बिहार बदलाव के राह पर है। इसी बदलाव का एक प्रमाण है कि जो पूर्व में बाहुबली कहलाते थे, आजकल साहित्यकार बन चुके हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं भूतपूर्व डीएम जी कृष्णया की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व बाहुबली सांसद आनंद मोहन की। सहरसा मंडल कारा में सजा काट रहे पूर्व बाहुबली सांसद ने साहित्य के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करने की ठान ली है। अपनी पहली कविता संग्रह कैद में आजाद कलम में जहां एक ओर उन्होंने बाजारवाद को नंगा किया है वहीं आम आदमी के दर्द को भी उकेरा है। इस संग्रह में कुल 26 कविताएं हैं। इनकी इस कविता संग्रह को लब्ध प्रतिष्ठित प्रकाशन राजकमल प्रकाशन ने प्रकाशित किया है।

अपनी कविताओं के जरिये श्री मोहन ने विरोधियों को भी यह संदेश भी दिया है कि वे झुकनेवालों में से नहीं हैं। प्रमाण के रुप में इस कविता को देखिये।
गुमनाम नहीं मरूंगा
शायद सोचा था उसने

कि मृत्युदंड की सजा सुन हार मान लूंगा मैं

झुकी गर्दन उसकी सजा स्वीकार

तंग काल-कोठरी में

 तिल-तिल घुट-घुट मरूंगा मैं

समझा नहीं कि हार से भी

 रार ठान लूंगा मैं

पर जीते जी उससे कभी

हार नहीं मानूंगा मैं।
आनंद मोहन ने अपनी कविता संग्रह में केवल इतने से बस नहीं किया है। एक दूसरी रचना “हराने को उन्हें लेने होंगे कई-कई जन्म” में अपने विरोधियों को ललकारते हुए वे कहते हैं कि - हराने को उन्हें लेने होंगे/ कई-कई जन्म/ क्योंकि/ गिर-गिरकर उठने/ और मर-मर जीने का/ मैं जानता हूं इल्म। इसी कविता में आगे कहा है- शातिर राजनीति के गन्दे खेल में/ वक्त के हाथों पराजित हूं/ यह मानता हूं मैं/ लेकिन/ वक्त की करवटों को भी/ बखूबी पहचानता हूं मैं।
अपनी रचनाओं में एक वफ़ादार पति के जैसे पूर्व बाहुबली सांसद ने अपनी अर्धांगिनी पूर्व सांसद लवली आनंद से मिले समर्थन को भी उकेरा है- हमें चैन दी/ गर होती बाहर तुम/ बेफिक्री में लिखते हम/ दिल में खुशी है/ आंखे नम/ सामने है यह तेरे दम/ कैद में आजाद कलम। बताते चलें कि डीएम हत्याकांड में मौत की सजा पाने के बाद (आज की तारीख में आजीवन कारावास की सजा) मोहन ने भागलपुर कैंप जेल में यह कविता लिखी थी। बहरहाल, चाहे जो भी हो पूर्व सांसद ने अब बंदूक का परित्याग कर कलम पकड़ ली है। वे अपनी आत्मकथा बचपन से पचपन” तक भी लिख रहे हैं। माना जा रहा है कि अपनी इस रचना के जरिये वे सूबे के अनेक सफ़ेदपोशों की पोल खोलेंगे। उनकी जेल डायरी का पहला खंड प्रकाशन के इंतजार में है।

बिहार में अब स्वास्थ्य यात्रा की बारी

पटना(अपना बिहार, 28 जनवरी 2012) – बिहार में यात्राओं का सिलसिला चल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेवा यात्रा के बाद सूबे के स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे अब स्वास्थ्य चेतना यात्रा पर निकलने वाले हैं। मिली जानकारी के अनुसार श्री चौबे की यह यात्रा पूरे बिहार से होकर गुजरेगी। इनकी इस यात्रा के दौरान लोगों को राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में किये गये कारनामों के बारे बताया जायेगा। इसके अलावे लोगों की निशुल्क स्वास्थ्य जांच के बाद मुफ़्त में विटामिन की गोलियां और टानिक की बोतलें भी मिलेंगी। यह यात्रा 30 अप्रील तक चलेगी।

नाव डूबने से तीन लोगों की मौत

पटना(अपना बिहार, 28 जनवरी 2012) - बिहार में सारण जिले के डोरीगंज थाना क्षेत्र में दरौली घाट के समीप गंगा नदी में शुक्रवार को एक नौका के पलट जाने से तीन लोगों के डूब मरने की आशंका है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कुछ स्थानीय ग्रामीण जब एक छोटी नौका पर सवार होकर दूसरे किनारे जा रहे थे तभी बीच धार में उनकी नौका अनियंत्रित होकर उनकी नौका पलट गई। इस दुर्घटना में तीन लोगों के डूब मरने की आशंका है जबकि पांच अन्य तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए। सूत्रों ने बताया कि स्थानीय गोताखोरों की मदद से लापता लोगों की तलाश की जा रही है।

राजघराने अब नहीं पैदा करते राजा : नीतीश

पटना(अपना बिहार, 28 जनवरी 2012) – देश में लोकतंत्र है। इसी लोकतंत्र का परिणाम है कि अब राजा राजघरानों में पैदा नहीं होते। ये बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते गुरुवार को पटना जिले में पुनपुन प्रखंड में खैरूद्दीन चक डुमरी महादलित टोले में गणतंत्र दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहीं। अब जनता ही बहुमत देकर किसी को प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बनाती है। जनता तय करती है कि कौन विपक्ष में रहेगा और कौन सत्ता में। उन्होंने कहा कि राज्य में सभी महादलित टोले में राज्य सरकार ने झंडोत्तोलन कार्यक्रम का निर्णय किया है जिससे वहां के पिछड़े लोगों का मनोबल और स्वाभिमान बढे़गा।

नीतीश ने कहा कि सरकार ने भूमिहीन महादलितों को तीन डेसीमिल जमीन देने का निर्णय किया है जिसके तहत मकान बनाने के लिए महादलितों को जमीन दी जा रही है। जहां सरकारी जमीन नहीं उपलब्ध है वहां खरीदकर महादलितों को जमीन उपलब्ध करायी जा रही है। कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी संबोधित किया।

नजरिया – अपना आंबेदकर पैदा नहीं करने का फ़ल भुगते ओबीसी समाज

देश में ओबीसी यानी पिछड़ा वर्ग की आबादी कुल आबादी का करीब 65 फ़ीसदी है। हालांकि यह हिसाब बहुत पुराना है और इसलिये विश्वसनीय भी नहीं है। फ़िर भी यह माना जा सकता है इसमें बहुत अधिक वृद्धि नहीं हुई होगी। देश में अनुसूचित जाति और जनजाति समाज के लोगों को उनकी आबादी के हिसाब से आरक्षण दिया गया है। उन्हें संपूर्ण आरक्षण दिया गया है। जबकि मंडल कमीशन के बाद भीख के रुप में ओबीसी को 27 प्रतिशत जो आरक्षण मिला है, वह केवल सरकारी नौकरियों एवं शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिये ही मान्य है। Read More>>>

बतकही – गणतंत्र मुबारक हो बिहारवासियों

आज के भारत में जो शासन व्यवस्था कायम है, उसे लोकतंत्र अथवा गणतंत्र कहें या फ़िर प्रजातंत्र? यह एक सवाल है। सवाल इसलिये कि आज लोकतांत्रिक व्यवस्था के बावजूद शासक वर्ग देह ऐंठकर चलता है, मानों जिनके वोट पर वह सत्तासुख के मजे ले रहा है, वे इंसान हैं ही नहीं। इसका एक प्रमाण बिहार से ही लिजीये। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आजकल जनता की सेवा करने के लिये सेवा यात्रा कर रहे हैं। बेचारे हेलीकाप्टर से घुम घुम कर जनता की सेवा करते फ़िर रहे हैं। जहां जाते हैं हेलिकाप्टर से उतरते हैं लोगों की सेवा में जूट जाते हैं। चलते हैं तो आगे पीछे सैंकड़ों बंदूकधारी तैनात रहते हैं। देखने से ही लग जाता है कि बिहार का राजा आया है। जनता बेचारी दूर रह जाती है।

यहां यह बात गौर करने के लायक है कि आजकल नेताओं पर हमले बहुत बढ गये हैं। जार्ज बुश से लेकर शरद पवार और अब नीतीश कुमार भी इस श्रेणी में शामिल हो गये हैं। वैसे श्री कुमार पहले दो लोगों से अधिक महान हैं। वह इसलिये कि उन्हें तो केवल एक अकेले आदमी का विरोध झेलना पड़ा। हमारे सुशासन बाबू को को बिहार में जनता ने खुलेआम पत्थर मारे। वह एक बार नहीं, बल्कि दो—दो बार। अब यह संयोग ही है कि यह महान काम किसी और जिले की जनता ने नहीं बल्कि नालंदा की जनता ने किये हैं।

अब सवाल यह उठता है कि बिहार में ऐसा क्या हो गया, जिसके कारण जनता ने सुशासन बाबू पर अपना गुस्सा निकाला। वैसे सेवा यात्रा के हर चरण में श्री कुमार को जनता के इस तरह की आगवानी को खुले दिल से स्वीकार करना पड़ा है। ये सारी घटनायें महज संयोग नहीं हैं। हकीकत यह है कि बिहार में लोकतंत्र नहीं, नीतीश तंत्र है। नीतीश तंत्र का मायने यह कि जनप्रतिनिधियों को कोई औकात नहीं है। कोई भी मंत्री खुद से कोई निर्णय नहीं ले सकता है। जबतक सीएम का हिस्सा तय नहीं हो जाता है तबतक सरकारी खजाने की एक पाई भी खर्च नहीं होती। अफ़सरों की स्थिति अच्छी है। लेकिन कुछेक आईएएस ही हैं, जो नीतीश तंत्र में स्वयं को फ़िट पा रहे हैं। अधिकतर वे हैं, जिन्हें हिस्सा का बंटवारा करने में महारत हासिल है।

व्यक्ति आधारित राजनीति मौजूदा आर्थिक परिप्रेक्ष्य में किस कदर खतरनाक हो सकती है, श्री कुमार उसका एक बेहतर नमूना हैं। इसका उदाहरण यह कि बिहार में अरबों रुपये के साइकिल और पोशाक फ़र्जी तरीके से बंट गये और बिहार के मुख्यमंत्री छाती फ़ुलाकर कहते हैं कि यह भ्रष्टाचार तो हमने पकड़ा है फ़िर इसमें हमारी संलिप्तता कैसी। है न कमाल की बात। 

इसलिये बिहार में लोकतंत्र नहीं, नीतीश तंत्र है। नीतीश तंत्र में नीतीश समर्थक बिंदास हैं। इन बिंदासों में एक डा शर्मा हैं, जो दिल्ली में डेवलपमेंट संस्थान चलाते हैं। वैसे इनका एक संस्करण बिहार में भी मौजूद हैं। अंतर केवल नाम का है। बाकी सब एक समान है। दस्तावेज उपलब्ध हैं जो यह बतलाते हैं कि इन दोनों ने मिलकर बिहार को अबतक कैसे लूटा है। यानी बिहार में लूट तंत्र स्थापित हो चुका है। रामनाम जपने वाले एक रामभक्त ने बिहार में मची लूट को देखकर कहा कि – नीतीश नाम का लूट है, लूट सके सो लूट, उस वक्त पछतायेगा, जब ढोल जायेगा फ़ूट। लेकिन हम ऐसा वैसा कुछ नहीं कहने जा रहे हैं। हम तो आप सभी को केवल गणतंत्र की शुभकामनायें दे रहे हैं। 

 

 

Text Box: Copy right reserved to apna bihar software solutions
Text Box: Your
Ad
Here

अपना बिहार

निष्पक्षता हमारी पहचान

Text Box:

Home Page

Development News

Political News

News from Districts

Business

Entrepreneur

Educational News

Youth

Women's World

Job

Literature

Art & Culture

About us

Contact us

Text Box:
विशेष रिपोर्ट – नीतीश को उन्नीस साबित करने की संघ की तैयारी जोरों पर * साहित्यकार बना जी कृष्णैया का हत्यारा * संपादकीय - हाशिये पर ओबीसी राजनीति * कोसी आज बाढ पीड़ितों के समर्थन में वीरपुर से आंदोलन की शुरुआत करेंगी मेघा पाटेकर * कल पढे - विशेष संपादकीय - यह कैसा गनतंत्र है * मुजफ़्फ़रपुर में भव्य तरीके से कर्पूरी जयंती मनायेगा एआईबीएसएफ़ * स्त्री विमर्श - नारी अस्मिता की खोज * शिक्षा विभाग के वेबसाइट से गायब हुए नीतीश और शाही * शिवशंकर मिश्र का वैचारिक लेख - नारी अस्मिता और तुलसी के राम * छले गये फ़ारबिसगंज के पीड़ित * नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय - खुल गया गोपा - “सेन” का भेद * शिक्षा के नामपर एक और महाघोटाला * संपादकीय – सुशासन में बढा सुशासनी अत्याचार * सीपीआई ने लगाया पोषाहार स्कीम में लूट का आरोप * सेवा समायोजन नहीं हुआ तो अनिश्चिकालीन हड़ताल तय * लोकतंत्र विरोधी रूडी की रूढ मानसिकता- जितेंद्र यादव * राजनीतिक बहस - अपने ही घर में बिहार की बेटी का हुआ अपमान * भोजपुरी फ़िल्मों में काम करना चाहते हैं नासिरुद्दीन शाह * शुरु होते ही लोकप्रिय हुई “माई स्टांप योजना” * रूडी ने निकाला नौकरशाहों और शोषितों पर भड़ास * संपादकीय - भूमिहीनों को जमीन नहीं, रईसों को महल बनाने की आजादी * विशेष रिपोर्ट - सीवान में भी पानी-पानी हुए नीतीश * राजनीतिक बहस - अपने ही घर में बिहार की बेटी का हुआ अपमान * बेटी को देख चहक उठा “भेलपुर” * प्रियंका के ठुमके पर बहका औरंगाबाद * "आरक्षण" के मसले पर नीतीश ने शरद को दिखाई "आंखें" * शरद और लालू की बेटियों की शादी तय * संपादकीय - भूमिहीनों को जमीन नहीं, रईसों को महल बनाने की आजादी * विशेष रिपोर्ट - सुस्त विपक्ष के कारण सरकार मस्त और जनता हो रही पस्त * मानवाधिकार हनन – फ़िर हुई हाजत में हत्या * दलाई लामा के प्रवास के दौरान बोधगया में दिखा सुशासन * गया में सिमी का सदस्य गिरफ़्तार * मोदी ने किया मार्च लूट की संभावनाओं से इन्कार * नीतीश कुमार पर चौतरफ़ा हलमे की तैयारी में जूटे ललन और मिथिलेश * बाल-बाल बचे दलाई लामा * देश को गैर एनडीए-यूपीए विकल्प की आवशयकता * उदय मांझी को मिला पार्टी बदलने का इनाम * कालेजों में स्थापित होगा प्लेसमेंट सेल * शराब विक्रेता से 4 लाख की लूट * नक्सली बताकर हत्या का आरोप, लोजपा ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन * पटनाइट्स को झुमायेंगा यूफ़ोरिया बैंड * इतिहास से साक्षात्कार – कर्नल महबूब थे तिरंगा फ़हराने वाले पहले बिहारी, जीनत की आंखों में सजीव है नेताजी के भारत का सपना * अपराधियों का तांडव – बैंक अधिकारी सहित दो का अपहरण * किसान हुए लाचार, नहीं मिल रहे धान के खरीदार * जनता को जगाने बिहार आयेंगी मेघा पाटेकर * विकास का बखान करने लियोन जायेंगे सुशील मोदी * दानापुर में युवक की हत्या * जदयू नेता ने कहा – एनआईटी में शिक्षकों की हुई अनियमित नियुक्ति * एक और छात्र ने की आत्महत्या * आटो चालक की पीट-पीटकर हत्या * पी के शाही ने राष्ट्रीय सहारा को लताड़ा, तमाशबीन बने रहे खबरनवीस * लालबत्ती लगाकर घूमने वाला पत्रकार * 9 माह में 25 फ़ीसदी तो 4 माह में 75 फ़ीसदी कैसे खर्च करेगी सरकार - सिद्दीकी * फ़िर से कापियां जांचे बीपीएससी, हाईकोर्ट ने दिया आदेश * जमुई में दो लोगों की हत्या * महाराजगंज में लाश के बदले मिलती है मोटी रकम * दानापुर में युवक को जिंदा जलाया, मौत के बाद भड़के लोग * जदयू के मुखियाओं को सम्मानित किये जाने पर बिफ़रे चंद्रमोहन राय * राजद विधायक की गिरफ़्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाया रोक * सुशासन के नाम पर मजाक - न खाता न बही, जो माननीय कहें, वही सही * छात्रा ने आशिक को सिखायी आशिकगिरी * डीएमसीएच के आईसीयू में 4 बच्चों की मौत * 1560 अरब रुपये से होगा कृषि का विकास * छात्र की फ़िरौती के लिये 10 लाख रुपये की मांग * फ़र्जी मुठभेड़ों की हो न्यायिक जांच * रुपम की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज * नंद किशोर ओझा को मिली जान से मारने की धमकी * एमबीए पढाकर युवाओं को नौकर न बनायें – ताराकांत झा
Text Box: आईये हम सब मिलकर अपने बिहार को विकसित बिहार बनायें।

बिहार का एकमात्र दैनिक हिंदी न्यूज पोर्टल

खबरें बिहार के सतत विकास की

Text Box: Special 
Reports

बिहार में अपराध

अपना बिहार और राज्य में प्रकाशित विभिन्न अखबारों में प्रकाशित खबरों के अनुसार कल दिनांक 27  जनवरी 2012 को घटित घटनाओं की संख्या

 

 

 

शनिवार , 28 जनवरी 2012

Text Box: Your
Ad
Here

यह कोई नई बात नहीं है कि प्रेम के अनेक स्वरुप हो सकते हैं। लेकिन बात जब दो जवां दिलों के बीच के प्रेम की हो तो आंखों के सामने तरह-तरह की तस्वीरें अनायास ही घूमने लगती हैं। मसलन दो युवा जोड़ी एक-दूसरे के कमर में हाथ डाले या फ़िर हाथों में हाथ डाल कभी किसी समुद्र के किनारे तो कभी किसी पार्क में या फ़िर Read More>>>

टेक्नोफ़ेंड युवाओं के नाम एक बिहारी का संदेश

फेसबुक पर कुछ मित्र बिहार के बारे में केवल और केवल पोजिटिव ही सुनना चाहते हैं. मुझे भी बिहार में हो रहे सकारात्मक बदलाव महसूस हो रहे हैं पर इसका मतलब यह तो नहीं कि निगेटिव बातों को ढँक दिया जाए या पूरी शक्ति से उसे दबा दिया जाए. बिहार के कितने किसान, मजदूर, गाँवों में रहनेवाले अथवा शहर में ही रह रहे अपेक्षाकृत निम्न आय वर्ग के लोग फेसबुक अथवा सोशल मीडिया के संपर्क में हैं ? Read More>>>

स्त्री विमर्श - नारी अस्मिता की खोज

(कमलेश मेहरौल)

भारत में सदियों से महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण भेदभावपूर्ण रहा है। उसे सदा से ही दोयम दर्जे का नागरिक समझने की परिपाटी रही है। परंतु, महिलाओं की सहभागिता भी समाज में पुरुषों के बराबर ही रही है। पितृ सत्तात्मक समाज ने महिलाओं को सदैव हाशिये पर रखा है, जिसके पीछे वह महिलाओं की जैविक संरचना को कारण बताता रहा है। जबकि महिलाओं ने हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर पुरुषों का साथ दिया, लेकिन कभी भी उसे उसके कार्य के लिये मान्यता प्रदान नहीं की गई। Read More>>>

निराधार करती आधार और जनसँख्या रजिस्टर परियोजना का सच 
(गोपाल कृष्ण)

दिसम्बर १३ को वित्त की संसदीय समिति की जो रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश की गयी उसने ये जगजाहिर कर दिया की भारत सरकार की शारीरिक हस्ताक्षर या जैवमापन (बायोमेट्रिक्स) आधारित विशिष्ट पहचान अंक (यू.आई.डी./आधार परियोजना) असंसदीय, गैरकानूनी, दिशाहीन और अस्पष्ट है और राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के लिए खतरनाक है। बायोमेट्रिक पहचान तकनीक और ख़ुफ़िया तकनीक के बीच के रिश्तो की पड़ताल अभी बाकी है.  Read More>>>

शिक्षा के नामपर एक और महाघोटाला

पटना(अपना बिहार, 15 जनवरी 2012) – बिहार में सब ठीक ठाक है। बांका और सासाराम जिले में सरकारी तफ़्तीश के दौरान यह सच सामने आया है कि करीब डेढ लाख छात्र-छात्राओं ने फ़र्जी नामांकन के आधार पर सरकारी साइकिल और पोशाक की राशि हड़प ली। मानव विकास संसाधन विभाग के सूत्रों की मानें तो पूरे बिहार में यह संख्या करीब 12 लाख है। सरकार की ओर से इसकी जिम्मेवारी लेते हुए राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिये हैं। इसके अलावे राज्य के मानव संसाधन विकास विभाग के मंत्री पी के शाही ने अब एक नया आदेश जारी किया है कि जबतक छात्र-छात्राओं की उपस्थिति 6 महीने तक नहीं रहेगी, तबतक उन्हें न तो साइकिल मिलेगी और न ही पोशाक दी जायेगी। वही विभाग के बड़बोले प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने सारा दोष बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों पर मढते हुए उनके खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।

बहरहाल, सबसे बड़ा सवाल यह कि 12 लाख फ़र्जी छात्रों का नामांकन किसने और कैसे कर दिया। निश्चित तौर पर इसके लिये केवल छात्रों के अभिभावकों को जिम्मेवार ठहराया जाना पूर्णरुपेण अनुचित है। इसके अलावे एक संभावना यह भी बनती दिख रही है कि सरकार अब स्कूली बच्चों को पोशाक और साइकिल देने से पीछे हट रही है। इसलिये सरकारी तंत्र इस पूरे मामले को बढा-चढाकर बता रहा है। वैसे इस मामले की स्वीकृति ने सरकार के दावों की पोल तो खोल ही दी है।

विशेष रिपोर्ट - ब्रह्मोश्वर मेहरबान तो लोगों को मिला सरकारी हथियार का लाइसेंस

रोहतास(अपना बिहार, 24 जनवरी 2012) – माओवादियों से लड़ने में बिहार सरकार की तेज तर्रार पुलिस भी अपने आपको अक्षम पाती है। इसलिये बिहार सरकार ने आम आदमी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय लोगों को हथियार के लाइसेंस देना शुरु कर दिया है। रोहतास जिले के चेनारी में स्थानीय प्रशासन की ओर से बड़ी संख्या में हथियार का लाइसेंस दिया गया है। जिले के आरक्षी अधीक्षक मनु महाराज ने बताया कि यह लाइसेंस आदिवासियों को दिया गया है ताकि वे माओवादियों से अपनी संपत्ति और जान की सुरक्षा कर सकें। वैसे यह भी आश्चर्यजनक है कि जो आदिवासी अपने घर में दोनों शाम चूल्हा नहीं जला सकते हैं, वे भला हथियार कैसे खरीद सकते हैं। एक उल्लेखनीय जानकारी यह भी कि रोहतास जिले में बड़ी संख्या में गोंड़ जाति के लोग रहते हैं जो स्वयं को महाराणा प्रताप के वंशज यानी राजपूत कहते हैं और सरकार उन्हें अनुसूचित जाति के रुप में मान्यता दे रही है। माना जा रहा है कि स्थानीय प्रशासन के रुख में यह परिवर्तन वर्ष 1995 से लेकर 2001 तक बिहार में हुए नरसंहारों के मुख्य आरोपी ब्रह्मोश्वर मुखिया की उपस्थिति के कारण हुआ है। बताते चलें कि नीतीश कृपा के कारण इंसान के नाम पर दरिंदा ब्रह्मोश्वर मुखिया को जेल से रिहाई मिल चुकी है और इसका असर शाहाबाद के इलाकों में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है।

 

 

 

धर्म का आशय समझने की जरुरत

मुकेश शंकर भारती,

शोधार्थी, अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान, जेएनयू, नई दिल्ली

दोस्तों, अपना बिहार के माध्यम से आपतक बिहार से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर पहुंचाते हुए हम दो वर्ष की अवधि को कब पार कर गये, इसका अहसास तक नहीं हुआ। इसे सफ़लता माना जाना चाहिये या नहीं, इसका निर्धारण तो आप सभी पाठकगण ही करें। हमने अपनी ओर से यथाशक्ति कोशिश की है कि हम आपकी अपेक्षाओं पर खरे उतरें। आज से दो वर्ष पहले अपना बिहार अस्तित्व में आया था। शुरुआत वैसी ही थी, जैसी शुरुआत हर नई कोशिश को नसीब होती है। समय बीतता गया और देखते ही देखते दो वर्षों की अवधि बीत गई। पीछे पलट कर देखें तो एक लंबा इतिहास है और आगे एक सुनहरा भविष्य। हम सभी आगे बढें, इसके लिये यह आवश्यक है कि अतीत और भविष्य के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए हम आगे बढें। हम आगे बढें क्योंकि हमें बिहार को आगे बढाना है और यही हमारी प्राथमिकता है। Read More>>>

आज की खबरें

· विशेष रिपोर्ट – नीतीश को उन्नीस साबित करने की संघ की तैयारी जोरों पर

· राजघराने अब नहीं पैदा करते राजा : नीतीश

· नाव डूबने से तीन लोगों की मौत

· बिहार में अब स्वास्थ्य यात्रा की बारी

· साहित्यकार बना जी कृष्णैया का हत्यारा

· कोचिंग संचालक का अपहरण

· खाना संबंधित विवाद में तेजाब फ़ेंका

· मौर्य होटल में कम्प्यूटर इंजीनियर ने की खुदकुशी

· शिक्षा के नामपर एक और महाघोटाला

· संपादकीय – सुशासन में बढा सुशासनी अत्याचार

· सीपीआई ने लगाया पोषाहार स्कीम में लूट का आरोप

· सेवा समायोजन नहीं हुआ तो अनिश्चिकालीन हड़ताल तय

· लोकतंत्र विरोधी रूडी की रूढ मानसिकता- जितेंद्र यादव

· राजनीतिक बहस - अपने ही घर में बिहार की बेटी का हुआ अपमान

· भोजपुरी फ़िल्मों में काम करना चाहते हैं नासिरुद्दीन शाह

· शुरु होते ही लोकप्रिय हुई “माई स्टांप योजना”

· रूडी ने निकाला नौकरशाहों और शोषितों पर भड़ास

· संपादकीय - भूमिहीनों को जमीन नहीं, रईसों को महल बनाने की आजादी

· राजनीतिक हलचल - “आरक्षण” के मसले पर नीतीश ने शरद को दिखायी आंख 

 विशेष रिपोर्ट

करवट बदलती सूबे की राजनीति

· विशेष रिपोर्ट - प्रवासी बिहारियों के सम्मेलन के नाम पर पैसे की लूट

· कल्याणबिगहा के नाम पर भ्रष्टाचार क्यों?

· प्रेरणादायक व्यक्तित्व - 21वीं सदी की एक महिला यह भी

· गांधी के साथ कृत्रिमता - आजादी के बाद के गांधी की प्रतिमा लगेगी गांधी मैदान में

· अपनी बात - वाल स्ट्रीट पर हंगामा करने वाले अब लालकिला फ़तह की तैयारी में

· बतकही – ग्लोबलाइजेशन के फ़ायदे

· पशुओं के चारे से तंदरुस्त हो रहे इंसान

· कानोंकान - बिहार मार्का भंवरी देवी के भंवर में फ़ंस गया बिहार

 

जननायक की यादें

(डा निहोरा प्रसाद यादव)

कर्पूरी जयंती पर विशेष

अपनी बात - अपना बिहार के दो वर्ष पूरे

विशेष रिपोर्ट – नीतीश को उन्नीस साबित करने की संघ की तैयारी जोरों पर

भले ही देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं और राजनीतिक उठापटक जारी है। लेकिन इससे भी अधिक उठापटक इन दिनों बिहार में चल रहा है। इस उठापटक की खासियत यह है कि यह उठापटक दोनों सत्तासीन दलों के बीच जारी है। मिली जानकारी के अनुसार बिहार के हर जिले में संघ द्वारा “शाखा” को पुनर्जीवित कर दिया गया है। read more>>>

मणिकांत ठाकुर, manikant thakur, byline

लाखों फ़र्ज़ी नामांकन से करोड़ों का घपला

 

मणिकांत ठाकुर

बीबीसी संवाददाता, बिहार

बिहार के स्कूलों में कम-से-कम दस लाख ऐसे नाम दर्ज बताये जा रहे हैं, जिन्हें फ़र्ज़ी या डुप्लीकेट नामांकन माना जा रहा है. ख़ुद राज्य सरकार के आदेश पर इनमें से तीन लाख नाम स्कूल-रजिस्टर से हटाये जा चुके हैं. और यह सिलसिला अभी जारी है.

स्कूलों में फ़र्ज़ी दाख़िला के ज़रिये किया गया अरबों रूपए का यह घपला इन दिनों यहाँ काफ़ी चर्चा में है.

इस कारण राज्य सरकार के कई बहुप्रचारित दावों की बड़ी फजीहत हुई है.

बिहार शिक्षा परियोजना के निदेशक और राज्य के शिक्षा सचिव राजेश भूषण से मैंने पूछा कि इतनी बड़ी तादाद में फ़र्ज़ी दाख़िला आख़िर हुआ कैसे ?

उनका जवाब था - '' मुझे नहीं लगता है कि ये तादाद ज़्यादा है. राज्य में छह से चौदह वर्ष के दो करोड़ तेरह लाख बच्चों में से अबतक मात्र तीन लाख बच्चों का ही डुप्लीकेट नामांकन पाया गया है.लेकिन मैं ये मानता हूँ कि हमारे स्कूलों का प्रबंधन उतना प्रभावी नहीं है, जितना होना चाहिए. फिर भी गड़बड़ी दुरुस्त करने में सरकार जुट गयी है.'' Read More>>>

साहित्यकार बना जी कृष्णैया का हत्यारा

बिहार में महिला सशक्तिकरण - प्रचार बनाम जमीनी सच्चाई

63वें गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में बिहार में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बना नवगछिया का धरहरा गांव, जहां हर बेटी के जन्म लेने पर दस पेड़ लगाये जाते हैं(ऐसा दावा बिहार सरकार द्वारा किया गया है)। दूसरी नालंदा में बेबस महिला को पिटती सुशासनी पुलिस

63वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर गांधी मैदान में सेना की सलामी लेते राज्यपाल देवानंद कुंवर

जन संवाद यात्रा के दौरान बाढ पीड़ितों के साथ राज्य सरकार की वादाखिलाफ़ी के खिलाफ़ धरना देतीं मेघा पाटेकर

(1)

कड़ी धूप में बादल के एक टुकड़े के नीचे
मैं उससे पहली बार मिला था
सड़क पर धूप चमक रही थी

धूप में उसके पाँव
मानो समन्दर की लहरों पर चल रहे थे
पत्तों से छन कर आती धूप की तरह
हम एक-दूसरे को देख लेते थे
धूप आसमान की बुलंदियों को छू रही थी
धूप समन्दर की सतह पर बिखरी हुई
और हम दोनों बर्फ़ ढके पहाड़ों की तरह थे
जेठ की धूप
उसके सिर पर बादल का टुकड़ा
किसी आने वाली बारिश की शुरूआत थी

(2)

सरो के दरख़्त जैसी रौशनी मेरे सामने है
और पलकों ने झपकना बंद कर दिया है
हवा के तेज़ झोंको ने दरया में लहर पैदा कर दी है
और एक कश्ती अपना लंगर तोड़ मौजों में बह आई है
दिल एक नाचीज़ हिस्से ने सिर उठाया है
और जंगल में एक आग फैलती चली गई है
मैंने अपने आपको तन्हा महसूस किया
और एक साया मेरा हमक़दम हो गया।

(3)

तुमने मेरे पथरीले घर में क़दम रखा
और वहाँ एक मीठे पानी का चश्मा फूट पड़ा
पूरा गाँव उस चश्मे का पानी ले जाता है
उसमें नहाता है, पीता है
और पूरे गाँव से उदासी भाग गई है
मैं इस करिश्मे से ख़ुश हूँ और परेशान भी
अगर मुझे मालूम होता कि इस ख़ुशी की एवज़ में
उदासी तुम्हारे दिल में घर कर जाएगी
तो मैं...

इस हफ़्ते नवल की कविता

हत्यायें

लूट/चोरी

बलात्कार

अपहरण

20

26

0

0