाएगा और जो यह जानना चाहते हैं कि एक प्रतिशत अंक गिरने से धरातल पर क्या फर्क दिखेगा, तो वह यह जान लें कि एक प्रतिशत अंक बढ़ने से 20 लाख लोग गरीबी रेखा से बाहर आ जाते हैं। डा. भारती ने कहा कि गलत आर्थिक नीतियों का सबसे अधिक खामियाजा ये हाशिए पर पड़े लोग ही उठाते हैं। हम आप तो बस आलोचना या अनुभव कर पाते हैं, इसका दंश तो समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोग ही सबसे क्रूरतम रूप में झेलते हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा मेक इन इंडिया का आहवान भी बिना किसी रोडमैप के हवा हवाई साबित हो रही है।

राज्य मंत्रिपरिषद ने लिया राजगीर में फैसला, 32 प्रस्तावों पर लगी मुहर, मानव श्रृंखला के पहले रूठे शिक्षकों को मनाने हेतु बकाये वेतन का भुगतान, 23 फरवरी से बिहार विधानमंडल का बजट सत्र, 27 को पेश होगा बजट

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - मंगलवार को राजगीर की हरी-भरी वादियों के बीच कन्वेंशन सेंटर में राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के अलावा अन्य मंत्रियों सहित 40 लोगों ने भाग लिया। बैठक में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्य मंत्रिपरिषद ने सूबे में शराब निर्माण को पूर्णत: बंद करने का निर्णय लिया। मंत्रिमंडल सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने बताया कि मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अन्तर्गत बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम, 2016 की धारा-24 में राज्य सरकार को प्रदत्त शक्तियों के आलोक में अनाज आधारित आसवनी से ईएनए निर्माण, विदेशी शराब विनिर्माणशाला/बोटलिंग प्लांट की अनुज्ञप्ति का वित्तीय वर्ष 2017-18 से नवीकरण नहीं करने की स्वीकृति दी गई।

श्री मेहरोत्रा ने बताया कि बैठक में कुल 32 प्रस्तावों को सहमति प्रदान की गयी।फैसले के मुताबिक खुले में शौच मुक्त पंचायतों में प्राथमिकता के आधार पर हाइस्कूल बनाये जायेंगे। सबसे महत्वपूर्ण यह कि मानव श्रृंखला कार्यक्रम के पहले शिक्षकों में भड़के आक्रोश को देखते हुए राज्य मंत्रिपरिषद ने उनके बकाया भुगतान के लिए 21 सौ करोड़ रुपये व्यय की स्वीकृति दी। साथ ही विधानमंडल के बजट सत्र की स्वीकृति भी प्रदान की गयी। श्री मेहरोत्रा ने बताया कि 23 फरवरी से 31 मार्च तक विधानमंडल के सत्र के आयोजन की स्वीकृति दी गयी। वहीं 27 फरवरी को बजट पेश करने की स्वीकृति पर मुहर लगी। कैबिनेट में पटना के डाकबंगला चौराहे पर आइटी पार्क बनाये जाने की स्वीकृति मिली। कैबिनेट में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित दो दर्जन से अधिक मंत्रियों ने इसमें हिस्सा लिया। बैठक शुरू होने से पहले ही प्रधान सचिव ने सभी मंत्रियों को अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर को घुमाया।

बताते चलें कि राजगीर में करीब सात साल बाद कैबिनेट की बैठक हुई। सुबह साढ़े ग्यारह बजे बैठक शुरू हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित 40 लोग और शामिल हुए, जिसमें मंत्री और विधायक के अलावा अधिकारी भी शामिल थे। उल्लेखनीय है कि पिछली बार शांति स्तूप परिसर में कैबिनेट की बैठक हुई थी।

मंत्री को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - जबरन घर खाली कराने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री मदन मोहन झा तथा उनके निजी सचिव अरुण पाठक को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। साथ ही मामले की सुनवाई के दौरान पटना के एसएसपी सहित पटना सिटी के एसडीओ तथा अगमकुआं थाना प्रभारी एवं दारोगा बबन प्रसाद को कोर्ट में हाजिर रहने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की एकलपीठ ने मंगलवार को मुमताज अहमद की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई की। अदालत को बताया गया कि मंत्री की ओर से उनके निजी सचिव अरुण पाठक ने पुलिस में भूतनाथ रोड स्थित हाउसिंग कॉलोनी के फ्लैट नंबर 30 को खाली कराने की अर्जी दी थी। उनकी अर्जी पर पुलिस ने जांच कर अपनी रिपोर्ट दी और पटना सिटी एसडीओ ने दंडाधिकारी को प्रतिनियुक्ति कर फ्लैट खाली कराने का आदेश जारी कर दिया। उनका कहना था कि आवेदक का पक्ष जाने बिना सभी कार्रवाई की गई। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए मंत्री एवं उनके सचिव को नोटिस जारी किया। साथ ही मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 फरवरी तय कर दी।

न्यायिक सेवा में आरक्षण मामले में हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - न्यायिक सेवा में दिए गए आरक्षण को लेकर दायर मामले में पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग सहित हाईकोर्ट प्रशासन व बीपीएससी से जवाब तलब किया है। अदालत ने सभी पक्षों को 30 जनवरी तक जवाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश किया है। न्यायमूर्ति नवनीत प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति विकास जैन की खंडपीठ ने शत्रुघ्न प्रसाद सिंह की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। अदालत को बताया गया कि गत दिनों राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से न्यायिक सेवाओं में आरक्षण देने का अधिसूचना जारी की गई है। उनका कहना था कि आरक्षण के बारे में जो नीति निर्धारित की गई, उसे सही ठंग से से लागू किए बगैर आरक्षण दे दिया गया है। अदालत ने इस मुद्दे पर सामान्य प्रशासन विभाग सहित हाईकोर्ट प्रशासन व बीपीएससी को जवाब तलब किया है।

सड़क योजनाओं को सरकार ने खोला खजाना

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - मंगलवार को नालंदा के राजगीर कन्वेंशन सेंटर में मंत्रिपरिषद् की बैठक में कुल 32 प्रस्तावों पर निर्णय लिये गये। इनमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के लिए वित्तीय व्यय के प्रस्ताव शामिल रहे। बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने जानकारी देते हुए कहा कि पथ निर्माण विभाग के अन्तर्गत पथ प्रमंडल, रोसड़ा के अन्तर्गत सिंघिया-हिरनी पथ (बिरौल-सिंघिया-पिपरा पथ) के किमी 0.00 से 10.00 तक (कुल 10.00 किमी पथांश लंबाई) में मिट्टी कार्य, पथ परत कार्य, सिमेन्ट कंक्रीट पथ कार्य, पथ फर्निचर कार्य, विविध कार्य, क्रॉस डेज्न कार्य, आकस्मिक कार्य, पथ संधारण कार्य, चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य कुल 2519.78 लाख (पच्चीस करोड़ उन्नीस लाख अठहत्तर हजार) रुपए के अनुमानित व्यय पर करने की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गयी। इसके अलावा बिहारशरीफ पथ प्रमंडल के अन्तर्गत पावापुरी-घोसरावां पथ के किमी 0 से 5.06 (कुल 5.06 कि०मी० पथांश लंबाई) में क्रॉस डेज्न, डेज्न, बचाव कार्य, भूमि अधिग्रहण तथा रोड साईनेज आदि कार्य सहित चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य कुल 2234.34 लाख (बाईस करोड़ चैंतीस लाख चैंतीस हजार) रुपए के प्रथम पुनरीक्षित अनुमानित लागत पर करने हेतु प्रथम पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति मंत्रिपरिषद ने प्रदान की।

श्री मेहरोत्रा ने बताया कि नाबार्ड ऋण योजना के तहत भागलपुर जिलान्तर्गत नवगछिया के विजयघाट के समीप कोशी नदी पर कुल 10.87 किमी लम्बाई में पहुँच पथ निर्माण कार्य, क्रॉस-डेनेज कार्य, गार्डड बाँध निर्माण कार्य, आरओबी निर्माण कार्य, रोड फर्निचर एवं बचाव कार्य सहित 1840 मीटर लंबाई का 4-लेन उच्च स्तरीय आरसीसी पुल का निर्माण कार्य कुल 46784.87 लाख (चार सौ सड़सठ करोड़ चौरासी लाख सतासी हजार) रुपए की प्रथम पुनरीक्षित अनुमानित लागत पर करने की प्रथम पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गयी। साथ ही बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के नियंत्रणाधीन राज्य पथों पर अवस्थित विक्रमशीला सेतु पर दिनांक-12.11.2016 से 14.11.2016 की मध्य रात्रि तक एवं सभी पुलों पर दिनांक-26.11.2016 से 02.12.2016 की मध्य रात्रि तक पथकर संग्रह स्थगित रखने की घटनोत्तर स्वीकृति दी गई।

प्रधान सचिव ने बताया कि पथ निर्माण विभाग के अन्तर्गत भारत-नेपाल सीमा के समानान्तर बिहार राज्य अन्तर्गत पश्चिम चम्पारण जिला के उत्तर प्रदेश राज्य सीमा पर राष्ट्रीय उच्च पथ सं-28 बी. के गोबरहिया ग्राम (मदनपुर के निकट) से प्रारंभ होकर पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया होते हुए किशनगंज जिला के पश्चिम बंगाल राज्य सीमा पर गलगलिया तक, कुल 552.293 किमी दो लेन पथ एवं पुल-पुलिया निर्माण कार्य, भू-अर्जन इत्यादि कार्य, कुल 3935.1304 करोड़ (तीन हजार नौ सौ पैंतीस करोड़ तेरह लाख चार हजार) रुपए के प्रथम पुनरीक्षित अनुमानित लागत पर करने हेतु प्रथम पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई।

सरकार चलाने में नीतीश अक्षम : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - नेता प्रतिपक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार के पास जनता के लिए कोई संवेदना नहीं बचा है उन्हें सिर्फ अपने नाम और कुर्सी से लगाव है। उन्होंने कहा कि बिहार की राजधानी में इतनी बड़ी घटना होती है और मुख्यमंत्री जी के पास घटना स्थल पर जाने, घायलों से मिलने और मृतकों के परिवारों का आँसू पोछने का भी समय नहीं है। अपनी विफलता को छुपाने के लिए अब बयान देते हैं कि उन्हें कुछ पता ही नहीं था। घटना के 2 घंटे बाद तक उन्हें पता भी नहीं चलता है तो राजधानी के बाहर अगर कोई हादसा होता तो उन्हें दो दिनों तक पता नहीं चलता। इससे साफ होता है कि नीतीश जी का सरकार, प्रशासन किसी पर भी पकड नहीं है इसलिए उन्हें पद पर भी बने रहने का कोई हक नहीं है, नीतीश कुमार घटना की जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दें।

शहाबुद्दीन मामले में फैसला सुरक्षित

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड और तेजाब कांड समेत कई मामलों में सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल शिफ्ट करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. शहाबुद्दीन पर 45 मामले दर्ज हैं और पत्रकार हत्याकांड की जांच बिहार सरकार ने सीबीआइ से कराने की सिफारिश पहले ही कर चुकी है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायाधीश अमिताव राय की खंडपीठ के समक्ष सीबीआइ ने इस मामले में दलील देते हुए कहा था कि शहाबुद्दीन को तिहाड़ जेल हस्तांतरित करने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है. आरोपी के राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए ऐसा करना जरूरी है.

पहले हुई सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा था कि आरोपी पक्ष की ओर से बार-बार निष्पक्ष सुनवाई की बात कही गयी है, लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए कि आरोपी के साथ पीड़ित पक्ष के लिए निष्पक्ष सुनवाई काफी मायने रखती है. पीड़ित के साथ किसी प्रकार की नाइंसाफी को न्यायोचित नहीं माना जा सकता है. पीड़ित पक्ष को न्याय मिलना जरूरी है ताकि न्याय के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे. सुनवाई के दौरान शहाबुद्दीन के वकील ने पहले कहा था कि सभी मामले राजनीति से प्रेरित है और अगर आरोपी को बाहर के जेल में भेजा गया तो यह उसके संवैधानिक अधिकारों का हनन होगा. इस मामले में बिहार सरकार, सीबीआइ, शहाबुद्दीन और पीड़ित पक्ष अपनी दलील खंडपीठ के सामने रख चुके हैं और उम्मीद है कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला सुना सकता है.

हाईकोर्ट ने बदला राजभवन का फैसला, दरभंगा संस्कृत विवि के बर्खास्त कुलपति को बहाल करने का आदेश

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि के बर्खास्त कुलपति डॉ. देवनारायण झा को पटना हाइकोर्ट में सुनवाई हुई. पटना हाइकोर्ट ने देवनारायण झा को पुन: बहाल करने का निर्देश दिया है. इससे पूर्व 10 अगस्त को राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने देवनारायण झा को बर्खास्त कर दिया था. देवनारायण झा पर फर्जी कागजात के आधार पर वीसी बनने और वित्तीय अनियमितता और अवैध बहाली में संलिप्तता का आरोप लगा था. राजभवन की चार सदस्यीय टीम ने 27 जून को कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि पहुंची थी और मामले की जांच की थी. देवनारायण झा के खिलाफ अवैध बहाली और आर्थिक अनियमितता का आरोप लगा था. टीम द्वारा जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद देवनारायण झा को बर्खास्त कर दिया गया था. वहीं एक दूसरे सुनवाई में पटना हाइकोर्ट ने सब आॅर्डिनेट जूडिशियरी में आरक्षण नियमों के चुनौती की याचिका पर हाइकोर्ट में सुनवाई की. कोर्ट ने बिहार लोक सेवा आयोग को हाइकोर्ट में 2 सप्ताह के अंदर हलफनामा दायर करने का आदेश दिया.

भाजपा के परिवारवाद पर राजद ने बोला हमला

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष कारी सोहैब ने उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव में भाजपा के द्वारा जारी उम्मीदवारों की सूची में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के परिवार को तथा केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे को टिकट दिये जाने पर कहा है कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते है कि लोग परिवार के टिकट के लिए दवाव नहीं बनावें और दूसरी ओर परिवारवाद को बढ़ावा देते है।

उन्होंने कहा कि यह भाजपा की दोहरी मानसिकता है तथा जनता को धोखा देने का प्रयास है। क्या भारत की भोली-भाली जनता को बेवकुफ समझती है? एक ओर भाजपा परिवारवाद पर दूसरे दलों को उपदेश देने का काम करती है तथा जनता के द्वारा चुने गये जनप्रतिनिधियों को अपमानित करने का काम करती है, भारत की जनता जानती है कि भाजपा स्वयं क्षेत्रवाद, अलगाववाद, साम्प्रदायवाद तथा परिवारवाद की राजनीति करती है। भाजपा के चाल, चरित्र एवं चेहरा को जनता जान चुकी है।

खुशहाल बिहार के लिए शराबबंदी जरूरी : मिश्र

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र ने शराब मुक्त बिहार के लिए आगामी 21 जनवरी को आयोजित होने वाला मानव श्रृंखला में राज्य की जनता के जनहित में राज्य के मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के सभी 30 हजार सदस्यों से भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि 03 अप्रैल, 2016 हाजीपुर के चतुर्थ राष्ट्रीय सम्मेलन में शराब मुक्त खुशहाल बिहार बनाने हेतु शपथ के कार्यान्वयन, सामाजिक बदलाव, समाज को मजबूती प्रदान करने, के लिए सम्पूर्ण राज्य में मानव श्रृंखला को सफल बनाने के लिए प्रतिष्ठान के सभी सदस्यों और आम लोगों से सम्पर्क कर अधिक से अधिक संख्या में भाग लें।

हादसे में नाव नहीं, डूब गयी सरकार : पप्पू

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - जन अधिकार पार्टी (लो) के संरक्षक और सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा है कि राज्य सरकार के पास आपदा प्रबंधन की कोई तैयारी नहीं है। राज्?य भर में अलग-अलग मौकों पर हुए हादसे बताते हैं कि सरकार हादसों को लेकर संवेदनशील नहीं है। मकर संक्रांति के दिन पटना के एनआइटी घाट में नाव नहीं, सरकार डूबी है।

पटना में पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि जिन आयोजनों से सरकार को श्रेय मिलता है, उसको लेकर सरकार व्यापक स्तर पर तैयारी करती है। प्रकाशोत्सव और कालचक्र पूजा की तैयारी और व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को श्रेय मिलने वाला था तो उन्होंने व्यापक तैयारी की। श्री यादव ने कहा कि आम लोगों के त्योहार मकर संक्रांति को लेकर पूरी व्यवस्था लापरवाह बनी रही। पूरा प्रशासनिक महकमा मानव श्रृंखला की तैयारी में जुटा रहा। दियारे में गए हजारों लोगों की चिंता सरकार को नहीं थी। उन्होंने इस हादसे की न्यायिक जांच की मांग की।

श्री यादव ने कहा कि नशाबंदी के नाम पर 21 जनवरी को बनने वाली मानवश्रृंखला का जन अधिकार पार्टी (लो) विरोध करती है। मानव श्रृंखला को लेकर पूरा बिहार खौफ में है। पूरा सरकारी महकमा के साथ निजी स्कूलों, संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों को भी जबरन मानव श्रृंखला बनाने को विवश किया जा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश की घटना की चर्चा करते हुए श्री यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साहसिक निर्णय से लोकतंत्र मजबूत हुआ है। जन अधिकार पार्टी अखिलेश यादव के निर्णय के साथ है। अखिलेश यादव ने नये समाजवादी सोच की शुरूआत की है। पत्रकार वार्ता में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुपति प्रसाद सिंह, राष्ट्रीय महासचिव प्रेमचंद सिंह, मंजयलाल राय, राजेश रंजन पप्पू आदि मौजूद थे।

नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन आज

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - नोटबन्दी के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेसी बुधवार को प्रदर्शन करेंगे। इस क्रम मे राजधानी पटना में कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता भारतीय रिजर्व बैंक के सामने अपना विरोध प्रदर्शित करेंगे। इस आशय की जानकारी प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डा. हरखु झा ने दी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के वरीय सदस्य पूर्व विदेश मंत्री डा. सलमान खुर्शीद, प्रभारी सचिव के.एल. शर्मा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अध्यक्ष डा. अशोक चौधरी, कांग्रेस के सभी मंत्रीगण, प्रदेष कांग्रेस कमिटी के पदाधिकारीगण शाामिल होंगे।

उन्होंने बताया कि कि दूसरे चरण के क्रम में ही 23 जनवरी 2017 को राज्य स्तरीय जन-वेदना सम्मेलन का आयोजन पार्टी मुख्यालय, सदाकत आश्रम में दिन के 12 बजे किया गया है जिसकी अध्यक्षता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. अशोक चौधरी करेंगे। बताते चलें कि इससे पहले नोटबंदी के खिलाफ पहले चरण में 29 दिसम्बर को राज्यस्तरीय संवाददाता सम्मेलन, 2 जनवरी, 2017 को जिलास्तरीय संवाददाता सम्मेलन, 6 जनवरी को जिला स्तरीय धरना कार्यक्रम, 9 जनवरी को जिला मुख्यालय पर महिला कांग्रेस द्वारा थाली पीटो कार्यक्रम, राज्य स्तर पर कांग्रेस की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किये गये थे।

धूमधाम से मनाई जाएगी जननायक की जयंती : पूर्वे

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - राष्ट्रीय जनता दल की ओर से प्रदेश से लेकर पंचायत तक जननायक कपूर्री ठाकुर की जयंती समारोह धूमधाम से मनाई जाएगी। पटना में 24 जनवरी, 2017 को राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद जयंती समारोह का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही सभी जिला में जननायक कर्पूरी ठाकुर जयंती पखवारा मनाया जाएगा। मंगलवार को तैयारियों की समीक्षा के बाद आयोजित पे्रस कांफ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष डॉ0 रामचन्द्र पूर्वे एवं प्रधान महासचिव मुन्द्रिका सिंह यादव ने यह जानकारी दी। प्रदेष अध्यक्ष ने कहा कि 24 जनवरी, 2017 को राजद प्रदेश कार्यालय में भव्य समारोह का आयोजन किया गया है, जिसका उद्घाटन लालू प्रसाद करेंगे। समारोह में पार्टी के सभी मंत्री, सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, विधान पार्षद, सभी पूर्व विधायक, सभी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष, सभी जिलाध्यक्ष, सभी पदाधिकारी और राज्य कार्यकारिणी के सदस्य सहित पार्टी के तमाम नेता उपस्थित रहेंगे। 28 जनवरी, 2017 से 12 फरवरी, 2017 तक सभी जिलों में जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती पखवारा समारोहपूर्वक मनाना है। जयंती समारोह के लिए राजद अतिपिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेष अध्यक्ष प्रगति मेहता को तैयारी समिति का संयोजक बनाया गया है। सभी जिलों के लिए प्रभारी भी मनोनीत किये जा रहे हैं।

इसके पूर्व प्रदेश कार्यालय में मंगलवार को बैठक हुई जिसमें तैयारी की समीक्षा की गई। बैठक के अंत में पटना नाव हादसे में मारे गए सभी लोगों के प्रति गहरी शोक संवेदना प्रकट करते हुए दो मिनट का मौन धारन किया। साथ ही राजद के वरिष्ठ नेता पूर्व एमएलसी रामनंदन सिंह के निधन पर भी गहरी शोक संवेदना व्यक्त की गई। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष रामनारायण मंडल, प्रदेश प्रवक्ता प्रगति मेहता पटना जिलाध्यक्ष देवमुनी सिंह यादव, प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन, मुनीलाल यादव, देवकिशुन ठाकुर, महताब आलम, सतीश गुप्ता सहित अन्य नेता उपस्थित थे।

विपक्ष पूरी तरह हताश और निराश : जदयू

पटना(अपना बिहार, 18 जनवरी 2017) - जदयू प्रवक्ता नवल शर्मा ने कहा है कि सूबे में विपक्ष पूरी तरह हताश और निराश हो चुका है । केवल तथ्यहीन और भ्रामक आरोपों की बैसाखी के सहारे दिव्यांग विपक्ष अपने को जिन्दा रखे हुए है । उन्होंने कहा कि विपक्ष के इन आरोपों से घबड़ाये बिना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस समर्पण भाव से बिहार के विकास में अपने को झोंक रखा है उसे भी लोग देख और समझ रहे हैं । सत्ता के भूख से बेचैन बीजेपी नेताओं के पेट में जिस तरह चूहे दौड़ रहे हैं उसे भी जनता देख रही है। श्री शर्मा ने कहा कि पटना नाव दुर्घटना को सरकार ने चुनौती के रूप में लिया है और दोषियों को दंडित कर सरकार न्यायप्रियता का कठोर उदाहरण पेश करेगी । पर बीजेपी ने जांच रिपोर्ट आये बिना ही अपना निष्कर्ष सुना दिया जो यह साफ दर्शाता है कि बीजेपी की मंशा दोषियों को दंडित करने की नहीं बल्कि राजनीतिक रोटी सेंकने की है।

नाव हादसा : सरकार ने मानी चूक

दियारा में अब नहीं होगा कोई आयोजन, मुख्य सचिव की अनुमति के बाद ही होगा कोई बड़ा आयोजन, विज्ञापन में अपने चित्र के इस्तेमाल पर जताया एतराज, डीएम नहीं डीआईजी शालीन और प्रत्यय अमृत करेंगे हादसे की जांच

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह मान लिया है कि मकर संक्रांति के मौके पर हुए हादसे का कारण प्रशासनिक चूक है। सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हर आयोजन मेरे स्तर से नहीं होता है। हादसे के बाद चौतरफा आलोचनायें झेल रहे मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना से उन्हें गहरा सदमा लगा है। इस घटना से सभी लोग दुखी हैं। उन्होंने कहा कि अब मुख्य सचिव की अनुमति के बगैर बड़ा आयोजन करने की अनुमति नहीं दी जायेगी। इसके लिए नियम बनायेंगे और तय एसओपी का पूरी तरह पालन होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के आयोजन में हर पहलू की जांच होनी चाहिए। हमारे स्तर पर होने वाले कार्यक्रम की मॉनेटरिंग और समीक्षा समय-समय पर की जाती है। इसी का परिणाम प्रकाश पर्व और काल चक्र पूजा का समापन सफलता पूर्वक किया गया। उन्होंने कहा कि हर कार्यक्रम तो मेरे स्तर पर होता नहीं है। एक चूक ने सारी चीजों को पीछे की ओर धकेल दिया। इससे आप मेरे मन: स्थिति की कल्पना कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अब भविष्य में इस तरह की घटना न घटे इसकी तैयारी होगी। पहले से भी एसओपी (स्टैंडर आॅपरेटिंग प्रोसिड्योर)बना हुआ है। इसकी एक-एक बिंदु की जांच होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की चूक न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना दुखद है. इसकी जांच के लिए आइपीएस अधिकारी शालीन और आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत को जिम्मेवारी सौंपी गयी है। जैसे ही हमें घटना की जानकारी मिली, हमने बचाव के आदेश दिये। घटना स्थल पर प्रत्यय अमृत और पटना के डीएम और एसपी को जाने का निर्देश दिया। पीड़ित परिवार को हम मदद कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब दियारा में इस तरह के आयोजन की अनुमति नहीं दी जायेगी। उन्होंने कहा कि घटना की गंभीरता पूर्वक जांच होगी, जिसमें देख जायेगा कि नदी के पार इस तरह के कार्यक्रम के लिए वापस लौटने का इंतजाम किया गया था कि नहीं? इस तरह के आयोजन कोई स्वयं कर सकता है कि नहीं? इस तरह के आयोजन के लिए किसी से अनुमति लेना है कि नहीं? जांच में यह देखा जायेगा कि कोई नाव पर कैसे चढ़ रहा था? एक-एक पहलू की जांच होगी। इस तरह की कोई घटना होगी तो सरकार पर आक्षेप तो आयेगा ही। मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भरती हुए लोगों के इलाज की इंतजाम के लिए भेजा। लोगों का इलाज हुआ। एक की मौत हो गयी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम के आयोजन के लिए पूर्व से ही एसओपी बना हुआ है। देखा जायेगा कि इसमें और क्या परिवर्तन करना होगा? जांच में पता किया जायेगा कि नाव परिवहन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड था कि नहीं? राज्य में नावों के परिचालन के लिए परिवहन में एक्ट बना हुआ है। देखना है कि परिवहन एक्ट के तहत राज्य में नावों का परिचालन होता है कि नहीं? जांच में दोषी पाये जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई होगी. दियारा को लेकर मापदंड तय किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन में मेरे तस्वीर का उपयोग किया गया है। यह साफतौर पर बता दिया गया है कि बिना अनुमति के मेरे फोटो का उपयोग नहीं किया जायेगा। हम आॅफिस से पता कर रहे हैं कि आखिर किसे आदेश से उस आयोजन में मेरे तस्वीर का उपयोग किया गया।

25 की मौत के बाद खुली डीएम साहब की नींद

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - मकर संक्रांति की शाम 25 लोगों की मौत हो गयी। अब जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वीकार कर लिया है कि बीते शनिवार को घटित हादसे के पीछे चूक थी, और उन्होंने गंगा में नाव परिवहन को लेकर सख्ती बरतने का निर्देश दिया है। डीएम संजय कुमार अग्रवाल ने अपनी कुंभकर्णी निद्रा का त्याग करते हुए मंगलवार को गंगा में नौका परिवहन को लेकर निर्देश जारी किया। उन्होंने सभी अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को निदेश दिया कि किसी भी परिस्थिति में गैर निबंधित नाव का परिचालन न हो। इसके अलावा उन्होंने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेवारी संबंधित थाना अध्यक्षों को भी दी। उन्होंने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को निदेश दिया कि वे कैंप लगाकर नावों का निबंधन सुनिश्चित करें। इसके अलावा उन्होंने जिला परिवहन को यह जिम्मेवारी सौंपी है कि वे परिचालन योग्य नावों की जांच करें। इसके अलावा उन्होंने सभी नावों पर सवारियों की क्षमता उल्लेखित करने का निर्देश भी दिया।

नौका हादसे की जांच के लिए सर्वदलीय समिति बनाये सरकार, सुमो ने की मांग

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि राज्य सरकार नाव हादसे की जांच के लिए सर्वदलीय समिति का गठन करे। उन्होंने कहा कि गंगा दियारा में नौका हादसे के 48 घंटे बाद भी राज्य सरकार ने एक भी अधिकारी के खिलाफ न प्राथमिकी दर्ज करायी, न किसी का तबादला किया और न किसी को निलंबित किया। बदनसीब नौका के मल्लाह और बंद पड़े डिज्नीलैंड के संचालक पर तो एफआईआर दर्ज करायी गई,लेकिन अफसरों को क्यों छोड़ दिया गया? क्या प्रशासन केवल उन्हीं कार्यक्रमों में मुस्तैदी दिखायेगा, जिनसे मुख्यमंत्री की राष्ट्रीय छवि चमकायी जाती है?

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार यदि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित करना चाहते हैं, तो उन्हें किसी गांधीवादी नेता की अध्यक्षता में सर्वदलीय जांच समिति का गठन करना चाहिए। अधिकारियों की जांच समिति बिल्कुल भरोसेमंद नहीं है। शोक के माहौल में शराबबंदी के लिए प्रस्तावित मानव-श्रृंखला की तारीख भी बदली जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बतायें कि इससे पहले पटना के दशहरा उत्सव और छठ पूजा के दौरान हुए हादसों की जांच रिपोर्ट के आधार पर एक भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या अधिकारियों की जांच समिति दोषी अफसरों को बचाने के लिए बनायी गई है?

प्रशासनिक लापरवाही ने ली लोगों की जान : सीपीआई

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद के सचिव सत्यनारायण सिंह ने मकरसंक्रांति के मौके पर 14 जनवरी को पटना में आयोजित पतंगबाजी महोत्सव के दरम्यान हुई नौका दुर्घटना में करीब 30 लोगों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि यह दुर्घटना प्रषासनिक लापरवाही, कुव्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने कहा है कि इस आयोजन में लोगों के स पार से उस पार लाने और वापस ले जाने के लिए पर्याप्त संख्या में नावों, स्टीमर आदि की व्यवसथा नहीं थी। पुलिस बल भी जरूरत के मुताबिक नहीं था। एनडीआरएफ को भी नहीं लगाया गया था। इसलिए हादसा के वक्त तुरंत राहत नहीं पहुंचाया जा सका। बचाव कार्य समय पर हो गया रहता तो इतनी जिंदगियां नहीं जाती ।

भाकपा राज्य सचिव ने कहा है कि बिहार सरकार ने अभी 10 दिन पहले प्रकाषपर्व पर देष-विदेश से आये लाखों श्रद्धालुओं के पटना में जुटने पर ऐसा शानदार इंतजाम किया था, जिसका सर्वत्र गुणगान हुआ था। यह अपने-आप में एक नजीर बन गया था। फिर सवाल यह उठता है कि बिहार सरकार इस छोटे से आयोजन के प्रति वेपरवाह क्यों हो गई? उसका पुलिस-प्रशासन सुस्त, निष्क्रिय क्यों रहा? मुख्यमंत्री या इसके किसी मंत्री ने इसकी तैयारी की समीक्षा क्यों नहीं की ? पर्यटन विभाग और उसके अधिकारी क्या कर रहे थे? ऐसे में हजारों की भीड़ को संभालने में विफलता के लिए सरकार और प्रशासन अपनी जिम्मेवारी से नहीं बच सकता।

देश का अपमान न करें प्रधानमंत्री : सदानंद

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार भारत में राष्ट्रपिता के अमूल्य योगदान को भूलाने का काम कर रही है। उन्होंने खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडर और डायरी पर महात्मा गाँधी की तस्वीर की जगह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फोटो छपने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह न सिर्फ राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का अपमान है बल्कि यह देश का भी अपमान है।

श्री सिंह ने कहा कि भाजपा और आरएसएस अपने को भारत की संस्कृति से जुड़ा हुआ संगठन कहता है जबकि उसके सिद्धंत और कारनामे देश को कबूल नहीं होता। इसलिए उसके हर कदम और कार्य का विरोध देश की जनता करती है। खादी भारत की आजादी से जुड़ा हुआ है, जिसे गाँधी जी ने विदेशी कपड़ो का विकल्प के रूप में सामने लाया था । जिससे महात्मा गाँधी का स्वाधीनता संग्राम में विदेशी कपड़ों का बहिष्कार, विदेशी कपड़ो का होलिका दहन आदि आन्दोलन सफल हुआ था। इसलिए चरखा पर सूत कातते हुए महात्मा गाँधी की तस्वीर राष्ट्र का प्रतीक बना, जिसे प्रधानमंत्री जी ने स्थानापन्न करने का प्रयास किया है।

श्री सिंह ने कहा कि मोदी सरकार के इस कार्य को देश की जनता कतई स्वीकार नहीं करेगी। यह केंद्र सरकार की छोटी सोच की ओछी हरकत है, जिससे भारत की जनता और राष्ट्रपिता दोनों का घोर अपमान हुआ है।

सरकारी बाबू बच्चों को पढ़ायें एक घंटा, लोक संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को मिला सुझाव

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यह सुझाव पसंद आया कि सरकारी कर्मचारी सप्ताह में कम से कम एक दिन एक घंटा किसी सरकारी स्कूल में जाकर पढ़ायें। मुख्यमंत्री को यह सुझाव बाढ़ के विकास कुमार ने दिया। उनकासुझाव था कि सभी सरकारी विद्यालयों में पदाधिकारियों को सप्ताह में कम से कम एक घंटा जाकर बच्चों को पढ़ाना चाहिये, इससे बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहन मिलेगा। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत अच्छा सुझाव है। इसी तरह कृषि के क्षेत्र में श्री बषीर आलम द्वारा सब्जियों के कमर्षियल क्रॉपिंग के संबंध में दिये गये सुझाव पर उनके प्रस्तुतिकरण को देखने का निर्देश प्रधान सचिव को दिया।

सोमवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद सभाकक्ष में लोक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम में स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण, पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, श्रम संसाधन, ग्रामीण विकास (जीविका), कृषि, पषु एवं मत्स्य संसाधन, कला संस्कृति, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, योजना एवं विकास तथा पर्यावरण एवं वन विभाग से संबंधित मामलों पर 12 लोगों द्वारा मुख्यमंत्री को अपना सुझाव दिया गया।

मुख्यमंत्री को सलाह देने वालों में पटना के डॉ. राजकिशोर प्रसाद सिन्हा, सीवान के बशीर आलम, पटना की अंजु गुप्ता, नालन्दा के सत्येन्द्र प्रसाद सिंह, सहरसा के प्रभात कुमार सिंह, दरभंगा के नरेश मिश्र, दरभंगा के ही प्रदीप कुमार चौधरी, दानापुर के कुमार शांतनु, पटना के डॉ. (मेजर) प्रभात कुमार, मुजफ्फरपुर के आनन्द मोहन, वैषाली के अरूण कुमार और चंदन कुमार शामिल रहे। प्राप्त सुझाव एवं राय पर संबंधित विभाग के प्रधान सचिव/सचिव ने वस्तुस्थिति को स्पष्ट किया। लोगों से प्राप्त सुझाव एवं राय पर मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों के प्रधान सचिव/सचिव को कार्रवाई करने हेतु निर्देशित किया। मुख्यमंत्री ने कुछ सुझावों को बहुत अच्छा सुझाव माना और उन सुझावों को ग्रहण करने के संबंध में कार्रवाई का भी निर्देश दिया।

वहीं स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्राप्त सुझावों के आलोक में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में हेल्थ सेक्टर में बहुत काम हुये हैं। उन्होंने कहा कि 2006 के पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में जहॉ एक महीने में 39 मरीज जाते थे अब एक महीने में 11 हजार मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में इलाज कराते हैं। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य केन्द्रो में दवा की उपलब्धता समेत आधारभूत संरचनाओं का विकास हुआ है, जिसके कारण सरकारी हेल्थ सेन्टर में लोगों का विष्वास बढ़ा। उन्होंने कहा कि राज्य में एक करोड़ दस लाख बच्चों का हेल्थ कार्ड बना है।

लोक संवाद कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, योजना एंव विकास मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, शिक्षा मंत्री डा. अशोक चैधरी, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री अवधेश कुमार सिंह, कृषि मंत्री रामविचार राय, समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अब्दुल गफ्फूर, अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण मंत्री संतोष कुमार निराला, श्रम संसाधन मंत्री विजय प्रकाश आदि मौजूद रहे।

मानव श्रृंखला राजनीतिक कार्यक्रम नहीं : जदयू

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - प्रदेश जदयू प्रवक्ता नवल शर्मा ने कहा है कि मानव श्रृंखला स्थगित करने का बीजेपी नेताओं का बयान शुद्ध रूप से राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि पटना की हृदयविदारक नाव दुर्घटना से सभी लोग मर्माहत हैं और इस दु:ख की क्षति पूर्ति नहीं हो सकती । पर मानव श्रृंखला जद यू का कोई राजनीतिक आयोजन नहीं है बल्कि यह सरकारी कार्यक्रम है और इसका उद्देश्य मानवता की सेवा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को समझना चाहिए की मानव श्रृंखला से जन्मी जागरूकता लाखों घरों को उजड़ने से बचाएगी और नशा से बर्बाद लोगों की जिन्दगियां आबाद करेगी । यह एक अत्यंत ही पवित्र और लोकहितकारी कार्यक्रम है ।

औद्योगिक विकास को लगा ग्रहण : भाजपा

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश रूंगटा ने कहा कि बिहार की चैपट विधि व्यवस्था एवं समुचित प्रोत्साहन नीति के अभाव में राज्य में औद्योगिक विकास की योजना को ग्रहण लग गया है । करोड़ों-करोड़ रुपए के प्रस्ताव केवल कागजों पर रेंग रहे हैं । औद्योगिक प्रस्तावों का आंकड़ा शुद्ध रूप से एक धोखा है । उन्होंने कहा कि 2016 में बिहार सरकार को कुल 6500 करोड़ रुपए का प्रस्ताव उद्योग लगाने हेतु प्राप्त हुये। जिसमें से 5500 करोड़ के प्रस्तावों को सरकार ने निवेष हेतु मंजूरी प्रदान की है । लेकिन राज्य में यदि कानून व्यवस्था के यही बिगड़े हालत रहे तो कोई भी नया निवेश नहीं हो सकेगा।

डीका के न्याय के सवाल पर मुख्यमंत्री के समक्ष प्रदर्शन

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - भाकपा-माले की केद्रीय कमिटी सदस्य व ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी, इनौस के राज्य सचिव नवीन कुमार और आइसा के राज्य अध्यक्ष मोख्तार ने संयुक्त बयान जारी करके कहा है कि हाजीपुर की महादलित छात्रा डीका कुमारी के न्याय के लिए ऐपवा-आइसा और इनौस ने चरणबद्ध आंदोलन चलाने का निर्णय किया है. आगामी 19 जनवरी को तीनों संगठनों ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री के समक्ष प्रदर्शन का फैसला किया है.

ऐपवा महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि आज पूरा बिहार डीका कुमारी के लिए न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन नीतीश सरकार इस पर खामोश बैठी है. छात्राओं को पंख लगाने का दावा करने वाले नीतीश कुमार को यह बताना होगा कि आखिर स्कूल कैंपसों के भीतर छात्राओं के साथ बलात्कार और उनकी निर्मम हत्या क्यों हो रही है? ऐसी जघन्य हत्या के बाद भी प्रशासन चुप क्यों बैठा है? उन्होंने कहा कि 19 जनवरी को मुख्यमंत्री के समक्ष विशाल प्रदर्शन के बाद 26 जनवरी को पूरे राज्य में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाएगा और इस दिन उपवास रखा जाएगा.

उन्होंने कहा कि जहां पूरा प्रशासन अपराधियों के बचाव में खड़ा है. छात्रा की हत्या करने कोई बाहर से अपराधी नहीं घुसे थे, बल्कि ऐसे लोग शामिल हैं, जो स्कूल व्यवस्था से जुड़े हुए हैं. जिले के एसपी व डीएम ने ने केवल पहले लापरवाही बरती बल्कि अब भी गैरजिम्मेदार बने हुए हैं. बिहार सरकार को इस मसले पर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए.

सीबीआई करे नाव हादसे की जांच : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - बिहार विधान सभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कई सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की तरफ से मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा नदी दियारा गांधी घाट में आयोजित पंतग उत्सव के पर गंगा नदी में नाव हादसे में अब तक 25 लोगों की मौत डूबने से हो गई। इस सरकारी आयोजन में लोगों को बुला कर नाव हादसे में हुई लोगों की मौत हत्या का मामला बनता है, क्या सरकार इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर करेंगी। इस घटना के पहले भी घटनाओं की जांच निष्पक्ष नहीं हुई जिस कारण इस घटना की जांच सीबीआई से करायीं जांए।ं।

डा. कुमार ने कहा कि सोनपुर थाने में दर्ज की गयी एफआईआर में नाव हादसे की जिम्मेवारी नाविक और मनोरजंन पार्क के संचालक पर थोपी गयीं, लेकिन पंतगोत्सव के आयोजक का जिक्र तक नहीं किया गया, सरकार किसे बचाना चाहती है, बताएं ? सरकारी विज्ञापन छपा कि पतंग उत्सव कार्यक्रम के दौरान पर्यटन विभाग द्वारा क्रूज की सेवा नि:शुल्क वापसी होगी, फिर यह हादसा कैसे हुआ ?

यूपी की राजनीति में पंच बनने का प्रयास कर रहे लालू : नंद किशोर

पटना(अपना बिहार, 17 जनवरी 2017) - वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद अब उत्तर प्रदेश के सियासी उठापटक में पंच बनने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम यादव के बीच पंचायती कराने में नाकाम होने के बाद लालू जी अब कांग्रेस के साथ गांठ बांधने में अपनी भूमिका साबित करने में लगे हुए हैं। पर उत्तर प्रदेश का जनमानस अब न तो अखिलेश यादव की हांडी को दुबारा चूल्हे पर चढ़ने देने वाली है, न ही कांग्रेस को अवसर देकर तीन दशक पूर्व की गलती दुहराने वाली है। बसपा के शासनकाल का भ्रष्टाचार भी यूपी अभी भूला नहीं है।

हादसे के कारण महागठबंधन में गांठ उजागर, लालू प्रसाद ने भी की दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग, प्रशासन कर रहा पर्यटन मंत्री अनिता देवी के उपर ठीकरा फोड़ने का प्रयास

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - बीते शनिवार को पतंगोत्सव में भाग लेकर अपने घरों को लौट रहे 24 लोग बेमौत ही काल के गाल में समा गये। इस पूरे मामले को लेकर जहां एक ओर हर प्रदेश वासी मर्माहत है, वहीं सियासी गलियारे में एक ही दिन में दो तरह के दृश्य देखने को मिले। एक ओर मकर संक्रांति के मौके पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद के सरकारी आवास पर आयोजित चूड़ा-दही भोज के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दही का टीका लगाकर महागठबंधन की मजबूती का एलान किया। वहीं दूसरी ओर शाम में हादसा होने के बाद राजनीतिक रिश्ते में गांठ उजागर हो गया।

रविवार को सियासी गलियारे में दिन भर आलोचनाओं और बयानों का दौर चलता रहा। जहां एक ओर राजद प्रमुख लालू प्रसाद और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा. अशोक चौधरी ने हादसे के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेवार ठहराया और कड़ी कार्रवाई की मांग की। महागठबंधन के दोनों घटकों द्वारा जिला प्रशासन और परोक्ष रूप से अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के बाद सियासी गलियारे का तापमान बढ़ गया। उधर जिला प्रशासन के द्वारा इस पूरे मामले में पर्यटन विभाग को जिम्मेवार ठहराया गया। यहां तक कि सोनपुर थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक कहा गया है कि पर्यटन विभाग ने बिना पूर्व अनुमति के ही पतंगोत्सव का आयोजन कराया।

वहीं सोशल मीडिया में भी तमाम तरह की कयासबाजियां शुरू हो गयीं। एक ओर हादसे के लिए राज्य सरकार और विशेष तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस्तीफे तक की मांग की गयी। तर्क दिया गया कि इससे पहले भी छठ हादसा और गांधी मैदान में रावण वध समारोह के दौरान हुए हादसे के कसूरवारों को सजा नहीं मिली। हर मामले में कसूरवारों को क्लीन चिट दे दिया गया। इसके अलावा नाव हादसे की जांच के लिए जो कमेटी बनायी गयी है उसमें जांच की जिम्मेवारी जिलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल को दी गयी है। सोशल मीडिया में यह सवाल भी खूब उछला कि जिसके उपर लापरवाही बरतने का आरोप है, वह मामले की जांच कैसे कर सकता है।

वहीं दूसरी ओर जदयू सर्मथकों द्वारा तर्क दिया गया कि सारे विभागों का काम अकेले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कैसे कर सकते हैं। जदयू समर्थकों के मुताबिक पर्यटन विभाग की अक्षमता के कारण ही यह नाव हादसा हुआ। बतात ेचलें कि पर्यटन विभाग की मंत्री अनीता देवी हैं जो राजद कोटे से हैं। वहीं इसस संबंध में पूछने पर उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच के आदेश दिये गये हैं। कसूरवारों को नहीं बख्शा जाएगा।

बहरहाल लाश पर राजनीति रविवार को खूब गुलजार रही। जहां एक ओर विपक्ष ने इसे लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा तो सत्ता पक्ष द्वारा बचाव की मुद्रा अपनायी गयी। इन दोनों के बीच जिला प्रशासन द्वारा रविवार को स्वयं को सबसे अधिक सक्रिय साबित करने की तमाम कोशिशें की गयीं। इसका प्रमाण यह कि रविवार को भी जिला प्रशासन घटना स्थल पर लापता लोगों को खोजने का प्रयास करती रही।

नाव हादसे के बाद भोज स्थगित, फिर भी लालू आवास पर उमड़े लोग

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - शनिवार को नौका दुर्घटना मे 21 लोगों के हताहत हो जाने के कारण राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने अपने आवास पर आयोजित अल्पसंख्यक समाज के लिये विशेष चूड़ा-दही भोज को रद्द कर दिया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या मे राज्य के दूरदराज इलाके से उनके शुभ चिंतक एवम राजद के पदाधिकारी और कार्यकर्ता पटना पहुँच गये। श्री प्रसाद ने आये तमाम लोगों से मुलाकात की ,उन्हें संक्रांति की शुभकामनाये दी और कहा कि सभी तयारी के बावजूद कल हुए दुखद दुर्घटना के कारण उन्हें भोज के इस कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा। उन्होंने कहा कि राज्यवासियों का जो प्रेम ,समर्थन और सहयोग उन्हें प्राप्त है इसके लिये मैं राज्यवासियों का आभारी हूँ। आप सभी ने जो इस कड़ाके कि सर्दी मे मेरे निमंत्रण पर यहाँ आने का कष्ट किया इससे हमारा सम्बल बढ़ा है। आप सब भविष्य मे भी मुझे और राजद को अपना बहुमूल्य सहयोग देते रहेंगे। इस अवसर पर पूर्व मंत्री सांसद मोहम्मद तस्लीमुद्दीन ,विधायक अख्तरूल इस्लाम शाहीन ,विधायक नवाज आलम ,प्रदेश युवा राजद अध्यक्ष कारी सोहैब सहित विभिन अल्पसंख्यक संगठनो के प्रमुख उपस्थित थे।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने जताया जयराम बाबू के निधन पर शोक

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने शोषित समाज दल के पूर्व अध्यक्ष प्रो जयराम प्रसाद सिंघ के निधन पर गहरी शोक सम्वेदना व्यक्त की और अपने शोक संदेश मे कहा कि जयराम बाबू अपने जीवन के अंतिम दिनो तक समता मुल्क समाज के निर्माण और शोषित ,अभिवंचितों को उनका अधिकार दिलाये जाने के लिये संघर्षशील रहे !ईश्वर उनकी आत्मा को चिर शान्ति दे ,परिजनों ,शुभचिंतकों को इस शोक को सहन करने कि शक्ति दे। शोक व्यक्त करने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ,उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ,स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव ने भी जयराम बाबू को श्रद्धान्जलि अर्पित करते हुए कहा कि वे गरीब ,दवाएँ ,सताये समाज को समाज कि मुख्यधारा से जोड़ने के लिये सामाजिक नाइंसाफी को समाप्त करना चाहते थे।

निर्दयी हुई नीतीश सरकार : चौबे

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - बक्सर के सांसद अश्विनी कुमार चौबे ने नाव हादसे के बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि राज्य सरकार निर्दयी हो गयी है। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से लोगों को राज्य सरकार ने मरने को छोड़ दिया, वह साबित करता है कि राज्य सरकार किस तरह से निकम्मी हो गयी है। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से रोम जल रहा था और नीरो चैन की बंशी बजा रहा था, वैसे ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी असंवेदनशील होकर चैन की बंशी बजा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शनिवार की रात जैसे ही उन्हें हादसे की सूचना मिली, उन्होंने घटनास्थल पर जाकर पीड़ित परिवारों को ढाढस बंधाया।

गंगा नाव हत्याकांड के लिए राज्य प्रशासन जिम्मेवार : माले, मृतकों के परिजनों को 20 लाख रुपये का मुआवजा दे सरकार

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि मकर संक्रान्ति के दिन गंगा नदी में नाव के डूबने से कई लोगों की दर्दनाक मौत बेहद दुखद है. उन्होंने कहा कि यह हादसा नहीं हत्याकांड है. जब प्रशासन ने गंगा के उस पार दियर में पतंग महोत्सव का आयोजन किया, तो नावों व गोताखोरों की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गयी? इस आपराधिक लापरवाही के लिए पटना व सारण की डीएम पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश सरकार प्रकाशोत्सव में व्यवस्था की सफलता पर फूले नहीं समा रहे, लेकिन कल की घटना ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि नीतीश कुमार के लिए आम लोगों की जिंदगी का कोई महत्व नहीं है. तकरीबन 30 हजार लोग गंगा के उस पार चले गये, लेकिन उनके आने-जाने की पर्याप्त व्यवस्था बिलकुल नहीं की गयी. जिसकी वजह से यह घटना हुई. लगता है, सरकार ने 2012 में पटना के अदालतघाट छठ हादसा और 2014 के गांधी मैदान हादसा से कुछ भी भी सबक नहीं लिया. ऐसे हरेक मौके पर सरकार की आपदा प्रबंधन की कलई खुल जाती है. सरकार का आपदा प्रबंधन पूरी तरह लचर है. माले राज्य सचिव ने घटना की जानकारी मिलते ही पीएमसीएच का भी दौरा किया. उन्होंने मृतक परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है.

भाकपा-माले की पटना जिला कमिटी ने अपनी बैठक में मृतकों को श्रद्धांजलि दी. पटना नगर के सचिव अभ्युदय, रणविजय कुमार, नवीन कुमार, मृर्तजा अली, समता राय आदि माले नेताओं ने एक मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी.

आइसा ने इस दर्दनाक घटना के खिलाफ बुद्धा स्मृति पार्क के पास शाम में 5 बजे कैंडल मार्च का आयोजन किया. जिसमें आइसा के राज्य सचिव शिवप्रकाश रंजन, आइसा राज्य अध्यक्ष मोख्तार, हैदर, राज्य उपाध्यक्ष चंद्रभूषण, कार्यालय सचिव निखिल कुमार, राहुल, विकास, मनोज कुमार, संतोष आर्या, सत्यम, सूर्य प्रकाश, आलोक आदि शामिल हुए. वहां आयोजित सभा को संबोधित करते हुए आइसा नेताओं ने कहा कि इस घटना में मरनेवाले अधिकांश युवा हैं. सरकार उनके लिए अविलंब 20 लाख रुपये का मुआवजा उपलब्ध कराये.

नाव हादसे पर न हो राजनीति : भारती

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - प्रदेश कांगे्रस उपाध्यक्ष एवं विधान पार्षद रामचन्द्र भारती व विधान पार्षद राधा चरण साह ने पंतगोत्सव के दौरान गंगा नदी में हुई नाव दुर्घटना में मारे गये लोगों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि दु:ख की इस घड़ी में वे मृतकों के परिजनों के हर दु:ख-दर्द के साथ है। ईश्वर उन्हें इस दर्दनाक घटना में सम्बल प्रदान करे। साथ ही नेता द्वय ने कहा कि इस दर्दनाक दुर्घटना पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए और दलीय भावना से उपर उठकर शोक-संतप्त परिवारों को हर तरह से सहायता करनी चाहिए।

नाव हादसे पर राज्यपाल ने जताया शोक

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - राज्यपाल राम नाथ कोविन्द ने पटना में गंगा नदी में हुई नौका-दुर्घटना पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। उन्होंने इस हृदय-विदारक दुर्घटना में कई व्यक्तियों के निधन पर अपनी गहरी शोक-संवेदना व्यक्त करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। राज्यपाल श्री कोविन्द ने दिवंगत आत्माओं को शान्ति तथा उनके पारिवारिक जनों को धैर्य-धारण की क्षमता प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।

नाव हादसे के बाद मानव श्रृंखला कार्यक्रम रद्द करेंगे सीएम? सुमो ने पूछा सवाल

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - शनिवार को हुए दर्दनाक नाव हादसे के बाद विपक्ष के नेता मुखर हो गये हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूछा है कि क्या वे आगामी 21 जनवरी को होने वाले मानव श्रृंखला कार्यक्रम को रद्द करेंगे। श्री मोदी ने कहा कि लॉ कॉलेज घाट के पास सरकार और प्रशासन की लापरवाही के कारण डूबे नौका से दर्जनों लोगों की दर्दनाक मौत हो गयी। आखिर क्या चाहती है सरकार? क्या सरकार की नजर में लोगों के जान की कोई कीमत नहीं? पूर्व में हुए छठ घाट हादसा, दशहरा हादसा व अन्य घटनाओं से क्यों नहीं चेती सरकार?

उन्होंने कहा कि जब प्रकाश पर्व और कालचक्र की अच्छी व्यवस्था का पूरा श्रेय नीतीश कुमार खुद ले रहे हैं तो सरकारी अव्यवस्था के कारण हुए इस घटना की जिम्मेवारी क्यों नहीं ले रहे? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस हृदय विदारक घटना के कारण आज होनेवाले गांधी सेतु के पुनर्विकास कार्य का शुभारंभ कार्यक्रम को रद्द कर दिया, क्या नीतीश कुमार भी 21 जनवरी को होने वाले मानव श्रृंखला कार्यक्रम को रद्द करेंगे?

प्रशासन के सर ठीकरा फोड़कर दामन नहीं बचा सकती सरकार: नंदकिशोर

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - भाजपा के वरिष्ठ नेता सह लोक लेखा समिति के सभापति नंदकिशोर यादव ने कहा कि नाव दुर्घटना पर सरकार के मंत्री से लेकर मुख्तार तक सिर्फ प्रशासन के सर ठीकरा फोड़कर अपना दामन नहीं बचा सकते। सरकार में शामिल घटक दल के मंत्री और सत्ता के सबसे बड़े साझीदार दल के सुप्रीमो हादसे को प्रशासनिक चूक बताकर अपना चेहरा बचा रहे हैं। नाव हादसे के लिए पूरी सरकार नैतिक तौर पर जिम्मेदार है। सरकार का पूरा तंत्र पतंगबाजी आयोजन को भगवान भरोसे छोड़ सुप्रीमो के आवास पर संक्रांति सेलिब्रेट करने में लगा रहा। पूरी सरकार वहां थी। फिर हादसे की जिम्मेदारी से मंत्री और मुख्तार कैसे बच सकते हैं।

श्री यादव ने कहा कि यह सच है कि प्रशासन के अधिकारियों ने पूर्व में हुए हादसों से सबक नहीं लिया। दशहरा में गांधी मैदान हादसे के वक्त भी प्रशासनिक तंत्र सेलिब्रेशन में मस्त था। इस बार भी वैसी ही परिस्थिति थी। यह सही है कि तत्पर रहकर अगर आयोजन की मॉनिटरिंग होती तो हादसा टल सकता था। पर हादसे की जिम्मेदारी से सरकार भी बच नहीं सकती।

श्री यादव ने कहा कि जिस इच्छा शक्ति से प्रकाशोत्सव और गांधी मैदान में होने वाले अन्य समारोहों में पूरे शासन को झोंक दिया जाता है, क्या वजह है कि दशहरा, छठ और मकर संक्रांति में वैसी गंभीरता सरकार नहीं दिखा पाती। हादसा हो जाने के बाद भी सिर्फ नाविक और मेला कांट्रेक्टर जैसे निचले स्तर के लोगों पर एफआईआर कर असली दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

सदानंद नाव हादसे में मारे गये लोगों के प्रति जताया दुख

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने पटना में हुए नाव दुर्घटना पर दु:ख व्यक्त करते हुए मारे गए लोगों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने अपने शोक सन्देश में कहा कि यह बड़ी दुखद और हृदयविदारक घटना हैं। ईश्वर मारे गए लोगों की आत्मा को शांति प्रदान करें एवं उनके परिवार को इस दु:ख-दर्द को सहन करने की शक्ति दें। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति के अवसर पर हुआ यह नाव दुर्घटना प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। इस घटना की जांच कर दोषी लोगों को कड़ी से कड़ी सजा देने और मृतकों के आश्रितों को यथाशीघ्र आर्थिक मदद देने की मांग बिहार सरकार से की है।

नाव हादसे के दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई : चौधरी

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सह शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी ने मकर संक्रान्ति के दिन एनआईटी घाट पर हुई नाव दुर्घटना में मृत व्यक्तियों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की है। उन्होंने इस दुर्घटना की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जाँच के साथ ही इस घटना के लिये जिम्मेवार अधिकारियों को चिन्हित करने की मांग की है। ऐसे चिन्हित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो, जिससे भविष्य में इस इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो।

लाशों पर राजनीति कर रहे भाजपा नेता : जदयू

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - जदयू के प्रदेश प्रवक्ता नवल शर्मा ने कहा है कि पटना नाव दुर्घटना पर बीजेपी का रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रदेशवासी इस मर्मान्तक घटना से आहत हैं वहीं बीजेपी नेता आदत से लाचार लाशों पर राजनीति करने में लगे हैं । उन्होंने कहा कि घटना की जाँच हो रही है और यह तय है कि हादसे के जिम्मेवार लोग किसी सूरत में बख्शे नहीं जाएंगे । पर राजनीतिक नैतिकता का तकाजा बनता है की ऐसी घटनाओं पर सारी ऊर्जा और सहयोग पीड़ित परिवार के पक्ष में हो न की ऐसे मौकों पर आरोप प्रत्यारोप की राजनीति हो जो बीजेपी कर रही है ।

राजद का संवाद कार्यक्रम स्थगित

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - बीते 14 जनवरी को पटना के एनआईटी घाट पर हुये नाव दुर्घटना के कारण राजद द्वारा 16 जनवरी को प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है। राजद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचन्द्र पूर्वे के हवाले से उक्त जानकारी देते हुए पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा है कि संवाद कार्यक्रम के अगले तिथि की घोषणा बाद में की जायेगी। बताते चलें कि कार्यक्रम के तहत कल राज्य के सहकारिता मंत्री आलोक कुमार मेहता पार्टी के नेताओं-कार्यकतार्ओं से मिलकर उनकी समस्याओं को सुनने वाले थे। श्री गगन ने कहा है कि कल हुये नाव दुर्घटना से राजद परिवार काफी मर्माहत है और इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।

एनआईटी नाव हादसे के जिम्मेवारी स्वीकार करे सरकार : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - एनआईटी नाव घटना के संबंध में नेता प्रतिपक्ष डा. प्रेम कुमार ने सरकार से कई सावल पूछा है कि आखिर दर्जनों मौत का कारण कौन है? कौन लेगा इस घटना की जिम्मेदारी। उन्होंने कहा कि यह सरकार की बड़ी विफलता है हर तरफ से प्रशासन की गलती साबित हो रही है, जिसे फिर से जाँच के नाम पर लीपापोती किया जा रहा है।

डॉ. कुमार ने कहा कि जब मीडिया 4.30 बजे से ही प्रशासन को असुविधा की सूचना दे रही थी तो फिर प्रशासन ने ध्यान क्यों नहीं दिया। साढ़े चार बजे ही लोगों के भीड़ को संभालना मुश्किल हो चुका था पुलिस ने लाठीचार्च भी किया, फिर एप्रोच रोड भी धस गया था जिसे मीडिया ने लगातार दिखाया तो भी प्रशासन क्यों नहीं जागी? हजारों की भीड़ को कुछ सिपाहियों के भरोसे कैसे छोड़ा गया? सिपाहियों की मौजूदगी में भी निजी नाव ओवरलोड कैसे हुआ, नगर निगम का स्टीमर कहाँ था, नाव पर लाइफ जैकेट क्यों नहीं था, एसडीआरअफ की टीम वहाँ क्यों नहीं थी?

गांधी को हटाकर खुद को स्थापित करने का प्रयास घटिया साजिश, जदयू नेता राजीव रंजन प्रसाद ने लगाया आरोप

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - बिहार प्रदेश जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा है कि केवीआईसी के कैलेंडर में महात्मा गांधी की जगह नरेंद्र मोदी की तस्वीर के बाद अब बापू को लेकर हरियाणा के मंत्री अनिल विज का बयान न केवल शर्मनाक है, बल्कि आरएसएस और बीजेपी की घटिया साजिश का हिस्सा भी है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को आदर्श और पूज्य मानने वाले आरएसएस व बीजेपी के लोग इतिहास तोड़-मरोड़ कर और सामाजिक ताने-बाने को नष्ट-भ्रष्ट कर पूरे देश को विचार-शून्यता की अँधेरी गुफा में धकेल देना चाहते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन और देश निर्माण में इनकी कोई भूमिका नहीं होने के कारण, ये उनसे जुड़े सभी तथ्यों, आदर्शों और प्रतिमानों को ही खत्म कर देने पर आमादा हैं।

श्री प्रसाद ने कहा कि विश्व को सत्य, अहिंसा और सविनय अवज्ञा का मूल मंत्र देने वाले बापू ने सुख-सुविधा का त्याग करके पीड़ित मानवता की सेवा का कठिन व्रत लिया। उन्होंने खादी के रूप में देशवासियों को स्वाबलंबन का हथियार दिया। कारपोरेट की चाकरी और महंगे तथा फैशनेबल सूट-बूट की सज-धज करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता के केवल तेज खिलाड़ी हैं। झूठे वायदे, जुमलेबाजी और धुंआधार प्रचार उनके राजनीतिक हथियार हैं; जबकि किसानों, गरीबों, आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, वंचितों व महिलाओं का दमन और शोषण तथा बेरोजगारी उनकी राजनीति के दुष्परिणाम हैं। बापू की पूजनियता से घबराए नरेंद्र मोदी कभी उनकी बराबरी नहीं कर सकते।

पूर्व विधान पार्षद के निधन से लालू दुखी

पटना(अपना बिहार, 16 जनवरी 2017) - राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने पूर्व विधान पार्षद रामनन्दन सिंह के असामयिक निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है। रविवार को श्री प्रसाद स्व. सिंह के आवास गये और वहां जाकर उन्होंने उनके पार्थिव शरीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। स्व. सिंह के असामयिक निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव, वितमंत्री अब्दुल बारी सिद्दिकी, राज्यसभा सांसद डॉ. मीसा भारती, राजद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचन्द्र पूर्वे, उपाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, तनवीर हसन, प्रधान महासचिव मुन्द्रिका सिंह यादव, विधायक भोला यादव सहित अनेक नेताओं ने शोक व्यक्त किया।

अपने शोक संदेश में राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि वे जीवनपर्यन्त सड़क से लेकर सदन तक गरीब-गुरबों की लड़ाई लड़ते रहे। उनके निधन से सामाजिक एवं राजनीतिक जगत की अपूरणीय क्षति हुई है। दुख की इस घड़ी में उनके मृत आत्मा की चिर शांति तथा परिजन को ढांढ़स बंधाने एवं इष्ट मित्र को दुख सहने की शक्ति देने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई। उनके निधन का समाचार मिलते ही उनके सम्मान में प्रदेश राजद कार्यालय में पार्टी का झंडा आधा झुका दिया गया।

पटना की खुशियों को लगी सरकारी उदासीनता की नजर, मकर संक्रांति के मौके पर नाव हादसे में 24 मरे

पटना(अपना बिहार, 15 जनवरी 2017) - वर्ष के पहले पर्व मकर संक्रांति के मौके पर पटनावासियों की खुशियों को सरकारी उदासीनता की नजर लग गयी। शनिवार की शाम करीब छह बजे नाव हादसे में 24 लोगों के मरने की सूचना है। हादसा एनआईटी घाट पर हुई जब मकर संक्रांति के मौके पर पतंगोत्सव मनाकर लोग वापस लौट रहे थे। मिली जानकारी के मुताबिक नाव पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे। इस कारण जैसे ही नाव घाट से 15-20 मीटर आगे बढी, नाव में पानी भरने लगा। देखते ही देखते नाव ने जल समाधि ले ली। इस बीच एक और नाव आ रही थी, जान बचाने को कुछ लोगों ने उस पर भी सवार होना चाहा और देखते ही देखते वह नाव भी डूब गया। इस हादसे में अभी तक 24 लोगों के मरने की सूचना मिली है। सबसे अधिक महत्वपूर्ण यह कि पतंगोत्सव पर होने वाले भीड़ के बावजूद स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा के इंतजाम नहीं किये गये थे। इसका अनुमान इसी मात्र से लगाया जा सकता है कि हादसे की सूचना मिलने के करीब 45 मिनट के बाद एनडीआरएफ़ के जवान पहुंचे। मिली जानकारी के अनुसार दोनों नावों पर करीब 150 लोग सवार थे। कई लोग जो तैरना जानते थे, उन्होंने तैरकर अपनी जान बचा ली। अभी भी दर्जनों के लापता होने की जानकारी मिल रही है। वहीं एनडीआरएफ़ के द्वारा कई लोगों को बाहर निकाला गया और उन्हें इलाज के लिए पीएमसीएच ले जाया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव ने इलाजरत लोगों के इलाज में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरतने का निर्देश दिया है।

हादसे के पहले गुलजार था सियासी गलियारा, लालू ने नीतीश को लगाया दही का टीका, आपसी मतभेद को किया खारिज, विधान पार्षद रजनीश के घर जुटे भाजपाई

पटना(अपना बिहार, 15 जनवरी 2017) - शनिवार की शाम नाव हादसे के पहले पूरा पटना मकर संक्रांति की खुशियों में डूबा था। सियासी गलियारा भी चूड़ा-दही के भोज के कारण गुलजार था। सबसे बड़ा आयोजन राजद प्रमुख लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर आयोजित था। इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पहुंचे। राबड़ी देवी और लालू प्रसाद ने उन्हें स्वयं दही-चूड़ा परोसा। बाद में श्री प्रसाद ने श्री कुमार को दही का टीका लगाया। इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत में श्री कुमार ने कहा कि महागठबंधन सरकार जनता से किये अपने वादों को पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की एकता अटूट है। उन्होंने समस्त बिहारवासियों को मकर संक्रांति की बधाई दी। वहीं राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि महागठबंधन में दरार की बातें सब विपक्षी नेताओं की साजिश है। उन्होंने कहा कि हम सभी एक हैं और जनता की सेवा करते रहेंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजद सांसद डा मीसा भारती के पुत्र को गोद में खिलाया।

इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, पूर्व सांसद रघुनाथ झा, शिवानंद तिवारी, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी, शिक्षा मंत्री डा अशोक चौधरी सहित महागठबंधन के तमाम नेता राजद प्रमुख के आवास पर पहुंचे। स्वयं लालू प्रसाद और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सभी नेताओं की आगवानी की। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोगों ने दही-चूड़ा भोज में हिस्सा लिया। वहीं भाजपा नेताओं ने विधान पार्षद रजनीश के आवास पर आयोजित भोज में भाग लिया और एक-दूसरे को मकर संक्रांति की शुभकामनायें दी।

असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली का रास्ता साफ, बीपीएससी को हाईकोर्ट की फटकार

पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - सूबे के विभिन्न विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली के मामले में आज पटना हाईकोर्ट ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को फटकार लगायी है. हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए बीपीएससी को मनोविज्ञान विभाग का रिजल्ट चार सप्ताह में निकालने का निर्देश दिया है. अर्चना भारती और अन्य की तरफ से दायर याचिकाओं पर न्यायमूर्ति रविरंजन की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है.

पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भी इस संबंध में कार्रवाई करने का निर्देश दिया. मनोविज्ञान विभाग में 990 पद रिक्त हैं. गौरतलब है कि राज्य में लगभग 3400 असिस्टेन्ट प्रोफेसर के पदों पर बहाली होनी है लेकिन राज्य सरकार ने बीच में ही बहाली की प्रक्रिया रोक दी थी. राज्य सरकार के इस आदेश को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी. जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगाने के साथ ही बीपीएससी को असिस्टेंट प्रोफेसर के चयन की प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया था.

दुष्प्रचार और प्रोपगेंडा की सीमा पा कर रहे पीएम : मीसा

पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - राजद सांसद डा. मीसा भारती ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि हममें से कोई भी गाँधीजी की जगह ले सकता है? मोदीजी को लगता है कि वो ले सकते हैं। पहले नेहरू-इंदिरा के कद को बौना साबित करने और पटेल-बोस की विरासत को हथियाने के लिए सरकार व संघियों द्वारा भ्रामक प्रचार करने के सुनियोजित प्रयास चल ही रहे थे, अब गांधी जी भी संघियों के दुष्प्रचार के चपेट में आ गए हैं। कहाँ विदेशी ब्रैंड के लाखों के कपड़े, चश्मे और 12 लाख रुपये का सूट पहनने वाले मोदीजी और कहाँ जीवनभर सूत कातने वाले और गज भर धोती पहनने वाले गाँधी जी! भक्ति, दुष्प्रचार और प्रोपगेंडा परोसने की भी एक सीमा होती है!!

डा. भारती ने कहा कि खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडर से गाँधी जी को तो 2016 में ही गायब कर दिया गया था, और अब 2017 में मोदीजी वहाँ गाँधी जी को धकेल खुद विराजमान हो गए हैं। विरोध 2016 में भी हुआ था। तब सृजनात्मक स्वतंत्रता और त्रुटि की आड़ में इसे दबा दिया गया। पर 2017 में तो हद ही हो गई। 2016 में जो हुआ वह प्रोपगेंडा थोपने की सोची समझी सुनियोजित नीति का ही हिस्सा था। 2017 के कैलेंडर में उसे अंजाम तक पहुँचा दिया गया है। मोदीजी बताएँ कि खादी के प्रचार प्रसार में उनका ऐसा क्या योगदान है कि गाँधी जी भी उनके सामने बौने हो गए? नोटबन्दी लागु करने के साथ साथ क्यों नहीं उन्होंने नए नोटों में भी गाँधी जी की जगह ले ली या आने वाले समय में हमें वह दिन भी देखना होगा?

जदयू ने दिया भाजपा को दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण

पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - महागठबंधन के मुख्य दल जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह द्वारा 15 जनवरी को चूड़ा-दही भोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. इस कार्यक्रम में जदयू की ओर से भाजपा को भी न्योता दिया गया है. वशिष्ठ नारायण सिंह ने आज पत्रकारों से बातचीत में कहा है कि भाजपा नेताओं को दही-चूड़ा के भोज पर बुलायेंगे. उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ जदयू का सामाजिक जुड़ाव रहा है. संभावना जतायी जा रही है कि वशिष्ठ नारायण सिंह ने यह घोषणा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सहमति मिलने के बाद ही की है. इस कार्यक्रम के लिए जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नायारण के घर तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं. भोज के लिए चूड़ा भागलपुर, भोजपुर और बेतिया से मंगवाया गया है. वहीं दही भी काफी मात्रा में लायी गयी है. इसके साथ ही सब्जी मिठाई का भी इंतजाम किया गया है. बता दें कि हर वर्ष वशिष्ठ नारायण सिंह की ओर से आयोजित किए जाने वाले इस भोज में चूड़ा, दही, तिलकुट, मिठाई और सब्जी की व्यवस्था रहती है.

शराबबंदी से आयी खुशहाली : राजीव

पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - प्रदेश जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा है कि देश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी से घर-घर में खुशहाली आई है। अपने इस साहसी कदम से उन्होंने राज्य की महिलाओं को दिए वचन को भी निभाया है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी से राज्य में अपराध भी घटे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी बिहार में शराबबंदी के लिए नीतीश जी की बड़ाई करने से खुद को नहीं रोक पाए। अच्छे काम की बड़ाई करने वाले प्रधानमंत्री के पास उसका अनुकरण करने का भी साहस होना चाहिए। श्री प्रसाद ने कहा कि सकारात्मक राजनीति करने वाले नीतीश कुमार खुद भी पक्ष-विपक्ष की बजाय अच्छे-बुरे के आधार पर निर्णय लेते रहे हैं।

लोजपा प्रमुख की हालत स्थिर, नीतीश, लालू और मांझी सहित नेता पहुंचे देखने

पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - सांस लेने में दिक्कत होेने के बाद गुरूवार की देर शाम पटना के एक अस्पताल के आइसीयू में भर्ती कराये गये केंद्रीय मंत्री एवं लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान की हालत अब स्थिर है. यह जानकारी उनका उपचार कर रहे चिकित्सकों ने आज दी. पासवान के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चिकित्सकों से स्वयं बात की और उन्हें देखने पारस अस्पताल गये.

राज्यपाल रामनाथ कोविंद एवं राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने भी पासवान के स्वास्थ्य की जानकारी ली. लालू प्रसाद अपने बेटों तेजस्वी यादव एवं तेज प्रताप यादव के साथ पासवान को देखने के लिए पारस अस्पताल गये. पासवान को पारस एचएमआरआइ अस्पताल में भर्ती कराया गया है. अस्पताल की हृदयरोगविज्ञान इकाई के प्रमुख डॉक्टर प्रमोद कुमार ने कहा कि पासवान जी का स्वास्थ्य अब स्थिर है. श्री पासवान का उपचार कर रहे दल के एक अन्य सदस्य एवं एम्स पटना के डॉक्टर संजीव कुमार ने भी कहा कि पासवान का स्वास्थ्य अब स्थिर है. उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का एक दल उनका उपचार कर रहा है.

श्री पासवान के भाई एवं लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने बताया था कि केंद्रीय मंत्री को सांस लेने में दिक्कत महसूस होने पर गुरूवार की रात करीब 8.30 बजे अस्पताल लाया गया और उन्हें आइसीयू में भर्ती कराया गया. केंद्रीय खाद्य एवं जनवितरण मंत्री पासवान इससे पहले राज्य के चार दिवसीय दौरे पर कल यहां पहुंचे थे. इस दौरान उन्हें पटना, खगड़िया, बेगूसराय एवं मोकामा में राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को पूरा करना था. इसके बाद उन्हें 15 जनवरी को पटना में मकर संक्रान्ति पर भोज आयोजित करना था.

दलित छात्रा की हत्या की हो जांच, धरना देगे महिला संगठन

पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - ऐपवा राज्य कार्यालय में शुक्रवार को महिला संगठनों की संयुक्त बैठक हुई. बैठक में ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, अनिता सिन्हा व नयनतारा, बिहार महिला समाज की अध्यक्ष प्रो. सुशीला सहाय, परिवर्तन जन आंदोलन की वर्षा जवलगेकर, आॅल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन की साधना मिश्रा व अनामिका, नटमंडप की मोना झा, आधी जमीन की मधु, जन संस्कृति मंच की प्रीति प्रभा, वीमेन्स नेटवर्क की प्रतिनिधि आदि उपस्थित थे. बैठक की अध्यक्षता मीना तिवारी ने किया.

बैठक में उपस्थित महिला संगठनों की प्रतिनिधियों ने अंबेदकर विद्यालय, हाजीपुर की छात्रा बलात्कार-हत्याकांड पर सरकार की संवेदनहीनता और मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की तीखी आलोचना की और कहा कि इस सरकार को स्कूल-कॉलेजों में पढ़नेवाली छात्राओं को खासकर दलित छात्राओं को न्याय व अधिकारों की चिंता नहीं है. नीतीश सरकार के इसी रवैये के कारण आज बिहार में महिलाओं, गरीबों, दलितों पर हमले हो रहे हैं. अपराधी व ताकतवर लोग चैन से हैं और पितृसत्तात्मक मूल्यों को बढ़ावा मिल रहा है.

अंबेदकर विद्यालय, हाजीपुर की छात्रा ने हत्या के दिन ही सुबह में अपनी मां को एक शिक्षक द्वारा यौन संबंध बनाने के लिए दबाव डालने की बात बतायी थी. छात्रा की मां इस बात को कई बार दुहरा चुकी है, लेकिन पुलिस ने किसी भी शिक्षक को अब तक गिरफतार नहीं किया है. यही नहीं, घटनास्थल पर मौजूद मां बार-बार कहती रही, किंतु उसके कहे अनुसार एफआईआर भी दर्ज नहीं किया गया. एसपी के हवाले से अखबारों व न्यूज चैनलों पर यह खबर चलायी जा रही है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर छात्रा के साथ बलात्कार की पुष्टि नहीं हो रही है. यह बलात्कार विरोधी कानून का खुला उल्लंघन है.

राज्यपाल, मुख्यमंत्री, लालू सहित सबने दी मकर संक्रांति की बधाई

पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - मकर संक्रांति के मौके पर राज्यपाल राम नाथ कोविन्द, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राजद प्रमुख लालू प्रसाद, विधानसभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार सहित अनेक नेताओं ने राज्यवासियों को मकर संक्रांति की श्ुाभकामनायें दी है। अपने संदेश में राज्यपाल ने कहा कि सूर्य की दिव्य आराधना तथा गंगा के प्रति पवित्र आस्था के प्रकटीकरण से जुड़ा मकर संक्रांति पर्व, प्रकृति के साथ मानवीय चेतना के निकट जुड़ाव और श्रद्धा-भाव का परिचायक है। राज्यपाल ने समस्त बिहारवासियों और देशवासियों को मकर संक्रांति के सुअवसर पर बधाई देते हुए उनके सुखी, समृद्ध और आनंदमय जीवन की मंगलकामना की है।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने अपने संदेश में कहा कि मकर संक्रांति के दिन से फसली कलेंडर का नया वर्ष शुरू होता है !ऐसी मान्यता है कि संक्रांति के दिन स्नान करना और चूड़ा दही खाना और खिलाया जाना बहुत शुभ होता है। संक्रांति के दिन खरमास समाप्त हो जाता है। शादी-ब्याह और अन्य शुभकार्य करना शुरू हो जाता है। नई फसल के घर आने की खुशी लोग मिलजुल कर मनाते हैं। नई फसल को मिलजुल कर खाते और खिलाते हैं। यह पर्व आपसी भाईचारा और सौहाद्र को बढ़ाता है। उन्होंने राज्यवासियों से अपील की है कि इस त्योहार को मिलजुल कल मनायें और संकल्प लें कि हम अपने खेतों को कभी भी परती नहीँ रखेंगे। नई तकनीकी और उपकरणों का उपयोग कर पैदावार को बढ़ाएंगे। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी , उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव , स्वास्थ मंत्री तेज प्रताप यादव ,राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने भी राज्यवासियों को मकरसंक्रांति की बधाई दी है और कहा कि यह गौरवपूर्ण भारतीय संस्कृति का त्योहार है।

शराबबंदी लागू करने में सरकार विफल : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता शराबबंदी के बाद राज्य के अंदर अवैध शराब की बिक्री बढ़ गयी है, आए दिन शराब पकड़े जा रहे हैं, जिसे रोकने में नीतीश सरकार पूरी तरह से विफल हो चुकीं है। डा. कुमार ने कहा कि पूर्ण शराबबंदी के बाद भी सूबे के अंदर 18 शराब फैक्ट्री चल रही है, जिसमें शराब बन कर पड़ोसी राज्यों में बेचे जा रहा हैं और वहां से राजस्व आ रहा है। नीतीश जी शराबबंदी पर यह दोहरी नीति क्यों अपना रखी है। आप पूरे देश में शराबबंदी चाहते हैं तो पहले राज्य के अंदर चल रहे शराब फैक्ट्रियों को तुरंत बंद करे, फिर पूरे देश में पूर्ण शराबबंदी की मांग करें।

डा.कुमार ने कहा कि नीतीश जी आपने भाजपा शासित राज्यों से शराबबंदी की मांग की, लेकिन जहां कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां शराबबंदी की मांग क्यों नहीं की, इस तरह की दोहरी नीति शराबबंदी पर क्यों अपना रखा हैं। डा. कुमार ने कहा कि राज्य के अंदर शराबबंदी में कड़े कानूनों को बदलने के लिए सर्वदलिय बैठक बुलाई, लेकिन उस बैठक की बातों को आपने ठंडे बस्ते में डाल दिया। भाजपा पूर्ण शराबबंदी का समर्थन करती है, लेकिन कड़े तालिबानी कानूनों का विरोध करती है, साथ ही राज्य के अंदर चल रहे 18 शराब फैक्ट्रियों को बंद करने की मांग लगातार कर रहीं। भाजपा पूर्ण शराबबंदी के साथ ही इसलिए मावनश्रृखंला में साथ है।

भाजपा के युवा नेताओं ने ली राजद की सदस्यता

पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश कार्यालय में युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष मो. कारी सोहैब के समक्ष भाजपा के दर्जनों युवा नेताओं ने राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद जी नीति एवं सिद्धांतों में आस्था व्यक्त करते हुए राजद की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने वालों में मुन्ना राय, रंजीत कुमार, रविन्द्र यादव, रूपेष कुमार, पिन्टू कुमार, अमित कुमार, छोटू कुमार, मंटू कुमार, राजीव रंजन, गौरी यादव, धर्मेन्द्र यादव, महेन्द्र यादव, अरविन्द कुमार, रवि कुमार सहित दर्जनों भाजपा कार्यकर्ता शामिल रहे। इस मौके पर इन नेताओं ने कहा कि युवाओं के आदर्श उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव जी के कार्यों से युवाओं के प्रति जो उनका सोच है उससे पे्ररित होकर हमलोगों ने राजद का सदस्यता ग्रहण किया। पूरे प्रदेश में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव जी के प्रति नौजवानों में भारी उत्साह और उमंग है और प्रदेश के युवा अपना भविष्य उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव जी में देख रही है।

इस मौके पर युवा राजद के प्रदेष अध्यक्ष मो. कारी सोहैब ने कहा कि महागठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव जी के कार्यों से पे्ररित होकर पूरे बिहार में हर वर्ग के छात्र, युवाओं का राजद के प्रति रूझान बढ़ा है। इस अवसर पर राजद दस्तकार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मदन शर्मा, युवा राजद के प्रदेष मुख्य प्रवक्ता रणविजय साहू, प्रदेश प्रवक्ता अरूण कुमार यादव, अरविन्द कुमार पप्पू, अमित कुमार सहित कई युवा नेता उपस्थित थे।

शोषित समाज दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयराम प्रसाद का निधन, राजद नेता मुन्द्रिका सिंह सहित अनेक नेताओं ने जताया शोक

पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - राष्ट्रीय जनता दल के प्रधान महासचिव सह विधायक मुन्द्रिका सिंह यादव एवं प्रदेह्णा प्रवक्ता मनीष यादव ने शोषित समाज दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयराम प्रसाद के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। नेताओं ने कहा कि स्व. जयराम प्रसाद अमर शहीद जगदेव प्रसाद जी के पदचिन्हों पर चलते हुए आजीवन शोषित, दलित और पीड़ित समाज के उत्थान के लिए संघर्ष करते रहे। उनके निधन से सामाजिक और राजीनतिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। नेताओं ने स्व. जयराम प्रसाद के परिजनों एवं षोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति व्यक्त की है। जापलो के प्रदेश प्रवक्ता श्याम सुन्दर यादव ने भी स्व. प्रसाद के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने शोषित समाज दल के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. जयराम सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और कहा है कि भाकपा-माले ने अपना एक सच्चा दोस्त खो दिया. प्रो. जयराम सिंह हमेशा शोषित समुदाय के संघर्षों की लड़ाई लड़ते रहे और कभी हार नहीं मानी.

इस दुख की घड़ी में हम उनके परिजन के साथ हैं. माले सचिव के अलावा माले के मगध जोन के प्रभारी रामजतन शर्मा, किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव राजाराम सिंह, रामधार सिंह,महानंद, केडी यादव आदि नेताओं ने अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की.

जेपी पेंशन को लेकर उभरा राजनीतिक विवाद, श्याम रजक ने उठाया पेंशन पर सवाल, संजय सिंह ने सुशील मोदी को कहा - फर्जी आंदोलनकारी

पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - सूबे में जेपी पेंशन के लाभार्थियों की नयी सूची आने के बाद सियासत गर्मा गयी है। इसे लेकर सियासी बयानबाजी जारी है। सबसे अधिक बयानबाजी राजद प्रमुख लालू प्रसाद को पेंशनरों की सूची में शामिल किये जाने को लेकर की जा रही है। जबकि पेंशनरों की सूची में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा भाजपा के सुशील मोदी भी शामिल हैं। अन्य लोगों में वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी, लोजपा प्रमुख सह केंद्रीय खाद्य आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी सरीखे लोग भी हैं। मिली जानकारी के अनुसार अभी इस पेंशन का 3100 लोग लाभ उठा रहे हैं। इसके तहत पेंशनरों को दस हजार रुपये दिये जाते हैं।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा बयान जदयू के विधायक सह पूर्व मंत्री श्याम रजक ने दिया है। उन्होंने जेपी पेंशन की नैतिकता पर ही सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि वे किसी व्यक्ति विशेष की बात नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेपी पेंशन लाभार्थियों की सूची में केवल राजद प्रमुख लालू प्रसाद ही नहीं बल्कि कई और अन्य नेता भी शामिल हैं। श्री रजक ने कहा कि संपूर्ण क्रांति आंदोलन स्वतंत्रता आंदोलन की तरह निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा। स्वतंत्रता संग्राम की परिणति देश की आजादी के रूप में हुई थी। इसलिए स्वतंत्रता सेनानियों को मिलने वाली पेंशन की सार्थकता है। लेकिन संपूर्ण क्रांति आंदोलन अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सका। यह लड़ाई व्यवस्था परिवर्तन की थी। लेकिन आज भी व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई जारी है।

वहीं इस मामले में लालू प्रसाद को पेंशन दिये जाने पर सवाल उठाने वाले पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पर हमला करते हुए जदयू के प्रवक्ता संजय सिंह ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी पर फर्जी आंदोलनकारी होने का आरोप लगाया है। उन्होंनकहा है कि सुशील मोदी को पेंशन देने से पहले सरकार जांच करा ले। सुशील मोदी फर्जी आंदोलनकारी हो सकते हैं।

राजनीति से ऊपर उठकर बनायें अद्वितीय मानव श्रृंखला : सदानंद

पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा है कि नशामुक्त बिहार के लिए शराबबंदी के समर्थन में बनने वाली विशाल मानव श्रृंखला में सभी लोगों को धर्म, जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर शामिल होना चाहिए, ताकि यह अद्वितीय एवं ऐतिहासिक बन सके। उन्होंने कहा कि सर्वजन एवं सर्वधर्म का समर्थन मिले बिना समाज से शराब जैसी बुराई दूर नहीं हो सकती है। अत: सम्पूर्ण भारत में शराबबंदी के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए सभी दलों को राजनीति से ऊपर उठकर बिहार के मानव श्रृंखला को अद्वितीय बनाना चाहिए।

श्री सिंह ने कहा कि शराबबंदी के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से बिहार में 21 जनवरी को आयोजित हो रहे मानव श्रृंखला का कार्यक्रम विश्व जनमानस को नशामुक्ति के लिए उद्वेलित और प्रेरित करेगा। यह श्रृंखला 11,292 किलोमीटर लम्बी होगी, जिसमें 3007 किमी एनएच और एसएच के मुख्य सड़क मार्ग पर होगी। इसमें करीब 60 लाख आदमी शामिल होंगे, जबकि उपमार्गों पर 8285 किमी में 1 करोड़ 65 लाख व्यक्ति शामिल होंगे। यह मानक प्रति किमी 2000 लोगों के हिसाब से लगभग 2 करोड़ से भी अधिक मानव शामिल होकर श्रृंखला बनाएँगे। यह विश्व में अबतक की बनी सबसे लम्बी मानव श्रृंखला नेपाल की 1155 किमी के रिकार्ड को तोड़कर नया किर्त्तिमान बिहार के नाम बनेगा।

गौपालकों को मिले दूध की वाजिब कीमत : राधामोहन

नई दिल्ली/पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि गांव के परिवारों में दूध उत्पादन एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि बन गया है और किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए खेती - बाड़ी के साथ इसे भी अपना रहे हैं। श्री सिंह ने यह बात आज कृषि मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की अंतर-सत्रीय बैठक में कही। इस बैठक में राष्ट्रीय डेयरी योजना के कार्यान्वयन पर चर्चा हुई।

श्री सिंह ने कहा कि देश के लगभग 70 मिलियन ग्रामीण परिवार दूध उत्पादन में लगे हुए हैं। छोटे और सीमांत किसान तथा भूमिहीन श्रमिक, व्यक्तिगत रूप से प्रतिदिन लगभग एक सेतीन लीटर दूध का उत्पादन कर देश के अधिकांश दूध का उत्पादन करते हैं। भारत के लगभग 78 प्रतिशत किसान, छोटे तथा सीमांत हैं जिनके पास लगभग 75 प्रति?शत मादा गौजातीय पशु हैं, परंतु केवल 40 प्रतिशत फार्म भूमि है। दूध, ग्रामीण परिवारों की सकल आय में लगभग एक तिहाई का तथा भूमिहीन लोगों के मामले में उनकी सकल आय के लगभग आधे हिस्से तक का योगदान करता है।

श्री सिंह ने कहा कि भारत 1998 से विश्व के दुग्ध उत्पादक राष्ट्रों में पहले स्थान पर बना हुआ है। यहां विश्व की सबसे अधिक बोवाईन आबादी (18.4 प्रतिशत हिस्सा) है। भारत में दूध का उत्पादन 1970 के लगभग 22 मिलियन टन से बढ़कर 2015-16 में 156 मिलियन टन हो गया, जो पिछले 46 वर्षों में 700 प्रतिशत की वृद्धि दशार्ता है। इसकी बदौलत भारत में 299 ग्राम प्रतिदिन विश्व औसत के मुकाबले दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धतता 337 ग्राम प्रतिदिन है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों, 2014-16 से दूध के उत्पादन ने 6.28 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है, जो पिछले वर्ष की लगभग 4 प्रतिशत की विकास दर से अधिक है तथा 2.2 प्रतिशतके विश्व विकास औसत के मुकाबले तीन गुना अधिक है। यदि चावल तथा गेहूं दोनों को भी मिला दिया जाए तो भी 2014-15 में 4.92 करोड़ रूपए के सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) में दूध का 37 प्रतिशत से भीअधिक का योगदान है। देश में उत्पादित दूध का लगभग 54 प्रतिशत अधिशेष है जिसमें लगभग 38 प्रतिशत संगठित सेक्टर द्वारा हैंडल किया जाता है, जिसमें सहकारिताओं तथा निजी डेयरी संगठनों कीबराबर की भागीदारी होती है। श्री सिंह ने बताया कि डेयरी व्यवसाय में महिलाओं की लगभग 70 प्रतिशत भागीदारी है।

गांधी की जगह नमो की तस्वीर पर सियासत गर्म

पटना(अपना बिहार, 14 जनवरी 2017) - खादी ग्रामोद्योग आयोग द्वारा वर्ष 2017 नये साल में जो कैलेन्डर एवं डायरीमें महात्मा गाँधी की जगह प्रधानमंत्री मोदी का फोटो प्रकाशित किये जाने के बाद सूबाई राजनीति भी गर्म हो गयी है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता पूर्व विधायक डा. हरखु झा ने कहा कि खादी ग्रामोद्योग आजादी के दिनों में अंग्रेजों के खिलाफ चलाये गये गांधी जी द्वारा उद्योग था। जिस उद्योग में आमजन द्वारा बनाये गये स्वदेषी वस्तुओं का निर्माण होता था। भारत के आजादी के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गाँधी जी के दर्शन, विचारों एवं आदर्शों को कायम रखते हुए इस संस्थान को प्रशासनिक दर्जा दिया। लेकिन दुर्भाग्यवश भाजपा के शासन में आने से इस कुटीर एवं लघु उद्योग के रूप में काम कर रही संस्था का विलोपन शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि भाजपा एवं उसकी सरकार को कोई हक नहीं बनता कि वह वर्षों पुरानी संस्था को अपना नामाकरण दे जिससे देश का इतिहास बदले और छवि खराब हो।

डा. झा ने कहा कि महात्मा गाँधी जी का तस्वीर वर्षों से चरखा काटते हुए इतिहास के पन्नों में भारत ही नहीं विश्व के अनेक देशों में इसे दिखाया जाता है जो भारत के गौरव का प्रतीक चिन्ह माना जाता है वैसे में जो कोई व्यक्ति इस घृणित कार्य को किया है वह आमजन के नजर में दोषी है तथा प्रधानमंत्री जी को चाहिए कि इस पर एक न्यायिक जाँच बैठाये और दोषी व्यक्ति को चिन्हित कर सजा दें।

अपनी बात : युवा तेजस्वी ने साबित किया राजनीतिक आदर्श

दोस्तों, राजनीति में प्रोटोकाल का बड़ा महत्व होता है। यह प्रोटोकाल ही था जिसके कारण दो घुर विरोधियों नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार ने प्रकाश पर्व के मौके पर मंच साझा किया। जबकि बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के सामने जमीन पर बैठे। हालांकि लालू प्रसाद ने प्रोटोकाल के नियमों का अनुपालन किया और सबसे दिलचस्प नजारा उस समय दिखा जब वे गांधी मैदान में श्रद्धालुओं के बीच से गुजर रहे थे। हर श्रद्धालु उनका अभिवादन कर रहे थे। हालत यह हो गयी कि सुरक्षा के लिहाज से की गयी बैरिकेडिंग टूटने लगी तब श्री प्रसाद स्वयं श्रद्धालुओं के बीच पहुंचे और तब जाकर स्थिति नियंत्रित हो सकी। यह लालू प्रसाद की लोकप्रियता का एक पैमाना माना जा सकता है कि भले ही उन्हें मंच पर जगह नहीं दिया गया हो, लेकिन लोगों के दिलों में वे जरुर बसते हैं।

लेकिन तारीफ़ करनी होगी युवा उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव की। मिली जानकारी के अनुसार पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के हिसाब से उपमुख्यमंत्री होने के कारण उन्हें भी मुख्य मंच को साझा करना था। परंतु उन्होंने लालू प्रसाद को मंच पर जगह नहीं दिये जाने के कारण मंच साझा करने से इन्कार कर दिया और खुद भी जमीन पर बैठकर ऐतिहासिक सिक्ख समागम का हिस्सा बने।

तेजस्वी का यह व्यवहार प्रोटोकाल के हिसाब से नहीं था। असल में प्रोटोकाल सत्ता पर राज करने के लिए जरुरी होता है। न कि जन पक्षीय राजनीति के लिए। स्वयं लालू प्रसाद ने अपनी राजनीति में प्रोटोकाल को वह तरजीह नहीं दी। जब वे सीएम थे तो स्वयं गरीबों, दलितों और पिछड़ों के गांव-बस्ती में चले जाते थे। फ़िर लोगों से अपने हिसाब से मिलते थे। यह वही दौर था जब उन्होंने "पढना लिखना सीखो, ओ भैंस चराने वालों, ओ सुअर चराने वालों" का नारा दिया था।

बहरहाल कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि लालू प्रसाद एक सर्वमान्य(मानसिक अवसादग्रस्त सवर्णों को छोड़कर) जननेता हैं। उनका सम्मान होना चाहिए था। वैसे तेजस्वी यादव का यह आचरण और भी सराहनीय है। कार्यक्रम के बाद अपने ट्वीटर संदेश में उन्होंने साफ़ कहा कि वे सकारात्मक राजनीति करते हैं, इसलिए वैचारिक मतभेद तो चलते रहेंगे लेकिन सूबे के विकास के लिए जिस किसी के साथ बात करनी होगी, जरुर करेंगे। फ़िर चाहे वह आरएसएस के कुनबे के पीएम या फ़िर उनके मंत्रीगण क्यों न हो।

बिहार ने किया कमाल, पीएम सहित सबने की प्रकाश पर्व के भव्य आयोजन के लिए बिहार की सराहना

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - दशमेश गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह के 350वीं जयंती के मौके पर आयोजित पांच दिवसीय प्रकाश पर्व के अंतिम दिन पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में बने अस्थायी गुरुद्वारे के दरबार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सभी ने बिहारवासियों और बिहार सरकार दोनों की मुक्त कंठ से सराहना की। जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भव्यतम प्रकाश पर्व का आयोजन कर बिहार ने नया इतिहास रचा है तो दूसरी ओर पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि यदि वे भी चाहते तो ऐसा भव्य इंतजाम पंजाब में नहीं कर पाता जैसा नीतीश कुमार ने करके दिखाया है। उन्होंने कहा कि पूरा सिख समुदाय इस ऐतिहासिक प्रकाश पर्व के आयोजन के लिए श्री कुमार के प्रति ॠणी रहेगा।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार सरकार द्वारा लागू की गयी पूर्ण शराबबंदी की सराहना की। उन्होंने कहा कि सामाजिक बदलाव का काम इतना आसान नहीं होता है। लेकिन नीतीश कुमार ने यह कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति से देश के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि इससे बिहार विकास के नये कीर्तिमान रचेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रकाश पर्व के मौके को ऐतिहासिक बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा विश्व के हर देश में बने दूतावासों को निर्देश दिया गया है। साथ ही पटना में आयोजित प्रकाश पर्व के सफ़ल आयोजन के लिए केंद्र सरकार के कई विभागों यथा रेल व पर्यटन मंत्रालय द्वारा 40-40 करोड़ रुपए व्यय किया गया है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के गौरवशाली अतीत की चर्चा करते हुए कहा कि देश के इतिहास में बिहार में की अहम भूमिका है। इस क्रम में उन्होंने डा राजेन्द्र प्रसाद, लोकनायक जय प्रकाश नारायण और जननायक कर्पूरी ठाकुर का भी नाम लिया।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विनम्रतापूर्वक कहा कि बिहार एक गरीब और पिछड़ा राज्य है। इसके बावजूद हमारे द्वारा श्री गुरु गोविन्द सिंह के प्रकाश पर्व को लेकर यथाशक्ति इंतजाम किया गया है। यदि इंतजाम में किसी तरह की कोई कमी रह गयी हो तो वे इसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं। उन्होंने कहा ऐतिहासिक प्रकाश पर्व को यादगार बनाने के लिए पटना सिटी के गुरु के बाग में भव्य बहुद्देशीय उद्यान का विकास किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में गुरु नानक देव, गुरु अर्जुन सिंह, गुरु तेगबहादुर और गुरु गोविन्द सिंह की यादें है। राज्य के विभिन्न जिलों में सिख पंथ से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के विकास के लिए सिख सर्किट की स्थापना की जाएगी ताकि यहां आने वाले श्रद्धालु इन सभी जगहों पर मत्था टेक सकें।

श्री कुमार ने कहा कि बिहार के लिए यह गौरव का विषय है कि यहां सभी धर्मों के महापुरुषों का या तो अवतरण हुआ है या फ़िर कर्मभूमि रही है। उन्होंने गया में चल रहे 34वें कालचक्र पूजा का उल्लेख भी किया। साथ ही उन्होंने कहा कि इसी साल महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह का सौवां साल है। इस उपलक्ष्य में बिहार सरकार द्वारा विशेष तैयारी की जा रही है।

श्री कुमार ने शराबबंदी की चर्चा करते हुए कहा कि विकसित समाज के लिए नशामुक्ति बहुत जरुरी है। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति समाज का निर्माण ही गुरु गोविन्द सिंह और महात्मा गांधी के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल, बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविन्द ने भी अपने विचार व्यक्त किये। जबकि इस अवसर पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, रविशंकर प्रसाद, पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सहित बड़ी संख्या में गणमान्यों के अलावा लाखों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। इस मौके पर प्रधानमंत्री सहित सभी उपस्थित अतिथियों ने गुरु गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाश पर्व के मौके पर विशेष डाक टिकट भी जारी किया।

झलकियां : पीएम ने नहीं लिया लालू प्रसाद का नाम, नीतीश कुमार की शान में पढे कसीदे

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - प्रकाश पर्व के आखिरी दिन गांधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद से अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता निभाते हुए न तो श्री प्रसाद का नाम लिया और न ही उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का। वहीं अपने संबोधन में श्री मोदी ने नोटबंदी का समर्थन करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपेक्षा से अधिक उदारता दिखायी और जमकर तारीफ़ की। संबोधन से पहले भी मंच पर दोनों नेताओं के बीच बातचीत के कई दौर चले। बीच-बीच में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी नीतीश कुमार के साथ हंसी मजाक करते दिखे।

पीएम ने की नीतीश की तारीफ़, सुमो के होश उड़े

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - प्रकाश पर्व के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश भाजपा के नेताओं के एक मुद्दे को हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कर दिया। पूर्ण शराबबंदी का लगातार विरोध करने वाले प्रदेश भाजपा के नेताओं के होश उस समय उड़ गये जब पीएम ने सीएम नीतीश कुमार के द्वारा लागू शराबबंदी की जमकर सराहना की। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी कहा कि अच्छे काम की तारीफ़ होनी चाहिए।

बोलने के क्रम में भटक गये नरेंद्र मोदी और बादल

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - प्रकाश पर्व के आखिरी दिन अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल दोनों भटक गये। प्रधानमंत्री ने गुरु गोविन्द सिंह के जीवनी की चर्चा करते हुए उनके जीवन संघर्ष को आदिगुरु शंकराचार्य के साथ जोड़ दिया। उनका कहना था कि जिस तरह शंकराचार्य ने हिन्दू धर्म की रक्षा के देश के चार अलग-अलग कोनों पर पीठ का निर्माण कराया था उसी प्रकार गुरु गोविन्द सिंह ने भी पंज प्यारों की बात कही। उन्होंने कहा कि खालसा पंथ उनके खून से जुड़ा है। इसे विस्तारपूर्वक बताते हुए श्री मोदी ने कहा कि पंज प्यारों में गुजरात का एक दर्जी भी शामिल था। वहीं अपने संबोधन में पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि गुरु गोविन्द सिंह ने कश्मीरी पंडितों का जबरन धर्मांतरण के खिलाफ़ खालसा पंथ की स्थापना की। हालांकि सभी वक्ताओं ने एक सुर में इस तथ्य को स्वीकारा कि गुरु गोविन्द सिंह ने देश के दलितों, पिछड़ों और शोषितों को सशक्त बनाने के लिए खालसा पंथ की शुरुआत की।

रामविलास पासवान को मिली दलित होने की सजा

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - प्रकाश पर्व के आखिरी दिन पटना के गांधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्य मंच पर रामविलास पासवान और राज्यपाल रामनाथ कोविन्द दोनों को किनारे बिठाया गया। हालांकि श्री कोविन्द को संबोधन का अवसर दिया गया लेकिन लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान को यह मौका भी नहीं मिला। बताते चलें कि श्री कोविन्द भी दलित समाज से आते हैं।

गुरू गोविन्द सिंह की 350वीं जयंती आज, आज आयेंगे पीएम, प्रकाश सिंह बादल ने बुधवार को लगाया अरदास

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - दशमेश गुरू श्री गुरू गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाश पर्व को लेकर राजधानी पटना तैयार है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं बुधवार को पूरे पटना का हवाई सर्वेक्षण कर तैयािरयों का जायजा लिया। गुरूवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगमन होना है, इसलिए सुरक्षा की पूरी तैयारी की गयी है। वहीं बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी पटना पहुंचे और उन्होंने गुरूद्वारा जाकर मत्था टेका। उन्होंने प्रकाश पर्व के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई दी। बुधवार को तख्त हरमंदिर जाकर मत्था टेकने वालों में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी शामिल रहे।

उधर मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरूवार को 12.15 बजे पटना आएंगे। इसके बाद वे तख्त हरमंदिर जायेंगे और वहां से दर्शन करने के बाद पटना के गांधी मैदान में बनाये गये अस्थायी टेंट सिटी में बने अस्थायी गुरूद्वारे में अरदास लगायेंगे। इस कारण पटना पुलिस और एसपीजी सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियां बुधवार को चाक चौबंद दिखीं। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा का जायजा लिया गया। प्रधानमंत्री के आगमन पर गांधी मैदान के दरबार हॉल को फायर प्रूफ किया जा रहा है। अभी केवल छत ही फायर प्रूफ है। इसके अलावा दीवाने हॉल के चारों तरफ सिंथेटिक कपड़ों का घेरा है। गद्दे भी हैं। बैठने के लिए प्लाइउड है। इसीलिए इसे पूरी तरफ फायर प्रूफ व सुरक्षित बनाया जा रहा है। चारों ओर लगे कपड़े पर फायर रेसिस्टेंट स्प्रे(अग्नि निरोधक स्प्रे)की लगाने का निर्देश एसपीजी ने दी है। बुधवार को दरबार हाल के चारों ओर की दीवारों व अन्य जगहों पर अग्नि निरोधक स्प्रे का छिड़काव किया जाएगा। दरबार हॉल के पीछे दमकल की भी आधा दर्जन गाड़ियां तैनात रहेंगी। प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगे एसपीजी के अधिकारी सोमवार से ही पूरे गांधी मैदान की सुरक्षा का जायजा ले रहे हैं। राज्य अग्नि शमन सेवा के डीजी पीएन राय इससे जुड़ सुरक्षा की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

नहीं हो सकी कश्मीरा सिंह की गिरफ्तारी, सुरक्षा एजेंसियों के होश फाख्ता

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - प्रकाश पर्व के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के मद्देनजर खालसा आतंकी कश्मीरा सिंह के पटना में होने की सूचना से सुरक्षा एजेंसियों के होश फाख्ता हैं। बताते चलें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूचना के मुताबिक खालसा आतंकी कश्मीरा सिंह अपनी दाढ़ी-मुंछ मुड़वाकर पटना में है। वहीं जोनल आईजी नैयर हसनैन खां ने इस संबंध में बताया कि कश्मीरा सिंह की पहचान नहीं हो सकी है। लेकिन पुलिस चप्पे-चप्पे पर तैनात है और सुरक्षा के सारे प्रबंध किये गये हैं।

तख्त हरमंदिर में उमड़े जनसैलाब से अव्यवस्था, प्रशासन ने संभाला मोर्चा

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - प्रकाश पर्व को लेकर बुधवार को तख्त हरमंदिर साहब में जन सैलाब उमड़ा। इस कारण हुई अव्यवस्था के कारण थोड़ी देर के लिए हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गयी। लेकिन जल्द ही स्थानीय प्रशासन और स्थानीय सेवादारों ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया। बाद में इस संबंध में जिलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि गुरूवार को होने वाली भीड़ को देखते हुए खास इंतजाम किये गये हैं। उन्होंने कहा कि तख्त हरमंदिर साहब में भी भीड़ नियंत्रण के तमाम उपाय किये गये हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार का कष्ट न हो।

बिहार को वाजिब हक दे केंद्र, बजट पूर्व समीक्षा बैठक में बोले वित्त मंत्री, पीएम को याद दिलाया सवा लाख करोड़ का वादा

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - सूबे के वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने केंद्र सरकार से उसका वाजिब हक देने की मांग की है। बुधवार को बजट पूर्व समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस बार नोटबंदी एवं सातवें वेतन आयोग की अनुशंसायें लागू करने से राज्य के खर्च में वृद्धि होगी तथा दूसरी ओर प्राप्त होने वाली आय में कमी होगी। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली से अनुरोध किया कि इस बार वे देश की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए ऐसा बजट बनायें ताकि बिहार जैसे कम आय वाले राज्य को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने में मदद मिल सके।

अपने संबोधन में श्री सिद्दीकी ने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत बिहार को 12 हजार करोड़ रुपए मिलने चाहिए थे लेकिन नीति आयोग ने इसे घटाकर 11 हजार 88 करोड़ 33 लाख रुपए कर दिया। इसके अंतर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष में बिहार को 5 हजार 483 करोड़ रुपए मिलने चाहिए थे लेकिन अभी तक केवल 200 करोड़ रुपए की राशि ही मिली है। वहीं पूर्व के वर्षों के बकाये के रूप में 5827 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि शेष 5260.69 करोड़ रुपए की राशि राज्य को उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय बजट में उपबंध किया जाय।

श्री सिद्दीकी ने विशेष राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग वर्षों से लंबित है। उन्होंने अनुरोध किया कि वर्ष 2017-18 में इस संबंध में केंद्र सकारात्मक निर्णय ले। इससे बिहार का विकास सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने केंद्र सरकार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सवा लाख करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की याद दिलायी। उन्होंने कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में इस मद में केंद्र सरकार अपने वादे पर खरी नहीं उतरी है। उन्होंने अनुरोध किया कि वर्ष 2017-18 के बजट में इस मद में समुचित इंतजाम किये जायें। इस मौके पर वाणिज्य कर मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव सहित वित्त विभाग के अनेक आला अधिकारी मौजूद थे।

ऐतिहासिक मेजबानी के लिए तेजस्वी ने जताया जनता का आभार, तख्त हरमंदिर पहुंच गुरू गोविन्द सिंह को किया नमन, लंगर में दी सेवा

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - दशमेश गुरू श्री गुरू गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाश पर्व के सफल आयोजन के लिए उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक मौका है और इस ऐतिहासिक मौके को जनता ने अपना समर्थन देकर यादगार बना दिया है। बुधवार की सुबह उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने श्री तख्त श्री हरिमंदिर जाकर गुरु गोविंद सिंह महाराज के 350 वे प्रकाश उत्सव समारोह मे शिरकत की। गुरुगोविंद सिंघ जी महाराज को नमन किया। गुरुद्वारा मे गुरुजी महाराज से जुड़ी स्थानों एवम उनके अस्त्र-शस्त्र आदि को पूरी श्रद्धा के साथ दर्शन किया। इस दौरान उन्होंने प्रकाश उत्सव मे आये तमाम देश -विदेश के श्रद्धालुओं से मुलाकात की तथा उनका स्वागत किया।

उपमुख्यमंत्री ने श्री गुरूग्रन्थ साहब को माथा टेका तथा गुरूवाणी को पूरी श्र्द्धाा के साथ सुनने के बाद कंगनघाट ,किला घाट और पटना बाईपास पर श्रद्धालुओं के ठहरने के लिय बनाये गये टेंट सिटी गये। उन्होंने श्रद्धालुओं से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया तथा अधिकारियों को निदेश दिया कि श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाय। उन्हें किसी तरह की कोई कठिनाई नहीं हो। बाद में उपमुख्यमंत्री ने लंगर मे जा कर श्रद्धाालुओं के बीच लंगर परोसा तथा श्रद्धालुओं के बीच बैठ कर लंगर चखा।

इसके पहले उन्होंने गाँधी मैदान के बिस्कोमान भवन के निकट नि:शुल्क चाय वितरण केन्द्र का उदघाटन किया तथा श्रद्धालुओं के बीच चाय वितरित किया। वहीं गांघी मैदान पहुँच कर अधिकारियों के साथ प्रकाश उत्सव के लिये गये प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा की तथा कहा कि उन्हें खुशी है कि आये तमाम श्रद्धालु काफी खुश हैं और महागठबंधन कि सरकार द्वारा किये गये व्यवस्था की सराहना कर रहे हैं। वहीं पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि आज हम सब को गुरू गोविंद सिंह के जीवन से शिक्षा लेनी चहिये और बेहतर इंसान बनने का संकल्प लेना चहिये। उन्होंने कहा कि बिहार मेजबानी के लिय प्रसिद्ध है और इस बार बिहार ने यह साबित भी कर दिया है। वहीं उतर प्रदेश चुनाव से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि वहाँ पर दंगा कराने वालों की करारी हार होगी। उन्होंने कहा कि बुराई भले ही कितने आडंबर कर ले, जीत अच्छाई की ही होती है।

राजनीति का अखाड़ा बना दशमेश गुरू का प्रकाश पर्व, केजरीवाल, अमरिंदर और प्रकाश सिंह बादल सहित सबने की अपने-अपने अंदाज में राजनीति

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि देश में अब जाति और धर्म के नाम पर राजनीति न हो। परंतु सच्चाई यही है कि धर्म और जाति के नाम पर राजनीति बदस्तूर जारी रहेगी। इसका एक सजीव प्रमाण दशमेश गुरू श्री गुरू गोविंद सिंह के 350वें जन्मदिवस के मौके पर पटना में चल रहा प्रकाश पर्व है। यहां गुरू के दरबार में अरदास लगाने वालों में वे नेता भी शामिल हैं जो पंजाब में चुनावी ताल ठोंक रहे हैं। सबसे अधिक दिलचस्प यह है कि सबने अपने-अपने हिसाब से राजनीति भी की।

मसलन सबसे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविन्द केजरीवाल आये। दिलचस्प यह कि जिस दिन वे पटना आये, उसी दिन उनके घोर विरोधी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी आये। लेकिन श्री केजरीवाल के कारण उन्होंने गुरूद्वारा दर्शन के अपने कार्यक्रम में बदलाव किया और सोमवार के बजाय मंगलवार को तख्त श्री हरमंदिर पहुंचे। राजनीतिक बयान देते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पंजाब के चुनाव में सहयोग करने की इच्छा भी व्यक्त की। वहीं अरविन्द केजरीवाल ने भी पटना में इस मौके पर साफ कहा कि पंजाब चुनाव में उनकी पार्टी एक मजबूत पार्टी के रूप में उभरेगी। हालांकि उन्होंने इस संबंध में विस्तार देने से परहेज किया।

धर्म के नाम पर हो रही इस सियासत में उबाल तब आया जब बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री और अकाली दल प्रमुख प्रकाश सिंह बादल अपने कुनबे के साथ पटना पहुंचे। पटना साहिब में गुरू के दरबार में अरदास लगाने के बाद पत्रकारों से बातचीत में साफ कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव में हम तीन चौथाई सीटें जीतेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे साथ किसी का मुकाबला नहीं है।

बहरहाल गुरूवार को प्रकाशपर्व के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगमन होना है। ऐसे में राजनीति का परवान चढ़ना लाजमी है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे आयोजन को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक महत्वाकांक्षा से भी जोड़ते हैं। उनका कहना है कि प्रकाश पर्व के सफल आयोजन से राष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि का विस्तार करेगी और इसका लाभ उन्हें वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में मिलेगा।

शराबबंदी के कारण हुआ प्रकाशपर्व का सफल आयोजन : जदयू

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - जदयू के प्रदेश प्रवक्ता नवल शर्मा ने कहा है कि शराबबंदी ने बिहार में शांति और सुव्यवस्था का माहौल बनाने में एक बड़े उत्प्रेरक का काम किया है । जिस शांति से सूबे के लोगों ने नया वर्ष मनाया और जिस शान्ति से प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है उसके पीछे की मूल प्रेरणा शासकीय मुस्तैदी के साथ साथ शराबबंदी भी है । उन्होंने कहा कि जो विपक्ष तालिबानी कानून कहकर शराबबंदी की आलोचना कर रहा था अब शायद उन्हें भी अपने भूल का अहसास हो रहा होगा । 'भय बिन होय न प्रीति ' का ही नतीजा है कि आज बिहार की फिजाओं में कलह और संघर्ष के बजाय प्रेम और आपसी भाईचारा का माहौल बन रहा है और प्रकाशोत्सव जैसे बड़े आयोजन शांतिपूर्वक सम्पन्न हो रहे हैं । अब विपक्ष को भी दरियादिली दिखाते हुए शराबबंदी के पक्ष में मजबूती से खड़ा हो जाना चाहिए ।

कब तक होती रहेंगी पत्रकारों की हत्या : प्रेम

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - बिहार विधान सभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी आपके शासनकाल में प्रेस की आजादी पर लगातार हमला हो रहा है और पत्रकारों की हत्याए हो रहीं है। यही लोकतंत्र है, जहां चैथे स्तम्भ पर लगातार हमले कर उनकी आजादी समाप्त की जा रहीं हैं। समस्तीपुर में एक दैनिक अखबार के पत्रकार ब्रजकिशोर ब्रजेश को गोली मार कर अपराधियों ने हत्या कर दी। राज्य के अंदर इसके पहले भी कई पत्रकारों की हत्याएं हो चुकी है, जिस से प्रेस आज खतरे में पड़ी हुई है और सरकार मूक दर्शक बनी हुई है।

डा. कुमार ने कहा कि पत्रकार ब्रजकिशोर ब्रजेश के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए साथ ही उनके परिवार के किसी व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए एवं इनके परिवार को सुरक्षा प्रदान सरकार करें। अपराधियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए एवं दोषियों को सजा दिलायी जाए। राज्य के पत्रकारों को सरकार सुरक्षा प्रदान करें।

डा. कुमार ने कहा कि राज्य में नीतीश जी की सरकार में अब पत्रकार की हत्या अपराधियों द्वारा खुले आम की जा रहीं है। ऐसे में संविधान के चैथे स्तम्भ की हत्या लोकतंत्र की हत्या की गई है। सीवान में हिन्दुस्तान के ब्यूरो प्रभारी राजदेव रंजन की हत्या अपराधियों ने गोली मार कर कर दी। मुख्यमंत्री बताएं की इस राज्य में अब कौन सुरक्षित है। राज्य में कानून का नहीं अपराधियों का राज चल रहा है।

प्रकाश पर्व ऐतिहासिक, कार्यकर्ता करें श्रद्धालुओं का सहयोग, सीपीआई राज्य सचिव ने किया आहवान

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव सत्य नारायण सिंह ने गुरू गोबिंद सिंह जी के 350 वें प्रकाशोत्सव में सम्मिलित होने देश-विदेश से पटना साहिब पहुँच रहे सिख श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए हार्दिक शुभकामनाएं दी है। साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार के लिए, खासकर पटना के लिए यह एक गौरवपूर्ण अवसर है, इसलिए प्रत्येक पटनावासी का पुनीत कर्तव्य है कि वे सिख श्रद्धालुओं का तहेदिल से स्वागत करें, उन्हें हर प्रकार से सहयोग करें। अतिथि सत्कार, सर्वधर्म समभाव और बसुधैव कुटुम्बकम गौतमबुद्ध की पावन धरती - बिहार की गौरवशाली परंपरा है जिसकी रक्षा करना और आगे बढ़ाना सभी बिहारवासियों का पावन कत्र्तव्य है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की बिहार राज्य परिषद उक्त गौरवशाली परंपरा का निर्वाह करने में बिहारवासियों के कंधे से कंधा मिलाकर आगंतुक श्रद्धालुओं का स्वागत करने हेतु तत्पर है।

श्री सिंह ने इस बात पर संतोष जाहिर किया कि बिहार सरकार ने धर्मनिरपेक्षता के मार्ग का अनुसरण करते हुए आगंतुक सिख श्रद्धालुओं के स्वागत और प्रकाषोत्सव के सफल आयोजन के लिए मुकम्मिल इंतजामात किए हैं जिसकी चारों तरफ से प्रशंसा हो रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस प्रकार से व्यक्तिगत रूचि लेकर प्रकाषोत्सव की तैयारियों में सहयोग की पहल की है वह सराहनीय है। श्री सिंह ने राज्य के सभी पार्टीजनों, विशेषकर पटना के पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया है कि वे प्रकाशोत्सव की सफलता के लिए पूरा योगदान करें।

तेजप्रताप ने सुशील मोदी पर किया करारा पलटवार, सुमो को जनता ने किया बेदखल, अब मानसिक दिवालियापन के शिकार

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव ने पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी द्वारा एक दिन पहले दिये गये राजनीतिक नसीहत कि वे अपने पिता राजद प्रमुख लालू प्रसाद की छाया से बाहर निकलें, नहीं तो वंशी बजाते रह जायेंगे, के जवाब में करारा पलटवार किया है। अपने बयान में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जबसे बिहार की जनता ने श्री मोदी को सत्ता से बेदखल कर दिया है तब से वह मानसिक दिवालियापन के शिकार हो गये हैं। ऐसे में उन पर तरस ही खाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक स्वास्थ्य मंत्री के नाते हम उनके मानसिक दिवालियापन के इलाज के लिए उचित बंदोबस्त करने को तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि वैसे सुशील मोदी जी को यह समझना होगा कि यह लालू प्रसाद की उज्जवल छवि ही है जिसकी बदौलत बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश के वंचित, शोषित और अल्पसंख्यक समाज के लोगों ने उन्हें अपना मसीहा बना लिया है। ऐसे में हमें खुद पर गर्व है कि हम उनकी प्रेरणा से बिहार की जनता की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक सुशील मोदी जी की बात है तो हमारा उनसे आग्रह होगा कि समाज को तोड़ने, साम्प्रदायिक वैमनस्य फैलाने जैसी कृत्यों से अगर वह बाज नहीं आये तो जीवन में कभी बिहार की जनता उन्हें स्वीकार नहीं कर सकती।

सिक्ख श्रद्धालुओं का राजद कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत

पटना(अपना बिहार, 5 जनवरी 2017) - दशमेश गुरू श्री गुरू गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाश पर्व के रंग में सियासी गलियारा भी रंग गया है। बुधवार को श्री गुरू गोविन्द सिंह जी महाराज के 350वें प्रकाशोत्सव पर नगर कीर्तन गांधी मैदान पटना से हरमिन्दर साहिब पटना सिटी तक निकला। राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष डा. राम चंद्र पूर्वे एवं प्रधान महासचिव मुन्द्रिका सिंह यादव ने एनआईटी मोड़ पटना के पास गुरू ग्रंथ साहिब के जत्था एवं नगर कीर्तन में श्रद्धालुओं का स्वागत किया। गुरू गोविन्द सिंह जी की जन्म भूमि पटना में लाखों श्रद्धालुओं पहंूचे हैं। नगर कीर्तन जत्था में श्रद्धालुओं के उपर पुष्प बरसाया गया। सभी श्रद्धालुओं को बोतल का पानी तथा प्रसाद हाथों में दिया गया। अनेक श्रद्धालुओं से गले मिलकर एवं हाथ मिलाकर शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर पूर्व सांसद राजनीति प्रसाद, प्रो. शैलेन्द्र कुमार सिंह, प्रदेश कार्यालय सचिव चन्देश्वर प्रसाद सिंह, मनोज कुमार, विमल यादव, मिथिलेश यादव, पंकज शर्मा, राधा रंधीर सहित सैंकड़ों राजद कार्यकर्ता नगर कीर्तन जत्था की सेवा में शामिल थे।

बिहार ने किया पंजाब से बेहतर : अमरिंदर, पंजाब चुनाव में मांगा सहयोग, सिख इंटरनेशनल ने सीएम के प्रति जताया आभार

पटना(अपना बिहार, 4 जनवरी 2017) - दशमेश गुरू श्री गुरू गोविंद सिंह के 350वें प्रकाशपर्व के मौके पर राज्य सरकार द्वारा किये गये इंतजाम से सिख समुदाय गदगद हो गया है। मंगलवार को सिख इंटरनेशनल की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसके लिए आभार व्यक्त किया गया। वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने गुरु गोविंद सिंह जी के जन्मदिन पर आयोजित 350वें प्रकाश पर्व' के दौरान आज तख्त हरमंदिर साहिब पर मत्था टेका और सुन्दर व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशंसा की। पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अमरिन्दर पंजाब की पार्टी प्रभारी आशा कुमारी, कांग्रेस नेता शकील अहमद खान और राज्य मंत्री अशोक चौधरी के साथ तख्त हरमंदिर साहिब पहुंचे।

बाद में वे पटना के गांधी मैदान में बसाए गये तंबूओं के अस्थायी शहर में पहुंचे तथा दुनिया भर से आए श्रद्धालुओं से मिले। श्री अमरिन्दर ने वहां लंगर में श्रद्धालुओं के लिए भोजन भी परोसा। वहीं पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने गुरु गोविन्द सिंह के 350वें जन्मदिवस के अवसर पर प्रकाश पर्व के आयोजन की व्यवस्था को लेकर नीतीश कुमार की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पंजाब में अकालियोंं ने भी ऐसे आयोजन किये हैं, लेकिन मैंने कभी भी पटना जैसा सुन्दर और विशाल आयोजन नहीं देखा। उन्होंने कहा कि यदि नीतीश कुमार पंजाब चुनाव में कांग्रेस की मदद करते हैं तो उन्हें खुशी होगी। बाद में पंजाब कांग्रेस प्रमुख बाद में नीतीश कुमार के आवास पर गये और पूरे आयोजन में निजी तौर पर दिलचस्पी लेने के लिए उनकी तारीफ की। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस अवसर पर उनके साथ शिक्षा मंत्री डॉ. अशोक चौधरी भी उपस्थित थे।

प्रकाश पर्व में पीएम के आगमन को लेकर सुरक्षा सख्त, खालसा आतंकी को लेकर रेड अलर्ट जारी

पटना(अपना बिहार, 4 जनवरी 2017) - गुरू गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाश पर्व में आगामी 5 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पटना आयेंगे। उनके आगमन को लेकर बिहार पुलिस और एसपीजी यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप ने फुल प्रुफ तैयारी की है। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गृह विभाग ने एक विशेष अलर्ट जारी किया है। जारी अलर्ट के अनुसार प्रकाश पर्व में कुख्यात खालसा आतंकी कश्मीरा सिंह के आने की सूचना है। बताया जा रहा है कि कश्मीरा सिंह ने अपना दाढ़ी-मुंछ हटा लिया है और वह कई दिनों से पटना में है।

उधर प्रकाशोत्सव में पांच जनवरी को प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर सुरक्षा तैयारियां शुरू हो गयी हैं। पटना पहुंच चुकी एसपीजी ने एयरपोर्ट और गांधी मैदान में सुरक्षा मामले की पड़ताल की और पीएम के लाउंज को घेरे में ले लिया है। स्पेशल सुरक्षा के संबंध में एसपीजी ने डीएम संजय कुमार अग्रवाल, एसएसपी मनु महाराज, सिटी एसपी चंदन कुशवाहा समेत अन्य पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में पीएम के आगामी दौरे को लेकर एक-एक बारीकियों पर चर्चा हुई। पिछली घटनाओं के बारे में भी जानकारी ली गयी है।

एसपीजी अधिकारियों ने पटना एयरपोर्ट प्रशासन के साथ सोमवार को बैठक की। बैठक में सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं पर चर्चा की गयी। पटना एयरपोर्ट परिसर में हुई इस बैठक की अध्यक्षता एसपीजी के आइजी एमपी गुप्ता ने की। इसमें एयरपोर्ट की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिये गये. राज्य प्रशासन, सीआइएसएफ और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के अधिकारियों को संयुक्त निरीक्षण किया जायेगा।

विफलता छिपाने को नौटंकी कर रहे पीएम, मीसा ने पीएम पर बोला हमला

पटना(अपना बिहार, 4 जनवरी 2017) - राजद सांसद डा. मीसा भारती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोला है। मंगलवार को जारी अपने बयान में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने नोटबन्दी से उपजे हाहाकार से निजात दिलाने के लिए देश से 50 दिनों की मोहलत माँगी थी। कहा था कि 50 दिनों में हालात ना सुधरे तो बीच चौराहे उन्हें जिंदा जला दें। भारत के प्रधानमंत्री से ऐसी भाषा अप्रत्याशित थी। तो नोटबन्दी से उत्पन्न हुई स्थिति भी कोई कम अप्रत्याशित नहीं थी, चाहे मीडिया का एक धड़ा जानबूझकर इस अफरा तफरी को दिखाने से गुरेज करता रहा। सरकार द्वारा बताया कोई लक्ष्य 50 दिन की समय सीमा तक भी टिक नहीं पाया। दूसरी ओर लोग 50 दिन पूरे होने पर प्रधानमंत्री के बयान की ही भाँति कुछ ऐतिहासिक और नाटकीय घटने की उम्मीद लगाए बैठे थे। । पर ना निकासी सीमा हटी, और ना रोक टोक समाप्त हुए। स्थिति भी जस की तस बनी रही।

उन्होंने कहा कि घोषणा की गई कि प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करेंगे। हवा बनाई गई, खबरें लीक की गईं कि कोई जबरदस्त घोषणा होगी। पर खोदा पहाड़, निकला चूहा! काले धन की कितनी उगाही हुई, कितना काला धन समाप्त हुआ, आतंकवाद, नक्सलवाद इत्यादि पर तथाकथित लगाम लगने के क्या तथ्य सामने आए हैं- इसपर एक शब्द नहीं! पहले अपना महिमामंडन, फिर नोटबन्दी की तथाकथित सफलता का गुणगान किया गया। पर यह सफल कैसे माना जाए- उसपर चुप्पी साधे रहे। फिर इ्रॅ इंल्लॅ घोषणाओं के नाम पर ब्याज दर में छूट तो गर्भवती महिलाओं को पहले ही मिलने वाली राशि में मामूली इजाफा!

डा. भारती ने कहा कि नई बोतल में पुरानी शराब, पर चर्चे हजार! चिर परिचित, सोची समझी और बार बार दोहराए जाने वाली रणनीति के तहत सम्बोधन समाप्त होते ही मीडिया इन पुरानी योजनाओं के फेर बदल और नामकरण को ऐसे प्रदर्शित करने लगी जैसे उन्हें भविष्य में होने वाली किसी क्रांति का उद्गम स्थान ही मिल गया हो! ठीक वैसे ही जैसे इक कहानी में नँगे राजा के काल्पनिक वस्त्र का झूठा बखान, मुर्ख कहलाने के डर से पूरी प्रजा करने लगी थी! नोटबन्दी के कदम के बाद भी ठीक यही हवा बनाई गई थी। पर जब अनर्थ की परतें खुलीं, तो ना चाहते हुए भी नोटबन्दी की वास्तविकता के कुछ अंश को दिखाना ही पड़ा।

उन्होंने कहा कि देश अभी भी नोटबन्दी की मार देश झेल ही रहा है। अब भी निकासी सीमा लागू है। स्पष्ट है कि तुगलकी फरमान का दंश आज भी अर्थव्यवस्था को कचोट रहा है, पीड़ा दे रहा है। जो घोषणाएँ प्रधानमंत्री ने की हैं, वह अलग अलग रूपों में केंद्र और राज्यों की योजनाओं में पहले से विद्यमान हैं। उसमें नया कुछ भी नहीं है। बस काट छाँट कर नया रूप देकर नोटबन्दी की जारी विफलता और अपने नाटकीय बयान से ध्यान भटकाने की कमजोर कोशिश की गई है।

चचेरे भाई की हत्या मामले में रणवीर को आजीवन कारावास, बकरा को लेकर 29 साल पहले हुई थी घटना

पटना(अपना बिहार, 4 जनवरी 2017) - खगड़िया में 29 साल पहले पूर्व विधायक रणवीर यादव द्वारा बकरे के विवाद में अपने ही चचेरे भाई सुनील यादव की गोली मारकर हत्या कर देने के मामले में मंगलवार को मुंगेर के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश पीसी चौधरी द्वारा आजीवन करावास की सजा पाये पूर्व विधायक रणवीर यादव खगड़िया की वर्तमान विधायक पूनम देवी के पति भी हैं. प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने पूर्व विधायक रणवीर यादव को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 50 हजार रुपये का जुमार्ना भी लगाया है. वहीं, अपर प्रथम सत्र न्यायालय की ओर से खगड़िया के पूर्व विधायक को उम्रकैद की सजा सुनाये जाने के बाद उनकी पत्नी और वर्तमान विधायक पूनम देवी ने कहा कि हम इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण में जायेंगे. उम्मीद है कि हमें हाईकोर्ट से न्याय जरूर मिलेगा.

मिली जानकारी के अनुसार, बकरे के विवाद में हत्या करने के मामले में मुंगेर के प्रथम अपर सत्र न्यायालय की ओर से 24 दिसंबर, 2017 को ही पूर्व विधायक रणवीर यादव को दोषी करार दे दिया गया था. इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. घटना 6 दिसबंर, 1988 को घटित हुई थी. 06 दिसंबर, 2017 को पूर्व विधायक रणवीर यादव का बकरा (खस्सी) छत से गिर गया था. इसे लेकर उपजे विवाद में उन पर चचरे भाई सुनील यादव को गोली मारने का आरोप लगा था. गोली लगने के बाद घायल सुनील की मौत इलाज के दौरान घटना के 11 दिनों के बाद हो गयी थी. इसके पहले घायल सुनील ने पूर्व विधायक के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए लिखित बयान दिया था कि रणवीर ने भाई कैलू यादव के इशारे पर राइफल से गोली चलायी थी.

इस मामले का एक अन्य अभियुक्त कैलू यादव का वैशाली जिला के पातेपुर थानाक्षेत्र के बाजितपुर गांव में 1993 को हत्या हो कर दी गयी थी. कोर्ट द्वारा दोषी करार दिये जाने के बाद पूर्व विधायक को मुंगेर के मंडल कारा में उसी दिन भेज दिया गया था. घटना के समय खगड़िया में सत्र न्यायालय नहीं होने की वजह से केस को मुंगेर भेज दिया गया था. बाद के दिनों में यहां सत्र न्यायालय बनने के बाद केस को खगड़िया वापस लाया गया था.

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर, यूपी में पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को संबोधित करेंगे प्रेम

पटना(अपना बिहार, 4 जनवरी 2017) - पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में चुनावी बिगूल बजने में अब केवल औपचारिकता ही शेष है। सर्वोच्च न्यायालय की आदेश अवहेलना करते भाजपा ने जातिगत समीकरणों के लिहाज से अपनी रणनीति को अंजाम देना शुरू कर दिया है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने बिहार के नेताओं को जिम्मेवारी सौंपी है। इसी तरह की एक जिम्मेवारी किा निर्वहन करने बिहार विधान सभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार एक दिवसीय यात्रा पर उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव में 4 जनवरी को करेंगे।

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राजनीतिक दलों से जाति, धर्म और भाषा आदि के आधार पर चुनाव प्रचार नहीं करने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद डा. कुमार यूपी के बलिया क्षेत्र में राष्ट्रीय समाजिक संगठन फूलन सेना द्वारा यूपी के बलिया में आयोजित रैली में पिछड़े वर्ग, निषाद, मल्लाह, साहनी, बिंद, केवट, बनपड़, पटेल, गौड़, नाई, गुप्ता, मौर्या, सोनार, साह, कानू एवं यादव के सामाजिक उत्थान एवं भारतीय जनता पार्टी को एक जुटता के साथ मतदान करने हेतु आयोजित किया गया है।इस रैली मे डा. प्रेम कुमार नेता प्रतिपक्ष बिहार विधान सभा, केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री, केशव प्रसाद मौर्या अध्यक्ष उत्तर प्रदेश भाजपा सहित बिहार भाजपा के पदाधिकारीगण एवं समाजिक कार्यकर्ताइस रैली में शामिल होने के लिए डा. प्रेम कुमार के नेतृत्व में जायेंगे। जिनमें प्रमुख राजेश कुमार, मधुरेश चौधरी अन्दू, मनोज कुमार, शिवपूजन राम, नरेश महतो, राम कुमार, कृष्णानंद शर्मा गुड्डू, सुभाष चन्द्रवंशी आदि शामिल होंगे।

धुमधाम से कर्पूरी जयंती मनायेगा राजद, लालू करेंगे उद्घाटन, प्रगति मेहता को आयोजन की मिली जिम्मेवारी

पटना(अपना बिहार, 4 जनवरी 2017) - राष्ट्रीय जनता दल की ओर से जननायक कपूर्री ठाकुर जयंती समारोह भव्य तरीके से मनाई जाएगी। आगामी 24 जनवरी को राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद समारोह का उद्घाटन करेंगे। समारोह की तैयारी के लिए राजद अतिपिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेष अध्यक्ष प्रगति मेहता को तैयारी समिति का संयोजक बनाया गया है। राजद के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने बताया कि हर वर्ष राष्ट्रीय जनता दल की ओर से जननायक कर्पूरी ठाकुर जी की जयंती मनाई जाती है। समारोह में पार्टी के सभी सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक, सभी जिलाध्यक्ष, सभी प्रदेश पदाधिकारी, सभी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सहित पार्टी के सभी नेता-कार्यकर्ता उपस्थित होंगे।

दवा घोटाले का सच आया सामने : भाजपा

पटना(अपना बिहार, 4 जनवरी 2017) - बिहार विधान सभा में विपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल में दवा घोटाले सहित कई घोटाले हुए हैं। भाजपा शुरू से ही दवा घोटाले की जांच की मांग करती रहीं हैं। लेकिन जब दवा घोटाले की जांच सामने आयीं तो घोटाले की सच्चाई सामने आ गयीं हैं, अब नीतीश जी आप क्या कहेंगे, जबाव दें। नीतीश राज में टॉपर घोटाला व छात्रवृर्ति घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।

डा. कुमार ने कहा कि 12.5 करोड़ रुपये की दवा घोटाले की जांच रिपोर्ट सामने आ गयीं हैं। वर्ष 2008-10 तक का मामला है। इस घोटाले में पीएमसीएच के तत्कालीन अधिक्षक, उपाध्यक्षक, एक विभागाध्यक्ष सहित 15 अन्य लोग शामिल हैं। लेकिन इन में उन बड़े लोगों के नाम नहीं आए जो पर्दे के पीछे थे। उन्हें सरकार क्या बचाना चाहती है।

डा. कुमार ने कहा कि राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में 8 साल पहले दवा खरीद के नाम पर साल 2008 से 10 तक चलता रहा घोटाला, जिसके विरूध में भाजपा लगातार आवाज उठाती रहीं, जिसके बाद जांच के बाद करोड़ों रुपये का घोटाले का सच सामने आया। स्टॉक रजिस्टर में दवाओं की खरीद की इंट्री तक नहीं की गयीं और अनेकों गड़बड़ियां की गयीं। इस घोटाले में नीचे से ऊपर तक के लोग शामिल थे। अभी भी इस घोटाले में शामिल लोगों को छोड़ने की मंशा सरकार की नहीं होनी चाहिए। इस घोटाले में बड़ी मच्छलियों को पकड़ने की जरूरत है।

थानाध्यक्ष की मौजूदगी में माले कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप, घटना की हो उच्च स्तरीय जांच

पटना(अपना बिहार, 4 जनवरी 2017) - भाकपा माले की जांच टीम ने कहा है कि उनके पास पुख्ता प्रमाण है कि भरगामा के थाना प्रभारी की उपस्थिति में इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया है और इसकी जानकारी फारबिसगंज के पुलिस उपाधीक्षक और अनुमंडलाधिकारी को थी. मुशहर बसती को उजाड़ने और महत्वपूर्ण नेताओं की हत्या करने में स्थानीय राजद और भाजपा नेताओं की मिली जुली संलिप्तता है. वैसे भी इस इलाके में मुशहर और मुस्लिम के खिलाफ अपराध व षड्यंत्र में राजद और भाजपा मिली हुई है. जांच टीम में भाकपा-माले पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा, पूर्व सांसद व खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद, भाकपा-माले राज्य कमिटी सदस्य नवल किशोर, खेग्रामस राज्य कार्यकारिणी सदस्य जयनारायण यादव आदि शामिल थे.

पटना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन मेें माले नेताओं ने मांग की है कि हत्याकांड की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच करायी जानी चाहिए, जिसमें नेता-पुलिस और सिविल अधिकारी की मिलीभगत के पहलू को भी सामने लाया जाए. फर्जी केवाला के आधार पर जमीन कब्जा कर कामत बनाकर मुशहर टोला पर हमला आयोजित करने वाले दयानंद यादव और उसके लठैतों-अपराधियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए. सारी विवादित, बेनामी और सरकारी जमीन पर सरकारी कब्जा कर मुसहर समुदाय के बीच वितरित किया जाए. मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख का मुआवजा दिया जाए और घायलों को 5-5 लाख का मुआवजा प्रदान किया जाए. भरगामा थाना प्रभारी को बर्खास्त किया जाए और फारबिसगंज के अनुमंडलाधिकारी व पुलिस उपाधीक्षक पर तत्काल कार्रवाई की जाए. पूर्णिया और कोशी प्रमंडल में सीलिंग, भूदान, सरकारी जमीन भूमिहीनों के बीच बांटे जाने तथा सिकमीदारों को पुश्तैनी हक दिलाने को लेकर विशेष ट्रिब्यूनल गठित की जाए.

कांग्रेस के दबाव में सस्ता हुआ कर्ज : सदानंद

पटना(अपना बिहार, 4 जनवरी 2017) - बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि नोटबंदी के खिलाफ सहयोगी दलों के साथ कांग्रेस का संघर्ष रंग लाने लगा है, क्योंकि तमाम केन्द्रीय मंत्रियों और अर्थशास्त्रियों के भविष्यवाणी के बावजूद भी पिछली बार 7 दिसम्बर को मौद्रिक नीति की समीक्षा के समय लोन सस्ता नहीं हुआ था। जनता के हित में यह कांग्रेस की लड़ाई के दबाव का ही परिणाम है कि अब कर्ज सस्ता हो रहा है।

श्री सिंह ने कहा कि सरकारी और निजी दोनों तरह की बैंकों ने ऋण पर ब्याज दरों में कटौती करनी शुरू कर दी है। एसबीआई ने एक साल के लिए कर्ज के लिए ब्याज दर को 8.65% से घटाकर 7.75% और 3 साल की अवधि के ऋण पर 9.05 से 8.15% किया है। वहीं यूबीआई ने विभिन्न अवधि के ऋणों पर ब्याज दर में 0.65 से 0.9%, ओबीसी ने ब्याज दरों में 0.8% की कमी की है। जबकि पीएनबी ने एक साल के सीमांत लागत आधारित ऋण दर में ब्याज दर 9.15 से 8.45% कर दिया है। श्री सिंह ने कहा कि हालाँकि सस्ता लोन के रूप में जनता को मिली राहत बहुत कम है। फिर भी कांग्रेस यह मानती है कि नोटबंदी के विरुध्द राहुल गाँधी के नेतृत्व में हो रहा संघर्ष ने परिणाम देना शुरू कर दिया है े जो भारत की गरीब जनता को पूरी राहत दिलाने तक जारी रहेगी।

तेजप्रताप पहुंचे राजद कार्यालय

पटना(अपना बिहार, 4 जनवरी 2017) - स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव मंगलवार को प्रदेश राजद कार्यालय पहूंचे। कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचन्द्र पूर्वे एवं प्रदेश कार्यालय सचिव चन्देश्वर प्रसाद सिंह ने बुके तथा फूल माला देकर स्वागत किया एवं नव वर्ष 2017 की हार्दिक बधाई दी। श्री यादव दो घंटे तक राजद कार्यालय में बैठकर सभी लोगों से मिले तथा छात्रों को सम्बोधित किया। इस अवसर पर बधाई देने वालों में पटना जिलाध्यक्ष देवमुनी सिंह यादव, के.डी. चौधरी, अशोक कुमार यादव आदि प्रमुख रहे।

सुमो ने किया राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर बड़ा हमला

पटना(अपना बिहार, 4 जनवरी 2017) -। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उनके दोनों पुत्रों पर बड़ा हमला किया है। मंगलवार को फेसबुक पर एक बैनर के जरिए श्री मोदी ने श्री प्रसाद पर कटाक्ष करते हुए लिखा कि वे गरीबों के नेता हैं और उनके दोनों बेटों के पास करोड़ों की संपत्ति है। श्री मोदी ने लिखा कि इनके एक बेटे के 15 लाख की मोटरसाइकिल और बीएमडब्ल्यू कार है। उन्होंने यह भी लिखा कि लालू राज के 15 वर्षों में जो गरीब बिहार से बाहर गये, वे अभीतक वापस नहीं आये हैं।

गांवों में जायें कांग्रेसी नेता-कार्यकर्ता , बिहार प्रभारी सीपी जोशी ने किया आहवान, अच्छा काम करने वाले कार्यकर्ता होंगे पुरस्कृत : चौधरी

पटना(अपना बिहार, 4 जनवरी 2017) - प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सह कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सी.पी. जोशी ने प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं से गांवों में जाने का आहवान किया है। मंगलवार को सदाकत आश्रम में प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पदाधिकारियों, कांग्रेस पार्टी के विधायकों, विधान पार्षदों, पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों, प्रदेष कांग्रेस के मोर्चा संगठन, विभाग एवं प्रकोष्ठों के अध्यक्ष एवं जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्षों की एक संयुक्त बैठक को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगले तीन महीनों तक वे गाँवों का दौरा करें एवं आम जनता को नोटबंदी से हुई कठिनाइयों एवं परेषानियों से उन्हें अवगत करायें।

उन्होंने कहा कि बिहार के कांग्रेसजनों को इस अवसर का लाभ उठाकर पार्टी के सशक्तिकरण पर भी ध्यान देना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक तीन जिले पर एक समन्वयक बनाये गये हैं जो जिला कांग्रेस कमिटी से समन्वय बनाकर जिलों का दौरा करेंगे तथा इस कार्यक्रम में सभी स्तर के कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रहेगी। डा. जोश्ी ने कहा कि डिजीटल करेंसी में 100 रुपए के नोट को बीस बार बदलने पर उसका मूल्य शून्य हो जायगा, जबकि 100 रुपए का करेंसी नोट को कईबार बदलने के बाद भी उसका मूल्य 100 रुपए ही होगा।

डा. जोशी ने कहा कि बिहार एक ऐसा प्रदेश है जिसने नरेन्द्र मोदी के रथ को रोका है तथा बिहार की गठबन्धन सरकार ने अपने सात निश्चयों को प्रभावी ढंग से लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि देष को बदलने का काम हमेशा कांग्रेस पार्टी ने किया है। कांग्रेस पार्टी को विचारधारा के स्तर पर आगे बढ़ना है।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्य के शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी ने कहा कि जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्षों को अपनी टीम बनाने की पूरी छूट दी गयी थी और अब उनकी यह जिम्मेवारी बनती है कि वे अपने-अपने जिलों में इस कार्यक्रम को सफल बनायें। उन्होंने कहा कि नोटबन्दी के खिलाफ प्रदेष कांग्रेस ने राज्य स्तर से लेकर जिलास्तर तक विरोध मार्च निकाला था तथा 2 जनवरी को सभी जिलों में नोटबन्दी के खिलाफ पत्रकार वार्ता हुई। उन्होंने कहा कि इन तीन महीनों में जो कांग्रेस कार्यकर्ता अच्छा कार्य करेंगे, उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा। बैठक को इस कार्यक्रम के बिहार समन्वयक रोकीबुल हुसैन, इस कार्यक्रम के राष्ट्रीय स्तर के सदस्य माणिक टैगोर ने भी सम्बोधित किया। बैठक में राज्य के पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्रीअवधेश कुमार सिंह, राजस्व मंत्री डा. मदन मोहन झा, निबन्धन एवं उत्पाद मंत्री अब्दुल जलील मस्तान, कांग्रेस के विधायक, पूर्व विधायक, प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी एवं जिला कांग्रेस के अध्यक्ष उपस्थित थे।

विश्व शांति को प्रेम-करूणा अनिवार्य : दलाई लामा

गया/पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - सिर्फ प्रार्थना से परिवर्तन नहीं हो सकता। इसके लिए प्रेम और करुणा की जरूरत है। परहित की भावना रखें। जितने भी क्लेश हैं उन्हें नष्ट करने के बाद ही कालचक्र में प्रवेश कर अभिषेक दीजिए, ऐसा कहा जाना चाहिए। सोमवार को बोधगया के कालचक्र मैदान में धर्मगुरु दलाई लामा ने आस्था के जनसैलाब के बीच प्रवचन में ये बातें कहीं। प्रवचन से पहले दलाई लामा ने सुबह सात बजे भूमि पूजन और सूत्रपाठ के साथ 34वीं कालचक्र पूजा की शुरूआत की। सवा दो घंटे पूजन के बाद एक घंटे का प्रवचन हुआ। इसके बाद कुछ विशेष शिष्यों के साथ दलाई लामा ने दोबारा पूजा की जो दोपहर एक बजे तक चली। प्रवचन के दौरान दलाई लामा ने पूजा में शामिल होने विभिन्न देशों से आए श्रद्धालुओं का स्वागत किया। कहा, बोधगया ऐसी धरती है जहां भगवान बुद्ध की लीला संपन्न हुई। बौद्ध देशों के लिए बोधगया का प्रमुख स्थान है। बोधगया महातीर्थ स्थल है।

दलाई लामा ने भारत में कालचक्र पूजा की शुरूआत और अपने सपने की बात बतायी। बताया किस प्रकार 1970 में पहली बार कालचक्र पूजा हुई। कालचक्र का अभिषेक देने के बाद उन्हें सपना आया कि वे कई कालचक्र में उपदेश देंगे। कालचक्र पूजा में तिब्बत के मनोनीत प्रधानमंत्री लोप संग सांगे भी पूजा में शामिल हुए। कालचक्र पूजा में शामिल होने विभिन्न देशों से एक लाख से अधिक श्रद्धालु बोधगया पहुंचे हुए हैं। उम्मीद जतायी जा रही है कि दो दिनों में यह संख्या और बढ़ेगी। पूजा के दौरान कालचक्र मैदान में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। दलाई लामा ने कालचक्र पूजा में शामिल होने आए श्रद्धालुओं को सलाह देते हुए कहा कि अभी दो दिन आपके लिए कुछ खास नहीं है। उन्होंने राजगीर, नालंदा, ढुग्ंोश्वरी और गुरुपा आदि घूमने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यहां का मौसम तपस्या करने जैसा बना हुआ है।

गरीबों को मिले शराब पीने की छूट : मांझी

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - अपने विवादास्पद बयानों के लिए प्रसिद्ध पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने एक बार फिर अनोखा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि गरीबों को शराब पीने की छूट मिलनी चाहिए। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया है कि बहुत सारे गरीब अस्पताल के पोस्टमार्टम से लेकर नाली साफ करते हैं। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के कड़े कानून के कारण अमीर से ज्यादा गरीब वर्ग के लोगों को परेशानी हो रही है। उन्होंने गया में संवाददाताओं से बात करते हुए ये बातें कही। उन्होंने कहा कि अमीर लोगों को तो किसी प्रकार से शराब मिल जाया कर रहा है, लेकिन गरीबों को यह नहीं मिल पा रही है। साथ ही वे इसके लिए पुलिस से ज्यादा प्रताड़ित भी हो रहे हैं। जेल भी जा रहें हैं। ऐसे में सरकार को गिने चुने लोगों को शराब पीने की छूट मिलनी चाहिए। वहीं उत्तर प्रदेश की सियासत पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री मांझी ने कहा कि यह परिवारवाद का घृणित रूप है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ऐसी ही एक झलक बिहार में भी देखने को मिलेगा।

माले कार्यकर्ताओं की हत्या के विरोध कोशी बंद का आहवान

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - अररिया के भरगामा प्रखंड के रहरीया में भाकपा-माले के जिला सचिव सत्यनारायण यादव व कमलेश्वरी ऋषिदेव की हत्या और महादलित मुसहर समुदाय पर बर्बर सामंती दमन के खिलाफ भाकपा-माले ने आगामी 4 जनवरी को कोशी-सीमांचल बंद का आह्वान किया है. इसी दिन पूरे राज्य में सड़क जाम भी किया जाएगा. माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि भूमि अधिकार के लिए संघर्षरत दलित-गरीबों पर नवकुलकों के हमले के खिलाफ हमें जोरदार संघर्ष में उतरना होगा.

इस बर्बर की घटना की जानकारी मिलते ही पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा और केंद्रीय कमिटी के सदस्य व पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद घटनास्थल की ओर रवाना हो गये. श्री झा ने बताया कि दिन के उजाले में कल पहली जनवरी को दबंगों ने रहरीया गांव में आतंक मचाकर इस जघन्य घटना को अंजाम दिया है. सारी घटना पुलिस की उपस्थिति में हुई है.

चौबे ने लालू को कहा अपशब्द, पलटवार में राजद प्रवक्ता ने कहा चिरकुट

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश प्रवक्ता मनीष यादव ने बीजेपी सांसद अश्विनी चैवे द्वारा राजद प्रमुख लालू यादव पर की गई टिप्पणी पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अश्विनी चौबे जैसे चिरकुट नेता का बयान सामंती मानसिकता को दशार्ता है और देश भर में बीजेपी के जंगलराज और गुंडाराज को प्रमाणित करता है। मयार्दा, अनुशासन, शिष्टता और शुचिता का ढोल पीटने वाले बीजेपी के जाहिल नेताओं से एैसे हि ओछे बयान की उम्मीद की जा सकती है। श्री यादव ने कहा कि मंडल आंदोलन के नेता और बिहार के दबे, कुचले, गरीब, मजदूर-किसान, नौजवान की मजबूत आवाज हैं लालू प्रसाद। श्री प्रसाद ने सामंतियों की रीढ़ को तोड़कर बिहार में गरीबों का राज पुन: स्थापित किया है और बिहार की धरती श्री चौबे जैसे ऐरे-गैरे नेताओं का नसबंदी करना भी अच्छी तरह जानती है। ऐसे नेताओं के गंदे दिमागी वायरस का इलाज हम अच्छी तरह जानते है।

प्रकाश पर्व में पहुंचे केजरीवाल सहित कई दिग्गज, पटना के गांधी मैदान में अस्थायी गुरूद्वारे में राजद प्रमुख ने मत्था टेका, रामकृपाल और तेजप्रताप ने भी दी सेवा

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - दशमेश गुरु, गुरु गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाश पर्व के दूसरे दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल सहित अनेक दिग्गज पटना पहुंचे। इनमें में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री एस. एस. आहलुवालिया आदि शामिल रहे। वहीं देर शाम राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने भी पटना के गांधी मैदान स्थित बने अस्थायी गुरूद्वारे में पहुंचकर गुरूग्रंथ साहब के समक्ष मत्था टेका।

इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को तख्त हरिमंदिर साहिब में मत्था टेका और गुरुघर का आशीष लिया। उन्हें ग्रंथी ने सरोंपा भेंट किया। तख्त हरिमंदिर से होकर केजरीवाल बाल लीला गुरुद्वारा पहुंचे। बाल लीला में भी केजरीवाल को सरोंपा भेंट किया गया। केजरीवाल ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह का 350वां प्रकाशोत्सव मनाया जा रहा है। यहां व्यवस्था बहुत अच्छी की गयी है। जब पत्रकारों ने कुछ और प्रश्न पूछने चाहें, तो केजरीवाल ने कहा कि यहां राजनीतिक बातें नहीं करूंगा।

पटना में प्रकाशोत्सव को लेकर जबरदस्त उत्साह है। सोमवार को गांधी मैदान टेंट सिटी में केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री रामकृपाल यादव पहुंचे और लंगर में अपनी सेवा दी। श्री यादव ने गांधी मैदान टेंट सिटी में बने अस्थायी गुरुद्वारे में मत्था टेका। इसके बाद उन्होंने लंगर परिसर की सफाई भी की। श्रद्धालुओं की सेवा करते हुए उन्होंने बर्तन भी धोए। इधर, स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव भी गांधी मैदान टेंट सिटी पहुंचे। उन्होंने पांत में बैठकर लंगर छका। साथ ही लंगर बांटकर अपनी सेवा भी दी। प्रकाशोत्सव को लेकर श्रद्धालु काफी उत्साहित दिखे।

उधर गुरू गोविंद सिंह महाराज के 350 प्रकाशपर्व के शुभअवसर पर राजधानी के गांधी मैदान में गुरूसाहिब में प्रतिपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने माथा टेका। लंगर भी किया एवं वहां सेवा भी की। डा. कुमार ने कहा कि यह बिहार के लिए गौरव की बात है पूरे देश व दुनिया से लाखों श्रद्धालु पटना आए, जिनका स्वागत करते हैं एवं लख-लख बधाई देते हैं। डा. कुमार के साथ भाजपा व्यवसायी प्रकोष्ठ के महामंत्री मधुमेश चैधरी एवं भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता मोहम्मद शदुबुद्दीन एवं अन्य लोग मौजूद थे।

सरकार ने किया अति पिछड़ों की छात्रवृत्ति बंद : सुमो

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि दलितों, आदिवासियों की छात्रवृत्ति को बंद करने के बाद अब सरकार ने अति पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को मिलने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति को भी चालू वित्तीय वर्ष से बंद कर दिया है। इसके पहले छात्रवृत्ति की राशि को अधिकतम 1 लाख से घटा कर 75 हजार, फिर 15 हजार तक सीमित कर दिया गया। छात्रवृत्ति को पूरी तरह से बंद करने की सरकार की मंशा के कारण ही वित्तीय वर्ष के मात्र तीन महीना बचे होने के बावजूद अब तक न विज्ञापन निकाल कर आवेदन आमंत्रित किया गया है और न ही कोई प्रक्रिया ही प्रारंभ की गई है।

उन्होंने कहा कि पूर्व में तकनीकी संस्थानों में नामांकन ले चुके अति पिछड़ा वर्ग के छात्र छात्रवृत्ति की अधिकतम राशि में कटौती के कारण बीच मंझधार में फंस गए हैं। जिन छात्रों ने 1 लाख तक की फी वाले संस्थानों में नामांकन करा लिया है उन्हें अब आगे की पढ़ाई पूरी होने तक मात्र 15 हजार रुपये ही मिलेंगे। छात्रवृत्ति की जानकारी लेने के लिए संबंधित विभाग की दौड़ लगा रहे छात्रों को बताया जा रहा है कि वर्ष 2016-17 से छात्रवृत्ति बंद हो गई है और अब अति पिछड़ा वर्ग के छात्रों को बैंकों से कर्ज दिलाया जायेगा।

श्री मोदी ने कहा कि क्या सरकार छात्रवृत्ति और बैंक द्वारा दिए गए कर्ज को एक ही समझती है? क्या वैसे छात्रों के साथ सरकार धोखा नहीं कर रही है जिन्होंने छात्रवृत्ति के आधार पर तनकीनी संस्थानों में अपना नामांकन करा लिया और अब छात्रवृत्ति की राशि में भारी कटौती कर दी गई है? क्या अब अति पिछड़े वर्ग के गरीब छात्रों को कर्ज के बूते अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ेगी?

नोटबंदी से विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि मोदी सरकार के नोटबंदी का असर न सिर्फ भारत के औद्योगिक विकास को प्रभावित किया है बल्कि इसके असर से देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी अछूता नहीं है। उन्होंने कहा कि 8 नवम्बर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा हुयी और 11 नवम्बर को समाप्त हुए सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भण्डार में 1.190 अरब डॉलर की कमी होकर 367.041 रह गया था, जबकि बीते साल 30 सितम्बर को यह बढ़कर 371.99 अरब डॉलर के रिकार्ड स्तर तक पहुँच गया था। उन्होंने कहा कि देश की विदेशी मुद्रा भण्डार में कमी का दौर 23 दिसंबर को समाप्त हुए सप्ताह में भी देखने को मिली जब यह 93.52 करोड़ डॉलर घटकर 359.56 अरब डॉलर पर आ गया है,े जो पिछले 9 माह के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है।

उन्होंने कहा कि देश का आरक्षित स्वर्ण भण्डार जो 30 सितम्बर, 16 को 20.460 अरब डॉलर पर स्थिर था; वह 23 दिसम्बर को 19.98 अरब डॉलर पर आ गया। इतना ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भारत का आरक्षित निधि 11 लाख डॉलर घटकर 2.29 अरब डॉलर तथा विशेष आहरण अधिकार 9 लाख डॉलर कम होकर 1.43 अरब डॉलर रह गया है। श्री सिंह ने कहा कि मोदी सरकार नोटबंदी के कुप्रभाव को चाहे न स्वीकारे लेकिन देश की गरीब जनता इसके दंश को झेल रही है, जिसके हितों की रक्षा करने के लिए कांग्रेस पार्टी अपनी मांग मांगे जाने तक संघर्ष करती रहेगी।

जदयू ने किया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - जदयू के प्रदेश प्रवक्ता नवल शर्मा ने कहा है कि उनकी पार्टी सुप्रीम कोर्ट का धर्म, जाति और भाषा के आधार पर वोट नहीं माँगने के फैसले का पुरजोर स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बीजेपी जैसी पार्टियों के सांप्रदायिक और जातीय राजनीति पर अंकुश लगाने और राजनीति के शुद्धिकरण की दिशा में मिल का पत्थर साबित होगा । बीजेपी के तमाम नेता जिस तरह मंच से संप्रदाय और जाति का जहर उगलते हैं और राममन्दिर , बीफ , गाय , पाकिस्तान और घरवापसी जैसे शब्दों के जरिये भावना भड़काकर चुनावी ध्रुवीकरण की राजनीति करते हैं उससे भारतीय राजनीति को मुक्ति मिलेगी । उन्होंने कहा कि जद यू धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक सदभाव में विश्वास करनेवाली पार्टी है और सियासत की स्वच्छता के लिए उठनेवाले प्रत्येक कदम के पक्ष में मजबूती से खड़ी है।

ताबड़तोड़ कार्यक्रमों से नववर्ष का आगाज करेगी सीपीआई

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने इस वर्ष का आगाज कई आंदोलनों से करने का निर्णय लिया है। पार्टी के राज्य सचिव सत्यनारायण सिंह के मुताबिक आगामी 3-10 जनवरी, 2017 को हिसाब दो जवाब दो आंदोलन चलाया जाएगा। इस दरम्यान नोटबंदी से मची तबाही और पचास दिन पूरे होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी की छलपूर्ण नई घोषणाओं का पदार्फाष करने और केन्द्र सरकार के जनविरोधी चरित्र और नीतियों के सच से आम जनता को अवगत कराने हेतु प्रतिरोध कार्रवाई के रूप में प्रखंड स्तर, जिला स्तर, पर लीड बैंक शाखाओं के समक्ष धरना/ प्रदर्शन के आयोजन किए जाएंगे जिनकी परिणति 10 जनवरी को पटना में रिजर्व बैंक के समक्ष महाधरना में होगी।

वहीं आगामी 25-26 जनवरी को संविधान बचाओ दिवस मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वरा लगातार लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता पर हमले जारी हैं, और स्वाधीन भारत के आत्मनिर्भर आर्थिक विकास की समाजवदोन्मुखी नीतियों को तिलांजलि देकर व्यवहार में कारपोरेट घरानों का राज कायम करने की साजिषों के विरोध स्वरूप 25 जनवरी को सभी जिलों में कैंडल मार्च निकाला जाएगा और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर पार्टी कार्यालयों में राष्ट्रीय तिरंगा ध्वज फहराने के उपरांत संविधान की रक्षा के मुद्देपर गोष्ठियाँ आयोजित की जाएंगी जिसमें समाज के विविध तबकों के लोगों को आमंत्रित कर इस अभियान को व्यापक बनाया जाएगा। जबकि 30 जनवरी को महात्मा गाँधी शहादत दिवस पर गोडसे का पुतला दहन कार्यक्रम किया जाएगा।

पेट्रोल-डीजल की कीमत में वृद्धि की पुरजोर निंदा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने के बावजूद की जा रही वृद्धि : चौधरी

पटना(अपना बिहार, 3 जनवरी 2017) - केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि किये जाने की विपक्षी दलों ने पुरजोर विरोध किया है। राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश प्रवक्ता मनीष यादव ने कहा कि नोटबंदी के पचास दिन बाद कालाधन की विफलता एवं विगत साल से कराहते बैंक की लाईनों में खड़े देशवासियों को नववर्ष में राहत की उम्मीद पर प्रधानमंत्री ने तुषारापात कर दिया। साल के पहले दिन पेट्रोल में 1.29 रूपए, डिजल 97 पैसा और रसोई गैस 2 रूपए प्रति सिलेंडर की बढ़त ने हर-हर महंगाई घर-घर महंगाई के कहावत को चरितार्थ किया है। बावजूद इसके मोदी जुमलों की बरसात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद बैंको की कतार में मरनेवाले के प्रति सहानुभूति और श्रद्धांजलि से परहेज करने वाले नरेन्द्र मोदी नोटबंदी को देशभक्ति से जोड़कर देशवासियों को ज्ञान बाटते थक नहीं रहे थे, वही डीजल-पेट्रोल और रसोई गैस की मूल्यवृद्धि में देश को घोर निराशा हाथ लगी है।

वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सह शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी ने कहा कि केन्द्र सरकार नोटबन्दी से त्रस्त देश की जनता को नये वर्ष में पेट्रोल, डीजल एवं रसोइ गैस की कीमतों में भारी वृद्धि का सौगात दिया है। उन्होंने कहा कि मई 2014 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह के अंतिम कार्यकाल में पेट्रोल की कीमत 71.41 रुपए एवं डीजल की कीमत 56.71 रुपए प्रति लीटर थी उस वक्त अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत 107.09 डालर प्रति बैरल थी। उन्होंने कहा कि आज अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल एवं डीजल की कीमत के अनुपात में देश में पेट्रोल एवं डीजल की कीमत में कमी नहीं की गई है। नयी कीमत के अनुसार आज पेट्रोल की कीमत 73.12 रुपए एवं डीजल की कीमत 61.38 रुपए प्रति लीटर हो गयी है एवं रसोई गैस की कीमत 2 रुपए प्रति सिलेन्डर बढ़ाई गयी है।

डा. चौधरी ने कहा कि केन्द्र सरकार के इस कदम से मँहगाई बढ़ेगी तथा आम जन-जीवन त्रस्त हो जायगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को पेट्रोल एवं डीजल पर लगाये गये उत्पाद शुल्क को तुरत कम करना चाहिये, जिससे नोटबन्दी से त्रस्त जनता को कुछ राहत मिल सके।

राजद कार्यसमिति के सदस्य भाई अरूण कुमार ने कहा कि केन्द्र सरकार के द्वारा यह दलिल दिया जाना, कि पेट्रोल एवं डिजल का दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम घटने एवं बढ़ने पर निर्भर करता है यह दलील आम जनता के आंखों में धुल झोकने के बराबर है क्योकि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का मूल्य बहुत तेजी से गिर रहा था यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का किमत अपने सबसे न्यूनतम स्तर को भी पार कर गई थी, तो केन्द्र सरकार ने उस अनुपात में पेट्रोलियम पदार्थो का किमत नहीं घटाकर उत्पाद शुल्क बढ़ाकर दाम को स्थिर रखने का काम किया था। परन्तु अब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य बढ़ रहे हैं तो सरकार को बाजार मूल्य बढ़ाने के बजाय उत्पाद शुल्क को कम करके दाम को स्थिर रखा जा सकता था। परन्तु केन्द्र सरकार जनता के हितों के बजाए अपनी हितों को साधने में लगी हुई है।

अंदर की बात :न मुलायम हैं मुलायम और न दुधमुंहे हैं अखिलेश

दोस्तों, यूपी की राजनीति में कल जो कुछ भी हुआ, उसकी बुनियाद बहुत पहले ही पड़ चुकी थी। एक सरकारी आयोजन के दौरान मुलायम सिंह यादव ने अपने ही बेटे के नेतृत्व वाली सरकार को सचेत किया था। हालांकि अखिलेश यादव ने तब पुत्रवत अपने पिता के आदेश का पालन किया और तब लगने लगा कि समाजवादी कुनबे में सब ठीक होने लगा है। फ़िर अमर सिंह की वापसी के बाद स्थिति फ़िर से विषम होने लगी। ऐसे कई मौके आये जब शिवपाल सिंह यादव ने अपने आपको सुपर सीएम साबित करने का प्रयास किया। चाचा-भतीजे की इस लड़ाई का अंजाम अब जाकर यह हुआ है कि अखिलेश यादव सपा से छह वर्षों के लिए निष्कासित किये जा चुके हैं। हालांकि यह बात पूरा देश जानता है कि मुलायम सिंह यादव सचमुच के मुलायम इंसान हैं और तस्वीर कभी भी बदल सकती है।

खैर भविष्य की बातों को भविष्य पर छोड़कर वर्तमान के आधार पर यदि यूपी की चुनावी राजनीति का मूल्यांकन किया जाय तो निश्चित तौर पर एक कुनबे की आपसी लड़ाई का शिकार समाजवादी राजनीति हो रही है। हालांकि इसमें बड़ी भूमिका किसकी है, यह बहस का एक विषय हो सकता है। मुलायम सिंह की बात करें तो उन्हें कभी भी ठोस निर्णय लेने वाला राजनेता नहीं माना गया। वर्ष 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जब देश में एक बड़ी ताकत की संभावनायें तेज हुईं और इसके नेतृत्व की जिम्मेवारी उन्हें सौंपी गयी तब उन्होंने एकाएक हाथ झटक दिया। संभावनाओं की किरकिरी हुई। इससे पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर श्री यादव को समाजवादी राजनीति को रसातल में पहुंचाने का श्रेय मिल चुका है।

अब यदि अखिलेश यादव की बात करें तो वे एक जोशीले व कम परिपक्व सह कुशल सीएम के रुप में उभरे हैं। उनकी कार्यशैली से युवाओं में जोश और विश्वास है। यूपी की जनता में उनके प्रति सहानुभूति भी है। लेकिन श्री यादव भी अपनी अपरिपक्वता के आरोपों से बच नहीं सकते हैं। यह कहने से काम नहीं चलने वाला है कि जो भी हुआ, वह सब नेताजी(मुलायम सिंह यादव) के कारण हुआ।

बहरहाल यूपी की राजनीति में पूर्व से निश्चित भूचाल आ चुका है और आने वाले समय में इसका असर भी दिखेगा। असर इसलिए भी कि इस बार बसपा, भाजपा और कांग्रेस तीनों पूर्व की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में है। फ़िलहाल तो यही देखना दिलचस्प होगा कि एक कुनबे की लड़ाई सपा की बुनियाद को किस हद तक डैमेज करती है। वैसे एक सवाल यह भी है कि कहीं यह सब अखिलेश के पक्ष में यूपी की जनता के मन में सहानुभूति की लहर पैदा करने के लिए तो नहीं किया जा रहा है ताकि पांच वर्षों की सफ़लता-विफ़लता इस बार की चुनावी सफ़लता में रोड़ा न बने। इस सवाल की एक वजह यह भी है लखनऊ मेट्रो, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे को छोड़कर अखिलेश ने ऐसा कोई काम नहीं किया है, जिसके लिए उनके वर्तमान कार्यकाल को याद रखा जा सके। राजनीतिक लिहाज से भी वे महज सीएम ही बनकर रहे। नेता बनने की कोशिश ही नहीं की। परिणाम तो पहले ही तय हो चुका था।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने पीएम से पूछे सवाल

पटना(अपना बिहार, 31 दिसंबर 2016) - पिछले माह के 8 नवंबर को नोटबंदी लागू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा &